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सिवान में बाढ़ से बेहाल दियारा क्षेत्र, स्कूल चारों तरफ से पानी से घिरा

रघुनाथपुर (सिवान) सरयू नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे प्रखंड का दियारा क्षेत्र बेहाल हो गया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है। इससे लोगों का जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही आवागमन और दैनिक कार्य भी बाधित हो रहे हैं। बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों की झोपड़ियों को भी चारों ओर से घेर लिया है।प्रखंड के गभीरार पंचायत के बिन टोला गांव स्थित नया प्राथमिक विद्यालय भी चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। बाढ़ से सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को विद्यालय परिसर के आसपास पानी जमा होने से बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीण प्रीतम महतो ने बताया कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कौसड़ निवासी अनिल यादव ने बताया कि बाढ़ से सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को हो रही है। पशुओं के लिए समय पर चारा नहीं मिल पा रहा है। चारे के अभाव में पशुओं की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पशुपालकों को जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी के बीच से चारा काटकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने और प्रभावित गांवों में आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है।

मानसून में बारिश का असमान वितरण, खेती पर असर; बिहार के 14 जिलों में बाढ़ का संकट

 पटना  मानसून की विदाई का समय करीब आ गया है, लेकिन बिहार में अबकी बार बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है। स्थिति यह है कि मानसून सीजन समाप्त होने में कुछ ही सप्ताह शेष हैं, इसके बावजूद राज्य के किसी भी जिले में सामान्य के मुकाबले 60 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हो सकी है। कई इलाकों में कम बारिश के कारण खेती प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर नदियों में नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आए पानी के कारण 14 जिलों में बाढ़ की विकट स्थिति बनी हुई है। यानी बारिश की कमी और बाढ़, दोनों तस्वीरें एक साथ देखने को मिल रही है। ऐसे तमाम झंझावात के बीच किसानों ने कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 99 प्रतिशत धान की रोपनी कर दी। महत्वपूर्ण यह है कि 26 जिलों में सौ प्रतिशत या उससे अधिक रोपनी हुई है। पांच जिलों में किसानों ने सौ प्रतिशत से अधिक धान लगाया है। ऐसे जिलों में जहानाबाद, गोपालगंज, मूंगेर, शेखपुरा एवं किशनगंज जिले हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून में बिहार में बारिश का वितरण लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा। कई दौर में अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसका क्षेत्रवार फैलाव समान नहीं रहा। कुछ जिलों में एक-दो दिनों में भारी बारिश हुई, जबकि लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से कुल मौसमी आंकड़ा सामान्य से नीचे बना रहा। किसानों के लिए बारिश का असमान वितरण चिंता मौसम की इस असमानता का सीधा असर खरीफ (शारदीय) फसलों पर पड़ा है। जिन क्षेत्रों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां धान समेत अन्य फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। वहीं, बाद में बाढ़ ने कई इलाकों में खेतों में पानी जमा कर दिया। इससे फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है। सितंबर की बारिश पर टिकी उम्मीद मानसून की विदाई से पहले सितंबर की बारिश किसानों और जलस्रोतों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मौसम विभाग ने बिहार समेत कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश जताई है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश राज्य के मौसमी आंकड़े को कुछ सुधार सकती है, लेकिन मानसून के अंतिम चरण तक भी यदि व्यापक बारिश नहीं हुई तो इस साल का मानसून बिहार के लिए कम बारिश, असमान वितरण और बाढ़ की दोहरी मार के रूप में दर्ज हो सकता है।

