राज्यपाल पटेल ने राजभवन में रोपा तुलसी का पौधा
भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को राजभवन उद्यान में तुलसी का पौधा लगाया। उन्होंने गमले में तुलसी के बीज बोकर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी दिया।
मध्य प्रदेश
भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शुक्रवार को राजभवन उद्यान में तुलसी का पौधा लगाया। उन्होंने गमले में तुलसी के बीज बोकर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश भी दिया।
इंदौर मध्य प्रदेश की महू से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अवैध धर्मांतरण के आरोपी छांगुर बाबा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि छांगुर बाबा नरपिशाच है। उसने कई बेटियों के साथ गलत किया है। उसके तो हाथ-पैर और प्रजनांग काट देने चाहिए और शरीयत जैसी कठोर होनी चाहिए। उषा ठाकुर का विस्फोटक बयान महू से बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने छांगुर बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, 'ऐसे नरपिशाचों के हाथ-पैर और प्रजनांग तक काट देने चाहिए ताकि कोई और ऐसा दुस्साहस न करे।' उन्होंने कहा कि ये नरपिशाच बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और ये भारत के संविधान को भी नहीं मानते, ये शरीयत को मानते हैं, तो फिर इन्हें सजा भी शरीयत जैसी कठोर मिलनी चाहिए।' क्यों भड़कीं उषा ठाकुर? उषा ठाकुर ने छांगुर बाबा के कथित अपराधों को लव जिहाद और धर्मांतरण का षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग देश के संविधान और कानून का सम्मान नहीं करते और समाज की एकता को तोड़ने का काम करते हैं। ठाकुर ने यह भी जोड़ा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कस रही है और इस तरह के लोगों को कठोर सजा मिलनी चाहिए। छांगुर बाबा कौन है? जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले का रहने वाला एक स्वयंभू धर्मगुरु है, जिस पर अवैध धर्मांतरण, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, छांगुर बाबा ने खाड़ी देशों से 100 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग हासिल की और इसका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को जबरन धर्म बदलवाने के लिए किया। उत्तर प्रदेश एटीएस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसे और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि छांगुर बाबा के 40 से अधिक बैंक खातों में मध्य पूर्व और संभवतः पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से फंडिंग आई। ईडी ने बलरामपुर और मुंबई में 14 ठिकानों पर छापेमारी की। बलरामपुर के मधुपुर गांव में छांगुर बाबा की आलीशान कोठी, जो सरकारी जमीन पर बनी थी, को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
भोपाल बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में घुसकर यहां पहचान छिपाकर रह रहे हैं। इसी तरह का एक बांग्लादेशी अवैध रूप से भोपाल में रहते हुए पकड़ा गया है। बांग्लादेश का निवासी अब्दुल कलाम भोपाल में किन्नर बनकर वर्षों से रह रहा था। अब्दुल खुद का नाम नेहा किन्नर रखा था, वह इस नाम से पहचान पत्र भी बनवा चुका है और उसी का उपयोग कर वह खुद को भारतीय बताता था। केंद्र सरकार द्वारा बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की तलाश शुरू की गई, तब भोपाल में अब्दुल कलाम के छिपे होने का खुलासा हुआ। अब अब्दुल कलाम को डिपोर्ट किए जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। वह बुधवारा क्षेत्र में रहता था। उसके खिलाफ तलैया पुलिस ने कार्रवाई की है। फिलहाल, वह भोपाल पुलिस की सुरक्षा में रह रहा है। खुलासा हुआ है कि अब्दुल जांच एजेंसियों से बचने के लिए किन्नर बनकर राजधानी में घूमता रहता था। यह कार्रवाई इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा की गई है। पहचान छिपाने के लिए उसने लड़की का भेष बना