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भोपाल गैस त्रासदी के कचरे पर रिपोर्ट पेश, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताई स्थिति

भोपाल/जबलपुर  भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद निकली राख में पारे की मात्रा उपस्थित होने के संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष के अधिवक्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करें. वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उनके तर्कों को नही सुना जाएगा।  क्या है पूरा मामला? दरअसल, भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण किए जाने की मांग करते हुए आलोक प्रताप सिंह द्वारा साल 2004 में याचिका दायर की गई थी. याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने पर हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में शुरू कर दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनष्टीकरण पीथमपुर जिला धार में किया गया था।  पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले कचरे को हटाए जाने के बावजूद भी आसपास के कई वार्डों में आम जनता को अब भी दूषित और जहरीला पानी की सप्लाई होने का खतरा है. युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के सैंपल लेकर उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे. विनष्टीकरण के बाद भी राख में पारा? पिछली सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गई. संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया. वहीं, याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने से बची हुई राख में पारा पाया गया है. राख का विनष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के बहुत करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोजल फैसिलिटी पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है।  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पेश की रिपोर्ट सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पैरामीटर तय सीमा के अंदर हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे. याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की ओर से राख में उपस्थित पारा के संबंध में रिपोर्ट पेश की गई, जिसे कोर्ट में रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित पक्षों को 27 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर तर्क देने के आदेश दिए हैं। 

न्यू मार्केट में आग का खतरा! 50 फीट में 3 दुकानों पर भट्टियां, बेखौफ खा रहे लोग

भोपाल  राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट में कपड़ा, ज्वैलर्स समेत करीब 900 दुकानों के बीच भटि्टयां भी सुलग रही हैं। जिस छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी, वहां से सिर्फ 50 फीट दूर ही 3 दुकानें और हैं। यहां खतरे के बीच ही भटूरे तले जा रहे हैं। जांच में खुलासा हुआ कि इन दुकानों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। दुकान की न तो फायर और न ही इलेक्ट्रिक एनओसी है। फायर एक्सटिंग्विशर जरूर हैं, लेकिन कोने में रखे हैं। यदि आग लग जाए तो इन्हें चलाने के लिए कर्मचारी भी प्रशिक्षत नहीं है। ये खामियां मिलीं…     कलकत्ता छोले-भटूरे: जिस जगह पर छोले तले जा रहे, उसके ऊपर ही धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी है। जरूरत के हिसाब से इसे खोल और बंद कर सकते हैं। यहां आग बुझाने के लिए एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन इन्हें चलाना नहीं आता।     देहली के छोले-भटूरे: यहां किचन इतना छोटा है कि 2 कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तलते हैं। ऐसे में आग लग जाए तो कर्मचारी निकल ही नहीं सकते। बिजली के तार भी खुले हुए हैं।     पंजाब छोले-भटूरे: फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। कई जगहों से बिजली के तार खुले मिले। फायर एक्सटिंग्विशर तो है, लेकिन कोने में रखे हैं। अब शिफ्टिंग पर जोर फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने बताया कि दुकान में अग्निशामक यंत्र होने चाहिए। कर्मशियल सिलेंडर ही होना चाहिए। भटि्टयां नहीं होना चाहिए। जांच में सामने आया कि भटि्टयां पाई गईं। देहली के छोले-भटूरे में ऊंचाई पर बैठकर कर्मचारी भटूरे तलते हुए मिला। इलेक्ट्रिक सर्टिफिकेट किसी के पास नहीं है। बिजली के तार भी खुले ही पड़े हैं। इन सभी खामियों के चलते दुकानों को शिफ्ट करने का प्लान है। 8 अक्टूबर को लगी थी भीषण आग बालाजी छोटे भटूरे दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी। आग ने पास की 5 बड़ी दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को चपेट में ले लिया था। इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो गया। जिस जगह आगजनी हुई थी, उससे 100 फीट की दूरी पर ही दो और छोले भटूरे की दुकानें खुली हुई है। इसके पास में दो से तीन नमकीन दुकानें भी हैं। जहां पर सुबह से रात तक भट्‌टी जलती है। ऐसे में फिर से हादसा होने की संभावना है। लापरवाही पर हो चुकी FIR 8 अक्टूबर को बालाजी छोला भटूरे दुकान में आग लगी थी और इसके बाद पास की अन्य दुकानें भी चपेट में आ गई थीं। इस मामले में टीटी नगर पुलिस ने आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल की शिकायत पर छोला भटूरे की दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के विरुद्ध केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि बालाजी छोला-भटूरा दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और देखते ही देखते आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान हुआ था। घटना के बाद ने पुलिस को शिकायत की थी। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर ने बताया कि आग लगने की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी। अब मामले में दुकान संचालक की लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर, दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं? इसकी पड़ताल नगर निगम कर रहा है। अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की जांच के बाद इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट होगी। चौक बाजार में 22 लाख का सिस्टम, पर हादसे के वक्त काम नहीं करता जानकारी के अनुसार चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए निगम ने 22 लाख रुपए का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान यह सिस्टम काम नहीं आया। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और मेंटेनेंस नहीं होने की बातें सामने आई हैं। शहर के जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड, घोड़ा नक्कास समेत 8 प्रमुख बाजारों में भी यही स्थिति है। आग लगने या हादसे के बाद सुरक्षा इंतजाम होते हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं होती। बैरागढ़ में दिखावे का सिस्टम 17 दिसंबर 2017 को संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश मिले। सिस्टम लगा, लेकिन देखरेख नहीं हुई। उपकरण जंग खा रहे हैं। मेन कॉरिडोर तक कब्जे हैं। यहां कभी मॉकड्रिल तक नहीं हुई।

