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इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा: 42.76 करोड़ की लागत से बनेंगी और चौड़ी होंगी पांच सड़कें

ग्वालियर मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा-भितरवार क्षेत्र में पांच प्रमुख सड़क निर्माण होने से कई गांव सीधे शहर से जुड़ जाएंगे। वहीं रहवासियों को बदहाल मार्ग से छुटकारा मिलेगा। 42.76 करोड़ रुपए की लागत से यह सड़कें बनेंगी। बजट पास हो गया है, अब सिर्फ डीपीआर बनाकर टेंडर निकाले जाने का इंतजार बना है। बागवई से वाया घाटमपुर होते हुए हरसी नरवर मार्ग तक बनने वाले बायपास से भितरवार के रहवासियों को लगने वाले जाम से निजात मिलेगी। 25 से ज्यादा गांवों को होगा फायदा इन प्रमुख सड़कों के निर्माण होने से 25 से ज्यादा गांवों का पहुंच मार्ग सुगम होगा। इन सभी सड़कों का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा कराया जाएगा। उक्त सड़क निर्माण को लेकर विभाग ने सेटेलाइट नक्शा तैयार कर लिया है और एस्टीमेट बनाने में जुटा है। डबरा स्थित मकोड़ा टेकनपुर मार्ग बनने से कई गांवों के अलावा बिलौआ के कई गांवों के पहुंच मार्ग तक पहुंचना आसान हो जाएगा। एसडीओ लोक निर्माण विभाग रवि श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ जगह नवीन तो कुछ जगह पुरानी सड़क को उखाड़ कर नई सड़क बनाई जाएगी। बागवई बाईपास 15 मीटर चौड़ा बनेगा। सेटेलाइट नक्शा तैयार किया गया है, डीपीआर तैयार की जा रही है। जल्द ही टेंडर निकाला जाएगा।   ये सड़कें बनेंगी मकौड़ा टेकनपुर मार्ग काफी समय से बदहाल बना हुआ है। लोगों का इस मार्ग से निकलना मुश्किल हो रहा था। आखिरकार 8.1 किमी तक सड़क निर्माण का बजट पास हो गया है। सड़क 4 मीटर चौड़ी बनेगी, 10.53 करोड़ रुपए का बजट पास इसके लिए पास हुआ है। ये मार्ग बनने से मकौड़ा, कल्याणी, टीसीपी, हाइवे स्थित बौना, ऊधलपाड़ा, बझेरा, करीब ८ गांव के रहवासी लाभांवित होंगे। करहिया से लेकर मकरध्वज मंदिर तक जाने वाला 3 किमी की खराब सड़क को फिर से बनाया जाएगा। 3.90 करोड़ रुपए का बजट पास किया गया है। इस सड़क के बनने से नैनागिरी आदिवासी बस्ती, दुबई और मेहगांव को फायदा होगा। नरवर करैरा जाने के लिए अभी भितरवार से बाजार से अंदर होते हुए जाना पड़ता है। लेकिन बागवाई से वाया घाटमपुर होते हुए हरसी नरवर मार्ग तक बायपास के निर्माण होने से फिर भितरवार के अंदर उन वाहनों का प्रवेश नहीं हो सकेगा। जिससे भितरवार के मुख्य मार्ग पर जाम नहीं लगेगा और जाम से निजात मिलेगी। 20 करोड़ रुपए की राशि का बजट पास है। 6 किलोमीटर तक डामरी सड़क बनेगी। 15 मीटर चौड़ा यह बाइपास निर्माण होगा।  घाटीगांव क्षेत्र की पार से जखा वाया इमलिया मार्ग तक 2.1 किलोमीटर की नवीन सड़क बनेगी। जिसके लिए 2.73 करोड़ रुपए का बजट पास किया है।  सिमरिया तिराहे से लेकर रेलवे फाटक तक मुख्य मार्ग का निर्माण कार्य शुरू है। दो किलोमीटर दूरी तक डामरी सड़क का निर्माण कार्य होगा, गिट्टी बिछाई जा चुकी है। करीब डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से यह निर्माण कार्य होगा। 4 मीटर चौड़ी सड़क बन रही है। वहीं सड़क के दोनों तरफ करीब 300 पेड़ लगाए जाने की भी योजना है।

नगर निगम का बड़ा कदम: 9 साल बाद 10 हजार नई संपत्तियां टैक्स दायरे में, बढ़ेगी कमाई

