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बिहार की पिंकी ने बदली परिवार की किस्मत, जीविका से कर्ज लेकर शुरू की पेवर ब्लॉक यूनिट

गयाजी हौसला मजबूत हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुश्किल परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। नीमचक बथानी प्रखंड की नैली पंचायत स्थित गोवडीहा गांव की पिंकी कुमारी ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से इसे साबित किया है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली पिंकी आज पेवर ब्लॉक निर्माण के कारोबार से अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी इकाई परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ करीब एक दर्जन लोगों को रोजगार भी दे रही है। एक लाख रुपये के ऋण से रखी कारोबार की नींव पिंकी कुमारी के लिए कारोबार शुरू करने का सफर आसान नहीं था। वर्ष 2013 में जब वह संगम जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पति पिंटू कुमार के पास भी रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था। परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती बना हुआ था। ऐसे में पिंकी ने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। जीविका समूह से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला। इसी आर्थिक सहयोग से उन्होंने पति के साथ पेवर ब्लॉक निर्माण का काम शुरू किया। शुरुआत में कारोबार स्थापित करने और बाजार में अपनी जगह बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मेहनत से बढ़ी मांग, मजबूत हुई आर्थिक स्थिति पेवर ब्लॉक का इस्तेमाल सड़क किनारे, घरों के आंगन, पार्क, परिसर और अन्य खुले स्थानों पर फर्श बनाने में होता है। निर्माण कार्यों में इसकी उपयोगिता को देखते हुए पिंकी ने कारोबार को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और आसपास के क्षेत्रों में उनकी पहचान बनने लगी। कारोबार से होने वाली आमदनी का उपयोग उन्होंने परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ व्यवसाय को मजबूत बनाने में भी किया। जरूरत पड़ने पर स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर काम को आगे बढ़ाया। समय के साथ अनुभव बढ़ा और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया। महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा पिंकी का कहना है कि जीविका से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। आर्थिक सहयोग नहीं मिलता तो निर्माण इकाई शुरू करना मुश्किल होता। आज वह अपने पति के साथ कारोबार का और विस्तार करना चाहती हैं। उनकी सफलता बताती है कि आर्थिक सहायता, अवसर और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए रोजगार भी सृजित कर सकती हैं। पिंकी की यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देखती हैं।

औरंगाबाद में कृषि कॉलेज बनाने की तैयारी तेज, जमीन सत्यापन अंतिम चरण में; छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

औरंगाबाद जिले में कृषि महाविद्यालय (Agriculture Collge) के स्थापना की स्वीकृति मिलने के बाद इस दिशा में पहल तेज हो गई है। महाविद्यालय के निर्माण के लिए जमीन की तलाश पूर्ण हो गई है। हसपुरा प्रखंड के डिंडीर में पांच एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। पूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। वर्तमान में चिह्नित जमीन के सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की उम्मीद है। हसपुरा प्रखंड के डिंडिर में बनने की संभावना कृषि महाविद्यालय की स्थापना होने से जिले में कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्र-छात्राओं को कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा। करीब पांच माह पहले उच्च विभागीय अधिकारियों के द्वारा जमीन का निरीक्षण किया गया था। इसी जमीन को चयन होने की बात कही गई थी। परंतु यह अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। एक सप्ताह के अंतिम अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर जमीन सत्यापन का कार्य कर लिया जाएगा। जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महाविद्यालय की स्थापना से संबंधित आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। कृषि शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा कृषि महाविद्यालय की स्थापना से जिले के विद्यार्थियों को कृषि के क्षेत्र में पढ़ाई करने के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे। वर्तमान में कृषि से संबंधित उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को दूसरे जिलों या अन्य स्थानों का रुख करना पड़ता है। जिले में ही कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों को भी होगा फायदा कृषि महाविद्यालय की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले के किसानों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि क्षेत्र में शोध और नई तकनीकों के विकास के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के नए तरीकों की जानकारी देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल खेती की तकनीकों पर अनुसंधान से भी किसानों को लाभ मिल सकता है। औरंगाबाद कृषि प्रधान जिला है। ऐसे में यहां कृषि महाविद्यालय की स्थापना को कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब जमीन सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने और स्थापना से संबंधित आगे की कार्रवाई शुरू होने का इंतजार है। जमीन चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जमीन सत्यापन का कार्य होते ही आगे का कार्य शुरु हो जाएगा।     रितेश यादव, वरीय उपसमाहर्ता औरंगाबाद  

