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UCC पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा दावा, बोले- 90% से अधिक नागरिक समान नागरिक संहिता के पक्ष में

समान नागरिक संहिता के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूसीसी पर सभी जिलों में हो चुकी हैं बैठकें प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया जाएगा 15 से 29 जुलाई तक बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को मिला "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड" समारोहपूर्वक होगा जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन 25 से 30 जून तक होंगी गतिविधियां प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को प्राप्त हुए 1640 करोड़ रूपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में समान नागरिक संहितालागू (यूसीसी) करने के लिएसभी जिलों में जन परामर्श बैठकें हो चुकी हैं। सभी जिलों में कार्य शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनैतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया। लगभग 3.49 करोड़ एस.एम.एस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजें गए। नागरिकों के 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90% से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में यह जानकारी दी। गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा के अंतर्गत सभी स्कूलों में होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा दिनांक 15 से 29 जुलाई तक मनाया जा रहा है। इस अवधि में सभी स्कूलों में अलग अलग शैक्षणिक, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और गतिविधियां होंगी। इसमें जनप्रतिनिधि, पालक एवं विषय विशेषज्ञ शामिल होगें। इसमें विद्यार्थियों के विकास की कार्य योजना बनाई जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रत्येक दिवस की कार्य योजना बनाई है, इसमें भाषण, निबंध प्रतियोगिता, संस्कृत श्लोक प्रस्तुति, स्वास्थ्य जागरूकता, वृक्षारोपण, कैरियर मार्गदर्शन इत्यादि विषय शामिल किए गए हैं। इस अवधि में सांदीपनि विद्यालयों में एक दिवसीय गुरू पूर्णिमा उत्सव होगा। इसके अंतर्गत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान प्रदर्शिनी, नवाचार इत्यादि के कार्यक्रम किए जाएगें। कार्यक्रम में अभिभावक, जनप्रतिनिधिगण और नागरिकों की सहभागिता होगी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की देश-विदेश में विशेष पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रसिद्ध वन्य जीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्-2026" में "एडिटर्स चॉईस अवार्ड- बेस्ट वाईल्ड लाईफ डेस्टिनेशन" श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। गोवा में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य और प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। यह अवार्ड प्रदेश सरकार की जैव विविधता के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है। जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह में पंचायत स्तर तक होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 19 मार्च से प्रारंभजल गंगा संवर्धन अभियान का 25 से 30 जून 2026 की अवधि में समारोहपूर्वक समापन होगा। भारत सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। डिण्डौरी, खण्डवा तथा शहडोल देश के प्रथम 10 जिलों में तथा खण्डवा और इंदौर के नगरीय निकाय, देश के प्रथम 10 नगरीय निकायों में शामिल है। प्रदेश में अभियान में जल संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय कार्य हुए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में समारोहपूर्वक समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाए। अभियान अंतर्गत किए गए कार्यों की प्रदर्शनी, भाषण, ग्राम पंचायत में जनभागिता से किए गए कार्यों का प्रेजेंटेशन किया जाए और जल के सदुपयोग की शपथ भी दिलाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का किसान सम्मान निधि के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रदेश भ्रमण संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 20 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि अंतरित की गई। प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का प्रदेश के किसानों की ओर से आभार माना।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति

राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5,960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति 225 शासकीय माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल के हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5 हजार 960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी दी गई। बैठक में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान को गति देते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य में शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच बढ़ेगी और ड्रॉप आउट दर में कमीं आएगी। इसके अतिरिक्त, किसानों के आर्थिक संबल के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण योजना की नई शर्तों, शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 3 हजार 580 करोड़ रूपये से अधिक की राशि की निरंतरता तथा जनजातीय क्षेत्रों के विद्युतीकरण संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना के संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रूपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रूपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरुरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है। 225 शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रूपये के प्रस्ताव पर सहमति दी। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मैपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी। राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते, जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है। शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण प्रदाय करने के लिए किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी, जिसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से … Read more

सीएलसी राउंड के महाविद्यालय आवंटन जारी, 1.29 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला प्रवेश का अवसर

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संचालित ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) राउंड के महाविद्यालय आवंटन जारी कर दिए गए हैं। इस राउंड में प्रदेश के कुल 1 लाख 29 हजार 265 विद्यार्थियों को विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीट आवंटित की गई है। आवंटित विद्यार्थियों में 94 हजार 703 स्नातक (यूजी) तथा 34 हजार 562 स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं। महाविद्यालय आवंटन के उपरांत विद्यार्थी निर्धारित प्रवेश शुल्क जमा कर अपने प्रवेश की प्रक्रिया पूर्ण कर सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों से निर्धारित समय-सीमा का पालन करते हुए 30 जून तक प्रवेश शुल्क अनिवार्य रूप से जमा करने का आग्रह किया है, जिससे उनका प्रवेश सुनिश्चित हो सके। विभाग ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित नवीनतम जानकारी एवं आवश्यक निर्देशों के लिए ई-प्रवेश पोर्टल का नियमित अवलोकन करते रहें।  

