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एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा, 99.8% साइबर केस लंबित, जांच प्रक्रिया धीमी

 पटना बिहार में साइबर अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 2023 में 4450 के मुकाबले 2024 में साइबर अपराध के लगभग डेढ़ गुना अधिक 6380 कांड दर्ज किए गये। खास बात रही कि इस साल सूबे में साइबर अपराध के कुल 11764 लंबित कांडों में मात्र 12 कांडों का ही अंतिम रूप से निबटारा हो सका। 99.8 फीसदी कांड लंबित रह गये। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के जारी आपराधिक आंकड़े 2024 से इसकी जानकारी मिली है। आंकड़े के मुताबिक इस साल राष्ट्रीय स्तर पर भी करीब 91 फीसदी कांड लंबित रहे। 1333 साइबर अपराधी हुए गिरफ्तार, आठ दोषी करार एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल साइबर अपराध के मामले में बिहार से 1333 अपराधी गिरफ्तार हुए। बिहार में साइबर अपराध के जिन 12 मामलों में अंतिम कार्रवाई हुई, इनमें भी आठ दोषी करार दिए गये। इस साल देशभर में मात्र 2292 साइबर अपराधियों को सजा मिली। इनमें सर्वाधिक 637 तेलंगाना, 303 आंध्र प्रदेश और 237 कर्नाटक के रहे। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में साइबर अपराध से जुड़े 98 हजार मामले ट्रायल के लिए लंबित रहे। इनमें बिहार के 5782 मामले भी शामिल रहे। 2024 में दर्ज कांडों में से 917 कांड ट्रायल के लिए भेजे गये जबकि 2023 के 4865 कांड ट्रायल के लिए पूर्व से लंबित थे। 87% कांडों का नहीं हुआ अनुसंधान भी पूरा आंकड़ों के मुताबिक साइबर अपराध के दर्ज कुल कांडों में 87 फीसदी कांडों का पुलिस अनुसंधान भी पूरा नहीं हो सका। अनुसंधान के लिए 11764 कांड उपलब्ध थे। इनमें 524 कांड पर्याप्त सबूत नहीं रहने के कारण बंद कर दिए गये। 917 मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।इस तरह, कुल 1481 मामले पुलिस के स्तर पर निष्पादित हुए। लेकिन, 10283 कांडों में पुलिस का अनुसंधान भी पूरा नहीं हो सका। महिलाओं के विरुद्ध 864 साइबर अपराध हुए बिहार में साइबर अपराध के दर्ज मामलों में 3771 ऑनलाइन ठगी, 1167 आपसी दुश्मनी, 187 फिरौती और 96 यौन शोषण से संबंधित रहे। महिलाओं के विरुद्ध 864 साइबर अपराध हुए। इनमें 40 साइबर ब्लैकमेलिंग, 73 साइबर छेड़खानी और 70 फेक प्रोफाइल से संबंधित रहे। इस दौरान बच्चों के विरुद्ध भी 21 साइबर अपराध दर्ज हुए।

सराय स्टेशन के पास सिग्नल टावर पर संदिग्ध IP कैमरा, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं

मुजफ्फरपुर हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड के सराय स्टेशन के आगे समपार फाटक संख्या-43 सी स्पेशल के पास लगे सिग्नल टावर पर इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) कैमरा लगाकर आतंकी नेटवर्क द्वारा रेलवे ट्रैक और सड़क की निगरानी किए जाने का मामला सामने आया है। सोलर संचालित इस कैमरे को इंटरनेट के जरिए चलाया जा रहा था। गुमटीमैन से मिली सूचना के बाद कैमरे की जांच में सनसनीखेज जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि कैमरे में आतंकी यासीन भटकल की तस्वीर भी मिली है। मुख्यालय को दी गई सूचना आईपी एड्रेस की जांच में कर्नाटक के तटीय क्षेत्र से पाकिस्तान कनेक्शन वाले आतंकी नेटवर्क से इसकी निगरानी होने की बात सामने आई है। सराय स्टेशन के स्टेशन मास्टर मनोज कुमार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर मुख्यालय को सूचना दी गई। शुक्रवार देर शाम एटीएस की तीन सदस्यीय टीम और एसटीएफ मौके पर जांच के लिए पहुंची। पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ आईजी अमरेश कुमार और रेल एसपी बीणा कुमारी को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है। NGO कर्मी बनकर पहुंचा संदिग्ध युवक एक दिन पहले हरियाणवी बोलने वाला एक संदिग्ध युवक समपार फाटक पर पहुंचा और खुद को एक एनजीओ से जुड़ा बताते हुए सिग्नल टावर पर कैमरा फिट कर वहां से निकल गया। गुमटीमैन को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उसने स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी। स्टेशन मास्टर ने तुरंत आरपीएफ को सूचना दी। आरपीएफ ने मामला जीआरपी हाजीपुर और मुजफ्फरपुर को भेज दिया। जांच में जुटीं कई एजेंसियां जीआरपी के एसआई मौके पर पहुंचे और कैमरा उतरवाकर गुमटीमैन को सौंप दिया। बाद में रेल डीएसपी सोनपुर सहकार खान के नेतृत्व में जीआरपी टीम ने गहन जांच शुरू की, जिसके बाद मामला गंभीर रूप में सामने आया। इसके बाद कैमरे को मुजफ्फरपुर जीआरपी को सौंप दिया गया। हाजीपुर थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक टीम जांच में जुटी है। वहीं मुजफ्फरपुर जीआरपी के एसआई के नेतृत्व में दूसरी टीम भी अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है। मामले की तकनीकी जांच के लिए रेलवे के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। अंधेरे में भी कर रहा था साफ रिकॉर्डिंग यह कैमरा आईपी तकनीक पर आधारित है और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीर रिकॉर्ड कर रहा था। कैमरे में 4G सिम लगा था। पुलिस ने कैमरे से करीब एक घंटे की रिकॉर्डिंग भी निकाली है। कैमरा मूवेबल था और कर्नाटक में बैठा व्यक्ति इसे मोबाइल से ऑपरेट कर रहा था। कैमरे के जरिए रेलवे ट्रैक के साथ-साथ सड़क मार्ग की भी निगरानी की जा रही थी आतंकी साजिश की आशंका गहराई प्रारंभिक जांच में कैमरे का कनेक्शन पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन से जुड़े लोगों के नाम पर होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रेलवे ट्रैक, किसी वीआईपी मूवमेंट, हत्या या बड़े आतंकी हमले की रेकी के लिए यह कैमरा लगाया गया हो सकता है। आसपास लगे अन्य कैमरों और फुटेज को भी खंगाला जा रहा है, ताकि कैमरा लगाने वाले युवक की पहचान की जा सके।  

सावधान! बिहार में साइबर अपराधियों ने अपनाया नया तरीका, बड़े अधिकारियों के नाम पर ठगी