जनसमस्याओं के निराकरण में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जरूरी : CM यादव

जनसमस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण दिलाएं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को 2-2 लाख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के खिलाड़ियों को 1-1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीएम समाधान कार्यक्रम में विभिन्न शिकायतकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का निराकरण संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से करें। शिकायतों का प्रारंभिक स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जिससे नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समाधान कार्यक्रम में लाड़ली लक्ष्मी योजना, आवास योजना के बिलों में गड़बड़ी, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना तथा नल-जल योजना से संबंधित शिकायतों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रभारी डीपीओ ओ.पी. पांडे को संबंधित प्रकरण में कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए। कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी अमर दाहिया को नल-जल योजना से संबंधित प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने के लिए कहा। ऊर्जा विभाग के उप महाप्रबंधक रघुवीर सिंह को शिकायत का समय पर निराकरण नहीं होने पर लघु शास्ति अधिरोपित करने के निर्देश दिए। नगर निगम आयुक्त सत्येन्द्र धाकरे को नगरीय निकायों से संबंधित प्रकरणों का अभिलेख तैयार कर प्रस्तुत करने के लिए भी निर्देशित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा आमजन से जुड़े मूलभूत विषयों और शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का प्रारंभिक स्तर पर ही समाधान कर दिया जाए, तो शिकायतों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों के कार्यों की निगरानी की जाती है और प्रस्तुत प्रतिवेदनों में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन और प्रशासन का मूल उद्देश्य जनता के हित में कार्य करना तथा उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो और प्रत्येक शिकायत का निराकरण संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाए। जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनविश्वास अभियान के अंतर्गत मुरैना कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, कृषि एवं पशुपालन, सहकारिता, पर्यटन, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तथा जनसमस्याओं के निराकरण सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह समिति जिले के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। जनप्रतिनिधि जिले की आवश्यकताओं, समस्याओं, संभावनाओं और विकास से संबंधित अपने सुझाव समिति के माध्यम से प्रस्तुत करें, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं तैयार कर उन्हें प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रत्येक जिले को विकास का एक आदर्श मॉडल बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विकास कार्यों की समीक्षा करें, स्थानीय समस्याओं एवं कठिनाइयों को समझें तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जनहित में नवाचार करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ आमजन तक पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को दें प्रशिक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना जिले में औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। यहां स्थापित हो रही औद्योगिक इकाइयों से स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रस्तावित उद्योगों से उनकी मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी पहले ही प्राप्त कर ली जाए और उसी के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षण दिलाया जाए, ताकि इकाइयों में उत्पादन प्रारंभ होने के साथ ही प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्लास विनिर्माण इकाई का उदाहरण देते हुए कहा कि इस प्रकार की बड़ी औद्योगिक परियोजनाएं क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करती हैं। ऐसे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पराली से औद्योगिक उत्पाद तैयार करने वाली इकाइयों की सराहना करते हुए कहा कि कृषि अपशिष्ट का उपयोग कर नए उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे नवाचार करने वाले उद्यमियों का उत्साहवर्धन करें, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना में फूड पार्क विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा किसानों के उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उद्योगों का विस्तार स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध संभावनाओं के अनुरूप किया जाना चाहिए, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके। दुग्ध उत्पादन, पशुपालन एवं सहकारिता को मिले प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और कृषि को प्रोत्साहित करते हुए किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है। इसके लिए सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने तथा छोटे दुग्ध उत्पादकों को संगठित रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांवों में दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समितियों के माध्यम से जोड़ने से दूध का संग्रहण एवं विपणन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे छोटे पशुपालकों को बाजार उपलब्ध होगा और उनकी आय बढ़ाने के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृंदावन ग्राम की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि देशी नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वृंदावन ग्राम के माध्यम से गौपालन, दुग्ध उत्पादन और सहकारी गतिविधियों को प्रोत्साहन देकर गांवों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत गोशाला में 500 गायों के रखरखाव की … Read more

