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एमपी के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अब होगी हाईटेक और प्रैक्टिकल आधारित शिक्षा, प्राचार्य तैयार करेंगे भविष्य की नर्सें

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। राज्य सरकार और एम्स भोपाल ने मिलकर एक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नर्सिंग छात्रों को आधुनिक मशीनों के संचालन और गंभीर मरीजों की देखभाल में दक्ष बनाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों को हाईटेक मेंटर के रूप में प्रशिक्षित करेंगे। वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई का ढांचा पारंपरिक है। छात्रों का अधिक समय थ्योरी पढ़ने और ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण में ही निकल जाता है। उन्हें बड़े अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों और जटिल मेडिकल केसों को नजदीक से देखने का अवसर बहुत कम मिलता है। व्यावहारिक अनुभव की यही कमी दूर करने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है। सात दिनों के प्रशिक्षण में सीखेंगे प्रबंधन और तकनीक मास्टर प्लान के पहले चरण में 24 जिलों के नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ‘एडवांस सिमुलेशन लैब’ के माध्यम से डमी (पुतलों) पर वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और कार्डियक मॉनिटर जैसे उपकरणों का अभ्यास कराया गया। साथ ही कॉलेज प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, जो अब तक केवल एम्स जैसे बड़े संस्थानों तक सीमित थीं। इस नई पद्धति के जरिए भारतीय नर्सिंग परिषद के नए ‘दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम’ को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जा सके। छात्रों को ये होगा फायदा इस पहल से छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इमरजेंसी केयर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें चलाना आ जाएगा। अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करते समय उन्हें अलग से प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हाथों-हाथ प्रैक्टिस से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मरीजों को बेहतर इलाज दे सकेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलने से उनके लिए देश के बड़े निजी अस्पतालों और विदेशों में नौकरी के अवसर भी खुलेंगे। आम नागरिकों को मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ माधवानंद कर ने कहा कि मप्र के नर्सिंग शिक्षकों और प्राचार्यों को नई तकनीकों और पाठ्यक्रमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

मध्यप्रदेश में पेंशन का बड़ा फैसला: अब अविवाहित-तलाकशुदा बेटियों के लिए खत्म हुई एज लिमिट

भोपाल प्रदेश में 50 साल बाद पेंशन नियम बदलेंगे। आश्रित विधवा, परित्याक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित पुत्रियां आजीवन परिवार पेंशन की पात्र होंगी। इसके लिए अधिकतम 25 वर्ष की आयु सीमा समाप्त होगी। आश्रितों के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जाएगी। यह न्यूनतम पेंशन और महंगाई राहत मिलाकर होगी। आश्रित बड़ी संतान चाहे वह बेटा हो या बेटी, जो बड़ा होगा, वह परिवार पेंशन का पात्र होगा। साथ ही कई प्रक्रियात्मक परिवर्तन भी प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य में चार लाख से ज्यादा पेंशनधारक प्रदेश में चार लाख से अधिक पेंशनधारक हैं। इनके लिए 1976 में पेंशन नियम बनाए गए थे। तब से भारत सरकार कई संशोधन कर चुकी है, जिन्हें प्रदेश के पेंशनरों के लिए लागू करने की मांग पेंशनर्स एसोसिएशन उठाती रही है। मुख्य सचिव अनुराग जैन जब अपर मुख्य सचिव वित्त थे, तब नियमों में परिवर्तन को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी ने समिति बनाई और नियमों में संशोधन के प्रारूप को अंतिम रूप दे दिया। सूत्रों के अनुसार पेंशन नियम में अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि आश्रित के लिए आय सीमा में वृद्धि की जाएगी। यह न्यूनतम पेंशन, जो 7,750 रुपये प्रतिमाह होती है, और महंगाई राहत जोड़कर निर्धारित होगी यानी न्यूनतम पेंशन में 55 प्रतिशत महंगाई राहत जोड़ी जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि इस सीमा के भीतर यदि आश्रित की आय है तो उन्हें भी परिवार पेंशन की पात्रता होगी। इसके साथ ही एक बड़ा परिवर्तन यह भी किया जा रहा है कि आश्रित में अविवाहित बेटी के लिए आयु सीमा का बंधन समाप्त किया जाएगा। अभी 25 वर्ष से अधिक अविवाहित पुत्री को पात्र नहीं माना जाता है। इसके साथ ही आश्रित विधवा, परित्याक्ता, तलाकशुदा बेटियां भी परिवार पेंशन के दायरे में आएंगी। विभागों के बढ़ेंगे अधिकार पेंशनर किसी भी श्रेणी का हो, अभी पेंशन रोकने के लिए प्रकरण कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजना पड़ता है। लगभग हर कैबिनेट की बैठक में ऐसे प्रकरण आते हैं। अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले में निर्णय प्रशासकीय विभाग ही लेगा। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत ही कैबिनेट के समक्ष निर्णय के लिए रखे जाएंगे।   केंद्रीय सेवा की अवधि भी जुड़ेगी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सेवा से प्रदेश में सेवा देने के लिए आने वाले कर्मचारियों की पेंशन की गणना की प्रक्रिया में भी सुधार होगा। इसमें केंद्रीय सेवा की अवधि को भी जोड़ा जाएगा। इसका स्पष्ट प्रविधान नियम में रहेगा। पेंशनर्स एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि हम 18 वर्ष से नियम में संशोधन की मांग कर रहे हैं। जो संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, वे वर्तमान समय के अनुकूल हैं।

