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बार्सिलोना मेले में सीएम यादव ने जाना स्मार्ट सिटी का ग्लोबल विजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘फीरा दे, बार्सिलोना मेले में देखा स्पेन के स्मार्ट नगर का माडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘फीरा दे बार्सिलोना’ में देखा स्पेन के स्मार्ट सिटी का मॉडल बार्सिलोना मेले में सीएम यादव ने जाना स्मार्ट सिटी का ग्लोबल विजन फीरा दे बार्सिलोना में स्पेन के स्मार्ट नगर मॉडल से प्रभावित हुए सीएम यादव मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना पर हुआ विचार-विमर्श भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पेन प्रवास के तीसरे दिन बार्सिलोना स्थित ‘फीरा दे बार्सिलोना – मोंटजुइक’ मेला परिसर का भ्रमण किया। यह मेला यूरोप के प्रमुख प्रदर्शनी एवं व्यापार मेलों में से एक है। वर्ष 1932 में स्थापित यह केंद्र बार्सिलोना के ऐतिहासिक मोंटजुइक क्षेत्र में स्थित है, जो सांस्कृतिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्पेन के स्मार्ट नगर मॉडल, पर्यावरणीय प्रबंधन, शहरी गतिशीलता एवं नवाचार प्रणाली का प्रत्यक्ष अवलोकन करना था, जिससे मध्यप्रदेश में भी इन क्षेत्रों में विकास को गति दी जा सके। ‘फीरा दे बार्सिलोना’ जैसे संस्थानों के सहयोग से मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के निवेश सम्मेलनों तथा स्थायी प्रदर्शनी केंद्र की स्थापना की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। मेला भ्रमण के दौरान मेले के प्रतिनिधि एवं मध्यप्रदेश के अधिकारियों की टीम भी मौजूद रही। फीरा दे बार्सिलोना परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है तथा प्रति वर्ष 150 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी करता है, जिनमें औद्योगिक, तकनीकी, नवाचार, पर्यटन तथा शहरी विकास जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। लगभग एक लाख 65 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला यह प्रदर्शनी परिसर ‘स्मार्ट नगर प्रदर्शनी विश्व अधिवेशन’, ‘चलित दूरसंचार विश्व अधिवेशन’, ‘एलिमेंटेरिया खाद्य एवं पेय व्यापार मेला’ तथा ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स समाधान विश्व अधिवेशन’ जैसे वैश्विक आयोजनों का सफल संचालन करता है।  

वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता डॉ. यादव ने, वन-टू-वन संवाद रहा अहम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वन-टू-वन बैठकों से खुले वैश्विक निवेश के नए द्वार सीएम यादव की सीधी बातचीत ने खोले विदेशी निवेश के नए रास्ते वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता डॉ. यादव ने, वन-टू-वन संवाद रहा अहम टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल से लेकर औद्योगिक ट्रांसफॉर्मेशन पर हुई निवेश वार्ता विश्वस्तरीय कंपनियों ने जताई मध्यप्रदेश में निवेश की गहरी रुचि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बार्सिलोना प्रवास के तीसरे दिन विश्व की अग्रणी कंपनियों के शीर्ष पदाधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात कर मध्यप्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार के नए अवसरों को लेकर विस्तृत चर्चा की। सेनेटरीवेयर, वस्त्र, स्वास्थ्य सेवाएं, डाटा सेंटर, एनीमेशन, ब्रांडिंग और मीडिया नीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी वैश्विक कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेशकों की संभावनाओं को लेकर गंभीर रुचि प्रदर्शित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे पहले स्पेन की अग्रणी सेनेटरीवेयर कंपनी रॉका ग्रुप (Roca Group) के कॉर्पोरेट संचालन निदेशक पाउ अबेलो से भेंट की। इस दौरान देवास स्थित कंपनी की इकाई ‘रॉका बाथरूम प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Roca Bathroom Products Pvt. Ltd.) द्वारा किए गए ₹164.03 करोड़ के निवेश और 445 लोगों को दिए गए रोजगार पर संतोष व्यक्त किया गया। कंपनी ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाई के विस्तार और विविधीकरण की योजना भी साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हेलोटेक्स ग्रुप (Helotex Group) के मालिक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोर्डी बोनारो ट्रियोलार्ट से भेंट हुई। कंपनी पहले से ही इंदौर स्थित ‘प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड’ (Pratibha Syntex Ltd.) के साथ साझेदारी में कार्यरत है। बैठक में वस्त्र उद्योग के विस्तार और निवेश प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने पर चर्चा हुई। अमेक (Association Multisectorial de AMEC) के निदेशक एलेजांद्रो गैलेगो अल्काइडे से मुलाकात में राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग, मीडिया एनालिटिक्स, एआई आधारित संचार रणनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की पहचान को सशक्त करने की दिशा में सहयोग की सहमति बनी। एसएसएल-कोटिंग्स (पावर सॉइल) के प्रतिनिधि जीफ विशेप के साथ हुई बैठक में टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीक “टेरा-3000” के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जो विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों, नींव और सख्त मिट्टी में उपयोगी है। इस समाधान के माध्यम से पारंपरिक निर्माण सामग्रियों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। सोगो समूह के सतीश रायसिंघानी के साथ बातचीत में भारत और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में एसओजीओ ब्रांड के उत्पादों के विस्तार की संभावनाएं तलाशी गईं। एसओजीओ घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक मजबूत यूरोपीय ब्रांड है, जो भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों की पहुँच बढ़ाना चाहता है। सर्विटाइज के सीईओ मार्क विंटर के साथ बैठक में औद्योगिक परामर्श, डिजिटल परिवर्तन और ग्राहक अनुभव आधारित समाधानों पर चर्चा हुई। यह कंपनी सेवा-आधारित व्यापार मॉडल के जरिये उद्यमों की दक्षता बढ़ाने में विशेषज्ञता रखती है और मध्यप्रदेश में MSME सेक्टर को स्मार्ट मॉडल से जोड़ने में रुचि रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नॉर्सेक ग्लोबल के निवेशकों के साथ भी सार्थक चर्चा हुई। स्पोर्ट्सफन टीवी एस.एल. के सह-संस्थापक सिद्धार्थ तिवारी से हुई बैठक में मध्यप्रदेश में फुटबॉल खेल के विकास हेतु प्रतिभा खोज, प्रशिक्षण शिविरों और अकादमियों की स्थापना के माध्यम से सहयोग की संभावनाएँ तलाशी गईं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी झारखंड सरकार के साथ पहले से इस दिशा में कार्यरत है और अब मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की पहल को लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों के समक्ष राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियों का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए आवश्यक भूमि, जल, ऊर्जा और मजबूत आधारभूत संरचना सहज रूप से उपलब्ध है। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी, दक्ष मानव संसाधन, सुगम और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में हासिल उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए एक सुरक्षित, स्थिर और समर्थ राज्य है, जो वैश्विक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक सहयोग के द्वार खोलता है।  

