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रंगों के बीच दहशत: विश्वविद्यालय में मधुमक्खियों ने विद्यार्थियों पर बोला हमला

शहडोल पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में विद्यार्थी होली का उत्सव मना रहे थे, उसी दौरान अफरा-तफरी मच गई। रंग-गुलाल के बीच डीजे की धुनों पर झूम रहे छात्र-छात्राओं पर अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला बोल दिया। जान बचाने के लिए छात्र परिसर में इधर-उधर भागते नजर आए। वहीं बीच किसी बात को लेकर छात्रों के दो गुट भी आपस में भिड़ गए। होली के उत्सव बीच हंगामे और भगदड़ का यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में होली का उत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा था। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला बोल दिया। मधुमक्खियों के हमले से परिसर में भगदड़ जैसे हालात बन गए। जान बचाने के लिए छात्र इधर-उधर भागते नजर आए। कई छात्र-छात्राएं घबराकर जमीन पर गिरते-पड़ते भी दिखे। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने नहीं आई है।   मामला यहीं नहीं थमा, होली खेलने के दौरान किसी बात को लेकर छात्रों के दो गुट आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते कहासुनी धक्का-मुक्की में बदल गई, कुछ देर तक परिसर में तनाव का माहौल बना रहा। बाद में अन्य छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन की दखल के बाद स्थिति को संभाला गया। विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर खड़े हो रहे सवाल     गौरतलब है कि हाल ही में विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह दूषित और बदबूदार भोजन को लेकर भी चर्चा में रहा था। अब होली जश्न के दौरान मधुमक्खियों का हमला और छात्रों के बीच झड़प ने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसारित वीडियो के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और लोग प्रशासनिक लापरवाही पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि किसी गंभीर घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कैंपस की सुरक्षा और आयोजन प्रबंधन को लेकर जवाबदेही तय होना अब जरूरी माना जा रहा है।

डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, रकम क्रिप्टो में बदली

ग्वालियर भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त चिकित्सक 89 वर्षीय नारायण महादेव टिकेकर को 24 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने के नाम पर 2.52 करोड़ रुपये ठगने के मामले में ग्वालियर पुलिस ने दिल्ली से चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। साइबर ठगों ने इनके बैंक खातों में ठगी के 30 लाख रुपये ट्रांसफर कराए थे। आरोपितों ने एटीएम कार्ड के जरिए राशि निकालकर बिचौलिये को सौंपी और इसके बदले 1.70 लाख रुपये कमीशन लिया। एक आरोपित का भाई दिल्ली पुलिस में दारोगा है। वह ग्वालियर पहुंचा, जहां उसे पता चला कि उसका भाई ही साइबर ठगी गिरोह को बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराता था। पुलिस की जांच में क्या पता चला पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, असम और बंगाल सहित अन्य राज्यों के करीब 500 बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। क्राइम ब्रांच ने मोहित मिश्रा (बी-40, चाणक्य पैलेस-1, स्ट्रीट नंबर 48, जनकपुरी, नई दिल्ली), राहुल प्रजापति (राजद-150, धरमपुर प्रथम, नजफगढ़, नई दिल्ली), हरीश यादव (हाउस नंबर 49, ब्लॉक धरमपुरा एक्सटेंशन, नजफगढ़, नई दिल्ली) और साहिल फिरोज खान (ए-5/175, एक्सटेंशन पार्ट वन, मोहन गार्डन, उत्तम नगर, नई दिल्ली) को दिल्ली से गिरफ्तार किया। ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार, इस मामले में क्रिप्टो ट्रेडिंग भी की गई। यूएसडीटी के जरिए ठग रकम को क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेज देते थे। आरोपित टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े थे, जहां से म्यूल खाते उपलब्ध कराने का नेटवर्क संचालित होता था।  

सुभरंजन सेन बने MP के PCCF, लंबे कार्यकाल के साथ जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी

भोपाल भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुभरंजन सेन मध्य प्रदेश के नए वन बल प्रमुख नियुक्त किए गए हैं। वरिष्ठता में 1989 बैच के आईएफएस अधिकारी एचएयू खान और 1990 बैच के बिभाष ठाकुर को पीछे छोड़ 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी सेन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहली पसंद बन गए, सेन अभी मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक हैं। वन बल प्रमुख वीएन अंबाडे 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके सेवानिवृत्ति के एक सप्ताह पहले से नए वन बल प्रमुख की तलाश की जा रही थी। इनमें खान, ठाकुर और सेन इन तीन नामों का पैनल बनाकर वन विभाग ने मुख्यमंत्री को स्वीकृति के लिए भेजा था। इससे पहले मंत्रालय में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में नए वन बल प्रमुख के चयन के लिए बैठक की गई थी।   नजरअंदाज कर जूनियर को सौंपी कमान वन विभाग में वन बल प्रमुख सबसे वरिष्ठतम अधिकारी को ही बनाया जाता है। इस हिसाब से वन विकास निगम के प्रबंध संचालक एचयू खान और उनके बाद पीसीसीएफ अनुसंधान और विस्तार बिभाष कुमार ठाकुर वन बल प्रमुख बनने की वरिष्ठता रखते हैं। लेकिन पहली बार वरिष्ठता को नजरअंदाज कर खान और ठाकुर से जूनियर सेन को वन बल प्रमुख की कमान सौंपी है। अब चूंकि सेन की नियुक्त हो गई है तो ठाकुर की वर्तमान पदस्थापना में बदलाव किया जा सकता है, उन्हें पीसीसीएफ अनुसंधान और विस्तार से हटाना पड़ेगा। वरिष्ठता के कारण उन्हें लघु वनोपज संघ या वन विकास निगम के प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा सकता है। समीता राजौरा बनाई जा सकती हैं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक वरिष्ठता के आधार पर 1992 बैच की आईएफएस अधिकारी समीता राजौरा मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक बनाई जा सकती हैं। वह वन्यप्राणी शाखा में काम करने की इच्छुक भी हैं। वर्तमान में वह मप्र राज्य लघुवनोपज संघ की प्रबंध संचालक हैं। इधर, राज्य वन विकास निगम की प्रबंध संचालक एवं एसपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला को पीसीसीएफ के पद पर पदोन्नत कर दिया गया है।

एमपी में कांग्रेस की नई रणनीति, मिशन 2028 के तहत इंफ्लूएंसर्स बनाएंगे माहौल

भोपाल संगठन सृजन अभियान के साथ ही जन-जन तक पहुंच बढ़ाने के लिए कांग्रेस नए-नए प्रयोग कर रही है। इसमें तकनीक के बदलते दौर की दृष्टि से सोशल मीडिया के माध्यम से भी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने की रणनीति है। इसके लिए बड़ा प्रयास यह कि पार्टी सोशल मीडिया इंफ्लूएंसरों का सहयोग लेने जा रही है। इनकी संख्या हजारों में होगी। शुरुआत में लगभग 250 को चिह्नित भी कर लिया गया है। यह ऐसे लोग हैं जिनके सोशल मीडिया में बड़ी संख्या में फालोअर्स हैं। लेखन अच्छा है, कांग्रेस विचारधारा की ओर झुकाव है। ये इंफ्लूएंसर अपने वाल, हैंडल आदि पर लिखेंगे। कांग्रेस के बड़े नेताओं के जन्मदिवस, पुण्यतिथि, बड़े आयोजन, चुनाव, पार्टी की रीति नीति, त्वरित मुद्दों पर लिखेंगे। पार्टी ने ऐसे लोगों को खोजने के लिए कई महीने तक उनके सोशल मीडिया पोस्ट देखे। इसमें सामने आया कि उनकी पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों की प्रतिक्रियाएं आती हैं। हर जिले में रहेगी इंफ्लूएंसरों की टीम समसामयिक विषयों और राजनीति की समझ भी अच्छी है। यह भी पता चला कि उनका झुकाव कांग्रेस की तरफ है, ऐसा नहीं है तो भी भाजपा विरोधी हैं। इसके बाद पार्टी ने इन लोगों से संपर्क किया और तैयार किया। हर जिले के लिए पांच से 10 इंफ्लूएंसरों की टीम रहेगी। विधानसभा चुनाव के पहले तक इनकी संख्या बढ़ाने का भी लगातार प्रयास किया जाएगा। प्रदेश संगठन इनके सतत संपर्क में रहेगा। कोशिश की जाएगी की सभी अलग-अलग विषयों पर अपनी बात पोस्ट करें। कांग्रेस में पहली बार इस तरह का प्रयोग हो रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए पार्टी ग्राम पंचायत स्तर तक सोशल मीडिया का नेटवर्क तैयार कर रही है। 25 सदस्यों वाली पंचायत समितियां में एक व्यक्ति सोशल मीडिया के लिए भी काम करेगा। उसके पास बूथ स्तर तक सभी मतदाताओं का डाटा रहेगा। इसी तरह से शहरी क्षेत्रों में मोहल्ला स्तर तक भी सोशल मीडिया का प्रभारी बनाया जाएगा। भाजपा भी इंफ्लुएंसरों को जोड़ रही भाजपा भी सोशल मीडिया इंफ्लुएंसरों को अपने साथ जोड़ रही है। हाल ही में भोपाल में पार्टी के सभी विधायकों के सोशल मीडिया हैंडलर्स का प्रशिक्षण हुआ था। इसमें उन्हें कहा गया था कि विधानसभा क्षेत्र, तहसील, मंडल से लेकर गांव-गांव तक जो छोटे-छोटे इंफ्लुएंसर हैं उन्हें भाजपा की विचारधारा से जोड़ा जाए, जिससे पार्टी की गतिविधियां निचले स्तर तक पहुंच सकें। इसके अतिरिक्त पार्टी के आइटी विभाग का अपना अलग नेटवर्क है।

रंजिश ने लिया हिंसक रूप, बदमाशों का उत्पात—एक आरोपी गिरफ्तार

भोपाल प्रियदर्शिनी नगर में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात पंचशील नगर के बदमाशों ने जमकर उत्पात मचाया। पुरानी रंजिश को लेकर बदमाशों ने घरों पर पथराव किया और वाहनों में तोड़फोड़ की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस ने नामजद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। डंडों से हमला और जान से मारने की धमकी टीटीनगर पुलिस के अनुसार, नर्मदा भवन के पास रहने वाले 24 वर्षीय प्रियांश खिल्लारे ने शिकायत में बताया कि 27 फरवरी की रात करीब 2:30 बजे कुछ युवक उनके घर की खिड़की पर डंडों से हमला करने लगे। बाहर निकलकर देखने पर दीपांशु सेन, छोटू उर्फ यश, बब्बू, रानू सहित अन्य युवक वाहनों में तोड़फोड़ करते दिखे और उसे जान से मारने की धमकी दी। शोर सुनकर मोहल्ले के लोग जागे तो आरोपित भाग निकले।  

कूनो बना वाइल्डलाइफ हॉटस्पॉट: 53 घड़ियाल छोड़े गए, पर्यटन को मिलेगा बूस्ट

भोपाल. कूनो नेशनल पार्क में रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो नदी में 53 घड़ियाल और 25 कछुओं को प्राकृतिक आवास में छोड़ा। कार्यक्रम कूनो नेशनल पार्क के भीतर पालपुर फोर्ट के सामने कूनो नदी तट पर आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी। मध्यप्रदेश लगातार पर्यटन के क्षेत्र में आगे मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। इस वर्ष प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कूनो जैसे संरक्षित क्षेत्र वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहे हैं। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य के तत्वावधान में आयोजित किया गया। छोड़े गए 53 घड़ियाल गेवेलियस गैंगेटिक्स प्रजाति के हैं, जिनमें 28 नर और 25 मादा शामिल हैं। वहीं 25 कछुए थ्री-स्ट्राइप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के हैं। सभी जीवों को वैज्ञानिक निगरानी और तय मानकों के अनुसार नदी में छोड़ा गया। विलुप्त हो रहे जीवों के संरक्षण के लिए काम मुख्यमंत्री ने कहा कि विलुप्त हो रहे जीवों के संरक्षण के संकल्प के साथ राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कूनो में चल रहे चीता प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू हुआ था। हाल ही में बोत्सवाना से आए 9 चीतों को छोड़ा गया है, जिससे कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो गई है।  

ग्वालियर हादसा: तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से कार घसीटती चली गई, मची अफरा-तफरी

ग्वालियर एनएच-44 पर बझेरा से कल्याणी तिराहे के बीच एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक ट्रक कार को लगभग एक किलोमीटर तक घसीटते हुए नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि कार में चार लोग सवार थे। सभी सुरक्षित हैं। घटना के दौरान हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया। इस घटना के बाद नेशनल हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

शहरों के विकास को बूस्ट, सरकार लाएगी कॉलोनी सुधार का नया मॉडल

भोपाल प्रदेश में शहरीकरण तेजी से हो रहा है। बड़े शहरों के आसपास नई-नई कालोनियां बन रही हैं। इनमें अधोसंरचना विकास से जुड़े कामों को लेकर आमतौर पर शिकायतें आती हैं। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि सभी काम एक साथ करवाए जा सकें, इसलिए जन सहयोग से काम कराए जाएंगे। इसके लिए जनभागीदारी का नया माडल लागू किया जाएगा। इसमें निकायों को विशेष फंड दिया जाएगा, जो पांच करोड़ रुपये तक हो सकता है। स्थानीय लोगों को कितनी राशि लगानी होगी, इसका निर्धारण जन प्रतिनिधियों और मैदानी अधिकारियों से परामर्श के बाद किया जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद लागू होगी योजना योजना का प्रारूप तैयार कर कैबिनेट के सामने रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने पर लागू कर दिया जाएगा। प्रदेश में मुख्यमंत्री जनभागीदारी योजना में अभी क्षेत्र के हिसाब से राशि लेने का प्रविधान है। गरीब बस्ती में 25 प्रतिशत और संपन्न व अपर मिडिल क्लास वाले क्षेत्रों में 50 प्रतिशत राशि ली जाती है। इस प्रविधान को नए सिरे से तय किया जाएगा। जनभागीदारी केवल राशि नहीं बल्कि सामग्री के रूप में भी हो सकती है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि वर्ष 2003-04 के 36 करोड़ रुपये लगाकर 150 किमी लंबाई की कांक्रीट की सड़कें बनाई गई थीं। जनभागीदारी के रूप में सीमेंट ली गई थी। निकायों की खराब आर्थिक स्थिति और विशेष फंड अब यह तय किया जा रहा है कि जो नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद जनभागीदारी से कोई भी काम करेगी, उसे विशेष फंड दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इस योजना में पचास प्रतिशत राशि की व्यवस्था निकायों को करनी होगी। यह किस रूप में होगी, इसका निर्धारण विधायक, महापौर, नगर पालिका व परिषद अध्यक्ष से चर्चा के बाद किया जाएगा। दरअसल, इस माडल को प्रभावी तरीके से लागू करने के पीछे उद्देश्य यही है कि रहवासियों को सुविधाएं मिल जाएं और निकायों पर अधिक वित्तीय बोझ भी न आए क्योंकि निकायों की आर्थिक स्थिति खराब है। कई निकायों के लिए वेतन-भत्ते बांटना ही मुश्किल हो रहा है। ये अधोसंरचना विकास के काम के लिए पूरी तरह सरकार पर निर्भर हो गए हैं, जबकि इन्हें टैक्स लगाकर वसूलने के अधिकार दिए गए हैं पर स्थिति ठीक नहीं है। एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी से सुधरेगी व्यवस्था एकीकृत टाउनशिप पालिसी के कारण स्थितियों में सुधार होगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसमें यह प्रविधान किया गया है कि जो भी टाउनशिप बनाएगा, उसे सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज, नाली, उद्यान सहित अन्य अधोसंरचना विकास से जुड़े सभी काम करने होंगे। इसके बाद ही कालोनी को पूर्णता का प्रमाणपत्र दिया जाएगा और कालोनी का हस्तांतरण निकायों को होगा।  

