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बायपास पर राहत: रालामंडल ब्रिज दोबारा चालू, लेकिन बिजली के पोल अब भी नहीं लगे

इंदौर राऊ-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद ब्रिज के बाद रालामंडल के समीप बना ब्रिज भी ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। दोनों ब्रिजों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। दोनों ब्रिजों को बिना लोकार्पण के शुरू कर दिया गया है। रालामंडल ब्रिज डेढ़ माह पहले ट्रायल के लिए खोला था, लेकिन चार दिन बाद उसे फिर बंद कर दिया गया, क्योंकि ब्रिज का लोड टेस्ट नहीं हुआ था और रेलिंग के बाद कुछ गलत निर्माण भी हो गए थे। गलती समझ में आने पर बाद में अफसरों ने उसे तुड़वा दिया था। ब्रिज की दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद होने के कारण वाहन को सर्विस रोड से गुजरना पड़ रहा था। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की कतार लग जाती थी। राऊ से देवास के बीच 35 किलोमीटर के बायपास पर तीन जगह ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। दो स्थानों पर ब्रिज ट्रैफिक के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे ट्रिपल लेयर ब्रिज के शुरू होने में छह माह से अधिक का समय और लगना है। यहां मध्य हिस्से को तो ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी अंडरपास और फ्लायओवर का काम बाकी है। इस ब्रिज के बनने से बायपास से इंदौर शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों को आसानी होगी। अभी बोगदों से होकर वाहनों को आना पड़ता है, जबकि भारी वाहन तो बोगदों से आए ही नहीं पाते हैं। इस ब्रिज के बनने से शहर में एंट्री आसान होगी।रालामंडल ब्रिज ट्रैफिक के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन ब्रिज पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। यहां ट्रैफिक अंधेरे में ही चलेगा, जबकि बायपास के दूसरे ब्रिजों पर विद्युत पोल लगाए गए हैं।  

वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव की पहल से देशभर में पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश बन रहा देश का वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन हब वाइल्डलाइफ संरक्षण, इको-टूरिज्म और रोजगार का उभरता केंद्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व तक सीमित न रखते हुए उसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इसी दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की अनेक प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल वापसी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की वापसी का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को बसाने तक सीमित नहीं, बल्कि खो चुकी जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। इसी प्रकार चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिवस पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। वन विहार को पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए वहां 40 ई-व्हीकल भी उपलब्ध कराए गए हैं। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षणको नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्वप्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव श्रीधर वाकणकर के नाम पर रखा गया। मार्च-2025 में शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। इसी क्रम में अप्रैल 2025 में सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। अगस्त 2025 में ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।  हाथी संरक्षण में वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्यजीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना … Read more

आज 13 मई को मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे नरसिंहपुर से 1835 करोड़ का अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजनाओं से जटिल बीमारियों का मिल रहा निशुल्क उपचार

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक का जीवन अनमोल है और उनकी जिंदगी को किसी भी कीमत पर बचाने के लिए राज्य सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है। मंगलवार को उज्जैन के असनोरिया क्षेत्र में निवासरत परिवार के 5 माह के बालक यथार्थ सिंह  को ‘पीएम  एयर एम्बुलेंस सेवा’ के माध्यम से बेहतर इलाज के लिए बेंगलुरु के नारायणा अस्पताल भेजा गया है। बच्चा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है। यथार्थ इलाज इंदौर के एक अस्पताल में चल रहा था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अति मुश्किल परिस्थितियों में राज्य सरकार  सभी जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ी है। गंभीर बीमारी से पीड़ित बालक यथार्थ का उपचार आयुष्मान निरामय योजना के अंतर्गत निःशुल्क कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से प्रार्थना की है कि बालक यथार्थ पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर जल्द ही अपने घर लौट आए। प्रदेश में सुदृढ़ हो रही स्वास्थ्य सेवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता निरंतर बेहतर हो रही है। राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को समय पर और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजना जरूरतमंद नागरिकों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।इन योजनाओं से अब जटिल और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी बड़े अस्पतालों में निशुल्क एवं त्वरित उपचार की सुविधा मिल रही है। 

