samacharsecretary.com

10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं में देशभर के निशानेबाजों ने दिखाया दम

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित “24वीं कुमार सुरेन्द्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैंपियनशिप (राइफल इवेंट्स)” के अंतर्गत आज 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर, जूनियर एवं यूथ वर्ग की स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में देशभर से आए खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर वर्ग में राजस्थान की जोड़ी ने जीता स्वर्ण 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम सीनियर स्पर्धा में राजस्थान के दिव्यांश एस पंवार एवं मनीषा की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 503.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रेलवे की अर्जुन बाबूता एवं सोनम उत्तम की टीम ने 502.5 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं इस्मिता की जोड़ी ने 438.3 अंक अर्जित कर कांस्य पदक प्राप्त किया। जूनियर वर्ग में हरियाणा का दबदबा 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम जूनियर स्पर्धा में हरियाणा की अमीरा एवं रोहित कन्यन की जोड़ी ने 501.9 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पश्चिम बंगाल के अभिनव शॉ एवं स्वास्तिका ने 501.0 अंक के साथ रजत पदक प्राप्त किया। महाराष्ट्र की अवनी राठौड़ एवं प्रीतम केंद्रे की टीम ने 432.8 अंक अर्जित कर कांस्य पदक हासिल किया। यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की जोड़ी रही अव्वल 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम यूथ वर्ग में महाराष्ट्र की शाम्भवी एवं वेदांत वाघमारे की जोड़ी ने 496.6 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उत्तरप्रदेश के अंश डबास एवं कोपल ने 496.1 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि पश्चिम बंगाल के स्वास्तिका एवं अभिनव शॉ ने 434.7 अंक अर्जित कर कांस्य पदक जीता। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों, रेलवे, सेना एवं अन्य संस्थानों के खिलाड़ियों ने सहभागिता करते हुए उच्च स्तरीय प्रदर्शन किया। यह आयोजन युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति रुचि, अनुशासन एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 15 मई तक आयोजित होंगी विभिन्न स्पर्धाएँ उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता 03 मई 2026 से 15 मई 2026 तक म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता के अंतर्गत आगामी दिनों में विभिन्न राइफल स्पर्धाओं का आयोजन किया जाएगा। खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएँ सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।  सारंग ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना एवं अकादमियों के माध्यम से देश को भविष्य के श्रेष्ठ खिलाड़ी मिलते रहेंगे। 

मध्यप्रदेश को बड़ी रेल सौगात, नई लाइन से गुजरात की दूरी होगी कम

झाबुआ मध्य प्रदेश में जून महीने तक नई रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। सांसद अनिता चौहान की अध्यक्षता में हुई झाबुआ जिला विकास समन्वय एवं मूल्यांकन समिति (दिशा) की बैठक में जिले के विकास को नई रफ्तार देने पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण इंदौर-दाहोद रेल परियोजना रही। इसके तहत रेलवे अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि गुजरात के कतवारा से झाबुआ के मध्य रेल लाइन (Katwara-Jhabua railway line) निर्माण का कार्य जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इंदौर-दाहोद परियोजना का हिस्सा है ये रेल लाइन बता दें कि, गुजरात के कतवारा से मध्य प्रदेश के झाबुआ तक बन रही रेल लाइन महत्वाकांक्षी इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट ( Indore-Dahod railway line project) का हिस्सा। इस परियोजना के तहत 204.76 किलोमीटर तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना की कुल लागत 1873 करोड़ रुपए है जिसके अंतर्गत प्रदेश के धार और झाबुआ जैसे अन्य आदिवासी जिलों में पहली बार रेल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इससे गुजरात तक की दूरी कम होगी। बैठक में शामिल वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम घरसट की मौजूदगी में हुई बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबोर, भाजपा जिलाध्यक्ष भानू भूरिया, थांदला विधायक वीरसिंह भूरिया, एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन मुद्दों पर विशेष रूप से फोकस किया जल संरक्षणः जिले में गहराते जल संकट के स्थायी समाधान पर चर्चा करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग की समीक्षा की गई। जिला पंचायत सीईओ जितेन्द्रसिंह चौहान ने बताया स्वीकृत 1233 खेत तालाबौ में से 260 पूर्ण हो चुके हैं, शेष 30 मई तक पूरे होंगे। डगवेल रिचार्ज के 4071 कार्यों में से 2244 पूर्ण हो चुके है, शेष 15 मई तक पूरे करने का लक्ष्य है। जिले के 147 पुराने अमृत सरोवरी मैं से 112 लबालब है। अमृत 2.0 के तहत 14 नए तालाबों का निर्माण जारी वाले 1,748 हैंडपंपों के पास अनिवार्य रूप से रिचार्ज पिट बनाए जाएं ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। कृषि एवं तकनीक: कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान उप संचालक एनएस रावत ने आगामी खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया। किसानों को ई-विकास प्रणाली से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सोनल जसवंत भाबीर ने किसानों की सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करने का सुझाव दिया। सांसद ने जल संकट को देखते हुए कम पानी वाली और सूखा प्रतिरोधी फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बुनियादी ढांचा और बिजली व्यवस्थाः प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मजरा-टोला योजना में 181 सड़कों की डीपीआर तैयार की जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत क्षतिग्रस्त ग्वाली ब्रिज का मुद्दा विधायक वीरसिह भूरिया ने उठाया, जिस पर अधिकारियों ने बताया कि पुराने ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर नई निविदा प्रक्रिया शुरू सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत जिले में 435 घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। सांसद ने इस योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। शिक्षा और स्वास्थ्यः टीबी मुक्त झाबुआ का संकल्प : सांसद ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए एक भावुक अपील की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से निक्षय मित्र बनने और टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध कराने का आग्रह किया। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया जिले के विद्यार्थियों को 5,933 साइकिलें वितरित की जा चुकी हैं और 'अपार आईडी' निर्माण का कार्य प्रगति पर है। महिला विकासः प्रधानमंत्री मातृ वंदना और लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 350 से अधिक नए हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। पारदर्शी भुगतान और उपार्जनः जिला आपूर्ति अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक 19,368 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जिसका 31.52 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में पीएम-किसान हितग्राहियों की ई-केवाईसी शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