खाद्य प्रसंस्करण और सोया उद्योग में तेजी से आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश खाद्य प्रसंस्करण और सोया उद्योग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में हुए शामिल उत्कृष्ट सोया कंपनियों एवं उनके प्रतिनिधियों को किया सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने और उद्योगों के विस्तार के लिए निवेशकों के साथ लगातार संवाद एवं कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश को देश की फूड बास्केट के रूप में पहचान प्राप्त है। सोयाबीन उत्पादन में भी प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। मालवा सोयाबीन की राजधानी है। देश में सोयाबीन के कुल उत्पादन का 45 फीसदी उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है। सोयाबीन क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, उद्यमियों और किसानों का इंदौर में एकत्रित होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल के विपणन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कंपनियों के लगभग 15 उद्योगपतियों और उनके प्रतिनिधियों को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। सोपा के चेयरमैन गोयनका ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन और कृषि आधारित उद्योगों की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। सोयाबीन क्षेत्र में कार्य करने वाले उद्यमियों एवं संस्थानों को सम्मानित करना उनके उत्कृष्ट योगदान का अभिनंदन है। प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और अल नीनो के प्रभाव जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। प्रदेश में चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार लाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। सस्ती बिजली, भूमि और जल की उपलब्धता सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों की विशेषताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए हैं। इन आयोजनों से स्थानीय संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और रोजगार सृजन को नई दिशा मिली है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावों को धरातल पर उतारा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के प्रयास निरंतर जारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को मिलाकर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर सृजित हों। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ही कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सुशासन पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। मध्यप्रदेश भी अपनी संभावनाओं और संसाधनों के आधार पर विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, औद्योगिक निवेश बढ़ाने तथा प्रदेश की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयास कर रही है। सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोयाबीन केवल एक कृषि उपज नहीं, बल्कि किसानों की आय, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सोया उद्योग में आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता, उत्पाद विविधीकरण और बाजार विस्तार पर ध्यान देकर भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन कृषि वैज्ञानिकों, किसानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच संवाद एवं सहयोग को मजबूत करते हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में सोपा चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज के मूल्य में अंतर की राशि उपलब्ध कराने की पहल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों के विकास और किसानों के हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से भविष्य में भी नए अवसर सृजित होंगे। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “आत्मनिर्भर भारत – पॉवरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन” है। कार्यक्रम में देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान शामिल हुए। कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारतीय खाद्य तेल एवं सोयाबीन क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करना है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर, विजय पाल सहित सोयाबीन उद्योग, कृषि और व्यापार जगत से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से 7 जिलों का होगा विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

