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झारखंड में माओवाद पर शिकंजे के बीच 9 वांछित माओवादी फरार, बंगाल समेत दूसरे राज्यों में छिपने की आशंका

 रांची  झारखंड के जंगलों से नौ इनामी वांछित माओवादी भागे फिर रहे हैं। झारखंड पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। झारखंड से माओवाद का समापन लगभग हो चुका है, लेकिन ये वांछित माओवादी अब तक फरार हैं। कइयों के दूसरे राज्यों में भागने की भी सूचना है, जिसका सत्यापन चल रहा है। हाल के कुछ महीने में आधा दर्जन से अधिक इनामी माओवादी पड़ोसी राज्य बंगाल में भाग गए थे। वहां जाकर इन माओवादियों में कइयों ने आत्मसमर्पण किया तो कुछ गिरफ्तार भी किए गए हैं। अभी दो दिन पहले ही सात लाख के इनामी माओवादी दंपत्ति ने भी कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। कुछ माओवादी ओडिशा व छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ये हैं नौ इनामी माओवादी, जिनकी झारखंड पुलिस को है तलाश नितेश यादव उर्फ इरफान उर्फ नंदू उर्फ किरानी (15 लाख का इनामी, रीजनल कमेटी सदस्य, भाकपा माओवादी), आरिफ उर्फ शशिकांत उर्फ सुदेश उर्फ सुरेश (जोनल कमांडर, दस लाख का इनामी, टीएसपीसी), मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू उर्फ दिनेश गंझू (जोनल कमांडर, दस लाख का इनामी), गोदराय यादव उर्फ संजय यादव (जोनल कमांडर, दस लाख का इनामी)। इनके अलावा पंकज कोरवा (सब जोनल कमांडर, पांच लाख का इनामी), राजू भुइया (सब जोनल कमांडर, पांच लाख का इनामी), बलराम लोहरा उर्फ जटु उर्फ मजनू (एरिया कमांडर, पीएलएफआइ, दो लाख का इनामी), सामुएल बुढ़ उर्फ सामू (एलजीएस, पीएलएफआइ, एक लाख का इनामी) तथा सुदेश गंझू उर्फ गुरुदेव (टीएसपीसी, सदस्य, एक लाख का इनामी) भी फरार चल रहा।

मुजफ्फरपुर में युवती को अश्लील मैसेज भेजने वाला दारोगा सस्पेंड, विभागीय जांच के आदेश

