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सुमन हेल्प डेस्क 24×7 सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा का बनी आधार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय पर उपलब्धता एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग से प्रदेश सरकार महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्रभावी पहल कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क एवं इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मध्यप्रदेश सरकार सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ नवजात शिशु की सुरक्षा के संकल्प को तकनीक, संवेदनशीलता और सतत सेवा के माध्यम से साकार कर रही है। सुमन हेल्प डेस्क स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, शिकायतों के त्वरित समाधान, समयबद्ध रेफरल एवं सतत निगरानी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त आधार प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) हेल्प डेस्क व्यवस्था प्रदेश में गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद सहायक प्रणाली बनकर उभरी है। राज्य में प्रारंभिक रूप से 57 स्वास्थ्य संस्थाओं से शुरू हुई यह व्यवस्था अब विस्तारित होकर 55 जिला चिकित्सालयों, 10 शासकीय मेडिकल कॉलेजों तथा एम्स भोपाल तक पहुँच चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया मध्यप्रदेश मॉडल मध्यप्रदेश के सुमन आइसीसीसी एवं जिला हेल्प डेस्क मॉडल को भारत सरकार द्वारा आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन (नेशनल समिट ऑन इनोवेशंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज) में नवाचार एवं सर्वोत्तम कार्य-पद्धति के रूप में सराहा गया है। जिलों में स्थित सभी 66 हेल्प डेस्क भी अब 24×7 होंगी संचालित राज्य स्तर पर स्थित आईसीसीसी पूर्व से ही 24 घंटे सातों दिवस कार्यरत था, जबकि जिला स्तरीय हेल्प डेस्क कार्यालयीन समय में संचालित होते थे। इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए मई 2026 से प्रदेश के सभी 66 जिला स्तरीय SUMAN हेल्प डेस्क को भी 24×7 संचालित किया जा रहा है। सुमन हेल्प डेस्क प्रत्येक जिले में सक्रिय प्रदेश के प्रत्येक जिले में सुमन हेल्प डेस्क स्थापित की गई है, जहाँ 2 टेली-कॉलर एवं एक सुपरवाइज़र नियुक्त हैं। हेल्प डेस्क का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को सभी निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण रूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लाभार्थी को स्वास्थ्य सेवाओं में देरी या असुविधा पर हेल्प डेस्क द्वारा संबंधित स्वास्थ्यकर्मी — एएनएम, सीएचओ अथवा अन्य मैदानी अमले से समन्वय स्थापित कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाता है। शिकायतों का समयबद्ध निवारण इस प्रणाली की प्रमुख विशेषता है। आइसीसीसी से जुड़ी हाई-टेक निगरानी व्यवस्था सुमन हेल्प डेस्क व्यवस्था राज्य स्तरीय सुमन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) से जुड़ी हुई है। कंट्रोल सेंटर से सेवाओं की सतत निगरानी, रिपोर्टिंग एवं समन्वय किया जा रहा है। यह कमांड सेंटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 104 टोल फ्री सेवा से मिल रहा व्यापक परामर्श 104 टोल फ्री नंबर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, शिकायत निवारण, शासकीय योजनाओं की जानकारी तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) सेवाओं की जानकारी, सोनोग्राफी एवं आवश्यक जांच के लिए परामर्श, आईएफए एवं कैल्शियम अनुपूरण संबंधी मार्गदर्शन, बर्थ वेटिंग होम में भर्ती के लिए प्रेरित करना, उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) की सतत निगरानी, नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य ट्रैकिंग आदि सेवाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। लाखों माताओं और नवजातों की नियमित मॉनिटरिंग सुमन हेल्प डेस्क से लाखों गर्भवती महिलाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली माताओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है। हेल्प डेस्क द्वारा समय-समय पर जागरूकता संदेश, स्वास्थ्य परामर्श एवं आवश्यक जानकारी भी साझा की जाती है, जिससे सुरक्षित प्रसव एवं नवजात देखभाल के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।  

भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय हॉकी श्रृंखला में करेंगे देश का प्रतिनिधित्व