खंडवा नगरीय क्षेत्र में जीआईएस ( ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम ) यानी भौगोलिक सर्वे के दौरान 10 हजार से अधिक नई संपत्तियां मिलीं हैं। नई संपत्तियां एक अप्रेल से टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। निगम ने नौ साल बाद नई संपत्तियों को टैक्स लगाने की कार्य योजना तैयार की है। सर्वे में मिलीं 10 हजार नई संपत्तियां नगरीय क्षेत्र में जीआईएस ( ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम ) यानी भौगोलिक सर्वे के दौरान 10 हजार से अधिक नई संपत्तियां मिलीं हैं। नई संपत्तियां एक अप्रेल से टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। निगम ने नौ साल बाद नई संपत्तियों को टैक्स लगाने की कार्य योजना तैयार की है। जिसे एमआईसी फाइनल टच देगी। टैक्स शुरु होने से निगम की आय हर साल एक से डेढ़ करोड़ रुपए बढ़ने की उम्मीद है। निगम की डिमांड 11.50 करोड़ से बढ़कर 13 करोड़ रुपए हो जाएगी। वर्ष 2017 के बाद 2026 में नई संपत्तियां नगर निगम ने वर्ष 2017 के बाद नई संपत्तियों पर वर्ष 2026 में टैक्स लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है। सर्वे का कार्य 8 फरवरी-2025 को शुरु हुआ था। इस दौरान 10 हजार 887 नई संपत्तियां दर्ज की गईं हैं। निगम ने इन संपत्तियों का डिटेल सर्वे तैयार किया है। अभी 46,346 संपत्तियों टैक्स के दायरे में हैं। इन संपत्तियों से करीब 11.50 करोड़ रुपए टैक्स की डिमांड है। अब नई संपत्तियों को मिलाकर एक से डेड़ करोड़ रुपए नया टैक्स जनरेट होगा।

भालीवाड़ा जलाशय पर संकट: मोटरों की भरमार से जलस्तर में लगातार गिरावट

सिवनी/भालीवाड़ा कुरई के ग्राम भालीवाड़ा स्थित जलाशय में जल संकट गहराता जा रहा है। जलाशय में लगभग 75 स्थाई व अस्थाई मोटर पम्प लगे होने से पानी का स्तर तेजी से घट रहा है। वर्तमान में जलाशय में मात्र लगभग 3 फीट पानी शेष है। इसके बावजूद भी विद्युत मोटर पम्प लगातार लगातार जलाशय से पानी निकाला जा रहा है। मछुआ मांझी समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि जलाशय में अब केवल 1 से 2 दिन का पानी ही शेष बचा है। समिति से जुड़े लगभग 130 महिला-पुरुषों की आजीविका मछली पालन पर निर्भर है। जलाशय में पानी की कमी के कारण मछलियों के मरने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बड़ी बात यह है कि समिति द्वारा तहसीलदार, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायत एवं बादलपार पुलिस चौकी में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विद्युत विभाग ने बनाया पंचनामा विद्युत वितरण केंद्र बादलपार, सिवनी ग्रामीण तथा ग्राम पंचायत सारसडोल के सरपंच एवं सचिव की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया। जलाशय में 50 से अधिक मोटर पम्प संचालित पाए गए। बताया जाता है कि बादलपार विद्युत वितरण केंद्र से 3 स्थाई एवं 13 टीसी कनेक्शन एवं सिवनी ग्रामीण क्षेत्र से 31 विद्युत मोटर पम्प चल रहे हैं। खुले तार दे रहे हादसे को न्योता जलाशय में लगे कुछ मोटरों में खुले तार होने से पानी में करंट फैलने का भी खतरा बना हुआ है, जिससे जान-माल की हानि की आशंका व्यक्त की जा रही है। लोगों का कहना है कि इस पर प्रशासन को तत्काल ध्यान देना चाहिए। कलेक्टर से कर चुके हैं लिखित शिकायत ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव ने बताया कि जल संकट, मछुआ मांझी समिति की आजीविका और मवेशियों के लिए पेयजल की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है। वहीं किसानों का कहना है कि उन्होंने सिंचाई एवं विद्युत विभाग से विधिवत कनेक्शन प्राप्त किए हैं। मछुआ मांझी समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जलाशय से विद्युत मोटर पम्प नहीं हटाए गए तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसानों को नहर के माध्यम से सिंचाई करने से कभी नहीं रोका गया, लेकिन नहर से नीचे का पानी जलाशय में आ जाने के बाद भी लगभग 50 मोटर पम्पों का संचालन समझ से परे है। उनका कहना है कि जलाशय में अभी भी प्रर्याप्त पानी है जिससे मछलियां जीवित रह सकती हैं, बशर्ते पानी की निकासी तत्काल रोकी जाए।