पटना जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पटना पर अब विमानों के बोर्डिंग गेट और लगेज बेल्ट में अचानक बदलाव नहीं किया जा सकेगा। शीतकालीन समय-सारणी लागू होने के साथ ही एयरपोर्ट प्रशासन ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं। इनके अनुसार, विमानों की समय-सारणी के साथ ही संबंधित लगेज बेल्ट और बोर्डिंग गेट भी पहले से निर्धारित कर दिए गए हैं। यदि किसी कारणवश बोर्डिंग गेट बदलना पड़ता है, तो एयरलाइन को इसकी ठोस वजह भी बतानी होगी। दरअसल, अंतिम समय में बोर्डिंग गेट बदल दिए जाने से यात्रियों को एक गेट से दूसरे गेट तक भागदौड़ करनी पड़ती है। इससे खासकर बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी होती है। इसी को देखते हुए एयरपोर्ट प्रशासन ने यह कदम उठाया है। वहीं, एयरपोर्ट पर चल रहे निर्माण कार्यों से अगले आदेश तक बोर्डिंग गेट संख्या 12ए बंद रखने का निर्णय लिया गया है। पटना एयरपोर्ट से सर्दियों के शुरुआती दौर के लिए उड़ानों की नई समय-सारणी रविवार से प्रभावी हो जाएगी। इसके अनुसार, 30 नवंबर तक रोजाना 40 जोड़ी उड़ानों का संचालन होगा। इस दौरान छह नई उड़ान सेवाएं शुरू होंगी। इससे पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चंडीगढ़ के लिए हवाई कनेक्टिविटी बढ़ेगी। नई समय-सारणी में पटना से 14 शहरों के लिए हवाई संपर्क निर्धारित किया गया है। नई समय-सारणी के अनुसार, पटना एयरपोर्ट पर सुबह की पहली उड़ान दिल्ली से इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6ई-6245 होगी, जो सुबह 8 बजे पहुंचेगी। यह विमान सुबह 8:35 बजे पटना से रवाना होगा। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक दारोगा की करतूत ने वर्दी की साख पर दाग लगाने का काम किया है। प्यार में धोखा खाई जिस युवती ने थाने में शिकायत कराई थी उस युवती को दारोगा ही परेशान करने लगा। आरोप है कि दारोगा युवती को गंदे मैसेज भी भेजता था। मुजफ्फरपुर में एक दारोगा की गंदी हरकत उजागर हुई है। (सांकेतिक फोटो) मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। प्रेमी से धोखा खाई पीड़ित युवती को दारोगा की अश्लीलता का शिकार होना पड़ा। उसका केस देखने वाला दारोगा उसे रातों में कॉल परेशान करता था। युवती ने दारोगा की हरकत की शिकायत एसएसपी से की थी। एसडीपीओ नगर-2 से मामले की जांच कराने के बाद एसएसपी ने आरोपित अहियापुर थाना के दारोगा ललन कुमार को शनिवार की सुबह सस्पेंड कर दिया। उसके खिलाफ विभागीय प्रोसीडिंग चलाने का भी एसएसपी ने आदेश दिया है। बताया गया कि युवती ने अहियापुर इलाके के प्रेमी नीरज नवाब पर उसे धोखा देने, अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दे ब्लैकमेल करते हुए आठ लाख रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए थाने में केस दर्ज कराया था। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि अहियापुर थाना के एसआई ललन कुमार को युवती के केस का आईओ बनाया गया था। आरोप है कि दारोगा पीड़िता से फोन पर अनुचित, अमर्यादित व आपत्तिजनक बातें करने लगा। पीड़िता ने दारोगा के खिलाफ मानसिक रूप से परेशान करने की शिकायत की थी।

गेहूं और रबी मक्का की खेती करने वाले किसान ध्यान दें, बंपर पैदावार के लिए जान लें बुआई की सही तारीख

मुजफ्फरपुर  बदलते जलवायु और मौसम के मिजाज के बीच खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया है। अनियमित वर्षा, बाढ़, सुखाड़ और तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण खेती के समक्ष कई तरह की नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन प्रतिकूल प्रभावों से फसलों को बचाने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि मौसम विभाग ने किसानों को खास सलाह दी है। विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर गेहूं और रबी मक्का की बुआई का कार्य पूरा कर लें। समय पर बोआई कृषि मौसम विभाग के नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि सामान्य तौर पर गेहूं की बुआई 15 नवंबर से 5 दिसंबर के बीच की जाती है। हालांकि बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों के लिए 15 नवंबर तक बुआई पूरी करना ज्यादा फायदेमंद होगा। समय पर बुआई करने से फसल में फूल आने और दाना पकने के समय अधिक तापमान का खतरा टल जाता है। टर्मिनल हीट स्ट्रेस देर से बुआई होने पर फसल को 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का सामना करना पड़ता है, जिससे पछिया हवा और गर्मी का बुरा असर पड़ता है। समय पर बुआई से फसल को अप्रैल महीने में होने वाली ओलावृष्टि के खतरे से भी बचाया जा सकता है। दरअसल, देर से तैयार होने वाली फसल की कटाई अप्रैल तक खिंच जाती है, जबकि अप्रैल में ओलावृष्टि की करीब 70 प्रतिशत घटनाएं होती हैं। रबी मक्का की खेती डॉ. सत्तार ने किसानों को अक्टूबर के महीने में रबी मक्का की बुआई से बचने की खास सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बेहतर और बंपर उपज के लिए 10 नवंबर से 30 नवंबर के बीच मक्का की बुआई करना सबसे उत्तम माना गया है। इस निश्चित अवधि में फसल के विकास के लिए पूरी तरह अनुकूल मौसम मिलने की संभावना रहती है। पर्यावरण हितैषी खेती किसानों को अच्छी पैदावार के लिए पर्यावरण हितैषी कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने फसल चक्र का सख्ती से पालन करने और रासायनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग करने की बात कही है। बुआई की तारीख में थोड़ा बदलाव करके किसान मौसम के दुष्प्रभावों से अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।