भोपाल  भारत और आस्ट्रेलिया के बीच भोपाल में आयोजित होने वाली अंडर-18 हॉकी सीरीज के लिए भारतीय पुरुष एवं महिला टीमों की घोषणा कर दी गई है। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रृंखला के लिए मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी, भोपाल के कुल 10 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन हुआ है। खिलाड़ियों के चयन से प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है। भारतीय अंडर-18 पुरुष टीम में अकादमी के गोलकीपर आयुष रजक, डिफेंडर अंश बहुत्रा और करण गौतम, मिडफील्डर अवि माणिकपुरी तथा फॉरवर्ड खिलाड़ी सिद्धार्थ बेन और गाज़ी खान को स्थान मिला है। वहीं भारतीय अंडर-18 महिला टीम में अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों स्नेहा दावड़े, गोलकीपर महक परिहार, नम्मी गीता और नौशीन नाज़ का चयन हुआ है। इन खिलाड़ियों के चयन से अकादमी में खुशी और उत्साह का माहौल है। भोपाल में होगा भारत-ऑस्ट्रेलिया मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंडर-18 हॉकी सीरीज का आयोजन भोपाल में किया जाएगा। यह सीरीज 15 मई से 20 मई 2026 तक खेली जाएगी, जिसमें देश और विदेश के युवा खिलाड़ी अपना कौशल दिखाएंगे। घरेलू मैदान पर खेलने का अवसर मिलने से मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का उत्साह और भी बढ़ गया है। राष्ट्रीय चयन में दिखा एमपी अकादमी का दम मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी लंबे समय से देश को प्रतिभाशाली खिलाड़ी देने का कार्य कर रही है। आधुनिक प्रशिक्षण, फिटनेस प्रबंधन और अनुभवी कोचिंग के कारण अकादमी के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय टीम में जगह बना रहे हैं। एक साथ 10 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन अकादमी की मजबूत खेल संरचना और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण का प्रमाण है। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  सारंग ने दी शुभकामनाएं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और राज्य सरकार द्वारा विकसित खेल सुविधाओं का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे। हॉकी में उभरती ताकत बन रहा मध्यप्रदेश लगातार राष्ट्रीय टीमों में खिलाड़ियों के चयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश अब हॉकी के क्षेत्र में तेजी से उभरती ताकत बन रहा है। प्रदेश की खेल अकादमियों में तैयार हो रहे खिलाड़ी देश के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं।  

