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ब्रिज विवाद में सस्पेंड इंजीनियर्स की बहाली, मंत्री के नोटशीट निर्देश से हुआ फैसला

भोपाल  राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में निलंबित किए गए सभी सात इंजीनियरों को लोक निर्माण विभाग ने बहाल करने की तैयारी कर ली है। इनमें दो चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। इस ओवरब्रिज के डिजाइन और निर्माण को लेकर देशभर में मध्य प्रदेश सरकार और पीडब्ल्यूडी की काफी आलोचना हुई थी। जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने बहाली संबंधी नोटशीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि संबंधित अधिकारी जून 2025 से निलंबित हैं, इसलिए उन्हें पुनः सेवा में लिया जाए। इसके बाद विभाग ने बहाली आदेश जारी करने की तैयारी कर रहा है।  सस्पेंशन के दौरान दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों को ईएनसी कार्यालय से संबद्ध किया गया था, जबकि अन्य इंजीनियर भोपाल के फील्ड कार्यालयों में अटैच थे। अब बहाली के बाद सभी अधिकारियों की पदस्थापना ईएनसी कार्यालय में किए जाने की तैयारी है।   पहले जारी हो चुके थे आरोप पत्र जानकारी के अनुसार, सभी सात इंजीनियरों को पूर्व में आरोप पत्र जारी किए गए थे और उनसे जवाब मांगा गया था। डिजाइन से जुड़े अधिकारियों ने अपने जवाब में किसी प्रकार की गलती से इनकार किया। विभाग द्वारा जवाबों का परीक्षण करने के बाद अधिकांश अधिकारियों को बिना अतिरिक्त कार्रवाई के बहाल कर दिया गया।  इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई मामले में  चीफ इंजीनियर संजय खांडे, चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा,  प्रभारी ईई शबाना रज्जाक, सहायक यंत्री शानुल सक्सेना, उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा, प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला, प्रभारी ईई जावेद शकील और सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि रेलवे की मंजूरी के बिना ड्राइंग अनुमोदन और डिजाइन से जुड़ी प्रक्रियाओं में गंभीर त्रुटियां हुईं। विभागीय जांच अभी जारी रहेगी पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। इसके लिए अलग से जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो दस्तावेज, बयान और साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। यह प्रक्रिया अगले चार से पांच महीने तक चल सकती है। बताया गया है कि तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के मामलों में बहाली के साथ विभागीय जांच भी जारी रहेगी, जबकि अन्य अधिकारियों को फिलहाल राहत दे दी गई है।  ब्रिज का दोबारा हो रहा री-डिजाइन भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में बने इस रेलवे ओवरब्रिज का तीखा मोड़ शुरुआत से विवादों में रहा है। विशेषज्ञों ने इसे यातायात के लिहाज से जोखिमभरा बताया था। अब पीडब्ल्यूडी और रेलवे मिलकर ब्रिज के टर्निंग हिस्से का दोबारा डिजाइन तैयार कर रहे हैं, हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हो पाया है। इससे क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से तकनीकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में ब्रिज पर 35 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने को खतरनाक बताया गया था।  