मुड़मा जतरा मेले में जुटेंगे लाखों श्रद्धालु, 4 सेक्टरों में बंटा परिसर; 8 जगहों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात

रांची  मांडर प्रखंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मुड़मा जतरा मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा की व्यापक तैयारी की है। 27 और 28 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालुओं और लोगों के जुटने की संभावना है। मेले की संवेदनशीलता, पारंपरिक बोंगा और भूत पूजा तथा परिसर के आसपास कब्रिस्तान और ईदगाह की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने विधि-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। इस संबंध में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक की ओर से संयुक्त आदेश जारी किया गया है। मेले की गतिविधियां 26 अक्टूबर की दोपहर से ही शुरू होने के मद्देनजर दंडाधिकारियों और पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी ग्रामीण एसपी और सदर अनुमंडल पदाधिकारी करेंगे। चार सेक्टरों में बांटा गया मेला क्षेत्र सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को चार सेक्टरों में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर में पुलिस अधिकारियों के साथ पर्याप्त संख्या में पुरुष और महिला लाठी बल की तैनाती होगी। 26 अक्टूबर की सुबह से मेला समाप्त होने तक लगातार काम करने वाला विशेष नियंत्रण कक्ष भी बनाया गया है। यहां दंडाधिकारी और पुलिस अधिकारी तैनात रहेंगे। मेले में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा मेला परिसर और आसपास के रास्तों पर नजर रखने के लिए 21 गश्ती दल तैनात किए गए हैं। ये दल मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहनों से लगातार गश्त करेंगे। असामाजिक तत्वों, छेड़खानी करने वालों और अफवाह फैलाने वालों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया है। पूर्व में नक्सलियों द्वारा पुलिस बल को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतने और निर्धारित दूरी बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष इंतजाम आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रैपिड एक्शन पुलिस, हिट टीम और बम निरोधक एवं निष्क्रियकरण दस्ता अलर्ट पर रहेगा। मेला परिसर में वाटर कैनन, आंसू गैस दस्ता और अग्निशमन विभाग की दो बड़ी गाड़ियां तैनात रहेंगी। चिकित्सा सुविधा के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ चार एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, ब्रांबे के गेस्ट हाउस को सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में चिह्नित किया गया है। वहां भी सशस्त्र बलों की तैनाती रहेगी। आठ प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त यातायात पुलिस मेले में लाखों की भीड़ को देखते हुए रांची-मांडर मार्ग पर यातायात व्यवस्था सुचारू रखने की जिम्मेदारी यातायात एसपी संभालेंगे। काठीटांड़ चौक, मुड़मा चौक और तिलता चौक समेत आठ प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त यातायात पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों के लिए आठ अलग-अलग पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। मुख्य मार्गों पर अनधिकृत वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए ड्रॉप गेट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों और जवानों को निर्धारित समय पर ड्यूटी संभालने तथा पूरे मेले के दौरान सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

कृषि इनपुट अनुदान योजना: छपरा में 20,661 आवेदनों में से 12,395 को मिली अंतिम मंजूरी, 218 लंबित