31 कन्या छात्रावास बनेंगे आदर्श, 15 मई से शुरू होगा शौर्य संकल्प प्रशिक्षण

भोपाल  पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने मंगलवार को विभागीय समीक्षा कर अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026' की तैयारियों की जानकारी ली। प्रमुख सचिव ने इसके प्रभावी और सुचारू क्रियान्वयन के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर के नेतृत्व में योजनांतर्गत 4000 युवाओं को सेना, पुलिस, होमगार्ड एवं अन्य सैन्य बलों में भर्ती के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके कार्यान्वयन के लिए समय-सीमा में कार्य कर अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति के लिए सालभर कर सकेंगे आवेदन प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने 2 दिनों में अनिवार्य रूप से लंबित छात्रवृत्तियों का अनिवार्य रूप से भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2025-26 के लिए 36 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। प्रमुख सचिव डॉ. कुमार ने इन चयनित विद्यार्थियों की राशि जल्द जारी कर प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 जून तक योजना का वर्षभर (रोलिंग आधार पर) एप्लिकेशन भरने के की व्यवस्था के साथ पोर्टल में बदलाव करने के भी निर्देश दिए। 31 कन्या छात्रावास बनेंगे 'आदर्श', 31 मई तक पूरे हों रसोई निर्माण कार्य प्रमुख सचिव ने चयनित 31 कन्या छात्रावासों को 'आदर्श छात्रावास' बनाने संबंधी सभी निर्माण कार्य 30 जून तक हर हाल में पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। छात्रावासों में मेस संचालन के लिए रसोई निर्माण के कार्यों को भी 31 मई तक पूर्ण करने की समय-सीमा तय की गई। उन्होंने छात्रावासों में रिक्त सीटों को जल्द भरने के भी निर्देश दिए। प्रमुख सचिव ने हाल ही में संशोधित हुई 'दिल्ली छात्रगृह योजना' की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की। इससे दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे प्रदेश के अधिक से अधिक ओबीसी विद्यार्थी इस योजना (प्रतिमाह 10,000 रुपये सहायता) का लाभ उठा सकें। समीक्षा बैठक में आयुक्त  सौरभ कुमार सुमन, संयुक्त संचालक  भूपेंद्र कुमार गोयल, मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मती पल्लवी वैद्य और मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. फरजाना गजाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।   

रतलाम में तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, 46.5 डिग्री के साथ देश में चौथे स्थान पर

भोपाल प्रदेश में गर्मी के तेवर अधिक तीखे हो रहे हैं। झंझावाती मौसम में प्रदेश के पश्चिमी जिलों का तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है। मंगलवार को रतलाम का अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 7.2 डिग्री अधिक है। यह प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा। मौसम विभाग ने इसे देश के चौथे सबसे गर्म शहर के तौर पर चिह्नित किया है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक देश में सबसे अधिक तापमान राजस्थान के बाड़मेर में 47.3 डिग्री दर्ज हुआ। वहीं फलोदी में इसे 46.8 डिग्री दर्ज किया गया। राजस्थान के जैसलमेर और महाराष्ट्र के अकोला में तापमान रतलाम जैसा ही 46.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बढ़ा रात का पारा और लू का प्रकोप दिन के तापमान में कई दिनों से वृद्धि के ट्रेंड की वजह से रात का तापमान भी बढ़ा है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान 24 से 29 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को रतलाम और धार भीषण लू की चपेट में रहे। तो दूसरी तरफ चक्रवातीय परिसंचरण के चलते कुछ हिस्सों में मौसम बदल गया है। दक्षिण–पश्चिम बालाघाट में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और कहीं–कहीं ओले गिरे। इंदौर, धार जिले के मांडू, देवास, सीहोर, सागर, छिंदवाड़ा और रायसेन में धूल भरी आंधी चली। द्रोणी सक्रिय होने से आंधी और गरज–चमक की स्थिति राजधानी भोपाल में दोपहर तीन बजे के बाद धूप–छांव देखने को मिली, जिससे उमस भरी गर्मी महसूस की गई। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि दक्षिण–पश्चिम मध्य प्रदेश से लेकर मणिपुर तक एक द्रोणी सक्रिय है। इसके प्रभाव से नमी आ रही है, जो तेज गर्मी के साथ मिलकर आंधी और गरज–चमक की स्थिति पैदा कर रही है। हालांकि अगले कुछ दिनों तक रतलाम सहित पूरे प्रदेश में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। प्रदेश में अगले 24 घंटों के दौरान दिन के तापमान में दो से चार डिग्री बढ़ने की संभावना जताई गई है। प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान शहर अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान भोपाल 42.6 25.6 इंदौर 43.6 25.6 ग्वालियर 41.5 26.8 जबलपुर 42.0 25.2  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं एवं प्रशासनिक विषयों की समीक्षा की