डॉ. यादव अशोकनगर के करीला धाम मेले में शिरकत करेंगे, विकास कार्यों का करेंगे उद्घाटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव अशोकनगर के करीला धाम मेले में होंगे शामिल विकास कार्यों का करेंगे लोकार्पण-शिलान्यास भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अशोकनगर जिले की बहादुरपुर तहसील के ग्राम करीला में रंगपंचमी पर आयोजित होने वाले मेले में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस अवसर पर माता जानकी के दर्शन कर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित स्व-सहायता समूहों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन और विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। करीला धाम श्रृद्धालुओं की आस्था का केन्द्र अशोकनगर जिले की बहादुरपुर तहसील की ग्राम पंचायत जसैया के ग्राम करीला में प्रतिवर्ष रंगपंचमी पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह मेला 7 मार्च से 9 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। माँ जानकी करील के ऐसे घने जंगल में ऋषि बाल्मीकी के आश्रम में लवकुश के साथ रहीं, इसलिए इसे करीला कहा गया। मेले में लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गये हैं। माँ जानकी के दर्शन कर लाखों श्रद्धालुओं लेते हैं आर्शीवाद रंगपंचमी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का करीला धाम आना प्रारंभ हो जाता है। रंगपंचमी के दिन व रात में लाखों श्रद्धालु माँ जानकी के मंदिर में शीश नवाते हैं तथा दर्शन लाभ लेकर आर्शीर्वाद प्राप्त करते हैं। मन्नतें पूरी होने पर हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर राई नृत्य करवाते हैं। करीला के मुख्य मंदिर में माँ जानकी के साथ महर्षि वाल्मिीकि व लव-कुश की प्राचीन प्रतिमाएँ स्थापित हैं। रंगपंचमी पर विशेष रूप से वाल्मीकि गुफा के कपाट खोले जाते हैं। माँ जानकी दरबार की भभूति से फसलों के होते है रोग दूर माँ जानकी माता के दरबार पर जो श्रद्धालु आते हैं, वे दर्शन लाभ लेकर माँ जानकी दरबार की भभूति अपने साथ ले जाते हैं। इस भभूति को फसल के समय खेतों में फसलों पर छिड़का जाता है। यदि फसल में इल्ली लग जाती है तो भक्तजन माँ के दरबार की भभूति खेतों में डालते हैं। लोगों की मान्यता है कि इस भभूति से फसलों में लगे रोग एवं इल्ली दूर हो जाती है। राई नृत्य की रहती है धूम, नृत्यांगनाओं द्वारा किया जाता राई एवं बधाई नृत्य करीला धाम में मान्यता है कि जिसके सन्तान न हो वह यहां आकर मन्नतें मांगे तो उसकी मुराद माँ जानकी पूरी करती हैं। श्रृद्धालु माँ जानकी के दरबार में श्रृद्धा की प्रसादी अर्पित कर मन्नतें मांगते हैं। मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु यहां आकर अपनी श्रृद्धानुसार राई नृत्य करवाते हैं। क्षेत्र में यह लोकोक्ति प्रचलित है कि लव व कुश के जन्म के बाद माँ जानकी के अनुरोध पर महर्षि वाल्मिीकि ने उनका जन्मोत्सव बडी धूम-धाम से मनाया था, जिसमें स्वर्ग से उतरकर अप्सराएँ आई थी तथा उन्होंने यहां नृत्य किया था। वही जन्मोत्सव आज भी रंगपंचमी के अवसर पर यहां मनाया जाता है। उसी उत्सव में हर वर्ष सैकडों नृत्यांगनाएँ यहां राई नृत्य प्रस्तुत करती हैं। नृत्यांगनाएँ ओढ़नी से घूंघट डाले नगाड़ों की गूंज एवं मृदंग की थाप पर लम्बे घेर वाले लहंगे एवं पैरों में घुंघरू की खनखनाती आवाज पर मनमोहक अदाओं के साथ रातभर नृत्य करती हैं। ऐसा लगता है मानो अप्सराएँ जमीन पर उतरकर जन्मोत्सव की खुशी मना रही हों। भोर होने पर नृत्यांगनाओं द्वारा प्रस्तुत बधाई नृत्य के साथ मेले का समापन होता है।  

भवि‍ष्‍य में उज्जैन में भी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के हॉकी खिलाड़ी होंगे तैयार: मुख्यवमंत्री डॉ. यादव