तबादला नीति में बड़ा बदलाव, स्वैच्छिक ट्रांसफर को प्राथमिकता देने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में इस बार स्वेच्छा से स्थानांतरण मांगने वालों को प्राथमिकता मिल सकती है। कर्मचारी विभिन्न कारणों से स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण चाहते हैं जबकि विभागों की प्राथमिकता प्रशासनिक आधार रहता है। स्थानांतरण नहीं होने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पिछली कैबिनेट की बैठक में स्वयं यह बात उठाई और कहा कि स्वैच्छिक स्थानांतरण तो अधिक होने चाहिए। अब सामान्य प्रशासन विभाग आगामी मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में जो स्थानांतरण नीति प्रस्तावित करने जा रहा है, उसमें स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वालों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष बड़ी संख्या में अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत कारण बताकर स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग की जाती है। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण करने की अनुमति नहीं होती है। इसके कारण अधिकांश आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता है। स्वैच्छिक तबादलों के लाभ और प्रस्तावित नीति स्वैच्छिक स्थानांतरण में प्रशासनिक व्यय भी नहीं देना होता है। इसका दूसरा लाभ यह है कि ऐच्छिक स्थान पर पहुंचने से कर्मचारी की उत्पादकता बढ़ती है, क्योंकि वह मन लगाकर काम कर सकता है। इस व्यावहारिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वैच्छिक स्थानांतरण को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रस्तावित कर रहा है कि स्वैच्छिक आवेदनों को गुण-दोष के आधार पर पहले निराकरण किया जाएगा। यदि संभव होगा तो पहले इनके ही तबादले किए जाएंगे, फिर प्रशासनिक आधार को देखा जाएगा। स्थानांतरण से प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक के लिए हटाया जा सकता है। निर्धारित किए जा सकते हैं ये प्रविधान अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा एवं मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।     शिक्षा विभाग की अलग नीति रहेगी, जिसका आधार सामान्य प्रशासन विभाग की नीति को सुनिश्चित किया जाएगा।   जिला संवर्ग एवं राज्य संवर्ग के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के अंदर स्थानांतरण कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद होंगे।     प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण विभागीय मंत्री एवं मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे।     पिछले एक वर्ष में स्थानांतरित कर्मचारियों को सामान्यतः दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।     उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से होंगे।     गंभीर बीमारी, न्यायालयीन आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसी परिस्थितियों में प्रतिबंध अवधि में भी स्थानांतरण किए जा सकेंगे।  