रांची RIMS में सीनियर रेजिडेंट भर्ती को झटका, साक्षात्कार में नहीं पहुंचे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी

रांची राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए शुक्रवार को रिम्स में दो स्तरों पर नियुक्ति प्रक्रिया चली। एक ओर राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति के लिए वाक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया, वहीं रिम्स में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) पदों के लिए भी साक्षात्कार हुआ। हालांकि, एसआर के साक्षात्कार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के नहीं पहुंचने से रिक्त पदों को भरने की चुनौती बनी हुई है। इसके पीछे एक प्रमुख वजह पीजी के दौरान भरे जाने वाले बांड को बताया जा रहा है। बांड की शर्तों के कारण कई चिकित्सक दूसरे राज्यों में चले जाते हैं, जिससे राज्य में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या प्रभावित होती है। रिम्स में एसआर के लिए आयोजित साक्षात्कार में अभ्यर्थियों की कम उपस्थिति ने चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में डॉक्टरों की उपलब्धता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, शुक्रवार को एसआर के लिए निर्धारित कुल पदों और साक्षात्कार में पहुंचे अभ्यर्थियों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी है। सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच सरकारी मेडिकल कालेजों में सह प्राध्यापक के 65 पदों पर नियुक्ति के लिए शुक्रवार को वाक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया। इनमें नियमित श्रेणी के 53 और बैकलॉग के 12 पद शामिल हैं। इससे पहले 21 सितंबर को आयोजित साक्षात्कार में 65 पदों के विरुद्ध केवल 13 अभ्यर्थी पहुंचे थे। इनमें भी अधिकांश अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे। कई अभ्यर्थी सह प्राध्यापक के पद को सहायक प्राध्यापक समझकर पहुंच गए थे। इसके बाद विभाग ने पहले की प्रक्रिया रद कर नए सिरे से साक्षात्कार आयोजित करने का निर्णय लिया था। पांच मेडिकल कॉलेजों में होगी नियुक्ति नियुक्ति प्रक्रिया के तहत जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज, धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज और पलामू के मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में सह प्राध्यापकों की नियुक्ति की जाएगी। विभिन्न विभागों में रिक्तियों को भरने से मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई, मरीजों के उपचार और विशेषज्ञ सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। विभाग की ओर से नियमित पदों में मेडिसिन, रेडियोलॉजी, रेडियोथेरेपी, एनाटोमी, पैथोलॉजी, निश्चेतना, नेत्र रोग और अन्य विभाग शामिल किए गए हैं। बैकलॉग के पद माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, नेत्र रोग, पीएसएम, मनोरोग, दंत और निश्चेतना विभागों में हैं। बॉन्ड की शर्तों से प्रभावित हो रही उपलब्धता चिकित्सा शिक्षा से जुड़े लोगों के अनुसार, पीजी की पढ़ाई के दौरान बांड भरने वाले कई चिकित्सक बॉन्ड की शर्तों के कारण दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। इससे झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। एसआर स्तर पर पर्याप्त डॉक्टर नहीं रहने से विभागों में काम का दबाव बढ़ता है। मरीजों के उपचार, शैक्षणिक गतिविधियों और अस्पताल की नियमित सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि योग्य चिकित्सक राज्य में काम करने के लिए उपलब्ध रहें। मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया और बांड संबंधी नियमों को लेकर स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।

बिहार के इंजीनियर ने खोजा प्लास्टिक का देसी विकल्प, 50 पैसे में तैयार होता है उत्पाद