CM डॉ. यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के CEO हेमंत रुपानी की मुलाकात, निवेश और उद्योग पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने की भेंट हिंदुस्तान कोका कोला समूह मध्यप्रदेश में करेगा 300 करोड़ रुपये का निवेश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेमंत रुपानी ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रूपानी को प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित योजनाओं गतिविधियों की जानकारी दी। रूपानी ने राज्य सरकार की उद्योग मित्र नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिंदुस्तान कोका कोला समूह मध्यप्रदेश में 300 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है। इससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उल्लेखनीय है कि राजगढ़ जिले के पिलूखेड़ी इंडस्ट्रियल एरिया में हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस की इकाई पहले से ही संचालित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के दौरान हिंदुस्तान कोका-कोला के नेशनल हेड विवेक झा, राज्य प्रमुख सुअश्विनी यीलेने तथा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक , श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी तिराहा पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र प्रथम के प्रति समर्पित प्रखर विचारधारा, देश की अखंडता के लिए उनका दृढ़ संकल्प सदैव प्रेरणा देता रहेगा। देश अनंतकाल तक डॉ.मुखर्जी का ऋणी रहेगा।  

मध्य प्रदेश में UCC बिल की तैयारी, क्या इंटरकास्ट मैरिज से प्रभावित होंगे आदिवासी अधिकार?

भोपाल   मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है।  आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, '' उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा।  आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, '' एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।   गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी।  मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं।  लिव इन रिलेशनशिप गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा।  संपत्ति का अधिकार गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

बैतूल के आदिवासी अंचल में बदलाव लाने वाले मोहन नागर को आज राष्ट्रपति भवन में मिलेगा पद्मश्री सम्मान

राजगढ़ मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है। जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए। बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया। श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर 'बोरी बंधान' की शुरुआत की। सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना पर राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को, शिक्षा विभाग की बड़ी पहल

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भोपाल में किया जाएगा कार्यशाला का आयोजन योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से की जाएगी चर्चा, दिया जाएगा प्रशिक्षण भोपाल  प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राज्य स्तरीय कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला 25 जून को पलाश रेसीडेन्सी भोपाल में होगी। इसमें राज्य शिक्षा केंद्र के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और सभी जिलों के नोडल अधिकारी तथा उनके सहायक शामिल होंगे। कार्यशाला में योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल NSP पर नवीन/ नवीनीकरण पंजीयन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के सीनियर कन्सलटेंट राघवेन्द्र खरे उपस्थित सहभागियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित है राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत भारत सरकार स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्ली द्वारा चयन परीक्षा में पात्र छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि सीधे हितग्राही छात्र के खाते में भेजी जाती है। राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं नगरीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 8वीं के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए छात्र को विगत वर्ष कक्षा 7वीं में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही, अभिभावक की सकल वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य के लिए निर्धारित कोटा में मेरिट सूची के अनुसार प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के 6 हजार 446 विद्यार्थियों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।  

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की नई सुविधा: 1912 पर करें कॉल, स्मार्ट मीटर की हर समस्या होगी दूर

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को विशेष सुविधा अब बिल, मीटर और इंस्टॉलेशन से जुड़ी दिक्कतों का 1912 पर घर बैठे होगा समाधान भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी द्वारा कार्यक्षेत्र में लगाए जा रहे आधुनिक स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर विशेष शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू की गई है। अब उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए सीधे इस नंबर पर संपर्क कर निराकरण करा सकते हैं। इन शिकायतों का होगा निराकरण कंपनी द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के अंतर्गत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करके स्मार्ट मीटर का अनुचित तरीके से इंस्टॉलेशन होना, स्मार्ट मीटर का जल जाना, डिस्प्ले बंद होना या मीटर का क्षतिग्रस्त होना, मासिक बिजली बिल का जनरेट न होना, गलत बिल जनरेशन की समस्या, बिल में एक्सपोर्ट यूनिट्स का गलत दर्ज होना, मीटर की तेज रिकॉर्डिंग के कारण बिजली का अधिक बिल आने संबंधी शिकायत, 'उपाय' (Upay) ऐप में स्मार्ट मीटर का डाटा गलत दिखना या प्रदर्शित न होना, बिजली बिल में मीटर का गलत सीरियल नंबर अंकित होना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय प्रारंभिक (शुरुआती) रीडिंग में विसंगति होना, सोलर/नेट मीटर में परिवर्तित न होना, बिल भुगतान करने के बाद भी बिजली का रीकनेक्शन न किया जाना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय पुराने मीटर की आखिरी रीडिंग गलत दर्ज होना तथा चेक मीटर लगाने का अनुरोध करना या अनुरोध के बावजूद चेक मीटर इंस्टॉल न होने संबंधी शिकायतों का निराकरण करा सकेंगे। स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित और सटीक मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग या इंस्टॉलेशन को लेकर कोई भी शंका या समस्या है, तो वे बिना किसी झिझक के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित तकनीकी टीम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण किया जाएगा  

