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Ken-Betwa Link Project: नहरों के लिए जमीन देने वाले किसानों को 4 गुना मुआवजा, सर्वे का काम पूरा

 छतरपुर  देश की पहली नदी जोड़ परियोजना छतरपुर में आकार ले रही है। पहले चरण में करीब 3400 करोड़ का ढोडन बांध बनाया जा रहा है। इस बांध से जिलेभर में नहरें बनाई जाएंगी। जिससे जिले के गांव सिंचाई क्षेत्र से जुड़ सकें। नहरें कहां से डाली जानी हैं और कौन से गांवों से होकर गुजरेंगी इसकी पूरी प्लानिंग की जा चुकी है। जिन किसानों की जमीनें नहरों के दायरे में आएंगी उनको भी सरकार जमीन की कीमत से चार गुना मुआवजा देगी। जिससे किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आए। जिलेभर के 54 गांवों से होकर केन बेतवा की नहरें निकलेंगी। जिसका सर्वे भी किया जा चुका है। केन बेतवा लिंक परियोजना का ढोड़न बांध बनने से 14 गांव डूब में आए थे। इन गांवों को सरकार ने दूसरी जगहों पर विस्थापित किया है। साथ ही उनके लिए कालोनियों बनाई गई हैं। मुआजवा के तौर पर साढ़े बारह लाख रुपए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया गया है। अब सरकार ने मुआवजा नीति को बदलते हुए ग्रामीण क्षेत्र की जमीनों का मआवजा चार गुना तक कर दिया गया है। बांध के डूब क्षेत्र में करीब पांच हजार परिवार प्रभावित हुए। पहले चरण में बांध बनने के बाद दूसरा चरण नहरों का होगा। बांध से बरूआसागर तक बनेगी 218 किमी लंबी कैनाल सरकार का लक्ष्य केन बेतवा लिंक परियोजना से बुंदेलखंड को सिंचाई से जोड़ना है। ढोड़न बांध से यूपी के बरुआसागर तक करीब 218 किमी लंबी केनाल बनाई जाएगी। इस लंबी कैनाल से छोटी टोटी माइनर नहरें निकाली जाएंगी। जिले में सबसे ज्यादा नौगांव के गांव आ रहे हैं जो करीब 21 गांव हैं। जहां से होकर नहरें गुजरेंगी। सरकार ने अपडेट किया मुआवजे का प्रविधान जमीन अधिग्रहण के तहत सरकार अधिग्रहण पर कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाता था लेकिन अब सरकार ने नया आदेश जारी कर मुआवजा राशि को चार गुना कर दिया है। अगर किसी किसान की जमीन की कीमत एक लाख होगी तो सरकार किसान को 4 लाख का मुआवजा देगी। भू अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब सिर्फ किसानों को भुगतान होना है। यह भुगतान 54 गांव के चिन्हित किसानों को किया जाएगा। सरकार ने जमीन अधिग्रहण को लेकर नया आदेश दिया है। इस आदेश के तहत किसानों को उनकी जमीन का सरकारी रेट से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है अब सिर्फ किसानों को पैसा दिया जाना है। बांध से लेकर बरुआसागर तक बड़ी कैनाल बनेगी उससे माइनर नहरें जोड़ी जाएंगी।- उमा गुप्ता, ईई, केन बेतवा लिंक परियोजना  