पटना प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या के बीच मुजफ्फरपुर के कुढ़नी प्रखंड के एक इंजीनियर ने पर्यावरण-अनुकूल विकल्प विकसित करने की पहल की है। छितरौली पंचायत के मुरादपुर निवासी इंजीनियर नाज ओजैर मक्के के बेकार समझे जाने वाले छिलके से कप, प्लेट, कटोरी, ग्लास, स्ट्रॉ और झोला जैसे उत्पाद बना रहे हैं। उनका यह नवाचार सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प के रूप में सामने आया है। वर्षों के शोध के बाद विकसित तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है। इसके जरिए उन्होंने एमएनओ स्वदेशी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से स्टार्टअप शुरू किया है। यह पहल कृषि अपशिष्ट के उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध करा रही है। पांच साल की रिसर्च के बाद मक्के के छिलके पर किया प्रयोग इंजीनियर नाज ओजैर के अनुसार, प्लास्टिक के बर्तनों से जुड़ी पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं ने उन्हें वैकल्पिक सामग्री पर शोध के लिए प्रेरित किया। उन्होंने करीब पांच वर्षों तक बांस, केला और पपीते के रेशों पर प्रयोग किए। इसके बाद मक्के के छिलके को आधार बनाकर काम शुरू किया। उन्होंने छिलके को निश्चित तापमान पर गर्म कर मनचाहा आकार देने की तकनीक विकसित की। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से तैयार बर्तन अपना आकार बनाए रखते हैं। 2019 में पेटेंट आवेदन, 2024 में मिली मंजूरी नाज ओजैर ने अपनी तकनीक के लिए एक मार्च 2019 को पेटेंट आवेदन किया था। इसके बाद 21 फरवरी 2024 को उन्हें पेटेंट प्रमाणपत्र मिला। पेटेंट मिलने के बाद उन्होंने 26 मई 2026 को अपना स्टार्टअप स्थापित किया और उत्पादन शुरू किया। उनका उद्देश्य कृषि अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना है। किसानों से खरीदते हैं मक्के का छिलका नाज ओजैर किसानों से मक्के का छिलका करीब एक से दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदते हैं। आमतौर पर बेकार समझे जाने वाले इस कृषि अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में बदलने से किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलता है। इससे खेतों से निकलने वाले अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल भी संभव हो सकता है। हालांकि, किसानों को होने वाला वास्तविक आर्थिक लाभ खरीदे जाने वाले छिलके की मात्रा और नियमित आपूर्ति पर निर्भर करेगा। 45 से 50 पैसे में तैयार होता है एक उत्पाद इंजीनियर नाज के अनुसार, एक उत्पाद बनाने में करीब 45 से 50 पैसे की लागत आती है, जबकि कटोरी जैसे उत्पाद की बिक्री लगभग दो रुपये प्रति पीस की दर से होती है। उनका दावा है कि मौजूदा समय में इस कारोबार से सालाना करीब पांच लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। उनकी छोटी फैक्ट्री में आठ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है। उत्पादन बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के और अवसर बनने की संभावना है। दस साल में 100 उत्पादों को बदलने का लक्ष्य नाज ओजैर का लक्ष्य अगले दस वर्षों में सिंगल यूज प्लास्टिक से बने कम से कम 100 तरह के उत्पादों के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प विकसित करना है। फिलहाल उनकी इकाई में कप, प्लेट, कटोरी और अन्य उपयोगी वस्तुओं पर काम हो रहा है। यदि इन उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत और बड़े स्तर पर उत्पादन की क्षमता बनी रहती है, तो बाजार में इनकी पहुंच बढ़ सकती है। प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इनकी उपयोगिता का आकलन टिकाऊपन, स्वच्छता और निपटान की प्रक्रिया के आधार पर भी करना जरूरी होगा। सरकारी मिशन से नवाचार को बढ़ावा ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मक्के के छिलके जैसे कृषि अपशिष्ट से पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाने की प्रक्रिया को लोगों तक पहुंचाने और स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देने की पहल भी की जा रही है। इससे कृषि अवशेषों के मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है।     ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल सराहनीय     ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के नवाचार बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मक्के के छिलके से पर्यावरण-अनुकूल बर्तन बनाना सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और कृषि अपशिष्ट से मूल्य संवर्धन करने वाली योजनाओं को बढ़ावा दे रही है। ऐसी तकनीकें सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। सरकार ऐसे उद्यमियों को हरसंभव मदद देने के लिए तत्पर है।     श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री  