महिला आयोग की जनसुनवाई में AI के दुरुपयोग के गंभीर मामले उजागर, बढ़ी चिंता

महिला आयोग की जनसुनवाई में सामने आए एआई के दुरुपयोग के गंभीर मामले शादी का झांसा और ब्लैकमेलिंग पर आयोग सख्त भोपाल देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते डिजिटल और पारंपरिक अपराधों के बीच, मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की संयुक्त बेंच (जनसुनवाई) में सोमवार को कुछ ऐसे गंभीर मामले सामने आए जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक की अगुवाई में कुल 22 प्रकरणों की त्वरित सुनवाई की गई। जनसुनवाई में जहाँ एक तरफ घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, वहीं दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग और यौन शोषण के मामलों ने आयोग का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। आयोग ने सभी मामलों को बेहद संजीदगी से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल और निष्पक्ष वैधानिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। वैवाहिक साइट से संपर्क, रिश्ता टूटने पर ए आई से बनाईं अश्लील व भ्रामक तस्वीरें तकनीक के जरिए महिलाओं को निशाना बनाने का एक बेहद संवेदनशील और आधुनिक मामला इस जनसुनवाई का मुख्य केंद्र रहा। एक पीड़ित युवती ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि वैवाहिक वेबसाइट (Matrimonial Website) के माध्यम से एक युवक और उसके परिवार से शादी की बातचीत आगे बढ़ी थी। हालांकि, किसी कारणवश जब युवती के परिवार ने इस रिश्ते को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, तो युवक ने प्रतिशोध की भावना से सोशल मीडिया पर उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से युवती की फर्जी शादी, गोदभराई और अन्य भ्रामक तस्वीरें तैयार कीं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया। युवती की सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के इस सुनियोजित प्रयास को देखते हुए महिला आयोग ने इसे एक गंभीर साइबर अपराध माना और मामले को त्वरित जांच एवं कठोर कार्रवाई के लिए तुरंत साइबर सेल (साइबर वेलनेस सेंटर) को प्रेषित कर दिया है। महिला आयोग की संयुक्त बेंच के समक्ष सोमवार को जनसुनवाई में एक पीड़िता ने लिखित शिकायत के माध्यम से आयोग को अवगत कराया कि एक युवक द्वारा पूर्व में विवाह का झूठा आश्वासन देकर उसका शोषण किया गया तथा उसके साथ निरंतर मारपीट व प्रताड़ना की जाने लगी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि इस कृत्य में अनावेदक की माता भी संलिप्त रही, जिसने दोनों का विवाह संपन्न कराने का भरोसा देते हुए पीड़िता से छलपूर्वक एक बड़ी धनराशि प्राप्त कर ली और राशि प्राप्त करने के उपरांत विवाह से साफ इनकार करते हुए पीड़िता को प्रताड़ित किया जाने लगा अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने इस मामले को प्राथमिक रूप से अत्यंत गंभीर मानते हुए संबंधित थाना प्रभारी को अनावेदक एवं उसके परिजन के विरुद्ध सुसंगत धाराओं के अंतर्गत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। कथित पत्रकार द्वारा सोशल मीडिया पर नर्स का मानसिक उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग एक अन्य प्रकरण में समाज में रसूख का धौंस देकर महिलाओं को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया। अस्पताल में कार्यरत एक महिला नर्स ने खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार मानसिक उत्पीड़न करने की शिकायत दर्ज कराई। नर्स का आरोप था कि उक्त आरोपी उसके विरुद्ध फर्जी वीडियो और झूठी, भ्रामक खबरें प्रसारित कर समाज में उसकी छवि को पूरी तरह खराब करने का प्रयास कर रहा था। हद तो तब हो गई जब आरोपी ने महिला आयोग के वैधानिक अस्तित्व के संबंध में भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और धमकीपूर्ण बातें कहीं। आयोग के सख्त रवैये और कड़े निर्देश के बाद दोनों पक्षों को संयुक्त बेंच के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराया गया और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रोडमैप तैयार किया गया। सुनवाई के दौरान आयोग परिसर में ही 'स्काई सोशल एनजीओ' द्वारा एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता उपलब्ध कराना था। संस्था के अनुभवी और प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिकों तथा परामर्शदाताओं ने हिंसा, गंभीर उत्पीड़न, पारिवारिक विवाद, परित्याग और गहरे भावनात्मक तनाव से प्रभावित महिलाओं की काउंसिलिंग की। उन्हें इस कठिन दौर से उबरने के लिए भावनात्मक संबल और 'ट्रॉमा-इन्फॉर्म्ड' मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की गई, जिससे महिलाएं मानसिक रूप से सशक्त होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें।