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भाकपा-माले का चुनावी ऐलान: 20 सीटों पर उतारे उम्मीदवार, देखें पूरी लिस्ट

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन के घटक भाकपा-माले ने अपने उम्मीदवारों की पहली और दूसरी सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार कुल 20 सीटों पर उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला लिया है, जिसमें अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग दोनों को समुचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसके साथ ही पार्टी ने दोनों फेज़ों के उम्मीदवारों की घोषणा एक साथ कर दी है। CPI-ML ने फेज-1 के लिए कुल 14 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। इन सीटों में भोर, जिरदेई, दरौली, दारौंडा, कल्याणपुर, वारिसनगर, राजगीर, दीघा और फुलवारी जैसी महत्वपूर्ण विधानसभा सीटें शामिल हैं। फेज-2 के लिए पार्टी ने 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है।  

मौसम ने किया उल्टा, झारखंड में दिवाली पर होगी बारिश और ठंड

रांची भीषण सर्दी का मौसम आने वाला है। इस मौसम में लोगों का हाल बेहाल हो जाता है। वहीं, झारखंड में ठंड का सिलसिला अभी से ही शुरू हो गया है तो जनवरी तक लोगों का हाल बेहाल ही होने वाला है। राज्य में दिन ढलते ही तापमान में गिरावट आ रही है और रात के समय ठंडक बढ़ती जा रही है। लोग बिना कंबल के रात को नहीं सो पा रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक अक्टूबर के अंत तक पूरा राज्य ठंड की चपेट में आ जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक 18 अक्टूबर को पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, कोडरमा और धनबाद जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, हालांकि मौसम शुष्क बना रहेगा। झारखंड में सुबह धूप निकल रही है, लेकिन दोपहर तक आसमान में बादल छा जा रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, दिवाली के दिन पलामू क्षेत्र में बारिश की संभावना है। इससे दिवाली की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं। अगले कुछ दिनों में और भी ठंड बढ़ सकती है। खासकर, रात के समय में, तापमान में गिरावट के चलते सर्दी का अनुभव अधिक होगा।

2500 रुपए का दिवाली गिफ्ट: हेमंत सरकार महिलाओं को दे रही सीधा लाभ

रांची दीपावली में कुछ ही दिन बचे हुए हैं। दीपावली से पहले झारखंड की महिलाओं के चेहरे चमकने वाले हैं। जी हां, हेमंत सरकार दीपावली से पहले महिलाओं के खाते में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि भेजने वाली है। लगभग 51 लाख लाभुकों के खाते में राशि भेज दी जाएगी हेमंत सरकार ने लाभुकों के खाते में आज यानी शुक्रवार तक मंईया सम्मान योजना की राशि यानी 2500 रुपए भेजने का निर्देश दिया है। 20 अक्टूबर को दीपावली है। 19 अक्टूबर तक राज्य की लगभग 51 लाख लाभुकों के खाते में मंईया सम्मान की राशि भेज दी जाएगी। यह राज्य की महिलाओं के लिए दिवाली की सबसे बड़ा गिफ्ट होगा जिससे महिलाओं के चेहरों पर खुशी की लहर एक बार फिर से दौड़ जाएगी। अगले 24 घंटे में राज्य के 12 जिलों की महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच जाएगा पैसा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंईया सम्मान योजना की 15वीं क़िस्त की राशि का पैसा सबसे पहले अगले 24 घंटे में राज्य के 12 जिलों की महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच जाएगा, जिसको लेकर सरकार ने जिलों के नाम की घोषणा भी कर दी है। इन जिलों में सबसे पहले रांची, जमशेदपुर, लोहरदगा, धनबाद, देवघर, बोकारो, गुमला, जामताड़ा, सिमडेगा, चतरा, पाकुड़ और गढ़वा जिला का नाम आ रहा है। इन जिलों में वे महिलाएं शामिल हैं जिनके आवेदन और दस्तावेज पहले ही वेरिफाई कर लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा इस बार दीपावली से पहले योजना की 15वीं किस्त पहले उन लाभार्थियों को दी जाएगी जिनके खातों में डीबीटी (DBT) सक्रिय है। बाकी जिलों की महिलाओं को दूसरे चरण में पैसा मिलेगा, लेकिन यह राशि दिवाली से पहले ही लाभुकों के खाते में दी जानी है जिसके लिए पूरी तैयारी हो चुकी है। इस बार सरकार ने तय किया है कि दिवाली से पहले सभी महिलाओं को समय पर उसकी किस्त की राशि मिल जानी चाहिए ताकि कोई भी लाभार्थी इस योजना के लाभ से वंचित न रह सके। सरकार ने यह ऐलान करते हुए कहा है कि वैसी महिलाएं जिन्हे पिछली किस्त की राशि नहीं मिल पाई थी उनके लिए इस बार दोहरी खुशी मिलने वाली है। जी हां, उन्हें अब सरकार एक साथ दोनों क़िस्त की राशि के रूप में कुल ₹5000 की राशि का भुगतान करने वाली है।  