102-108 एंबुलेंस होंगी एकीकृत, मरीज की लोकेशन और हालत अस्पताल को मिलेगी तुरंत

पटना रेफरल व्यवस्था को सॉफ्टवेयर आधारित बनाया जाएगा, ताकि वास्तविक निगरानी हो सके। इसके अलावा 102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा। इमरजेंसी रेफरल के मामलों में एंबुलेंस में ही मरीज की स्थिति का आकलन कर डैशबोर्ड के माध्यम से कंट्रोल सेंटर को सूचित किया जाएगा। इमरजेंसी नेटवर्क के माध्यम से 102 एवं 108 सेवाओं को अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। एंबुलेंस में उपलब्ध कियोस्क से सरकारी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता की रियल टाइम जानकारी तथा मरीज की वर्तमान लोकेशन संबंधित अस्पताल को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एम्स, आइजीएआइएमएस, पीएमसीएच, एनएमसीएच को पायलट प्रोजेक्ट में सम्मिलित किया जाएगा। ये सभी निर्देश स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने दिए, जो गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के सभागार में हुई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। क्यूआर कोड आधारित बेड मैनेजमेंट बैठक में रेफरल व्यवस्था, स्मार्ट एंबुलेंस, टेली-मेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं कार्यक्षमता बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में कमांड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने, क्यूआर कोड आधारित बेड मैनेजमेंट एवं बेड की रियल टाइम एंट्री सुनिश्चित की जाए मरीजों के खान-पान से संबंधित जानकारी एएनएम, आशा एवं जीविका दीदी से मिलेगी। आयुष चिकित्सकों द्वारा प्रभावी दवाओं की जानकारी भी संकलित की जाएगी। टेली-मेडिसिन सेवा को सुदृढ़ करने के लिए 104 सेवा को ई-संजीवनी से जोड़ने की संभावना देखी जाएगी। मंत्री ने एआई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं कार्यक्षमता बढ़ाने तथा मरीजों के डेटा के प्रभावी उपयोग का निर्देश दिया। बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, बीएमएसआइसीएल के एमडी सुब्रत सेन आदि उपस्थित रहे।

10 साल से सेवा दे रहे कर्मचारियों के हक में हाई कोर्ट का फैसला, आउटसोर्सिंग से मिली राहत

रांची  सदर अस्पताल, लोहरदगा में पिछले करीब दस वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे एम्बुलेंस चालकों एवं नाइट वॉचमैन को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश संबंधित प्राधिकार को दिया है। न्यायालय ने इसके लिए 12 सप्ताह की समय-सीमा निर्धारित की है। याचिकाकर्ता रफीक अंसारी एवं अन्य की ओर से झारखंड हाई कोर्ट में अधिवक्ता चंचल जैन, अधिवक्ता अभिजीत इंद्र गुरु एवं अधिवक्ता अभिषेक कुमार ने पक्ष रखा। यह मामला सदर अस्पताल, लोहरदगा में लंबे समय से कार्यरत एम्बुलेंस चालकों एवं नाइट वॉचमैन की सेवा से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे अस्पताल में करीब एक दशक से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें उनके वर्तमान कार्य से हटाकर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से सेवा लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्हें आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा था। इस कार्रवाई के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में मुख्य रूप से यह आग्रह किया गया था कि लंबे समय से अस्पताल में निरंतर सेवा दे रहे याचिकाकर्ताओं की सेवा अवधि एवं उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को ध्यान में रखते हुए उनके नियमितीकरण पर विचार किया जाए तथा उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधीन कार्य करने के लिए बाध्य न किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए संबंधित विभाग/प्राधिकार को याचिकाकर्ताओं को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कार्य करने के लिए बाध्य नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनी गईं। सुनवाई पूरी होने के पश्चात पीठ ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण के संबंध में आदेश पारित किया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकार को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश से सदर अस्पताल, लोहरदगा में लंबे समय से कार्यरत इन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। करीब दस वर्षों से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर पारित यह आदेश उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लालू यादव की बढ़ी मुश्किलें! IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने 8 अन्य आरोपियों के साथ तय किए आरोप