ग्वालियर एवं शिवपुरी सहित अब 10 जिलों में संचालित हो रहे आधार सेवा केंद्र

भोपाल  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा मध्यप्रदेश में आधार सेवाओं को नागरिकों तक अधिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता के साथ पहुंचाने के लिए आधार सेवा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इस पहल से प्रदेश के नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन संबंधी सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो सकेंगी। वर्तमान में यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्र (एएसके) प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, विदिशा एवं भिण्ड में संचालित हैं। ग्वालियर और शिवपुरी में मंगलवार से आधार सेवा केंद्रों का संचालन प्रारंभ हो गया है। इस प्रकार प्रदेश के 10 जिलों में आधार सेवा केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं। आधार केंद्रों पर नागरिकों को आधार नामांकन, डेमोग्राफिक एवं बायोमेट्रिक अपडेट सहित विभिन्न आधार सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। नागरिकों की सुविधा के लिए इन केन्द्रों पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। प्रदेश में आधार सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 26 अन्य जिलों में नए आधार सेवा केंद्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इन केंद्रों के शुरू होने से नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध होंगी और आधार संबंधी कार्यों में समय और संसाधनों की बचत होगी। यूआईडीएआई द्वारा संचालित आधार सेवा केंद्रों के अतिरिक्त प्रदेश में लगभग सभी लोक सेवा केंद्र, राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालय जैसे नगर निगम, कलेक्टर कार्यालय, महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना कार्यालय, जनपद पंचायत, शिक्षा विभाग के ब्लॉक संसाधन केंद्र, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और चयनित बैंक शाखाओं के माध्यम से भी आधार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूआईडीएआई राज्य कार्यालय, भोपाल के निदेशक  सुमित मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में 2 हजार 800 से अधिक आधार नामांकन केंद्र कार्य कर रहे हैं। नागरिक यूआईडीएआई की वेबसाइट के माध्यम से अपने निकटतम आधार केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार में मोबाइल नंबर सहित अन्य विवरण अपडेट रखें। आधार संबंधी किसी भी जानकारी अथवा सहायता के लिए यूआईडीएआई हेल्पलाइन 1947 पर संपर्क किया जा सकता है।  

इंदौर एयरपोर्ट विस्तार पर ब्रेक! 143 एकड़ जमीन की जरूरत, एक दशक से अटका मामला

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद, शहर को आज भी सीधी वैश्विक कनेक्टिविटी नहीं मिल पा रही है। इस गतिरोध की मुख्य वजह एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक महज 143 एकड़ जमीन का आवंटन रुकना है। सालाना 40 लाख यात्री और 80 फ्लाइट्स का दबाव झेल रहे इस एयरपोर्ट का विस्तार बेहद जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया भूमि अधिग्रहण का यह प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस संबंध में कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यदि यह जमीन मिल जाए, तो इंदौर से सीधे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान उड़ान भर सकेंगे और यात्रियों को दिल्ली-मुंबई की कनेक्टिंग फ्लाइट्स के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। विलंब के कारण संरक्षित जमीन पर अतिक्रमण और अन्य प्रोजेक्ट के लिए आवंटन का डर है। कुछ जमीन मेट्रो के स्टेशन के लिए दी जा चुकी है। हालांकि, अफसरों का दावा है कि इस पर तेजी से काम चल रहा है। विस्तार का गणित: दो चरणों में बदलना है नक्शा एयरपोर्ट प्रबंधन और प्रशासन ने वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए विस्तार के मूल प्लान को दो चरणों में रीडिजाइन किया है:     पहला चरण (89 एकड़ की जरूरत): रनवे की लंबाई 2700 मीटर से बढ़ाकर 3500 और फिर 4000 मीटर करना है। इससे प्रति घंटे 15 के बजाय 24 फ्लाइट आ-जा सकेंगी।     दूसरा चरण (54 एकड़ की जरूरत): नया आधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा। विमान पार्किंग की क्षमता 26 से बढ़कर 54 हो जाएगी, जिससे रात में भी बड़े विमान पार्क हो सकेंगे। विजन 2047: जब 729 एकड़ का परिसर तीन गुना होगा इंदौर एयरपोर्ट वर्तमान में केवल 729 एकड़ में है। वर्ष 2047 तक की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आसपास के गांवों—सिंहासा और कोड़िया बड़ी की 1100 एकड़ जमीन मिलाकर 1950 एकड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। तब तक यात्री क्षमता 10 से 12 गुना बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, आरक्षित जमीन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़े हिस्से पर अतिक्रमण हो चुका है, जिससे फनल और लाइट एरिया भी प्रभावित हुआ है। चापड़ा योजना निरस्त, अब उज्जैन भी रेस में आगे जमीन की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखते हुए पूर्व में इंदौर से 45 किलोमीटर दूर चापड़ा में एक नया 'ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट' बनाने की योजना तैयार की गई थी। इसके चलते इंदौर एयरपोर्ट के मूल विस्तार प्लान को सीमित कर दिया गया था, लेकिन अब चापड़ा का प्रस्ताव पूरी तरह निरस्त हो चुका है। वहीं, उज्जैन में नया प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सबसे बड़ा पेंच… भूमि अधिग्रहण का मुआवजा मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास के तहत पड़ोसी धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ के मद्देनजर नए एयरपोर्ट की प्लानिंग तेजी से आगे बढ़ी है, जिसके लिए 45 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है। इंदौर के विस्तार प्रस्ताव में सबसे बड़ा पेंच भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की राशि को लेकर फंसा है, जिसकी व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है। देरी का खामियाजा… मेट्रो को दी 20 एकड़ जमीन पूर्व में जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट प्रबंधन को सुविधा विस्तार के लिए 20 एकड़ जमीन सौंपी थी। लंबे समय तक उपयोग नहीं किया गया और योजनाएं कागजों में ही घूमती रहीं। परिणाम यह हुआ कि अब उस आवंटित जमीन पर मेट्रो ट्रेन का स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे एयरपोर्ट के पास उपलब्ध आंतरिक स्पेस और कम हो गया है।