छपरा सारण जिले में कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत किसानों को राहत राशि देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। कृषि विभाग की 24 अक्टूबर 2026 की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 31 चिह्नित पंचायतों से प्राप्त कुल 20,661 आवेदनों में से 12,395 को जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) स्तर से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। इससे बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को अनुदान राशि मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। कृषि समन्वयकों के स्तर पर भौतिक सत्यापन के बाद 14,860 आवेदनों को स्वीकृति दी गई। इस चरण में 8,83,890.5 रकबे से संबंधित प्रविष्टियों की जांच और सत्यापन का विवरण दर्ज किया गया। वहीं, पात्रता और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर 3,511 आवेदन निरस्त कर दिए गए, जबकि 2,290 आवेदन लंबित रखे गए थे। इसके बाद अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (एसएओ) स्तर पर आवेदनों की समीक्षा की गई। इस स्तर पर 12,616 आवेदनों को स्वीकृति मिली, जबकि 584 आवेदन अस्वीकृत किए गए और 1,660 लंबित रहे। अंतिम जांच के बाद जिला कृषि पदाधिकारी ने 12,395 आवेदनों को मंजूरी दे दी है। जिला स्तर पर अब केवल 218 आवेदन लंबित बताए गए हैं। ये आवेदन सोनपुर प्रखंड की नगरमीरा पंचायत से संबंधित हैं। डुमरी और शिकारपुर से मिले सर्वाधिक आवेदन प्रखंडवार आंकड़ों में छपरा, सोनपुर, दिघवारा, गरखा, दरियापुर, रिविलगंज और मांझी की पंचायतों से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। सोनपुर प्रखंड की शिकारपुर पंचायत से सर्वाधिक 2,137 आवेदन आए, जबकि छपरा प्रखंड की डुमरी पंचायत से 1,948 किसानों ने आवेदन किया था। इनमें डुमरी के 1,766 और शिकारपुर के 926 आवेदनों को जिला कृषि पदाधिकारी स्तर पर अंतिम मंजूरी मिली है। गड़खा प्रखंड की पचपटिया, इतवा और कोठिया पंचायतों से भी बड़ी संख्या में किसानों ने अनुदान के लिए दावा किया था। स्वीकृत किसानों को डीबीटी से मिलेगी राशि कृषि विभाग के अनुसार, शेष लंबित आवेदनों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पात्र किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से अनुदान राशि भेजी जाएगी।

पूर्णिया के मखाने की विदेशों में धूम, ग्रीस भेजी गई 1 टन की खेप; 8 जिलों में 37,440 टन उत्पादन

भागलपुर बिहार के सीमांचल की मिट्टी और पानी से उपजे 'सफेद मोती' यानी मखाने का डंका अब सात समंदर पार बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के पूर्णिया के मखाने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और विदेशी बाजारों में इसके सीधे निर्यात का विशेष तौर पर उल्लेख किया। प्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में पूर्णिया और कोसी-सीमांचल के मखाने को नई ब्रांडिंग और व्यापक वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि पिछले महीने आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों को पूर्णिया का विशेष 'अचारी फ्लेवर' वाला मखाना उपहार स्वरूप भेंट किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तारीफ हुई थी। मुंद्रा पोर्ट से ग्रीस के पिरियस बंदरगाह पहुंची व्यावसायिक खेप अक्टूबर 2026 की शुरुआत में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्णिया से मखाने का संस्थागत विदेशी निर्यात अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट द्वारा तैयार एक टन मखाने की पहली व्यावसायिक खेप सीधे यूरोपीय देश ग्रीस भेजी गई। इस निर्यात की नोडल एजेंसी नई दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड रही, जिसने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से कंटेनर के जरिए यह कंसाइनमेंट ग्रीस के प्रमुख पिरियस बंदरगाह तक पहुंचाया। 18 से अधिक देशों में धमक, 60 फीसदी उपज का निर्यात आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों के अलावा यूरोपीय संघ सहित 18 से अधिक देशों में सीमांचल के मखाने की सीधी आपूर्ति हो रही है। इनमें ग्रीस के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूएई (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल प्रमुख आयातक देश बन चुके हैं। कोसी-सीमांचल मखाना: वैश्विक निर्यात एक नजर में पीएम का संबोधन: ‘मन की बात’ कार्यक्रम। ताजा व्यावसायिक निर्यात: 1 टन मखाना बेलौरी (पूर्णिया) से ग्रीस के पिरियस पोर्ट भेजा गया। सप्लाई चेन: उत्पादक- इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट (पूर्णिया); निर्यातक- एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली); प्रस्थान- मुंद्रा बंदरगाह (गुजरात)। वैश्विक मंच पर उपस्थिति: ब्रिक्स सम्मेलन में अतिथियों को भेंट किया गया था अचारी फ्लेवर मखाना। निर्यात गंतव्य (18+ देश): ग्रीस, अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (दुबई), कतर, सिंगापुर, ब्राजील, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल आदि। निर्यात हिस्सेदारी: कुल क्षेत्रीय उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत। गुणवत्ता व खासियत: बड़े आकार का लावा, अत्यधिक कुरकुरा और शुद्ध दूधिया सफेद रंग। कृषि व व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि कोसी और सीमांचल के जलजमाव वाले प्राकृतिक क्षेत्रों में उत्पादित मखाने की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका बड़ा आकार और स्वाभाविक दूधिया सफेद रंग है। अपनी इसी उच्च गुणवत्ता और न्यूट्रिशन वैल्यू के कारण यहां उत्पादित कुल मखाने का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा वैश्विक बाजार में हाथों-हाथ खप रहा है। वर्ष 2025-26: कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में मखाना उत्पादन की स्थिति जिला     खेती का क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)     लावा (पॉप्ड मखाना) उत्पादन (टन में) कटिहार     7,527                                  8,950 पूर्णिया     7,204                                    8,565 सहरसा     4,046                                   4,810 सुपौल     3,814                                    4,534 अररिया     2,714                                   3,227 मधेपुरा     2,553                                    3,036 किशनगंज     2,470                                2,926 खगड़िया     1,170                                 1,392 कुल योग     31,498 हेक्टेयर                   37,440 टन कोसी-सीमांचल के 8 जिलों में 37440 टन रिकॉर्ड उत्पादन वाणिज्यिक और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान कोसी-सीमांचल क्षेत्र के आठ जिलों में कुल 31,498 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाने की वैज्ञानिक खेती की गई, जिससे कुल 37,440 टन उन्नत मखाना लावा का उत्पादन दर्ज किया गया है। उत्पादन के मामले में कटिहार जिला 7,527 हेक्टेयर में 8,950 टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि पूर्णिया जिला 7,204 हेक्टेयर में 8,565 टन उत्पादन के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इसके अलावा सहरसा, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, किशनगंज और खगड़िया में भी हजारों मीट्रिक टन मखाने की बंपर पैदावार दर्ज की गई। स्थानीय स्तर पर बेहतर ग्रेडिंग, फ्लेवरिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों की पैकेजिंग मिलने से अब किसानों को बिचौलियों के बजाय सीधे एक्सपोर्टर्स से बेहतर दाम मिल रहे हैं, जिससे इलाके की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।  

