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‘झारभूमि लाइवस्टॉक’ के गठन से ग्रामीण आजीविका और पशुपालन को मिलेगी नई ताकत

 पिपरवार सीसीएल के पिपरवार सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और कृषि आधारित आजीविका को संगठित स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 300 किसानों और महिला पशुपालकों की नई उत्पादक कंपनी “झारभूमि लाइवस्टॉक फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” का विधिवत गठन कर लिया गया है। कंपनी का पंजीकरण शुक्रवार को पूरा होने के साथ ही क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों में उत्साह का माहौल है। कंपनी गठन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों, दुग्ध उत्पादकों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है, ताकि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, चारा प्रबंधन और कृषि उत्पादों के विपणन को संगठित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। बताया गया कि कंपनी के गठन से किसानों को बाजार तक सीधी पहुंच, उचित मूल्य, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से मिल सकेगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्वरोजगार को मजबूती देने पर भी कंपनी का फोकस रहेगा। कंपनी के गठन के साथ ही उसका निगमित प्रमाण पत्र, स्थायी खाता संख्या और कर कटौती खाता संख्या भी जारी कर दी गई है। संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने सभी सदस्य किसानों और महिला पशुपालकों को नई यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयास से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और पशुपालन आधारित रोजगार को मजबूती प्राप्त होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की सामूहिक भागीदारी से बनी इस कंपनी को आत्मनिर्भर कृषि और पशुपालन मॉडल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

बिहार सरकार का नया समीकरण: कैबिनेट विस्तार में युवाओं और नए चेहरों पर भरोसा

पटना बिहार कैबिनेट विस्तार में बीजेपी और जदयू ने नए चेहरों पर ज्यादा भरोसा जताया है। सम्राट मंत्रिमंडल में कई वरिष्ठ और पुराने मंत्रियों का प्रभाव कम हुआ है, जबकि पहली बार मंत्री बने नेताओं को अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीजेपी कोटे से मंत्री बने मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। नीतीश सरकार में यह विभाग जदयू के पास था, लेकिन अब सम्राट सरकार में इसे बीजेपी को दिया गया है। मिथिलेश तिवारी पहली बार मंत्री बने हैं और उन्हें कैबिनेट के सबसे अहम विभागों में से एक सौंपा गया है। सम्राट कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री वहीं, पिछली सरकार में बीजेपी के पास रहा स्वास्थ्य विभाग इस बार जदयू को मिला है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पहली बार मंत्री बने निशांत कुमार को सौंपी गई है। इसी तरह जदयू विधायक डॉ. श्वेता गुप्ता को समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वह पहली बार विधायक बनी हैं और पार्टी ने उन्हें बड़ा विभाग देकर भरोसा जताया है।   गोपालपुर से विधायक बुलो मंडल को भी पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। उन्हें ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी मिली है। यह विभाग करीब तीन दशक तक बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास रहा था। इसके अलावा, बिहपुर से विधायक ई. शैलेन्द्र को पथ निर्माण विभाग सौंपा गया है। वहीं, श्रेयसी सिंह और लेशी सिंह का भी नए मंत्रिमंडल में कद बढ़ा है। कई पुराने नेताओं का घटा कद वहीं, नए मंत्रिमंडल में कई पुराने मंत्रियों का कद घटा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव लंबे समय से ऊर्जा विभाग संभाल रहे थे। नई सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया है, लेकिन ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली गई है। इसी तरह, नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले अशोक चौधरी का भी नई सरकार में प्रभाव कम हुआ है। पहले उनके पास ग्रामीण कार्य विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय था, लेकिन अब उन्हें खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का भी नए मंत्रिमंडल में कद घटा है। सम्राट कैबिनेट में उन्हें ग्रामीण कार्य विभाग सौंपा गया है। पहले उनके पास 68,216 करोड़ रुपये के बजट वाला शिक्षा विभाग था, जबकि अब उन्हें करीब 11,312 करोड़ रुपये के बजट वाला विभाग मिला है। इसके अलावा, पूर्व समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी, प्रमोद चंद्रवंशी, संजय टाइगर और रामकृपाल यादव के विभागों में भी बदलाव किया गया है, जिससे उनके राजनीतिक कद में कमी मानी जा रही है।