Vande Bharat Special Offer: सफर के दौरान फ्री मील और पानी, लेकिन यात्रियों को माननी होगी ये शर्त

भोपाल   इंडियन रेलवे की सबसे आधुनिक ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं यात्रियों को दी जा रही हैं. ये ट्रेन तूफानी स्पीड और बेहतरीन सुविधाओं के साथ फिक्स टाइमिंग के लिए जान जाती है. अब रेलवे ने वंदे भारत एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए और खुशखबरी दी है।  2 घंटे लेट होने पर यात्रियों को ऑफर इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के अनुसार वंदे भारत एक्सप्रेस अगर अपने फिक्स टाइम से लेट आती है या स्टेशन से देरी से रवाना होती है तो यात्रा के दौरान यात्रियों को फ्री में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. रेलवे के इस ऑफर से यात्रियों का भरोसा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर और बढ़ेगा. इस ऑफर का मकसद यात्रियों को सफर के दौरान होने वाली असुविधा से बचाना है. रेलवे के अनुसार अगर वंदे भारत एक्सप्रेस अपने तय समय से 2 घंटे या उससे अधिक की देरी से चल रही है, तो यात्रियों को आईआरसीटीसी की तरफ से मुफ्त में खाना, नाश्ता और पीने का पानी दिया जाएगा।  सुबह और रात के हिसाब से खाने का मेनू तय रेलवे ने साफ किया है कि इसके तहत यात्रियों से एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. बुकिंग के समय भी इस मद का कोई चार्ज नहीं जोड़ा जाएगा. ट्रेन के लेटलतीफ होने पर समय के अनुसार खाने का मेन्यू तय होगा. अगर ट्रेन सुबह 2 घंटे से ज्यादा लेट है तो चाय-कॉफी के साथ हेवी ब्रेफास्ट पैसेंजर्स को सर्व किया जाएगा. यदि ट्रेन दोपहर या रात के भोजन के समय लेट होती है, तो यात्रियों को पूरा शाकाहारी भोजन मिलेगा. यात्रियों को रेल नीर (पीने का पानी) भी अतिरिक्त रूप से मुफ्त दिया जाएगा।  बुकिंग के समय नो फूड विकल्प चुनने पर भी सुविधा इस ऑफर में ध्यान रखने योग्य बात ये है कि अगर आपने बुकिंग के दौरान नो फूड का ऑप्शन चुना है तो भी ट्रेन के लेट होने पर फ्री में भोजन व पानी मिलेगा. रेलवे ने साफ किया है कि फ्री मील सर्विस सभी यात्रियों के लिए होगी. टिकट बुक कराते समय आपने फूड का विकल्प चुना हो या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।  मध्य प्रदेश से चलती है 5 वंदे भारत एक्सप्रेस मध्य प्रदेश को कुल 5 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है. ये ट्रेनें राज्य के प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और खजुराहो को आपस में और देश के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं. ये हैं रानी कमलापति (भोपाल)- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली), भोपाल- इंदौर-नागपुर ट्रेन, भोपाल-जबलपुर-रीवा वंदे भारत ट्रेन, खजुराहो- हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, वाराणसी से खजुराहो के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस।  भोपाल रेल मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी नवल अग्रवाल ने बताया "वंदे भारत एक्सप्रेस के 2 घंटे या उससे अधिक लेट होने पर यात्रियों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए रेलवे द्वारा बिल्कुल मुफ्त भोजन, नाश्ता और रेल नीर की सुविधा दी जाएगी. ट्रेन के देरी से चलने के समय के आधार पर यात्रियों को भारी नाश्ता या पूरा शाकाहारी भोजन निःशुल्क परोसा जाएगा. यह रेलवे की तरफ से मिलने वाली पूरी तरह से काम्प्लीमेंट्री सेवा है। 

