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राम जानकी पथ के तीसरे-चौथे पैकेज को जल्द मिलेगी मंजूरी, 107 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

पटना राम जानकी पथ के शेष हिस्सा का निर्माण 8200 करोड़ रुपये से किया जाएगा। तीसरे और चौथे पैकेज में बनने वाली इस सड़क की डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही यह डीपीआर केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की स्वीकृति के बाद इस सड़क के निर्माण की निविदा जारी की जाएगी। राम जानकी पथ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मेहरौना घाट से बिहार-नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 240 किलोमीटर सड़क बननी है। इनमें तीसरे और चौथे पैकेज में सारण जिले के मशरख से नेपाल की सीमा भिट्टा मोड़ तक 150 किलोमीटर फोरलेन सड़क बनेगी। तीसरे और चौथे पैकेज में 150 किमी सड़क किन-किन गावों से होकर गुजरेगी, इसका निर्धारण पहले ही कर लिया गया है। कुल 107 गावों की जमीन का इसमें अधिग्रहण किया जाएगा। इनमें सारण के दस, गोपालगंज के 13, पूर्वी चंपारण के 48, शिवहर के पांच और सीतामढ़ी के 31 गांव शामिल हैं। जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा डीपीआर पर केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद इस पथ के लिए जल्द ही जमीन अधिग्रहण का कार्य भी शुरू होगा। वहीं, पहले और दूसरे पैकेज में करीब 90 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पहले से जारी है। तीसरे पैकेज में 76 किलोमीटर सड़क बनेगी, जो मशरख से शिवहर तक जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में AI की एंट्री, सहिया से मरीजों तक डिजिटल मदद पहुंचाने की योजना

रांची  अब आपके स्वास्थ्य की देखभाल एआई फैमिली डॉक्टर जैसी आधुनिक तकनीक करेगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके नेपाल हाउस सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसमें इसपर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के लिए एआई असिस्टेंट और एआई फैमिली डॉक्टर जैसे डिजिटल संसाधन विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने दोनों प्लेटफार्म के विकास के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। एआई असिस्टेंट स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत हेल्थ प्रोफेशनल्स और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए डिजिटल सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह उन्हें उनके दैनिक कार्यों की जानकारी और समय पर रिमाइंडर एवं अलर्ट उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उन्हें कब, कहां, किसके साथ और कौन-सा कार्य करना है, कार्य के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी तथा आवश्यक संसाधन क्या होंगे। उदाहरण के तौर पर एआई असिस्टेंट किसी सहिया को यह जानकारी दे सकेगा कि उसे किस स्थान पर, किस समय टीकाकरण करना है, कितने बच्चों का टीकाकरण होना है तथा इसके लिए किन तैयारियों की आवश्यकता है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों को अपने कार्य समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, उप सचिव ध्रुव प्रसाद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा एआई फैमिली डाक्टर प्रस्तावित एआई फैमिली डाक्टर आम लोगों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह मरीज द्वारा बताई गई स्वास्थ्य संबंधी समस्या के आधार पर संभावित बीमारी और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि एआई द्वारा सुझाई गई किसी भी दवा को तब तक वैध चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जाएगा, जब तक उसे किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा अनुमोदित न किया जाए। इस व्यवस्था का उद्देश्य एआई की सुविधा का लाभ उठाते हुए चिकित्सकीय सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करना है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी योजना अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोनों एआई प्लेटफॉर्म के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया। योजना के अनुसार, एआई फैमिली डाक्टर को प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा सकता है। पायलट परियोजना के परिणाम सफल रहने पर इसे राज्य के व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावना पर विचार किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों के दैनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने के साथ-साथ आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