उज्‍जैन खेलों का हब बनने की ओर है अग्रसर : मुख्यवमंत्री डॉ. यादव स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा में बनेगा अन्तर्राष्ट्रीय स्‍तर का हॉकी सिन्‍थेटिक टर्फ भवि‍ष्‍य में उज्जैन में भी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के हॉकी खिलाड़ी होंगे तैयार प्रयास करेंगे कि 2030 में होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के मैच हो उज्जैन में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने नानाखेडा स्‍टेडियम में 48.71 करोड़ रुपए की लागत के सिन्थेटिक हॉकी टर्फ एवं अन्‍य निर्माण कार्यों का किया भूमि-पूजन उज्जैन मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान  महाकालेश्‍वर और  गोपाल कृष्‍ण की हम सभी पर विशेष कृपा है। उनके आशीर्वाद से आज उज्‍जैन और पूरे प्रदेश के खिलाडियों को सौगात मिलने जा रही है। स्‍पोर्टस कॉम्‍प्‍लेक्‍स में निरंतर उज्‍जैन में विकास के कार्य हो रहे है। खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम है। खेल अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को उज्जैन में स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा स्‍टेडियम परिसर में 48.71 करोड रुपए की लागत से बनने वाले अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के सिन्‍थेटिक हॉकी टर्फ और पवेलियन दर्शक दीर्घा के निर्माण कार्य के भूमि- पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कही। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है एवं विभिन्न जिलों में नए स्टेडियम, खेल परिसर एवं प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उक्त निर्माण कार्य से उज्जैन धीरे-धीरे खेलों का हब बनने की ओर अग्रसर है एवं भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होंगे। स्‍व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया खेल परिसर नानाखेडा स्‍टेडियम को देखकर विदेशों में स्थित सर्वसुविधायुक्‍त स्‍टेडियम का स्‍मरण होता है। क्षीर सागर स्‍टेडियम में देश के अन्‍य शहरों के हॉकी खिलाडी आकर प्रदर्शन करते थे। अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुसार यहां हॉकी सिन्‍थेटिक टर्फ की आवश्‍यकता थी जो निकट भवि‍ष्‍य में शीघ्र ही पूर्ण होने जा रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि वर्ष 2030 में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में इस स्‍टेडियम में अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के मैच का आयोजन करवाया जाए। हम सभी ने यह संकल्‍प लिया था कि प्रतिभाशाली खिलाडियों को उनके हुनर के प्रदर्शन के लिए सर्वसुविधायुक्‍त स्‍टेडियम बनाकर दिया जाए। हॉकी पेवेलियन, एथलेटिक्स पेवेलियन, हॉकी फील्ड के निर्माण साथ-साथ नानाखेडा स्‍टेडियम परिसर में सड़क निर्माण, पार्किंग, कंपाउंड वॉल इत्यादि कार्य भी सम्मिलित होंगे। उज्जैन को खेल मैदानों की सौगाते मिल रही है। इसमें सबसे पहले खेल मैदान हेतु 8.71 हेक्टयर (21.77 एकड़) भूमि खेल विभाग एवं खिलाड़ियों की दिलवाई गई। उसके बाद एथलेटिक सिंथेटिक्स ट्रैक जो 7.22 करोड़, लॉब टेनिस सिन्‍थेटिक मैदान एवं ग्रास से निर्मित फुटबॉल मैदान, राशि रू. 