पूर्णिया. सावधान, साइबर बदमाश आपको एसपी, डीएम ही नहीं सीएम व पीएम बनकर भी झांसा दे सकते हैं। हाल में साइबर बदमाशों द्वारा इस तरकीब का खूब उपयोग किया जा रहा है और लोगों को आराम से चूना लगा रहे हैं। साइबर थानों तक इस तरह की शिकायतें पहुंच भी रही है और साइबर थाना पुलिस ऐसे मामलों को सुलझाने में जुटी भी रहती है। साइबर अपराध अब पुलिस के लिए नयी चुनौती बनती जा रही है। यद्यपि इसकी रफ्तार भी चौकाने वाली है। पूर्णिया साइबर थाने में औसतन हर दिन साइबर ठगी की तीन दर्जन से अधिक शिकायतें पहुंच रही है। इसमें अलग-अलग तरकीब का उपयोग कर लोगों का खाता खाली करने की बात सामने आ रही है। इसमें पीएम व सीएम वाला भी एक नया ट्रेंड है। प्रधानमंत्री की आवाज से ठगी चंद दिन पूर्व ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज में जन धन योजना अंतर्गत खाते में 2000 रूपये आने का प्रलोभन देकर साइबर अपराधी ने एक बुजुर्ग के बैंक खाते से 1496 रूपये उड़ा लिये थे। पीड़ित जलालगढ़ थाना क्षेत्र के एकांबा निवासी सुधीर प्रसाद मजूमदार ने साइबर थाना में आवेदन दिया था। बुजुर्ग ने बताया था कि उनके मोबाइल पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज में एक संदेश आया। इस संदेश में कहा गया कि जिन लोगों का जन धन योजना अंतर्गत एसबीआई में खाता है, उनके खाते में दो हजार रूपये का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए भेजे गए मैसेज को स्क्रैच करें। उन्होंने बताया कि भेजे गए संदेश को जैसे ही स्क्रैच किया, उनके खाते से 1496 रूपये की निकासी का मैसेज आया। उन्होंने बताया कि प्रधान मंत्री के आवाज के झांसे में आकर वे ठगी के शिकार हो गए। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज AI से तैयार की जाती है। साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट और केवाईसी के नाम पर भी लोगों को चूना लगा रहे हैं। यही नहीं पुलिस, सीबीआई या आरबीआई अधिकारी बनकर भी साइबर बदमाशों द्वारा चूना लगाया जा रहा है। दारोगा बताकर लूट इसी तरह खुद को थाना का दारोगा बताकर एक व्यक्ति से दर्ज केस के आरोपितों की गिरफ़्तारी के नाम पर बारी-बारी से कुल 9010 रूपये की आनलाइन ठगी कर ली। रघुवंशनगर थाना क्षेत्र के औरलाहा निवासी पीड़ित सुदीप कुमार ने साइबर थाना में आवेदन दिया है। आवेदन में कहा गया है कि गत 25 अप्रैल को उन्हें मोबाइल नंबर 8962070351 से कॉल आया, जिसमें कहा कि वह रघुवंशनगर थाना से दरोगा बात कर रहा है। उनके द्वारा जो केस दर्ज किया गया है, उसके आरोपितों की गिरफ्तारी हो जाएगी लेकिन उन्हें पैसा भेजना पड़ेगा। उनके द्वारा हामी भर दी गई। उसने इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के खाता संख्या 009310356120 से 25 अप्रैल को 1000, 1000 एवं 800 कुल 3800 रूपये दरोगा के बताए स्कैनर पर भेज दिया। इसके बाद दरोगा ने कहा कि एसपी से बात कीजिए, आपको फोन कर रहे है। तब उन्हें 8962604672 नंबर से कॉल आया और कहा कि एसपी साहब बोल रहे है, अभियुक्त को जल्दी से पकड़ना है, तो उन्हें भी पैसा भेजना होगा। इस तरह से कुल मिला कर उनके खाता से 9010 रुपये उड़ा लिए गए।