देश का पहला रेयर अर्थ टाइटेनियम पार्क भोपाल में आज खुलेगा

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब क्रिटिकल मिनरल्स इनोवेशन के बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। यहां देश के पहले ‘रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्घाटन आज 9 मई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. अजीत के. मोहंती करेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह पार्क केवल प्रदर्शनी स्थल नहीं होगा, बल्कि अनुसंधान से उद्योग तक तकनीक पहुंचाने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बनेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को औद्योगिक उपयोग से जोड़ते हुए भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स और टाइटेनियम तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। पार्क में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विकसित आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यहां नियोडिमियम और सेरियम जैसे दुर्लभ खनिजों के निष्कर्षण और प्रसंस्करण से जुड़ी उन्नत प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही अनुपयोगी और पुराने मैग्नेट्स की रिसाइक्लिंग कर मूल्यवान तत्वों को दोबारा प्राप्त करने की तकनीक भी दिखाई जाएगी। इस पार्क को "प्रयोगशाला से उत्पाद" की अवधारणा पर डिजाइन किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटना है। इससे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा और उद्योगों के लिए उनकी उपयोगिता प्रदर्शित की जा सकेगी। इस पार्क की कार्यप्रणाली 3P ढांचे पर आधारित है—प्रक्रिया, प्रदर्शन और लोग। इस ढांचे के तहत, पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से कुशल कार्यबल तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सुविधा का एक प्रमुख उद्देश्य चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पार्क नियोडिमियम और सेरियम जैसी दुर्लभ धातुओं के उत्पादन की विधियों को प्रदर्शित करेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा सहित आधुनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें बेकार पड़े चुम्बकों को पुनर्चक्रित करके मूल्यवान तत्वों को पुनः प्राप्त करने की तकनीक भी शामिल होगी, जिससे अपशिष्ट कम होगा और संसाधन दक्षता में वृद्धि होगी। अधिकारियों ने आगे कहा कि "दुर्लभ पृथ्वी और टाइटेनियम थीम पार्क" भारत की खनिज आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विशिष्ट केंद्र की स्थापना महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थिरता, नवाचार और कौशल विकास पर जोर देने के साथ, यह पार्क अत्याधुनिक अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग का केंद्र बनने के लिए तैयार है, जिससे वैश्विक खनिज अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी। अस्वीकरण: यह पोस्ट किसी एजेंसी फीड से स्वतः प्रकाशित की गई है और इसमें पाठ में कोई संशोधन नहीं किया गया है। संपादक द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की गई है। इस परियोजना का मुख्य फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा। पार्क में खनिज संसाधनों के पुनः उपयोग और रिसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण के साथ आयात निर्भरता कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ती मांग के बीच भोपाल का यह पार्क भारत को रणनीतिक खनिज क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह थीम पार्क ‘3पी फ्रेमवर्क’ पर आधारित होगा। इसके तहत नई तकनीकों और नवाचारों का विकास, उच्च औद्योगिक गुणवत्ता सुनिश्चित करना और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करना प्रमुख लक्ष्य होंगे। भोपाल में बनने वाला संस्थान क्यों महत्वपूर्ण? भोपाल में आज 9 मई को जिस “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क ”का लोकार्पण होना है, उसे भारत की नई रेयर अर्थ रणनीति के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी विकास और उद्योग सहयोग का केंद्र बन सकती है। भोपाल के आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क” विकसित किए जाने का उद्देश्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि देश में संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तैयार करना है, ताकि भारत केवल कच्चा माल बेचने वाला देश न रह जाए। 'प्रयोगशाला से उत्पाद' की अनूठी अवधारणा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भोपाल के इस केंद्र में शोध, परीक्षण, प्रोटोटाइप विकास और उद्योगों के लिए तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं विकसित होती हैं, तो मध्यप्रदेश देश के रेयर अर्थ मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है।यह केवल औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मिशन बन जाएगा। 3पी फ्रेमवर्क पर आधारित कार्यप्रणाली:     प्रक्रिया (प्रोसेस) – दुर्लभ मृदा एवं टाइटेनियम क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवाचार उत्पादों का विकास एवं प्रदर्शन।     प्रदर्शन (पर्फार्मेंस) – उच्च गुणवत्ता वाले औद्योगिक मानकों की स्थापना, जिससे तकनीकों की दक्षता, विश्वसनीयता एवं विस्तार क्षमता सुनिश्चित हो सके।     मानव संसाधन (पीपुल) – युवाओं एवं पेशेवरों के कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से एक सक्षम कार्यबल तैयार

