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वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू

पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए त्रि-पक्षीय अनुबंध आज 24 जुलाई को आज 24 जुलाई को होगा पेसा एक्ट पर त्रि-पक्षीय समझौता, ग्राम स्वशासन को मिलेगा बल वाल्मी और इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा एमओयू भोपाल प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन के लिए आज 24 जुलाई को त्रि-पक्षीय अनुबंध होगा। अनुबंध सचिव पंचायती राज मंत्रालय, केन्द्र सरकार, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के बीच होगा। कार्यक्रम मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान वाल्मी, भोपाल में आज 24 जुलाई को शाम 4 बजे से होगा। कार्यक्रम में पेसा एक्ट पर बनी पुस्तिका का विमोचन किया जाएगा। साथ ही देशभर से आए पेसा एक्ट पैनलिस्ट, विशेषज्ञों के बीच चर्चा होगी। प्रदेश में पेसा एक्ट के बेहतर क्रियान्वयन, उपनियमों को लागू करना, जनजातीय समुदाय को प्रशिक्षण देना, जनजातीय समुदाय की परंपराओं की रक्षा, नए शोध, जनजातीय कलाओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए और जनजातीय समुदाय के बीच हो रहे बेहतर कार्यों का प्रचार-प्रसार, के बारे में चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय सचिव पंचायती राज मंत्रालय विवेक भारद्वाज, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संचालक सह आयुक्त पंचायत राज संचालनालय छोटे सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।  

वर्ल्ड पॉवर चैम्पियनशिप में 10 लाख से अधिक स्कूली छात्रों ने की भागीदारी

भोपाल  प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश भाषा के शिक्षकों के प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। प्रशिक्षण के लिये भोपाल में एक राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान इंग्लिश लर्निंग ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट (ईएलटीआई) कार्यरत है। यह संस्थान राज्य के समस्त शासकीय, प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षण संस्थानों में इंग्लिश भाषा संबंधी अकादमिक और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मार्गदर्शन एवं सहयोग कर रहा है। ईएलटीआई संस्थान इंग्लिश भाषा अध्यापन क्षेत्र में सतत उन्नयन एवं स्तरीकरण के लिये हैदराबाद के इंग्लिश एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) से सहयोग प्राप्त कर रहा है। इंग्लिश भाषा शिक्षकों का प्रशिक्षण स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी सकूलों में इंग्लिश भाषा पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया है। प्रशिक्षण के लिये ईएलटीआई ने शिक्षण सत्र के लिये कैलेंडर तैयार किया है। संस्थान इंग्लिश भाषा के मूल्यांकन के लिये विभिन्न स्तरों के प्रश्न-पत्रों के निर्माण और अन्य विषय के प्रश्न-पत्रों के अनुवाद कार्य में भी सहयोग कर रहा है। इंग्लिश भाषा के शिक्षकों को प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से जुड़े डिप्लोमा कोर्स कराने के लिये उनकी चयन प्रक्रिया में भी सहयोग कर रहा है। प्रदेश के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में कार्यरत शिक्षकों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में संस्थान विशेष ध्यान दे रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता के आकलन एवं मूल्यांकन के कार्यों को भी सतत रूप से कर रहा है। इंग्लिश ओलम्पियाड संस्थान ने पिछले वर्ष इंग्लिश विषय में कक्षा-2 से 8 के लिये संकुल, विकासखण्ड तथा जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये ओलम्पियाड प्रश्न बैंक तथा प्रश्न-पत्रों का निर्माण किया था। पिछले वर्ष ओलम्पियाड में शामिल छात्रों की संख्या 10 लाख से अधिक रही। संस्थान ने माध्यमिक शालाओं में इंग्लिश विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिये आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण के लिये मेन्युअल का भी निर्माण किया है। संस्थान ने राज्य द्वारा निर्मित कक्षा-1 से 8 तक की इंग्लिश की पाठ्य-पुस्तकों और एनसीईआरटी से जुड़ी कक्षा-9 से 12 तक की पाठ्य-पुस्तकों के निर्माण में समन्वय का कार्य भी किया है।  

कोर्ट ने जताई चिंता: ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं डिलीवरी कर्मचारी, पुलिस नहीं करती वैरिफिकेशन