‘सफाई साथी अभियान’ के तहत पतरातू डैम पर शुरू हुई अनोखी पहल की हो रही चर्चा

रांची रामगढ़ जिला अंतर्गत पतरातू डैम के पास एक नई पहल की शुरुआत हुई है। यहां बीआइटी मेसरा के छात्र छात्राओं ने यत्र तत्र फेंकी हुई पानी की बोतल से बेहद मजबूत डस्टबिन बनाए हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बेहद सशक्त संदेश है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। बीआईटी मेसरा के छात्रों ने वेस्ट वाटर और प्लास्टिक बोतलों से डस्टबिन बनाए। बीआईटी मेसरा के डिपार्टमेंट आफ मैनेजमेंट की मानसी सिंह और उनकी टीम ने 'सफाई साथी अभियान' के तहत पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर जोर दिया है। इस तरह का प्रयोग पहली बार राज्य के किसी संस्थान के छात्र छात्राओं द्वारा किया गया है। वेस्ट वाटर बोतलों, प्लास्टिक बोतलों से बनाए गए डस्टबिन को पतरातू में लगाया गया है, जिसे बीआइटी मेसरा के डिपार्टमेंट आफ मैनेजमेंट के छात्रों द्वारा तैयार किया गया है। छात्रा मानसी कुमारी ने बताया कि कहीं भी आप जाएं तो आपके इर्द गिर्द बेकार पड़ी पानी की बोतलें फेंकी रहती हैं, जो हमारे पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है। हमारी टीम ने इन बोतलों को नया रूप देने की ठानी और पतरातु डैम से इसकी शुरुआत की गई है। वहां हमलोग गए और फेंकी हुई बोतल को जमा कर डस्टबिन का रूप देने में लगा गए। जब डस्टबिन तैयार हो गया तो देखने में बेहद आकर्षक लग रहा था। आसपास के लोग भी इस नए प्रयोग को देखने जुट गए। उन्होंने बताया कि बीआईटी मेसरा कैंपस में भी प्रतिदिन बोतलें जहां तहां फेंकी दिख जाती हैं। जिसका उपयोग हम रचनात्मक कार्यों में कर सकते हैं। इस नेक कार्य में संस्थान के यूथ टूरिज्म क्लब का भी भरपूर सहयोग मिला। क्लब की मीनाक्षी, हनाफ, गौतम, स्नेहल, तनिष्क, निधि, ईशा, साकेत, मुस्कान जैसे सहयोगियों ने मिलकर इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया। अपने अनुभव साझा करते मानसी ने बताया कि जब मेसरा कैंपस में फेंकी हुई बोतल को चुनती थी तो वहां सहयोगी और कुछ लोग कहते थे कि एमबीए करने के बाद अब यही काम तुम्हें करना बाकी रह गया है, लेकिन हमने फेंकी हुई बोतल से डस्टबिन बनाने की ठान ली थी तो पीछे नहीं हटी। यही कारण है कि डस्टबिन इंस्टालेशन की शुरुआत पतरातु से की। हालांकि, मेसरा कैंपस में भी जल्द ही एक डस्टबिन इंस्टाल करूंगी। बताया कि आमतौर एक नीले और पीले रंग के डस्टबिन की कीमत 4500 रूपये होती है जबकि बेकार या फेंकी हुई प्लास्टिक बोतलों से यह डस्टबिन महज 1200 रूपये में तैयार की जा रहीं हैं। बोतल को जमा कर की पेंटिंग मानसी सिंह ने बताया कि सबसे पहले हमने फेंकी हुई बोतलों को जमा किया। अच्छी तरह से धोने के बाद बोतल की पेंटिंग की ताकि दिखने में आकर्षक लगे। कहा कि झारखंड में यह पहल पहली बार की जा रही है, जिसमें वेस्ट प्लास्टिक बोतलों से डस्टबिन बनाकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की जा रही है। मानसी ने बताया कि हमने देखा की अक्सर ये बोतलें नालों में चली जाती हैं जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है बल्कि बरसाती दिनों यही जमा बोतलें नाला जाम का कारण बनती हैं और नाले का गंदा पानी उफनकर बाहर निकलता है और गंदगी फैलती है। इस समस्या को देखते हुए मानसी सिंह और उनकी टीम ने 'सफाई साथी अभियान' की शुरुआत करने का निर्णय लिया। इस पहल के अंतर्गत इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को पुनः उपयोग करके डस्टबिन बनाए जा रहे हैं, ताकि कचरे का सही प्रबंधन हो सके और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़े। उन्होंने कहा कि इस डस्टबिन को बनाने और पतरातु डैम जाकर इंस्टाल करने में प्रबंधन की अनुमति के लिए चार माह का समय लग गया जबकि आमजनों से जुड़ा यह नवाचार है।