गंगा की बाढ़ में डूबा भागलपुर का सिल्क हब, जीआई टैग वाले तीन उत्पादों पर खतरा

पटना बिहार के रेशमी शहर की आर्थिक रीढ़ बाढ़ के थपेड़ों से टूट गई है। भागलपुर में गंगा की उफनाती लहरों और बाढ़ की विभीषिका ने न केवल लाखों लोगों को बेघर किया है, बल्कि यहां की पहचान माने जाने वाले तीन वैश्विक ब्रांड (तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम) के वजूद पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। बता दें कि तसर सिल्क, कतरनी धान और जर्दालू आम को जीआई टैग दिया गया है। कृषि और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बाढ़ से भागलपुर की अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगा है, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं। नाथनगर और चंपानगर के सिल्क हब इस समय पानी में पूरी तरह डूबे हुए हैं। आर्थिक मामलों के स्थानीय जानकार अधिवक्ता राजेश सर्राफ ने बताया कि भागलपुर का सिल्क उद्योग लगभग 50 फीसदी घरेलू और 50 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है। पावरलूम मशीनों और कच्चे माल के पानी में डूबने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। नाथनगर स्थित बुनकर समाज के इनायत अंसारी बताते हैं कि विदेशों से मिले ऑर्डर की समय पर डिलीवरी नहीं होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी साख खतरे में है। यदि बुनकरों का बनारस या कोलकाता पलायन शुरू हुआ, तो इस पारंपरिक क्लस्टर को भारी क्षति पहुंचेगी। दूसरी ओर, जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ कतरनी धान और जर्दालू आम के बागों को भी प्रकृति का कहर झेलना पड़ रहा है। सुल्तानगंज के आभा रतनपुर निवासी कृषक एवं निर्यातक मनीष कुमार सिंह बताते हैं, बाढ़ का पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने के कारण कतरनी धान के नाजुक पौधे पूरी तरह सड़ जाएंगे। इस अनूठे सुगंधित चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजार ठप होने के कगार पर है। जर्दालू आम के बगीचे में जलभराव पर चिंता जताते हुए वो कहते हैं कि बगीचों में जलभराव सबसे खतरनाक होता है। पीरपैंती के आम उत्पादक पप्पू यादव कहते हैं कि बगीचे में एक सप्ताह से अधिक दिनों तक पानी जमा रह गया तो पेड़ सूख जाएंगे। इससे आम की उत्पादकता में कमी आएगी। सिल्क बुनकरों को विशेष राहत पैकेज मिले : चैंबर भागलपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष रामगोपाल पोद्दार बताते हैं कि बुनकर और किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं। सरकार को इस संकट से निपटने के लिए सिल्क बुनकरों के लिए विशेष राहत पैकेज और किसानों के लिए फसल बीमा का त्वरित भुगतान सुनिश्चित करना होगा, तभी इन जीआई टैग उत्पादों को बचाया जा सकता है। सरकारी आंकड़े में (सालाना) सिल्क: 100 करोड़ कतरनी धान की पैदावार : 2000 एकड़ कतरनी धान का कारोबार: 30 करोड़ जर्दालू आम की प्रतिवर्ष पैदावार-बाजार : 10,000 मीट्रिक टन