जल जीवन मिशन बना जनभागीदारी और सामाजिक परिवर्तन की मिसाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को गति मिली है। इसी क्रम में लागू मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के 131 ग्राम, जैसीनगर के 145 ग्राम, सागर ब्लॉक के 26 ग्राम तथा रायसेन जिले के बेगमगंज ब्लॉक के 15 ग्रामों सहित कुल 317 ग्रामों को शुद्ध पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है। घर-घर नल कनेक्शन से संवरा ग्रामीणों का जीवन ग्राम खजुरिया में लगभग 147 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि, मजदूरी और पशुपालन पर आधारित है। योजना लागू होने से पहले गांव में केवल दो नल और एक कुआं था, जो गर्मियों में सूख जाता था। पानी के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों को एक से डेढ़ किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। पानी की समस्या का सीधा असर बच्चियों की पढ़ाई और महिलाओं के दैनिक जीवन पर पड़ता था। अब घर-घर नल कनेक्शन मिलने से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिली है और गांव में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार दिखाई दे रहा है। दिव्यांग नीरज साहू को मिला आत्मसम्मान इस योजना ने गांव के कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद भी जगाई है। ग्राम खजुरिया के निवासी नीरज साहू, जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, आज गांव की जल आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रोजगार के अवसर नहीं मिलने के बीच उन्होंने ग्राम पंचायत के समक्ष बॉलमेन के रूप में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। ग्राम सभा की सहमति से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। आज वे गांव में जल सप्लाई व्यवस्था संभालते हुए सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके लिए यह योजना केवल पेयजल सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम बन गई है। जनभागीदारी बनी योजना की सबसे बड़ी ताकत योजना में सामुदायिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। सहयोगी संस्था आई.एस.ए. मध्य सेवा एसोसिएशन, भोपाल द्वारा जनसभाओं, ग्रामसभाओं, नुक्कड़ नाटकों और स्कूल रैलियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया। गांवों में ग्राम जल एवं स्वच्छता तदर्थ समितियों का गठन कर स्थानीय समुदाय को जल प्रबंधन से जोड़ा गया। इससे ग्रामीणों में योजना के प्रति स्वामित्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। महिलाओं की भागीदारी से मजबूत हुआ ग्रामीण मॉडल ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। इससे गांवों में सहभागी विकास और सामाजिक समावेशन का प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने योजना के संचालन और रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाया है। हर घर नल से जल पहुंचने से सुधरा जीवन स्तर आज खजुरिया गांव में टोंटी से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता केवल सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में आए व्यापक बदलाव का प्रतीक बन चुकी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में कमी आई है, महिलाओं के श्रम और समय की बचत हुई है तथा बच्चों को बेहतर वातावरण मिल रहा है। जल जीवन मिशन ने यह सिद्ध किया है कि जब योजनाएं संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनसहभागिता के साथ लागू होती हैं, तब उनका प्रभाव सीधे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। जल है तो कल है” का साकार होता संदेश सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहा यह परिवर्तन प्रदेश में विकसित हो रहे उत्तरदायी और सहभागी ग्रामीण मॉडल की तस्वीर प्रस्तुत करता है। मड़िया ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना अब अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रही है। खजुरिया में 'जल है तो कल है' का संदेश अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि बदलती जिंदगी का वास्तविक अनुभव बन चुका है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को 1189 करोड़ रूपये के विकास कार्यों का करेंगे भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को गुना जिले को विकास की बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले में औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण एवं रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 1059 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली अंबुजा सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास करेंगे। साथ ही लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत के 144 विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण करेंगे। इन विकास कार्यों से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। जिले में मिलेगें रोजगार के अवसर अंबुजा कांक्रीट नार्थ प्रा.लि. (अडानी ग्रुप) द्वारा मावन में 32 हैक्टेयर भूमि पर स्थापित की जाने वाली यह सीमेंट प्रोजेक्ट जिले के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना की उत्पादन क्षमता 2×2 मिलियन टन प्रतिवर्ष होगी। यह यूनिट गुना शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर स्थापित की जा रही है। सीमेंट प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। लगभग 500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं 1000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। साथ ही शासन को प्रतिवर्ष लगभग 160 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना है। क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा प्रस्तावित परियोजना से न केवल औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि परिवहन, व्यापार, सेवा एवं अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे गुना जिले की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं गुना जिले के प्रभारी मंत्री  गोविन्‍द सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।  

‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण का हुआ सफल संचालन

भोपाल मध्यप्रदेश के वन्य जीव संरक्षण इतिहास में कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण के सफल संचालन से नया अध्याय जुड़ गया।  लगभग एक शताब्दी पूर्व प्रदेश के वनों से विलुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति की वापसी अब साकार हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला के सुपखार परिक्षेत्र में शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मती समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)  एल. कृष्णमूर्ति ने 4 और जंगली भैंसों को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलतापूर्वक मुक्त किया। इस अवसर पर संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व  रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर)  प्रकाश वर्मा, उप संचालक (बफर) सु अमिथा के.बी., समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में वन विभाग जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चला रहा है। इसी के अंतर्गत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व से ‘जंगली भैंस’ को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। सुपखार वह क्षेत्र है, जहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की उपस्थिति होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को 4 ‘जंगली भैंस’ (1 नर और 3 मादा)  को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपखार स्थित विशेष बाड़े में मुक्त किया था। दूसरे चरण में 4 और जंगली भैंसों के आगमन के साथ कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है। आगामी चरणों में भी परियोजना को और विस्तार दिया जाएगा। इससे प्रदेश में जंगली भैंसों की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित होगी। काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2,220 किलोमीटर की लंबी दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों से तय की गई। यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी करती रही। सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे अभियान का नेतृत्व किया। यह अभियान लगभग 72 घंटे तक चला। ‘जंगली भैंस’ भारतीय वन्यजीव धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही यह वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। ‘जंगली भैंस’ की वापसी से कान्हा क्षेत्र की जैव विविधता और अधिक समृद्ध होगी और परियोजना देश में वन्यजीव पुनर्स्थापना के सफल मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगी। मध्यप्रदेश, बाघ, चीता और गिद्ध संरक्षण जैसे अभियानों के लिए पहचान बना चुका है। ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना अभियान से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है।  