MP कैबिनेट विस्तार जल्द! 5 नामों पर मंथन, सिंधिया गुट के इस दिग्गज की एंट्री लगभग तय

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अपने मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं जिसके बाद से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो 4-6 मंत्री सीएम की रडार पर हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। वहीं खबर है कि 4-5 विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। जिनमें दो महिला विधायकों का जिक्र है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के गणित की बात करें तो मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरा जा सकता है। इसके साथ ही नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। सीएम मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षी और उनके रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। अटकलें है कि मंत्री विजय शाह, वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, पंचायत विभाग की राज्यमंत्री राधा सिंह, संपतिया उइके और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना की शिकायतों के बाद उनपर गाज गिरना लगभग तय है। तीन सीनियर मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग अटकलें है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के दिग्गज मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका में देखें जा सकते हैं। इन विधायकों को मिल सकती है एंट्री कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इनके अलावा सागर से प्रदीप लारिया, पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। सिंधिया खेमे से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मध्य प्रदेश में ट्रांसफर के लिए नई मुश्किल, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के अभाव में अटके शिक्षकों के आवेदन

भोपाल मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की ऑनलाइन स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शिक्षकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है. पोर्टल की तकनीकी खामियों और नई अनिवार्य शर्तों के कारण हजारों शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों के सामने आ रही है. दरअसल इस बार पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण चाहने वालों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है।  पुराने कर्मचारियों के लिए नई शर्त परेशानी शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार "स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं, जिनका विवाह 15 से 20 वर्ष पूर्व हुआ था. उस समय विवाह पंजीयन की व्यवस्था व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी और न ही विभागीय सेवाओं में इसकी कभी अनिवार्यता रही है. ऐसे में अचानक विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू होने से हजारों पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।  पुराने विवाहित कर्मचारियों के सामने संकट संगठन के अनुसार ऐसे लोक सेवक, जिनमें पति-पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं या उनमें से एक अन्य विभाग में पदस्थ है, वे पति-पत्नी आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेना चाहते हैं। लेकिन पोर्टल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र के बिना आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा। शिक्षकों का कहना है कि उनके पास विवाह से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज, सेवा अभिलेख, परिवार समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और शासकीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आवेदन से वंचित किया जा रहा है। तकनीकी खामियों से बढ़ी मुश्किल विवाह पंजीयन के अलावा दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र, पारस्परिक स्थानांतरण, जिला विकल्पों की अनुपलब्धता और विभिन्न पदों के विकल्प नहीं खुलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र शिक्षक आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक संगठन ने मांगा वैकल्पिक प्रावधान शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। जिन कर्मचारियों के पास विवाह पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उनके लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, समग्र आईडी, पति-पत्नी की शासकीय सेवा संबंधी जानकारी अथवा अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार करने का विकल्प दिया जाए। संगठन ने कहा कि यदि विभाग ने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई तो हजारों शिक्षक केवल दस्तावेजी बाधा के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। अंतिम तिथि बढ़ाने की भी मांग शिक्षक संगठन ने शासन से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने, विवाह पंजीयन संबंधी शर्त में संशोधन करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर देना विभाग की जिम्मेदारी है और किसी भी शिक्षक को तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।   वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता संगठन का कहना है कि पति-पत्नी संबंध प्रमाणित करने के लिए सेवा पुस्तिका, परिवार विवरण, नामांकित सदस्य रिकार्ड, आधार कार्ड, समग्र आईडी अथवा अन्य विभागीय दस्तावेज पहले से उपलब्ध हैं. इन दस्तावेजों को मान्य नहीं किए जाने से शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  तिम तिथि नजदीक, बढ़ी चिंता बता दें की स्थानांतरण के आवेदन की अंतिम तिथि 24 जून निर्धारित है. ऐसे में जिन शिक्षकों के पास विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए निर्धारित समय में पंजीयन करवाकर आवेदन करना लगभग असंभव है. इससे पात्र शिक्षक अपने स्थानांतरण के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।  संगठन ने शासन से की मांग शासकीय शिक्षक संगठन ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की अनिवार्यता में तत्काल संशोधन किया जाए. अन्य वैध दस्तावेजों को स्वीकार करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए. साथ ही पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, जिससे कोई भी पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित न रहे। 