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं एवं प्रशासनिक विषयों की समीक्षा की। बैठक में डॉक्टरों की पदोन्नति, मेडिकल ऑफिसर्स की काउंसलिंग प्रक्रिया, टीबी मुक्त भारत अभियान और सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन अभियान की प्रगति पर विस्तार से चर्चा कर अप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनाने के लिए डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र तैयार करें, जिससे चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक एवं उपचारात्मक व्यवस्था और सुदृढ़ हो सके। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर्स की काउंसलिंग प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा की नवीन स्वास्थ्य संस्थानों में शीघ्र सेवा प्रदाय प्रारंभ किया जाये। “टीबी मुक्त भारत” अभियान की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश को टीबी मुक्त बनाने हेतु जनभागीदारी, समय पर जांच एवं उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को टीबी मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग एवं पोषण सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक स्क्रीनिंग, जागरूकता एवं समय पर उपचार के माध्यम से इस बीमारी के नियंत्रण हेतु विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  धनराजू एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

साइबर ठगी करने वाले दो अंतर्राज्यीय आरोपी झारखंड से गिरफ्तार

भोपाल प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में नर्मदापुरम जिले की थाना बनखेड़ी पुलिस एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी की वारदात में शामिल दो अंतर्राज्यीय आरोपियों को झारखंड राज्य के देवघर जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा फरियादी के बैंक खाते से 03 लाख 09 हजार 917 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी। प्राप्त जानकारी अनुसार फरियादी छोटेलाल कुशवाह पिता हरिसिंह कुशवाह, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम डूमर थाना बनखेड़ी जिला नर्मदापुरम ने 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते से अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कुल 03 लाख 09 हजार 917 रुपये की धोखाधड़ी की गई है। शिकायत पर थाना बनखेड़ी में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम  साई कृष्णा एस. थोटा (IPS) के मार्गदर्शन में विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों एवं साइबर विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम 02 मई को झारखंड रवाना हुई। पुलिस टीम ने अत्यंत सूझबूझ एवं गोपनीय तरीके से आरोपियों के निवास क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक भेष बदलकर निगरानी की। इसके पश्चात 07 मई को देर रात्रि दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में उमेश दास पिता शंकर दास उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम बिल्ली, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) तथा उत्तम कुमार दास पिता मनोज कुमार दास उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम गुनियासोल, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन, बैंक पासबुक एवं एटीएम कार्ड जप्त किए गए हैं। ऐसे देते थे साइबर ठगी को अंजाम प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी नागरिकों के मोबाइल पर APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता था, आरोपी उसके मोबाइल की जानकारी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद आरोपी पीड़ित के मोबाइल नंबर की eSIM तैयार कर लेते थे, जिससे बैंक खाते से जुड़े OTP एवं बैंकिंग अलर्ट सीधे आरोपियों तक पहुंचने लगते थे। इसी तकनीक का उपयोग कर फरियादी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में 03 लाख 09 हजार 917 रुपये ट्रांसफर किए गए। क्या होती है APK फाइल? APK (Android Package Kit) एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में उपयोग होने वाली एप्लीकेशन फाइल होती है। जिस प्रकार कम्प्यूटर में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए “.EXE” फाइल का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार एंड्रॉयड मोबाइल में एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए “.APK” फाइल का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः APK फाइल वैध मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए उपयोग होती है, लेकिन साइबर अपराधी इन्हीं APK फाइलों का दुरुपयोग कर फर्जी एवं हानिकारक एप्लीकेशन तैयार कर लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल कराते हैं। साइबर अपराधियों द्वारा व्हाट्सएप, सोशल मीडिया लिंक, टेलीग्राम चैनल एवं अन्य ऑनलाइन माध्यमों से APK फाइल भेजी जाती है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता है तथा मांगी गई परमिशन को अनुमति देता है, वैसे ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी अपराधियों की पहुंच में आ जाती है। इसके माध्यम से आरोपी मोबाइल के SMS, OTP, बैंकिंग मैसेज, कॉन्टैक्ट, गैलरी एवं अन्य निजी जानकारी तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं और बाद में बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन एवं साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं। नागरिकों के लिए सावधानी एवं सुरक्षा संबंधी सुझाव मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी अज्ञात लिंक, APK फाइल या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। केवल अधिकृत एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर मोबाइल स्क्रीन शेयर न करें और न ही बैंकिंग संबंधी ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा करें। यदि मोबाइल अचानक बंद हो जाए, नेटवर्क गायब हो जाए अथवा बिना जानकारी के eSIM एक्टिवेट होने का संदेश प्राप्त हो तो तुरंत अपने मोबाइल सेवा प्रदाता एवं बैंक से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा वेबसाइट National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।  

