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बिहार में शराब तस्करों पर कार्रवाई, पिकअप वैन जब्त और टाइल्स गोदाम सील; पंजाब से जुड़ा खेप का कनेक्शन

दरभंगा मद्यनिषेध विभाग की टीम ने गुरुवार की सुबह सदर थाना क्षेत्र के रानीपुर बेला वार्ड नौ में छापेमारी कर एक पिकअप वैन और टाइल्स गोदाम से करीब 459 कार्टन विदेशी शराब बरामद की। कार्रवाई के दौरान पिकअप वैन को जब्त कर लिया गया, जबकि गोदाम को सील कर दिया गया है। छापेमारी का नेतृत्व मद्यनिषेध के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार ने किया। देर रात मिली थी सूचना जानकारी के अनुसार, बुधवार की देर रात मद्यनिषेध विभाग को सूचना मिली थी कि रानीपुर बेला वार्ड नौ में किसान ट्रेडर्स के पास एक पिकअप वैन खड़ी है, जिस पर शराब लदी हुई है। सूचना मिलने के बाद मद्यनिषेध की टीम रात में ही मौके पर पहुंची और पिकअप वैन को कब्जे में ले लिया। गोदाम मालिक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। ताला तोड़कर हुई जांच इसके बाद सदर थाना पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया। गुरुवार की सुबह रानीपुर के मुखिया राजकुमार दास और गोदाम मालिक के एक रिश्तेदार की मौजूदगी में गोदाम का ताला तोड़ा गया। जांच के दौरान गोदाम में टाइल्स रखे मिले, जबकि उसके भीतरी हिस्से में शराब की कार्टन छिपाकर रखी गई थी। पंजाब निर्मित है शराब पिकअप वैन और गोदाम से करीब 459 कार्टन विदेशी शराब बरामद हुई। बरामद शराब पंजाब निर्मित है और इसमें आइबी व आरएस ब्रांड शामिल हैं। गोदाम रानीपुर वार्ड आठ निवासी स्व. विद्यानंद चौधरी के पुत्र सरोज चौधरी और संतोष चौधरी का बताया गया है। संचालन को लेकर जांच जारी हायक आयुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि यह जानकारी जुटाई जा रही है कि सरोज और संतोष गोदाम का संचालन खुद करते थे या उन्होंने इसे किसी को किराये पर दे रखा था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद शराब की आपूर्ति कहां की जानी थी। मामले में गोदाम के संचालन और शराब की खेप से जुड़े अन्य बिंदुओं की भी जांच की जा रही है। सीमा पर होती है चेकिंग इतनी सख्ती के बावजूद शराब की आपूर्ति होने के सवाल पर सहायक आयुक्त ने बताया कि सीमावर्ती राज्य और नेपाल की सीमा पर नियमित चेकिंग की जाती है तथा शराब की खेप भी पकड़ी जाती है। हालांकि, सीमा पर हर ट्रक की चेकिंग संभव नहीं है, क्योंकि इससे जाम लगने के साथ विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसी का लाभ शराब तस्करी में संलिप्त असामाजिक तत्व उठाते हैं और शराब बिहार के विभिन्न जिलों तक पहुंच जाती है, जहां उसे पकड़ा जाता है।  

सम्राट चौधरी कैबिनेट के बड़े फैसले, सोनपुर में बनेगी सैटेलाइट टाउनशिप और पटना में भूमिगत सड़क की तैयारी