नई दिल्ली/पटना  IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू परिवार के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है. जबकि 7 आरोपियों को आरोपों से बरी किया गया है. मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2026 को होगी. लेकिन आखिर यह मामला है क्या? इसकी शुरुआत कब हुई? रेलवे के होटलों से लेकर पटना की जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग तक पूरा मामला कैसे पहुंचा? और अब लालू परिवार के सामने आगे क्या कानूनी चुनौती है? आइए हर सवाल का जवाब समझते हैं।  क्या है IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग घटना, कैसे बढ़ेगी लालू परिवार की मुश्किलें जानें क्या है IRCTC होटल मामला? यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी के BNR होटलों के संचालन के ठेके से जुड़ा है. CBI का आरोप है कि इन दोनों होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका निजी कंपनी सुजाता होटल्स को देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं की गईं. एजेंसी के अनुसार, इस कथित लाभ के बदले पटना में जमीन का लेन-देन हुआ।  जमीन का क्या कनेक्शन है? जांच एजेंसियों के मुताबिक होटल टेंडर और पटना की जमीन के बीच कथित लेन-देन इस केस का सबसे अहम हिस्सा है. CBI ने आरोप लगाया कि पटना की बेशकीमती जमीन पहले एक कंपनी के जरिए खरीदी गई. बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा. एजेंसी ने जमीन की कीमत और जिस कीमत पर सौदा हुआ. उसमें बड़े अंतर का भी आरोप लगाया है. यही कथित लेन-देन बाद में ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बना।  मामला कब शुरू हुआ? इस मामले की जड़ें 2004-05 के दौर में हैं. उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। मार्च 2004 में रेलवे के दो होटलों के प्रबंधन से संबंधित प्रक्रिया IRCTC को सौंपी गई थी. मई 2004 में लालू रेल मंत्री बने। इसके बाद होटल संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी. CBI के मुताबिक 2005-06 में टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया।  CBI ने केस कब दर्ज किया? कई वर्षों बाद यह मामला 2017 में फिर सामने आया. जुलाई 2017 में CBI ने FIR दर्ज की. एजेंसी ने लालू यादव और अन्य पर पद के कथित दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और होटल टेंडर में अनियमितता के आरोप लगाए. इसके बाद CBI ने जांच आगे बढ़ाई और अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की. इसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।  ED की एंट्री कब हुई? CBI की FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की. अगस्त 2018 में ED ने PMLA के तहत लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. यहीं से यह मामला सिर्फ कथित भ्रष्टाचार या टेंडर विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग केस के रूप में भी अदालत पहुंच गया।  आज कोर्ट ने क्या फैसला दिया? 10 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया. वहीं 7 आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया गया. कोर्ट ने प्रथमदृष्टया लालू यादव द्वारा रेल मंत्री के पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को मुकदमा आगे बढ़ाने लायक माना. आरोप तय किए गए आरोपियों में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, पीसी गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर शामिल हैं।  क्या लालू यादव और तेजस्वी दोषी साबित हो गए? नहीं…यह सबसे जरूरी कानूनी बात है. कोर्ट द्वारा आरोप तय करना दोषी करार देना नहीं होता. इसका मतलब है कि अदालत ने प्रथमदृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार माना है. अब ट्रायल में अभियोजन पक्ष को अपने आरोप सबूतों के जरिए साबित करने होंगे. बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा. इसलिए फिलहाल लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी या अन्य आरोपियों को दोषी कहना सही नहीं होगा।  अब लालू परिवार की मुश्किलें कैसे बढ़ सकती हैं? आरोप तय होने के बाद मामला ट्रायल की ओर बढ़ेगा. अभियोजन पक्ष सबूत और गवाह पेश करेगा.इसके बाद बचाव पक्ष उन सबूतों को चुनौती देगा. लालू परिवार के लिए चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में कथित होटल टेंडर, जमीन के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को अदालत में साबित करने की कोशिश होगी. हालांकि इसका अंतिम परिणाम ट्रायल के बाद ही सामने आएगा।  क्या यह Land-for-Jobs केस ही है? नहीं…दोनों मामले अलग हैं. IRCTC मामला रांची और पुरी के रेलवे होटलों के कथित टेंडर में अनियमितता और उससे जुड़े जमीन के लेन-देन पर केंद्रित है. वहीं Land-for-Jobs केस में रेलवे में नौकरी देने के बदले कथित तौर पर जमीन लेने के आरोप हैं. दोनों मामलों में लालू परिवार के सदस्यों के नाम सामने आने के कारण अक्सर इन्हें एक साथ देखा जाता है, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों अलग मामले हैं।  अब अगली सुनवाई कब होगी? राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है. अब अदालत में मामले की ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।   