झारखंड में घरेलू गैस कनेक्शन का विस्तार, रांची में 35 हजार घरों में PNG चालू; 34 CNG स्टेशन भी सक्रिय

रांची राजधानी रांची में पाइपलाइन के जरिए घरेलू प्राकृतिक गैस (पीएनजी ) पहुंचाने की योजना को गति दी जा रही है। गेल (इंडिया) लिमिटेड शहर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी ) नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। वर्तमान में रांची में लगभग 35 हजार घरेलू पीएनजी कनेक्शन चालू हो चुके हैं। अगले छह महीनों में करीब 40 हजार अतिरिक्त घरेलू उपभोक्ताओं को पीएनजी सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहर के अधिक परिवारों को रसोई गैस की सुविधाजनक आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं गेल के उप महाप्रबंधक प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि रांची के विभिन्न इलाकों में पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा घरों तक प्राकृतिक गैस की सुविधा पहुंचाई जा सके। 14 क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार की योजना आने वाले महीनों में शहर के 14 क्षेत्रों में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार की योजना है। इसमें हेहल, चुटिया, नोवागढ़/नोव नगर, काजू बागान, पुलिस लाइन, लालपुर, मेन रोड, बहू बाजार, वीर कुंवर सिंह कालोनी, महावीर नगर, रांची सेल नगर, पहाड़ी मंदिर क्षेत्र, किशोरगंज और महिलौंग शामिल हैं। इन इलाकों में नेटवर्क विस्तार और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाए जाएंगे। इससे संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को पाइपलाइन से गैस उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार होगा। रांची में 34 सीएनजी स्टेशन चालू घरेलू पीएनजी के साथ परिवहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है। गेल के अनुसार, वर्तमान में रांची में 34 सीएनजी स्टेशन चालू हैं। शहर और आसपास के इलाकों में सीएनजी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। स्मार्ट सिटी से तुपुदाना तक विस्तार की तैयारी नई योजना के तहत धुर्वा स्थित स्मार्ट सिटी, रिंग रोड के गागी चौक, बुढमू चौक और तुपुदाना सहित प्रमुख क्षेत्रों में नए सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ मौजूदा डाटर बूस्टर स्टेशन को आनलाइन सीएनजी स्टेशन में बदलने की योजना है। इससे गैस की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर पीएनजी और सीएनजी नेटवर्क के विस्तार का उद्देश्य घरेलू, वाणिज्यिक, औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की पहुंच बढ़ाना है। पाइपलाइन से घरों तक गैस पहुंचने पर उपभोक्ताओं को सिलिंडर की बुकिंग और उसे रखने की जरूरत से राहत मिल सकती है। वहीं, सीएनजी नेटवर्क मजबूत होने से वाहनों के लिए गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। हालांकि, नए कनेक्शन और स्टेशनों की सुविधा संबंधित क्षेत्रों में नेटवर्क निर्माण, तकनीकी तैयारी और परियोजना की प्रगति पर निर्भर करेगी।