तीन मेट्रोपोलिटन रीजन को जोड़ेगा एक इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से 7 जिलों में होगा तेजी से विकास मध्यप्रदेश में बनेगा देश का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल बेल्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महाकौशल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज सहित जबलपुर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के साथ प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस विकास यात्रा में मध्यप्रदेश भी कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ा है। मध्यप्रदेश के औद्योगिक इतिहास में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। यह कॉरिडोर राज्य के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कॉरिडोर केवल एक इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि इसकी परीधि में आने वाले 7 जिलों एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज विकास की बयार लेकर आएगा। इस कॉरिडोर से इन क्षेत्रों में तेजी से बदलाव आएगा। उद्योग, कृषि, लॉजिस्टिक, टेक्नोलॉजी और सेवाओं का एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क एवं चेन तैयार होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लगभग 600 किलोमीटर लम्बाई वाला यह इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर भविष्य में प्रदेश के तीन मेट्रोपोलिटन रीजन इंदौर, भोपाल और जबलपुर को सीधे जोड़ेगा। इससे मध्यप्रदेश में भारत का सबसे बड़ा इंटिग्रेटेड इंडस्ट्रियल बेल्ट तैयार करने का हमारा संकल्प पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित संवाद भवन में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कारिडोर निर्माण की सौगात के लिए महाकौशल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज सहित जबलपुर के उद्योगपतियों एवं विभिन्न व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह एवं महाकौशल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि गुप्ता इस अवसर पर विशेष रूप से मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इस नए इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए 3 से 6 महीने में भूमि चिन्हांकन और मास्टर प्लान तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद 6 से 12 महीने में उद्योग क्षेत्रों और जरूरी इन्फ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम शुरु हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मार्च 2028 के अंत तक 10 हजार एकड़ औद्योगिक भूमि विकसित करने, 1 लाख करोड़ रुपए का निवेश जुटाने और 3 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए राज्य सरकार अपने पूर्ण स्वामित्व में एक विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) कंपनी स्थापित करने जा रही है, इसमें प्रारंभिक रूप से 100 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस नए कॉरिडोर से पूरे महाकौशल क्षेत्र विशेषकर जबलपुर को विशेष लाभ मिलेगा। प्रदेश की संस्कारधानी (जबलपुर), प्रशासनिक राजधानी (भोपाल) और औद्योगिक राजधानी (इंदौर) से एकल कॉरिडोर से हमेशा के लिए जुड़ जाएगी। जबलपुर क्षेत्र को भविष्य में इंडस्ट्रियल हब के साथ-साथ इंजीनियरिंग, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस एंसिलरी, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केन्द्र बनाया जाएगा। इसी के साथ नरसिंहपुर और रायसेन जिले को कृषि प्रसंस्करण और फूड पार्क सेक्टर में विकास का लाभ मिलेगा। भोपाल क्षेत्र को टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, नॉलेज सर्विसेज और साझा व्यावसायिक अवसंरचना का केन्द्र बनाया जाएगा। सीहोर-देवास क्षेत्र को फूड प्रोसेसिंग, वेयर हाउसिंग और इंदौर क्षेत्र को आईटी एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स सहित अन्य निवेश क्षेत्रों में विकास की सौगातें मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए इकोनॉमिक कॉरिडोर के पूर्ण होने पर निवेशकों को बिजली, पानी, सड़क सहित सभी प्रकार की सुविधाएं पहले से उपलब्ध होंगी। मध्यप्रदेश भारत का सबसे फेवरेट इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परमात्मा उद्योगपतियों को यश प्रदान करता है, ताकि वे अपनी क्षमता, योग्यता और बुद्धिमता से युवाओं को रोजगार से जोड़ सकें और जरूरतमंदों का घर भी चल पाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी सेक्टरों में हर छोटे और बड़े व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित कर रही है। नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से अवसरों को पाने की दूरी भी कम होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर पूरे क्षेत्र के विकास की परियोजना है। इसके लिए सरकार जल्द से जल्द सभी प्रकार के प्रबंध करने जा रही हैं। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने महाकौशल क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जबलपुरवासियों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरे महाकौशल सहित जबलपुर क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में लोक निर्माण के विकास कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के चार संभागों के मुख्यालय के रूप में जबलपुर को तकनीकी विश्वविद्यालय की बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पास प्रदेश के विकास का विज़न है। कार्यक्रम में महाकौशल क्षेत्र के 11 जिलों से आए उद्योगपतियों, व्यवसायियों और व्यापारियों ने इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट को कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन कर हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाकौशल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के महासचिव अखिल मिश्रा, संयोजन मंत्री समीर पॉल सहित महाकौशल वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन, जबलपुर के लघु उद्योग संघ, महाकौशल ऑटो डीलर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल, रेडीमेड गारमेन्ट्स, होटल इंडस्ट्री, प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग, फूड एण्ड डेयरी इंडस्ट्री सहित विभिन्न व्यवसायों के उद्योगपति एवं व्यापारीगण उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश में लेडी कॉन्स्टेबल को मिली जेंडर चेंज की मंजूरी, मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर फैसला