अवैध निकासी और वेतन घोटाले के बाद सख्ती, कोडरमा में तबादला लिस्ट तैयार

कोडरमा जिला मुख्यालय में लंबे समय से एक ही कार्यालय और एक ही पद पर जमे कर्मियों के स्थानांतरण की तैयारी तेज हो गई है। मुख्य सचिव के निर्देश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। संवेदनशील पदों पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है और माना जा रहा है कि अगले सप्ताह बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी हो सकता है। जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी और वेतन घोटाले के मामले सामने आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। इसके बाद सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए डीडीओ, लेखा, कोषागार और वेतन प्रसंस्करण से जुड़े कर्मियों का अनिवार्य स्थानांतरण करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक ही पद या कार्यालय में दीर्घकालीन पदस्थापन पर रोक लगाई जाए। साथ ही 30 मई तक आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इधर, कोडरमा जिला मुख्यालय में कई कर्मी पांच वर्षों से अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत हैं। कुछ कर्मियों का अन्यत्र स्थानांतरण होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति के जरिए उन्हें फिर से पसंदीदा पदों पर बनाए रखा गया है। ऐसे में मुख्य सचिव के आदेश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस संबंध में मंगलवार को जिला स्थापना समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने संविदा और एकमुश्त मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा वेतन भुगतान में अनियमितताओं की पहचान के लिए एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स प्रणाली लागू करने, रिस्क बेस्ड सैंपलिंग के जरिए संदिग्ध मामलों की जांच कराने तथा पिछले पांच वर्षों में असामान्य बजट मांगों की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है।

बिहार को बड़ी सौगात: रक्सौल एयरपोर्ट से नेपाल तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, जल्द शुरू होंगी फ्लाइट्स

रक्सौल (पूच) भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई। पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित एयरपोर्ट एवं तिलावे नदी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे पटना एयरपोर्ट से करीब 360 मीटर बड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि यह एयरपोर्ट आकार और सुविधाओं के मामले में उत्तर बिहार का महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बनेगा। निरीक्षण के बाद एसएसबी मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि यदि सभी कार्य तय समयसीमा के अनुसार पूरे हुए तो अगले लगभग 20 महीनों में रक्सौल से हवाई सेवा शुरू हो सकती है। बड़े विमानों की लैंडिंग के अनुरूप बनेगा रनवे सांसद डॉ. जायसवाल ने बताया कि प्रस्तावित एयरपोर्ट का रनवे तिलावे नदी के उस पार तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके। उन्होंने कहा कि बड़े रनवे के कारण विमानों को इमरजेंसी ब्रेकिंग की आवश्यकता कम पड़ेगी, जिससे एयरपोर्ट तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और आधुनिक होगा। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए कुल 139 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष भूमि अधिग्रहण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। कंसल्टेंट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और अगले तीन महीनों में विस्तृत डिजाइन एवं तकनीकी नक्शा तैयार होने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सांसद ने कहा कि निर्माण एजेंसी को एयरपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद दो महीने तक तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक जांच एवं ट्रायल लैंडिंग की प्रक्रिया चलेगी। उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ सांसद ने कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर बिहार एवं भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के आर्थिक, व्यापारिक और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनेगा। एयरपोर्ट बनने से नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों एवं पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को पटना जाकर विमान सेवा लेने की मजबूरी समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के साथ-साथ बेतिया-रक्सौल और मोतिहारी-रक्सौल फोरलेन सड़क परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। वर्ष 2016 में मिली थी स्वीकृति डॉ. जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीएम पैकेज के तहत एयरपोर्ट परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि भूमि अधिग्रहण एवं नीतिगत कारणों से परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2023 में भूमि अधिग्रहण की अनुमति मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पहल से रक्सौल का सपना अब साकार होता दिख रहा है। सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 रक्सौल और चंपारण के विकास के लिए विशेष वर्ष साबित होगा। उन्होंने बताया कि दो माह के भीतर रेलवे क्रॉसिंग संख्या 33 एवं 34 पर आरओबी निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे परियोजना को भी गति मिलने की संभावना है। इस अवसर पर रक्सौल विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा, नरकटिया विधायक विशाल कुमार, सुगौली के राकेश गुप्ता उर्फ बबलू गुप्ता, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय, एसडीओ मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।  