11.43 करोड़ से निर्मित स्व. राजमाता सिंधिया बहुउद्देशीय खेल परिसर जिसमें आधुनिक रूप से निर्मित शूटिंग रेंज, बेडमिंटन हॉल, मल्लखंब, जिम्नेशियम हॉल जिसमें 1.50 करोड़ के उपकरण की सौगात शहरवासियों को दी गयी हैं। प्रदेश में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियाँ स्थापित की गई हैं। इसी का परिणाम है कि जहां पूर्व वर्षों में एशियन गेम्स और ओलंपिक गेम्स में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी मात्र सहभागिता कर पाते थे, किन्तु वर्तमान में हमारे खिलाड़ी न केवल एशियन गेम्स बल्कि ओलंपिक गेम्स में भी पदक अर्जित कर प्रदेश को गौरवान्वित कर रहे हैं। उज्‍जैन से निकलने वाले खिलाडी राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदर्शन करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में हासामपुरा में भी स्‍टेडियम बनकर तैयार होगा। यहां कनेक्टिविटी के लिए फोर लेन मार्ग भी बनाए जा र‍हे है जिससे गांव-गांव के प्रतिभाशाली खिलाडियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्‍त होगा। वर्तमान में नजरअली कंपाउंड में बनाए गए स्‍वीमिंग पूल और अन्‍य प्रमुख स्‍वीमिंग पूल के रख-रखाव के लिए खेल विभाग को हस्‍तांतरित किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने सभी को नए सिन्‍थेटिक टर्फ की बधाई दी। साथ ही सभी को रंगपंचमी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी मिलकर हर्षोल्‍लास और आनंद के साथ पर्व मनाए। सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि हम सबके लिए आज बड़े हर्ष का विषय है कि नानाखेड़ा स्‍टेडियम खेल परिसर में एक और नई सौगात शहरवासियों को मिलने वाली है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव खेल के क्षेत्र में भी उज्‍जैन का निरंतर विकास कर रहे है। प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेलों इंडिया कार्यक्रम प्रारंभ किया है। पहले छोटे शहरों, कस्‍बों और गांवों के खिलाडियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर कम ही मिला करते थे। खेलों इंडिया कार्यक्रम ने इन्‍हें अपनी प्रतिभा को सभी के समक्ष प्रदर्शित करने का एक सशक्‍त प्‍लेटफॉर्म प्रदान किया है। हमारे खिलाडी अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन कर मेडल ला रहे है। हॉकी हमारा राष्‍ट्रीय खेल है। इसके साथ अन्‍य खेलों जैसे बास्‍केटबॉल, फुटबॉल, तिरंदाजी को भी बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने हॉकी विश्‍वकप में उत्‍कृट प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की महिला खिलाडियों को एक-एक करोड़ रुपए की राशि से पुरस्‍कृत किया है। सांसद  फिरोजिया ने बतौर जिला हॉकी ऐसोसिएशन के अध्‍यक्ष के रूप में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया। राज्‍यसभा सांसद  बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के विशेष प्रयासों से आज यह कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। हॉकी के खिलाडियों के लिए निश्चित रूप से यह एक बहुत बडी सौगात है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव की मंशा है कि हॉकी के खिलाडी राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अग्रणी बने। खेलों के माध्‍यम से प्रतिभाशाली खिलाडी देश का नाम विश्‍व में रौशन करें। पूर्व विधायक  राजेन्द्र भारती ने कहा कि खिलाडियों की अपेक्षाओं और सपनों को साकार करने का कार्य मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के विशेष प्रयासों से संपन्‍न हुआ है। निश्चित रुप से उज्‍जैन से भी मेजर ध्‍यानचंद जैसे खिलाडी निकलेंगे। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के प्रति‍आभार व्‍यक्‍त किया। इस अवसर पर नगर निगम अध्‍यक्ष मती कलावती यादव जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन  ज्‍वलंत शर्मा ने किया और आभार प्रदर्शन संचालक खेल एवं युवा कल्‍याण  अंशुमन यादव द्वारा किया गया। … Read more