भोपाल मध्य प्रदेश में गृह विभाग ने लेडी कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज करवाने की अनुमति दे दी है। मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा के बाद सरकार ने कॉन्स्टेबल को यह अनुमति दी है। अब वह जल्द ही मेडिकल प्रक्रिया से गुजरने के बाद मर्द बन जाएगी। मध्य प्रदेश में इससे पहले भी दो लेडी कॉन्स्टेबल जेंडर चेंज करवा चुकी हैं। 2022 में महिला ने मांगी थी अनुमति मिली जानकारी के अनुसार एमपी पुलिस में पदस्थ लेडी कॉन्स्टेबल ने जनवरी 2022 में जेंडर परिवर्तन के लिए अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही उसने शपथ पत्र भी पेश किया था। महिला के आवेदन के बाद उसका मेडिकल जुलाई 2022 में गांधी मेडिकल कॉलेज में करवाया गया। रिपोर्ट पेश की लेडी कॉन्स्टेबल की जांच के बीद मनोचिकित्सक ने उसकी रिपोर्ट पेश की थी। इसके जिला मेडिकल बोर्ड ने लेडी कॉन्स्टेबल के पक्ष में अनुशंसा की थी। तमाम प्रक्रियाओं के बाद लेडी कॉन्स्टेबल ने अपना आवेदन शासन को मंजूरी के लिए भेजा था। सीएम ने दिए थे निर्देश वहीं, लेडी कॉन्स्टेबल के आवेदन पर सीएम मोहन यादव ने गृह विभाग को जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद गृह विभाग ने तमाम दस्तावेजों का परीक्षण किया। जेंडर चेंज करवाने को मिली अनुमति गृह विभाग ने अब लेडी कॉन्स्टेबल को जेंडर चेंज करवाने की अनुमति दे दी है। आदेश जारी होने के बाद लेडी कॉन्स्टेबल मेडिकल प्रक्रिया के जरिए जेंडर चेंजर करवाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले 2021 में निवाड़ी और 2023 में रतलाम में एक लेडी कॉन्स्टेबल का जेंडर चेंज करवा चुकी है। अब दोनों पुरुष बन गई हैं।  

मध्य प्रदेश में ADJ की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती, हाई कोर्ट में सुनवाई