देशभर में 14 मई को ब्लैकआउट मॉक ड्रिल? सायरन सुनते ही बंद करनी होंगी लाइटें

पूर्णिया. एक बार फिर पूर्णिया समेत सीमांचल के चारों जिले के साथ राजधानी पटना में ब्लैक आउट होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश के आलोक में किसी भी आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आगामी 14 मई को हवाई हमला एवं ब्लैकआउट संबंधी एक वृहद मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन, पूर्णिया की ओर से जारी सूचना में आम जनमानस से यह अपील किया गया है कि 14 मई को शहर में सायरन बजने, अचानक बिजली कटने या आपातकालीन वाहनों की आवाजाही देखकर बिल्कुल भी घबराएं नहीं। यह कोई वास्तविक आपात स्थिति नहीं है, बल्कि हमारी सुरक्षा और बचाव प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए किया जा रहा एक मॉक ड्रिल है। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन कर इस मॉक ड्रिल को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। राज्य के छह जिलों में हो रहा है आयोजन केंद्र सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार इस तरह के अर्द्धवार्षिक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाना है। राज्य के छह नागरिक सुरक्षा जिलों पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया तथा कटिहार में यह आयोजन किया जा रहा है। राज्य स्तर पर नागरिक सुरक्षा निदेशालय को इस मॉक ड्रिल के सफल आयोजन के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है, जिसकी तैयारियां राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन विभाग की निगरानी में की जा रही हैं। इस वृहद अभ्यास के दौरान आपातकाल के विभिन्न परिदृश्यों का सजीव चित्रण और प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया जाएग। बताया गया है कि सायरन बजते ही पूरे क्षेत्र की बत्तियां बंद कर अंधेरा रखना है। इसके लिए विद्युत विभाग के साथ विशेष समन्वय स्थापित किया गया है। इस मॉक ड्रिल में विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय और उनके रिस्पांस टाइम का आकलन किया जाएगा। इसके लिए अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, पुलिस प्रशासन, होमगार्ड, रेड क्रॉस सोसाइटी एवं नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों की विशेष रूप से तैनाती की जायेगी।

सभी जिलों में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं तलाशकर युवाओं को अवसर देने पर जोर

पटना बिहार पर्यटन विभाग हर साल चार लाख लोगों को रोजगार देगा। इस संबंध में विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अगले पांच वर्षों का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। शुक्रवार को विभाग के मंत्री केदार गुप्ता ने अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने विभाग की ओर से पिछली सरकार द्वारा तय की गई योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा। इसके अलावा लंबित पड़ी योजनाओं पर फिर से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। विभाग अपनी नयी योजना में पांच वर्षों में 20 लाख लोगों को रोजगार देगा। वर्ष 2030 तक विभाग पूरे प्रदेश में इतने युवाओं को रोजगार से जोड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार का भी सृजन होगा। राज्य सरकार ने सात निश्चय तीन के तहत एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी विभागों की हिस्सेदारी तय की जा रही है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी उद्योग विभाग के साथ पर्यटन विभाग को ही मिला है। सरकार के लक्ष्य का 20 फीसदी केवल पर्यटन विभाग ही पूरा करेगा। ऐसे में रोजगार देने के लिए पर्यटन विभाग आगे आया है। उसने आगामी पांच वर्षों में 20 लाख रोजगार देने के लक्ष्य को हर वर्ष के लिए अलग-अलग निर्धारित किया है। पर्यटन विभाग अगले पांच वर्षों में सभी जिलों में रोजगार की संभावनाओं की तलाश करेगा और फिर युवाओं को उनकी पात्रता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराएगा। युवा जिस कौशल के होंगे, उन्हें उसी में रोजगार मिलेगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्हें अपने-अपने जिलों में रोजगार की संभावनाओं के सेक्टर की पहचान करने और फिर उनमें युवाओं के लिए अवसर की उपलब्धता की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। सरकार हर संभावनाओं को युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी विशेषज्ञों के अनुसार सूबे में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसका अबतक ढंग से विकास नहीं हो पाया है। इस समय पर्यटन के क्षेत्र में काफी कम रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यही नहीं बहुत कम संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अधिसंख्य रोजगार असंगठित क्षेत्र में है और वे भी अनिश्चितता वाले हैं। इसलिए राज्य सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के हर संभव संभावनाओं की तलाश कर उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी। धार्मिक पयर्टन का होगा विकास सूबे के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को विस पहुंच अपने विभाग का कार्यभार संभाला। उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर विभाग के कामकाज की जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि उनका लक्ष्य अगले पांच सालों में प्रदेश के उन पर्यटन क्षेत्रों का विकास करना होगा, जिनकी चर्चा बहुत कम होती है। खासकर धार्मिक पर्यटन को लेकर प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता पर्यटकीय महत्व वाले धार्मिक स्थलों की पहचान करना है, ताकि विभागीय अधिकारियों से विमर्श कर उनके विकास के लिए किए जाने वाले कामों की सूची तैयार की जा सके। इसके लिए वे जल्द ही एक बैठक अधिकारियों संग बुलाकर इस योजना पर काम शुरू करेंगे। इसके अलावा प्रदेश में प्राकृतिक दृश्यों वाले स्थानों की भरमार है। उनको भी विकसित कर पर्यटन के मानचित्र पर स्थान दिलाना उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है।