यूसीसी में बड़ा बदलाव, एमपी में एक समुदाय को मिलेगी 70% तक छूट

भोपाल   मध्यप्रदेश में इस साल के अंत तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हो सकती है। सरकार ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। उच्च स्तरीय समिति गठित करने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के मुख्य सचिव को अलग से कहा है कि वे समिति से समन्वय के लिए अपनी निगरानी में अधिकारियों के एक दल को लगाएं ताकि समिति की बैठकें समय-समय पर होती रहें। समिति को जो सहयोग चाहिए, वह राज्य की ओर से उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि प्रदेश में यूसीसी में आदिवासियों को 50 से 70 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। असल में उत्तराखंड व गुजरात ने यूसीसी लागू कर दिया है। अब सीएम चाहते हैं कि मप्र इन दोनों राज्यों के बाद यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बने। हालांकि भाजपा व एनडीए शासित दूसरे राज्यों में भी यह कवायद तेजी से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक यूपी व असम में भी तैयारियां हो चुकी हैं। समिति को 60 दिन में करने होंगे ये काम प्रदेश में मौजूदा विभिन्न व्यक्तिक, पारिवारिक विधियों, जिनमें विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण- पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक, लिव-इन का अध्ययन। उत्तराखंड-गुजरात में अपनाए गए मॉडल व प्रक्रिया का अध्ययन। राज्य के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए संतुलित-व्यावहारिक विधिक संरचना का प्रस्ताव देना। विभिन्न हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां लेकर उनका निराकरण कराना। सुनवाई व परामर्श बैठकें कर प्रक्रिया में लोगों की सहभागिता। प्रस्तावित व्यवस्था में महिला- बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, समानता एवं सुरक्षा से जरुरी प्रावधानों पर विचार देना। लिव-इन संबंधों के विनियमन, पंजीयन से उत्पन्न अधिकारों के संबंध में सुझाव देना। विधेयक के विधिक, प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का परीक्षण करना, ताकि भविष्य में विधिक जटिलता का सामना न करना पड़े। क्या कहता है यूसीसी विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामले वर्तमान में अलग-अलग व्यक्तिगत और पारिवारिक कानूनों द्वारा शासित हैं। यूसीसी में कहा गया है कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता, निष्पक्षता और कानूनी स्पष्टता वाले होने चाहिए। एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी संरचना से देश व राज्यों के विकास में सहायता मिलेगी। मप्र में अब तक ये काम हुआ 27 अप्रेल को यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई को अध्यक्ष बनाया है। जबकि सेवानिवृत्त आइएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद् अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह को सदस्य बनाया है। समिति के सचिव का जिम्मा जीएडी के अपर सचिव अजय कटेसरिया को दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में यूसीसी को लेकर की जा रही तैयारियों पर अधिकारियों से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। पिछले सप्ताह सामान्य प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक में भी इस संबंध में जानकारी ली गई थी। कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में, विरोध पर कर रही विचार उधर कांग्रेस भी यूसीसी पर नजर गड़ाए बैठी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल यूसीसी को लेकर सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों को देख रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस आदिवासियों को पूरी तरह यूसीसी से बाहर रखने के पक्ष में है।

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत, मंत्री ने कहा—धार्मिक संस्थानों में मिलेगी उपयोगी ट्रेनिंग