रांची का कांके डैम होगा साफ, एसटीपी और नैनो टेक्नोलॉजी से रुकेगा प्रदूषण

रांची  राजधानी रांची के प्रमुख जलस्रोत कांके डैम को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बड़ी पहल शुरू की है। डैम के पानी की गुणवत्ता खराब मिलने के बाद विभाग अब हाईटेक तकनीक के जरिए इसकी सफाई कराने की तैयारी में जुट गया है। इसके तहत कांके डैम के आसपास चार स्थानों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी को सीधे डैम में जाने से रोका जा सके। हाल ही में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने अधिकारियों के साथ कांके डैम के पानी की गुणवत्ता की समीक्षा की। जांच के दौरान पानी में हरे रंग की मात्रा अधिक पाई गई। अधिकारियों के अनुसार यह स्थिति जल प्रदूषण का संकेत है, जिसके कारण पानी को साफ करने में जरूरत से ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। समीक्षा बैठक में सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डैम की सफाई के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए और जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। विभाग सचिव ने निर्देश दिया है कि कांके डैम में नैनो फिल्टर तकनीक अपनाई जाएगी। इससे पानी की सफाई के साथ-साथ पानी में अक्सीजन की मात्रा को भी बढ़ाया जाएगा नैनो फिल्टर तकनीक से होगी सफाई विभाग ने डैम की सफाई के लिए नैनो फिल्टर तकनीक लागू करने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही इसे कांके डैम में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से डैम के भीतर माइक्रो बबल और आक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जाएगी। इससे पानी प्राकृतिक रूप से अधिक साफ होगा और जल की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही डैम में वर्षों से जमी गाद को कम करने में भी मदद मिलेगी। नैनीताल मॉडल पर काम करेगी योजना जानकारी के अनुसार, नैनो फिल्टर तकनीक का उपयोग वर्ष 2016 में नैनीताल में जल संकट के दौरान किया जा चुका है। वहां इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। अब उसी मॉडल को रांची में लागू करने की तैयारी चल रही है। विभाग की ओर से इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा। बढ़ाई जाएगी ऑक्सीजन की मात्रा विभागीय इंजीनियरों के अनुसार वर्तमान में गेतलसूद डैम के पानी में लगभग 10 पीपीएम आक्सीजन मौजूद है। विभाग का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 20 पीपीएम तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी में आक्सीजन की मात्रा 4 पीपीएम से नीचे चली जाए तो मछलियों और अन्य जलजीवों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में नई तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। करोड़ों की मशीन खरीदने की तैयारी नैनो फिल्टर तकनीक को लागू करने के लिए विभाग करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी में है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कई दौर की बैठक हो चुकी है मशीन चयन के लिए एक विशेष टीम का गठन भी किया गया है। साथ ही नैनीताल के इंजीनियरों से तकनीकी सहयोग लेने और रांची के इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है।