बिहार सरकार में 26 मंत्रियों ने कार्यभार संभाला, विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने पर जोर

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग को ठीक से समझें और योजनाओं की समीक्षा करें। साथ ही अपने-अपने विभाग में नयी योजनाओं की संभावनाओं को तलाशें और उसका प्रस्ताव तैयार करें। राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लोक सेवा आवास, 1अणे मार्ग के लोक संवाद में सभी नवनियुक्ति मंत्रियों के साथ औपचारिक बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी कहा कि अपने विभाग की पूरी जानकारी रखें। किसी भी योजना की पूरी जानकारी लेने के बाद ही मीडिया में इससे संबंधित बायन दें। 26 मंत्रियों ने कामकाज संभाला नवगठित एनडीए सरकार में शपथ लेने के अगले ही दिन ज्यादातर मंत्रियों ने अपने-अपने महकमे का दायित्व संभाल लिया है। शुक्रवार को सुबह दस बजे से ही मंत्रियों के कामकाज संभालने का सिलसिला शुरू हो गया और यह शाम साढ़े छह बजे तक चला। इस दौरान 26 मंत्रियों ने विभागों में जाकर विधिवत कामकाज शुरू कर दिया। दायित्व संभालने वाले मंत्रियों ने विकास कार्यों में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं को लाभुक तक पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। मुख्यमंत्री समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने 15 अप्रैल को ही अपना दायित्व संभाल लिया था। गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में 32 और मंत्री मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने। 26 मंत्रियों के दायित्व संभालने के बाद शेष छह मंत्री शनिवार से लेकर मंगलवार तक अपने-अपने विभागों में योगदान करेंगे। इनमें कृषि मंत्री विजय सिन्हा, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं। अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा : निशांत जदयू नेता निशांत ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने उनको जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसको पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में राज्य में जो भी ईमानदारीपूर्वक विकास कार्य किए, उसे भविष्य में भी जारी रखा जाएगा। वे शुक्रवार को विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग में मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। निशांत ने कहा कि शहर से लेकर गांव तक बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जायेगी। गांवों और शहरों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के अंतर को खत्म किया जायेगा। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में कराये जाने वाले विकास कार्यों में पूरी ईमानदारी और संवेदना बरती जाएगी। राज्य की अच्छी छवि बनाने को प्रभावी कदम उठाएं : श्रवण सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि राज्य के बाहर भी बिहार की सकारात्मक छवि को मजबूत बनाना है। वे शुक्रवार को विभाग का पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर भी राज्य की अच्छी छवि बनाए रखने के लिए विस्तृत कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रेडियो और सोशल मीडियाका समन्वित उपयोग किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार की प्रमुख योजनाओं अंतिम छोर तक पहुंचाई जाए। कहा कि विभाग में मानव संसाधन की कमी को तत्काल पूरा किया जाए, जिससे बिना किसी बाधा और देरी के सभी काम पूरा हो सके। सूचना प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवीन तकनीकों और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए।

130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा, पटना में जनजीवन अस्त-व्यस्त