रखा है और अपना नाम भी नेहा रखा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक अब्दुल को भोपाल के बुधवारा इलाके से पकड़ा गया है। उसका असली नाम अदुल कलाम है। वह भोपाल में नेहा के नाम से रह रहा था। चोरी छुपे भोपाल में वह कई साल से रह रहा था। वह किन्नर बनकर शहर में यहां-वहां निकलता था। अब्दुल कलाम उर्फ नेहा ने बकायदा फर्जी तरीके से परिचय-पत्र भी बनवा लिया था। इसके संबंध में भी अंदरखाने पड़ताल की जा रही है। क्योंकि वह परिचय पत्र बनाने में कैसे सफल हो गया, बड़ा सवाल है। उससे लगभग भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ भी बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही है। विशेष निगरानी में है अब्दुल, कोई नहीं मिल सकता अब्दुल के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच भी इंटेलीजेंस यूनिट कर रही है। उसके मोबाइल को जब्त कर सायबर क्राइम की मदद से चौटिंग से लेकर बातचीत की जानकारी जुटाई जा रही है। उसके जिन लोगों के साथ संपर्क थे, उनसे भी क्राइम ब्रांच में एक स्पेशल टीम अलग से पूछताछ कर रही है। अब्दुल कलाम के भोपाल में होने की जानकारी केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी भेज दी गई है। अदुल कलाम को तलैया थाने में रखा गया है। थाना प्रभारी के अलावा दो महिला आरक्षकों को ही आने-जाने की अनुमति है। खुद को महिला बताता है, इसलिए महिला आरक्षक तैनात पुलिस सूत्रों ने बताया कि वह पुरूष है, लेकिन वह वर्षों से महिला किन्नर के भेष में छिपा था। वह हावभाव भी महिलाओं जैसा दिखाता है, इसलिए महिला आरक्षकों को भी तैनात किया गया है। उसने भारत आने और अपने अन्य साथियों के भी संबंध में जानकारी दी है। इस मामले में पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि समय-समय पर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है। जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, कुछ नहीं कहा जा सकता।
रीवा रीवा जिले के मनमोहक जलप्रपातों पर बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कोटवार और पुलिस के साथ अब पटवारियों की भी ड्यूटी लगा दी है। बता दें कि, जिले में पूर्वा, क्योंटी और चचाई तीन प्रमुख जलप्रपात हैं, जहां वीकेंड पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। हालांकि, पूर्वा जलप्रपात को छोड़कर चचाई और क्योंटी में अभी तक सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई है। वीकेंड पर लगेगी पुलिस-पटवारियों की ड्यूटी कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि शनिवार और रविवार को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। इसलिए वीकेंड पर कोटवार, पुलिस और ग्राम पंचायत कर्मियों के अलावा पटवारियों को भी तैनात किया जाएगा। साथ ही खतरनाक स्थानों पर रेलिंग लगाने का काम भी किया जाएगा। लोग बोले- इससे पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रशासन का यह कदम पर्यटकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर रोमांच या लापरवाही के चलते दुर्घटनाएं होती हैं। इन उपायों से जलप्रपातों की सुंदरता का आनंद लेने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
इंदौर ने एक बार फिर स्वच्छता में अपनी श्रेष्ठता की साबित ,सुपर स्वच्छ लीग में नंबर वन का स्थान इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका इंदौर इंदौर ने एक बार फिर बता दिया कि स्वच्छता में उसका कोई सानी नहीं है। गुरुवार सुबह जब दिल्ली के विज्ञान भवन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, निगमायुक्त शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों से सम्मान स्वीकार कर रहे थे, हर इंदौरी खुद को गौरवांवित महसूस कर रहा था। जिन अष्टसिद्धियों को पाने का संकल्प हमने 11 मार्च 2024 को स्वच्छता का सातवां आसमान छूते वक्त लिया था, उन्हें आखिर पा ही लिया। अब तक स्वच्छ सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शामिल