बिहार के किसानों के लिए मौका! मशरूम हट बनाने पर मिलेगा 80% अनुदान, 26 अक्टूबर तक करें आवेदन

औरंगाबाद  कम जमीन में अधिक आय अर्जित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से जिले में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। नीति आयोग की आकांक्षी प्रखंड योजना के तहत मशरूम हट निर्माण और मशरूम किट वितरण की योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत पात्र लाभुकों को मशरूम हट निर्माण पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जबकि मशरूम किट 100 प्रतिशत अनुदान पर दी जाएंगी। इच्छुक किसानों और लाभुकों के पास आवेदन करने के लिए सीमित समय बचा है। आवेदन की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर निर्धारित की गई है। डीएम अभिलाषा शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित योजना के तहत आकांक्षी प्रखंडों की सभी पंचायतों में एक-एक मशरूम हट का निर्माण कराया जाएगा। कुल 80 मशरूम हट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मशरूम उत्पादन शुरू करने के इच्छुक किसानों और लाभुकों को प्रोत्साहित करने के लिए 2000 मशरूम किट वितरित की जाएंगी। इन किट पर लाभुकों को शत-प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है। कैसे मिलेगा लाभ? योजना के माध्यम से कम भूमि वाले किसान भी मशरूम उत्पादन को आजीविका के विकल्प के रूप में अपना सकेंगे। योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र लाभुकों को आवेदन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी के लिए जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करना होगा। योजना के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने आकांक्षी प्रखंडों के प्रखंड कृषि पदाधिकारियों, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। संबंधित कर्मियों को किसानों के बीच योजना का प्रचार-प्रसार करने और अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त करने की जिम्मेदारी दी गई है।

मोतिहारी-बेतिया में मिलावटी खून बेचने वाले गिरोह की तलाश, दो लैब पर छापेमारी से मचा हड़कंप

