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गया में आधुनिक MSME ट्रेनिंग सेंटर बनेगा कौशल विकास और रोजगार का केंद्र

 बोधगया  गया जिले के खिजरसराय में निर्माणाधीन एमएसएमई टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग सेंटर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 20 एकड़ भूमि पर करीब 176 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर निर्माण कार्य जारी है। अब तक परिसर की बाउंड्री वॉल, मुख्य गेट और गार्ड रूम का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि अन्य भवनों की ड्राइंग और डिजाइन के अनुरूप निर्माण प्रक्रिया लगातार जारी है। निर्माण एजेंसी को इस परियोजना को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। सेंटर का वास्तुशिल्प (आर्किटेक्चरल) डिजाइन दिल्ली के विशेषज्ञ आर्किटेक्ट्स द्वारा तैयार किया गया है, जो इसे आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देगा। कुल नौ ब्लॉकों में विकसित होगा अत्याधुनिक परिसर एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बहुउद्देशीय प्रशिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, एक्जीक्यूटिव हॉस्टल, कमर्शियल ब्लॉक, कन्वोकेशन हॉल, स्टाफ रेजिडेंसी, गर्ल्स हॉस्टल, डाइनिंग ब्लॉक, बॉयज हॉस्टल, ट्रेनिंग सेंटर, प्रोडक्शन ब्लॉक सहित कई भवन बनाए जाएंगे। सभी भवन दो मंजिला होंगे और आधुनिक प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। युवाओं को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण परियोजना पूरी होने के बाद यह संस्थान मगध क्षेत्र के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा। एमएसएमई विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार यहां आठवीं कक्षा से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के छात्र-छात्राओं को विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाएंगे। संस्थान में डिप्लोमा इन टूल एंड डाई मेकिंग, मेकाट्रॉनिक्स, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स स्किल्स सहित कई आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम संचालित होंगे। प्रशिक्षण की अवधि छह माह से एक वर्ष तक निर्धारित की जाएगी, ताकि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था सेंटर में हेवी इंजीनियरिंग, जनरल इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल टेस्टिंग, प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट से जुड़े अलग-अलग विभाग स्थापित किए जाएंगे। वहीं, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण, ब्यूटीशियन एवं अन्य रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की व्यवस्था होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक प्रशिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास की नई नींव साबित होगी। इसके शुरू होने से हजारों युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

बिहार की चुनिंदा सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स, रखरखाव पर होगा खर्च

पटना  राज्य उच्च पथ की चुनिंदा सड़कें और पुल पर टोल टैक्स (Bihar Toll Tax) लगाने के निर्णय से पथ निर्माण विभाग को एक साल में सात से आठ सौ करोड़ रुपए का राजस्व हासिल होगा। इस राशि का इस्तेमाल सड़कों के रख रखाव पर किया जाएगा। वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से बनी सड़कें आ जाएंगी टोल की परिधि में पथ निर्माण विभाग ने बड़ी संख्या में राज्य उच्च पथों (एसएच) को एशियन डेवलपमेंट बैंक व कुछ सड़कों किसी दूसरी वित्तीय संस्थाओं की ऋण राशि से विकसित किया है। वित्तीय संस्थाओं की मदद से तैयार राज्य उच्च पथों को टोल टैक्स के दायरे में लाया जाना तय है। जल्द ही पथ निर्माण विभाग इस आशय की अधिसूचना जारी करेगा कि कौन-कौन से राज्य उच्च पथों पर टैक्स लिए जाएंगे। टोल की वसूली के लिए टोल एजेंट को मिलेगी जिम्मेवारी अलग-अलग इलाके में स्थित सड़कों पर टोल टैक्स की वसूली के लिए टोल एजेट नियुक्त करेगा पथ निर्माण विभाग। पथ निर्माण विभाग इन दिनाें डिजिटल मोड़ में यह आकलन कर रहा है कि किसी सड़क पर 24 घंटे के भीतर औसतन कितने वाहनों का परिचालन होता है। इसके आधार पर टोल एजेंट को जिम्मेवारी दी जाएगी। पेमेंट गेटवे के लिए केंद्र सरकार की संस्था की मदद ली जाएगी स्टेट हाईवे पर लगने वाले टोल टैक्स के पेमेंट गेटवे के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की मदद ली जाएगी। राष्ट्रीय उच्च पथ (एनएच) पर टोल टैक्स वसूली के लिए जो फास्ट टैग प्रचलन में हैं उन्हीं का इस्तेमाल राज्य उच्च पथ (एसएच) पर भी टोल के लिए किया जा सकेगा। इसकी अनुमति मिल जाने के बाद एसएच के लिए टोल मद में फास्ट टैग के माध्यम से जो राशि आएगी वह पथ निर्माण विभाग के खाते में चली जाएगी। इसके लिए पथ निर्माण विभाग अलग से कोई फास्ट टैग की व्यवस्था नहीं करेगा।  

रांची एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की तैयारी तेज, केंद्र के फैसले का इंतजार

रांची  झारखंड के लोगों का वर्षों पुराना सपना अब धीरे-धीरे हकीकत की ओर बढ़ता दिख रहा है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का आकलन कर अपनी रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी है। रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर उपलब्ध संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। अब अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाना है। अगर सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हुईं तो आने वाले वर्षों में रांची देश के चुनिंदा ऐसे शहरों में शामिल हो सकता है, जहां से घरेलू उड़ानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। रांची एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने की सबसे बड़ी वजह इसकी लगातार बढ़ती यात्री संख्या और झारखंड से विदेश जाने वाले यात्रियों की बढ़ती मांग मानी जा रही है। वर्तमान में बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और हैदराबाद के रास्ते दुबई, सिंगापुर, बैंकाक, कतर, मलेशिया और अन्य देशों के लिए उड़ान भरते हैं। यदि रांची से सीधी अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू होती है, तो यात्रियों का समय और खर्च दोनों कम होंगे। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने के लिए एयरलाइंस कंपनियों की रुचि, पर्याप्त यात्री संख्या, द्विपक्षीय उड़ान अनुमति और राज्य सरकार का सहयोग भी उतना ही जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय सुविधा बहाल करने के लिए स्थान चिन्हित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) व्यवस्था है। एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार इन सुविधाओं के लिए आवश्यक स्थान चिह्नित किया जा चुका है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही संबंधित विभागों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद विदेश जाने वाले यात्रियों की पासपोर्ट जांच, कस्टम क्लीयरेंस और अन्य औपचारिकताएं रांची एयरपोर्ट पर ही पूरी हो सकेंगी। एयरपोर्ट प्रबंधन ने अंतराष्ट्रीय सेवा बहाल करने के लिए कई एयरलाइंस कंपनियों से भी संपर्क किया है। शुरुआत खाड़ी देशों के लिए सीधी उड़ानों से हो सकती है, क्योंकि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए वहां जाते हैं। एयरपोर्ट को मिल चुका है आईएसओ प्रमाण पत्र बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। लगभग 19 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल में एक समय में करीब 500 यात्रियों को संभालने की क्षमता है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, पर्याप्त चेक-इन काउंटर, विस्तृत आगमन-प्रस्थान क्षेत्र और भविष्य के विस्तार की भी व्यवस्था की गई है। रांची एयरपोर्ट पहले ही आईएसओ प्रमाणन प्राप्त कर चुका है। सुरक्षा के लिहाज से आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, सीसीटीवी निगरानी, फायर सेफ्टी सिस्टम तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। एयरपोर्ट पर रनवे और एप्रन की क्षमता भी वर्तमान परिचालन के अनुरूप मजबूत मानी जा रही है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढोतरी झारखंड में विदेशी पर्यटकां की संख्या में बढोत्तरी हुई है। राज्य गठन के साथ सिर्फ 172 विदेशी पर्यटक सलाना आते थे। अब दो लाख से अधिक विदेशी पर्यटक सलाना आते है। गत वर्ष 3.31 लाख पर्यटक प्रदेश में आए, जिसमें से 1.76 विदेशी पर्यटक की संख्या रही। प्रदेश से विदेश जाने वालों की संख्या बढ़ी क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की ओर से वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक करीब 10.98 लाख पासपोर्ट बनाया गया। कोरोना काल के बाद से पासपोर्ट बनवाने वालो की संख्या लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2022 में 1 लाख 900, वर्ष 2023 में एक लाख नौ हजार, वर्ष 2024 में एक लाख 12 हजार और वर्ष 2025 में एक लाख 13 हजार पासपोर्ट जारी हुए। पासपोर्ट बनाने के बाद लोग बड़ी संख्या में विदेश जहा रहे हैं। क्यों जरूरी है रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ान -दिल्ली या कोलकाता होकर विदेश जाने की मजबूरी खत्म होगी। -यात्रा का समय 4 से 8 घंटे तक कम हो सकता है। -झारखंड के प्रवासी श्रमिकों और कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। -मेडिकल, शिक्षा और पर्यटन के लिए विदेश जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। राज्य में निवेश और उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने से पहले क्या है जरूरी -केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय दर्जे की अंतिम मंजूरी। -कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (सीआईक्यू) की स्थापना। -एयरलाइंस कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय रूट पर परिचालन की घोषणा। -संबंधित देशों के साथ स्लॉट और उड़ान अनुमति। -पर्याप्त यात्री मांग और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित होना।     बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने के लिए की मंत्रालय व एयरलांस कंपनियां को भी पत्र लिखा गया है। रांची एयरपोर्ट कस्टम, इमिग्रेशन और अन्य सुविधाओं के लिए एयरपोर्ट में जगह उपलब्ध है। एयरपोर्ट अंतराष्ट्रीय उडान के लिए तैयार है। पूर्व में वर्ष 2008-09 में रांची से जेद्दा के लिए सीधी उड़ानें संचालित होती थी।     -विनोद कुमार, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट निदेशक  

रिम्स-2 निर्माण को हरी झंडी, कैबिनेट ने 27 प्रस्तावों पर लगाई मुहर

 रांची  झारखंड में अबतक के सबसे बड़े अस्पताल के निर्माण को लेकर गुरुवार को राज्य कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। रांची में रिम्स-2 के निर्माण को कैबिनेट ने 4189.41 करोड़ रुपये खर्च करने के स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए जागृति पीएमयू के गठन पर सहमति दी है। इसके लिए आइआइएम, रांची को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके साथ ही एक्सआइएसएस, रांची को इम्पैक्ट असेसमेंट की जिम्मेदारी दी गई है।  दूसरी ओर, कैबिनेट ने झारखंड में विकसित भारत जी-राम-जी योजना लागू करने के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान कर दी। इस योजना में आदिम जनजाति समूह के लिए अतिरिक्त कार्य की भी व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। उन्हें 100 दिनों की जगह 150 दिनों का रोजगार मिलेगा। योजना लागू होने से ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन हो जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने कुल 27 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। कैबिनेट ने राज्य में 12 पंचायतों से कम वाले प्रखंड एवं अंचलों में एकल प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मा देने का निर्णय लिया है। अंचल-प्रखंडों में बदलेगी व्यवस्था ऐसे 53 अंचलों और 54 प्रखंडों में एकल प्रशासनिक पदाधिकारी रखने का निर्णय लिया गया है। इन 53 अंचलों में अंचल अधिकारी सह बीडीओ पदस्थापित होंगे, जबकि 54 प्रखंडों में बीडीओ सह सीओ की पदस्थापना होगी। इसके अलावे 164 प्रखंडों में बीडीओ और सीओ अलग-अलग पदस्थापित होंगे। प्रदेश में 271 प्रशासनिक सेवा की इकाई है। राज्य में प्रखंड-अंचल में झारखंड प्रशासनिक कोटि के पदाधिकारियों की युक्तिसंगत पदस्थापन होगी। कैबिनेट की बैठक में आठ-नौ जुलाई को नई दिल्ली में नेशनल स्टेट होल्डर कंसल्टेशन 2026 के आयोजन की भी स्वीकृति प्रदान की गई। श्रावणी मेला के लिए बनेंगे अस्थायी ओपी झारखंड में श्रावणी मेला को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कांवरियों को कोई परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए ओपी की स्थापना की जाएगी। इसमें 28 अस्थायी ओपी और 19 यातायात ओपी बनाए जाएंगे। ये ओपी 30 जुलाई से 28 अगस्त तक कार्य करेंगे। नियुक्ति पत्र लेते समय लेनी होगी निष्ठा की शपथ राज्य में नियुक्ति पत्र लेते समय सभी कर्मियों और पदाधिकारियों के लिए निष्ठा और गोपनीयता की शपथ लेना अनिवार्य किया गया है। कैबिनेट ने कार्मिक विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति प्रदान की थी। चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की होगी स्थापना झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2024 के तहत बोकारो के चंदनकियारी में पेमिया ऋषिकेश विश्वविद्यालय की स्थापना होगी। इसे लेकर लेटर आफ इंटेंट देने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की।  

झारखंड सरकार यूपीएससी मुख्य परीक्षा तैयारी हेतु एससी-एसटी छात्रों को देगी 1.5 लाख

रांची  अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जिन छात्र या छात्राओं ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली है, उन्हें मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए राज्य सरकार 1.5 लाख रुपये की सहायता राशि देगी। मुख्यमंत्री अनुसूचित जनजाति-अनुसूचित जाति सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत यह राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। आवेदन की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक है। आवेदन के लिए पात्रता अगर आप झारखंड सिविल सर्विसेज प्रोत्साहन योजना 2026 का लाभ लेना चाहते हैं, तो आपको नीचे दी गई सभी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगाः     झारखंड का निवासी होना जरूरीः आवेदक झारखंड का स्थायी या स्थानीय निवासी होना चाहिए।     केवल एससी/एसटी अभ्यर्थियों के लिएः इस योजना का लाभ सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा।     आय सीमाः आवेदक के परिवार की सभी स्रोतों से वार्षिक आय 8 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए।     एक बार ही मिलेगा लाभः इस योजना का लाभ प्रत्येक अभ्यर्थी को केवल एक बार ही दिया जाएगा।     दूसरी सरकारी कोचिंग योजना का लाभ नहींः जो अभ्यर्थी केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य सिविल सेवा कोचिंग अथवा सहायता योजना का लाभ पहले से ले रहे हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को निम्नलिखित दस्तावोजों की स्व-अभिप्रमाणित (Self-Attested) प्रतियां जमा करनी होगीः  

शहरों की तर्ज पर अब गांवों में टैक्स व्यवस्था, कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा लागू

पटना  बिहार में शहरों क्षेत्र की तर्ज पर अब गांवों में भी टैक्स की वसूली होगी। सभी ग्राम पंचायतें हरेक घर से साल भर में औसतन 1200 रुपये टैक्स लेगी। 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा पर ग्रामीणों को भी नगर निगम की तर्ज पर होल्डिंग सहित अन्य टैक्स देना होगा। इस संबंध में पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को वित्त विभाग की हरी झंडी मिल गई है। अब सम्राट चौधरी कैबिनेट से सहमति मिलने के बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। दरअसल, 16वें केंद्रीय वित्त आयोग ने देशभर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की अनुशंसा की है। इससे आगे के वर्षों में वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि में कटौती संभव है। गांवों में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर करने के लिए टैक्स लगेगा। स्ट्रीट लाइट और पेयजल आपूर्ति पर भी कर का प्रावधान होगा। नई व्यवस्था में हर घर नल का जल आपूर्ति के लिए अनिवार्य रूप से शुल्क वसूलने का प्रावधान किया जा रहा है। आवासीय भवनों पर व्यावसायिक भवनों की तुलना में कम टैक्स लगेगा। व्यावसायिक भवनों का टैक्स आकार बाजार और व्यावसाय के हिसाब से तय होगा। मुख्य सड़क और गली स्थित भवनों के लिए भी कर में अंतर हो सकता है। ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले बाजार क्षेत्र में भी आवासीय भवनों पर कर सुदूर गांवों के घरों की तुलना में अधिक कर लगेगा। भवनों के व्यावसायिक उपयोग पर अधिक कर देना होगा। बिहार में सरकार ग्रामीण इलाकों में शहरों जैसी सुविधाएं बहाल करने के लिए काम कर रही हैं। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए सरकार समय समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।पंचायतों को और समृद्ध बनाने के लिए आय के श्रोतों की तलाश की जा रही है। पंचायतों में अपने संसाधन और सैरात विकसित किए जा रहे हैं जिनसे राजस्व की प्राप्ति हो। गांवों विकास कार्यों को आगे बढ़ाने और नागरिकों को जरूरी सुविधाएं सुचारू रखने के लिए नगर क्षेत्र की तर्ज पर गांवों में होल्डिंग टैक्स के अलावे पानी, बिजली, सफाई जैसी सुविधाओं पर टैक्स का संकलन किया जाए। इसी उद्येश्य से सरकार के स्तर पर यह निर्णय लिया गया है। बताया जा रहा है कि आगामी कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पास कराया जाएगा उसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

सरकारी कर्मचारियों की वेतन समस्याओं के समाधान के लिए झारखंड सरकार ने समिति बनाई

रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी वेतन विसंगतियों, एमएसीपी (MACP) योजना से जुड़े विवादों और विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस 7 सदस्यीय समिति का गठन राज्य के विभिन्न सेवा संघों (इम्पलॉइज यूनियंस) द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही मांगों के स्थायी समाधान के लिए किया गया है। यह समिति समय-समय पर राज्य सरकार को अपनी महत्वपूर्ण सिफारिशें और सुझाव सौंपेगी। राजस्व पर्षद के अध्यक्ष करेंगे अगुवाई, ये होंगे सदस्य वित्त विभाग द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सदस्य, राजस्व पर्षद करेंगे। निष्पक्ष और अनुभवी फैसले के लिए समिति में विभिन्न सरकारी सेवाओं के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।     अविनाश कुमार सिंह – भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS-सेवानिवृत्त)     ओम प्रकाश साह – राज्य प्रशासनिक सेवा (सेवानिवृत्त)     राज नारायण सिंह – राज्य पुलिस सेवा (सेवानिवृत्त)     जयंत कुमार मिश्रा – राज्य शिक्षा सेवा (सेवानिवृत्त)     उमेश मेहता – राज्य अभियंत्रण सेवा (सेवानिवृत्त) समिति के कार्य राज्य की विभिन्न सेवा संघों द्वारा उठाई गई वेतन विसंगतियों का निराकरण यह समिति करेगी। इसके साथ ही विभिन्न सेवाओं की सेवा शर्तों में एकरूपता लाने को लेकर प्रयास करेगी। समिति एमएसीपी से संबंधित मामलों का निराकरण करेगी। झारखंड में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियाें से जुड़े मामले लंबे समय से विवादों का केंद्र रहे हैं। इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय ने कई मामलों में कर्मचारियों को एसीपी का लाभ देने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में, पुलिस कर्मियों को एसीपी/एमएसीपी के लिए उच्च योग्यता की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। वहीं, राज्य के कर्मचारी संगठन लंबे समय से 7वें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने और ग्रेड-पे तय करने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) में तीन प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे लगभग तीन लाख कर्मचारी-पेंशनभोगी लाभान्वित हुए हैं।

‘शॉर्टकट से कमाई की तो बेऊर जेल भेजेंगे’, CM सम्राट चौधरी का अपराधियों को खुला संदेश

पटना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि बिहार में शॉर्टकट से अमीर बनने वालों के लिए बेऊर जेल में जगह तय है। जो भी गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करेगा या भ्रष्टाचार करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि नेता, मंत्री, विधायक या अधिकारी, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। वे गुरुवार को बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्य में पहली बार बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह का शुभारंभ किया। यह अभियान पूरे राज्य में एक सप्ताह तक चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के करीब 80 वर्ष बाद पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जन-जन तक जागरूकता पहुंचाने का व्यापक अभियान शुरू किया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पारदर्शी एवं जवाबदेह शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए बिहार सरकार भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान चला रही है। ट्रिपल-टी बनेगा सुशासन का आधार मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट (Tripple-T) के सिद्धांत पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। उन्होंने सतर्कता विभाग के कार्यों की सराहना की। कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने की आवश्यकता है। राज्य की एजेंसियों को होना होगा और प्रभावी उन्होंने कहा कि बिहार में विजिलेंस, स्पेशल यूनिट और आर्थिक अपराध इकाई जैसी सक्षम एजेंसियां हैं। इन एजेंसियों को इतना प्रभावी बनना होगा कि बाहरी एजेंसियों के हस्तक्षेप की जरूरत ही न पड़े। जहां भी भ्रष्टाचार की शिकायत मिले, वहां बिना किसी दबाव के कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 30 दिन में होगा शिकायतों का निपटारा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक जवाबदेही तय की गई है। किसी भी शिकायत के निपटारे के लिए 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई अधिकारी गलत आदेश देता है तो उसकी शिकायत उनके वरिष्ठ से की जा सकती है, हरहाल में तय अवधि में उसका निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्लॉक कार्यालयों और थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। संबंधित वरीय अधिकारियों को इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को समय पर न्याय मिल सके।

हर बुधवार थानों में जन सुनवाई, रांची में शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था

रांची राजधानी रांची में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से बुधवार को जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलेभर के विभिन्न थानों में कुल 240 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 134 मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया, जबकि शेष मामलों में जांच शुरू कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में फरियादी अपनी शिकायतें लेकर संबंधित थानों पहुंचे। कई मामलों का तत्काल समाधान किया गया, जबकि जटिल मामलों में पुलिस अधिकारियों ने जांच का आश्वासन देते हुए आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी। चुटिया, नगड़ी, पुंदाग, बुढ़मू, डोरंडा, लालपुर, सुखदेवनगर, डेली मार्केट सहित जिले के सभी थाना और ओपी में आयोजित इस कार्यक्रम में थाना प्रभारियों के साथ अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना और यथासंभव मौके पर ही उसका समाधान करने का प्रयास किया। प्राप्त शिकायतों में सबसे अधिक मामले जमीन विवाद और पारिवारिक विवाद से जुड़े रहे, जिन पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की। प्रत्येक बुधवार मिलेगा शिकायतों के समाधान का अवसर रांची पुलिस की इस पहल के तहत अब प्रत्येक बुधवार जिले के सभी थाना और ओपी में जन शिकायत समाधान कोषांग लगाया जाएगा। इसमें डीएसपी रैंक के अधिकारियों सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। पुलिस का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और आम जनता के बीच संवाद को मजबूत करना तथा लोगों को स्थानीय स्तर पर ही न्याय उपलब्ध कराना है। पहले छोटी-बड़ी शिकायतों के लिए लोगों को वरीय अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही थाना क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। जमीन विवाद से लेकर धोखाधड़ी तक की सुनवाई वरीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में जमीन विवाद, पारिवारिक विवाद, आपसी रंजिश, चोरी, डकैती, धोखाधड़ी समेत अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े मामलों की सुनवाई की जा रही है। अधिक से अधिक मामलों का मौके पर ही निष्पादन करने का प्रयास किया जाता है, जबकि गंभीर मामलों में तत्काल जांच शुरू कर दी जाती है। ग्रामीणों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ रांची पुलिस का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। अब उन्हें अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ेगा। इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा स्थानीय स्तर पर शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया और तेज होगी। पुलिस ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे प्रत्येक बुधवार अपने संबंधित थाना या ओपी में आयोजित जन शिकायत समाधान कार्यक्रम में पहुंचकर इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। प्रमुख थानों का प्रदर्शन     बरियातू थाना: 7 आवेदन प्राप्त, 5 का निष्पादन।     सदर थाना: 8 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     लालपुर थाना: 9 आवेदन प्राप्त, 7 का निष्पादन।     चुटिया थाना: 10 आवेदन प्राप्त, किसी भी मामले का मौके पर निष्पादन नहीं हो सका।     लोअर बाजार थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 2 का निष्पादन।     कोतवाली थाना: 11 आवेदन प्राप्त, 6 का निष्पादन।     धुर्वा थाना: 3 आवेदन प्राप्त, 1 का निष्पादन।     पंडरा ओपी: 8 आवेदन प्राप्त, 5 मामलों का निष्पादन।  