रहे इंदौर को इस बार सुपर स्वच्छ लीग में रखा गया था, लेकिन पिछले सात वर्ष की तरह इंदौर ने यहां भी खुद को पहले स्थान पर कायम रखा। इस बार प्रतियोगिता में 4,989 शहर थे। इन सबमें इंदौर को सबसे ज्यादा अंक मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि इंदौरियों को नंबर वन पर रहने की आदत है, गुरुवार को यह बात एक बार फिर साबित हो गई। कहा जाता है कि नंबर वन पर पहुंचना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है इस पर लगातार बने रहना। इंदौर ने इस चुनौती को स्वीकारा और जीत हासिल की। कोई शहर यूं ही नहीं नंबर वन बन जाता। दरअसल स्वच्छता इंदौरियों के संस्कार में हैं, यहां के नागरिकों के रग-रग में रची-बसी है। आने वाले समय में चुनौतियां और कठिन होंगी। अष्टसिद्धि पाने के साथ ही इंदौर अब नई भूमिका में आ चुका है। अब खुद को स्वच्छ बनाए रखने के साथ-साथ इंदौर की जिम्मेदारी एक अन्य शहर को भी स्वच्छ बनाने की है। निश्चित ही इंदौर इस कठिन परीक्षा में भी सफल होगा। आखिर हमारी आदत है नंबर वन आने की। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने के मायने स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हुए इस बार सुपर स्वच्छ लीग में पांच अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई थीं। दस लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर के साथ 11 अन्य शहर प्रतिस्पर्धा में शामिल थे। पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में सूरत ने इंदौर को कड़ी चुनौती दी थी। इंदौर को पहला स्थान उसके साथ साझा तक करना पड़ा था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार से सबक लेते हुए इंदौर ने इस बार ऐसी तैयारी की कि सूरत उसके आसपास भी नहीं पहुंच सका। सुपर स्वच्छ लीग में शीर्ष पर रहने से इंदौर की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह अब बड़े भाई की भूमिका में आ गया है। परिवार के सदस्यों का ध्यान रखना उसकी जिम्मेदारी हो गई है। इंदौर की सफलता के पीछे गीला और सूखा कचरा अलग करने की आदत एक महत्वपूर्ण कारक आठ साल पहले इंदौर ने स्वच्छता का संकल्प ले सड़क किनारे के कचरे के ढेर व कचरा पेटियों को हटाया और हर घर से गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने (सोर्स सेग्रिगेशन) का नवाचार किया। नगर निगम द्वारा किए गए इस बदलाव का साथ शहरवासियों ने दिया। उन्होंने अपने घर में गीले व सूखे कचरे का डिब्बा अलग रखा। कचरा पृथक्करण की इस मूल आदत के कारण इंदौर सात साल से स्वच्छता में नंबर-1 रहा। वहीं आठवीं बार सुपर लीग में शामिल होने के बाद भी देश के सभी शहरों में इंदौर सबसे आगे रहा। घर-बाजार से गीला-सूखा नहीं, छह तरह का कचरा अलग देने की शहरवासियों की आदत ही इंदौर को दूसरे शहरों से आगे बनाए हुए है। अलसुबह 6.30 बजे से शहर की कालोनियों में पहुंचने वाली डोर टू डोर कचरा संग्रहण की गाड़ियां देर रात छप्पन दुकान व सराफा बाजार के बंद होने के पहले उनका कचरा एकत्र कर ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचाती हैं। इस कार्य में हर दिन दो हजार से ज्यादा कर्मचारी इन वाहनों के साथ मौसम की परवाह किए बगैर नियमित जिम्मेदारी निभाते हैं। साल के 365 दिन शहरवासियों व निगम के कर्मचारियों की शहर को नंबर एक बनाने के प्रण की यह जीवटता ही जो इंदौर को हर मुकाबले में सिरमौर बनाती है। गीला-सूखा कचरा अलग-अलग लेने से आगे रहा इंदौर सुपर स्वच्छ लीग में शामिल इंदौर के शामिल होने के कारण इस बार इंदौर किसी भी शहर से नंबर-1 के खिताब के लिए मुकाबला नहीं था। इस सर्वेक्षण में देश के अन्य शहरों के साथ इंदौर का स्कोर कार्ड भी जारी किया गया। लीग में शामिल सूरत व इस बार का नंबर-1 स्वच्छ शहर अहमदाबाद भी स्वच्छता के अन्य मापदंडों पर इंदौर की तरह शत प्रतिशत अंक लाए हैं। सोर्स सेग्रिगेशन यानि घर-बाजारों से गीला-सूखा कचरा अलग-अलग मिलने वाली श्रेणी में