राष्ट्रपति पद का अपमान किया ममता बनर्जी ने: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आरोप

राष्ट्रपति पद का अपमान किया सुश्री ममता बनर्जी ने : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राष्ट्रपति पद का अपमान किया ममता बनर्जी ने: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आरोप डॉ. यादव ने ममता बनर्जी पर लगाया राष्ट्रपति पद का अपमान करने का आरोप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कड़ी निंदा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल प्रवास के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी द्वारा जो अमर्यादित व्यवहार किया गया है जो निंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र के सर्वोच्च और प्रतिष्ठित राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और ऐसे समय में जब राष्ट्रपति उनके राज्य के दौरे पर हैं, तब उनको राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्तित्व की गरिमा का पूरा ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे हालात बनाना, जिसमें दुनिया में हमारे राष्ट्रपति के पद का अपमान होता हो, यह किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। मैं इसकी कटु शब्दों में निंदा करता है। आश्चर्य की बात यह है कि इसको हल्की राजनीति का हिस्सा बनाते हुए स्थानीय और दलीय राजनीति में घसीटने का कृत्य भी हुआ है जो घृणित मानसिकता का उदाहरण है। मैं इसकी निंदा करता हूं। इसके लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को माफी माँगना चाहिए।

डॉ. अजय खरे के 12वें स्मृति व्याख्यान का आयोजन भोपाल में हुआ

जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश(संबद्ध जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया) भोपाल में आयोजित हुआ डॉ. अजय  खरे का 12वां स्मृति व्याख्यान  जन स्वास्थ्य को केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता से जोड़कर देखने की जरूरत: सुनील कौल भोपाल  7 मार्च 2026 को भोपाल में 12वां डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, टी.टी. नगर, भोपाल में जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश और मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस वर्ष के स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कौल थे, जिन्होंने “स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक: स्वास्थ्य और चिकित्सा पर पुनर्विचार” विषय पर व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय खरे की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो जन-स्वास्थ्य और विज्ञान आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे थे। इस अवसर पर जन स्वास्थ्य सम्मान 2025 भी प्रदान किए गए जिसकी घोषणा डॉक्टर अनंत भान द्वारा की गई। जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिवंगत डॉ. सी. एम. गुलाठी को मरणोपरांत विशेष जन स्वास्थ्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने दवाओं और दवा नीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था। इसके साथ ही डॉ. सी. सत्यामाला, वरिष्ठ जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, तथा विवेक पवार, जन स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यकर्ता, को स्वास्थ्य और उससे जुड़े सामाजिक कारकों पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. सुनील कौल ने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल इलाज के दायरे में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि पानी पर टैक्स लगाने की सोच विकसित होती है तो वह दिन दूर नहीं जब हवा पर भी टैक्स लगाया जाने लगे। उन्होंने कहा कि जब राजनीति खराब होती है तो उसका सीधा असर जन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने डॉ. अनुराग भार्गव द्वारा टीबी (तपेदिक) पर किए गए महत्वपूर्ण शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने टीबी और भूख के बीच के संबंध को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया। आज पूरी दुनिया यह मानती है कि दवा के साथ-साथ पर्याप्त और पोषक भोजन भी टीबी के इलाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आज भी देश में लगभग 4 लाख लोग हर साल टीबी से मर रहे हैं। पहले जहां टीबी से मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य था, आज हम केवल लगभग 25 प्रतिशत कमी ही हासिल कर पा रहे हैं, जबकि टीबी की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य में लोगों को बचाने के लिए केवल स्वास्थ्य बजट ही नहीं, बल्कि पोषण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समानता जैसे अन्य कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पैसों का खेल बढ़ता जा रहा है, जिसका उदाहरण नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में दिखाई देता है। “हम जिस रास्ते पर जा रहे हैं, वह भटकाव का रास्ता है,” उन्होंने कहा। मध्यप्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आंगनवाड़ी मॉडल पर्याप्त है या उसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पहले 1000 दिनों (गर्भधारण से दो वर्ष तक) के पोषण और देखभाल के मॉडल पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि देश के बजट का बड़ा हिस्सा गृह मंत्रालय और सेना पर खर्च होता है, जबकि सामाजिक क्षेत्र और जन स्वास्थ्य पर पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उन्होंने एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट बताया। उनके अनुसार सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश में हर साल लगभग 35 हजार महिलाएं दहेज या घरेलू हिंसा के कारण जलकर मर जाती हैं, जबकि गैर सरकारी संस्थाओ के अनुसार करीब 75 हजार महिलाएं दहेज या घरलू हिंसा के कारण जलने से अपनी जान गंवाती हैं। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु को रोकने के प्रयासों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने असम में किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि 58 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ किसी न किसी प्रकार की हिंसा की है। इसलिए हिंसा को केवल महिला का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और जन स्वास्थ्य का मुद्दा मानना होगा। उन्होंने कहा कि घृणा, जातिवाद और सांप्रदायिक हिंसा भी जन स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। 2020 में अमेरिका की एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था ने भी घृणा को जन स्वास्थ्य का मुद्दा माना है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल विचार सभी के लिए समान उपचार का था, लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि “अगर आपके पास पैसा नहीं है तो इलाज भी नहीं मिलेगा।” इससे अमीर और गरीब दोनों ही असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग आधारित भेदभाव से ऊपर उठना होगा और लोगों की स्वायत्तता और सम्मान को मजबूत करना होगा। जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने एक बड़ा जन स्वास्थ्य संकट बताते हुए कहा कि हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कई अध्ययन बताते हैं कि आने वाले वर्षों में इनमें भारी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयारी करनी चाहिए।” उन्होंने विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आशा कार्यकर्ताओं को दवाएं देने और प्राथमिक उपचार की अधिक ट्रेनिंग दी जा सकती है, ताकि संकट की स्थिति में समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं टिकाऊ बन सकें। दवाओं की कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दवाओं की निर्माण लागत से कई गुना अधिक कीमत पर बिक्री होती है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था में असमानता को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसमें एंथ्रोपोलॉजी, मनोविज्ञान और अन्य सामाजिक विज्ञानों के विशेषज्ञों की भी भागीदारी जरूरी है। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा— "एक जिंगई ढूंढ लाओ, वो भीगी हुई चिंगारी ढूंढ लाओ।" कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रजनीश जोशी ने कहा कि हर … Read more

