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सम्राट सरकार से बनी सहमति, अंचल अधिकारियों की हड़ताल खत्म, जमीन के काम होंगे तेज

पटना बिहार में लंबे समय से चल रही अंचलाधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों की हड़ताल खत्म हो गई है। सम्राट सरकार से वार्ता पर सहमति बनने के बाद सीओ, आरओ समेत अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर गए सभी सीओ-आरओ ने काम पर लौटने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार से उनकी मांगों पर वार्ता की सहमति बन गई है। इसके बाद बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ ने गुरुवार को सामूहिक अवकाश खत्म करने का ऐलान कर दिया। हड़ताल खत्म होने के बाद अंचलों में अटके जमीन के काम फिर से सुचारु हो सकेंगे, यह आम जनता के लिए भी राहत भरी खबर है। राज्य भर के अंचलाधिकारी (सीओ) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 9 मार्च को अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। राजस्व इस बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से कई बार उन्हें का काम पर लौटने की अपील की गई। तत्कालीन विभागीय मंत्री सह डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हड़ताली अफसरों को सैलरी ब्रेक, निलंबन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके असर से कुछ अधिकारियों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। हालांकि, बड़ी संख्या में सीओ-आरओ अपनी मांगों पर डटे रहे। इससे अंचलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे थे। काम पर नहीं लौटने वाले कुछ अधिकारियों पर विभाग ने ऐक्शन लेकर निलंबित भी किया। इससे सरकार और हड़ताली पदाधिकारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा था। साथ ही अंचलों में निबंधन से लेकर जमीन से जुड़े अन्य काम अटक गए थे। राज्य सरकार ने वैकल्पिक उपाय भी अपनाते हुए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अंचलों के अतिरिक्त प्रभार दिए थे। इससे अन्य कर्मचारियों का वर्क लोड बढ़ गया था। हड़ताल से प्रभावित हो रहा था जनगणना का काम जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। अभी स्व-गणना का काम चल रहा है। 2 मई से प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना भी करेंगे। बिहार में जनगणना के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में सीओ, आरओ और राजस्व कर्मियों की हड़ताल से जनगणना का काम भी प्रभावित हो रहा था। 55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार ने सुलह का रास्ता निकाल दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से हड़ताली अधिकारियों को उनकी मांगों पर विचार करने के लिए आश्वासन दिया है। इसके बाद, बिहार संयुक्त सेवा महासंघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 4 मई से वे अपना योगदान देंगे। 55 दिनों के बाद सीओ काम पर लौट जाएंगे। प्रधान सचिव पद से हटाए गए दो दिन पहले ही सम्राट सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को हटा दिया था। उनका तबादला बिहार राज्य योजना पर्षद में बतौर परामर्शी (सलाहकार) कर दिया गया था। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीके अनिल के ट्रांसफर के पीछे की मुख्य वजह सीओ-आरओ हड़ताल को ही मानी गई थी। सीके अनिल 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।  

न्यायिक सेवाओं में बड़ा बदलाव, ई-कोर्ट सर्विस ऐप का नया वर्जन 5 मई से होगा लॉन्च

 रांची  न्यायिक सेवाओं को और अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-कोर्ट सर्विस मोबाइल प का नया संस्करण 4.0 आगामी पांच मई से लांच किया जाएगा। इस संबंध में झारखंड हाई कोर्ट के केंद्रीय परियोजना समन्वयक द्वारा राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पत्र में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्देशानुसार एप का यह नया संस्करण कई तकनीकी और उपयोगकर्ता सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है। इसमें एंड्रायड 14 सपोर्ट, बेहतर परफार्मेंस, आसान नेविगेशन और नया यूजर फ्रेंडली इंटरफेस शामिल है, जिससे एक हाथ से भी आसानी से उपयोग संभव होगा। नए वर्जन में केस स्टेटस सेक्शन के माध्यम से सीधे आदेश और निर्णय की पीडीएफ डाउनलोड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा माई केसेस सेक्शन में बेहतर रिस्पांस, केस कंवर्जन ट्रैकिंग फीचर, ईपे, एनजेडीजी और ईफाइलिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत क्विक लिंक में जोड़ा गया है। कोर्ट परिसरों का लोकेशन जानने के लिए भूवन मैप्स का भी इंटीग्रेशन किया गया है। हाई कोर्ट ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नोटिस को वेबसाइट, ई-सेवा केंद्रों और कोर्ट परिसरों में प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को अपने पुराने डेटा का बैकअप लेने की सलाह दी गई है। ई-कोर्ट मोबाइल एप संस्करण 4.0 की मुख्य विशेषताएं     उन्नत तकनीक: यह ऐप अब पुराने कोर्डोवा हाइब्रिड फ्रेमवर्क से रिएक्ट नेटिव (React Native v0.77.0) पर शिफ्ट हो गया है, जिससे इसकी गति और कार्यक्षमता (Performance) काफी बेहतर हो गई है।     Android 14 सपोर्ट: यह नया संस्करण Android 14 (API स्तर 34) का समर्थन करता है।     बेहतर डेटा हैंडलिंग: उच्च डेटा वॉल्यूम को संभालने में यह पहले से अधिक सक्षम है।     उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण: संस्करण 4.0 के लिए उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण वीडियो जारी कर दिए गए हैं।  

कानून-व्यवस्था मजबूत करने को लातेहार पुलिस में व्यापक ट्रांसफर

लातेहार पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने जिले में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 29 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। जारी सूची के अनुसार हरिशंकर सिंह को छिपादोहर थाना से पुलिस केंद्र लातेहार, नागेंद्र भगत को लातेहार थाना से महुआडांड़ थाना, राम प्रसाद राम को चंदवा थाना से बारेसाढ़ थाना, शशिरंजन सिंह को चंदवा से महुआडांड़ थाना, सत्येन्द्र प्रसाद को चंदवा से गारू थाना भेजा गया है। इसी तरह संजय चौधरी को बालूमाथ से बरवाडीह, चन्द्रशेखर दुबे को बालूमाथ से महुआडांड़ थाना, द्वारिकानाथ पांडेय को बारियातू थाना से पीसीआर वैन, मिथिलेश कुमार सिंह को बारियातू से मनिका, अरुण कुमार सिंह को हेरहंज से जिला नियंत्रण कक्ष तथा नरेश राम को बरवाडीह से जिला नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित किया गया है। पंचरत्न राय यादव को बरवाडीह से बारेसाढ़ थाना, मोहम्मद अनवर को बरवाडीह से बालूमाथ, निरंजन तिवारी को छिपादोहर से पुलिस केंद्र लातेहार, सचिंदानंद सिंह को छिपादोहर से जिला नियंत्रण कक्ष तथा एमानुल टुडू को गारू से चंदवा थाना भेजा गया है। अमर कुमार को भेजा गया बारेसाढ़ से चंदवा धर्मेन्द्र कुमार को बारेसाढ़ से बरवाडीह, अमर कुमार को बारेसाढ़ से चंदवा, खुशादिल अंसारी को बारेसाढ़ से बारियातू, मधुसूदन प्रसाद प्रसाद को महुआडांड़ से लातेहार थाना, उमेश प्रसाद मेहता को महुआडांड़ से चंदवा तथा ददन प्रधान को महुआडांड़ से बालूमाथ थाना में तैनात किया गया है। भोला नाथ भंडारी को महिला थाना महुआडांड़ से पुलिस केंद्र लातेहार, दिनेश कुमार को पीसीआर वन से बारियातू, सहदेव प्रसाद वर्मा को जिला नियंत्रण कक्ष से बरवाडीह थाना, बचु राम को जिला नियंत्रण कक्ष से बारियातू थाना, मोहम्मद मुमताज अहमद को जिला नियंत्रण कक्ष से हेरहंज, रामविनय कुमार को बालूमाथ से लातेहार थाना तथा रामजी ठाकुर को पुलिस केंद्र लातेहार से छिपादोहर थाना भेजा गया है।

सम्राट चौधरी सरकार में बड़ा फेरबदल तय, मंत्रियों की सूची पर नजर

पटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का मतदान खत्म होते ही बिहार के लोगों का फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 दिन पुरानी सरकार के कैबिनेट विस्तार पर आ गया है। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पहले सीएम बने सम्राट चौधरी ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ 15 अप्रैल को शपथ ली थी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नई सरकार के पूरी तरह गठन के लिए बंगाल चुनाव के खत्म होने का इंतजार चल रहा था। ऐतिहासिक 92 फीसदी से ऊपर वोटिंग के साथ दो चरण में बंगाल का चुनाव खत्म हो चुका है। अब चर्चा है कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार 3 मई या 6 मई को हो सकता है। सम्राट कैबिनेट के विस्तार के लिए 3 मई और 6 मई की अटकल को भी बंगाल चुनाव से ही जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल से चुनाव की आंतरिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसमें चुनाव नतीजों में पार्टी के संभावित प्रदर्शन का अनुमान होगा। बंगाल चुनाव की इंटरनल रिपोर्ट में अगर हर हाल में भाजपा की जीत का भरोसा जताया गया होगा तो पार्टी नतीजों के बाद 6 मई को बिहार कैबिनेट का विस्तार करवा सकती है। लेकिन, अगर बंगाल से आई रिपोर्ट में भाजपा की जीत को लेकर कोई किंतु-परंतु जैसी आशंका होगी तो पार्टी की कोशिश होगी कि सम्राट चौधरी कैबिनेट का विस्तार चुनाव नतीजों से पहले ही 3 मई को निबटा लिया जाए। बिहार में सीएम समेत 36 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में भाजपा से ज्यादा होंगे जदयू के मंत्री, बड़े मंत्रालय भी मिलेंगे? सम्राट चौधरी की सरकार बनने के बाद से ही कैबिनेट में भाजपा और जदयू के मंत्रियों की संख्या को लेकर भी अटकलों का दौर चल रहा है। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की कैबिनेट में भाजपा के मंत्रियों की संख्या जदयू से ज्यादा थी। जदयू के नेताओं का कहना है कि सम्राट चौधरी की सरकार में मॉडल वही रहेगा। यानी भाजपा का सीएम है तो जदयू के मंत्रियों की संख्या ज्यादा होगी। मंत्रालय बंटवारे में भी नीतीश के फॉर्मूले से चले तो जदयू को कई बडे़ मंत्रालय भी मिल सकते हैं। सम्राट सरकार में सीएम और दोनों डिप्टी सीएम के अलावा भाजपा के 14 और जदयू के 15 नेता मंत्री बन सकते हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 मंत्री पद नहीं भरे जाएंगे नीतीश कुमार की ही तरह सम्राट चौधरी कैबिनेट में 36 के 36 पद भरने के बदले 1-2 मंत्रियों की जगह बनाकर रख सकते हैं, ताकि भविष्य में दूसरे दलों में तोड़-फोड़ की जरूरत पड़े तो डील के लिए ऑफर का इंतजाम रहे। सरकार में 1-2 मंत्रियों की जगह खाली हो तो उसकी बदौलत सामने वाली पार्टी के कुछ विधायकों को अपने वश में करना आसान हो जाता है। भाजपा और जदयू दोनों अपने कोटे से कम से कम 1-1 पद खाली रख सकती है। पिछली सरकार में जदयू के ज्यादातर मंत्री फिर से जगह पाएंगे। भाजपा के भी ज्यादातर मंत्री फिर से आएंगे, लेकिन नीतीश मिश्रा, कृष्ण ऋषि, नीरज सिंह बबलू जैसे कुछ पुराने मंत्री फिर से सरकार में आ सकते हैं। सम्राट चौधरी की सरकार में पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को क्या मिलेगा? सीएम सम्राट और डिप्टी सीएम विजय और बिजेंद्र को छोड़कर नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे सारे नेता फिलहाल पूर्व मंत्री बने हुए हैं। नीतीश की अगुवाई वाली सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि उनको फिर मौका मिलेगा या नहीं और मिला तो मंत्रालय पुराना रहेगा या बदल जाएगा। इन पूर्व मंत्रियों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की हो रही है, जिन्हें पहली किस्त में सरकार में जगह नहीं मिल पाई। सोशल मीडिया पर इसे लेकर पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों की भरमार लगी है। विजय सिन्हा को मंत्री बनाया जाएगा, इस पर संशय नहीं है, लेकिन पुराने मंत्रालय ही मिलेंगे या और बड़ा मंत्रालय मिलेगा, इस पर अटकलबाजी चल रही है। नीतीश सरकार में विजय कुमार सिन्हा के पास राजस्व और भूमि सुधार, खनन और भूतत्व के अलावा भाजपा के अध्यक्ष बने नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद से नगर विकास और आवास विभाग भी था। राजस्व और भूमि सुधार में विजय का तेवर भरा रूप दिख रहा था। चर्चा है कि उन्हें पथ निर्माण विभाग का मंत्री बनाया जा सकता है, जो पिछली सरकार में नितिन नबीन के बाद दिलीप जायसवाल को मिला था। सम्राट चौधरी सरकार में दीपक कुशवाहा का क्या होगा, चिराग और मांझी बदलेंगे मंत्री? चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को पहले की तरह कैबिनेट में 2-1-1 मंत्री मिलेंगे, यह मोटा-माटी तय दिख रहा है। जीतनराम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा फिर से मंत्री बनेंगे, यह भी तय दिख रहा है। चिराग पासवान भी अपने दोनों पुराने मंत्री संजय पासवान और संजय सिंह को रिपीट करेंगे, इसकी प्रबल संभावना है।

कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी की रणनीति, अरविंद शर्मा को बनाया MLC उम्मीदवार

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम वाली नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को कैबिनेट विस्तार तक के लिए इंतजार कराने से भूमिहार समाज में उपजी नाराजगी को भाजपा मैनेज करने में जुट गई है। विधायक बन चुके पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए हो रहे उप-चुनाव में भाजपा ने 46 साल पुराने कार्यकर्ता अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। विधानसभा कोटे की इस सीट पर 202 विधायकों के समर्थन वाले एनडीए के कैंडिडेट अरविंद शर्मा की जीत तय है, जो भूमिहार जाति से हैं। अरविंद शर्मा को टिकट मिलने को पार्टी से शुरुआत से जुड़े कार्यकर्ताओं के समर्पण का इनाम बताया जा रहा है। अरविंद शर्मा ने गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन पर्चा भरा है। उनके साथ दौरान सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और लोजपा-आर के विधायक दल के नेता राजू तिवारी समेत एनडीए गठबंधन के अन्य नेता मौजूद रहे। विपक्ष के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वो चुनाव लड़ने की भी सोच सके। इसलिए अरविंद शर्मा इस चुनाव में इकलौते कैंडिडेट होने के आधार पर निर्विरोध जीत जाएंगे। कोई कैंडिडेट आ जाता है तो 12 मई को मतदान और फिर उसी शाम को नतीजे आएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सरकार के दौर में नक्सलियों और रणवीर सेना के संघर्ष का केंद्र रहे जहानाबाद से काटकर बनाए गए अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले अरविंद शर्मा पटना में रहते हैं। भाजपा में पहले जिलाध्यक्ष और जिलों में प्रभारी रह चुके अरविंद शर्मा को सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकाल में बिहार कार्यालय का प्रभारी बनाया गया था। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और अरविंद शर्मा एक दौर के नेता हैं और गहरे मित्र रहे हैं। अरविंद शर्मा एक बार विधानसभा चुनाव लड़ने की रेस में थे, लेकिन टिकट का समीकरण नहीं बन पाया था। अब उनको पक्की जीत वाली सीट से एमएलसी का टिकट मिलने से पुराने कार्यकर्ताओं में उत्साह है कि पार्टी नेतृत्व कब किसे धैर्य का धमाकेदार तोहफा दे, कोई नहीं जानता। विधान परिषद में जून में 9 और सीटें खाली हो रही है, जिसका चुनाव मजेदार होगा। विपक्ष के पास जितने विधायक हैं, उसमें एकजुटता दिखाने पर एक सीट निकल सकती है। बाकी 8 सीटों पर एनडीए के कैंडिडेट बाजी मारेंगे, ऐसा माहौल दिख रहा है। अगले चुनाव में रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को मौका मिलने को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है।