मोहन नागर और स्व. भगवानदास रैकवार के योगदान ने मध्यप्रदेश को किया गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश की दो विभूतियों  मोहन नागर (समाज सेवा) तथा  भगवान दास रैकवार (खेल और बुंदेली मार्शल आर्ट, मरणोपरांत) को ‘पद्म’ सम्मान प्रदान किए जाने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज सेवा और खेल जगत में दोनों विभूतियों के उल्लेखनीय योगदान ने न केवल मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है बल्कि समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से इस वर्ष (2026) कुल 4 हस्तियों का पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चयन किया गया। इनमें  मोहन नागर,  कैलाश चंद्र पंत,  भगवान दास रैकवार और डॉ. नारायण व्यास शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा 25 जनवरी 2026 को पुरस्कारों की घोषणा हुई। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार प्रदान करने का समारोह नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में दो चरणों में आयोजित किया गया। पहला चरण 25 मई 2026 को संपन्न हुआ। इस वर्ष कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। मध्य प्रदेश की दो विभूतियां  पंत जी (साहित्य और शिक्षा क्षेत्र) और डॉ व्यास जी (पुरातत्व क्षेत्र) प्रथम चरण में गत माह सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। मंगलवार को हुए समारोह के द्वितीय चरण में 23 जून 2026 को 65 हस्तियों को सम्मानित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश की दो विभूतियां शामिल हैं। मंगलवार 23 जून को  मोहन नागर ने सम्मान प्राप्त किया। इसके साथ ही गत 18 अप्रैल को दिवंगत हुए  भगवान दास रैकवार को मरणोपरांत सम्मान दिया गया, जो उनके पुत्र  राजकुमार रैकवार ने ग्रहण किया।  