भोपाल मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था के बढ़ते दायरे के बीच अब मंदिरों की व्यवस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से संचालित करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के तहत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि प्रदेश के बड़े धार्मिक स्थलों पर लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए अब प्रशिक्षित और प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस की जा रही है।  मंदिरों में तेजी से बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या मंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा और प्रदेश के दूसरे बड़े धार्मिक स्थलों पर हर दिन हजारों से लेकर लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पहले जहां विशेष पर्व, शिवरात्रि या सावन जैसे मौकों पर ही भारी भीड़ दिखाई देती थी, वहीं अब हर शनिवार-रविवार और छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उज्जैन में अब सामान्य दिनों में भी एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सुविधाओं को व्यवस्थित रखना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। क्या पढ़ाया जाएगा टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में? इस नए कोर्स में सिर्फ धार्मिक पहलुओं पर नहीं बल्कि आधुनिक मैनेजमेंट सिस्टम पर फोकस किया जाएगा। छात्रों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग सिस्टम, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सफाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिरों में चढ़ने वाले फूल-माला, नारियल और अन्य पूजन सामग्री के उपयोग और डिस्पोजल की वैज्ञानिक व्यवस्था पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। धार्मिक स्थलों की आंतरिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। चर्च और मस्जिद में भी काम आएगा यह मैनेजमेंट इंदर सिंह परमार ने साफ कहा कि यह कोर्स केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट के सिद्धांत हर जगह एक जैसे होते हैं। जो छात्र यहां प्रशिक्षण लेंगे, वे चर्च, मस्जिद और अन्य धार्मिक या भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी बेहतर तरीके से व्यवस्थाएं संभाल सकेंगे। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इसकी शुरुआत मंदिरों से इसलिए की है क्योंकि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले उज्जैन में पायलट प्रोजेक्ट, फिर दूसरे विश्वविद्यालयों में  सरकार फिलहाल इस कोर्स को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन में शुरू करेगी। इसके बाद छात्रों की रुचि, एडमिशन और परिणामों को देखकर आगे का फैसला लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि अगले साल इसे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी शुरू करने की कोशिश की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाद में जबलपुर समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी यह कोर्स लागू किया जा सकता है। युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर सरकार का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन और बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रशिक्षित मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ेगी। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित लोगों के आने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, मंदिरों की व्यवस्थाएं ज्यादा प्रोफेशनल होंगी और धार्मिक स्थलों का संचालन अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। विपक्ष के सवालों पर मंत्री का जवाब विपक्ष द्वारा इस कोर्स को राजनीति और धर्म से जोड़ने पर मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह व्यवस्थाओं और मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों पर बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं को सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसे राजनीति के नजरिए से देख रहे हैं, वे इसकी वास्तविक जरूरत को समझ नहीं पा रहे हैं। सरकार समय की मांग के अनुसार धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।  

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले वेंडरों को मिलेगा सम्मान

सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडर होंगे सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। सरकार "पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली" योजना अंतर्गत घरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रतिबद्धतापूर्वक कर रही है। प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम अमनबीर सिंह बैंस ने बताया है कि निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सौर संयंत्र स्थापना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वेंडरों को सम्मानित किया जाएगा। एमडी बैंस ने कहा कि जो वेंडर अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। एमडी बैंस ने विगत दिनों भोपाल मुख्यालय में प्रगति की समीक्षा कर सभी वेंडर्स कार्य में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि कार्य क्षेत्र में आने वाली सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा जिससे कि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल किया जा सके। लगभग सवा लाख संयंत्र किये स्थापित एमडी बैंस ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में एक लाख 21 हजार 392 घरों पर सौर संयंत्र स्थापित कर दिए गए हैं। सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए 847.13 करोड रुपए का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक एक लाख 92 हजार 647 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, आवेदन पत्रों पर त्वरित कार्यवाही कर संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई द्रुत गति से जारी है।  

UP-MP के बीच यात्रा आसान: भोपाल से कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से केवल 7 घंटे में पहुंचेगे