मोतिहारी  बिहार में खून के काले कारोबार का खुलासा हुआ है। पूर्वी चंपारण में एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन मिलाकर तीन यूनिट बनाने और फर्जी लेबल लगाकर निजी नर्सिंग होम में बेचने के मामले सामने आए हैं। यह जानकारी मिलने के बाद औषधि विभाग ने बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब ठिकानों पर छापेमारी की है, लेकिन दोनों संचालक फरार मिले। बताया जाता है कि ये संचालक मोतिहारी में भी रक्त की आपूर्ति करते हैं। अब मोतिहारी में भी बड़े पैमाने पर छापेमारी की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, इस धंधे में संगठित गिरोह सक्रिय है। कहा जा रहा है कि गिरोह के पास जरूरतमंद युवकों और नशे के आदी लोगों की सूची है, जो तीन से चार सौ रुपये में रक्त देने को तैयार हो जाते हैं। कई बार नशे की लत के कारण एक ही व्यक्ति महीने में दो-तीन बार रक्त बेच देता है। इन लोगों से बिना जांच रक्त लेकर दो से तीन हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से कुछ निजी नर्सिंग होम को बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में मोतिहारी और बेतिया के धंधेबाजों के नाम सामने आ रहे हैं। बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब पर छापेमारी की गई, लेकिन दोनों संचालक फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि एजेंट की गिरफ्तारी के बाद यह पता चल सकेगा कि रक्त कहां से जुटाया जाता था और किन-किन नर्सिंग होम में इसकी आपूर्ति होती थी। बताया जाता है कि पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग को निजी नर्सिंग होम में मिलावटी रक्त बेचने की जानकारी मिली थी। इसके बाद विभाग ने औषधि विभाग को सतर्क करते हुए छापेमारी अभियान चलाने और संदिग्ध नर्सिंग होम व ब्लड बैंकों पर निगरानी रखने का निर्देश दिया। सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कुमार अमृतांशु ने कहा कि ब्लड की थैली में मिलावट अपने आप में खतरनाक है। खतरनाक है मिलावटी खून रक्त में आयरन सिरप मिला देने से मरीज को रिएक्शन हो सकता है। इससे मरीज को लाभ मिलने के बजाय उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए उचित गुणवत्ता वाला और जांच किया हुआ रक्त जरूरी है। मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार हीमोग्लोबिन के स्तर और चिकित्सकीय स्थिति के अनुरूप रक्त चढ़ाया जाना चाहिए। इसके बावजूद यदि रक्त में मिलावट कर मरीज को चढ़ाया जाता है, तो यह उसकी जान के साथ खिलवाड़ है। डॉ. अमृतांशु ने कहा कि पहले सुनने में आता था कि नशे के आदी लोग नशे के लिए पैसे जुटाने के उद्देश्य से रक्त बेचते हैं। ऐसे लोगों के रक्त में पहले से ही हीमोग्लोबिन कम हो सकता है। लेकिन अब एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन मिलाकर तीन यूनिट बनाने की बात सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में मरीज की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है। निबंधित ब्लड बैंक से ही रक्त लें मरीज आईएमए अध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि मिलावटी या बिना जांच का रक्त चढ़ाने से रिएक्शन हो सकता है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इससे एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, मलेरिया, जॉन्डिस और अन्य गंभीर बीमारियों के संक्रमण का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि मरीज को हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए रक्त चढ़ाया जाता है, लेकिन बनावटी रक्त से अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा और मरीज की परेशानी बनी रह सकती है। इसलिए लोगों को निबंधित ब्लड बैंक से ही रक्त लेना चाहिए और बिचौलियों के माध्यम से रक्त लेने से बचना चाहिए। बिना जांच रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा नियमों के अनुसार, रक्त की प्रत्येक यूनिट की एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, उपदंश और मलेरिया की जांच अनिवार्य है। आरोप है कि अवैध तरीके से जुटाए जा रहे रक्त की जांच नहीं होती। इससे मरीजों को गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है। सदर अस्पताल में पिछले दिनों एक मरीज के परामर्श के दौरान पता चला कि उसे एक निजी नर्सिंग होम में बिना जांच का रक्त चढ़ाया गया था। बाद में वह एचआईवी संक्रमित मिला। कुछ अन्य मरीजों में भी पीलिया और दूसरे संक्रमण की शिकायत मिलने की बात कही गई है। चिकित्सकों के अनुसार, बिना जांच रक्त चढ़ाने से संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है। मिलावटी रक्त से मरीज को अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल सकता। लगाते हैं ब्लड बैंक का फर्जी लेबल सूत्र बताते हैं कि गिरोह एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन का पानी मिलाकर उसकी मात्रा तीन गुना कर देता है। इसके बाद रक्त पर ब्लड बैंक का फर्जी लेबल लगाकर बेच दिया जाता है, ताकि किसी को संदेह न हो। औषधि निरीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि एक मामला संज्ञान में आया है, जिसमें एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन का पानी मिलाकर तीन यूनिट बनाने और कुछ नर्सिंग होम में आपूर्ति करने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि इस मामले में मोतिहारी और बेतिया के धंधेबाजों के नाम सामने आ रहे हैं। बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब पर छापेमारी की गई, लेकिन दोनों संचालक फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि एजेंट की गिरफ्तारी के बाद यह पता चल सकेगा कि रक्त कहां से जुटाया जाता था और किन-किन नर्सिंग होम में इसकी आपूर्ति होती थी। प्राथमिकी दर्ज कर लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है। इस धंधे में संलिप्त पाए जाने वाले नर्सिंग होम और लैब के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी तथा उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर नजर रख रहा है। सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अलर्ट कर छापेमारी अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