पटना सम्राट चौधरी की कैब‍िनेट ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप एरिया में जमीन की खरीद-ब‍िक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बैठक में लिए गए निर्णय की बाबत मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्‍तार से जानकारी दी। डीसीआर के अनुसार होगा जमीन का उपयोग उन्‍होंने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण पर लगी रोक को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय सरकार ने ले लिया है। टाउनशिप के विकास योजना के अधिसूचित होने के बाद भवनों का निर्माण एवं भूमि का विकास संबंधित विकास योजना में निर्धारित भूमि उपयोग तथा उसके अंतर्गत लागू डीसीआर के अनुरूप किया जाएगा। इसके अलावा सोनपुर क्षेत्र के अंतर्गत सैटेलाइट टाउनशिप में अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफिल्ड हवाई अड्डा, फिल्म सिटी, शैक्षणिक संस्थानों और विकास कार्य का निर्मण होगा। साथ ही सोनपुर सैटेलाइट टाउनशिप के क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। पटना में बनेगी अंडरग्राउंड रोड कॉरिडोर पटना में बढ़ते ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अंडरग्राउंड रोड कॉरिडोर को विकसित करने पर राज्य सरकार के स्तर से सहमति मिली है। इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी कार्य के लिए 18 करोड़ 21 लाख रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई है। यह भूमिगत सड़क पटना के विभिन्न इलाकों आर ब्लॉक चौराहा से कंकड़बाग, डाकबंगला चौराहा से पटना वीमेंस कॉलेज तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को भूमिगत मार्गों से जोड़ने के लिए अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) कराया जाएगा। इसके अलावा विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ) की लंबाई 90 किमी है। इसके निर्माण के लिए विस्तृत डीपीआर, भूमि अधिग्रहण समेत अन्य अनुमति प्राप्त करने के लिए 2.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी तरह नारायणी पथ (दरिहारा (कोन्हुआ)- डुमरिया घाट, गोपालगंज) की लंबाई 73.51 किमी है। इसका डीपीआर तैयार करने समेत अन्य कार्यों के लिए 2.10 करोड़ रुपये की स्वीकृत दी गई है।

सोनपुर मेले का अनोखा इतिहास: कैसे पशु व्यापार का केंद्र बना किसानों की आवाज और जनजागरण का मंच

 नयागांव (सारण)  गंगा-गंडक के संगम के पास लगने वाला विश्वविख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला केवल धार्मिक आस्था और पशु व्यापार के लिए ही प्रसिद्ध नहीं रहा, बल्कि इसने किसानों के अधिकारों की लड़ाई को भी नई पहचान दी। कभी जंगी हाथियों और घोड़ों की खरीद-बिक्री से चर्चा में रहने वाला यह मेला अंग्रेजी शासन के दौर में किसान आंदोलन और राजनीतिक जागरूकता का मंच बना। यहां जुटने वाली भीड़ ने व्यापार के साथ विचारों के आदान-प्रदान का रास्ता भी खोला। इस साल मेला 22 नवंबर से 23 दिसंबर तक आयोजित होगा। जंगी हाथियों और घोड़ों के कारोबार से बनी पहचान सोनपुर मेले की ऐतिहासिक पहचान इसके विशाल पशु बाजार से जुड़ी रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी और खरीदार हाथियों, घोड़ों, बैलों सहित अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए यहां पहुंचते थे। पुराने समय में युद्ध और सैन्य गतिविधियों में हाथियों व घोड़ों की अहम भूमिका होने के कारण इनके व्यापार का विशेष महत्व था। मेले से जुड़ी जनश्रुतियों में चंद्रगुप्त मौर्य, मुगल बादशाह अकबर और वीर कुंवर सिंह के नाम भी लिए जाते हैं, हालांकि इन दावों के लिए ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि जरूरी है। जब पशु बाजार बना किसानों की आवाज का मंच अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों को ऊंचे लगान और जमींदारी शोषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में सोनपुर मेले की विशाल भीड़ किसान नेताओं के लिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बनी। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसानों को संगठित करने और उनके अधिकारों की आवाज उठाने में अहम भूमिका निभाई। मेले में होने वाले किसान सम्मेलनों ने कृषि से जुड़े सवालों को व्यापक चर्चा का विषय बनाया। 17 नवंबर 1929 को बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना सोनपुर मेले के इतिहास में 17 नवंबर 1929 की तारीख खास महत्व रखती है। इसी दिन यहां बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना हुई थी। स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके प्रथम अध्यक्ष और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह महामंत्री बने। इस पहल ने बिहार में किसान आंदोलन को संगठित स्वरूप देने में योगदान दिया। आगे चलकर किसान आंदोलन का विस्तार हुआ और 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना हुई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी बनी रही अहमियत सोनपुर मेला ब्रिटिश शासन के दौरान सामाजिक और राजनीतिक विचारों के प्रसार का माध्यम भी रहा। ऐतिहासिक विवरणों में 1908 में सोनपुर में हुई एक बैठक का उल्लेख मिलता है, जिसे बिहार में कांग्रेस संगठन के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। मेले में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क का अवसर मिलता था। इस तरह सोनपुर की पहचान पशु व्यापार से आगे बढ़कर जनजागरण से भी जुड़ गई। हरिहरनाथ मंदिर और गज-ग्राह की कथा से धार्मिक पहचान सोनपुर मेले की पहचान भगवान हरिहरनाथ मंदिर और गज-ग्राह की पौराणिक कथा से भी जुड़ी है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा-गंडक के संगम में स्नान और मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ मेले में व्यापार, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है। यही विविधता इसे दूसरे मेलों से अलग पहचान देती है। आज भी इतिहास, आस्था और परंपरा का संगम समय के साथ सोनपुर मेले के पशु बाजार का स्वरूप बदला है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान कायम है। एक ओर यहां धार्मिक परंपराएं जीवित हैं, तो दूसरी ओर यह मेला बिहार के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक इतिहास की याद दिलाता है। जंगी हाथियों के कारोबार से लेकर किसानों के संगठित संघर्ष तक, सोनपुर मेले की कहानी बताती है कि यह आयोजन सिर्फ खरीद-बिक्री का बाजार नहीं, बल्कि जनजीवन और बदलावों का भी साक्षी रहा है।