झारखंड में धान खरीदी पर संकट, सरकारी पंजीकरण से किसानों की दूरी; बिचौलियों पर लगाम लगाने की तैयारी

रांची झारखंड के किसानों के लिए मुख्य फसल धान है और इसके लिए किसानों से लेकर सरकार तक लगातार चिंतित रहती है लेकिन कहीं ना कहीं कोई ऐसी बात है कि सरकार को प्रयासों का फल नहीं मिल रहा है। खेतों तक अभी भी सिंचाई के साधन नहीं पहुंच सके हैं तो पूरा वातावरण बिचौलियों से पटा पड़ा है। किसान धान उत्पादन करते हैं तो बिक्री नहीं कर पाते हैं। व्यवस्था में पंजीकरण को लेकर सरकारी आदेश से परेशानी बढ़ने की बात भी कही जा रही है। यही कारण है कि जहां राज्य में लगभग 29 लाख किसान चिह्नित हैं, वहीं महज 1.65 लाख से कुछ अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। धान उत्पादक किसानों की यह संख्या देखकर विभाग भी हतप्रभ है। झारखंड में धान बेचने के लिए निबंधित किसानों को पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग ने कई बदलाव किए हैं। इस कारण से कुछ किसानों और बिचौलियों ने धान बेचने की प्रक्रिया से दूरी बना ली है। पूर्व में भी झारखंड में किसानों के नाम पर कई बिचौलियों ने लाखों के धान बेचे हैं। अब सरकार ने आनलाइन व्यवस्था बनाई है जिसके तहत किसानों के खेती योग्य जमीन की जानकारी के साथ-साथ बैंक पासबुक भी जुड़ा रहता है। इससे धान के एवज में मिलनेवाला भुगतान सीधे किसानों के खाते में चला जाएगा। इसकी प्रक्रिया बहुत ही सरल बनाई गई है। निर्धारित फार्म में जानकारी साझा करने के बाद किसान एक-एक कर सभी भूखंडों की जानकारी डाल सकेंगे। एक भूखंड को एक ही किसान अपने हिस्से में दर्ज करा सकता है। विभाग से तमाम जानकारी को पुष्ट करने के बाद किसानों का पंजीकरण होगा और इसके साथ ही उन्हें निबंधित मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाएगा। किसानों को धान विक्रय केंद्रों की जानकारी भी एसएमएस के माध्यम से मिलेगी। धान जमा कराने के बाद किसानों को एक रसीद दी जाएगी और दो से सात दिनों के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा।

मोदी को सत्ता से हटाने वाले बयान पर खरगे घिरे, BJP-JDU का हमला; बिहार की राजनीति में बढ़ा तनाव