जबलपुर   अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश के पद से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने जबरन रिटायर्ड किए जाने को नियमों के खिलाफ बताया. हाई कोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की नियुक्ति की है।  याचिका में ये दलीलें दी गईं याचिकाकर्ता आर.के. श्रीवास ने याचिका में कहा "उन्होंने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था. वह वर्ष 2016 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत कर जिला न्यायाधीश (प्रारंभिक स्तर) बनाया गया. डेढ साल बाद ही उन्हें अप्रैल 2018 में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया. मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 2017 के नियम 14, उप-नियम 2 के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू करने के लिए संबंधित अधिकारी की सेवा के 10 वर्ष पूर्ण या उसकी आयु 50 वर्ष होनी चाहिए थी।  डेढ़ साल में 4 तबादले किए याचिका में कहा गया "यह नियम उन सेवा सदस्यों पर लागू होता है जिन्हें 2017 के नियमों की धारा 2(ह) में परिभाषित किया गया है. सिविल जज और मजिस्ट्रेट के रूप में उनके पिछले कार्यकाल को नहीं गिना जा सकता, क्योंकि वह निचली न्यायपालिका का हिस्सा थी. सत्र न्यायाधीश के रूप में डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान उनका 4 बार तबादला किया गया. इसके अलावा उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई और निलंबित कर दिया गया।  नए सेवा नियम लागू करने पर आपत्ति याचिका में कहा गया "अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने से ठीक एक महीने पहले, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1994 के सेवा नियमों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन नियमों को बनाते समय उनसे परामर्श नहीं लिया गया था. इसके बाद नए सेवा नियम लागू किए गए, जो मार्च 2018 से प्रभावी हुए. नए नियमों के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी गयी परंतु आयु सीमा 50 साल को यथावत रखा गया था।  मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को याचिकाकर्ता का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सके. निचली और उच्च न्यायपालिका में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, उन्हें अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में बी या सी ग्रेड मिला, जिसका अर्थ है अच्छा या बहुत अच्छा होता है. याचिका के सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्यायमित्र नियुक्त किया. मामले की अगली सुनवाई 16 नवम्बर को होगी। 

ऊर्जा मंत्री तोमर की जानकारी, इंदौर में बिजली आपूर्ति मजबूत करने के लिए 50 MVA ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत

महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन इंदौर में 50 एमवीए का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर इंदौर  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि दशहरा और दीपावली पर्व के दौरान बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने इंदौर के 132 केवी जीआईएस महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन में 50 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। इससे सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 100 एमवीए हो गई है। इस वृद्धि से संबंधित क्षेत्रों में बढ़ते विद्युत भार को संभालने और पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन से जुड़े व्यावसायिक एवं घरेलू उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि जीआईएस महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन से 33 केवी के 7 फीडरों के माध्यम से पश्चिमी इंदौर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगभग 90 हजार उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की जाती है। पिछले वर्ष की तुलना में इस क्षेत्र में विद्युत भार में हुई वृद्धि को देखते हुए विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्वीकृत कर स्थापित किया गया है। इससे सब स्टेशन की क्षमता बढ़ने के साथ बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इंदौर के इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होती है सप्लाई 132 केवी जीआईएस महालक्ष्मी सब स्टेशन से 33 केवी के विभिन्न फीडरों के माध्यम से बेस्ट प्राइस, शालीमार टाउनशिप, इन्फोटेल, स्कीम नंबर 134, डी.बी. अपोलो, महालक्ष्मी नगर क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की जाती है। इंदौर शहर की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर हुई 1366 एमवीए एमपी ट्रांसको इंदौर के अधीक्षण अभियंता जयेश चौपडा ने बताया कि महालक्ष्मी नगर सबस्टेशन में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से इंदौर शहर की कुल ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता बढ़कर 1366 एमवीए हो गई है। एमपी ट्रांसको इंदौर शहर में 12 अति उच्च दाब सब स्टेशनों के माध्यम से पारेषण व्यवस्था संचालित करती है। इनमें 220 केवी के पांच और 132 केवी के सात सब स्टेशन शामिल हैं। इंदौर की अधिकतम 894 मेगावॉट विद्युत मांग संभाल चुका है एमपी ट्रांसको चौपडा ने बताया कि पिछले वर्ष अक्टूबर में इंदौर शहर का अधिकतम विद्युत भार लगभग 610 मेगावॉट था, जो इस त्यौहार के मौसम में बढ़कर करीब 714 मेगावॉट तक पहुंच गया है। वहीं, इस वर्ष 25 मई को इंदौर की अब तक की सर्वाधिक 894 मेगावॉट विद्युत मांग दर्ज की गई थी। त्यौहारों और आगामी गर्मियों में संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए महालक्ष्मी नगर सब स्टेशन में अतिरिक्त पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है। बारिश के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इसे लगभग तीन माह के अल्प समय में स्थापित कर ऊर्जीकृत किया गया। इससे बढ़ते विद्युत भार के अनुरूप पारेषण व्यवस्था को सक्षम बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