भोपाल भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले फेस में भोपाल से विदिशा के बीच इस साल के आखिर तक लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल अधोसंरचना का काम नजर आने लगेगा। नेशनल हाईवे के निर्माणाधीन इस 42 किमी. के हिस्से के पास एमपीआइडीसी ने इंटीग्रेटेड मैन्यूफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर के तौर पर विकसित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स होंगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रोड पर काम कर रहा है, जबकि एमपीआइडीसी लॉजिस्टिक हब डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां तय करेगा। लॉजिस्टिक हब के तौर पर इसके विकसित होने से भोपाल व विदिशा के बीच छोटे उद्योगों और वेयरहाउसिंग का बड़ा जाल बिछने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा। राजधानी के विकास का रास्ता भी बदलेगा टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ के अनुसार अभी शहर का पूरा विकास दक्षिण दिशा यानी नर्मदापुरम रोड व इंदौर रोड की ओर है। इस कॉरिडोर के बनने से ये रायसेन रोड, विदिशा रोड की ओर होगा। विदिशा रोड खुद इकोनॉमिक कॉरिडोर में बदलेगा तो यहां नए प्रोजेक्ट्स नए विकास की स्थितियां बनेंगी। नर्मदापुरम रोड से इसे जोडऩे पहले से ही बायपास है। इंदौर रोड की ओर भी प्रस्तावित पश्चिमी बायपास से जुड़ेगा। मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य प्रदेश को 6800 करोड़ का तोहफा दिया है। नितिन गडकरी ने 6800 करोड़ के राजमार्गों को तोहफा मध्य प्रदेश को दिया है। इसमें 18 नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाएगा। जिसकी कुल लंबाई 550 किमी की होगी। सोमवार को नितिन गडकरी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के साथ भोपाल से कानपुर के बीच भोपाल कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का ऐलान किया गया। भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर भोपाल-विदिशा-सागर-कानपुर इकोनॉमी कोरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए भोपाल से विदेशा होकर सागर तक और सागर से महोबा जिले तक कवरई होकर कानपुर तक 11300 करोड़ की लागत से इस इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण होगा। इस हाईवे को निर्माण से भोपाल के कानपुर की दूरी 15 घंटे के घटकर 7 घंटे रह जाएगी। इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्लिविटी अच्छी हो जाएगी। वहीं बुंदेलखंड से भोपाल और कानपुर आने-जाने में भी समय बचेगा। सिर्फ 7 घंटे में भोपाल से कानपुर इसके अलावा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश के ओरछा में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 550 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली 18 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि स्थानीय लोगों की बेतवा में पुल बनाने की दो दशक पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि 665 मीटर लंबे इस पुल को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि 2-लेन के पेव्ड शोल्डर ब्रिज और फुटपाथ के निर्माण से ओरछा, झांसी, टीकमगढ़ की कनेक्टिविटी में सुधार होगा। मंत्री ने कहा कि पवई, ओरछा, हरपालपुर, कैथी पड़रिया कला, पटना तमौली, जस्सो, नागौद और सागर लिंक रोड बाईपास के निर्माण से शहर में यातायात का दबाव कम होगा। सागर ग्रीनफील्ड लिंक रोड से भोपाल से कानपुर की दूरी 21 किमी कम हो जाएगी, मोहरी से सताई घाट और चौका से एमपी/यूपी तक की दूरी भी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सीमा तक 4 लेन चौड़ा करने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सागर सिटी, छतरपुर सिटी और गढ़ाकोटा में फ्लाईओवर बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों ओरछा, खजुराहो, पन्ना, चित्रकूट, टीकमगढ़, सांची तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से सीमेंट और खनिजों का परिवहन आसान होगा और लॉजिस्टिक लागत कम होगी। मंत्री ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से भोपाल से कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की कनेक्टिविटी अच्छी होगी, टीकमगढ़ से ओरछा तक पक्की शोल्डर वाली 2 लेन सड़क बनने से यातायात सुरक्षित होगा। इस कार्यक्रम में गडकरी ने 2000 करोड़ रुपये की लागत से बमीठा से सतना तक 105 किलोमीटर लंबी 4 लेन की ग्रीनफील्ड सड़क बनाने की भी घोषणा की। इस सड़क के बनने से टीकमगढ़, पन्ना, छतरपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

लग्जरी वृद्धाश्रम में खाली कमरों की स्थिति, 80,000 रुपए तक का किराया रोक रहा बुजुर्गों को