मध्यप्रदेश भवन में हुई मैहर बैंड की सांस्कृतिक संध्या

भोपाल मध्यप्रदेश भवन में शुक्रवार को आवासीय आयुक्त श्रीमती रश्मि अरुण शमी के मुख्य आतिथ्य में सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध मैहर बैंड की प्रस्तुति दी गई। मैहर बैंड की प्रस्तुति में जल तरंग वादन में श्री सौरभ कुमार चौरसिया, वायलिन में श्री गोकर्ण प्रसाद पांडे, हारमोनियम में श्री गौतम भारती, सरोद-वादन में श्री बृजेश कुमार द्विवेदी, तबला-वादन में डॉ. अशोक कुमार बाड़ोलिया और सारंगी पर श्री मोहम्मद अहमद खान ने संगत दी। बैंड द्वारा विभिन्न शास्त्रीय राग और लोकधुनों की प्रस्तुति दी गयी। आवासीय कला संस्था आर्ट ईचौल मैहर की संस्थापक श्रीमती अंबिका बैरी ने संस्था द्वारा दिए जा रहे सिरेमिक, काष्ठ, मेटल और पत्थर शिल्प-कला प्रशिक्षण और फैलोशिप पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मैहर जिले के ग्राम महेदर के गीताजंली इंटरनेशनल के डेलास ब्रांड द्वारा जिले के ओडीओपी टमाटर के प्रसंस्कृत उत्पादों में सॉस, कैचअप, प्यूरी और चटनी प्रदर्शित और विक्रय की गई। मैहर के शारदा माता के प्रसाद के साथ मृगनयनी और विंध्य हर्बल्स के उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई। कार्यक्रम में नई दिल्ली में पदस्थ मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी-कर्मचारी और दिल्ली में निवासरत मध्यप्रदेश के निवासी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में ऐतिहासिक और स्थापत्य स्थलों का करेंगे भ्रमण

स्पेन प्रवास का चौथा दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में ऐतिहासिक और स्थापत्य स्थलों का करेंगे भ्रमण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पेन प्रवास के चौथे और अंतिम दिन 19 जुलाई को बार्सिलोना की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य धरोहर स्थलों का भ्रमण करेंगे। दिन की शुरुआत प्रसिद्ध पार्क गुएल के भ्रमण से होगी, जो आर्किटेक्चर और प्रकृति के मेल का अद्भुत प्रतीक है। वे सागरादा फैमिलिया चर्च का भ्रमण भी करेंगे, जिसे विश्व की सबसे अनूठी निर्माण शैलियों में गिना जाता है। यहां की सृजनात्मकता और सांस्कृतिक ऊर्जा, उस दृष्टि से मेल खाती है, जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कला, संस्कृति और निवेश—तीनों के समन्वय से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना स्थित विश्वप्रसिद्ध पिकासो संग्रहालय का भ्रमण भी करेंगे। भ्रमण न केवल सांस्कृतिक समृद्धि में अनुभव होगा, बल्कि मध्यप्रदेश में रचनात्मक उद्योगों और कला से जुड़े क्षेत्रों में संभावनाओं की खोज की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसी दिन बार्सिलोना से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।  

हाई कोर्ट का मानवीय फैसला: 6 माह की गर्भवती नाबालिग पर नहीं थोपा जाएगा गर्भपात

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया कि दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग किसी भी हालत में आरोपित के घर पर नहीं रह सकती। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने आदेश दिया कि जब तक पीड़िता बालिग नहीं हो जाती, उसे रीवा के नारी निकेतन में ही रखा जाए। नारी निकेतन की अधीक्षक को भी निर्देशित किया गया है कि पीड़िता की सुरक्षा और देखरेख में कोई चूक न हो। यह मामला रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक 17 वर्षीय किशोरी ने गर्भधारण किया था। मऊगंज अदालत ने गर्भपात की अनुमति हेतु हाई कोर्ट को पत्र भेजा था। कोर्ट ने जब इस पर सुनवाई की तो पता चला कि पीड़िता आरोपित भूपेंद्र साकेत के साथ रह रही थी और उसने मेडिकल जांच व गर्भपात कराने से इनकार कर दिया है। गर्भ अब लगभग 25 सप्ताह का हो चुका है। कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता की मर्जी के बिना गर्भपात कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता, खासकर जब वह मेडिकल जांच भी नहीं करवा रही। इस स्थिति में, यदि माता-पिता लड़की को अपने पास नहीं रखना चाहते, तो उसे नारी निकेतन में ही सुरक्षित रूप से रखा जाए। वहीं, एक अन्य मामले में कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया। भोपाल की एक महिला ने सतना निवासी अरुणेंद्र कुमार गौतम पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया था। इस पर पुलिस ने दुष्कर्म और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दी, जिसे मंजूर कर लिया गया। बाद में महिला ने जमानत रद्द करने की मांग की, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में सामने आया कि महिला पहले भी जबलपुर में ऐसे ही एक मामले में एफआईआर दर्ज करा चुकी है और वह पहले से शादीशुदा भी है। कोर्ट ने इन तथ्यों के आधार पर एफआईआर और आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का इस तरह दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