संसद में जोरदार विवाद: निशिकांत दुबे ने राजीव गांधी को बताया स्वीडिश सैन्य कंपनी का एजेंट

नई दिल्ली भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज साझा किया और दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी स्वीडिश सैन्य कंपनी के एजेंट थे। निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि 1970 में हथियारों की खरीद में राजीव गांधी भी दलाली में शामिल थे। निशिकांत दुबे का राजीव गांधी पर यह आरोप ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने निशिकांत दुबे पर हमला बोला है। सुप्रिया श्रीनेत ने निशिकांत दुबे की पत्नी की संपत्ति में आए जबरदस्त उछाल पर सवाल खड़े किए। गुरुवार को कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और उनकी उनके चुनावी हलफनामे के खिलाफ लोकपाल से हुई शिकायत का हवाला दिया। कांग्रेस के निशाने पर आए निशिकांत दुबे शिकायत में दावा किया गया है कि निशिकांत दुबे की पत्नी की संपत्ति साल 2009 में 50 लाख रुपये थी, जो साल 2024 में बढ़कर 32 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि भाजपा सांसद की संपत्ति में कोई खास परिवर्तन नहीं आया है। कांग्रेस नेता के अनुसार, लोकपाल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि भाजपा सांसद की आय नहीं बढ़ी है, लेकिन उनकी कुल संपत्ति में इजाफा हुआ है। ऐसे में ये पैसा कहां से आया? चुनावी हलफनामे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल निशिकांत दुबे के साल 2024 में दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी पत्नी के पास कुल 28.94 करोड़ रुपये की चल संपत्ति है। वहीं उनके पास 6.48 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति भी है। सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद के हलफनामे में बताया गया है कि उन पर 1.2 करोड़ रुपये का कर्ज है, लेकिन कथित कर्जदाता अभिषेक झा का दावा है कि उसने दुबे की पत्नी को कोई कर्ज नहीं दिया। कांग्रेस ने इसे लेकर भाजपा सांसद से स्पष्टीकरण मांगा है। 

झारखंड CM हेमंत का विपक्ष को करारा संदेश: घाटशिला में दी सीधी चुनौती

घाटशिला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन के नामांकन में शामिल हुए। नामांकन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घाटशिला के सर्कस मैदान में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित किया। इस दौरान हेमंत सोरेन ने दिवंगत रामदास सोरेन को याद भी किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घाटशिला विधानसभा क्षेत्र की जनता से आह्वान किया है कि इस बार वे ऐसा वोट करें कि विरोधी दल का जमानत जब्त हो जाए। उनका खाता भी खुलने नहीं पाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि घाटशिला में विभिन्न राज्यों से आए एक दर्जन मुख्यमंत्री डेरा डाले हुए हैं, लेकिन वे दो दर्जन भी मुख्यमंत्री लाएं, झारखंड का यह मुख्यमंत्री उन पर भारी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग आग का गोला छोड़ने वाले हैं, लेकिन वह गोले का छक्का छुड़ाने के लिए तैयार हैं। ऐसा छक्का छुड़ाएंगे कि जहां से गोला आएगा, वहां से भी दूर चला जाएगा। इस बार ध्यान देना है, वोट नहीं बंटने देना है मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या संयोग था कि गुरुजी के निधन के कुछ ही दिनों बाद रामदास दा भी उनके साथ चले गए। दोनों का निधन दिल्ली में हुआ। कहीं न कहीं कोई ताकत थी जिसने ऐसी परिस्थिति पैदा की। हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछली बार घाटशिला की जनता ने झामुमो प्रत्याशी रामदास सोरेन को रिकार्ड मतों से विजयी दिलाई थी। 22 हजार मतों से उन्हें जिताया था। इस बार ध्यान देना है, वोट नहीं बंटने देना है।

राजपूत-यादव को सबसे ज्यादा टिकट, चिराग की पार्टी में महिलाओं की भागीदारी कैसी रही?