आवास निर्माण के लिए DPR की मंजूरी, PM Awas Yojana के तहत 10 हजार फ्लैट बनेंगे

इंदौर   प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत नगर निगम ने विभिन्न स्थलों पर आवास निर्माण करने के लिए कुल 5 डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सरकार के 5 में से 2 डीपीआर मंजूर करते ही निगम फ्लैट निर्माण के काम पर लग गया है, जो कि ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा) और बढिय़ा कीमा में बनेंगे। सबके पास खुद का आवास हो और मकान की कीमत भी कम हो इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की गई है। योजना के पहले चरण में इंदौर शहर और आसपास 13 जगहों पर मिली सरकारी जमीन पर 18606 फ्लैट बनने के साथ लोगों को आबंटित होना शुरू हो गए हैं। अब प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 पर काम शुरू किया गया है। भेजी गई डीपीआर मंजूरी इसके चलते ताप्ती परिसर ट्रेजर फैंटेसी (सिंदौड़ा रंगवासा), सनावदिया, बढिय़ा कीमा और उमरीखेड़ा में 10 हजार फ्लैट बनाने की डीपीआर मंजूरी के लिए राज्य शासन के जरिए केंद्र सरकार को भेजी गई। निगम अफसरों के अनुसार ताप्ती परिसर और बढिया कीमा की डीपीआर मंजूर हो गई है। अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।  इसके लिए पिछले दिनों निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और प्रधानमंत्री आवास योजना के अपर आयुक्त अर्थ जैन ने स्थल निरीक्षण किया था। साथ ही अफसरों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत प्रस्तावित सभी आवासीय परियोजनाओं से पात्र हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके, इसके लिए फ्लैट का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-2.0 पर एक नजर     6048 वन बीएचके के फ्लैट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए बनेंगे।     1368 टू बीएचके के फ्लैट बनेंगे। 720 थ्री बीएचके के फ्लैट बनेंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है… प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, निम्न आय वर्ग (LIG), और मध्यम आय वर्ग (MIG) के परिवारों को 2022 (और अब 2.0 के तहत आगे) तक पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत सरकार घर बनाने या खरीदने के लिए सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत, पात्र लाभार्थियों को नया घर बनाने या कच्चे घर को पक्का करने के लिए लगभग 1.20 लाख से 2.50 लाख तक की वित्तीय सहायता/सब्सिडी मिलती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक के पास पहले से कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए। यह योजना मुख्य रूप से EWS (आर्थिक रूप से कमजोर), LIG (निम्न आय वर्ग) और MIG (मध्यम आय वर्ग) के लिए है।

एमपी में डॉक्टरों की भर्ती का नया रिकार्ड, अस्पतालों के लिए जारी हुई सबसे बड़ी सूची

इंदौर  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। 13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

डायल-112 जवानों की संवेदनशील कार्यवाही से घायल राष्ट्रीय पक्षी को समय पर मिला उपचार

भोपाल  शाजापुर जिले के थाना सुनेरा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्यवाही से घायल पक्षी को आवश्यक देखभाल एवं संरक्षण मिल सका। 09 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुनेरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेहंदी में एक मोर घायल अवस्था में पड़ा है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही सुनेरा थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  बृजमोहन यादव एवं पायलट  महेंद्र सिंह जादौन ने  मौके पर पहुँचकर पाया कि वन क्षेत्र से भटककर आया मोर अज्ञात कारणों से घायल हो गया था। डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल मोर को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा एफआरव्ही वाहन की सहायता से उपचार एवं देखभाल हेतु वन केंद्र, शाजापुर पहुँचाकर वन विभाग के अधिकारियों के सुपुर्द किया। डायल-112 जवानों की मानवीय एवं संवेदनशील कार्यवाही से राष्ट्रीय पक्षी को समय पर उपचार एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा मानव ही नहीं बल्कि वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

