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रेल यात्रा में संदेह: 167 बच्चों को कटनी में रोका गया, मानव तस्करी के एंगल से जांच शुरू

कटनी. बिहार से महाराष्ट्र पटना पुणे एक्सप्रेस से ले जाए जा रहे डेढ़ सौ से अधिक मुस्लिम बच्चों को मानव तस्करी की आशंका पर देर रात कटनी स्टेशन में उतारा गया। बाल कल्याण समिति और रेल पुलिस ने बच्चों को बाल सुरक्षा गृह में ठहराया है और जांच कर रही है। शनिवार की रात को महिला बाल विकास विभाग और आरपीएफ को सामाजिक संगठन से सूचना मिली कि पटना पुणे ट्रेन से बड़ी संख्या 7 से 15 वर्ष के बच्चों को लेकर महाराष्ट्र ले जा रहे है और मानव तस्करी की आशंका है। मामला की गंभीरता को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपीएफ, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी और बाल सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रेन के कटनी स्टेशन पहुंचते ही, सभी बच्चों को ट्रेन से नीचे उतारकर अपनी निगरानी में लिया। ट्रेन से 167 बच्चे उतारे गए और उनसे काउंसलिंग की गई। मदरसे में दाखिला कराने की बात सामने आई मनीष तिवारी बाल सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ट्रेन से उतारे गए बच्चों में अधिकांश मुस्लिम समुदाय के हैं, जिन्हें बिहार से महाराष्ट्र जाया जा रहा था। बच्चों को ले जाने वालों से दस्तावेज मिले हैं, जिसमें मदरसे में बच्चों का दाखिला कराने की बात सामने आई है। आरपीएफ और बाल सुरक्षा अधिकारी के अलावा बाल विकास कल्याण की टीम मामले की जांच कर रही है। रात को 80 बच्चों को जबलपुर के बाल गृह और बाकी को कटनी के बाल गृह में रखा गया है। बिहार में जिन क्षेत्रों से बच्चे ले जाए जा रहे थे, वहां से संपर्क किया जा रहा है और उसके बाद वास्तविक बात सामने आ सकेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल बोले – राज्य सरकार शासकीय संस्थानों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, रीवा में नव स्थापित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक उपकरणों का निवास कार्यालय भोपाल से वर्चुअल लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि आमजन को शासकीय संस्थानों में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को साकार करती है। उन्होंने नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), सिंगरौली का आभार व्यक्त किया। एनसीएल ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के अंतर्गत इन आधुनिक मशीनों की स्थापना में सहयोग किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस सुविधा से न केवल मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, बल्कि चिकित्सा विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार निरंतर प्रयासरत है कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों को अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जाए, जिससे मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की पहल चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। नव स्थापित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में 20 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें 16 सामान्य बेड एवं 4 आईसीयू बेड शामिल हैं। विभाग में एडवांस्ड गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी स्किल लैब की स्थापना की गई है, जो आधुनिक इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी तकनीकों से सुसज्जित है। इन अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से जटिल रोगों जैसे लिवर संबंधी बीमारियाँ, पित्त नली की पथरी, कैंसरजनित पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस, आंतों के रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस तथा अन्य गंभीर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल समस्याओं का सटीक एवं प्रभावी उपचार अब स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा। ये मशीने अत्यंत उन्नत डायग्नोस्टिक एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं को कम समय में, अधिक सटीकता के साथ संपन्न करने में सक्षम हैं। इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी के माध्यम से बिना बड़े ऑपरेशन के कई जटिल प्रक्रियाएँ की जा सकती हैं, जिससे मरीजों को कम दर्द, शीघ्र रिकवरी एवं कम खर्च में उपचार उपलब्ध होता है। विभाग द्वारा 6 अप्रैल से संचालन प्रारंभ होने के पश्चात अब तक 18 सफल प्रक्रियाएँ संपन्न की जा चुकी हैं, जो इसकी उपयोगिता और दक्षता को दर्शाता है। इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्र, डीन डॉ सुनील अग्रवाल, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग डॉ एम एच उस्मानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।  

लखपति दीदी सुमा उइके : संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

भोपाल.  बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की श्रीमती सुमा उइके आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता की कहानी इतनी प्रेरणादायक है कि इसका उल्लेख प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित “मन की बात” कार्यक्रम में भी किया गया। संघर्षों से भरी थी शुरुआत जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा उइके का जीवन पहले बेहद सीमित दायरे में था। वे केवल घर-गृहस्थी तक ही सीमित थीं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय मात्र 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन था। स्वयं सहायता समूह बना बदलाव की कुंजी वर्ष 2019 में सुमा उइके “जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने रिवाल्विंग फंड (RF) की सहायता से जैविक मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे आय के नए रास्ते खुले। कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय आगे बढ़ते हुए सुमा दीदी ने जनपद पंचायत कटंगी में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने बैंक से 6 लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर थर्मल थेरेपी सेंटर की शुरुआत की। इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि उन्होंने अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कैंटीन और थेरेपी सेंटर में समूह की सदस्य महिलाएं भी कार्य कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका भी सशक्त हुई है। आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा आज सुमा उइके की व्यक्तिगत मासिक आय 19 हजार रुपए तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय 32 हजार रुपए हो गई है। यह बदलाव उनके संघर्ष, मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। बनीं प्रेरणा और मिसाल आज सुमा उइके न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वे अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नारी सशक्तिकरण की प्रतीक सुमा उइके की यह यात्रा बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिले, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज वे “लखपति दीदी” बनकर नारी सशक्तिकरण की एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरी हैं। 

रविवार को बड़ा हादसा: खंडवा टैक्स ऑफिस में आग से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड खाक

खंडवा. शहर के जेल रोड स्थित संयुक्त वाणिज्यकर कार्यालय में रविवार दोपहर आग लग गई। आग में कार्यालय में जरूरी सामान व दस्तावेज जल गए। रविवार की वजह से कार्यालय बंद था। धुआं देखकर आसपास रहने वाले लोगों ने वहां पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश की और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सुबह चौकीदार ने आसपास की झाड़ियों में आग लगाई थी। आशंका है कि वहीं से आग कार्यालय तक पहुंची।

MP नगर में जोरदार धमाका: ट्रांसफार्मर फटा, पास खड़ी फॉर्च्यूनर क्षतिग्रस्त, मचा हड़कंप

भोपाल. शहर के एमपी नगर में रविवार को एक भीषण हादसा हो गया, जहां ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। आग की लपटों ने वहां खड़ी फॉर्च्यूनर कार को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह जलकर खाक हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक कार पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। भोपाल के एमपी नगर इलाके में सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया। जब एक ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पास खड़ी एक फॉर्चूनर कार को अपनी चपेट में ले लिया। जिसमें कार पूरी तरह जलकर खाक हो गई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया गया।

इंदौर रोड एक्सीडेंट: स्टील प्लेट का रोल गिरने से 5 ट्रक-कार भिड़े, एक की गई जान

इंदौर. मानपुर थाना क्षेत्र के आगरा-मुंबई हाईवे स्थित भेरूघाट पर शुक्रवार देर रात भीषण हादसा हो गया। मुंबई की ओर जाने वाली लेन पर घाट उतरते समय आगे चल रहे ट्रक से स्टील प्लेट का रोल सड़क पर गिर गया, इससे बचने के चक्कर में पीछे आ रहे पांच ट्रक और एक कार आपस में टकरा गए। हादसे में एक ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, शुक्रवार रात करीब ढाई बजे घाट उतरते समय ट्रक क्रमांक एमपी 09 बीजी 7608 से अचानक स्टील प्लेट का भारी रोल सड़क पर गिर गया। चालक ने वाहन रोककर नीचे उतरकर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन ट्रक के अचानक रूकने से पीछे से आ रहे वाहन अनियंत्रित हो गए और एक के बाद एक टकराते चले गए। बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई कार कुछ ही पलों में पांच ट्रक और एक कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। दुर्घटना में एक ट्रक पलट गया, जबकि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में ट्रक ड्राइवर 42 वर्षीय ओमप्रकाश यादव निवासी ग्राम शेरपुर गुड़ा, थाना मूसानगर, जिला कानपुर देहात (उत्तर प्रदेश) की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य पांच घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही मानपुर पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को क्रेन से हटाकर यातायात बहाल किया गया, हालांकि कुछ समय तक मार्ग बाधित रहा। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को आरोपी बनाया है।

सीएम मोहन यादव ने बहनों को दिया तोहफा, खातों में आए 1500 रुपये

 भोपाल मध्य प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए 12 अप्रैल का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीहोर जिले के आष्टा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 35वीं किस्त सिंगल क्लिक के माध्यम से जारी कर दी। इस बार बहनों के खातों में 1500 रुपये की सम्मान राशि अंतरित की गई है। मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 35वीं क‍िस्‍त जारी हो गई है। सीएम मोहन यादव ने स‍िहोर के आष्‍टा नगर से स‍िंंगल क्‍ल‍िक के माध्‍यम से 1.25 करोड़ मह‍िलाओं के खाते में 1875 करोड़ रुपये की राश‍ि ट्रांसफर की है। आंकड़ों में योजना की सफलता साल 2023 में शुरू हुई यह योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे बड़ा आधार बन गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि:     कुल लाभार्थी: लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं।     ताजा किस्त: 35वीं किस्त के रूप में 1875 करोड़ रुपये जारी किए गए।     अब तक की कुल राशि: 34 किस्तों के माध्यम से अब तक 54,000 करोड़ रुपये बहनों के खातों में भेजे जा चुके हैं।  बढ़ी हुई राशि: पिछले नवंबर से योजना की राशि 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये कर दी गई है। आखा तीज पर कन्यादान योजना का बड़ा तोहफा लाडली बहनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी आखा तीज के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत नव-विवाहित जोड़ों को 55,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, कार्यक्रम के दौरान डॉ. यादव ने नन्ही बालिकाओं को लाडली लक्ष्मी योजना के प्रमाण पत्र भी वितरित किए, जो राज्य सरकार की महिला एवं बाल विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भुगतान का स्टेटस और ई-केवाईसी (eKYC) गाइड जिन महिलाओं के खाते में राशि आनी है, वे घर बैठे अपना स्टेटस चेक कर सकती हैं। वहीं, जिन लाभार्थियों की किस्त रुकी है, उन्हें अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है। यदि आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराया है, तो तुरंत समग्र पोर्टल पर जाकर आधार और समग्र आईडी के माध्यम से इस प्रक्रिया को पूरा करें। इसके बिना आगामी किस्तों का लाभ मिलने में समस्या हो सकती है। स्टेटस कैसे चेक करें?     आधिकारिक पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' विकल्प का चयन करें।     अपनी समग्र आईडी या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।     मोबाइल पर आए OTP को भरें और अपना स्टेटस देखें।  

जबलपुर से कोटा तक नई रेल लाइन: अब शहरों में ट्रैफिक घटेगा, बाहर से गुजरेंगी मालगाड़ियां

जबलपुर. भारतीय रेल (Indian Railways) अब अपनी परिचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करने और बड़े जंक्शनों पर बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए 'बाइपास रेल लाइन' का जाल बिछाया जाएगा। पश्चिम मध्य रेल (WCR) ने इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आठ प्रमुख स्थानों को चिह्नित किया है। इन शहरों में प्रस्तावित है बाइपास रेलवे की इस योजना के केंद्र में जबलपुर, कोटा, बीना, गुना, रुठियाई, सवाई माधोपुर, कछपुरा और रामगंज मंडी जैसे व्यस्त स्टेशन शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रस्तावित बाइपास लाइनों की कुल लंबाई लगभग 166 किलोमीटर होगी। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य मालगाड़ियों को मुख्य स्टेशनों के बाहर से ही उनके गंतव्य की ओर रवाना करना है। सर्वे के लिए बजट स्वीकृत रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना की गंभीरता को देखते हुए इसके प्रारंभिक सर्वेक्षण (Survey) के लिए 83 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी है। वर्तमान में तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने का काम भी तेजी से चल रहा है, जिसे इन बाइपास लाइनों से जोड़कर ट्रेनों के आवागमन को और सुगम बनाया जाएगा। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का अलग होगा रास्ता अभी स्थिति यह है कि मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें एक ही ट्रैक और स्टेशनों का उपयोग करती हैं। बड़े स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म खाली न होने के कारण अक्सर ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है। बाइपास बनने से मालगाड़ियां शहर के भीतर प्रवेश किए बिना ही निकल जाएंगी, जिससे मुख्य स्टेशनों पर ट्रैक खाली रहेंगे और यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा। इटारसी में अंतिम चरण का काम देश के सबसे व्यस्ततम जंक्शनों में शुमार इटारसी में बाइपास का काम पहले से ही निर्माणाधीन है। यहाँ शेष बचे 9 किलोमीटर के हिस्से के लिए जल्द ही फाइनल सर्वे शुरू किया जाएगा। इस छोटे से खंड के पूरा होते ही इटारसी जंक्शन पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

समान नागरिक संहिता को लेकर सियासत तेज: उमंग सिंघार बोले—आदिवासी पहचान से समझौता नहीं होगा

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह कानून आदिवासी समाज की पहचान, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं के साथ सदियों से जीवन यापन कर रहा है। ऐसे में एकरूप कानून थोपना न केवल उनकी परंपराओं का अनादर है, बल्कि यह उनके अधिकारों का भी उल्लंघन है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 में यूसीसी को ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व’ में रखा गया था, क्योंकि संविधान सभा यह समझती थी कि विविधताओं वाले देश में इस विषय पर व्यापक सहमति बनानी होगी। यह कोई तत्काल लागू होने वाला अनिवार्य अधिकार नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक सिद्धांत था। लेकिन बीजेपी सरकार इसे जल्दबाजी, बिना संवाद और बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के थोपने का प्रयास रही है। सिंघार ने कहा, यूसीसी के नाम पर जो एकरूपता थोपी जा रही है, वह ‘विविधता में एकता’ के हमारे मूल मंत्र को तोड़ती है। आदिवासी समाज की अपनी सामाजिक व्यवस्था, विवाह, उत्तराधिकार और भूमि से जुड़े रीति-रिवाज सदियों पुराने हैं। पांचवीं और छठी अनुसूची उन्हें सांस्कृतिक स्वायत्तता देती है। यदि यूसीसी बिना छूट के लागू हुई, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ होगा। समानता का अर्थ एकरूपता नहीं सिंघार ने सरकार के ‘समानता’ के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि समानता का अर्थ एकरूपता नहीं होता, बल्कि हर समुदाय की विशिष्टता को सम्मान देते हुए न्याय सुनिश्चित करना होता है। उन्होंने चिंता जताई कि न तो आदिवासी संगठनों, न पंचायतों, न ही किसी धार्मिक या सामाजिक समूह से चर्चा की गई। बीजेपी की यही ‘नया सामान्य’ बन गया है – बिना विचार-विमर्श के कानून बनाना। यह अलोकतांत्रिक, असांप्रदायिक और असंवैधानिक है। सरकार को साफ जवाब देना चाहिए कि क्या यूसीसी आदिवासियों पर लागू होगी? यदि नहीं, तो संरक्षण की गारंटी क्यों नहीं दी जा रही? यह अनिश्चितता जानबूझकर फैलाया गया भय है।” आदिवासी समाज की परंपराओं की सुरक्षा की जाए सिंघार ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि क्या आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे में लाया जाएगा या उन्हें इससे बाहर रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने मांग की कि आदिवासी समाज को इस संहिता से बाहर रखा जाए और उनकी परंपराओं व अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सिंघार ने कहा कि बिना सहमति और संवाद के लाया गया कानून समाज में बंटवारे का काम करेगा। “यूसीसी की घोषणा ने एकता की बजाय अलगाव पैदा किया है। सरकार तुष्टीकरण की राजनीति छोड़े, आदिवासी समाज को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए और सभी समुदायों को विश्वास में लेते हुए कोई साझा मसौदा तैयार किया जाए। जल्दबाजी और अलोकतांत्रिक तरीका बीजेपी की असहिष्णु सोच को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा हो, सभी धर्मों, जनजातियों और अल्पसंख्यकों को साथ लेकर ही कोई नीति बने, अन्यथा यह देश की सांस्कृतिक विविधता के लिए घातक साबित होगी।

फूड सेफ्टी पर बड़ा सवाल: मंदसौर में 700 लीटर दूध के साथ यूरिया-केमिकल मिले, जांच शुरू

मंदसौर. मंदसौर जिले में पुलिस ने आठ दिन में दूसरी बार गरोठ क्षेत्र में नकली दूध बनाने की आशंका में छापामार कार्रवाई की है। शनिवार की देर रात गरोठ के ग्राम चचावदा चौकटिया में एक बाड़े में दबिश देकर पुलिस ने यूरिया, केमिकल सहित अन्य सामग्री जब्त की है। यहां लगभग 700 लीटर दूध का स्टाक भी मिला है। अब जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। मिली जानकारी के अनुसार शनिवार-रविवार की दरमियानी रात लगभग डेढ़ बजे गरोठ पुलिस की टीम ने ग्राम चचावदा चौकटिया स्थित एक बाड़े में दबिश दी। यहां दो कमरों में दूध की डेयरी संचालित हो रही है। मौके से पुलिस ने ढाई कट्टा यूरिया, केमिकल सहित अन्य सामग्री जब्त की है जो संभवतः नकली दूध बनाने के लिए उपयोग की जा रही थी। साथ ही करीब 700 लीटर दूध का स्टाक भी मिला। पुलिस को जानकारी मिली है कि इस डेयरी का संचालन सूरज गायरी कर रहा था। कोटड़ा बुजुर्ग में भी डेयरी पर मिला था 200 लीटर दूध उल्लेखनीय है कि अभी पांच दिन पूर्व ही शामगढ़ व गरोठ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गरोठ क्षेत्र के कोटड़ा बुजुर्ग में भी एक डेयरी पर छापा मारा था। यहां 2000 लीटर दूध, 200 लीटर केमिकल व दूध के पावडर जैसा पदार्थ मिला था। खाद्य विभाग ने दूध के सेंपल लेकर लेब में भेजे थे। उसकी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।