पटना चिराग पासवान की पार्टी को एनडीए ने 29 सीट दिए हैं, जिसे चिराग पासवान ने 6 महिला, 13 युवा और 10 अनुभवी लोगों को टिकट दिया है। उन 29 सीटों में 5 राजपूत, 5 यादव,4 पासवान,4 भूमिहार,और एक-एक ब्राह्मण, तेली(वैश्य), पासी, सूढ़ी (वैश्य), रौनियार,कानू, रजवार, धोबी, कुशवाहा, रविदास और मुस्लिम को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने बिहार के लगभग हर समाज को प्रतिनिधित्व दिया जिसमें सवर्ण, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को मौका दिया। एनडीए ने अब 243 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक कर दी है। सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने और फिर जनता दल यूनाइटेड ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। फिर हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की। अब चिराग पासवान ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है। चिराग पासवान ने पहली सूची में 14 प्रत्याशियों के नाम जारी किए थे और फिर दूसरी सूची में 15 उम्मीदवारों के नाम हैं। 

शिक्षा में तेज, विवादों में भी तेज प्रताप! 2.88 करोड़ की संपत्ति, 8 मुकदमे

 पटना  बिहार की सियासत में हमेशा चर्चा में रहने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आरजेडी से निष्कासन के बाद अब उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी जनशक्ति जनता दल के टिकट पर महुआ विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल किया है। इस दौरान दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में तेज प्रताप ने अपनी शिक्षा, संपत्ति और आपराधिक मामलों से जुड़ी अहम जानकारियां साझा की हैं। कितनी है सपत्ति हलफनामे के मुताबिक, तेज प्रताप यादव 12वीं पास हैं, जबकि उनके छोटे भाई और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सिर्फ 9वीं तक पढ़े हैं। तेज प्रताप के पास कुल 2.88 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिसमें 91.65 लाख रुपये की चल संपत्ति और 1.96 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। दिलचस्प यह है कि 2020 में उनकी कुल संपत्ति 2.82 करोड़ थी, यानी बीते पांच सालों में चल संपत्ति घटी लेकिन अचल संपत्ति में बढ़ोतरी हुई है। 8 केस भी दर्ज तेज प्रताप यादव पर इस वक्त 8 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें धारा 324, 302, 120B, 341, दहेज उत्पीड़न, एससी-एसटी एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर प्रावधानों के केस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से किसी में भी अब तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। हलफनामे में उन्होंने अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय का विवरण नहीं दिया है, क्योंकि तलाक का मामला अभी पटना की पारिवारिक अदालत में विचाराधीन है। नई पार्टी से चुनाव लड़ेंगे तेज प्रताप मई 2025 में आरजेडी से 6 साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी बनाई और अब उसी के बैनर तले चुनाव मैदान में हैं। नामांकन के दौरान उन्होंने अपनी दिवंगत दादी की तस्वीर साथ रखकर भावनात्मक अपील की। तेज प्रताप की राजनीति हमेशा विवादों से घिरी रही है, कभी बयानबाजी, कभी निजी रिश्ते, तो कभी पार्टी नेतृत्व से टकराव। बावजूद इसके वे बिहार की सियासत में एक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा बने हुए हैं। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में दो चरणों में मतदान होगा, पहला 6 नवंबर को और दूसरा 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर को होगी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप की नई पार्टी और उनकी नई पारी महुआ सीट पर क्या रंग दिखाती है।

CM फेस पर जारी सस्पेंस के बीच अमित शाह-नीतीश मुलाकात, सीट बंटवारे की गुत्थी सुलझी?

पटना  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर हैं. शुक्रवार को उन्होंने पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की. इसके बाद वह पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे. यह मुलाकात तब हो रही है जब एनडीए में सीटों का बंटवारा पहले ही हो चुका है. बीजेपी और जेडीयू 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. NDA के सीएम फेस पर क्या बोले अमित शाह? एक दिन पहले 'पंचायत आजतक' के मंच पर अमित शाह से पूछा गया कि अगर एनडीए सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा. जवाब में उन्होंने कहा, 'एनडीए कई पार्टियों का गठबंधन है. सभी दल चुनाव के बाद बैठेंगे, विधायक दल बैठेगा और अपना नेता चुन लेगा. फिलहाल हम नीतीश कुमार के ही नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं.' उनसे पूछा गया कि अगर बीजेपी के विधायक ज्यादा हुए तो भी क्या नीतीश कुमार ही सीएम रहेंगे. इस पर गृह मंत्री ने जवाब दिया, 'अभी भी हमारे ही विधायक ज्यादा हैं, फिर भी सीएम नीतीश कुमार ही हैं.' इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया. सेहत को लेकर उठ रहे सवालों का दिया जवाब विपक्ष लगातार नीतीश कुमार की सेहत को लेकर सवाल उठा रहा है. गृह मंत्री ने इस पर कहा, 'मुझे लगता है कि इस विषय पर निर्णय उनकी पार्टी को ही लेना चाहिए. मैंने कई बार उनसे लंबी-लंबी चर्चा की है. मुझे कोई आपत्ति नहीं दिखी. अगर आयु के चलते कुछ चीजें होंगी भी तो सरकार सिर्फ सीएम नहीं बल्कि पूरी टीम चलाती है.'