पटना पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों पर भाजपा और जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने खरगे के बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की है। वहीं, जदयू ने नीतीश कुमार पर टिप्पणी करने के खरगे के अधिकार और राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाए हैं। श्रीकृष्ण सिंह जयंती समारोह से शुरू हुआ विवाद विवाद रविवार को पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आया। भाषण में खरगे चुनावी धांधली के आरोपों का जिक्र कर रहे थे। इसी बीच भीड़ से आवाज आने के बाद उनकी प्रतिक्रिया ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। उनके बयान को लेकर भाजपा और जदयू ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। सम्राट चौधरी ने उठाया भाषा की मर्यादा का सवाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खरगे की टिप्पणी को अमर्यादित बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने खरगे और राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की। भाजपा नेताओं ने भी कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और सार्वजनिक भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। भाजपा का आरोप-गांधी परिवार की स्क्रिप्ट पढ़ रहे खरगे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने खरगे के बयान को गांधी परिवार की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने चुनाव में हार और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस की आलोचना की। सरावगी का दावा है कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए, न कि अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरी पार्टियों पर फोड़ना चाहिए। नित्यानंद राय ने कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के कारण कांग्रेस नेतृत्व हताश है और इसी वजह से आपत्तिजनक बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। राय ने दावा किया कि जनता ऐसे बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। ऋतुराज सिन्हा बोले-राजनीतिक बहस में व्यक्तिगत हमला उचित नहीं भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा ने भी खरगे की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों और जनहित के मुद्दों पर बहस करने के बजाय व्यक्तिगत हमले करना उचित नहीं है। सिन्हा ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को राजनीतिक बयानबाजी में शामिल करने पर आपत्ति जताते हुए खरगे और कांग्रेस नेतृत्व से बिना शर्त माफी की मांग की। नीतीश कुमार पर टिप्पणी को लेकर जदयू ने कांग्रेस को घेरा जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने नीतीश कुमार को समाजवादी विचारधारा का प्रमुख नेता बताते हुए कहा कि उनके लंबे राजनीतिक जीवन पर टिप्पणी करने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक रिकॉर्ड पर विचार करना चाहिए। उन्होंने खरगे के बयान को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा और कहा कि नीतीश कुमार को किसी के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। संजय झा की मांग-खरगे माफी मांगें, कांग्रेस ले जिम्मेदारी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई व्यक्तिगत टिप्पणी को सामान्य राजनीतिक आलोचना नहीं माना जा सकता। झा ने कांग्रेस से भी इस मामले में जवाबदेही लेने को कहा। बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक टकराव खरगे की टिप्पणी के बाद भाजपा और जदयू ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए माफी की मांग तेज कर दी है। भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा बनाया, जबकि जदयू ने नीतीश कुमार पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सियासी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हालांकि, नेताओं की ओर से लगाए गए आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं उनके अपने दावे हैं।

JPSC परीक्षा में बड़ा खेल? खाली OMR पर 292 अंक मिलने का दावा, CCTV फुटेज से खुलासे

रांची झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और कार्बन कॉपी के मिलान में ऐसे अंतर सामने आए हैं, जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के अनुसार, कुछ सफल अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए, जबकि उनकी ओएमआर शीट में बड़ी संख्या में उत्तर दर्ज मिले। सोते रहे ओम प्रकाश, ओएमआर में मिले 91 और 92 सही जवाब सीआईडी की जांच में ओम प्रकाश राणा का मामला सामने आया है। वह 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए थे। सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन में उनके परीक्षा के दौरान सोने और जम्हाई लेने की बात सामने आई। वहीं, उनकी दोनों पेपर की ओएमआर शीट की जांच में क्रमशः 91 और 92 सही उत्तर मिलने का उल्लेख है। इससे परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन और ओएमआर में दर्ज उत्तरों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे हैं। वंदना ने हल किए कम प्रश्न, ओएमआर में मिले ज्यादा उत्तर सफल अभ्यर्थी वंदना कुमारी के मामले में भी सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट के बीच कथित विसंगति मिली। जांच के मुताबिक, उन्होंने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न ही हल किए थे, जबकि ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज पाए गए। जांच एजेंसी इन तथ्यों को परीक्षा में संभावित गड़बड़ी के साक्ष्य के रूप में देख रही है। खाली ओएमआर के बावजूद अरविंद को मिले 292 अंक अरविंद कुमार का मामला भी जांच के दायरे में है। सीसीटीवी फुटेज में वह परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखे। जांच के अनुसार, उनकी ओएमआर शीट में कोई गोला भरा हुआ नहीं मिला, इसके बावजूद उन्हें 292 अंक मिले। आरोप है कि पूछताछ में अरविंद ने ओएमआर खाली छोड़ने और कार्बन कॉपी जलाने की बात स्वीकार की। कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर में भी अंतर एफआरओ परीक्षा के सफल अभ्यर्थी रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल ओएमआर में 147 उत्तर मिलने की बात सामने आई है। उनके मोबाइल वीडियो में मूल प्रति स्ट्रांग रूम के बाहर टीडीपीएल कर्मियों के पास दिखाई देने का भी दावा किया गया है। जांच में अभय तिवारी, उसके स्वजन और एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों की सफलता को लेकर भी आरोपों की पड़ताल की जा रही है। एक एजेंट के लैपटॉप में परिणाम घोषित होने से दो महीने पहले 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने की बात सामने आई है। सीआईडी के अनुसार, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे या निगरानी नहीं थी। इससे दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ की आशंका और गहरी हुई है। जांच एजेंसी इन सभी कड़ियों को जोड़कर परीक्षा में हुई संभावित अनियमितताओं और टीडीपीएल की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