बिहटा एयरपोर्ट की उड़ानों पर संकट, 460 करोड़ का टर्मिनल सिर्फ 2% बना

पटना  बिहार की राजधानी पटना से सटे बिहटा एयरपोर्ट से नागरिक विमानों की उड़ान की महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटक गई है। दरअसल, बिहटा में एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन के निर्माण कार्यों को पूरा करने का जिम्मा जिस कंपनी को दिया गया था, उसने पूरी तरह से काम बंद कर दिया है। लगभग 460 करोड़ की लागत से टर्मिनल भवन के निर्माण का जिम्मा पिछले वर्ष अप्रैल में रूस की कंपनी ज्वाइंट स्टॉक कंपनी इंडस्ट्रियल एसोशिएशन बोजरोजदिनी को मिला था। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार अब तक टर्मिनल भवन का मात्र दो प्रतिशत काम ही हो सका है। मई से कंपनी ने मजदूरों और मशीनों को हटाना शुरू कर दिया था। पिछले एक माह से टर्मिनल भवन का काम पूरी तरह से ठप है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने एयरपोर्ट अथॉरिटी और इंडिया के केंद्रीय कार्यालय को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। स्थानीय पदाधिकारी अब निर्माण परियोजना के संबंध में केंद्रीय निर्देशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बिहटा एयरपोर्ट के निर्माण का काम लेने वाले रूस की कंपनी ने तय लागत से 31 प्रतिशत कम की राशि पर निर्माण का जिम्मा दिया था। पूर्व से ही लेटलतीफ चल रही इस परियोजना को पूरा करने के लिए समयबद्ध तरीके से काम करने का निर्देश एएआई ने दिया था। आरंभ से ही कंपनी ने निर्माण कार्यों को लेकर धीमी गति रही। एक साल बीतने के बाद संबंधित एजेंसी ने टर्मिनल भवन का निर्माण कार्य पूरी तरह बंद कर दिया। फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस परियोजना को 14 मार्च 2027 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। आईआईटी, एनआईटी सहित कई संस्थान हैं एयरपोर्ट के निर्माण की प्रतीक्षा स्थानीय लोगों के लिए दूसरे राज्यों के लोग भी कर रहे हैं। यहां आईआईटी, एनआईटी, एफडीडीआई, नाइलिट जैसे कई केंद्रीय शिक्षण संस्थान हैं जहां दूसरे राज्यों के छात्र पढ़ते हैं। पटना से बिहटा की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए दानापुर स्टेशन से बिहटा तक एलिवेटेड रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का निर्माण बंद होने से परियोजना पूरा होने का इंतजार कर रहे लोगों को झटका लगा है। मामले में फिलहाल केंद्रीय मुख्यालय के निर्देशों की प्रतीक्षा है। 1413 करोड़ से अधिक की है परियोजना परियोजना पर 1400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जानी है। दो मंजिला टर्मिनल भवन को 50 लाख सालाना यात्रियों की क्षमता का बनाया जाना तय हुआ है। दस विमानों के लिए पार्किंग, एयरोब्रिज, आवासीय परिसर, प्रशासनिक भवन, मल्टीलेबल कार पार्किंग व अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जानी है। हालांकि परिसर में एप्रॉन का निर्माण कार्य जारी है। इसे 50 करोड़ से 15 महीने में पूरा करना था।

पटना में 2-3 दिन बारिश के आसार, बिहार के कई जिलों में वज्रपात और तेज हवा की चेतावनी