इंदौर को 98 प्रतिशत अंक मिले। वहीं सूरत को 92 व अहमदाबाद को 94 प्रतिशत अंक मिले। यानी इंदौर के मुकाबले सूरत, अहमदाबाद व अन्य शहरों को गीला-सूखा कचरा पूर्ण रूप से अलग-अलग नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से सोर्स सेग्रिगेशन ने इंदौर को स्कोर कार्ड में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया। इंदौर सफलता के पीछे रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिफ्यूज, रिथिंक, रिपेयर, रिपर्पस और रिनोवेशन की महत्वपूर्ण भूमिका स्वच्छता के जिन सितारों को अपने दामन में संजोने का स्वप्न देखते-देखते देश के बड़े शहरों की आंखे पथरा गईं उन सितारों को इंदौर ने अपने आसमान पर संजो लिया है। गुरूवार को दिल्ली में जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इंदौर को सुपर लीग श्रेणी में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया तो मालवा के सिरमौर शहर इंदौर के लोगों ने कुछ यही पंक्तियां याद करते हुए बड़े गर्व से अपनी सफलता को सराहा। स्वच्छता की दौड़ में अपने मानक ऊंचे कर इंदौर इतना आगे निकल आया है कि प्रतिस्पर्धा करने वाले शहर सशंकित ही रहते हैं कि स्पर्धा में नंबर वन तो इंदौर को ही आना है, उन्हें दूसरा-तीसरा स्थान भी मिल जाए तो बात बन जाए। सफलता की सही कसौटी उसकी निरंतरता ही होती है। स्वच्छता की अष्टसिद्धि प्राप्त करके इंदौर ने दुनिया को बता दिया कि यूं ही कोई शहर इंदौर नहीं हो जाता। इसके … Read more
ग्वालियर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट(MP High Court) ने पुलिस विभाग की दो अलग-अलग कार्रवाइयों को अवैध करार देते हुए अहम फैसले सुनाए हैं। कोर्ट ने एक मामले में प्रमोशन के बाद डिमोशन(Demotion After Promotion) को असंवैधानिक बताया, वहीं दूसरे मामले में पहले से सजा हो चुके कर्मियों के खिलाफ दोबारा विभागीय जांच(second Departmental Inquiry) शुरू करने को नियम विरुद्ध ठहराया है। मामला 1: प्रमोशन के बाद डिमोशन अवैध यह केस प्रमोद कुमार दुबे से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 2010 में सहायक उपनिरीक्षक (एमटी) से उपनिरीक्षक (एमटी)के पद पर प्रमोट किया गया था। लेकिन बाद में विभाग ने यह कहकर उनका प्रमोशन रद्द कर दिया कि वर्ष 2007 में उन पर एक वेतनवृद्धि रोकने की सजा लगाई गई थी, जिसका प्रभाव 5 वर्षों तक माना गया। विभाग का आरोप था कि उन्होंने सेवा पुस्तिका में इस सजा का रिकॉर्ड छिपाया। लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि प्रमोशन के लिए केवल पिछले 3 वर्षों में कोई बड़ी सजा नहीं होनी चाहिए, न कि 5 वर्षों की। कोर्ट ने यह तर्क मानते हुए कहा कि तीन साल की शर्त पूरी होती है, और विभाग का यह दावा कि सजा का प्रभाव 5 साल तक माना जाएगा, कानूनी और नीतिगत रूप से अस्थिर है। अतः कोर्ट ने डिमोशन का आदेश रद्द कर प्रमोशन को वैध घोषित किया। मामला 2: दोबारा विभागीय जांच अवैध दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति से पहले दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ दोबारा विभागीय जांच शुरू करने को अवैध बताया है। यह मामला उपनिरीक्षक मनीराम नादिर और प्रधान आरक्षक ओमवीर सिंह की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके खिलाफ पहली विभागीय जांच 14 दिसंबर 2020 को पूरी हो चुकी थी, जिसमें मनीराम पर 10 हजार रुपये का जुर्माना और ओमवीर सिंह की एक वेतनवृद्धि 6 महीने के लिए रोकी गई थी। इसके बावजूद विभाग ने 26 अक्टूबर 2022 को दोबारा जांच का नोटिस जारी किया, जिसे कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध करार दिया। शासन पक्ष इस दोबारा जांच को न्यायोचित ठहराने में असफल रहा। कोर्ट ने साफ कहा कि एक बार सजा देने के बाद, बिना पूर्व आदेश रद्द किए दोबारा जांच करना कानूनन गलत है।