 पटना बिहार में अलग-अलग इलाकों में बारिश रोज हो रही है। पिछले 24 घंटे में पटना, पूर्णिया, अररिया, वैशाली, भोजपुर और समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण में आंधी-बारिश ने काफी तबाही मचाई। पटना में पांच सौ से अधिक पेड़ टूटकर गिर गए। पेड़ के नीचे दबने से तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं वैशाली में दो, भोजपुर में एक और समस्तीपुर में एक-एक शख्स की जान वज्रपात की चपेट में आने से हो गई। आज फिर से मौसम विज्ञान केंद्र ने बिहार के सभी 38 जिलों में आंधी और भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान ओले गिरने के भी आसार जताए गए हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क और सावधान रहने की सलाह दी है। पटना में 130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवा शुक्रवार शाम को पटना का मौसम अचानक बदल गया। 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आई आंधी ने सबकुछ तबाह कर दिया। करीब 500 से अधिक पेड़ सड़क पर गिर गए। बेली रोड, गर्दनीबाग, वीरचंद्र पटेल रोड समेत कई जगह पेड़ गिरने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गई। देर रात तक बेली रोड पर लंबा जाम लगा रहा। दो किमी की दूरी तय करने में दो से ढाई घंटे तक का वक्त लग गया। पटना जू में 35 से अधिक पेड़ गिर गए। आलम यह हआ कि आज यानी शनिवार को पटना जू को बंद कर दिया गया। वहीं खराब मौसम के कारण कोलकाता से आ रही फ्लाइट डायवर्ट हो गई। पटना के 125 फीडरों से बिजली सप्लाई बंद हो गई। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। Bihar: चिता सज चुकी थी, बेटे तैयार थे; लेकिन जमीन विवाद में सात घंटे तक अटका रहा मां का अंतिम संस्कार कहां कितनी गर्मी पड़ी? मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में राज्य का अधिकतम तापमान 30 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री सेल्सियस कैमूर में दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान 20.0 से 26.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड हुआ। सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस फॉरबिसगंज (अररिया) में दर्ज किया गया। राज्य में सबसे अधिक 54.4 मिमी बारिश ठाकुरगंज में दर्ज की गई। इसके अलावा पलासी में 42.4 मिमी, मानपुर में 22.0 मिमी, टेढ़ागाछ में 19.6 मिमी और दिघलबैंक में 19.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। इसके साथ ही कुमारखंड में 18.2 मिमी, मेसकौर में 17.0 मिमी, फॉरबिसगंज में 15.2 मिमी और सासाराम में 13.6 मिमी बारिश हुई।

तेज हवाओं और बारिश से पटना में तबाही, पेड़ गिरे और गाड़ियां क्षतिग्रस्त, मौसम विभाग की चेतावनी

 पटना बिहार की राजधानी पटना में मौसम एक बार फिर खराब हो गया है। शुक्रवार 8 मई को दोपहर में अचानक शहर के आसमान में काले बादलों ने डेरा डाल दिया। दिन में 4 बजे ही अंधेरा छा गया और तेज हवाओं के साथ शाम को बारिश शुरू हो गई। आंधी से जगह-जगह पेड़ गिर गए। मौसम विभाग ने तात्कालिक पूर्वानुमान जारी करते हुए बिहार के 6 जिलों में शाम को आंधी, बारिश, वज्रपात का रेड अलर्ट जारी किया है। इनमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, शिवहर और सीतामढ़ी जिले शामिल हैं। इससे पहले औरंगाबाद, गयाजी, पटना, जहानाबाद और अरवल जिले में भी रेड अलर्ट की चेतावनी जारी की गई। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के भीतर राज्य भर में मौसम खराब रहने की आशंका जताई है। शनिवार 9 मई को राज्य के अधिकांश जिलों में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली गिरने, बारिश के साथ आंधी और ओलावृष्टि का खतरा बना रहेगा। लोगों से खराब मौसम में सावधान रहने की अपील की गई है। पटना में बारिश पटना में गिरे पेड़, गाड़ियां दबीं राजधानी में शुक्रवार दोपहर बाद आई आंधी से कई जगहों पर नुकसान की खबर है। हार्डिंग रोड सिंचाई भवन के पास तेज हवा से एक पेड़ गिर गया, इससे ठेला और बाइक उसके नीचे दब गई। हज भवन के पास भी सड़क किनारे पेड़ गिरने से एक गाड़ी उसके नीचे दब गई। फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पटना में आंधी से गिरे पेड़ बिहार में जारी है आंधी, बारिश का दौर बिहार में इस सप्ताह मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात से विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण बिहार, पूर्वी बिहार और सीमांचल के कुछ जिलों में बरसात हुई। किशनगंज, अररिया, गयाजी, मधेपुरा, नवादा, रोहतास, नालंदा, कैमूर जैसे जिलों में कुछ जगहों पर पानी गिरा। पटना में दो दिन बारिश के आसार राजधानी में अगले दो दिनों तक आंधी-बारिश के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 9 और 10 मई को पटना में बादल छाए रहेंगे और मेघगर्जन के साथ बारिश के एक-दो दौर चल सकते हैं। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी दो से तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की संभावना है। कब तक खराब रहेगा बिहार का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिमी यूपी में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिमी यूपी और उससे सटे बिहार के इलाकों में भी हवा का एक चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। इसका असर मौसम पर दिख रहा है। 9 मई को बिहार के अधिकांश हिस्सों में बरसात की संभावना जताई जा रही है। अगले सप्ताह से मौसम के सामान्य होने के आसार हैं। आंधी-बारिश का दौर खत्म होने के बाद राज्य में तापमान में अचानक बढ़ोतरी होगी। साथ ही भीषण गर्मी का दौर फिर शुरू हो जाएगा।