सिंह ने लघु उ‌द्योग निगम के अध्यक्ष का किया पदभार ग्रहण

भोपाल   सत्येंद्र भूषण सिंह ने मध्यप्रदेश लघु उ‌द्योग निगम लिमिटेड के अध्यक्ष पद का मंगलवार को पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, सूक्ष्म, लघु एवं उ‌द्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी और विधायक भोपाल दक्षिण पश्चिम  भगवान दास सबनानी सहित पार्टी पदाधिकारी, संगठन के कार्यकर्ता तथा आयुक्त एमएसएमई  दिलीप कुमार उपस्थित थे। अध्यक्ष  सिंह ने नियुक्ति पर प्रदेश शासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लघु उ‌द्योग निगम केवल एक उपक्रम नहीं, बल्कि लाखों कारीगरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के सपनों का मंच है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा देश के युवा उ‌द्यमियों के लिए जो रोड मैप तैयार किया गया है उस पर संकल्पित होकर निगम को प्रगतिशील बनायेंगे। उन्होंने कहा कि "वोकल फॉर लोकल" को "ग्लोबल फॉर लोकल बनाना और कारीगर से कारोबारी तक जिले में छिपी हुई हुनर को मुख्य बाजार से जोड़ना, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, लघु उ‌द्यमियों के लिए प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और लाभप्रद बनाना उनका लक्ष्य है। अध्यक्ष  सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश के हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास होंगे। 

फ्रांस और भारत के बीच दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी हो रही है लगातार मजबूत : फ्रांस राजदूत मथाउ