झारखंड में मतदाता सूची को लेकर सख्ती, कोई पात्र नागरिक नाम जुड़ने से न रहे वंचित

रांची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बुधवार को सभी उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर एसआइआर के तहत दावा-आपत्ति एवं सुनवाई, युवा मतदाता पंजीकरण तथा मतदाता सेवाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सभी कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान अनावश्यक भीड़ न लगने दें। एक साथ अधिक लोगों को बुलाने की जगह टोकन सिस्टम के माध्यम से क्रमवार सुनवाई कराई जाए। प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर दिया जाए तथा उपलब्ध दस्तावेज एवं तथ्यों के परीक्षण के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाए। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को लंबित मामलों एवं प्रतिदिन हो रहे निष्पादन की नियमित समीक्षा करें। एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने शून्य तथा एक से पांच फार्म-6 वाले मतदान केंद्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा, ऐसे मतदान केंद्रों की मतदान केंद्रवार समीक्षा करते हुए बीएलओ के माध्यम से उन नए एवं युवा पात्र भारतीय नागरिकों की पहचान की जाए, जिनकी आयु एक अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूर्ण हो रही है, लेकिन उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। ऐसे सभी पात्र नागरिकों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 एवं आवश्यक घोषणा-पत्र प्राप्त कर उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। साथ ही साहिबगंज में सामने आई अनियमितता की पुनरावृत्ति किसी अन्य जिले में न हो, इसके लिए आवेदन, दस्तावेज, सत्यापन एवं निर्वाचन डेटा पर प्रभावी निगरानी रखी जाए तथा किसी भी अनियमितता पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 19 एवं 20 नवंबर को राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब कार्यक्रमों की तैयारियां अभी से प्रारंभ करने का निर्देश दिया। इसके लिए ईएलसी को-आर्डिनेटर नियुक्त कर स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। स्कूल एवं कॉलेज स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर विद्यार्थियों एवं युवा मतदाताओं के बीच ईसीनेट का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा उन्हें उपलब्ध डिजिटल मतदाता सेवाओं की जानकारी दी जाए। उन्होंने एनवीएसपी पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन तथा ईसीनेट की ‘बुक ए काल’ सुविधा के माध्यम से प्राप्त मतदाताओं की शिकायतों एवं समस्याओं पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शिक्षा विभाग का नया निर्देश: 25 लाख से कम राशि की निकासी DEO/DSE के स्तर से होगी

 रांची  समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिलों में राशि की निकासी को लेकर नया दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इसके तहत अब 25 लाख रुपये से अधिक की राशि की निकासी उपायुक्त की स्वीकृति के बाद ही की जा सकेगी। वहीं, 25 लाख रुपये से कम की राशि की निकासी जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधीक्षक के स्तर से की जा सकेगी समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिलों में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में राशि की निकासी को लेकर जारी नए दिशा-निर्देश में वित्तीय प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था करने पर जोर दिया गया है। 25 लाख रुपये से अधिक की निकासी के लिए उपायुक्त की स्वीकृति अनिवार्य किए जाने से बड़ी राशि की निकासी उच्च स्तर की मंजूरी के बाद ही हो सकेगी। वहीं, इससे कम राशि की निकासी के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है। दिशा-निर्देश में प्रखंड से लेकर राज्य स्तर तक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नामित करने का प्रावधान भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस दिशा-निर्देश का उद्देश्य केंद्र समग्र शिक्षा अभियान के कार्यक्रमों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। राशि की निकासी के लिए निर्धारित इस व्यवस्था से अभियान के तहत होने वाली वित्तीय प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से संचालित करने पर जोर दिया गया है।

2030 तक बिहार में पलायन रोकने का दावा, बाढ़ और फरक्का बराज पर भी बोले सम्राट चौधरी

पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दो टूक कहा है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी लागू रहेगी। इससे कोई समझौता नहीं होगा। भले ही इससे बिहार को सालाना 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन यह ऐतिहासिक फैसला बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में राज्य में शराबबंदी, बाढ़, रोजगार, पलायन से लेकर कई राजनीतिक मु्द्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के आग्रह पर राज्य में शराबबंदी लागू की थी। इसका सकारात्मक असर हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक आदि के जरिए बाढ़ आती है। हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बनी है। अभी जो बाढ़ की स्थिति बनी है, उसके लिए राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया। सामुदायिक रसोई चलाकर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2030 के पहले बिहार से पलायन रुक जाएगा। 2030 तक पढ़ाई से लेकर नौकरी तक की बेहतर व्यवस्था हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ 30 सालों से काम कर रहा हूं। वह मेरे पितातुल्य हैं। एक सवाल पर उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का नेता कौन होगा, यह पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करता है। यह पार्टी का आंतरिक मामला है। फरक्का बराज से बिहार को नुकसान मुख्यमंत्री ने कहा कि फरक्का बराज से बिहार को नुकसान है। इससे गंगा नदी में गाद जमा हो गयी है। इस कारण बक्सर के पास गंगा की चौड़ाई चार किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि फरक्का जल संधि पर बिहार की ओर से यह आग्रह है कि हमें पीने, खेती करने और उद्योग के लिए किसी भी समय पानी लेने का अधिकार हो। इसके लिए हमने केंद्र सरकार से बात की है।