बिहार के किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता, तुलसी और लेमनग्रास की खेती से बढ़ेगी आय

पटना  सरकार सुंगधित तेल के उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग एवं विपणन तक की समेकित व्यवस्था विकसित करने पर बल दे रही है। इससे किसानों के उत्पाद को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों के विकास एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उक्त बातें कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में बुधवार को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र विस्तार एवं मूल्य संवर्धन पर आयोजित कार्यशाला में किसानों से कही। सुगंधित तेलों के उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी उन्होंने कहा कि कृषि का विविधीकरण समय की आवश्यकता है। बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां तुलसी, लेमनग्रास एवं अन्य सुगंधित पौधों की खेती के अनुकूल हैं। इनकी वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुखी खेती से सुगंधित तेल के उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ आसवन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, मानकीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन से भी जोड़ना होगा। इससे मूल्य संवर्धन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाओं, मानकों और बाजार संपर्क को मजबूत किया जाएगा। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर उपयुक्त फसलों की पहचान, उत्पादन क्लस्टरों के विकास, किसान प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार की रणनीति तैयार होगी। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया कार्यशाला में एसेंशियल आयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं महासचिव, विभागीय वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों के उद्यान पदाधिकारी और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय और इस्लामपुर स्थित औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के कृषि वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।  

दिल्ली से बिहार तक सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी, बक्सर से पटना तक सफर होगा तेज

पटना दिल्ली से पटना की सड़क यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए कई एक्सप्रेसवे और हाईवे को जोड़ने की योजना पर जोर है। यमुना, आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के साथ बिहार के सड़क नेटवर्क का बेहतर संपर्क बनने से यात्रियों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, 11-12 घंटे में सफर पूरा होने का दावा पूरे मार्ग के तैयार होने और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा। दिल्ली से पूर्वांचल तक एक्सप्रेसवे का सहारा प्रस्तावित यात्रा मार्ग में दिल्ली से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे, फिर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ से गाजीपुर तक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सड़कों से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों को पार करना आसान होता है। आगे बिहार तक पहुंचने के लिए गाजीपुर, बक्सर और पटना के बीच सड़क संपर्क अहम रहेगा। गाजीपुर से बक्सर की कनेक्टिविटी अहम गाजीपुर से बक्सर के बीच बेहतर सड़क संपर्क और गंगा पर पुल की सुविधा इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खंड में रास्ता सुगम होने पर उत्तर प्रदेश से बिहार आने-जाने वाले यात्रियों का समय बच सकता है। हालांकि, पूरे मार्ग पर यात्रा समय का आकलन संबंधित सड़क और पुल परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति के आधार पर ही किया जाना चाहिए। बक्सर से पटना तक फोरलेन और एलिवेटेड रोड बक्सर से पटना के बीच फोरलेन सड़क और एलिवेटेड रोड नेटवर्क से सफर आसान बनाने की संभावना है। बेहतर सड़क संपर्क से आरा समेत रास्ते के प्रमुख शहरों तक पहुंचने में सुविधा हो सकती है। बाईपास और चौड़ी सड़कों से शहरों के भीतर लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। गंगा एक्सप्रेसवे से भी मिल सकता है वैकल्पिक रास्ता दिल्ली से पटना जाने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे और आगे के सड़क नेटवर्क को जोड़कर वैकल्पिक मार्ग की संभावना भी बताई जा रही है। इस रास्ते से प्रयागराज की ओर बढ़कर बिहार के बक्सर, आरा और पटना तक पहुंचने का विकल्प मिल सकता है। इस मार्ग की उपयोगिता संबंधित सड़कों की उपलब्धता और कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी। 11-12 घंटे का सफर कब संभव होगा? दिल्ली से पटना तक 11-12 घंटे में पहुंचने का अनुमान तभी व्यावहारिक होगा, जब पूरे मार्ग पर जरूरी सड़क संपर्क चालू हों और जाम, निर्माण कार्य या अन्य बाधाएं कम हों। फिलहाल इसे निश्चित यात्रा समय के बजाय संभावित अनुमान के तौर पर देखना चाहिए। एक्सप्रेसवे और हाईवे का बेहतर नेटवर्क तैयार होने से दिल्ली, लखनऊ, गाजीपुर, बक्सर, आरा और पटना के बीच सड़क यात्रा को लाभ मिल सकता है।