बिहार में नया रेल बाइपास शुरू, पटना जंक्शन पर बंद नहीं होंगी सभी ट्रेनें; यात्रियों को मिलेगी राहत

 पटना बिहार में रेल यात्रियों के लिए नए बाइपास रूट को लेकर बड़ी खबर है। नेउरा-जटडुमरी रेलखंड को परिचालन की मंजूरी मिलने के बाद पटना के व्यस्त रेलमार्ग को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पटना जंक्शन से सभी ट्रेनें गुजरना बंद हो जाएंगी। नई रेललाइन से मुख्य रूप से मालगाड़ियों को पटना बाइपास करके चलाने की सुविधा मिलेगी, जबकि भविष्य में कुछ यात्री और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की संभावनाएं भी बनेंगी। साथ ही आपको बता दे कि पटना जक्शन पर तभी ट्रेने नहीं रुकेगी जब ब्लॉक या ट्रेन वहां नहीं रुकती हो, बाकि समय ट्रेने हमेशा की तरह रुकेगी। सभी ट्रेनें नहीं होंगी डायवर्ट, चुनिंदा ट्रेनों पर ही नजर नेउरा-दनियावां रेललाइन को लेकर यात्रियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली-हावड़ा रूट की सभी ट्रेनें अब पटना जंक्शन आना बंद कर देंगी। ऐसा नहीं है। नई लाइन का प्रमुख उद्देश्य मालगाड़ियों को वैकल्पिक रास्ता देना और व्यस्त मुख्य रेलखंड पर दबाव कम करना है। यात्री ट्रेनों को इस रूट से चलाने का फैसला रेलवे की परिचालन योजना के अनुसार होगा। इसलिए पटना जंक्शन, दानापुर या राजेंद्रनगर में ठहरने वाली सभी ट्रेनों के बंद होने की खबर को सही नहीं मानें। नेउरा से जटडुमरी, दनियावां होते हुए मिलेगा वैकल्पिक रास्ता नई रेललाइन के जरिए ट्रेनें नेउरा से जटडुमरी, दनियावां, बिहारशरीफ, बरबीघा और शेखपुरा होते हुए किऊल की ओर जा सकेंगी। इससे उन मालगाड़ियों को पटना के व्यस्त रेलखंड से होकर गुजरने की जरूरत नहीं होगी, जिन्हें पटना या दानापुर में माल उतारना नहीं है। इस वैकल्पिक मार्ग से दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। कुछ पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की भी बढ़ेगी संभावना नई रेललाइन से केवल मालगाड़ियों का रास्ता बदलने का ही फायदा नहीं होगा। मुख्य रेलखंड पर जगह उपलब्ध होने से भविष्य में अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी बढ़ सकती है। इस रूट के आसपास रहने वाले यात्रियों को नए स्टेशन और हॉल्ट से सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कौन-सी पैसेंजर ट्रेन कब से चलेगी और किन स्टेशनों पर रुकेगी, इसकी जानकारी रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। पटना जंक्शन पर ट्रेनों के दबाव में आएगी कमी दानापुर-पटना-किऊल-झाझा रेलखंड दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेलमार्ग का महत्वपूर्ण और व्यस्त हिस्सा है। इस पर मालगाड़ियों की आवाजाही के कारण कई बार यात्री ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ता है। वैकल्पिक बाइपास शुरू होने से मालगाड़ियों के लिए अलग रास्ता उपलब्ध होगा। इससे सिग्नल और आउटर पर इंतजार कम करने तथा यात्री ट्रेनों के परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। नेउरा, जटडुमरी और दनियावां के यात्रियों को भी फायदा नई रेललाइन से पटना, नालंदा, शेखपुरा और लखीसराय के बीच रेल संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। नेउरा-जटडुमरी के बीच गोनपुरा स्टेशन और अधपा, चामाचक तथा वाजिदपुर हॉल्ट बनाए गए हैं। इन इलाकों के यात्रियों को भविष्य में नई ट्रेन सेवाएं मिलने पर लंबी दूरी की यात्रा के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।