छतरपुर / टीकमगढ़ मानसून ट्रफ और डिप्रेशन की वजह से मध्यप्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर बाढ़ के हालात हैं। शुक्रवार को ग्वालियर-चंबल के 7 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट है। नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना में बाढ़ के हालात। इससे पहले गुरुवार को सतना, डिंडौरी, मऊगंज समेत 26 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। नदी-नाले उफान पर आ गए। इस वजह से कॉलेज की परीक्षा कैंसिल करनी पड़ी। वहीं, भोपाल में सड़क, शहडोल में सीवर लाइन की खुदाई में मिट्टी धंस गई। इस वजह से दो मजदूर दब गए। उनकी मौत हो गई। छतरपुर के रनगुवां डैम के सभी 12 और कुटनी बांध के 7 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। छतरपुर में तेज बारिश की वजह से अलग-अलग गांवों में दो मकान ढह गए। पहली घटना में बेटी की मौत हो गई, मां घायल है। दूसरी घटना में युवक की जान चली गई। धामची गांव में उर्मिल नदी का पानी घुसने से 200 परिवार फंस गए थे। एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि टीमें भेजकर 15 लोगों को रेस्क्यू कराया है। बानसूजारा बांध का जलस्तर बढ़ गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे डैम के 3 गेट खोल दिए गए। 180 क्यूमैक पानी छोड़ा गया। टीकमगढ़ में पूनौल नाला उफान पर है। पुल के ऊपर से 3 फीट तक पानी बह रहा है। झांसी हाईवे पर ट्रैफिक बंद करा दिया गया है। टीकमगढ़, रीवा, सतना, डिंडौरी और मऊगंज में शुक्रवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने शहडोल जिले में सीवर लाइन की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में दो श्रमिकों मुकेश बैगा एवं महिपाल बैगा के दबने से हुए निधन पर गहन दुःख व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इस घटना को अत्यंत हृदय विदारक बताया। उन्होंने दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोक संतप्त परिजनों को यह वज्र समान पीड़ा सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जिला प्रशासन को पीड़ित परिवारों को शीघ्र सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
हरदा एक प्राइवेट कॉलेज ने मुर्गियों की बिक्री का विज्ञापन दिया है। इस विज्ञापन में एक नस्ल का नाम 'नर्मदा' लिखा था। इससे बड़ा विवाद हो गया। नर्मदा नदी को मानने वाले लोगों ने इस नाम पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह उनकी धार्मिक भावनाओं का अपमान है। नर्मदा नदी के भक्तों, खासकर नर्मदीय ब्राह्मण समाज ने इसका विरोध किया। समाज के लोगों ने कॉलेज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की। कॉलेज ने कहा कि उसका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। लेकिन, समाज के लोग नाम हटाने की मांग पर अड़े रहे और चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे। जिला कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन नर्मदीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अशोक पराशर के नेतृत्व में समाज के सदस्य जिला कलेक्टर के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने संयुक्त कलेक्टर संजीव कुमार नागू को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि 'नर्मदा' नाम का गहरा धार्मिक महत्व है। यह उस देवी से जुड़ा है जिसकी लाखों लोग पूजा करते हैं। खासकर नर्मदा घाटी क्षेत्र में। कॉलेज ने दिया है विज्ञापन विवाद तब शुरू हुआ जब कॉलेज ने मुर्गियों की बिक्री के लिए एक विज्ञापन जारी किया। इसमें 'नर्मदा' और 'सोनाली' नाम की नस्लों का उल्लेख था। समाज के सदस्यों ने दावा किया कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। खासकर सनातन धर्म के अनुयायियों और नर्मदा के भक्तों की। जबलपुर के पोल्ट्री सेंटर से लिए नाम कॉलेज के अधिकारियों ने कहा कि विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए नाम जबलपुर के एक पोल्ट्री सेंटर से लिए गए थे। उस सेंटर में नस्लों के नाम कड़कनाथ, नर्मदा और सोनाली थे। कॉलेज