रांची: ऑनलाइन ठगी मामलों की सुनवाई अब होगी तेज, आईटी विभाग को अधिकार

 रांची राज्य में इलेक्ट्रानिक लेनदेन तथा साइबर फ्राड की शिकायतों का शीघ्र निपटारा होगा। राज्य सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के रूप में सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग के सचिव को प्राधिकृत किया है। झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के सेक्शन 46 के प्रविधान के तहत एडजुडिकेटिंग आफिसर के कर्त्तव्यों के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने व सुनवाई को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी गई है। इस एसओपी पर विभागीय मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली गई है। इससे पहले इसपर विधि विभाग से वेटिंग कराकर कानूनी तौर पर सत्यापित भी कराया गया है। यह एसओपी सूचना तकनीक अधिनियम, 2000 के तहत शिकायतों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी, यूनिफार्म और कानूनी रूप से सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से नागरिकों, बिज़नेस मैन और सरकारी संस्थाओं के लिए शिकायतों की प्रक्रियाओं को आसान बनाना गया है। इसका उद्देश्य शिकायतों का समय पर और अच्छे से निपटारा सुनिश्चित करना तथा डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम में भरोसा मजबूत करना है। इस एसओपी के माध्यम से आइटी एक्ट के तहत फाइल की गई वैसी सभी शिकायतों का निपटारा एडजुडिकेटिंग आफिसर द्वारा किया जाएगा, जहां नुकसान या मुआवजे का दावा पांच करोड़ रुपये से ज़्यादा नहीं है। बताते चलें कि राज्य में एडजुडिकेटिंग आफिसर के रूप में विभाग के सचिव की नियुक्ति तो हुई थी, लेकिन एसओपी नहीं होने से एक्ट का अनुपालन नहीं हो रहा था। यह होगा केस प्रोसेसिंग फ्रेमवर्क किसी शिकायत के निपटारा के लिए फोरा (एफओआरए : फाइलिंग, आब्जेक्शन, रजिस्ट्रेशन, और एलोकेशन प्रोसीजर) सिस्टम को अपनाया जाएगा। शिकायतें एडजुडिकेटिंग आफिसर के कार्यालय में मैनुअल या आनलाइन सिस्टम के ज़रिए दर्ज कराई जाएंगी। शिकायतें निर्धारित फारमेट में ही जमा होंगी। साथ ही निर्धारित शुल्क तथा आवश्यक दस्तावेज की स्वअभिप्रमाणित प्रति जमा करना होगी। शिकायतकर्ता को एक सही तरह से हस्ताक्षर किया हुआ शपथपत्र और पता और संपर्क की पूरी जानकारी देनी होगी। शुल्क डिमांड ड्राफ्ट या चालान से या आनलाइन जमा होगा। शिकायतकर्ता और प्रतिवादी को दिया जाएगा यूनिक केस नंबर सूचना तकनीक एवं ई-गवर्नेंस विभाग का अधिकृत प्रशाखा पदाधिकारी प्राप्त शिकायत और दस्तावेज की शुरुआती जांच करेगा। अगर शिकायत पूरी है,तो उसे रजिस्टर किया जाएगा तथा शिकायतकर्ता को एक यूनिक डायरी नंबर या केस नंबर दिया जाएगा। केस नंबर सभी संबंधित पार्टियों को भी बताया जाएगा। अधूरे आवेदन को लागू नियमों के अनुसार सुधार के लिए वापस किया जा सकता है या रद किया जा सकता है। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। प्रतिवादी तय तारीख पर आवश्यक दस्तावेज के साथ एक लिखित जवाब जमा करेगा। उसपर शिकायतकर्ता भी जवाब दे सकता है तथा एडजुडिकेटिंग आफिसर की अनुमति से अन्य दस्तावेज भी फाइल कर सकता है। सुनवाई ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों हो सकती है सुनवाई ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों हो सकती है। सुनवाई के दौरान पार्टियां डाक्यूमेंट्री सबूत, टेक्निकल रिकार्ड, गवाह आदि प्रस्तुत कर सकती हैं। सुनवाई की कार्यवाही को डिजिटल रिकार्ड के रूप में मेंटेन किया जाएगा। सुनवाई के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर केस के तकनीकी, वित्तीय और विधिक पहलुओं का मूल्यांकन करेगा। इसमें विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया जा सकेगा। जांच के बाद एडजुडिकेटिंग आफिसर रूल-5 के तहत लिखित आर्डर पास करेगा। इसे आफिशियल डिपार्टमेंट पोर्टल पर अपलोड भी किया जाएगा।

टीबी नियंत्रण अभियान को मिलेगी रफ्तार: बिहार में आधुनिक तकनीक से होगी मरीजों की पहचान

समस्तीपुर. जिले में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। अब एआई आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए टीबी मरीजों की तुरंत पहचान की जाएगी। इस नई तकनीक से बिना लक्षण वाले संक्रमित मरीजों का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 56 प्रशिक्षित एक्स-रे तकनीशियनों की तैनाती का निर्णय लिया है। इनमें दो तकनीशियन समस्तीपुर जिले के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। जिले में समस्तीपुर और विभूतिपुर प्रखंड को इस अभियान के लिए चयनित किया गया है। आयुष्मान आरोग्य शिविर में जांच स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान आरोग्य शिविरों में संभावित टीबी मरीजों की जांच एआई तकनीक से लैस हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों से की जाएगी। राज्य में कुल 104 पोर्टेबल मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके संचालन के लिए एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एनके चौधरी ने बताया कि अभियान का उद्देश्य टीबी संक्रमण और मृत्यु दर को कम कर देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेजी लाना है। उन्होंने कहा कि मरीजों की जल्द पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। अभियान में मिले 1264 नए मरीज स्वास्थ्य विभाग ने 24 मार्च से 7 मई तक जिले में विशेष टीबी जांच अभियान चलाया था। इस दौरान 288 शिविर लगाए गए और 312 हाई रिस्क गांवों में विशेष स्क्रीनिंग अभियान संचालित किया गया। अभियान के दौरान कुल 18,803 लोगों की जांच की गई। स्क्रीनिंग में 1264 नए टीबी संक्रमित मरीजों की पहचान हुई। एआई तकनीक की मदद से पांच ऐसे मरीज भी मिले, जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण मौजूद नहीं थे। कम रेडिएशन में सटीक जांच स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन पारंपरिक मशीनों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। इस मशीन से केवल तीन से चार मिली एंपियर तक रेडिएशन निकलता है, जबकि सामान्य एक्स-रे मशीनों में लगभग 300 मिली एंपियर रेडिएशन उत्सर्जित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम रेडिएशन के कारण यह तकनीक मरीजों के लिए सुरक्षित है। वहीं एआई आधारित प्रणाली तेजी और सटीकता के साथ टीबी संक्रमितों की पहचान करने में सक्षम साबित हो रही है।

किसी की लगी लॉटरी, किसी को लगा झटका! बिहार कैबिनेट विस्तार में दिखा बड़ा फेरबदल

पटना  बिहार में सम्राट का स्मार्ट मूव। कल तक जो मुख्यमंत्री के रेस में थे मंत्री तक नहीं बन पाए। सम्राट का 'स्मार्ट मूव' गांधी मैदान में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान दिखा। कई मंत्रियों को मिजाज के साथ-साथ विभाग भी बदल दिया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में विभागों का जब बंटवारा हुआ तो कई के तो लॉटरी लग गए, गर कई को तो जोर का झटका धीरे से लगा। बिहार में जिन मंत्रियों का विभाग बदला बीजेपी के कई मंत्रियों के विभाग बदल दिए गए। ये बदलाव विभाग में अपेक्षित कार्य नहीं करने के कारण नहीं लगा। ऐसा इसलिए कि तीन चार-माह में किसी का मूल्यांकन क्या हो सकता है। लेकिन जैसे पानी में पत्थर फेंक शांत तालाब में हलचल लाई जाती है वैसे ही विभाग को बदल कर आलाकमान ने साफ-साफ कह दिया कि यहां स्थाई कुछ नहीं होता, काम कर के दिखाना पड़ता है।     विजय सिन्हा: पिछले मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री रहे विजय कुमार सिन्हा को एक साथ कई विभाग मसलन राजस्व एवं भूमि सुधार के साथ-साथ खान एवं भूतत्व विभाग भी था। लेकिन इस बार विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग से संतोष करना पड़ा।     दिलीप जायसवाल: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के पास पिछली बार पथ निर्माण जैसा विभाग था, मगर इस बार उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग दिया गया।     रामकृपाल यादव: विभाग तो रामकृपाल यादव का बदल दिया गया है। रामकृपाल यादव के पास कृषि था, अब इन्हें सहकारिता दी गई है।     नीतीश मिश्रा: पिछले के पिछले मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री थे। इस बार उन्हें नगर विकास विभाग मिला है। साथ में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग मिला है।     अरुण शंकर प्रसाद: पिछले मंत्रिमंडल में कला, संस्कृति एवं पर्यटन थे, उन्हें श्रम एवं प्रवासी कल्याण युवा विभाग दी गई है। बीजेपी में जिनका कद बढ़ा कुछ विधायक जो इस बार मंत्री बने हैं उन पर सम्राट चौधरी विशेष मेहरबान रहे हैं।     इंजीनियर शैलेन्द्र: पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल इंजीनियर शैलेन्द्र को मिला बड़े विभाग का तोहफा। इन्हें पथ निर्माण जैसा विभाग दिया गया है।     संजय टाइगर: इस बार उच्च शिक्षा विभाग देकर मान बढ़ाया है। साध ही विधि विभाग भी दिया गया है। इसके पहले संजय टाइगर को श्रम विभाग था।     श्रेयसी सिंह: इनका कद बढ़ाया गया है, इन्हें पहले खेल विभाग मिला था। इस बार इस विभाग के साथ ही इन्हें उद्योग भी मिला है।     प्रमोद चंद्रवंशी: पर्यावरण एवं वन खान एवं भूतत्व, कला एवं संस्कृति विभाग बिहार में पहली बार मंत्री बने     केदार गुप्ता: पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी दी गई।     रामचंद्र प्रसाद: पर्यावरण, वन्य एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मिला।     नंद किशोर राम: डेयरी, मतस्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री बना गए।

किसानों की समस्या पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए तत्काल जांच के आदेश