मोदी सरकार की 12वीं सालगिरह: मोहन सरकार लाएगी खुशियों की सौगात

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 26 मई 2026 को अपने 12 वर्ष पूरे कर 13वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। इस मौके को खास बनाने के लिए भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मध्य प्रदेश में सरकार भी केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ ही प्रदेश स्तर पर नई सौगातों की तैयारी कर रही है। केंद्र की योजनाओं के प्रचार का बनेगा रोडमैप सूत्रों के मुताबिक, मोहन सरकार इस अवसर पर केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को प्रदेश की जनता के सामने प्रभावी तरीके से रखने का रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत गांव-गांव और शहर-शहर तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने पर फोकस रहेगा। जनहित योजनाओं के विस्तार के निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनहित से जुड़ी योजनाओं का विस्तृत खाका तैयार करें और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की योजना बनाएं। सरकार के फोकस में खासतौर पर किसान,आदिवासी वर्ग,महिलाएं रहेंगे। ढाई साल पूरे होने पर भी सरकार का विशेष फोकस मई माह में मोहन सरकार के ढाई साल पूरे हो रहे हैं। ऐसे में सरकार इस अवधि को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही है। माना जा रहा है कि इसी अवसर पर कुछ नई घोषणाएं और योजनाएं सामने आ सकती हैं। जनहित योजनाओं का खाका तैयार करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने टॉप अफसरों से कहा है कि जनहित योजनाओं का खाका तैयार कर उनके विस्तार पर योजना तैयार करें। इनमें कि सान और आदिवासी सरकार की फोकस में होंगे। बता दें, मई में मोहन सरकार के भी ढाई साल पूरे होंगे। सरकार इस मौके को खास बनाना चाहती है। जनता को ये सौगात दे सकते हैं मुख्यमंत्री     दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले लाभों का दायरा बढ़ा सकते हैं।     आदिवासियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने में तेजी।     सड़क, सिंचाई व बिजली से वंचित क्षेत्रों में नई योजना की शुरु आत।     महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा।     लघु उद्योगों की स्थापना के लिए अतिरिक्त छूट दी जा सक ती है।     कृषि आधारित उद्योगों में किसानों व उनके परिवारों को जोडऩे के प्रयास। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए होगी बैठक बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी। भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव(CM Mohan Yadav) शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है। मंत्रियों के कामकाज की होगी समीक्षा इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की विभागवार समीक्षा बैठकें बुलाने के निर्देश दिए हैं। ये बैठकें 8 से 10 मई के बीच आयोजित होंगी। भोपाल में राजनीतिक हलचल तेज हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद भोपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। निगम-मंडलों में नियुक्तियों और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।  

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ सिंहस्थ 2028 की तैयारी

उज्जैन  उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब सुविधाओं के विस्तार के साथ ही सिंहस्थ 2028 की व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े बदलाव करने जा रहा है। आने वाले समय में श्रद्धालुओं को न सिर्फ दर्शन में आसानी होगी, बल्कि उन्हें मंदिर की अन्य प्रमुख आरतियों की जानकारी भी मिल सकेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगेंगे नए शेड और बैरियर्स महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए महाकाल लोक में फिलहाल फॉगिंग फव्वारे लगाए गए हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से राहत देने के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से फैब्रिकेशन शेड लगाया जाएगा। वहीं दर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जल्द ही क्यूआर आधारित बैरियर्स भी लगाए जाएंगे, जिससे श्रद्धालुओं को व्यवस्थित और आसान तरीके से दर्शन हो सकेंगे। अब सांध्य और शयन आरती की जानकारी भी मिलेगी अभी तक देश-विदेश से आने वाले अधिकांश श्रद्धालु केवल सुबह होने वाली भस्म आरती के बारे में ही जानते हैं। मंदिर प्रशासन अब ऐसे प्रयास करेगा, जिससे श्रद्धालुओं को सांध्य आरती और शयन आरती के महत्व की भी जानकारी मिल सके। मंदिर समिति का मानना है कि इन आरतियों में शामिल होकर श्रद्धालु धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे और बाबा महाकाल की विशेष पूजा परंपराओं से जुड़ पाएंगे। वेबसाइट पर शुरू होगा अन्नक्षेत्र मॉड्यूल मंदिर प्रशासन ने वेबसाइट पर अन्नक्षेत्र मॉड्यूल शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मंदिर समिति का 29974.37 लाख रुपये का प्रस्तावित बजट भी पारित किया गया है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए बढ़ेंगे इंतजाम सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए मंदिर में 80 नई स्टील दानपेटियां बनाई जाएंगी। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कतार प्रबंधन को मजबूत करने के लिए करीब 1000 नए बैरिकेड्स लगाने की मंजूरी भी दी गई है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि हर श्रद्धालु को सुगम और व्यवस्थित दर्शन का लाभ मिल सके।

शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर मंथन, दो दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