झारखंड में 321 पेयजल योजनाएं ठप, भुगतान नहीं मिलने से 40 से अधिक एजेंसियों ने रोका काम

रांची राज्य में आदिम जनजाति (प्रीमिटिव ट्राइव्स) के घरों तक पेयजल पहुंचाने की योजना रुकी पड़ी है। केंद्र सरकार ने इससे जुड़ी 321 योजनाओं को 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृति दी है। इस योजना पर राज्य में कुल 235 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। अपने हिस्से की 65 करोड़ राशि देने के बाद केंद्र सरकार ने बाकी की 65 करोड़ राशि रोक कर रखी हुई है। इस वजह से 40 से अधिक एजेंसियों को भुगतान नहीं हुआ है। एजेंसियों के काम बंद करने की वजह से योजना पूर्ण होने के बाद भी आदिम जनजाति के घरों तक जल नहीं पहुंच रहा है। प्रिमिटिव ट्राइव्स को घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना केंद्र सरकार द्वारा लाई गई है। जिसमें 30 प्रतिशत के करीब राज्य सरकार का अंशदान होता है। स्कीम आईडी नहीं बनने से हो रही समस्या जलापूर्ति योजना से जुड़े एजेंसी के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी स्कीम आईडी ही नहीं बन पा रही है। ऐसे में पेयजल स्वच्छता विभाग के पोर्टल पर अपने किए काम की जानकारी वो अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से योजना का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए विभाग स्तर पर कई बार कार्रवाई के लिए कहा गया है। राज्य में करीब तीन लाख आदिम जनजाति के लोग रहते हैं। इनके आसपास ही क्लस्टर बनाकर पेयजल के स्रोतों से जल उपलब्ध कराने के लिए यह योजना बनाई गई है। कई योजनाओं में साठ प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है।

बिहार विधान परिषद चुनाव में NDA की एकजुटता का दिखा असर, BJP को फायदा; RJD और जन सुराज ने खोला खाता