भोपाल  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री  चैतन्य काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश आज शांति, स्थिरता और औद्योगिक संभावनाओं का मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप निवेशक-अनुकूल नीतियां विकसित की हैं, जिससे उद्योगों के लिए भरोसेमंद और सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के हृदय स्थल पर स्थित होने के कारण भारत के प्रमुख बाजारों तक सहज और संतुलित पहुंच प्रदान करता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क अत्यंत सुगम एवं किफायती बनता है। मंत्री  काश्यप ने यह बात कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में इंडो-फ्रेंच कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कही। मंत्री  काश्यप ने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में मध्यप्रदेश तेजी से नई संभावनाएं विकसित कर रहा है। सिंचाई क्षमता में हुए विस्तार से कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को विशेष गति मिली है। मंत्री  काश्यप ने कहा कि कारोबार सुगमता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देश में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है तथा निवेशकों के लिए पारदर्शी और उद्योग समर्थक वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस सहित यूरोपीय देशों के साथ मध्यप्रदेश की औद्योगिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और ऐसे आयोजन वैश्विक निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश और फ्रांस के बीच यह सहयोग आने वाले समय में और अधिक सशक्त होगा तथा यह साझेदारी औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति के नए अवसर तैयार करेगी। फ्रासं और भारत के बीच दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी हो रही है मजबूत : फ्रांस के राजदूत  मथाउ भारत में फ्रांस के राजदूत  थिएरी मथाउ ने कहा कि इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होते आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने अपनी उद्योग अनुकूल नीतियों और निवेश समर्थक वातावरण के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए नई संभावनाएं निर्मित की हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत के बीच दीर्घकालिक एवं भरोसेमंद साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है तथा दोनों देश आर्थिक सहयोग, नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में 700 से अधिक फ्रांसीसी कंपनियां कार्यरत हैं, जो रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, अधोसंरचना, रिटेल, जैव विविधता, शिक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में फ्रांस की कंपनियां मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के साथ फ्रांस के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में शिक्षा, पर्यटन, अकादमिक आदान-प्रदान और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग और अधिक विस्तारित होगा। त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और तेज क्रियान्वयन की कार्य संस्कृति : मुख्य सचिव  जैन मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेश आधारित औद्योगिक विकास को गति देने के लिए उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्रों पर रणनीतिक रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने बाबई औद्योगिक क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वीकृति मिलने के तुरंत बाद परियोजना पर कार्य प्रारंभ हुआ और अल्प समय में ही पूरे औद्योगिक क्षेत्र का आवंटन कर 11 इकाइयों का भूमि पूजन किया गया। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग सहित कई क्षेत्रों में तेजी से निवेश और विस्तार हो रहा है तथा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए 18 नई क्षेत्रीय नीतियां लागू की गई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि निवेश प्रक्रियाओं को पूरी तरह सरल और पारदर्शी बनाया गया है तथा फ्रांस की प्रमुख कंपनियों और वैश्विक संस्थाओं की मध्यप्रदेश में लगातार रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मंडला में महत्वपूर्ण परमाणु ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है तथा स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मजबूत अधोसंरचना और निवेश अनुकूल वातावरण : प्रमुख सचिव  सिंह औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी केंद्रीय भौगोलिक स्थिति के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत उपभोक्ता बाजार तक सहज पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि मजबूत औद्योगिक अधोसंरचना, 31 गीगावाट विद्युत क्षमता, प्रचुर जल उपलब्धता, 8 एयरपोर्ट, 5 आर्थिक कॉरिडोर, विस्तृत सड़क नेटवर्क और एक लाख एकड़ से अधिक औद्योगिक भूमि मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के साथ फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, फूड प्रोसेसिंग, एयरोस्पेस और मेडिकल डिवाइसेस जैसे क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से फ्रांस को लगभग 290 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, फूड इंडस्ट्री अवशेष, एल्युमिनियम उत्पाद और टेक्सटाइल प्रमुख रहे। उन्होंने कहा कि सिंगल विंडो प्रणाली, जीआईएस आधारित भूमि आवंटन, अनुपालन सरलीकरण तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने निवेशकों के लिए उद्योग स्थापना को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया है। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की महानिदेशक सु पायल एस. कंवर ने कहा कि मध्यप्रदेश फ्रांसीसी निवेश के लिए तेजी से उभरता हुआ विकास केंद्र है और यह कॉन्क्लेव व्यापार, नवाचार और सतत विकास के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच व्यापारिक संबंधों को और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न राज्यों में निवेश कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं तथा मध्यप्रदेश संस्करण राज्य स्तरीय सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेशन सेंटर में आयोजित इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव-2026 में भारत और फ्रांस के बीच औद्योगिक, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक मंथन हुआ। इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम तथा भारत स्थित फ्रांस दूतावास के सहयोग से आयोजित कॉन्क्लेव में फ्रांस की प्रमुख कंपनियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं तथा शासकीय अधिकारियों ने भागीदारी की। कार्यक्रम में ऊर्जा, अधोसंरचना, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय, स्वास्थ्य, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, संचार, सतत विकास, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण तथा सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में निवेश एवं साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कॉन्क्लेव के पूर्व फ्रेंच डेलिगेशन ने मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय का भ्रमण कर प्रदेश की जनजातीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को देखा। अगले दिन प्रतिनिधिमंडल ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका शैलाश्रय का भ्रमण … Read more