 पटना बिहार में अपनी विश्व प्रसिद्ध लीची की फसल को कीड़ों और बीमारियों से बर्बाद होता देख परेशान किसानों के लिए एक बड़ी और राहत देने वाली खबर है। लीची के फलों में लगने वाले खतरनाक 'स्टिंग बग' और अन्य बीमारियों से फसल को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के सीधे निर्देश पर एक्स्पर्ट्स की एक विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया है। यह उच्च स्तरीय कमेटी न सिर्फ प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी, बल्कि एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को सौंपेगी। किसानों की गुहार के बाद एक्शन में आए कृषि मंत्री दरअसल, इस सीजन में बिहार के लीची उत्पादक किसान अपनी फसल में लग रहे 'स्टिंग बग' नाम के कीड़े से भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। इस कीड़े के कारण फल खराब हो रहे हैं, जिससे किसानों की आमदनी पर गहरा संकट आ गया है। किसानों द्वारा इस गंभीर मुद्दे को मजबूती से उठाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल इसका संज्ञान लिया। उनके तुरंत निर्देश पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत आने वाले राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर द्वारा यह विशेषज्ञ कार्यबल गठित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। खेतों का दौरा करेगी टीम जारी आदेश के मुताबिक, यह टास्क फोर्स प्रभावित क्षेत्रों के लीची बागानों का जमीनी दौरा कर 'स्टिंग बग' की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी। टीम का मुख्य काम फसल को हुए नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करना होगा। इसके अलावा, यह टीम किसानों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कीटनाशकों और उपायों का सुझाव देगी। साथ ही, भविष्य में इस तरह की बीमारियों से फसल को बचाने के लिए लॉंग टर्म रणनीति तैयार करेगी और राज्य व केंद्र स्तर पर जरूरी हस्तक्षेप के लिए अपनी सिफारिशें भी देगी। दिग्गज वैज्ञानिकों को सौंपी गई जांच की कमान इस अहम कमेटी की कमान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. विकास दास को सौंपी गई है, जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ उद्यान-सह-बिहार राज्य बागवानी मिशन और पौधा संरक्षण निदेशालय के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि और बिहार कृषि विवि के जाने-माने कीट वैज्ञानिकों को भी टीम में जगह दी गई है। वहीं, डॉ. इप्सिता सामल और प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. विनोद कुमार को इस टास्क फोर्स का सदस्य सचिव बनाया गया है।

फूहड़ गानों पर लगेगी रोक, मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने दी चेतावनी

 पटना बिहार में अब अश्लील और फूहड़ गानों के जरिए रातों-रात सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले गायकों और निर्माताओं की खैर नहीं है। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने ऐसे गानों और कलाकारों पर सख्त कार्रवाई करने के साफ संकेत दे दिए हैं। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जो लोग फूहड़ गानों के जरिए समाज को दूषित कर रहे हैं, सरकार सबसे पहले उन्हें ठीक करने का काम करेगी। उनके इस बयान के बाद माना जा रहा है कि अश्लीलता पर जल्द ही बड़ी नकेल कसी जाएगी। फूहड़ गानों पर होगा सीधा एक्शन कला और संस्कृति विभाग की अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी कलाकार गलत या आपत्तिजनक गाना गाता है, तो उसे रोकने के लिए विभाग अब पूरी सख्ती से काम करेगा। प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा, “फूहड़ गाने बजाकर समाज का माहौल खराब करने वालों को हम सबसे पहले ठीक करेंगे। कला और संस्कृति ऐसा माध्यम बिल्कुल नहीं होना चाहिए जिससे किसी का मन खराब हो या समाज में किसी तरह की आपत्ति पैदा हो।” 'कला समाज को जोड़ने का माध्यम है, बिगाड़ने का नहीं' मंत्री ने कला के मूल उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि बिहार हमेशा से कला और संस्कृति के मामले में एक बेहद समृद्ध राज्य रहा है। यहां की लोक परंपराएं, सुरीला संगीत और सांस्कृतिक विरासत पूरे देशभर में अपनी एक अलग और सकारात्मक पहचान रखती हैं। उन्होंने कहा, "कला और संस्कृति लोगों के मन को ठीक रखती है। यह केवल सस्ते मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सही दिशा देने का भी काम करती है। कला संस्कृति वह चीज है जो लोगों को आपस में जोड़ती है, उनके मनोभाव को निखारती है और व्यक्तित्व का विकास करती है।" बिहार की सांस्कृतिक पहचान को बचाने और बढ़ाने पर जोर अपने विजन को साझा करते हुए मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने स्पष्ट किया कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करना है। विभाग अब ऐसे कार्यक्रमों और प्रतिभावान कलाकारों को मंच देकर आगे लाएगा जो समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हों। मंत्री के इस कड़े बयान के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में बिहार में बनने वाले अश्लील और विवादित गानों पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए सरकार कोई बड़ा और सख्त कानूनी कदम उठा सकती है।