का कहना है कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। संस्थान के निदेशक राजीव खरे से संपर्क नहीं हो सका। नर्मदा नाम हटाने की मांग नर्मदीय ब्राह्मण समाज ने तुरंत चिकन नस्ल से 'नर्मदा' नाम हटाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे आंदोलन करेंगे। अशोक पराशर ने कहा कि नाम हटाने तक वे विरोध करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह मामला उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा है और वे इसे हल्के में नहीं लेंगे। कॉलेज से माफी की मांग विज्ञापन में 'नर्मदा' नाम के इस्तेमाल से लोगों में गुस्सा है। वे कॉलेज से माफी मांगने और नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 'नर्मदा' नदी उनके लिए पवित्र है और इसका इस्तेमाल मुर्गियों के नाम के लिए करना गलत है।
स्पेन प्रवास का तीसरा दिन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पेन प्रवास का तीसरा दिन 18 जुलाई को मध्यप्रदेश की वैश्विक क्षमताओं को दर्शाने और निवेश सहयोग को सशक्त करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। दिनभर की गतिविधियाँ निवेश, स्मार्ट सिटी विकास, नवाचार और प्रवासी सहभागिता जैसे विविध पक्षों को समेटे हुए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दिन की शुरुआत बार्सिलोना के प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र 'मर्कारबेना' के भ्रमण से होगी, जो यूरोप का एक प्रमुख आपूर्ति श्रृंखला हब माना जाता है। इस भ्रमण के दौरान लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मध्यप्रदेश की संभावनाओं को समझने और यूरोपीय मॉडल से सीखने का अवसर प्राप्त होगा। इसके बाद 'इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश' थीम पर केन्द्रित बार्सिलोना बिजनेस फोरम का आयोजन होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेनिश उद्योग जगत, कॉरपोरेट समूहों और संस्थागत निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं को प्रस्तुत करेंगे। इस फोरम में प्रदेश की औद्योगिक नीतियाँ, प्राथमिक सेक्टर, अधोसंरचना परियोजनाएँ और ग्लोबल पार्टनरशिप मॉडल पर विशेष फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह संवाद प्रदेश में निवेश की मंशा को ठोस प्रस्तावों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बिजनेस फोरम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न उद्योगपतियों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और संभावित निवेशकों से वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधा संवाद करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यक्तिगत निवेश प्रस्तावों पर ठोस चर्चा करना और नीति से लेकर ज़मीन तक की स्पष्टता देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर बाद बार्सिलोना के स्मार्ट सिटी एवं नवाचार केंद्रों का भ्रमण करेंगे। इस भ्रमण में शहरी प्रबंधन, हरित प्रौद्योगिकी, डेटा-ड्रिवन सर्विस मॉडल और स्टार्टअप सहयोग से संबंधित अवधारणाओं का अवलोकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी मॉडल के लिए संभावित तकनीकी साझेदारियों की भी जानकारी लेंगे। इसके बाद होटल इंटरकॉन्टिनेंटल में पुनः कुछ महत्वपूर्ण वन-टू-वन बैठकों का दौर चलेगा, जिसमें निवेश प्रोत्साहन विभाग के साथ मिलकर प्रदेश के प्रतिनिधि संभावित सहयोग की दिशा तय करेंगे। दिन का समापन ‘प्रवासी एवं फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश’ समारोह के साथ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूरोप में बसे प्रवासी भारतीयों, व्यवसायियों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद करेंगे। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के प्रति प्रवासी समुदाय की प्रतिबद्धता को सम्मान देंगे और उन्हें राज्य की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आमंत्रण देंगे।