स्वास्थ्य व्यवस्था होगी मजबूत, MP में बड़े पैमाने पर डॉक्टरों की नियुक्ति

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।   13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही सुशासन, सुरक्षा और विकास के एक नवयुग का आरंभ हो गया है। पश्चिम बंगाल अब सच्चे अर्थो में 'आमार सोनार बांग्ला' बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में यह राज्य अब अपने पुराने गौरव और वैभव को प्राप्त कर समग्र विकास, निवेश, सुशासन एवं जनकल्याण के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल की नवगठित राज्य सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। समारोह में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह, केन्द्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह, अन्य वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्रीगण, एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के विभिन्न मुख्यमंत्री एवं अतिविशिष्ट जनों की गरिमामय उपस्थिति में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में  सुवेन्दु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  आर.एन. रवि ने  सुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद एवं नई सरकार के 5 अन्य मंत्रीगण को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी को लोक कल्याण के इस नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए समर्पित मैदानी कार्यकर्ताओं एवं राज्य की जागरूक जनता को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।  

प मुख्यमंत्री शुक्ल ने पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को दी बधाई

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने आज कोलकाता में पश्चिम बंगाल के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी से भेंट कर उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक जनादेश प्रदेश में विकास, सुशासन, सुरक्षा एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रति जनता के अटूट विश्वास को नई मजबूती देगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री  अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर होगा और राज्य प्रगति एवं समृद्धि के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।  

13 जिलों में मौसम अलर्ट, प्रदेश में दो सिस्टम सक्रिय; कल से बढ़ेगी गर्मी

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार मई की शुरुआत से ही मौसम ने अलग रंग दिखाया है। जहां आमतौर पर तेज गर्मी का असर रहता है, वहीं इस बार आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के बीचोंबीच से दो ट्रफ लाइन गुजर रही हैं और ऊपरी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है। इसी वजह से कई जिलों में मौसम लगातार बदल रहा है। इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट शनिवार को मौसम विभाग ने 13 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। राजधानी भोपाल स्थित राज्य मौसम विभाग ने शनिवार को सूबे के नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, सीधी और सिंगरौली यानी कुल 13 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन्ही में से कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बिजली गिरने की संभावना भी जताई गई है। इन जिलों में आंधी बारिश दर्ज इससे पहले शुक्रवार को कहीं तेज गर्मी तो कहीं आंधी-बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी, छिंदवाड़ा, रायसेन, सागर, दमोह, बालाघाट, भोपाल, देवास, खरगोन, राजगढ़, विदिशा, टीकमगढ़, अशोकनगर, शिवपुरी, बैतूल, नरसिंहपुर, मंडला, पांढुर्णा, डिंडौरी, अनूपपुर में कहीं तेज आंधी तो कहीं हल्की बारिश हुई। इन जिलों में तेज ग्रमी का असर वहीं, दिन में कई जिलों में गर्मी का असर देखा गया। इस वजह से रतलाम में पारा 43.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। शाजापुर में 42.6 डिग्री रहा। वहीं, पांच बड़े शहरों में उज्जैन में पारा 42.4 डिग्री, इंदौर-भोपाल में 41.2 डिग्री, जबलपुर में 38.8 डिग्री और ग्वालियर में 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 3 से 4 डिग्री तक तापमान में बढ़ोतरी का अनुमान मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को मौसम शुष्क होने के कारण प्रदेश के लगभग सभी इलाकों में अदिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। खासकर पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने को कहा गया। मौसम में बदलाव होने पर खुले – मैदानी क्षेत्र छोड़कर किसी पक्के मकान में शरण लेने की हिदायत दी गई है। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है। मई में अब तक बारिश का दौर IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, इस बार मई के पहले ही दिन से प्रदेश में मौसम बदला हुआ है। आम तौर पर शुरुआत में तेज गर्मी का असर रहता है, लेकिन इस बार कहीं तेज आंधी-बारिश तो कहीं ओलावृष्टि वाला मौसम रहा। चक्रवात, ट्रफ और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से ऐसा मौसम रहा। पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी होगी मौसम विभाग ने शनिवार को भी आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है, लेकिन इसके बाद दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी। रविवार को ज्यादातर शहरों में पारे में 3 से 4 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग की सावधानी बरतने की सलाह मौसम विभाग ने बिजली चमकने और आंधी के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। खुले मैदान में होने पर तुरंत किसी पक्के मकान की शरण लें। बेमौसम हो रही इस बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका जताई जा रही है।