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ महीने पहले एक पेड वृद्धाश्रम की शुरुआत हुई थी। यह वृद्धाश्रम आधुनिक सुविधाओं से लैस था। उद्घाटन के इतने दिनों बाद भी इस वृद्धाश्रम में रहने वाला कोई नहीं है। सिर्फ दो बुजुर्गों को छोड़कर यह आधुनिक वृद्धाश्रम पूरी तरह से खाली है। ऐसे में इसकी व्यावहारिकता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 56 बुजुर्ग नागरिकों को रहने की है व्यवस्था इस हाईटेक वृद्धाश्रम में 34 कमरे हैं। इन 34 कमरों में 56 बुजुर्ग नागरिक रह सकते हैं। कमरों के विकल्पों में सिंगल कमरों से लेकर सुइट तक शामिल हैं, जिन्हें बुजुर्गों को अलग-अलग स्तर पर आराम और प्राइवेसी देने के लिए डिजाइन किया गया है। पहले आओ, पहले पाओ की सुविधा वहीं, इस वृद्धाश्रम में बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होती है। उद्घाटन के बाद से, दो कमरों को छोड़कर बाकी सभी कमरे खाली पड़े हैं। कमरे पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन इन्हें लेने वाला कोई नहीं है। जनवरी में हुआ था उद्घाटन दरअसल, इसका उद्घाटन इसी साल जनवरी महीने में सीएम मोहन यादव ने किया था। इसके संचालन का जिम्मा एक एनजीओ के पास है। अपनी जरूरत के हिसाब से बुजुर्ग बुकिंग कर सकते हैं। खर्च अधिक होने की वजह से खाली पेड वृद्धाश्रम का कैंपस भोपाल के लिंक रोड पर नंबर 3 पर है। यह 5.25 एकड़ में फैला है। साथ ही इसमें काफी अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। मगर रिस्पॉन्स कम होने की वजह यह है कि यह किसी बुजुर्ग को रखने का खर्च बहुत ज्यादा है। एक व्यक्ति के लिए हर महीने 45,000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है, जिसे कई लोग अपनी पहुंच से बाहर मानते हैं। 24 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था निर्माण यहां रहने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस बुजुर्गों के आश्रय को अपने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जरिए चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसी विभाग ने 24 करोड़ रुपए की लागत से इस विशाल वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया था। सरकार इसे न लाभ, न हानि के आधार पर चलाने की योजना बना रही है, जिससे प्रति व्यक्ति रहने का खर्च कम हो जाएगा और ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग नागरिक इसकी ओर आकर्षित होंगे। एक अधिकारी, सामाजिक न्याय विभाग अत्याधुनिक है वृद्धाश्रम इस आश्रय गृह में एसी कमरे, इंटरटेनमेंट और आराम की जगहें, टहलने के लिए पक्का रास्ता, फिजियोथेरेपी सेंटर, लॉन्ड्री, किचन, मेडिकल रूम और रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें हैं। साथ ही बुजुर्गों की देखभाल करने वाला स्टाफ भी उपलब्ध है। मुनेश्वर कुमार

मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल की वन एवं वन्य जीव संरक्षण प्रयासों की सराहना

भोपाल  मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में मलेशियाई वन विभाग का 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर पहुँचा है। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने कान्हा में संचालित संरक्षण प्रयासों की सराहना करते हुए अपने देश में भी ऐसे मॉडल अपनाने में रुचि व्यक्त की। एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति एवं फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी ने प्रतिनिधिमंडल को अनाथ शावकों के पुनर्वास, ग्राम पुनर्स्थापन तथा पर्यटन प्रबंधन गतिविधियों का फील्ड भ्रमण कराया। मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के पहले दिन खटिया ईको सेंटर में वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण रणनीतियों, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा सत्र आयोजित किया गया। चर्चा सत्र में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. एच.एस. नेगी, एपीसीसीएफ श्री एल. कृष्णमूर्ति, फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, डिप्टी डायरेक्टर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों द्वारा कान्हा टाइगर रिजर्व की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों एवं सफल संरक्षण मॉडलों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।  

बाल अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डॉ. शर्मा

भोपाल  मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण किया। उन्होंने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बैठक कर बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षा एवं उनके समग्र विकास के लिए आयोग संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने बाल संरक्षण से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किए जाने तथा बच्चों के हितों से जुड़े मामलों में समन्वय और सक्रियता के साथ कार्य किए जाने पर जोर दिया। बैठक में आयोग की कार्यप्रणाली, बाल संरक्षण से संबंधित योजनाओं एवं विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने आयोग की गतिविधियों और कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।