मध्यप्रदेश में बढ़ा खसरे का खतरा: 4 जिलों में 12 केस मिले, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर संक्रामक बीमारी खसरे (मीजल्स) ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। फरवरी 2024 के बाद, अब 2026 में प्रदेश के चार जिलों- अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर में खसरे के 12 नए मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर दाने और खांसी के लक्षणों वाले मरीजों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2024 में मैहर में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब मिल रहे नए केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित जिलों की स्थिति: कहां कितने मरीज? स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) ने प्रभावित गांवों का दौरा कर सैंपल लिए, जिसकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है:     बुरहानपुर (बरौली गांव): यहां स्थिति सबसे गंभीर है, जहां भेजे गए सभी 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं। संक्रमितों की उम्र 2 से 25 वर्ष के बीच है।     दतिया (आगोरा गांव): यहां 8 में से 3 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां संक्रमितों की आयु सीमा 0 से 40 वर्ष तक है।     शिवपुरी (गुदर गांव): खनियाधाना क्षेत्र में 5 में से 3 केस पॉजिटिव आए हैं (उम्र 4 से 15 वर्ष)।     अलीराजपुर (कांडा-चुलिया): जोबट क्षेत्र में 6 में से 1 केस पॉजिटिव मिला है। संक्रमण फैलने का मुख्य कारण 'टीकाकरण में चूक' खसरे के दोबारा उभरने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।     विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलने के कारण बच्चों का नियमित टीकाकरण चक्र टूट जाता है।     महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने से कई बच्चे वैक्सीन की अनिवार्य डोज से वंचित रह गए थे। बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है खसरा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा न केवल श्वसन तंत्र पर हमला करता है, बल्कि बच्चों में अंधेपन (Blindness) का भी एक बड़ा कारण है। दुनिया भर में हर साल करीब 60 हजार बच्चे इसके कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। प्रमुख लक्षण और जटिलताएं     तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते।     उल्टी, डायरिया और गंभीर डिहाइड्रेशन।     जटिल मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis)। बचाव और सरकारी प्रयास     नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य संचालनालय ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है।     मरीजों को लक्षणों के आधार पर दवाइयां और विटामिन-ए सॉल्यूशन दिया जा रहा है। विटामिन-ए की दो डोज संक्रमण की गंभीरता को कम करने में सहायक होती हैं।     विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (MR) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाना ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी तरीका है।     ग्रामीणों और शिक्षकों को सलाह दी गई है कि संक्रमित मरीज को अलग (Isolate) रखें और साफ-सफाई व पोषण का विशेष ध्यान दें।

भोपाल ट्रैफिक अपडेट: ज्योति टॉकीज से बोर्ड ऑफिस रोड पर 3 माह तक निर्माण, डायवर्जन लागू