निवेश और रोजगार को मिलेगी रफ्तार, झारखंड में लॉन्च होगी नई टेक्सटाइल व औद्योगिक प्रोत्साहन नीति

 रांची झारखंड सरकार ने राज्य में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति और झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति को फिर से लांच करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे का मुख्य कारण है कि दोनों नीतियां लैप्स कर गई हैं इनके बदले नई नीति को लांच करना है। उद्योग विभाग इन नीतियों का ड्राफ्ट पहले ही जारी कर चुकी है और लोगों से इसके ऊपर हितधारकों के सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इन सुझावों को भी नई नीति में समाहित करने का निर्णय लिया गया है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगले पखवारे में इस नीति को मूर्त रूप दे दिया जाएगा। राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निवेशक अनुकूल नीतियों के माध्यम से राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश का आकर्षित करने की योजना है। इसके माध्यम से राज्य में 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ना है। राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति (जेआइआइपीपी) 2026 का मसौदा जारी किया है। इसे जारी करते हुए राज्य सरकार ने हितधारकों से सुझाव मांगे हैं जिन्हें नीति में जगह दी जाएगी। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को बड़ी सब्सिडी नई नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापक परियोजना निवेश सब्सिडी के तहत स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 15 करोड़ रुपये) देने का प्रविधान है। वहीं गैर एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपये) देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा एससी, एसटी, महिला एवं दिव्यांग उद्यमियों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त लाभ देने का निर्णय लिया गया है। पिछली नीति के आधार पर नई पहल प्रस्तावित टेक्सटाइल नीति मूल रूप से यह 2016-2021 की वस्त्र नीति की अगली कड़ी है। पिछली पांच वर्षीय नीति के तहत राज्य में लगभग 500 से 1,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और 10,000 से 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए थे, जिसमें महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। नई नीति की खास बातें – योग्य इकाइयों को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) सब्सिडी मिलेगी – फुटवियर और तकनीकी वस्त्र क्षेत्रों में 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा – एससी/एसटी, महिला एवं दिव्यांग उद्यमियों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी (झारखंड निवासी होने पर) – अधिकतम प्रभावी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है – बैंक ऋण पर 7 प्रतिशत प्रति वर्ष या ब्याज दर का 50 प्रतिशत (अधिकतम 3 करोड़ रुपये) 5 वर्षों के लिए एसजीएसटी प्रतिपूर्ति मसौदे के अनुसार पहले सात वर्ष में सौ प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।     अगले तीन वर्षों के लिए 40 प्रतिशत प्रतिपूर्ति      50 प्रतिशत बिजली टैरिफ प्रतिपूर्ति 5 वर्षों के लिए     100 प्रतिशत विद्युत कर प्रतिपूर्ति 5 वर्षों के लिए (नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने पर 7 वर्ष तक विस्तार)     स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति रोजगार और कौशल विकास पर विशेष जोर नीति में महिला कर्मचारियों के लिए पुरुषों की तुलना में 1,000 रुपये अधिक मासिक वेतन सब्सिडी का प्रविधान है। – पुरुष कर्मचारी: 5,000 रुपये प्रति माह – महिला कर्मचारी: 6,000 रुपये प्रति माह – एससी/एसटी/दिव्यांग कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये प्रति माह – जोन-3 (पिछड़े जिलों) में कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त 1,000 रुपये – प्रति प्रशिक्षु 13,000 रुपये तक की एकमुश्त प्रशिक्षण सहायता सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचा     ईपीएफ और ईएसआई में नियोक्ता के योगदान की प्रतिपूर्ति (1,000 रुपये प्रति व्यक्ति/माह)     टेक्सटाइल/अपैरल पार्कों के पास डॉर्मिटरी निर्माण के लिए भूमि सहायता     मंडी शुल्क में छूट     छात्रावासों के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तक सहायता पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष ध्यान नीति विशेष रूप से संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, जो अब तक औद्योगिक गतिविधियों से दूर रहा है। राज्य के जिलों को तीन जोन में विभाजित किया गया है। इसके तहत पहली बार पीएम मित्रा और केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, समर्थ और राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन जैसी प्रमुख केंद्रीय पहलों के साथ योजनाओं को समाहित किया गया है। 

बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, 12वीं पास छात्रों को मिलेगा प्लेसमेंट का मौका

 पटना बिहार के सरकारी स्कूलों में भी प्लेसमेंट की सुविधा मिलेगी। राज्य सरकार 12वीं कक्षा में ऐसे इच्छुक बच्चों को प्लेसमेंट की सुविधा देगी जो आगे पढ़ाई नहीं करना चाहते या फिर जो 12वीं के बाद ही करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए बड़े व्यावसायिक कंपनियों की मदद ली जाएगी। इसमें बड़ी कंपिनयों और बड़े औद्योगिक घरानों से भी सहयोग लिया जाएगा। बिहार सरकार अब सरकारी स्कूलों के 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई के बाद सीधे रोजगार से जोड़ने की तैयारी में है। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य उन विद्यार्थियों को अवसर देना है, जो इंटरमीडिएट के बाद परिवार की आर्थिक स्थित या अन्य कारणों से कामकाजी दुनिया में प्रवेश करना चाहते हैं। ऐसे बच्चों को विद्यालय से ही प्लेसमेंट की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। अवसर विकसित होंगे प्रस्तावित नई पहल के तहत विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और कौशल का आकलन कर उन्हें निजी कंपनियों तथा विभिन्न रोजगार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा। सरकार इसके लिए बड़े व्यावसायिक समूहों और उद्योग जगत का सहयोग लेने की योजना बना रही है। देश की नामी-गिरामी कंपनी और बड़े औद्योगिक घरानों सहित अन्य कंपनियों की भागीदारी से प्लेसमेंट, प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप के अवसर विकसित किए जाएंगे। कौशल के अभाव में बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिलता बिहार में 13 लाख बच्चे सरकारी विद्यालयों में इंटर की पढ़ाई करते हैं। इंटर स्तर पर मेडिकल, इंजीनियरिंग, एनडीए के सात-साथ रेलवे, बैंक में बड़ी संख्या में लड़के जाते हैं। निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में बच्चे जाते हैं। लेकिन जानकारी और कौशल के अभाव में उन्हें बेहतर प्सेलमेंट नहीं मिल पाता। इसीलिए सरकार ने यह व्यवस्था शुरू की है। सरकार की बड़े औद्योगिक घरानों और कंपनियों से अपेक्षा होगी कि वे विद्यार्थियों के लिए एंट्री-लेवल रोजगार, प्रशिक्षु पद, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध कराएं। विद्यार्थियों के पास दो विकल्प होंगे राज्य में पहले से कौशल विकास और उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था से 12वीं पास विद्यार्थियों के सामने दो स्पष्ट रास्ते होंगे। पहला तो उच्च शिक्षा में दाखिला। दूसरा कौशल प्रशिक्षण के बाद नौकरी या अप्रेंटिसशिप चुनना। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह पहल आय का साधन बनाने में उपयोगी हो सकती है। विशेष विद्यालयों का चयन किया जाएगा इस योजना में केवल नौकरी दिलाने पर ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाने पर भी जोर रहेगा। 12वीं के बाद चयनित युवाओं को संचार कौशल, डिजिटल दक्षता, कार्यस्थल व्यवहार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा क्षेत्र-विशेष की जरूरतों के अनुरूप तैयारी कराई जा सकती है। इसके लिए कुछ विशेष सरकारी विद्यालयों का चयन किया जाएगा, जहां 12 वीं के बाद बच्चों को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। इन विद्यालयों में बड़ी कंपनियों को भी स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हम 12 वीं के बाद इच्छुक बच्चों को उनके बेहतर करियर और रोजगार दोनों में मदद करेंगे। जो बच्चे रोजगार चाहते हैं, उनके लिए प्लेसमेंट की योजना बनायी जा रही है। हम विद्यालय के बाद ही उनके लिए रोजगार का प्रबंध करेंगे।

किसानों के लिए बड़ी सुविधा, ऐप से बुक करें खाद और QR कोड दिखाते ही मिलेगा उर्वरक

पूर्णिया  किसानों को अब खाद के लिए उर्वरक दुकानों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। किसान अब ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल के नाम से डिजिटल प्रणाली विकसित किया गया है। इसके तहत किसान घर बैठे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार खाद की बुकिंग कर सकेंगे। इसके लिए किसान की फार्मर आईडी होना अनिवार्य है। मोबाइल ऐप पर आधार संख्या और ओटीपी के माध्यम से किसान की पहचान का सत्यापन होगा। ऐप पर किसान अपने खेत और फसल का विवरण दर्ज कर आसानी से मोबाइल से ही खाद की बुकिंग कर रहे हैं। बुकिंग के बाद मोबाइल पर मिलने वाले क्यूआर कोड को अधिकृत विक्रेता के पास स्कैन कराने पर तुरंत खाद उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि कर्मियों को दी गई है जागरूकता की जिम्मेदारी अधिकारियों का मानना है कि इससे खाद के वितरण में पारदर्शिता आएगी और वास्तविक किसानों तक उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था को लेकर किसानों को जानकारी देने की जिम्मेदारी पंचायत एवं प्रखंड स्तर के कृषि कर्मियों को दी गई है। किसान सलाहकार, कृषि फसल की जानकारी ऐप में दर्ज करेंगे तो उसके अनुसार उर्वरक की उचित मात्रा ऐप पर दिखेगी। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, उन्हें पहले इसे बनवाना होगा। फार्मर आईडी बनने के बाद किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने के बाद खाद की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी पहले से अधिक प्रभावी होगी। बटाइदार भी कर सकेंगे खाद का उठाव जिन किसानों की जमीन उनके नाम पर दर्ज है, वे आसानी से इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे। जिन किसानों के पूर्वजों के नाम जमीन दर्ज है या जिनका नाम जमाबंदी में नहीं है, उनके लिए भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्मर आईडी बनाने की व्यवस्था की गई है। संयुक्त स्वामित्व वाली जमीन समेत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी नहीं बनी है, जो बटाईदार हैं या फिर सामुदायिक, मंदिर, सरकारी अथवा संस्थागत जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए भी इस निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद लेने की पूरी व्यवस्था की गई है। विभिन्न प्रकार की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। जिले में ऐप के माध्यम से एक सितंबर से खाद की बुकिंग शुरू हो गई है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और पूरी बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। जिले में अब तक 4,846 किसानों ने ऐप के माध्यम से खाद की बुकिंग की है जिन्हें नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। – विजय प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्णिया  

बिहार में खतरनाक ‘कोटा’ हेरोइन का बढ़ा नेटवर्क, साबुन-माचिस की डिब्बी में हो रही तस्करी