खेलों से बदलेगा आदिवासी क्षेत्र का भविष्य, 100 करोड़ के मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को हरी झंडी

खंडवा  खंडवा के आदिवासी बहुल क्षेत्र हरसूद में प्रदेश स्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। इसमें एथलेटिक्स, इंडोर गेम्स और आउटडोर खेलों की सुविधाएं होंगी। ग्रामीण आदिवासी बच्चों को उच्च स्तर पर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलेगा। 100 करोड़ की लागत से हरसूद में स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स के निर्माण से निमाड़ क्षेत्र की पहचान खेल के क्षेत्र में बढ़ेगी।   सरकार ने दी सहमति सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बाद अफसर योजना को अमली जामा पहनाने में जुटे है। मध्य प्रदेश बिल्डिंग कारपोरेशन के इंजीनियरों ने जिले के हरसूद क्षेत्र में स्थित सेल्दामाल में भूमि का स्थली निरीक्षण के बाद डीपीआर तैयार कर रहे है। सबकुछ योजना के तहत हुआ तो जल्द निर्माण के लिए कागजी प्रक्रिया शुरु होगी। इंजीनियर मयंक राय ने बताया कि हरसूद के सेल्दामाल में स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स के लिए 30 एकड़ भूमि अलाट हो गई है। शेष 9 एकड़ भूमि अलाट की कागजी प्रक्रिया चल रही है।   खिलाड़ियों को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं प्रदेश स्तरीय स्पोर्ट कॉम्प्लेक्स में खिलाडियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसमें मुख्य रुप से प्रशिक्षण और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, इनडोर, आउटडोर कोर्ट में बैडमिंटन, टेबल-टेनिस, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, स्क्वैश के लिए कोर्ट। एथलेटिक्स ट्रैक में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक (400 मीटर)। कुश्ती, ताइक्वांडो, एरोबिक्स और वेटलिफ्टिंग के लिए हॉल। स्विमिंग पूल में इनडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल। अन्य : क्रिकेट पिच, लॉन टेनिस कोर्ट, शूटिंग रेंज, हॉकी टर्फ। खिलाड़ियों के लिए सहायता चयनित प्रशिक्षु के लिए हॉस्टल और पौष्टिक भोजन। वित्तीय सहायता, किट और उपकरण में आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण समेत अन्य सुविधाएं जैसे शैक्षिक सहायता शिक्षा संबंधी खर्च, प्रतियोगिता का अवसर मिलेगा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका। मनोरंजक की सुविधाएं प्रस्तावित है।