शहर में पीएम आवास योजना के आवेदन को लेकर निगम ने लगाया कैंप, पात्र लोगों को मिलेगा लाभ

रांची रांची नगर निगम की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में विशेष कैंप लगेगा। गुरुवार से इसकी शुरुआत होगी। पहले दिन कुल आठ वार्डों में शिविर लगेंगे। इस पहल का उद्देश्य ऐसे पात्र व वंचित लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाना है, जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है और जो अब तक किसी कारणवश इस योजना से वंचित रह गए हैं। शिविर में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन लिए जाएंगे। निगम के मुताबिक, आवेदन परिवार के महिला या पुरुष मुखिया के नाम से होगा, जिसमें पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होंगे। आवेदक या उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर भारत में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के ऐसे परिवार, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है, आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज आवेदन के लिए भूमि से संबंधित अद्यतन कागजात, परिवार की फोटो, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, आवास होल्डिंग रसीद, स्व-प्रमाण पत्र एवं पक्का मकान नहीं होने का शपथ पत्र समेत अन्य दस्तावेज आवश्यक हैं। इस दौरान लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन देने की सुविधा मिलेगी। इन वार्डों में यहां लगेंगे शिविर वार्ड संख्या स्थान 1,2 और 3 जोगो पहाड़, एदलहातू 4 और 5 पहान टोली, अटल क्लिनिक 7,11 और 12 दुर्गा सोरेन चौक, हाई टेंशन मैदान कल इन आठ वार्डों में यहां शिविर लगेंगे और लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे और इस बारे में जानकारी भी मिल जाएगी। वार्ड संख्या स्थान 13,14 और 46 वार्ड कार्यालय, बहु बाजार चुटिया 6 और 8 सामुदायिक भवन, क्लिनिक 15,16 और 17 कर्बला चौक, निगम कार्यालय इसी प्रकार चार मई को वार्ड संख्या 25 व 26 में कार्तिक उरांव चौक, 27, 28 व 29 को सेल्टर हाउस मधुकम, 24 व 43 को कडरू दुर्गा मंदिर, 30, 32, 33 और 34 को सामुदायिक भवन टंगराटोली में शिविर लगेगा। पांच मई को वार्ड संख्या 37, 38, 39, 40, 41, 42, 49 व 35 में शिविर लगेगा। छह मई को वार्ड संख्या 44, 45, 48, 18, 19, 9 व 10 में शिविर लगेगा। सात मई को कुल ग्यारह वार्डों में शिविर लगेगा। इसमें वार्ड संख्या 20, 21, 22, 23, 47, 36, 31, 50, 51, 52 व 53 शामिल हैं।