 पटना राजधानी पटना और इसके आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पटना केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक पटना सहित दक्षिण-मध्य बिहार के विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है। मौसम केंद्र के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान पटना में बारिश दर्ज नहीं की गई है और मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा। मौसम विभाग के अनुसार आज 10 सितंबर को गया, नवादा, रोहतास और सीवान में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कल कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार 11 सितंबर को बिहार के उत्तर-पूर्वी भागों में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में हल्की से भारी बारिश हो सकती है। हालांकि, हवा में नमी अधिक बनी हुई है, जहां सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता 89 प्रतिशत तक दर्ज की गई। तापमान की बात करें तो पटना का अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। आने वाले दो-तीन दिनों तक अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने के आसार हैं, जिससे तापमान में बहुत बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने की अपील मौसम विभाग ने सतर्क करते हुए अलर्ट जारी किया है कि बारिश के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और मेघ गर्जन के साथ वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की आशंका है। खराब मौसम को देखते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

शराबबंदी पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, बोले- बिहार को सालाना ₹20 हजार करोड़ का नुकसान; फिर भी जारी रहेगी नीति

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी लागू रहेगी। इससे कोई समझौता नहीं होगा। भले ही इससे बिहार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में राज्य में शराबबंदी, बाढ़, रोजगार, पलायन से लेकर कई राजनीतिक मु्द्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के आग्रह पर राज्य में शराबबंदी लागू की थी। इसका सकारात्मक असर हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक आदि के जरिए बाढ़ आती है। हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बनी है। अभी जो बाढ़ की स्थिति बनी है, उसके लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया। सामुदायिक रसोई चलाकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2030 के पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। 2030 तक पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की बेहतर व्यवस्था हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ 30 सालों से काम कर रहा हूं। वह मेरे पितातुल्य हैं। एक सवाल पर उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का नेता कौन होगा, यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करता है। यह पार्टी का आंतरिक मामला है। नीतीश कुमार को बताया पिता तुल्य मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह पिछले 30 सालों से नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया।  भाजपा के अगले नेता को लेकर पूछे गए सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि यह फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है. उन्होंने इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया।  2030 तक पलायन रोकने का दावा मुख्यमंत्री ने बिहार से पलायन को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2030 से पहले राज्य से पलायन रोक दिया जाएगा. उनके मुताबिक, तब तक पढ़ाई से लेकर रोजगार तक बेहतर व्यवस्था तैयार हो जाएगी. सरकार का जोर राज्य में ही युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।  बाढ़ को लेकर हाईलेवल डैम की तैयारी बाढ़ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण बिहार में बाढ़ की समस्या आती है. हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बन चुकी है।  फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. उनके लिए सामुदायिक रसोई भी चलाई जा रही है।  फरक्का बराज को लेकर भी उठाया सवाल सम्राट चौधरी ने फरक्का बराज को भी बिहार के लिए नुकसानदायक बताया. उन्होंने कहा कि इसके कारण गंगा नदी में गाद जमा हो रही है. इससे नदी की चौड़ाई अलग-अलग जगहों पर बढ़ गई है।  मुख्यमंत्री के अनुसार, बक्सर में गंगा की चौड़ाई करीब 4 किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी तक हो जाती है।  उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर बिहार की मांग स्पष्ट है. राज्य को पीने, खेती और उद्योग के लिए जरूरत के अनुसार किसी भी समय पानी लेने का अधिकार मिलना चाहिए. इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत की गई है।  फरक्का बराज से बिहार को नुकसान मुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का बराज से बिहार को नुकसान है। इससे गंगा नदी में गाद जमा हो गयी है। इस कारण बक्सर के पास गंगा की चौड़ाई चार किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि फरक्का जल संधि पर बिहार की ओर से यह आग्रह है कि हमें पीने, खेती करने और उद्योग के लिए किसी भी समय पानी लेने का अधिकार हो। इसके लिए हमने केंद्र सरकार से बात की है।