वर्ष 2025 में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार एडमिशन हुए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में रोजगार के क्षेत्र में सतत रूप से नवाचारों की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में धार्मिक, प्राकृतिक, पुराधरोहर से संबंधित पर्यटन क्षेत्र समृद्ध है। पर्यटकों को आवश्यक मार्गदर्शन के लिए गाइड की व्यवस्था को सशक्त बनाने और विभिन्न व्यंजनों का आनंद दिलवाने के लिए कार्य की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को बड़ी संख्या में इन कार्यों से रोजगार मिलेगा। कौशल विकास और रोजगार विभाग का पर्यटन विभाग से तालमेल स्थापित कर यह कार्य संभव है। इसी तरह के रोजगारपरक कार्य दिलवाने के लिए विभिन्न विभाग नवाचार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में कौशल विकास और रोजगार विभाग की गतिविधियों की बैठक में समीक्षा की। बैठक में कौशल विकास और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल,मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह और विभागीय अधिकारी उपिस्थत थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फैक्ट्री परिसर में भी प्रशिक्षण संस्था संचालित की जा सकती है। उद्योगों की जरूरत को देखते हुए आवश्यक ट्रेड में प्रशिक्षण के प्रबंध किए जाएं। कौशल विकास और रोजगार दिलवाने के विभिन्न विभागों के कार्यों का समग्र प्रतिवेदन भी तैयार किया जाए। विभिन्न विभाग संचालित योजनाओं से दी जा रही सेवाओं और सृजित नए रोजगारों का विवरण भी संकलित करें ताकि इस क्षेत्र की उपलब्धि एक नजर में दर्शाई जा सके। शासकीय और निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे रोजगार, राज्य की ही उपलब्धि है। विभाग के प्रमुख नवाचार बैठक में विभाग स्तर पर किए गए विभिन्न नवाचारों की जानकारी दी गई। परम फाउंडेशन के अंतर्गत 10 आईटीआई का संचालन एक विशेष नवाचार है। प्रतिमाह युवा संगम के आयोजन, महिला ड्राइविंग प्रशिक्षण, प्रतिभा सम्मान, वर्ष 2025 से आईटीआई में 30 प्रतिशत के स्थान पर 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने, विद्यार्थियों को विदेशी भाषा प्रशिक्षण और इसके माध्यम से रोजगार की संभावना बढ़ाने का कार्य किया गया है। इसके अलावा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत तकनीकी और अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण का लाभ युवाओं को दिलवाया गया है। कौशल विकास क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। इनमें वर्ष 2025 में 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों को संस्थाओं में प्रवेश, गत 2 वर्ष में प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से 18 हजार 403 प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार, वर्ष 2025 में आईटीआई चलो अभियान में अब तक के सर्वाधिक 49 हजार 402 प्रवेश, यूएन वूमेन के सहयोग से 12 जनजातीय बहुल जिलों की 2127 महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड, युवा संगम से सवा तीन लाख आवेदकों को लाभ, संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में वर्ष 2024 से रोबोटिक्स, मेक्ट्रोनिक्स ऑटोमोबाइल जैसे 9 आधुनिक लाँगटर्म कोर्स का संचालन, 10 संभागीय आईटीआई के लिए हब इंस्टीट्यूट के रूप में व्यवस्थाएं कर ऑन-द-ऑब ट्रेनिंग और प्लेसमेंट सहायता दिलवाई जा रही है। वर्ष 2025 में आई टी आई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई। वर्ष 2026 में 2356 सीटों की वृद्धि हुई। इस तरह दो वर्ष में 5840 सीट्स बढ़ी हैं। आईटीआई के विभिन्न ट्रेड में इस वर्ष 10 प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। इसके अतिरिक्त कौशल विकास और रोजगार विभाग युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भागीदारी का अवसर दिलवा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2024 में फ्रांस में हुई अंतर्राष्ट्रीय वर्ल्ड स्किल स्पर्धा में मध्यप्रदेश के संस्कार शर्मा ने सायबर सिक्योरिटी स्किल में मेडालियम ऑफ एक्सीलेंस हासिल किया। क्षेत्रीय स्पर्धा में 44 पदक और राष्ट्रीय स्पर्धा में 8 पदक प्राप्त करने की उपलब्धि भी मध्यप्रदेश को मिली है। ग्लोबल पार्क, भोपाल में वर्ष 2026-27 में 3 हजार सर्टिफिकेशन का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश              प्रदेश में कौशल विकास की गतिविधियां निरंतर संचालित हों।              औद्योगिक संस्थानों की आवश्यकता के अनुरूप कोर्स डिजाइन कर युवाओं को प्रशिक्षित किया जाए।              खान-पान तैयार करने (पाक कला प्रशिक्षण) और गाइड के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।              कोसा वस्त्रों के निर्माण के लिए प्रदेश में अधोसंरचना उपलब्ध है। युवाओं को उद्यानिकी विभाग के सहयोग से शहतूत उत्पादन जैसे कार्यों से जोड़ा जाए। रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाए।  गुना जिले में जैकेट बनाने का कार्य एक आदर्श मॉडल है। आर्थिक लाभ दिलवाने वाली अनेक गतिविधियां घर से ही संचालित की जा सकती हैं। लघु और कुटीर उद्योगों से युवाओं को जोड़ने के ठोस प्रयास किए जाएं।  