पटना बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की कुल आठ सीटों के चुनाव नतीजों और चल रही मतगणना के रुझान का संक्षेप संदेश है कि आपसी झगड़े में महागठबंधन के घटक कांग्रेस और सीपीआई समेत विपक्ष से जन सुराज पार्टी ने अपनी-अपनी सिटिंग एमएलसी सीटें गंवा दी, जबकि एकजुटता और बगावत पर डंडा चलाकर बीजेपी-जेडीयू के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने लाज बजा ली। जिन 8 सीटों पर चुनाव हुए थे, उनमें मौजूदा एमएलसी के हिसाब से 2 सीट बीजेपी, 1-1 सीट जेडीयू, कांग्रेस, सीपीआई और जन सुराज पार्टी, जबकि 3 सीटें निर्दलीय के पास थी। 6 सीट के नतीजे घोषित हो गए हैं, जबकि बाकी 2 पर आगे चल रहे कैंडिडेट की ही जीत मानकर बात करें तो भाजपा एक सीट के फायदे से 3 पर पहुंच गई है। राजद और जन सुराज पार्टी का खाता खुला है। सीपीआई और कांग्रेस साफ हो गई है। निर्दलीय 1 घटकर 2 पर पहुंच रहे हैं। हालांकि निर्दलीय की दलीय निष्ठा देखें तो पिछली बार के 3 निर्दलीय में 1-1 भाजपा और जन सुराज के थे। इस बार भी जो 2 निर्दलीय जीत रहे हैं, उनमें 1 भाजपा का बागी है। तालमेल नहीं होने के कारण महागठबंधन को मुंह की खानी पड़ी। नई सीटों पर जीत हासिल करने की बात कौन कहे, घटक दल जीती सीट भी नहीं बचा पाये। कांग्रेस के दिग्गज नेता मदन मोहन झा कई बार से जीत रहे दरभंगा शिक्षक सीट नहीं बचा सके। सीपीआई के संजय सिंह तिरहुत टीचर से हार गए। राजद के संजीव सिंह ने पटना टीचर सीट बीजेपी के नवल किशोर यादव से छीनकर बड़ा उलटफेर किया, क्योंकि यादव लगातार 5 बार से जीत रहे थे। दरभंगा स्नातक सीट पर भी राजद का कैंडिडेट दमदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन भाजपा कैंडिडेट सर्वेश कुमार के पीछे है। चुनाव की घोषणा के साथ ही महागठबंधन में बिखराव दिखने लगा था। राजद ने सहयोगी दलों से बात किए बिना प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इस पर बिफरी कांग्रेस ने भी राजद प्रत्याशियों के सामने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक सीटों से अपने उम्मीदवार उतार दिए। सीपीआई भी दोस्ताना संघर्ष में कूद गई। आठ में से महज दो सीटें ही ऐसी दिखीं, जहां महागठबंधन के दल आपस में नहीं लड़ रहे थे। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने जब सफाई दी तो भी यही कहा कि पिछली बार की तरह सभी अलग-अलग लड़ रहे हैं। एनडीए की रणनीति कारगर दिखी एनडीए के घटक दलों में शुरू से ही एकता नजर आई और यह परिणामों में भी परिणत हुई। आरंभ में ही तय हो गया कि चुनाव में एनडीए की ओर से जदयू और भाजपा के 4-4 उम्मीदवार लड़ेंगे। हम, लोजपा (आर) और रालोमो ने समर्थन किया और पंचायत, प्रखंड, जिला से राज्य मुख्यालय तक के नेता एकजुट नजर आए। इसने स्नातक और शिक्षक सीटों के मतदान में बड़ा असर डाला। एनडीए दलों के समर्थक वोटरों में कोई बिखराव नहीं हुआ और नतीजा एनडीए की बढ़त के रूप में सामने आया। इस चुनाव को लेकर एनडीए की व्यापक रणनीति भी दिखी। भाजपा और जदयू के दफ्तरों में घटक दलों की कई बैठकें हुईं। हालांकि, जदयू को पटना स्नातक सीट पर अपने ही विधायक अनंत सिंह की बगावत से किरकिरी झेलनी पड़ी। जेडीयू ने संभाल ली अनंत सिंह की बगावत पर अंत-अंत तक जदयू ने इस सीट को संभाल लिया। साथ ही, मतदान के बाद अनंत सिंह को दल से निकाल कर अपने समर्थकों के बीच वह संदेश देने में भी कामयाब रहा। वहीं, सारण शिक्षक सीट से रालोमो के रामपुकार सिन्हा चुनाव में कूदे तो दल के तीन विधायकों ने उनका समर्थन कर दिया। लेकिन, दल और गठबंधन के कहने पर रामपुकार ने अपनी दावेदारी वापस ले ली। यह दीगर है कि तब भी जदयू के आनंद पुष्कर अपने दूसरे प्रयास में भी कामयाब नहीं हो पाए। यह सीट बीजेपी के बागी निर्दलीय राहुल राज ने जीत ली। जन सुराज पार्टी की विधान परिषद में हुई इंट्री बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव के बाद एमएलसी इलेक्शन भी जन सुराज के लिए बेहतर नतीजा लेकर आया। पिछली बार सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय जीतकर आए अफाक अहमद पार्टी का सिम्बल लेकर उतरे। हालांकि वे जीत नहीं पाए। लेकिन, जन सुराज ने सभी सीटों पर जीतने वालों को सीधी टक्कर दी या लड़ाई का तीसरा कोना बने। जन सुराज के सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा में शिक्षक सीट से दिग्गज कांग्रेसी मदन मोहन झा को हराकर जन सुराज की बिहार विधान परिषद में भी एंट्री करा दी। जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। सुरेश राय की जीत के साथ अब बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पार्टी के एक-एक सदस्य हो गए हैं, जिसमें एक प्रशांत किशोर ही हैं।