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा: नॉमिनेशन के बाद ही बिहार की वोटर लिस्ट जारी होगी

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही मतदाता सूची (Voter List) विवाद पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) मामले में चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि दोनों चरणों के नामांकन पूरा होने के बाद ही बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. अदालत ने आयोग के इस रुख को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 4 नवंबर तय की है. मतदाता सूची को वेबसाइट पर डालना चाहिए- प्रशांत भूषण सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि आयोग को उस मतदाता सूची को वेबसाइट पर डालना चाहिए. जिसके आधार पर मतदान कराया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने SIR की अंतिम सूची के बाद भी संशोधन की अनुमति दी है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं. नामांकन के बाद प्रकाशित होगी वोटर लिस्ट इस पर चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि आयोग पहले से ही तय प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है. उन्होंने बताया, “पहले चरण का नामांकन 17 अक्टूबर और दूसरे चरण का नामांकन 20 अक्टूबर को पूरा हो जाएगा. इसके तुरंत बाद अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित कर दी जाएगी.” याचिकाकर्ता कर सकते हैं वोटर लिस्ट की समीक्षा जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक और जिम्मेदार संस्था है, जो अपने कर्तव्यों को भलीभांति समझती है. अदालत ने आयोग को निर्देश दिया कि मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद याचिकाकर्ता उसकी समीक्षा कर सकते हैं, और यदि कोई गड़बड़ी दिखे, तो उसे अदालत में उठाया जा सकता है. राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं पर उठाए सवाल राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि “पूरा अवसर मिलने के बावजूद कोई भी व्यक्ति, जिसका नाम सूची से हटाया गया, अपील के लिए आगे नहीं आया. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को लोगों की मदद करनी चाहिए थी, लेकिन वे अदालत में सिर्फ आंकड़े दिखाकर भ्रम फैलाने में जुटे हैं.” गोपाल शंकरनारायण ने खड़ा किया सवाल दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने SIR प्रक्रिया की वैधानिकता पर ही सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि पहले इस बात पर फैसला होना चाहिए कि SIR कानूनी रूप से वैध है या नहीं. 4 नवंबर को अगली सुनवाई कोर्ट ने कहा कि वह 4 नवंबर को SIR की वैधानिकता पर आयोग की दलीलें सुनेगा और फिर आगे का आदेश पारित करेगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बिहार की वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ही किसी ठोस आपत्ति पर विचार किया जाएगा. 

17% मुस्लिम आबादी, फिर भी NDA के सिर्फ 4 मुस्लिम उम्मीदवार — क्या है रणनीति?