सीएम मोहन ने कहा कि विभागों में भर्ती की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखनी चाहिए।

भोपाल नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद से राज्य सरकार ने कई विभागों में लगभग 29,000 पद भरे हैं। अभी भी 1.04 लाख से ज्यादा पद खाली हैं। एमपी सीएम मोहन यादव ने जुलाई को एक मीटिंग में सरकारी भर्तियों की रफ्तार की समीक्षा की। उन्होंने विभागों को भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। सरकार इस साल 27000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देने की योजना बना रही है। सरकार रोजगार के लिए एक पोर्टल चला रही है, जिस पर 27 लाख से ज्यादा नौकरी चाहने वालों ने अपना नाम दर्ज कराया है। सीएम मोहन यादव ने जुलाई को एक मीटिंग की। इस मीटिंग में उन्होंने सरकारी भर्तियों की रफ्तार पर बात की। उन्होंने कहा कि भर्ती का काम ठीक से होना चाहिए और इसे सबसे ज्यादा जरूरी मानना चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) भर्तियों पर नजर रखता है। GAD ने मीटिंग में बताया कि उन्होंने कितने लोगों को नौकरी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस साल 27000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देंगे। खाली पदों को भरने के लिए योजना 15 जुलाई तक 27 लाख से ज्यादा लोग एमपी एम्प्लॉयमेंट पोर्टल पर नौकरी के लिए रजिस्टर कर चुके थे। सरकार ने बताया कि इस पोर्टल पर सिर्फ वही लोग रजिस्टर करते हैं जो नौकरी ढूंढ रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य में इतने ही लोग बेरोजगार हैं। एक बड़े सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी नौकरियों की भर्ती पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि खाली सरकारी पदों को भरने के लिए एक योजना बनाई गई है। चल रही प्रमोशन प्रक्रिया बीजेपी ने 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वे पांच साल में 2.5 लाख सरकारी नौकरियां देंगे। सरकार का मानना है कि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने से भी कई पद भर जाएंगे। हालांकि, यह मामला अभी हाई कोर्ट में है। प्रमोशन कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद ही किए जाएंगे। विभागों को एक्शन में रहने के निर्देश जीएडी ने सभी विभागों को यह बताया है कि वे हर साल खाली पदों को कैसे भर सकते हैं। खाली पदों और भर्तियों की जानकारी रखने के लिए एक पोर्टल भी बनाया गया है। जुलाई की मीटिंग में सीएम मोहन ने कहा कि विभागों में भर्ती की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मुख्य सचिव और GAD के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागों को समय पर काम करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि विभागों को इन निर्देशों का पालन करने के बाद रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