ट्रेन दुर्घटना में टिकट नहीं मिला तो भी मिलेगा मुआवजा! झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार

 रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में किसी यात्री की मौत होने पर उसके शव से रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने रेलवे को बनमाली गोप के स्वजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि मुआवजे से जुड़े नियमों को उदारता से समझना चाहिए, ताकि दुर्घटना के शिकार परिवारों को न्याय मिल सके। केवल तकनीकी कारणों से किसी परिवार को मुआवजे से वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें टिकट नहीं मिलने के कारण मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया था। मामला बनमाली गोप की मौत से जुड़ा है। उनके स्वजनों ने आठ लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वजनों ने हाई कोर्ट में अपील की। भीड़ में धक्का लगने से ट्रेन से गिरे थे बनमाली स्वजनों के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बनमाली गोप पलामू के झींकपानी रेलवे स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी जाना था। ट्रेन में काफी भीड़ थी और वह खड़े होकर यात्रा कर रहे थे।  

‘बॉस-मैम’ बोलने और नजरें झुकाने का फरमान! NMCH में रैगिंग पर बड़ी कार्रवाई, सीनियर बैच निलंबित

 पटना सिटी  नालंदा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस वर्ष 2026 में नामांकित छात्र-छात्राओं के साथ वर्ष 2025 के विद्यार्थियों द्वारा तथाकथित रैगिंग किए जाने के आरोप में पूरे बैच को तीन महीनों के लिए कक्षा से निलंबित करने का मामला तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कॉलेज के छात्रावास में रहने वाली वर्ष 2023-24 की छात्राओं पर भी कार्रवाई की गई है। आरोप के घेरे में आए सभी विद्यार्थियों को 24 घंटे में छात्रावास खाली करने का भी आदेश दिया गया है। इस फैसले के खिलाफ बुधवार को कॉलेज में गहमा-गहमी बढ़ी रही। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी), ऑल इंडिया एंटी रैगिंग कमेटी और बिहार ग्रीवांस सेल तक पहुंचे रूलबुक-2026 के पीडीएफ में सीनियर छात्र-छात्राओं को बास-मैम कह कर संबोधित करने, उनके सामने विशेष मुद्रा में खड़े रहने, उनकी आंखों में सीधे नहीं देखने, सीनियर और शिक्षकों से बहस न करने जैसे निर्देश शामिल हैं। राष्ट्रीय आयोग ने इन अहम सवालों पर स्पष्टीकरण मांगा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने रूलबुक-2026 के पीडीएफ की जांच कराने, पीडीएफ कॉलेज परिसर, छात्रावास, विद्यार्थियों के समूह या अन्य माध्यमों से प्रसारित हुई, यदि हां तो डीडीएफ के निर्माण एवं प्रसार के स्रोत की जांच की जाए। कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गयी, एंटी रैगिंग स्क्वाड, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा विद्यार्थियों को रैगिंग के विरुद्ध जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाए गए, अब तक कॉलेज को रैगिंग की कितनी शिकायतें प्राप्त हुई, उन पर क्या कार्रवाई की गई, शिकायत करने वाले विद्यार्थी की पहचान गोपनीय रखी जाए, किसी भी प्रकार के प्रतिरोध या उत्पीड़न से उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। प्राचार्य और तीन विभाग के शिक्षकों का फोटो। वर्ष 2025 बैच के सभी विद्यार्थियों के नाम। छात्र और छात्रा के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड। एप्रन संबंधित गाइडलाइन। पंद्रह गोल्डन रूल्स। प्रणाम बॉस-मैन कहते हुए अपना परिचय देने का हिंदी में फॉर्मेट। डॉक्टर सैम की तरह अच्छा व्यवहार करने का उल्लेख है। अंत में ऑल द बेस्ट 2025 बैच लिखा है। आज छात्राओं और कल छात्रों का पक्ष सुनेगा कॉलेज प्रशासन नालंदा मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने बुधवार को बताया कि सामने आई रैगिंग से जुड़ी शिकायतों के आलोक में गुरुवार को वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 की छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। शुक्रवार को आरोपित बैच 2025 के सभी छात्रों को बुलाया गया है। सभी का पक्ष सुनने के बाद प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच करते हुए सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी बेकसूर विद्यार्थी को किसी तरह का नुकसान न हो।