26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने पर डीजीपी ने दी बधाई

भोपाल  राष्ट्रीय अपराध रकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त करने वाले जिला विदिशा के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू ने आज पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने निरीक्षक  योगेन्द्र साहू को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग वर्तमान पुलिसिंग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी दक्षता, अनुसंधान क्षमता एवं पेशेवर उत्कृष्टता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस उपलब्धि से प्रदेश के अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी वैज्ञानिक अनुसंधान तथा तकनीक आधारित अपराध विवेचना के लिए प्रेरित होंगे। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में 19 एवं 20 जून 2026 को आयोजित 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 में देशभर के फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों, फोरेंसिक वैज्ञानिकों एवं पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की थी। सम्मेलन का उद्घाटन माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा किया गया था। सम्मेलन में मध्यप्रदेश पुलिस के निरीक्षक (फिंगरप्रिंट)  योगेन्द्र साहू को “Smart Use of Fingerprint Science in Investigation” विषय पर प्रस्तुत उत्कृष्ट केस स्टडी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। उनकी प्रस्तुति जिला विदिशा के थाना शमशाबाद में दर्ज एक जघन्य ब्लाइंड मर्डर प्रकरण पर आधारित थी, जिसमें घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट साक्ष्यों एवं नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के प्रभावी उपयोग के माध्यम से आरोपी की पहचान कर प्रकरण का सफल निराकरण किया गया था। केस स्टडी में वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, तकनीकी विश्लेषण, आधुनिक फिंगरप्रिंट विज्ञान तथा NAFIS प्रणाली के प्रभावी उपयोग को विस्तार से प्रदर्शित किया गया, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विशेष सराहना की गई। प्रतियोगी मूल्यांकन में देशभर से प्राप्त प्रविष्टियों के मध्य इस प्रस्तुति को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (SCRB)  जयदीप प्रसाद, संचालक फिंगरप्रिंट ब्यूरो मध्यप्रदेश  मनोज राजपूत उपस्थित थे।  

तकनीकी साक्ष्यों और सतर्क पुलिसिंग से आरोपी गिरफ्तार

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, तकनीक आधारित एवं त्वरित कार्रवाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। जीआरपी थाना जबलपुर ने अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान चोरी गए 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण एवं अन्य सामान को घटना के मात्र दो घंटे के भीतर बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर  सुंदर सिंह कनेश ने बताया कि 22 जून को नर्मदापुरम जिले के इटारसी निवासी  नीलेश मालपानी ने जीआरपी थाना जबलपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि ट्रेन क्रमांक 12853 अमरकंटक एक्सप्रेस में यात्रा के दौरान उनकी पत्नी के पर्स से सोने के आभूषण, एप्पल एयरपॉड, नगदी एवं अन्य दस्तावेज सहित लगभग 10 लाख 47 हजार रूप्ए की सामग्री चोरी हो गई हैं। रिपोर्ट पर थाना जीआरपी जबलपुर में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रेल  राजा बाबू सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम द्वारा रेलवे स्टेशन एवं आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा मोबाइल लोकेशन का गहन विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान चोरी गए एप्पल एयरपॉड की लोकेशन ट्रेस होने पर प्राप्त तकनीकी जानकारी एवं मुखबिर सूचना के आधार पर शिवनगर, गोहलपुर क्षेत्र में दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से चोरी गया सोने का हार, अंगूठियां, कान के टॉप्स, ब्रेसलेट, एप्पल एयरपॉड, नगदी, आधार कार्ड सहित अन्य सामग्री लगभग 10 लाख 47 हजार रूपए की जब्‍त की। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के प्रति तथा आधुनिक तकनीक और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने हेतु प्रतिबद्ध है।