झारखंड में सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, मुख्यमंत्री आवास से हाई कोर्ट तक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित

 रांची  राजधानी के प्रमुख सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील परिसरों के आसपास धरना-प्रदर्शन या रैली निकालने से पहले अब अनुमति सुनिश्चित करनी होगी। जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर इन स्थानों की निर्धारित परिधि को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करते हुए निषेधाज्ञा लागू की है। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास, प्रोजेक्ट भवन, नेपाल हाउस, झारखंड मंत्रालय और एफएफपी/एचईसी भवन के आसपास निर्धारित क्षेत्र में पाबंदियां लागू रहेंगी। झारखंड विधानसभा, झारखंड हाई कोर्ट और पुलिस मुख्यालय के आसपास के निर्धारित इलाके भी इसके दायरे में शामिल हैं। इन परिसरों की सुरक्षा तथा आसपास शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। धरना ही नहीं, जुलूस और आमसभा के लिए भी अनुमति जरूरी प्रतिबंधित क्षेत्रों में सक्षम प्राधिकार की पूर्व अनुमति के बिना धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली या आमसभा आयोजित नहीं की जा सकेगी। ऐसे में अपनी मांगों को लेकर इन स्थानों के आसपास जुटने की तैयारी कर रहे संगठनों को पहले अनुमति लेनी होगी। आदेश में घातक हथियार लेकर चलने तथा लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। सूचना पट्ट से दी जा रही पाबंदियों की जानकारी नागरिकों और संगठनों को प्रतिबंधों से अवगत कराने के लिए संबंधित स्थानों पर चेतावनी वाले सूचना पट्ट लगाए गए हैं। इनमें निषेधाज्ञा के पालन और उल्लंघन पर कार्रवाई की जानकारी दी गई है।  

बंगाल-नेपाल सीमा पर बढ़ेगी निगरानी, चरघड़िया में बनेगा उत्पाद विभाग का चौथा स्थायी चेकपोस्ट

किशनगंज  बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे किशनगंज जिले में शराब तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत कोचाधामन प्रखंड के चरघड़िया एंट्री प्वाइंट पर करीब 85 लाख रुपये की लागत से नया चेकपोस्ट बनाया जाएगा। चेकपोस्ट की स्वीकृति विभाग से मिलने के बाद निर्माण के लिए भवन निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। नया चेकपोस्ट बनने से इस क्षेत्र में वाहनों की निगरानी और जांच व्यवस्था मजबूत होगी। जानकारी के अनुसार जिस मार्ग में चेकपोस्ट बनाया जा रहा है उस मार्ग से शराब की बरामदगी होती रही है। फरवरी में कार से 404 लीटर और अप्रैल में 264.28 लीटर अंग्रेजी शराब जब्त की गई थी। जबकि कम मात्रा में शराब की बरामदगी पुलिस व उत्पाद विभाग निरंतर करती रही है। जिस कारण चरघड़िया में नया चेकपोस्ट बनने से विभाग की निगरानी व्यवस्था का विस्तार होगा। तीन स्थायी और तीन अस्थायी चेकपोस्ट से फिलहाल हो रही निगरानी फिलहाल जिले में गलगलिया, फरिंगगोला और रामपुर में तीन स्थायी चेकपोस्ट संचालित हैं। तीनों चेकपोस्ट बंगाल के रास्ते आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जाती है। इनके अतिरिक्त देवी चौक, ब्लाक चौक और कैल्टेक्स चौक पर तीन अस्थायी चेकपोस्ट भी चल रहे हैं। इन स्थानों पर वाहनों की जांच कर शराब की अवैध ढुलाई रोकने का प्रयास किया जाता है। उत्पाद विभाग के अनुसार स्थायी चेकपोस्टों पर 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था है। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों से आने-जाने वाले वाहनों की गतिविधियों के साथ ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर भी नजर रखी जाती है। जांच के दौरान सीसीटीवी में पूरी जांच की व्यवस्था कैद हो जाती है।     चरघड़िया एंट्री प्वाइंट पर चौथा चेकपोस्ट बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके निर्माण के लिए भवन निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। यहां चेकपोस्ट और बैरेक भी बनेगा। नया चेकपोस्ट बनने से शराब तस्करी रोकने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और संबंधित क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। – दीपक मिश्रा, उत्पाद अधीक्षक  