भोपाल  राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं उच्च शिक्षा में अकादमिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से "स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम निर्माण एवं चिन्हित विषयों की संदर्भ पुस्तकों की पांडुलिपियों में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं अकादमिक गुणवत्ता परीक्षण" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का 8 एवं 9 मई को आयोजन हुआ। उच्च शिक्षा विभाग एवं मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में भोपाल स्थित पलाश रेसिंडेसी में दो दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला में प्रदेशभर के विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, अकादमिक विद्वानों एवं नीति-निर्माताओं ने सहभागिता की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप, उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों एवं संदर्भ ग्रंथ पुस्तकों की गुणवत्ता, प्रासंगिकता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर व्यापक मंथन किया। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल शैक्षणिक सुधार का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था को आत्मनिर्भर, मूल्याधारित एवं ज्ञान-केंद्रित बनाने का व्यापक दृष्टिकोण है।  सिपाहा ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए तैयार की जा रही पाठ्य सामग्री गुणवत्तापूर्ण, समकालीन तथा भारतीय संदर्भों से समृद्ध होना आवश्यक है। मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक  अशोक कड़ेल ने कहा कि अकादमिक पांडुलिपियों का गुणवत्ता परीक्षण उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी एवं रोजगारोन्मुखी ज्ञान-संसाधनों के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास बताया। शिक्षा उत्थान न्यास समिति के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, संस्कार और राष्ट्रबोध का निर्माण करना भी है। उन्होंने भारतीय चिंतन, संस्कृति एवं परंपरागत ज्ञान को पाठ्यक्रमों में समाहित करने पर बल दिया। डॉ. कोठारी ने बताया कि प्रदेश, देश का पहला राज्य है जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्यापक कार्य हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग की यह पहल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण साबित होगी। महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल हरियाणा के पूर्व कुलपति डॉ. रमेश चंद्र भारद्वाज ने इस कार्यक्रम को वैश्विक स्तर का कार्यक्रम बताया। उन्होंने प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकों एवं लेखकों को धन्यवाद देते हुए उत्कृष्ट कार्य की प्रशंसा भी की। कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में स्नातक तृतीय वर्ष के 21 विषयों के लिए तैयार पाठ्यक्रमों एवं पांडुलिपियों का विशेषज्ञों द्वारा गहन परीक्षण किया गया। विषय विशेषज्ञों ने पाठ्य सामग्री की अकादमिक गुणवत्ता, भाषा, तथ्यात्मक शुद्धता, समसामयिकता एवं विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप उपयोगिता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. रविन्द्र कान्हेरे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित भारत और विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला है। इसके उपरांत भारतीय ज्ञान परंपरा संदर्भ पुस्तक की पांडुलिपि का परीक्षण किया गया। कार्यशाला के द्वितीय दिवस में भारतीय ज्ञान परंपरा संदर्भ पुस्तक की पांडुलिपि का प्रस्तुतीकरण किया गया तथा 21 विषयों के लिए तैयार पाठ्यक्रमों के परीक्षण का शेष कार्य संपन्न हुआ। विभिन्न विषयों के अध्यक्षों द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से पाठ्यक्रमों की विशेषताओं, उद्देश्यों एवं नवाचारों पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला के दौरान उच्च शिक्षा विभाग की भारतीय ज्ञान परंपरा शीर्ष समिति की बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित अध्ययन सामग्री, पाठ्यक्रम विकास एवं भावी कार्ययोजना पर गंभीर विमर्श किया गया। साथ ही शोध गतिविधियों एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष बैठक भी आयोजित की गई। कार्यशाला के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार की जा रही अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों, भारतीयता एवं शोध प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करेगी। यह कार्यशाला, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। कार्यशाला के अंतिम चरण में "विकसित भारत-मध्यप्रदेश में शिक्षा" विषयक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिए विभिन्न सुझावों पर विचार किया गया। कार्यक्रम का संचालन विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

तेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे अजय गुप्ता बने भारतीय वन सेवा के अधिकारी

रायपुर छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक प्रतिभा ने आज देश की सर्वाेच्च सेवाओं में अपनी जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। रायगढ जिले के सम्बलपुरी ग्राम के एक साधारण तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सुपुत्र अजय गुप्ता ने अपने अटूट संकल्प से भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और सही मार्गदर्शन की मोहताज होती है।           रायगढ़ के संबलपुरी गांव में तेंदूपत्ता और महुआ बीनने वाला अजय गुप्ता अब IFS अधिकारी बन गया है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए अजय ने पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जो कभी परिवार की रोजी-रोटी था, उसकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है। अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही। अजय कहते हैं कि पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित है, लेकिन एनआईटी में एडमिशन लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं। अजय कहते हैं कि जंगल उनके बचपन से ही जिंदगी का हिस्सा रहा है। जंगल ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि जीवन की दिशा भी दी। वह कहते हैं बचपन से मेरा जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने मुझे बहुत कुछ दिया है, बस्तर में काम करने के दौरान भी जंगल से रिश्ता और मजबूत हुआ। संघर्ष की जमीन से सफलता के आसमान तक          अजय का बचपन जंगलों के बीच वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी करते हुए बीता। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अजय बताते हैं। माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को ही अपना लक्ष्य माना। छुट्टियों के दौरान अजय स्वयं जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ इकट्ठा करने में माता-पिता की मदद करते थे। अभावों के बीच भी उन्होंने 10वीं में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का परिचय दिया था। सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने 'कैशलेस सपोर्ट' और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके। अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है – मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय              मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।            मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की 'लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति' और 'पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति' जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं। वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक         वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। युवाओं के लिए नया आदर्श          अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।