पटना की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव का ऐलान, तेज प्रताप और जनसुराज ने उतारे उम्मीदवार

पटना  पटना के बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर तारीख का ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने बताया है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। गुरुवार को चुनाव आयोग ने तीन राज्यों की तीन सीटों के उपचुनावों की घोषणा की। इनमें बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव 30 सितंबर 2025 को किए गए मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के आधार पर होगा। यह सीट भाजपा के नीतिन नवीन के इस्तीफे के कारण खाली हुई है। आयोग के अनुसार 6 जुलाई को उपचुनाव की अधिसूचना जारी होगी और नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। 13 जुलाई तक नामांकन पत्र दाखिल होगा। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। जबकि, 16 जुलाई तक नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम जारी कर दिया जाएगा। बांकीपुर विधानसभा सीट मुख्य तौर से बीजेपी और नितिन नवीन का अभेद किला माना जाता है। इस सीट से बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जीत का परचम लहराते आए हैं। नितिन नवीन अब राज्यसभा सांसद बन गए हैं लिहाजा उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी। नितिन नवीन के सीट छोड़ने के बाद इस सीट पर अब उपचुनाव होंगे। पटना की एक अहम विधानसभा सीट कही जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है। तेज प्रताप यादव ने वीणा मानवी को बनाया है उम्मीदवार बिहार में जनशक्ति जनता दल अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने पटना की सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपनी पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया है। जेजेडी पहली पार्टी है जिसने इस सीट पर कुछ दिनों पहले अपने उम्मीदवार का ऐलान किया था। पार्टी प्रत्याशी का ऐलान करते हुए तेजप्रताप यादव ने विश्वास जताया था कि उनकी नवगठित पार्टी कई दशकों से भाजपा का गढ़ रही इस सीट पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को कड़ी चुनौती देगी। तेज प्रताप यादव ने कहा था कि वीणा मानवी एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए लगातार काम करती रही हैं। वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ वैश्य समुदाय से भी आती हैं, जिस पर भाजपा हमेशा विशेष ध्यान देती रही है। जनसुराज भी मैदान में उतरने को तैयार इस सीट पर जनसुराज पार्टी भी ताल ठोकने के लिए बेकरार है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस सीट पर जनसुराज पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, अटकलें तो यह भी हैं कि खुद प्रशांत किशोर इस सीट से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा सीट को लेकर लगातार अपने बयानों से बीजेपी को घेर भी रहे हैं। एक बयान में प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया था कि इस सीट से बीजेपी को सिर्फ जनसुराज ही हरा सकती हैं। बता दें कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने लगातार पांचवीं बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटतम राजद प्रतिद्वंद्वी को लगभग 50 हजार मतों के बड़े अंतर से हराया था। अप्रैल में नितिन नवीन के सीट छोड़ने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी भाजपा से यह सीट छीनने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। किशोर ने इसे राज्य की सम्राट चौधरी सरकार पर जनमत संग्रह जैसा बताया था। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद संगठन को फिर से सक्रिय करने में जुटे किशोर ने यह भी कहा था कि यदि पार्टी के भीतर सहमति बनी तो वह स्वयं भी इस सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। जब तेज प्रताप यादव से पूछा गया था कि क्या वह प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी के लिए चुनौती मानते हैं, तो उन्होंने कहा था कि हर किसी का स्वागत है। सभी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। हम किसी को रोक नहीं रहे हैं।