युवाओं को मिलेगा एआई, जनरेटिव टूल्स और उद्यमिता कौशल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन 28 जनवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में किया जाएगा।इस छह सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच को सशक्त करना है।कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग द्वारा प्रायोजित है।इसके माध्यम से प्रतिभागियों को एआई की मौलिक एवं उन्नत अवधारणाओं, आधुनिक टूल्स और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारी, स्केलेबल और सतत स्टार्टअप विकसित कर सकें। कार्यक्रम में उद्यमिता की समझ, एमएसएमई सहायता योजनाएं, वित्तीय संस्थान, परियोजना चयन एवं पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन, बाजार सर्वेक्षण, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट निर्माण, संचार एवं सॉफ्ट स्किल्स विकास, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, जनरेटिव एआई, उत्पादन योजना, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन, कानूनी औपचारिकताएं, कराधान और नेतृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। साथ ही प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।कार्यक्रम में देश के विभिन्न संगठनों और संस्थानों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ, शासकीय विभागों के अधिकारी, सफल उद्यमी, बैंकर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विपणन एवं प्रेरणात्मक विशेषज्ञ और उद्यमिता विकास संस्थानों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह अभ्यास, प्रस्तुतिकरण, हैंड्स-ऑन सत्र और उद्यमियों के साथ संवाद शामिल रहेगा। कार्यक्रम के लिए पात्रता अंतर्गत विज्ञान, इंजीनियरिंग अथवा प्रौद्योगिकी में स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या पीजीडीसीए धारक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि महिला एवं एससी,एसटी,ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को शासन के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी। कुल 30 प्रतिभागियों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवश्यक होने पर साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रवेश ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर होगा।कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है।इच्छुक अभ्यर्थी टीईडीपी के लिए https://tinyurl.com/mpcstAl पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 24 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के संरक्षक एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी हैं।समन्वय टीम में डॉ. प्रवीण दिघर्रा, श्री अवनीश के. शर्मा, नव्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कौरव शामिल हैं।कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने और डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

इंदौरवासियों को जाम से बड़ी राहत, 5 महीने में पूरे होंगे 4 फ्लाईओवर, कई इलाकों में सिग्नल फ्री सफर

इंदौर शहर के निर्माणाधीन चार प्रमुख फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पांच माह में पूरा हो जाएगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही इन चौराहों से वाहनों का आवागमन सुगम होगा और सिग्नल पर रूकने की आवश्यकता नहीं होगी। कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने निर्माणाधीन फ्लाईओवर का दौरा कर निरीक्षण किया। फ्लाईओवर को जून माह तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। 267 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे हैं प्रोजेक्ट शहर में सत्य सांई चौराहा, देवास नाका, मूसाखेडी और आइटी पार्क चौराहा पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा चारों चौराहों पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह फ्लाईओवर 267 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे है। सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। उन्होंने जून माह तक चारों का काम पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर वर्मा ने बताया कि यह सभी फ्लाईओवर्स शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके पूर्ण होने से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।   अतिक्रमण हटाकर बाधाएं दूर करने के निर्देश चारों चौराहों पर निर्माण के दौरान कुछ बाधाए है, इन बाधाओं को रिमूवल कर हटाया जाएगा। वहीं चौराहों पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और समय-सीमा में काम पूरा करने को लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि व्यवस्थित संचालन के लिए गार्ड तैनात किए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रहे। धूल उड़ने से रोकने के लिए नेटिंग और अन्य उपाय किए जाएंगे। सर्विस रोड और पैदल यात्रियों की सुविधा पर जोर सर्विस लेन पर पैच रिपेयरिंग और डामरीकरण कर ट्रैफिक को सुचारू बनाया जाए। निर्माण कार्यो की आने वाले दिनों में नियमित समीक्षा की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने मूसाखेड़ी चौराहा पार करने के लिए पैदल नागरिकों के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के सर्विस रोड़ पर पर्याप्त लाईटिंग भी की जाए।   निर्माण में देरी, बढ़ाई समय सीमा फ्लाईओवर का निर्माण कार्य धीमी गति से किया जा रहा है।पहले निर्माण मार्च तक पूरा किया जाना था, लेकिन देरी को देखते हुए समय सीमा तीन माह बढ़ाई है। निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। चारों फ्लाईओवर को अब पांच माह में पूरा करना होगा। इसके लिए लगातार मानिटरिंग कर काम की गति को बढ़ाया जाएगा। धीमे निर्माण के कारण आमजन को परेशानी हो रही है।