आवासीय निर्माण के नियम बदले, इंडस्ट्रियल एरिया में सिर्फ सिंगल-डबल बेडरूम फ्लैट बनेंगे

भोपाल   राज्य सरकार (MP Govt) ने इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) में रेजिडेंशियल निर्माण और इंडस्ट्रियल जमीन (industrial land) के उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इंडस्ट्रियल पॉलिसी एवं इन्वेस्टमेंट प्रोत्साहन विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, अब औद्योगिक क्षेत्रों में स्वतंत्र रेजिडेंशियल प्लॉट, रो-हाउस और प्लॉट आधारित रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को विकसित करने की अनुमति नहीं मिलेगी।  केवल बहुमंजिला और ग्रुप हाउसिंग को मिलेगी मंजूरी नए नियमों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट या ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ही तैयार किए जा सकेंगे। इनमें एकल व दोहरे शयनकक्ष (सिंगल/डबल बेडरूम) वाली आवासीय इकाइयों के साथ-साथ हॉस्टल और उनसे जुड़ी सामाजिक-सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान रखा गया है। इसका सीधा उद्देश्य कम जगह में अधिक से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने की सुचारू व्यवस्था बनाना है। पुराने निर्माण और चालू प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर यह नियम उन जमीनों पर प्रभावी होगा जो आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित हैं, साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कर्मचारियों के लिए कैप्टिव आवासीय परिसरों हेतु दी जाने वाली भूमि पर भी लागू होगा। किसी भी परियोजना को शुरू करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति अनिवार्य होगी। निर्माण के दौरान मास्टर प्लान, भवन उपविधियों, पर्यावरण तथा अग्निशमन संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व से जारी आवासीय योजनाओं और पुराने बने मकानों पर इन नए नियमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कलेक्टर गाइडलाइन से तय होगा जमीन का मूल्य शासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि का मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया है। ग्रामीण व शहरी इलाकों में विकसित या विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन दर को 0.6 से विभाजित कर निकाला जाएगा। किसी भी परिस्थिति में जमीन की न्यूनतम कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। यदि गणना में दर इससे कम आती है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की पूर्व अनुमति से दरें बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त भूमि पर नहीं मिलेगी रियायत निवेश के आधार पर तय सीमा से अधिक जमीन लेने पर अतिरिक्त भू-भाग पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण स्वरूप, यदि कोई कंपनी संयंत्र एवं मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर भूमि मिलती है, तो प्रीमियम छूट का लाभ केवल 20 हेक्टेयर पर ही मिलेगा। शेष 5 हेक्टेयर पर सामान्य दरें लागू होंगी। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम गणना के समय 50% तक छूट का प्रावधान शामिल है। अनुपयोगी जमीन के हस्तांतरण के कड़े नियम यदि किसी औद्योगिक इकाई के पास आवंटित जमीन का कोई हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है, तो उसे शर्तों के अधीन पृथक कर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए अनुपयोगी हिस्सा कुल आवंटित भूमि का अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर होना चाहिए, जहां स्वतंत्र पहुंच मार्ग की उपलब्धता अनिवार्य है। हस्तांतरण से पूर्व आवंटी को भू-भाटक, संधारण शुल्क सहित सभी बकायों का भुगतान करना होगा तथा विधिक समर्पण दस्तावेज पंजीकृत कराने होंगे। अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार तय प्रशासनिक पारदर्शी व्यवस्था हेतु भूमि और भवनों के आवंटन के अधिकार क्षेत्र भी निर्धारित कर दिए गए हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को सौंपा गया है। आवासीय तथा व्यावसायिक भूमि आवंटन में क्षेत्रीय कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक की सीमा तक फैसला ले सकेंगे, जबकि इससे अधिक भूमि के आवंटन का निर्णय प्रबंध संचालक के स्तर से होगा। इसके अतिरिक्त, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर भी औद्योगिक आवास योजनाएं शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके अलावा आवासीय भूखंडों का उप-विभाजन भी प्रतिबंधित रहेगा। सिर्फ फ्लैट और हाइराइज बिल्डिंग्स को मंजूरी नई व्यवस्था के तहत इंडस्ट्रियल एरिया में केवल फ्लैट आधारित और हाइराइज रेजिडेंशियल बिल्डिंगस विकसित की जा सकेंगी।  इनमें एक और दो बेडरूम वाले फ्लैट के साथ छात्रावास और जरूरी सामाजिक सुविधाओं के निर्माण का प्रावधान किया गया है। पुराने रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए नियम सिर्फ भविष्य में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होंगे।  पहले से संचालित रेजिडेंशियल स्कीम और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। निर्माण से पहले अधिकारी की मंजूरी जरूरी नए दिशा-निर्देश नोटिफाइड रेजिडेंशियल लेंड के साथ इंडस्ट्रियल यूनिट्स को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के लिए विकसित की जाने वाली कैप्टिव रेजिडेंशियल सुविधाओं पर भी लागू होंगे।  प्रत्येक परियोजना के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा निर्माण कार्यों में मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन निर्माण नियमों, भूमि आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन करना होगा। जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि के मूल्य निर्धारण का आधार भी तय किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि, किसी भी स्थिति में भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगा। यदि औद्योगिक क्षेत्र में तय गणना के आधार पर भूमि का मूल्य ₹250 प्रति वर्गमीटर से कम आता है, तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से मूल्य बढ़ाने का अधिकार होगा। अतिरिक्त क्षेत्रफल पर कोई छूट नहीं निर्धारित निवेश सीमा से अधिक भूमि के लिए आवेदन करने पर अतिरिक्त क्षेत्रफल पर छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के लिए, यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में ₹200 करोड़ का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है, तो 20 हेक्टेयर पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर छूट लागू नहीं होगी। नियमों में प्रीमियम की गणना के दौरान 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर भूमि के मूल्य में 50% छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि के मूल्य पर 50% छूट का प्रावधान दिया गया है।