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर बात की। ऑनलाइन खाने-पीने का सामान सप्लाय करने वालों को लेकर कहा कि सबसे ज्यादा रेड सिग्नल जंप डिलीवरी वाले ही करते हैं। दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं और कुछ नहीं होता। ये हमारे घरों तक पहुंच रखते हैं, लेकिन इनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। कभी इनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं जांचा। इस बारे में नीति बनानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट, उद्यान और फुटपाथ पर धड़ल्ले से धार्मिक स्थल बन रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। ये धार्मिक स्थल यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह किसी एक क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्या है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर धार्मिक गतिविधियों के नाम पर कब्जा हो रहा है। हालत यह हो जाती है कि 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है। ई-रिक्शा को लेकर कोई योजना नहीं कोर्ट ने ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा कि इस बारे में सख्ती से कार्रवाई जरूरी है। पुलिस ई-रिक्शा चालकों के पुलिस सत्यापन, ट्रेनिंग इत्यादि की व्यवस्था करे। ई-रिक्शा के चालकों की कोई सूची नहीं है। कभी उनका आपराधिक रिकार्ड नहीं जांचा जाता। इस संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए। यह कहा याचिकाकर्ता ने याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि     चौराहों पर लगे सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं।     पुलिसकर्मी चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के बजाय मोबाइल चलाते हैं। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।     वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिग्नल ग्रीन रखे जाएं।     सड़कों पर गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान हो। कोर्ट ने कहा कि     जो रेड लाइट जंप करते हैं, उन्हें वहीं दो घंटे रोकें।     जिस चौराहे पर चालान बन रहे हैं, वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।     बीमा रिन्यू करने वाली कंपनी पहले बकाया चालान जमा कराए। इसके बाद बीमा रिन्यू किया जाए।     कार पुलिंग को बढ़ावा दें। शुरुआत हाई कोर्ट से हो सकती है। एक ऑफिस से जुड़े वकील एक कार से कोर्ट आएं तो सड़क पर वाहन संख्या कम करने में मदद होगी।     आईटीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाईडेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं।     पिछले दो वर्ष में यातायात पुलिस द्वारा 12 लाख से अधिक ई-चालान किए गए हैं।     यातायात नियमन के तीनों घटकों – यातायात इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।     सरकार ने राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाता है।     किसी भी समय समस्या पर प्रतिक्रिया देने और उसका समाधान करने के लिए 40 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) बनाए गए हैं।    

उज्जैन में लगेगा मेगा सोलर प्लांट, 55 हेक्टेयर में होगा 7000 करोड़ का निवेश

उज्जैन  उज्जैन जिले में स्थित बरंडवा उद्योगपुरी को जल्द एक और बड़ी सौगात मिल सकती है। सोलर एनर्जी की कंपनी जैक्सन यहां पर 7 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर एक नई यूनिट स्थापित करने की तैयारी में है। 55 हेक्टेयर जमीन की होगी जरूरत सीएम डॉ मोहन यादव के औद्योगिक विकास के प्रयासों के बाद विक्रम उद्योगपुरी के साथ जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े निवेश आ रहे हैं। इन्हीं में से एक जैक्सन ग्रुप ने मक्सी के नजदीक बरंडवा उद्योगपुरी में सोलर उपकरण बनाने की यूनिट स्थापित करने में रुचि दिखाई है। कंपनी का यहां करीब 7 हजार करोड़ रुपए का प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। हाल ही में कंपनी की ओर से मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआइडीसी) को पत्र लिख 55 हेक्टेयर जमीन की जरूरत जताई है। एमपीआइडीसी ने भूमि आवंटन को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जेक्सन कंपनी का प्लांट यहां स्थापित होता है, तो मक्सी क्षेत्र के लिए बड़े बदलाव का आधार साबित हो सकता है। 2 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना कंपनी मक्सी में बड़ा प्लांट शुरू करने की तैयारी में है। यदि 7 हजार करोड़ के निवेश से प्लांट स्थापित होता है तो इससे करीब दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर ने बताया कि जेक्सन कंपनी ने मक्सी के नजदीक बरंडवा में भूमि आवंटन के लिए पत्र दिया है। यहां करीब 7 हजार करोड़ रुपए से सोलर उपकरण निर्माण की युनिट स्थापित करने का प्रस्ताव है। भूमि आवंटन को लेकर कार्रवाई प्रचलित है।