पटना  एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. इस मामले में महागठबंधन पिछड़ गया. एनडीए में जेडीयू को छोड़ किसी भी घटक दल ने मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे हैं. जेडीयू ने 17 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिम समाज से सिर्फ 4 कैंडिडेट देकर एनडीए की लाज बचा ली है. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के सभी घटक दलों ने अपने हिस्से की सीटों पर उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. जेडीयू ने बुधवार को 57 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी और गुरुवार को दूसरी सूची जारी कर बचे उम्मीदवारों के नाम भी घोषित कर दिए. एनडीए की दूसरी सहयोगी भाजपा ने भी अपने 101 उम्मीदवारों के नाम 3 किस्तों में जारी कर दिए हैं. एनडीए की तीसरी पार्टी हम (HAM) ने भी हिस्से में मिली 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं. चौथी सहयोगी चिराग पासवान की लोजपा-आर ने भी 14 उम्मीदवारों की एक सूची जारी की है. उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम ने भी नाम तय कर दिए हैं. चिराग पासवान को बंटवारे में 29 सीटें मिली हैं. एनडीए की कैंडिडेट लिस्ट में जेडीयू को छोड़ किसी ने मुस्लिम कैंडिडेटट नहीं दिए. जेडीयू ने सिर्फ 4 मुसलमानों को इस बार मौका दिया है. जेडीयू ने 2020 में 11 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. उम्मीदवारों के चयन में जातीय समीकरण यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बिहार की सियासत में जातीय समीकरण की कितनी अहमियत होती है. इसी अहमियत को ध्यान में रख कर लालू यादव के नेतृत्व वाले आरजेडी ने वर्षों पहले मुस्लिम-यादव समीकरण बनाया था. नीतीश कुमार ने जब से लालू का साथ छोड़ा, तब से लेकर अब तक सभी जातियों को समान रूप से साधने का प्रयास किया है. यही वजह है 5 प्रतिशत से भी कम आबादी वाली कुर्मी जाति से आने वाले नीतीश ने अपना बड़ा जनाधार तैयार कर लिया है. हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने उम्मीदवारों के चयन में यह सावधानी बरती है. जेडीयू की लिस्ट में 4 मुस्लिम कैंडिडेट जेडीयू की सूची में एक बात खटकती है. इस बार सिर्फ 4 मुस्लिम कैंडिडेट सूची में हैं. जेडीयू ने अक्टूबर 2005 के चुनाव में 9 मुस्लिम कैंडिडेट दिए थे. 2010 में भी यह सिलसिला बरकरार रहा. तब 17 मुससलमानों को विधानसभा का टिकट जेडीयू से मिला था. 2015 में जेडीयू को इस बार की तरह ही 101 सीटें मिली थीं. फिर भी नीतीश ने 7 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया था. तब नीतीश आरजेडी के साथ चुनाव लड़े थे. बाद में वे भाजपा में लौट गए. नतीजा यह हुआ कि 2020 में जब उन्होंने 11 मुसलमानों को टिकट दिया तो उनकी जमात ने स्वजातीय या स्वधर्मी उम्मीदवारों का साथ नहीं दिया. जेडीयू के सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2015 तक मुसलमानों का मिला साथ मुस्लिम-यादव के मजूबत समीकरण की वजह से आरजेडी के प्रति मुसलमानों का आकर्षण भले कभी अधिक रहा हो, लेकिन नीतीश कुमार के उदय के बाद और उनके द्वारा किए गए काम से खुश होकर मुसलमानों का बड़ा तबका जेडीयू के साथ आ गया था. मुसलमानों में पिछड़े तबके की पहचान कर नीतीश ने उनके विकास के लिए काम किए तो उनका झुकाव उनके प्रति स्वाभाविक था. आम मुसलमानों के हित में भी नीतीश ने कई उल्लेखनीय काम कर उनके दिलों में अपनी जगह बना ली थी. नीतीश ने भी मुसलमानों को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसके बावजूद 2020 के चुनाव में मुसलमानों ने उनका साथ नहीं दिया. जेडीयू ने 11 मुस्लिम कैंडिडेट उतारे थे, लेकिन एक भी नहीं जीत पाया. बसपा के जमा खान अगर नीतीश के साथ नहीं आते तो विधानसभा में जेडीयू का कोई मुस्लिम विधायक ही नहीं होता. इसके संकेत पहले से ही मिलने लगे थे जेडीयू पर मुसलमानों का भरोसा नहीं रहा, यह संकेत तो स्पष्ट तौर पर 2020 में ही मिल गया था, जब उसके सारे मुस्लिम कैंडिडेट हार गए. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने खुल कर कहना शुरू किया कि जेडीयू को मुसलमानों के वोट नहीं मिलते. यह अलग बात है कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों के लिए सर्वाधिक और उल्लेखनीय काम किए हैं. मुसलमानों में नीतीश के प्रति नाराजगी की वजह शायद भाजपा की संगत रही है. भाजपा के साथ तो वे सर्वाधिक समय तक सरकार चलाते रहे हैं, लेकिन कई मौकों पर उन्होंने भाजपा की खुल कर मुखालफत भी की है. सांसद चुने जाने के बाद देवेश चंद्र ठाकुर ने गुस्से में यहां तक कह दिया कि उन्हें मुसलमानों ने वोट नहीं दिया, इसलिए वे उनका काम नहीं करेंगे. वक्फ कानून पर भाजपा के साथ जेडीयू का खड़ा होना भी मुसललमानों को नागवार लगा था. इसकी झलक उस दिन मिली, जब नीतीश ने रमजान के महीने में इफ्तार की पार्टी दी. मुस्लिम जमात के लोगों ने उसका बायकाट किया था. जेडीयू ने इस बार सिर्फ 4 मुसलमानों को ही मौका दिया है तो इसकी यही वजह समझ में आती है.