भोपाल भोपाल में ज्योति टॉकीज चौराहा से बोर्ड ऑफिस चौराहा के बीच आवाजाही करने वाले वाहन चालकों को आने वाले तीन महीनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। करीब सात महीने पहले ज्योति टॉकीज चौराहे के पास नाले की दीवार क्षतिग्रस्त होने से सड़क का एक हिस्सा धंस गया था, जिसकी अब मरम्मत की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) रंगपंचमी के बाद इस हिस्से पर मरम्मत कार्य शुरू करेगा। फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से सड़क के एक हिस्से पर बैरिकेडिंग कर दी गई है, जिससे ज्योति टॉकीज से बोर्ड ऑफिस की ओर जाने वाली लेन आंशिक रूप से बंद कर दी गई है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। इस परियोजना पर लगभग 90 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। विभाग के इंजीनियरों के अनुसार पूरा निर्माण कार्य करीब तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से डायवर्जन प्लान भी तैयार किया गया है। ट्रैफिक व्यवस्था बनी चुनौती यह मार्ग भेल, होशंगाबाद रोड, एमपी नगर और बोर्ड ऑफिस क्षेत्र से न्यू मार्केट व मानसरोवर कॉम्प्लेक्स जाने वालों के लिए प्रमुख रास्ता है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इस सड़क से हर घंटे लगभग 8 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है। 2.8 मीटर गहराई तक बनेगी नई नाले की दीवार सड़क के नीचे से गुजर रहे नाले की दीवार में दरार आने के कारण यह हिस्सा धंस गया था। अब सड़क को खोदकर करीब 2.8 मीटर गहराई तक नाले की नई दीवार बनाई जाएगी। निर्माण कार्य दो चरणों में किया जाएगा। पहले बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज की ओर जाने वाली लेन के नीचे नाले की मरम्मत होगी, इसके बाद दूसरी दिशा की सड़क का काम किया जाएगा। व्यापारियों से फिर होगी चर्चा एडिशनल डीसीपी ट्रैफिक संजय पवार के मुताबिक एमपी नगर जोन-1 और जोन-2 क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए व्यापारियों से पहले भी बातचीत की जा चुकी है। जरूरत पड़ने पर दोबारा बैठक कर सड़क किनारे खड़े वाहनों और अतिक्रमण को हटाया जाएगा। साथ ही व्यापारियों के वाहनों को मल्टीलेवल पार्किंग में पार्क करने की योजना भी है। इन इलाकों में लग सकता है जाम निर्माण कार्य के दौरान एमपी नगर जोन-1, एमपी नगर जोन-2, प्रगति पेट्रोल पंप चौराहा, गुरुदेव गुप्त चौराहा, चेतक ब्रिज, गौतम नगर, रचना नगर, मैदा मिल क्षेत्र, पर्यावास भवन रोड और अरेरा हिल्स जैसे इलाकों में ट्रैफिक दबाव बढ़ सकता है। भारी वाहनों के लिए डायवर्जन जब बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज की ओर जाने वाली सड़क पर काम होगा, तब भारी वाहनों को बोर्ड ऑफिस से डीबी सिटी मॉल के सामने से गुरुदेव गुप्त चौराहा की ओर मोड़ा जाएगा। यहां से वाहन एमपी नगर जोन-1 होते हुए होटल रेसिडेंसी के सामने से ज्योति टॉकीज पहुंचेंगे और आगे चेतक ब्रिज की ओर जा सकेंगे।  

मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती प्रक्रिया हुई डिजिटल, एजुकेशन पोर्टल 3.0 से घर बैठे होगा दस्तावेज सत्यापन

भोपाल प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अब शिक्षक भर्ती परीक्षा में पात्र घोषित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन ऑनलाइन किया जाएगा। इस नई व्यवस्था की शुरुआत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से की जाएगी। इसके लिए विभाग ने एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर एक विशेष मॉड्यूल तैयार कर लिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। पोर्टल पर अपलोड करने होंगे दस्तावेज नई व्यवस्था के तहत चयनित अभ्यर्थियों को अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर अपलोड करने होंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारी पोर्टल के माध्यम से ही इन दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और अभ्यर्थियों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 13 हजार पदों के लिए जारी हुई मेरिट सूची हाल ही में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा के लगभग 13 हजार पदों के लिए मेरिट सूची जारी की है। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है। विभाग की योजना है कि इसी महीने से पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन एजुकेशन पोर्टल-3.0 के माध्यम से शुरू कर दिया जाए। इससे उम्मीद है कि ग्रीष्मावकाश के बाद सरकारी स्कूलों को नए शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किए जाने की संभावना है।   डीईओ कार्यालय में नहीं करना पड़ेगा इंतजार अब तक शिक्षक चयन परीक्षा में मेरिट सूची में शामिल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए संभागीय कार्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में उपस्थित होना पड़ता था। इस प्रक्रिया में कई बार अभ्यर्थियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उन्हें काफी असुविधा होती थी। इसके अलावा कुछ मामलों में दस्तावेज सत्यापन में गड़बड़ी की शिकायतें भी सामने आई थीं। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद अभ्यर्थी घर बैठे ही अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे और अधिकारियों द्वारा उनकी जांच ऑनलाइन ही की जाएगी। इस तरह पूरी होगी ऑनलाइन प्रक्रिया नई प्रणाली के तहत पात्र अभ्यर्थी एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर लॉगिन कर निर्धारित मॉड्यूल में अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर अपलोड करेंगे। इसके बाद विभागीय अधिकारी पोर्टल के माध्यम से इन दस्तावेजों की जांच कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। यदि किसी दस्तावेज में त्रुटि पाई जाती है या अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होती है, तो अभ्यर्थियों से ऑनलाइन ही सुधार या अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति आदेश भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बन सकेगी।