बार में हथियार लेकर घुसे तो ₹1 लाख जुर्माना! नई नियमावली पर अब तक नहीं हुआ फैसला

 रांची  राज्य में बार में मारपीट, हथियार लहराने, गोली चलाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए, कार्रवाई करने के लिए जो नियमावली बनी, उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका। करीब सात महीने पहले सात फरवरी को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने बार संचालन के लिए ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' का ड्राफ्ट स्टेक होल्डर्स व आम लोगों के लिए जारी किया था। उक्त नियमावली पर सुझाव व आपत्तियां मंगाई गई थी, ताकि उसमें सुधार करते हुए संशोधित नियमावली को धरातल पर उतारा जा सके। सात महीने पूरे हो गए, लेकिन नियमावली धरातल पर नहीं उतारी जा सकी। अब भी राज्य में पुरानी नियमावली के तहत ही बार का संचालन हो रहा है। जो नियमावली बनी थी, वह फाइलों में ही रह गई। प्रस्तावित नियमावली में यह उल्लेख है कि होटल, रेस्टोरेंट, बार परिसर में अस्त्र-शस्त्र के साथ प्रवेश करने पर हथियार धारण करने वाले व्यक्ति को एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। स्टाक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं करने पर दस हजार, उसे अद्यतन नहीं भरने पर दस हजार रुपये के जुर्माने का प्रविधान है। बार में जाने वाले ग्राहकों की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखकर नियमावली का प्रारूप बनाया गया था। नियम तोड़ने वाले बार संचालकों के लिए जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। माप से कम शराब परोसने पर, गंदा परिसर रखने पर, निर्धारित आवाज से अधिक आवाज में म्यूजिक बजाने पर, नो स्मोकिंग जोन में स्मोकिंग करने पर भी जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है। बार व रेस्तरा में शराब परोसने के लिए नियम व शर्तों को प्रभावी बनाया जाना था। इसी उद्देश्य से यह नियमावली प्रस्तावित थी, लेकिन अब तक उस नियमावली पर विचार नहीं किया जा सका। तो पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसी जाती राज्य में ''झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली 2026'' लागू होती तो विभिन्न क्षेत्रों व होटलों में नियम के अनुसार शराब परोसने के समय निर्धारित होते। जैसे प्रस्तावित नियमावली में पांच सितारा होटलों में सुबह के चार बजे तक शराब परोसे जाने का प्रविधान प्रस्तावित है। वर्तमान में होटल हो या रेस्टोरेंट, हर तरह के बार में रात में 12 बजे तक ही शराब परोसने का प्रविधान किया गया है। नई नियमावली में सुरक्षा के जो प्रविधान प्रस्तावित हैं, वह पुरानी नियमावली में नहीं है। सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर ही नई नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, स्टेक होल्डर्स टैक्स के बिंदु पर आपत्ति जता चुके हैं, जिसपर विभाग को समीक्षा करना था। समीक्षा के बाद ही नियमावली पर आगे कोई निर्णय लिया जाना था। अब तक सभी बिंदुओं पर मामला लंबित है।  

धनबाद में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी अपडेट, 2,939 मतदान केंद्रों में 27 जर्जर