पटना ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ने सिर्फ रूट ही नहीं बदला है, बल्कि हेरोइन की हाई क्वालिटी तैयार कर उसका स्वरूप भी बदल दिया है, जिसे 'कोटा' (हेरोइन) के नाम से जाना जाता है। सरसों के दाने की तरह दिखने वाले 'कोटा' (हेरोइन) की तस्करी भी साबुन और माचिस की डिब्बी में रखकर ठिकाने तक पहुंचाया जा रहा है। पहले बिहार एसटीएफ के हाथ 'कोटा' (हेरोइन) लगा था, जिसकी मात्रा कम थी, लेकिन इसका असर बेहद खतरनाक बताया गया। इसका दिमाग और शरीर पर बहुत घातक प्रभाव पड़ता है। बिहार पुलिस कुछ दिन पहले इसका एक वीडियो क्लिप बनाकर इंटरनेट मीडिया पर अपलोड कर लोगों को जागरूक भी किया था। एसटीएफ 'कोटा' (हेरोइन) बरामदगी मामले में अब तक 27 केस दर्ज करा चुकी है और 71 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। इनमें 15 महिलाएं शामिल थीं। बिहार पुलिस ने अपील की कि आपके पास नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त, तस्करी या सेवन से संबंधित कोई सूचना है, तो तुरंत 1933 पर काल करें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है, जिसके खिलाफ बिहार पुलिस और एसटीएफ लगातार बड़े स्तर पर छापेमारी कर रही हैं। कुछ दिन पूर्व बरौनी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बने नए फुटओवर ब्रिज के नीचे से पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 118 ग्राम कोटा हेरोइन बरामद की गई है। यह हेरोइन बिहार या उसके आसपास के राज्यों से नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड से लाई गई थी। उन्हें यह मादक पदार्थ नागालैंड के ज्यूरक शहर के रहने वाले एक तस्कर ने सप्लाई किया था। चारों आरोपित कविगुरु एक्सप्रेस ट्रेन से सफर तय कर असम के कामाख्या से होते हुए बरौनी स्टेशन पहुंचे थे। इसी तरह मुजफ्फरपुर के कच्ची पक्की ओपी क्षेत्र में पुलिस ने घर में चल रहे रैकेट का भंडाफोड़ किया था। वहां से 25 ग्राम अवैध 'कोटा' हेरोइन की 64 पुड़िया बरामद कर एक तस्कर दंपती को गिरफ्तार किया था। बख्तियारपुर में एसटीएफ और पटना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में सौ ग्राम हेरोइन के साथ चार तस्करों को दबोचा था। इसे आठ साबुनदानीनुमा डिब्बों में रखा गया था। इसी तरह नदी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर एक घर से 162 ग्राम 'कोटा' (हेरोइन) और पैकिंग के 1,500 खाली डिब्बे जब्त किए गए थे। छिपाने के लिए अपना रहे शातिराना तरीका चेकिंग से बचने के लिए हेरोइन छिपाने का बेहद शातिराना तरीका अपना रहे हैं। बरौनी से गिरफ्तार दोनों महिलाओं ने हेरोइन से भरे प्लास्टिक के डिब्बों को अपने ब्लाउज के अंदर छिपा रखा था। दो अन्य तस्करों ने हेरोइन के पैकेटों को अपनी पैंट की जेब और पिठ्ठू बैग व प्लास्टिक के झोले में छिपा रखा था। तस्करी के दौरान किसी को संदेह नहीं हो, इसके लिए इसे सरसों के दाने की तरह तैयार कर कैरियर के जरिए तय ठिकाने पर भेजा जा रहा है। असम के दीमापुर और मणिपुर से पहुंच रही खेप सूत्रों की मानें तो पुलिस की छानबीन में सिंडिकेट से लेकर चेन से जुड़े कई राज उजागर हुए। स्थानीय लोगों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर बस या ट्रेन से उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में बुला रहे हैं। असम के दीमापुर और मणिपुर के इम्फाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से हेरोइन/कोटा की खेप लाकर बिहार के अलग-अलग जिलों में सप्लाई कर रहे हैं। नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के रास्ते चरस और अन्य ड्रग्स को बिहार के बाहर भी तस्करी की जा रही है। डेढ़ वर्ष में 17 किलोग्राम से अधिक हेरोइन/स्मैक बरामद एसटीएफ और उसकी नार्कोटिक्स सेल की टीम ने वर्ष 2025 में अप्रैल से दिसंबर तक 7.662 किलोग्राम हेरोइन और 4.215 किलोग्राम स्मैक जब्त किया गया। इसी तरह वर्ष 2026 में जनवरी से आठ अगस्त तक 5.724 किलोग्राम हेरोइन/स्मैक बरामद किया गया। एसटीएफ का अभियान जारी है और लगातार किसी न किसी क्षेत्र में मादक पदार्थ के साथ गिरफ्तारी की जा रही है।