बल्ले-बल्ले! मध्यप्रदेश में दो दिन मनाई जाएगी होली, मिला एक्स्ट्रा अवकाश

भोपाल मध्य प्रदेश शासन ने होली के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी घोषणा की है। राज्य सरकार ने पहले से घोषित अवकाश में संशोधन करते हुए अब 4 मार्च 2026 (बुधवार) को भी सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित कर दिया है। पहली बार किसी त्योहार पर दो दिन की छुट्टी मध्य प्रदेश में पहली बार किसी त्योहार को लेकर दो दिन सरकारी छुट्टी रहेगी। 29 दिसंबर 2025 को सरकार ने 2026 के लिए घोषित अवकाशों की सूची में तीन मार्च मंगलवार को होली का सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित किया था। चूंकि, होली मनाने को लेकर अलग-अलग राय है इसलिए कर्मचारी संगठनों ने चार मार्च का अवकाश घोषित किए जाने की मांग की थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजा। 4 मार्च को भी सरकारी छुट्टी का एलान पूर्व में 29 दिसंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार केवल 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को होली का अवकाश घोषित था। अब इसे संशोधित कर 4 मार्च 2026 (बुधवार) को भी छुट्टी का दिन तय किया गया है। यह अवकाश 'निगोशिएबल इन्स्ट्रूमेन्ट्स एक्ट 1881' की धारा 25 के अंतर्गत घोषित किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह सार्वजनिक और सामान्य अवकाश की श्रेणी में आएगा। यह संशोधित अधिसूचना मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से और आदेशानुसार सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव दिनेश कुमार मौर्य द्वारा 1 मार्च 2026 को जारी की गई है शासन के इस निर्णय के बाद अब प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और बैंकों (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत) में बुधवार को भी अवकाश रहेगा । इस कदम से लोगों को होली का त्यौहार मनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसकी जानकारी समस्त विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु भेज दी गई है।  

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की जगह ओपन थिएटर बनाने की योजना, 400 करोड़ से होगा विकास

भोपाल दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में शुमार 1984 की गैस त्रासदी का साक्षी रहा भोपाल का यूनियन कार्बाइड परिसर अब नए स्वरूप में विकसित किए जाने की तैयारी में है। राज्य सरकार यहां ओपन थिएटर, रिहायशी और व्यावसायिक परिसर के साथ एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र विकसित करने की योजना बना रही है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परिसर में लगभग सात से 10 एकड़ क्षेत्र में गैस त्रासदी पीड़ितों की स्मृति में भव्य स्मारक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जनवरी को स्थल का निरीक्षण कर इस दिशा में संकेत दिए थे। हालांकि, स्मारक निर्माण का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल से लंबित है, जिसे अब नए सिरे से आगे बढ़ाया जा रहा है।   पुनर्घनत्वीकरण के तहत विकास सरकार अब इस परियोजना को पुनर्घनत्वीकरण (रीडेंसिफिकेशन) योजना के तहत विकसित करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। स्मारक निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि परिसर में प्रस्तावित आवासीय और व्यावसायिक विकास से जुटाई जाएगी। मिट्टी का दोबारा परीक्षण स्मारक निर्माण से पहले परिसर की मिट्टी का परीक्षण राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर से पुनः कराया जाएगा। करीब 10 वर्ष पूर्व भी यहां परीक्षण हो चुका है। जनवरी 2025 में हाईकोर्ट के निर्देश पर 337 टन जहरीले कचरे को पीथमपुर भेजकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया गया था। आधारभूत ढांचे पर जोर परिसर में पहले सड़क, ड्रेनेज और जल प्रदाय व्यवस्था विकसित की जाएगी। वर्तमान में यहां फैक्ट्री का लोहे का ढांचा और प्रशासनिक भवन मौजूद हैं, जिन्हें हटाया जाना है। प्रस्तावित स्मारक में संग्रहालय, कांच से सुरक्षित प्रदर्शनी स्थल और प्रशासनिक भवन शामिल होंगे, जबकि अनुसंधान केंद्र में लैब, सभागार और छात्रावास जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।