जन्म-मृत्यु पंजीयन में शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करें : सचिव शुक्ल

भोपाल  मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव  मन् शुक्ल ने शुक्रवार को सीहोर जिले का भ्रमण कर जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था और विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में जन्म-मृत्यु का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। साथ ही आम नागरिकों को पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। सचिव  शुक्ल ने नगरपालिका सीहोर में जन्म-मृत्यु पंजीयन संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया और प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने हितग्राहियों एवं आम नागरिकों से संवाद कर पंजीयन प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्होंने तीन हितग्राहियों को जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रमाण-पत्र भी वितरित किए।  शुक्ल ने कलेक्टर कार्यालय स्थित जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय का निरीक्षण कर विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने सांख्यिकी संबंधी कार्यों के साथ विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना एवं सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया की जानकारी ली। जन्म-मृत्यु के ऑनलाइन पंजीयन की समीक्षा करते हुए उन्होंने पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। सचिव  शुक्ल ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत भारत सरकार के ई-साक्षी पोर्टल की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। उन्होंने पोर्टल पर सांसदों की अनुशंसा से कार्यों की स्वीकृति एवं राशि जारी करने की प्रक्रिया का कर्मचारियों से व्यावहारिक प्रदर्शन प्राप्त किया। इसके बाद नगरपालिका सीहोर एवं ग्राम पंचायत जहांगीरपुरा में योजना के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों का मौके पर भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संयुक्त संचालक आर्थिक एवं सांख्यिकी  विश्वजीत रायकवार, जिला योजना अधिकारी  संजय लक्केवार, कार्यपालन यंत्री  ए.के. पंथी, सहायक यंत्री मती ऐश्वर्या मोखले, सहायक यंत्री नगर पालिका  विजय कोली, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार  अश्फाक खान सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।