बिहार विधान परिषद में उलटफेर: RJD जीती, फिर भी घट गई ताकत; ‘49’ के नंबर की चर्चा तेज

पटना Bihar MLC Election Result: एक सीट पर राजद की जीत के बावजूद विधान परिषद में महागठबंधन की हैसियत अपेक्षाकृत कम होगी। परिषद में उसके अभी 19 सदस्य हैं। मध्य नवंबर के बाद उनकी संख्या 18 रह जाएगी, क्योंकि 16 नवंबर को उन आठ सीटों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, जिन पर चुनाव हुआ है। इस चुनाव ने ऊपरी सदन में एनडीए को एक सीट की बढ़त दिलाई है। शिक्षक और स्नातक कोटे की इन सीटों के प्रतिनिधियों में से चार चुनाव हार चुके हैं। 19 से घटकर 18 हुई ऊपरी सदन में महागठबंधन की सदस्य संख्या पराजित होने वालों में भाजपा के नवल किशोर यादव, निर्दलीय आफाक आलम के साथ कांग्रेस के डाॅ. मदन मोहन झा और भाकपा के प्रो. संजय कुमार सिंह हैं। दल अभी आगे भाजपा 25 26 जदयू 20 20 हम 01 01 रालोमो 01 01 लोजपा–रा 01 01 रालोजपा 01 01 राजद 15 16 कांग्रेस 02 01 माले 01 01 भाकपा 01 00 जसुपा 00 01 निर्दलीय 07 06 कुल 75 75 कांग्रेस और भाकपा महागठबंधन के घटक हैं। इन चारों की सीटों से नए चेहरे विधान परिषद पहुंचेंगे। उनमें पटना शिक्षक सीट पर राजद का परचम लहराने वाले डाॅ. संजीव कुमार भी हैं। उन्हें लेकर ऊपरी सदन में राजद की सदस्य संख्या 16 हो जाएगी। कांग्रेस दो से एक हो जाएगी और भाकपा शून्य। वहीं एनडीए 49 पर पहुंच गया है।  भाकपा (माले) की शशि यादव को लेकर महागठबंधन के सदस्यों की कुल संख्या 18 होगी। इस तरह राजद तो बढ़त में रहेगा, लेकिन समग्रता में महागठबंधन पहले से कम होगा। एनडीए का पलड़ा हुआ भारी इस चुनाव ने 75 सदस्यीय विधान परिषद में भाजपा की हैसियत बढ़ा दी है। जदयू यथावत है। दोनों चार–चार सीटों पर लड़े थे। उनमें भाजपा की दो सिटिंग सीटें थीं और एक जदयू की। जदयू ने पटना (स्नातक) की अपनी सीट बचा ली है और तीन पर मात खाई है। भाजपा ने पटना (शिक्षक) सीट गंवाई है, लेकिन दो नई (शिक्षक कोटे की तिरहुत और स्नातक कोटे की दरभंगा) के साथ कुल तीन सीटें जीती हैं। तीसरी उसकी सिटिंग सीट कोसी (स्नातक) है। पिछली बार भी दो निर्दलीय विजयी हुए थे और इस बार भी। उनमें से एक भाजपा से बगावत कर विजयी हुए राहुल राज हैं। स्वाभाविक है कि उनका आकर्षण भाजपा के प्रति हो। दूसरे वंशीधर ब्रजवासी के बारे में बताते हैं कि उनका जन सुराज पार्टी से मोहभंग हो गया है। इस तरह ऊपरी सदन में एनडीए का पलड़ा अपेक्षाकृत भारी हुआ है। तेजस्‍वी–तेज प्रताप के बाद फ‍िर सदन में दो सगे भाई विधान परिषद में कांग्रेस के एकमात्र सदस्य राजीव कुमार रह जाएंगे। राजद के डाॅ. संजीव कुमार उनके सगे भाई हैं, जो पूर्व मंत्री आरएन सिंह के पुत्र हैं। इससे पहले विधानसभा में ऐसा संयोग 2015 और 2020 के चुनाव से बना था। तब लालू प्रसाद के दोनों पुत्र (तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव) विधायक चुने गए थे। 2025 में तेजप्रताप पराजित हो गए।