धनबाद झारखंड में अप्रैल-मई 2027 में त्रिस्तरीय पंचायत संभावित है। इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां चल रही हैं। चुनाव और पंचायतों से संबंधित विभिन्न रिपोर्ट समय-समय पर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जा रही है। इस कड़ी में धनबाद जिला की पंचायतों, मतदाताओं और मतदान केंद्रों से संबंधित रिपोर्ट व सूची प्रकाशित की गई है। जिसके अनुसार जिले के नौ प्रखंडों के 242 पंचायतों में 10,61,604 मतदाता मतदान करेंगे। जबकि 2939 मतदान केंद्रों में से 27 मतदान केंद्र जर्जर हैं या फिर इन्हें स्थानांतरित करने अथवा इनके मरम्मति की आवश्यकता है। जर्जर मतदान केंद्रों की स्थानांतरित करने की जरूरत जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित इन मतदान केंद्रों में से 27 की हालत खराब है। ये अत्यंत जर्जर हो चुके हैं या फिर इनकी मरम्मति की जरूरत है। ऐसे मतदान केंद्रों में बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा पंचायत का बीसीसीएल बिजली घर गोल्डेन पहाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। जिसे करमाटांड शिफ्ट किया गया है। जबकि आंगनबाड़ी केंद्र ब्राम्हण टोला का मतदान केंद्र के निजी भवन में संचालित हैं। इसे करमाटांड शिफ्ट करने का प्रस्ताव है। पूर्वी टुंडी के चार केंद्रों जर्जर पूर्वी टुंडी प्रखंड के महोलीडीह पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र का मतदान भवन ध्वस्त हो चुका है। जबकि सामुदायिक भवन पंडुआ पूरी तरह से जर्जर है। रूपन में पुराना पंचायत भवन फुलपहाड़ी की हालत खस्ता है। वहीं लटानी और पांड्राबेजरा पंचायत के मतदान केंद्र प्राथमिक विद्यालय शंकरडीह में था। इस स्कूल को उत्क्रमित विद्यालय रघुनाथपुर में मर्ज कर दिया गया है। इसी प्रकार से प्राथमिक विद्यालय डुमरजोर को मध्य विद्यालय पोलकेरा में मिला दिया गया है। इनके जगह पर नए भवन को चिन्हित करना होगा। पूर्वी टुंडी की तरह ही कलियासोल प्रखंड का जमाकुदर, ऐलाकेंद्र, सालुकचपड़ा और कलियासोल पंचायत में सामुदायिक भवन फतेहपुर, मध्य विद्यालय कुशियारा, चासपाड़ा पुराना पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय कालुबथान पूर्व और पश्चिम अत्यंत जर्जर हैं। एग्यारकुंड में 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब एग्यारकुंड प्रखंड में सबसे अधिक 14 मतदान केंद्रों की हालत खराब है। चांच में एनपीएस डुमरीजोड भूधंसान की चपेट में आ चुका है। प्राथमिक विद्यालय हरिजन स्कूल बंद हो गया है। इन दोनों को पीएस बुटबाड़ी और सामुदायिक भवन पंचायत उपसचिवालय में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं जोगरात पंचायत में पीएस जूनकूदर का कमरा नंबर एक व दो की स्थिति खराब है। गोपीनाथपुर में सामुदायिक भवन आदिवासी टोला, एग्यारकुंड उत्तर में जामबानी लोहिया भवन, शिवलीबाड़ी दक्षिण में सामुदायिक भवन गड़ियाखान और गोपालपुर में पुराना पंचायत भवन व सामुदायिक भवन राजापुर के मरम्मत की जरूरत बताई गई है। वहीं कालीपहाड़ी दक्षिण पंचायत में प्राथमिक विद्यालय डीवीसी रांची कालोनी का मतदान केंद्र संख्या 46 से 51 तक जर्जर है। भौगोलिक रूप से नहीं बदलेंगी पंचायतें, दावा आपत्ति की मांग अब यह भी साफ हो गया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में इनके भौगोलिक स्वरूप में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं होगा। निर्वाचन आयोग से मांगी गई जानकारी पर धनबाद उपायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजी है। उसमें बताया गया है कि पंचायत की सीमाओं को ही आधार बनाया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट और मतदान केंद्रों को लेकर सूची भी जारी कर दिया गया है। जिस पर दावा आपत्ति की मांग किया गया है। बाघमारा में अधिक पंचायतें जिले के बाघमारा प्रखंड में सबसे अधिक 62 पंचायतें हैं और यहां मतदाताओं की भी संख्या सर्वाधिक 2,45,812 है। यहां सबसे अधिक 668 मतदान केंद्र भी हैं। जबकि सबसे कम केवल नौ पंचायतों वाला प्रखंड पूर्वी टुंडी है। यहां कुल मतदाता 39,229 हैं और मतदान केंद्र 112 हैं। प्रखंड – पंचायतें – मतदान केंद्र – कुल मतदाता बाघमारा – 62 – 668 – 2,45,812 बलियापुर – 23 – 283 – 99,844 धनबाद – 12 – 118 – 44,523 एग्यारकुंड – 23 – 231 – 90,735 गोविंदपुर – 39 – 479 – 1,77,966 कलियासोल – 20 – 226 – 79,115 निरसा – 27 – 293 – 1,08,611 पूर्वी टुंडी – 09 – 112 – 39,229 तोपचांची – 27 – 326 – 1,06,564 टुंडी – 17 – 203 – 69,205