बड़ी राहत: Bihar में CO अधिकारियों की हड़ताल टली, 4 मई से सेवाएं बहाल

पटना. बिहार में 9 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन सामूहिक हड़ताल पर गए अंचलाधिकारियों ने हड़ताल स्थगित (Bihar CO Strike News) करने का फैसला लिया है। संयुक्त मोर्चा, बिहार राजस्व सेवा महासंघ ने हड़ताल को स्थगित करने को लेकर आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन में भरोसा रखते हुए और व्यापक जनहित को सर्वोपरि रखते हुए अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश (हड़ताल) को स्थगित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया है। आगे कहा गया कि यह निर्णय आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तथा प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। 4 मई को दफ्तर जाएंगे सीओ बयान में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि संयुक्त मोर्चा के सभी सदस्य (अंचलाधिकारी) 04.05.2026 तिथि को अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान करेंगे। सरकार से मोर्चा को उम्मीद संयुक्त मोर्चा ने कहा है कि उनको उम्मीद है कि बिहार सरकार सकारात्मक एवं ठोस कदम उठाएगी तथा भूमि सुधार उप समाहर्ता सहित पूर्व में प्रस्तुत 11 सूत्री मांग-पत्र पर गंभीरता पूर्वक विचार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। सरकार को अब 2 महीने का अल्टीमेटम हालांकि, मोर्चा की ओर यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर निर्धारित समयावधि (2 महीने) के भीतर मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संयुक्त मोर्चा फिर से सामूहिक अवकाश (हड़ताल) पर जा सकता है।

झारखंड में ई-गवर्नेंस फेलोशिप योजना की शुरुआत, छात्रों को मिलेगा योजनाओं पर काम करने का मौका

रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है। यह वीडियो भी देखें किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

झारखंड से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की तैयारी में झामुमो

रांची झारखंड की क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। अप्रैल, 2025 को रांची में आयोजित पार्टी के 13वें महाधिवेशन में पारित अपने राजनीतिक प्रस्ताव से साफ संकेत दिया कि झामुमो की प्राथमिकता अब सिर्फ राज्य नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार है। पार्टी संगठन केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। यह प्रस्ताव धरातल पर मजबूती के साथ दिखने भी लगा है। इस कड़ी में दिल्ली में संपर्क कार्यालय, अन्य राज्यों में संगठन को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल तथा बिहार, असम, ओडिशा और बंगाल जैसे राज्यों के लक्षित हिस्सों को मिलाकर बृहद झारखंड की परिकल्पना झामुमो की रणनीति का हिस्सा हैं। बिहार से मिला सबक, गठबंधन राजनीति की चुनौती राष्ट्रीय विस्तार की इस रणनीति की पहली परीक्षा बिहार विधानसभा चुनाव में दिखी। झामुमो ने महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन सीट बंटवारे पर राजद और कांग्रेस के साथ अंतिम समय तक सहमति नहीं बन सकी। झामुमो ने सम्मानजनक सीटों की मांग की थी, पर ससमय निर्णय नहीं हुआ। लिहाजा, बिहार चुनाव से झामुमो को दूर रहना पड़ा। यह झामुमो के लिए बड़ा सबक रहा। असम में आक्रामक रणनीति, ‘तीर-धनुष’ के साथ मैदान में बिहार के अनुभव से सबक लेते हुए झामुमो ने असम में समय रहते चुनाव आयोग से अपना चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ हासिल किया और स्थानीय स्तर पर संगठन भी सक्रिय किया। यहां रिजल्ट आने में अभी देरी है लेकिन हेमंत सोरेन ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी ने राष्ट्रीय फलक पर विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। प्रचार के दौरान पूरी रणनीति के साथ धुआंधार रैलियां की और टी-ट्राइब को जनजाति का दर्जा दिलाने समेत अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। झामुमो मानता है कि उसकी मौजूदगी से भाजपा के आदिवासी वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है। बंगाल में रणनीतिक समर्थन, टीएमसी के साथ तालमेल बंगाल में हेमंत ने राजनीतिक सूझबूझ और परिपक्वता का परिचय देते हुए अपने उम्मीदवार नहीं उतारे, बल्कि ममता बनर्जी का हाथ मजबूत करने का निर्णय लिया। हेमंत ने टीएमसी के पक्ष में प्रचार कर भाजपा विरोधी राजनीति को मजबूत किया। कल्पना सोरेन ने भी आदिवासी बहुल सीटों पर प्रचार किया। यह रणनीति झामुमो के उस व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का धुर विरोधी के रूप में स्थापित करना है। पार्टी भविष्य में छत्तीसगढ़ और अन्य प्रदेशों में करेगी विस्तार झामुमो की राजनीति का मूल आधार झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, किसान और मजदूर रहे हैं। पार्टी अब इसी सामाजिक गठजोड़ को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराना चाहती है। पार्टी संगठन हेमंत की छवि को भी इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय स्तर पर उभार रहा है। आदिवासी समाज से जुड़े चिंतकों का मानना है कि हेमंत आज देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय ट्राइबल लीडर के रूप में स्वीकार किए जा रहे हैं और भाजपा के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय के अनुसार, पार्टी भविष्य में छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रदेशों में विस्तार को लेकर रणनीति बना रही है। भाजपा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई झामुमो ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा को मुख्य वैचारिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में चिह्नित किया है। पार्टी का मानना है कि देश में सामाजिक विभाजन और भय का माहौल बनाया जा रहा है, जिसके खिलाफ आदिवासी और वंचित वर्गों को एकजुट करना जरूरी है। झामुमो की जड़ें 1970 के दशक के उस आंदोलन से जुड़ी हैं, जब 1972-73 के आसपास अलग झारखंड और सामाजिक न्याय की विचारधारा के साथ पार्टी का गठन हुआ। समाजवादी सोच को आगे बढ़ाने में एके राय और शिबू सोरेन जैसे नेताओं की अहम भूमिका रही। आगे की राह: क्या है अवसर और कौन सी हैं चुनौतियां झामुमो को राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए न केवल नए राज्यों में संगठन खड़ा करना है, बल्कि गठबंधन राजनीति की जटिलताओं से भी जूझना है। असम में सक्रिय भागीदारी और बंगाल में रणनीतिक समर्थन से पार्टी ने संकेत दिया है कि वह लचीली, लेकिन स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इतना तय है कि झामुमो ने अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है- झारखंड के बाद उनका अगला पड़ाव दिल्ली है।