हेरिटेज ट्रेन से घूमिए मध्यप्रदेश की हसीन वादियां, पातालपानी-कालाकुंड रूट फिर से होगा शुरू

इंदौर   प्रदेश की एकमात्र हेरिटेज ट्रेन, जो यात्रियों को सुहानी वादियों और प्राकृतिक नजारों का अनुभव कराती है, उसका संचालन चार माह के अंतराल के बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेन 26 जुलाई से प्रत्येक शनिवार और रविवार को पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड तक चलेगी। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल द्वारा इसके संचालन के लिए विभागीय आदेश जारी कर दिया गया है। हालांकि, पातालपानी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को सड़क मार्ग से ही जाना होगा। ट्रेन की यह यात्रा महू तहसील के घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों, झरनों और पक्षियों की चहचहाहट के बीच से गुजरती है, जिससे यात्रियों को अद्भुत अनुभव मिलता है। प्राकृतिक सौंदर्य और खानपान का मिलेगा लुत्फ पातालपानी का झरना, भुट्टा, मैगी और गरमा-गरम भजिए के साथ इस यात्रा का स्वाद और आनंद कई गुना बढ़ जाएगा। यह पूरा सफर सुबह से शाम तक चलेगा, जिसमें पर्यटक हर पल प्राकृतिक नजारों का भरपूर आनंद उठा सकेंगे। मानसून की शुरुआत होते ही पर्यटक इस हेरिटेज ट्रेन के संचालन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। रेलवे ने हाल ही में एक ट्रायल रन भी किया है जो पूरी तरह सफल रहा। संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही टिकट बुकिंग भी शुरू की जाएगी। महू तहसील के जंगल, पहाड़ियां और उनके बीचे बहते हुए प्राकृतिक झरने, पक्षियों की चहचहाट पातालपानी के झरने और भुट्टे, मैगी, भजिए के आनंद लेने का समय आ चुका है। ये आनंद पातालपानी रेलवे स्टेशन से कालाकुंड रेलवे स्टेशन तक चलने वाली हेरिटेज ट्रेन के सफर में मिलेगा। सुबह से शाम तक के इस सफर में पर्यटकों प्राकृतिक नजारों को देखकर दमक उठेंगे। मानसून शुरू होते ही पर्यटक हेरिटेज ट्रेन संचालन का इंतजार करते हैं। इसके संचालन के लिए रेलवे द्वारा एक बार ट्रायल रन भी कर लिया है, जो सफल भी रहा है। अब रेलवे ने संचालन शुरू करने की सभी तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही टिकट बुकिंग शुरू की जाएगी। हेरिटेज ट्रेन का किराया और खासियत -हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन सेकंड क्लास के कोच रहेंगे। -विस्टाडोम का किराया 265 रुपये और नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपये होगा। -टाइमटेबल व स्टापेज सभी पहले की तरह ही रहेंगे। -विस्टाडोम के एक कोच में 60 सीटें हैं, दो कोच में 120 सीट रहेंगी। -विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए रहेगा। -ट्रेन में नान एसी चेयर कार के तीन कोच रहेंगे। -चेयर कार के दो कोच में 64-64 सीटें और एक कोच में 24 सीटें हैं। -नान एसी चेयर कार का किराया 20 रुपए प्रति सवारी होगा। हेरिटेज ट्रेन से जुड़ी अन्य विशेषताएं 2018 में शुरू हुई थी हेरिटेज ट्रेन मध्य प्रदेश की इस पहली हेरिटेज ट्रेन का संचालन 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुआ था। कुछ माह में ही इस ट्रेन ने प्रदेश सहित देशभर में अपनी पहचान बना ली थी। कोरोना काल के चलते अप्रैल 2020 में इस ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया था। चार अगस्त 2021 को ट्रेन में कई बदलाव कर दोबारा संचालन शुरू किया था। गर्मी का मौसम आते ही मार्च में इसे बंद कर दिया जाता है। विस्टाडोम कोच है आकर्षण का केंद्र रेलवे ने हेरिटेज ट्रेन में पर्यटकों के सफर को बेहतर और आरामदायक बनाने के लिए एसी विस्टाडोम लगाएं हैं। इन कोच में बड़े साइज के विंडो ग्लास, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए कोच में स्वच्छ टायलेट का निर्माण भी किया गया है। कोच की बाहरी भाग को आकर्षक पीवीसी शीट से सजाया गया है। हेरिटेज ट्रेन के रैक में दो विस्टाडोम और तीन नॉन एसी चेयर कार कोच होंगे। विस्टाडोम कोच का एक ओर का किराया 265 रुपए होगा जबकि नॉन एसी चेयर कार का किराया मात्र 20 रुपए प्रति सवारी तय किया गया है। विस्टाडोम कोच में बड़े साइज की खिड़कियां, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री जैसी सुविधाएं होंगी। दो विस्टाडोम कोचों में कुल 120 सीटें होंगी जबकि नॉन एसी चेयर कार के तीन कोचों में कुल 152 सीटें (64+64+24) उपलब्ध होंगी। कोचों में स्वच्छ टॉयलेट और आकर्षक पीवीसी शीट से सजे बाहरी भाग पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाएंगे। 2018 से लेकर अब तक का सफर यह हेरिटेज ट्रेन पहली बार 25 दिसंबर 2018 को शुरू हुई थी और कुछ ही महीनों में प्रदेश ही नहीं, देशभर में मशहूर हो गई थी। अप्रैल 2020 में कोरोना महामारी के चलते इसका संचालन बंद कर दिया गया था। इसके बाद 4 अगस्त 2021 को कई बदलावों के साथ इसका पुनः संचालन शुरू किया गया था। हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होते ही मार्च में इस ट्रेन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाता है, और अब मानसून आते ही एक बार फिर यह पर्यटकों को प्राकृतिक सुंदरता की सैर कराने के लिए तैयार है। 