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, AK-47 बरामद

लातेहार झारखंड में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। प्रतिबंधित झारखंड जन मुक्ति परिषद से जुड़े दो माओवादियों को हथियार और गोला-बारूद के साथ लातेहार जिले के कुरुखेता जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।पुलिस अधीक्षक (एसपी) कुमार गौरव ने बताया कि मंगलवार को एक खुफिया सूचना के बाद जंगल में चलाए गए एक अभियान के दौरान मनोज लोहरा (26) और महादेव सिंह (24) को पकड़ा गया। इस तरह झारखंड को नक्सलमुक्त बनाने में सुरक्षाबलों ने एक कदम और बढ़ा दिया है। भारी मात्रा में हथियार भी मिला बयान के आधार पर हमने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। संगठन के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। अधिकारी ने बताया कि बरामद की गई वस्तुओं में एक एके-47 राइफल, 318 कारतूस, मोबाइल फोन और सिम कार्ड शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई कुटमखेता जंगल क्षेत्र में छापामारी के दौरान की गई, जहां पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने एसपी के गुप्त सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को देखते ही उग्रवादी भागने लगे, लेकिन सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर दो लोगों को पकड़ लिया। गिरफ्तार उग्रवादियों की पहचान 26 वर्षीय मनोज लोहरा, पिता भुनेश्वर लोहरा, ग्राम जोबला (ताल पांकी, पलामू) और 24 वर्षीय मनोज महादेव सिंह, पिता स्व. आदन सिंह, ग्राम सिमरियाटांड़, लातेहार के रूप में हुई है। पुलिस ने क्या बताया पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने प्रेस वार्ता कर बताया किनक्सल विरोधी अभियान में लगातार सफलता मिल रही है और माओवादी व जेजेएमपी जैसे संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। एसपी ने बताया कि मनोज लोहरा के पास से एसएलआर राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री बरामद की गई है। वहीं छापेमारी के दौरान झाड़ियों से एके-47 राइफल, मैगजीन, गोली, मोबाइल और वायरलेस सेट भी बरामद हुआ है। बरामद हथियारों और सामग्रियों से स्पष्ट है कि उग्रवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। इस संबंध में मनिका थाना कांड संख्या 41/26, दिनांक 05 मई 2026 दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस शंकर राम नामक अन्य उग्रवादी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। अभियान में पुलिस अधिकारियों के साथ सशस्त्र बल के जवानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसमें पुलिस पदाधिकारी प्रभात कुमार दास, यकीन अंसारी, सेट-42 कुमंडीडी पिकेट, सेट-137 आईआरबी-04 छिपादोहर के जवान और मनिका थाना के रिजर्व गार्ड शामिल थे।