10वीं-12वीं की परीक्षाओं से पहले MP सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों में 1 फरवरी से ESMA लागू

भोपाल मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी से और पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से शुरू होंगी। वहीं शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगा दिया है। यह एक फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। तीन माह तक शिक्षक सामान्य के साथ महिला शिक्षिक भी संतान पालन अवकाश (सीसीएलई) भी नहीं ले पाएंगी। साथ ही शिक्षक आंदोलन या धरना-प्रदर्शन तक नहीं कर पाएंगे। प्रदेश के स्कूलों में एक फरवरी को एस्मा लग जाएगा। इसके पहले सभी विभिन्न विभागों में अटैच शिक्षकों को स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही उन्हें फरवरी का वेतन मिलेगा। अटैच शिक्षकों की मूल स्कूलों में वापसी, भोपाल में 300 शिक्षक कार्यमुक्त इस संबंध में अभी सिर्फ भोपाल जिले के शिक्षकों को कार्यमुक्त किया गया है। भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने 300 अटैच शिक्षकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं कलेक्टर के आदेश से बीएलओ कार्य में लगे शिक्षकों में ड्यूटी को लेकर असमंजस की स्थिति है। राजधानी में 300 ऐसे शिक्षक हैं जो मुख्य पदांकित संस्था छोड़ अपनी पसंद की जगहों पर सालों से अटैच हैं। बता दें कि प्रदेश के करीब छह हजार शिक्षक विभिन्न विभागों में अटैच हैं। साथ ही करीब 15 हजार शिक्षक विशेष पुनरीक्षण कार्य (एसआइआर) में लगे हैं।  ई-सेवा पुस्तिका अपडेट करने की समय-सीमा 31 जनवरी तय शासन द्वारा जारी आदेश के बाद डीईओ ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि 31 जनवरी तक शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका अपडेट होगी। इस कारण सभी शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म किया जा रहा है। सभी शिक्षक अपनी उपस्थिति अपने मूल पदांकित स्कूल में देंगे। वे 31 जनवरी तक अपनी ई-सेवा पुस्तिका में अपडेट कराएंगे। तभी फरवरी का वेतन मूल पदांकित स्कूल में उपस्थिति देने के बाद दिया जाएगा। हालांकि संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही कई शिक्षक अटैच हैं। भोपाल, डीईओ, एनके अहिरवार  ने बताया एसआइआर कार्य में लगे शिक्षकों की सूची बुलाकर उन्हें परीक्षा में ड्यूटी करने कार्यमुक्त किया जाएगा। अटैच शिक्षक अपने मूल स्कूल में उपस्थिति देंगे। तभी उनका फरवरी में वेतन जारी होगा।

अब आंखों की बीमारी पकड़ेगा एआई कैमरा, जेपी अस्पताल में शुरू हुई डायबिटिक रेटिनोपैथी की निशुल्क जांच

भोपाल राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है। जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के सहयोग से शुरू हुए इस केंद्र पर यह पूरी तरह निश्शुल्क होगी। केंद्र के शुभारंभ अवसर पर एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ मनीष शर्मा और सिविल सर्जन संजय जैन विशेष रूप से मौजूद रहे। असंचारी रोग क्लीनिक से किया लिंक इस नई जांच सुविधा को अस्पताल में पहले से संचालित ''असंचारी रोग क्लीनिक'' से जोड़ा गया है। 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी शुगर जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर आंखों का परीक्षण किया जाएगा। डाॅक्टरों का कहना है कि शुगर के कारण आंखों के पर्दे पर खून के छींटे आ जाते हैं, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती है। विजन जाने के बाद वापसी मुश्किल सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एक बार नजर चली जाए तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए समय पर जांच ही एकमात्र बचाव है। इसका उपचार दवा या लेजर तकनीक से संभव है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज     अक्षर कटे हुए या तिरछे दिखाई देना।     बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना।     अचानक रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखना।     आंखों के सामने काले धब्बे या काली रेखाएं तैरती नजर आना।

मोहनपुरा परियोजना से 26 गांवों में पहुंचेगा पानी, 10 हजार किसानों को होगा लाभ, 26 किलोमीटर पाइपलाइन बिछेगी

राजगढ़   एमपी के राजगढ़ जिले में वृहद सिंचाई परियोजना मोहनपुरा-कुंडालिया का और विस्तार होने वाला है। परियोजना से अछूते रहे सारंगपुर ब्लॉक के 26 गांवों की 11040 हेक्टेयर जमीन सींचित होने लगेगी। इसके लिए तैयार योजना को कैबिनेट में मंजूरी मिली है। मंजूरी के साथ ही परियोजना के विस्तार को हरी झंडी मिल गई है। आगामी दिनों में इसका काम शुरू हो जाएगा। जानकारी के अनुसार वर्तमान में मोहनपुरा और कुंडालिया परियोजना से राजगढ़ और आगर जिले के 1136 गांवों में सिंचाई की जा रही है। साथ ही जिले में राजगढ़, ब्यावरा, खिलचीपुर, जीरापुर क्षेत्र में दोनों का पानी पहुंच रहा था। नरसिंहगढ़ और सारंगपुर इससे वंचित था। अब सारंगपुर क्षेत्र के करीब 26 गांवों में पानी पहुंचेगा। जिससे 10400 किसानों को लाभ मिलेगा और 11040 हेक्टेयर जमीन सींचित होगी। सारंगपुर के इन गांवों को मिलेगा फायदा परियोजना के विस्तार से क्षेत्र अंतर्गत लीमा चौहान, पाडदा, टूट्याहेड़ी, दराना, देवीपुरा, भैंसवा माता, भवानीपुरा, कलाली, अरन्या, लोटट्या, घट्ट्या, रोजड़कलां, धामंदा, गायन, पट्टी, इधीवाड़ा, शंकरनगर, अमलावता, पीपल्या पाल, पाडल्या माता, शेरपुरा, कमलसरा, किशनखेड़ी, सुल्तानिया, जोगीपुरा और छापरा गांव शामिल हैं। दो साल में पूरा करेंगे नई परियोजना जिले के अधिकांश हिस्से में मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना का पानी पहुंच रहा था। इसके अतिरिक्त अधिक से अधिक सिंचित रकबा हम बढ़ाने की तैयारी में थे। कैबिनेट से सारंगपुर क्षेत्र के उक्त गांवों की परियोजना का भी मंजूरी मिली है। इससे 26 गांवों लाभान्वित होंगे। दो साल में इसे पूरा करेंगे ताकि जल्द से किसानों को लाभ मिलेगा। – विकास राजोरिया, प्रशासक, मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना, राजगढ़

प्रॉपर्टी रेट में बढ़ोतरी तय: शहर की 256 व ग्रामीण क्षेत्र की 57 लोकेशन सूचीबद्ध

ग्वालियर पंजीयन विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करना शुरू कर दिया है। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआइ) से शहर सहित जिले में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण किया। शहर में 256 व गांव में 57 लोकेशन पर बढ़ोतरी बताई है, जिला पंजीयक ने उप पंजीयकों के साथ बैठक की। इस बैठक में उप पंजीयकों से अपने-अपने क्षेत्र की गाइडलाइन के संबंध में जानकारी ली। उप पंजीयकों ने जहां पर ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं, वहां गाइडलाइन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अलग-अलग लोकेशन पर 40 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी होगी। शहरी क्षेत्र में औसतन 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभावित है। ऐसे बढ़ेगी गाइडलाइन -पॉलिगॉन में सुधार किया जा रहा है। स्टांप ड्यूटी चोरी रोकने के लिए पॉलिगॉन का दायर बढ़ाया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में अधिक लोकेशन को शामिल किया जाएगा। पॉलिगॉन में जिस लोकेशन की गाइडलाइन अधिक होगी। वह पूरे पॉलिगॉन के ऊपर लागू होगी।   -पॉलिगॉन का दायरा बढ़ने से भी गाइडलाइन स्वतः बढ़ जाएगी। ऐसा करने से स्टांप ड्यूटी चोरी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि अभी लोकेशन बदलकर चोरी कर रहे हैं। इस तरह से तैयार की जा रही है गाइडलाइन     संपदा-2 सॉफ्टवेयर एआइ तकनीक पर कार्य करता है। इसके माध्यम से गाइडलाइन तैयार की जा रही है।     उप पंजीयकों ने संपदा-2 से दस्तावेजों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। 30 हजार दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है।     उप पंजीयकों ने स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीद-फरोख्त की जानकारी जुटा रहे हैं। मल्टियों से भी डेटा लिया गया है।     नवीन क्षेत्रों में निवेश की संभावना को भी देखा जा रहा है। उन्हीं क्षेत्रों का चयन किया जाएगा, जहां पर सबसे ज्यादा विक्रय हो रहा है।     प्लॉट व व्यवसायिक संपत्तियों में ज्यादा बढ़ोतरी संभावित है।   2025 में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण करें पंजीयन महानिरीक्षक ने पिछले सप्ताह जिला पंजीयकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में गाइडलाइन पर चर्चा की गई। जिले में खुद होमवर्क करें। 2025 में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण करें। इसके बाद गाइडलाइन में क्या बदलाव चाहते हैं, उनके प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उप पंजीयकों ने बढ़ोतरी के प्रस्ताव के संबंध में जिला पंजीयक को जानकारी दी है। विसंगतियां भी बताई गई हैं। इन सबको दूर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में रही सबसे अधिक बिक्री वृत्त-2 : मुरार, न्यू सिटी सेंटर, महाराजपुरा, बड़ागांव वृत्त-1 : पुरानी छावनी, शिवपुरी लिंक रोड, गिरवाई क्षेत्र उप पंजीयकों ने डेटा का विश्लेषण किया है। कहां बढ़ोतरी की संभावना है, उन्हीं क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है। संपत्तियों का विक्रय कम है। उन लोकेशन पर गाइडलाइन नहीं बढ़ा रहे हैं।- अशोक शर्मा, जिला पंजीयक

रेलवे का मास्टरस्ट्रोक! एक ऐप में समाएंगी यात्रा से जुड़ी सभी सुविधाएं

भोपाल रेल यात्रियों की दैनिक जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एकीकृत मोबाइल एप के माध्यम से यात्रा से जुड़ी अनेक सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध करा दी हैं। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा के दौरान जरूरी जानकारियों तक, हर सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें अलग-अलग एप्स और रेलवे काउंटरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस एकीकृत एप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफार्म टिकट की बुकिंग कर सकते हैं। लाइव स्टेटस से लेकर भोजन बुकिंग तक की सुविधा इसके अलावा पीएनआर स्टेटस, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन की जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यात्रा के दौरान ट्रेन में भोजन बुकिंग की सुविधा भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। एक ही एप पर इतनी सुविधाएं मिलने से यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान जानकारी जुटाना सरल हो गया है।   डिजिटल पेमेंट पर मिलेगी 3% की छूट तो वहीं डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा अनारक्षित टिकटों की बुकिंग पर तीन प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यह छूट 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी और यूपीआई, मोबाइल वालेट, नेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।