भोपाल को मिलने जा रहा 26 करोड़ की लागत वाला लग्जरी वृद्धाश्रम, हर महीने देना होगा 50 हजार

भोपाल  भोपाल में पहली बार ऐसा वृद्धाश्रम खुलने जा रहा है जिसकी कल्पना आपने सपने में भी नहीं की होगी. ये वृद्धाश्रम आम ओल्ड ऐज होम से बहुत अलग होने वाला है. यहां आपको 24×7 मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी, रहने, खाने पीने की पूरी व्यवस्था भी की गई है. हालांकि इन 5 स्टार जैसी सुविधाओं का लुत्फ उठाने के लिए आपको हर महीने 50-82 हजार खर्ज करने पड़ेंगे. मध्य प्रदेश का पहला लग्जरी वृद्धाश्रम इस वृद्धाश्रम का नाम संध्या छाया रखा गया है जो 1 अगस्त से भोपाल में शुरू हो रहा है. संध्या छाया को एमपी का पहला पेड लग्जरी वृद्धाश्रम माना जा रहा है. इस वृद्धाश्रम को सीनियर सिटिजन की हर जरूरतों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. संध्या छाया के निर्माण में करीब 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए है जिसकी वजह से ये ओल्ड एज होम एक लग्जरी ठिकाना माना जा रहा है. क्या है लग्जरी वृद्धाश्रम की खासियत भोपाल के लिंक रोड-3 के पत्रकार कॉलोनी स्थित संध्या छाया ओल्ड एज होम में आपको सिंगल बेडरुम से लेकर डबल बेडरुम की सुविधा मिलती है. पूरा वृद्धाश्रम 5 एकड़ में फैला हुआ है. पूरे परिसर में सीसीटीवी की सुविधा है. यहां दो रेसिडेंशियल ब्लॉक के साथ लॉन भी बनाया गया है. इस वृद्धाश्रम में 60 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग रह सकते हैं. कितना है किराया इस वृद्धाश्रम में रहने के लिए आपको हर महीने कम से कम 50 हजार का बजट रखना होगा. सिंगल रुम का 50 हजार वहीं डबल रुम में रहने के लिए प्रति व्यक्ति को  41 हजार रुपए खर्च करने होंगे. रजिस्ट्रेशन के वक्त एक लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट भी जमा करना होगा . यहां खानापान से लेकर हर बेसिक सुविधाओं का भी खास ख्याल रखा गया है. बुजुर्ग यहां जैसे चाहे वैसे रह सकते हैं. हेल्थ चेकअप के लिए डॉक्टर हफ्ते में एक बार विजिट करेंगे. किसके अंडर में होगा वृद्धाश्रम एमपी सरकार इस वृद्धाश्रम को चलाने की पूरी जिम्मेदारी सेवा भारती को दी है. बुजुर्ग जो अमाउंट देंगे वो राशि सेवा भारती को मिलेगी. वहीं सिक्योरिटी अमाउंट एमपी सरकार को दी जाएगी. आश्रम के मैनेजमेंट, सुविधाओं में विस्तार और स्टाफ को वेतन देने में ये सिक्योरिटी अमाउंट खर्च की जाएगी.   

चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चंद्रशेखर आजाद ने शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ न आये, यह देश प्रेम की है पराकाष्ठा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शहादत का वह क्षण जब आज़ाद ने चुनी मृत्यु, पर न झुके अंग्रेजों के आगे: सीएम डॉ. यादव चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत, देशभक्ति की पराकाष्ठा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंद्रशेखर आजाद नगर में हुआ स्मरण आजाद कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव वी.सी. के जरिए हुए कार्यक्रम में शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमें गर्व है कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद जैसे महानायक मध्यप्रदेश की धरती पर जन्मे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समूची चेतना, जीवन और अस्तित्व भारतमाता के चरणों में समर्पित करने वाले अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर हम गौरवान्वित हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए समर्पित चंद्रशेखर आजाद का जीवन ऊर्जा, संकल्प और सेवा का अमिट अध्याय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने जब यह देखा कि अब गिरफ्तारी से बच पाना मुश्किल है तो अपने हाथों से ही खुद के प्राणोत्सर्ग कर शहादत दे दी, पर अंग्रेजों के हाथ नहीं आये, यह देश प्रेम की परकाष्ठा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के अवसर पर अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आज़ाद नगर (भाभरा) में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम "स्मरण-आजाद" को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। वीसी में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिवशेखर शुक्ला सहित अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। आज़ाद एक ऐसी आंधी थे, जिसने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद एक नाम नहीं, भारत की क्रांति का वह तेजस्वी स्वर था, जिसकी गूंज आज भी देशभक्ति की शपथ लेने वालों के हृदय में सुनाई देती है। बाल्यकाल से ही उनमें एक अलग तेज और एक अलग सोच थी। जब काशी में उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया और गिरफ्तार हुए, तब न्यायाधीश के पूछने पर जो जवाब उन्होंने दिया, वह आज भी हर देशभक्त के हृदय में बसा है। जब उनसे, उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया- 'आजाद'। पिता का नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया-स्वाधीनता। तीसरी बार जब उनके घर का पता पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था- जेल। वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, एक विचारधारा और आत्मबल के प्रतीक थे, जिन्होंने यह संकल्प लिया था कि-'मैं आज़ाद था, आज़ाद हूं और आज़ाद ही रहूंगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल एक क्रांतिकारी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वाधीनता आंदोलन के सेनापति की भूमिका निभाई। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति बने और शहीद भगत सिंह जैसे नौजवानों को भी उन्होंने दिशा दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जब सांडर्स को लाहौर में मार गिराया गया, तब इस योजना के केंद्र में चंद्रशेखर आज़ाद ही थे और जब देश की क्रांति को धन की आवश्यकता पड़ी, तब काकोरी कांड (1925) में ब्रिटिश खजाने को लूटकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि अगर लक्ष्य पवित्र हो, तो क्रांति भी तपस्या बन जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि दुश्मनों से घिरे होने पर उन्होंने अंतिम गोली स्वयं पर चला दी, परंतु दुश्मन की पकड़ में नहीं आए। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (अब आज़ाद पार्क) में 27 फरवरी 1931 को पुलिस से घिरे होने पर अंतिम गोली खुद को मारकर प्राणोत्सर्ग कर दिया और अपने नाम के अनुरूप अंतिम सांस तक वे "आज़ाद" ही रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत आज भी हमें यह याद दिलाती है कि स्वतंत्रता किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लाखों बलिदानों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर देश के युवाओं को उनके साहस, त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रखर प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को चाहिए कि वह आज़ाद जी के जीवन व चरित्र से सीखें कि कैसे कोई अकेला व्यक्ति इतिहास की धारा बदल सकता है। राष्ट्र के लिए जीना और राष्ट्र के लिए मरना क्या होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हम जिस आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, वह चंद्रशेखर आजाद जैसे रणबांकुरों के बलिदान की ही देन है। हम सबका यह परम कर्तव्य है कि हम एकजुट होकर उनके सपनों का भारत गढ़ें। उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म मध्यप्रदेश के वर्तमान अलीराजपुर जिले के एक छोटे से गांव भाभरा (अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के रूप में प्रचलित) में 23 जुलाई 1906 को हुआ था। चंद्रशेखर आजाद नगर में हुए मुख्य कार्यक्रम स्थल पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, पूर्व विधायक एवं वर्तमान में म.प्र. लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष माधो सिंह डाबर, भाभरा नगर परिषद की अध्यक्षा श्रीमती निर्मला डाबर, नगर परिषद के अध्यक्ष नारायण अरोड़ा, भाभरा जनपद पंचायत के अध्यक्ष जगदीश गणावा और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष परमार सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