23 साल पुराने आदेश पर सवाल, हिंदू पक्ष ने पूछा—ना वजूखाना, ना मीनार, फिर मस्जिद कैसे?

धार  मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।  एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि उसके द्वारा दायर जनहित याचिका कोई दीवानी मुकदमा नहीं है। साथ ही हिंदू पक्ष ने यह भी पूछा कि जब उस इमारत में मीनार और वजूखाना दोनों नहीं है तो वह मस्जिद कैसे कहलाएगी। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई की कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक का 'मूल धार्मिक स्वरूप' बहाल करने का निर्देश दे क्योंकि ASI की मौजूदा व्यवस्था से उसके बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने विवादित स्मारक को लेकर ASI के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी और स्मारक में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाई। दरअसल ASI के वर्तमान आदेश के अनुसार विवादित परिसर में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है। जैन ने कहा कि ASI का यह आदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करता है। ASI के आदेश को बुनियाद अधिकार का उल्लंघन बताया विष्णुशंकर जैन ने कहा कि इस कानून के एक प्रावधान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित कोई स्मारक पूजास्थल या तीर्थस्थल है, तो उसका उपयोग उसके स्वरूप के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। जैन ने कहा, 'ASI के साल 2003 में दिए गए आदेश के आधार पर जारी व्यवस्था से हमारे उपासना के अधिकारों के साथ ही बुनियादी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।' सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर विवादित स्मारक के 'मूल धार्मिक स्वरूप' के अनुरूप कार्य करने का वैधानिक दायित्व है। विष्णुशंकर जैन ने दिया मुस्लिम पक्ष के तमाम दलीलों का जवाब जैन ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को खारिज किया कि भोजशाला विवाद को लेकर 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की जनहित याचिका वस्तुतः एक दीवानी मुकदमा है और इसे उच्च न्यायालय की रिट कार्यवाही के बजाय किसी दीवानी अदालत में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,'यह कोई दीवानी मुकदमा नहीं है और इसमें तथ्यों से संबंधित कोई विवादित प्रश्न नहीं हैं।' मुस्लिम पक्ष ने दिया उपासना स्थल अधिनियम का हवाला मुस्लिम पक्ष का कहना है कि धार का विवादित स्मारक देश की आजादी की तारीख यानी 15 अगस्त 1947 को मस्जिद के रूप में वजूद में था, लिहाजा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के प्रावधानों के तहत इसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। हालांकि जैन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला पर यह कानून लागू नहीं होता क्योंकि वह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के वकील ने पूछा- मीनार या वजूखाना नहीं तो मस्जिद कैसे उधर हिंदू पक्ष के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मुस्लिम पक्ष के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि विवादित स्मारक में कोई मीनार या वजूखाना (नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने का स्थान) नहीं है, ऐसे में इसे मस्जिद कैसे कहा जा सकता है? तिवारी ने इमारत के जैन मंदिर होने के दावे को भी नकारा साथ ही तिवारी ने भोजशाला के जैन मंदिर होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी। बता दें कि उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।   मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष … Read more