दीनदयाल रसोई योजना:नगरीय निकायों ने किफायती दर पर भोजन की व्यवस्था

भोपाल  दीनदयाल रसोई योजना में नगरीय निकायों द्वारा अब तक करीब 4 करोड़ 60 लाख भोजन थाली का वितरण मात्र 5 रूपये प्रति थाली की दर पर जरूरतमंदों को किया गया है। यह योजना 51 जिला मुख्यालयों के 191 रसोई केन्द्रों के माध्यम से संचालित है। इनमें 166 स्थाई और 25 चलित रसोई केन्द्र कार्यरत हैं। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में व्यवसाय और श्रम कार्यों के सिलसिले में ग्रामीण क्षेत्रों से जरूरतमंद परिवारों का निरंतर आगमन होता है। नगरीय निकायों द्वारा इनके ठहरने और किफायती दर पर भोजन व्यवस्था के प्रयास किये जा रहे हैं। नगरीय निकायों द्वारा संचालन वर्तमान में 166 स्थाई रसोई केन्द्र में से 16 नगर निगमों में 58 रसोई केन्द्र और 99 नगर पालिका परिषद में 99 रसोई केन्द्र और 9 नगर परिषदों में 9 रसोई केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही 25 चलित रसोई केन्द्र में से 16 नगर निगमों में 23 और 2 नगर पालिका परिषद में 2 चलित रसोई केन्द्र संचालित हो रहे हैं। नगरीय निकायों द्वारा चलित रसोई केन्द्र की व्यवस्था इस उद्देश्य से की गई है कि जिन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे हैं उन्हें कार्य स्थल पर ही किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराया जाये। प्रदेश में चलित रसोई केन्द्र के वाहनों और उपकरणों की एकरूपता के लिये नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सुसज्जित वाहन उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। इसी के साथ दीनदयाल रसोई योजना के लिये नगरीय निकायों को अनुदान राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के विस्तार के लिये 68 नवीन रसोई घरों के संचालन का प्रस्ताव स्वीकृति के लिये राज्य शासन को भेजा गया है। धार्मिक नगरों में रसोई केन्द्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 6 धार्मिक नगरों मैहर, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, ओरछा और अमरकंटक में भी बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये दीनदयाल रसोई योजना का विस्तार किया है। नगरीय निकायों द्वारा जरूरतमंदों को दी जाने वाली थाली में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।  

बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश में मखाना क्रांति, किसानों को मिलेगा नया विकल्प

नर्मदापुरम  गेहूं, चना, धान के साथ नर्मदापुरम जिले में मखाने की खेती (makhana cultivation) करने का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग सब्सिडी देकर किसानों को इस खेती के लाभ बता रहा है। अभी तक 150 किसानों ने अपनी सहमति दे दी हैं। उन्हें मखाने उत्पादन का दरभंगा में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्यानिकी फसलों में विस्तार करते हुए मखाने को भी जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में जिलेभर में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने लगाए जाएंगे। मखाने की खेती पहली बार की जाएगी। इसे लेकर किसान असमंजस में हैं। इसलिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारी उन्हें मखाने के उत्पादन से लेकर लाभ तक की जानकारी दे रहे हैं। किसानों की बढ़ेगी आय बाजार में 2 हजार रुपए क्विंटल बिकने वाले मखाने की खेती होने वाली अतिरिक्त आय के बारे में बताया जा रहा है। किसान को बताया जा रहा है कि इसमें खेत का उपयोग नहीं करना है। किसान अपने तालाब में सिंघड़ा की खेती की तरह ही मखाने की फसल लगा सकता है। अभी तक 150 किसानों को चिह्नित किया गया है। इन किसानों को दरभंगा रिसर्च सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जल्दी ही एक दल रवाना होगा।  किसानों को शासन करेगा मदद मखाना की खेती (makhana cultivation) के लिए शासन किसानों को सब्सिडी देगा, इसमें कितनी राशि होगी। इसका निर्धारण होना अभी की स्थिति में बाकी है। इसके लिए शासन स्तर से योजना की नीति आने वाली है। इसके हिसाब से जिले में मखाना खेती की योजना संचालित होगी। उद्यानिकी अधिकारी भी जाएंगे दरभंगा किसानों की तरह उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को भी मखाने लगाने की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की टीम दरभंगा जाएगी। यह टीम वहां मखाने की खेती में तकनीक का उपयोग कैसे किया जाता है, इसका प्रशिक्षण लेगी। प्रयोग किया जा रहा है जिले में पहली बार मखाने की खेती करने का प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए अभी तक 150 किसान ने सहमति दी है। जल्द ही इन्हें दरभंगा में खेती करने को प्रशिक्षण दिलाएंगे। अधिकारियों को भी प्रशिक्षण मिलेगा।- रीता उईके, उप संचालक उद्यानिकी नर्मदापुरम