जनहित के कार्य समयसीमा में पूर्ण कराएं: राज्यमंत्री श्रीमती गौर

  विकास कार्यों की समीक्षा की, सरयू सरोवर पार्क की मरम्मत और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के निर्देश भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने बुधवार को मंत्रालय में विभिन्न विकासकार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों के कारण आमजन को असुविधा होती है, जिसे किसी भी स्थिति में नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अधूरे कार्य जल्द पूर्ण करने के निर्देश राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने आईटीआई रहवासी परिसर, गौतम नगर बस्ती, गायत्री नगर समेत अनेक कॉलोनियों के विकास कार्यों का प्राक्कलन शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, नालियों की सफाई, विद्युत पोलों की शिफ्टिंग और अतिरिक्त ट्रांसफार्मरों की स्थापना कर स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुधारने पर बल दिया। सरयू सरोवर पार्क का सौंदर्यीकरण और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई होगी राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने सरयू सरोवर पार्क की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्क में खराब फव्वारे और झूलों की मरम्मत शीघ्र कराई जाए। पाथवे निर्माण, पार्क का समुचित रख-रखाव, हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था एवं वाचनालय की बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही अयोध्या नगर क्षेत्र में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कर उन्हें पुनः चालू करने के निर्देश भी दिए। बैठक में श्री लव-कुश यादव, पार्षद श्रीमती शिरोमणि शर्मा, श्रीमती उर्मिला मौर्य समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी

पेसा अधिनियम बना जनजातीय समुदाय के लिए वरदान : चौपाल लगाकर सुलझा रहे हैं आपसी विवाद लगभग 8 हजार से अधिक प्रकरणों को जनजातीय समुदाय ने आपसी विमर्श में सुलझाया थाने में शिकायत किए बिना सुलझाए मामले भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिए लगातार कार्य कर रही है। जनजातीय समुदाय के लिये राज्य सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। प्रदेश के 88 ट्राइबल ब्लॉक्स में लागू पेसा अधिनियम जनजातीय समुदाय के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस अधिनियम के अंतर्गत जनजातीय समुदाय आपसी विवादों का समाधान थानों में शिकायत दर्ज कराए बिना ही चौपालों के माध्यम से कर रहे हैं। पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन में देश में मध्यप्रदेश न केवल अग्रणी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जनजातीय समुदाय ने अब तक लगभग 8 हजार से अधिक विवाद प्रकरणों का चौपाल के माध्यम से निराकरण कर मिसाल पेश की है। इन मामलों में पारिवारिक जमीन संबंधी विवाद शामिल है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा लागू किए गए पेसा एक्ट का उद्देश्य भी यही है कि जनजातीय समुदाय के लोगों को छोटे-छोटे विवाद में पुलिस थाना का चक्कर ना लगाना पड़े और आपस में बैठकर ही मामले की सुलह कर लें। साथ ही उनकी परंपरा, कला संस्कृति की भी रक्षा की जा सके। पेसा अधिनियम के अंतर्गत 3 प्रकार की समितियां कर रहीं हैं काम पेसा अधिनियम के तहत प्रदेश के 88 विकासखंडों में तीन प्रकार की समितियां काम रही है। इसमें शांति और विवाद निवारण समिति, सहयोगिनी मातृ समिति और वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति शामिल है। प्रदेश में शांति और विवाद निवारण समिति की संख्या 11 हजार 639 है। वन संसाधन योजना एवं नियंत्रण समिति की संख्या 11 हजार 331 है, जबकि सहयोगिनी मातृ निवारण समिति की संख्या 21 हजार 887 है। देश के 10 राज्य में हो रहा है पेसा एक्ट का क्रियान्वयन, मध्यप्रदेश है अग्रणी देश के 10 राज्यों में पेसा एक्ट का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सफलता की कहानियों को लेकर एक पुस्तिका भी निकाली गई है जिसमें मध्यप्रदेश की दो कहानियों को शामिल किया गया है। इस वजह से मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 5133 ग्राम पंचायतों में लागू है पेसा अधिनियम मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जनजातीय बाहुल्य वाले प्रदेश के 20 जिलों के 88 विकासखंड की 5133 ग्राम पंचायतों के 11 हजार 596 ग्रामों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। वर्तमान में 4850 पेसा मोबलाइजर कार्य कर रहे हैं। पेसा कानून में सबसे महत्वपूर्ण विषय वित्तीय प्रबंधन है, जिसके तहत राज्य में अब तक 11 हजार 538 खाते खोले गये है।  

खरगौन : 12 कॉलोनियों के 85 मकान घोषित असुरक्षित, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

खरगौन खरगौन शहर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण पर 85 मकान मालिकों को अतिक्रमण हटाने के लिये नोटिस जारी किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि खरगौन में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) की 132 के.व्ही. से लेकर 220 के.व्ही. तक की छह प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के समीप मानव जीवन के लिये घातक और विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है। ट्रांसमिशन लाइनो की प्रतिबंधित सीमा में हुये निर्माण खरगौन के अनेक क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनो के प्रतिबंधित सीमा में अनाधिकृत निर्माण किये गये है, जिनमें विद्युत मानकों के अनुरूप न्यूनतम सुरक्षा दूरी का उल्लंघन किया गया है। यहां के ओंकार दत्त रेजिडेंसी, निमरानी, द्वारका धाम कॉलोनी, साकेत नगर, जेतपुरा, यमुना नगर कॉलोनी, खरगोन मोतीपुरा, हिंगलाज नगर, स्मार्ट पार्क टाउनशिप, माँ रेवा विन्यास कॉलोनी, पानवा एवं भीलगांव आदि क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइन और निर्माण के बीच बेहद कम क्लियरेंस पाया गया है। यह अति उच्च वोल्टेज की बिजली से जुड़े संभावित करंट, स्पार्किंग, और अग्निकांड जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न कर सकता है। इन ट्रांसमिशन लाइनों के समीप हुये निर्माण खरगौन जिले में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की छह ट्रांसमिशन लाइने हैं जिनके समीप विद्युत सुरक्षा मानकों के विरूद्ध निर्माण कर लिये गये हैं। इन ट्रांसमिशन लाइनों में 132 के.व्ही. भीकनगांव-खरगोन डी.पी. लाइन, 132 के.व्ही. बिस्टन-लिलो लाइन, 132 के.व्ही. निमरानी-कसरावद लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-छैःगांव लाइन, 220 के.व्ही. निमरानी-ओंकारेश्वर लाइन एवं 220 के.व्ही. महेश्वर-पीथमपुर लाईन शामिल हैं। जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, 132 के.व्ही. या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, ताकि हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके। 600 से 950 गुना अधिक रहता है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है लेकिन इससे भी कहीं अधिक खतरनाक होती हैं। शहर भर में क्रियाशील एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 के.व्ही. (यानी 132,000 वोल्ट) एवं 220 के.व्ही. (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है। यह घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 के.व्ही. की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है। h