बिहार में राजगीर महोत्सव की तैयारी शुरू, बॉलीवुड नाइट से दंगल और तांगा दौड़ तक होंगे आकर्षण

बिहारशरीफ(नालंदा)  अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में एक बार फिर संस्कृति, संगीत और स्वाद का संगम देखने को मिलेगा। तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार महोत्सव 26 नवंबर से शुरू होगा। 28 नवंबर तक ये महोत्सव लगातार चलेगा। पांचवीं बार राजगीर स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में यह महोत्सव आयोजित होने जा रहा है। इसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोककलाओं और पारंपरिक व्यंजनों के रंग में आगंतुक सराबोर होंगे। शास्त्रीय संगीत से बॉलीवुड नाइट तक सजेगी शाम महोत्सव में शास्त्रीय संगीत, लोकनृत्य, सूफी गायन और बॉलीवुड नाइट मुख्य आकर्षण होंगे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की प्रस्तुतियों से शामें गुलजार होंगी। सुर-लय-ताल की महफिल के बीच दर्शकों को संगीत और नृत्य की विभिन्न विधाओं का आनंद मिलेगा। इसके साथ ही ग्रामश्री मेला, व्यंजन मेला, कृषि यांत्रिकीकरण प्रदर्शनी और पुस्तक मेला भी लोगों को आकर्षित करेंगे। ग्रामश्री मेले में दिखेगा देसी हुनर महोत्सव में ग्रामश्री मेला ग्रामीण उत्पादों और पारंपरिक कलाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां हस्तशिल्प, खादी, हस्तकरघा और काष्ठ कला से बने उत्पादों की खरीदारी का मौका मिलेगा। स्थानीय कारीगरों को अपने हुनर और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का मंच मिलेगा। व्यंजन मेले में देशी-विदेशी और पश्चिमी पकवानों के साथ सिलाव के प्रसिद्ध खाजा का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक स्वाद को भी पहचान मिलेगी। दंगल से तांगा दौड़ तक, दिखेगा रोमांच सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक खेल और प्रतियोगिताएं भी महोत्सव की रौनक बढ़ाएंगी। दंगल, तांगा सज्जा और तांगा दौड़ जैसे आयोजन लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे। इसके अलावा रंगोली, मेहंदी, चित्रकला और ताइक्वांडो प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। इनमें प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा। स्थानीय कला, शिल्प और व्यंजनों को मिलेगा मंच पिछले वर्ष किसी कारण से राजगीर महोत्सव का आयोजन नवंबर के बजाय दिसंबर में हुआ था। इस बार नवंबर में आयोजन होने से पर्यटन नगरी की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। महोत्सव स्थानीय कला, शिल्प और व्यंजनों को व्यापक मंच प्रदान करेगा। इससे राजगीर आने वाले पर्यटकों को क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलेगा। सांस्कृतिक विरासत से पर्यटकों को जोड़ने पर जोर महोत्सव के संबंध में प्रशासनिक पदाधिकारी ने बताया कि इस बार आयोजन का स्वरूप कई मायनों में बदला रहेगा। इसके बावजूद राजगीर की सांस्कृतिक धरोहर से पर्यटकों को परिचित कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारंपरिक प्रतियोगिताओं और स्थानीय उत्पादों के जरिए महोत्सव को आकर्षक बनाने की तैयारी की जा रही है।