सरकार का बड़ा फैसला: 7 जिलों में पत्थर खनन को मिली मंजूरी, बढ़ेगा राजस्व

 पटना  बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सर्वेक्षण के बाद चयनित आधा दर्जन से अधिक जिलों में पत्थर खनन होगा। इसके पूर्व क्षेत्रों की बंदोबस्ती ई-नीलामी के माध्यम से की जाएगी। सरकार ने इस काम को प्राथमिकता में करने के लिए मेटल स्क्रैप ट्रेड कारपोरेशन (एमएसटीसी) को ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के रूप में चयनित किया है। यह संस्थान पारदर्शी तरीके से आनलाइन नीलामी प्रक्रिया संचालित करेगा। 7 जिलों का कराया सर्वेक्षण खान एवं भू-तत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्टोन चिप्स के लिए प्रदेश को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना होता है। बिहार में पत्थर खनन पर रोक इसकी वजह थी, परंतु अब सरकार ने करीब सात जिलों का सर्वेक्षण कराया है जहां से पत्थर खनन का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से कई फायदे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राज्य में चल रही सरकारी परियोजनाओं के लिए पत्थर और स्टोन चिप्स उचित दर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे निर्माण कार्यों की लागत में कमी आएगी, जिससे सड़कों, पुलों और अन्य विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। बिहार के राजस्व में होगी वृद्धि इसके अलावा, पत्थर खनन पट्टों की व्यवस्थित बंदोबस्ती से राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। अभी तक अवैध खनन या अनियमित प्रक्रियाओं के कारण सरकार को पूरा राजस्व नहीं मिल पाता था, लेकिन ई-नीलामी से यह प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित होगी। इस निर्णय से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खनन कार्यों के संचालन से स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विभाग का दावा है कि यह कदम राज्य के विकास, राजस्व वृद्धि और आम लोगों को सस्ती निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।