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मुख्यमंत्री ने इंदौर के अस्पतालों में पहुँचकर दूषित जल से बीमार मरीजों का जाना हालचाल

घबराने की जरुरत नहीं है राज्य शासन आपके साथ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने इंदौर के अस्पतालों में पहुँचकर दूषित जल से बीमार मरीजों का जाना हालचाल मुख्यमंत्री इन्दौर के भागीरथपुरा के प्रभावितों और परिजनों से मिले मुख्यमत्री ने कलेक्टर वर्मा को नि:शुल्क चिकित्सा उपलब्ध कराने के दिये निर्देश इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन्दौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से पीड़ित और प्रभावितों से मिलकर भरोसा दिलाते हुए कहा कि चिंता न करें, सब कुछ अब ठीक होगा। आप सभी पूर्णत: स्वस्थ होकर अपने घर सकुशल पहुँचेंगे। यहाँ आपको बेहतर से बेहतर उपचार नि:शुल्क दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि सभी प्रभावितों का नि:शुल्क उपचार सुनिश्चित किया जाये साथ ही इसकी निगरानी भी हो। यह सुनिश्चित किया जाये कि प्रभावितों को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभावितों और उनके परिजनों से कहा कि राज्य शासन आपके साथ है। उन्होंने प्रभावितों तथा परिजनों के जीवन निर्वाह, कामकाज आदि के बारे में भी जाना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा विशेषज्ञ और अस्पताल स्टॉफ से भी चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने अधिकरियों और चिकित्सकों को निर्देश दिये कि वे अस्पताल में भर्ती प्रभावितों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखें। प्रभावितों को बेहतर से बेहतर सुविधाएँ, नि:शुल्क दवायें, इंजेक्शन, जाँच और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाये। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने अधिकारियों को कहा कि यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में भागीरथपुरा में हुई घटना के प्रभावितों से मिलने 31 दिसम्बर की शाम को परदेशीपुरा स्थित वर्मा अस्पताल, नंदानगर स्थित बीमा अस्पताल,एमआईजी चौराहा स्थित डीएनएस अस्पताल, रेसकोर्स रोड़ स्थित शैल्बी अस्पताल, एम.वाय.अस्पताल सहित विभिन्न अस्पतालों में पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रभावितों से अस्पताल में उपलब्ध कराए जा रहे उपचार तथा अस्पताल में भर्ती होने के पूर्व निर्मित हुई स्थितियों के बारे में और उनके कामकाज आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों से चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्पमित्र भार्गव, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन संजय दुबे, अतिरिक्त मुख्य सचिव सीएम सचिवालय नीरज मण्डलोई, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे़, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव,एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।  

बुरहानपुर जल आवर्धन योजना से बदल रही तस्वीर

भोपाल  ताप्ती नदी आधारित ‘‘जल आवर्धन योजना’’ से बुरहानपुर शहर को एक आधुनिक, सुरक्षित और भरोसेमंद जल आपूर्ति प्रणाली मिली है। परियोजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और नगरपालिक निगम बुरहानपुर द्वारा किया गया है। बुरहानपुर शहर में बढ़ती जनसंख्या और बदलती जीवन शैली के बीच सुरक्षित पेयजल की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बुरहानपुर शहर की जल वितरण अधोसंरचना पुरानी हो गई थी, जिससे जलापूर्ति ट्यूबवेलों लीकेज, गंदगी की मिलावट का खतरा था। गिरता भूजल स्तर जल की भविष्य की सुचारू उपलब्धता संकट था। 50 एमएलडी क्षमता का आत्याधुनिक जलशोधन संयंत्र इन चुनौतियों को दूर करने के लिए ताप्ती नदी आधारित नई जलप्रदाय प्रणाली विकसित की गई है। इसके तहत एनीकट, इंटेकवेल और 50 एमएलडी क्षमता का अत्याधुनिक जलशोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। जल शोधन संयंत्र में पानी को फिल्ट्रेशन क्लोरीनेशन और अन्य वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से शुद्ध किया जाता है। स्काडा प्रणाली से गुणवत्ता और आपूर्ति की निरंतर निगरानी की जाती है। पानी की क्वालिटी की रोज़ाना मॉनिटरिंग के लिए डब्ल्यूटीपी में एक हाई-लेवल वॉटर टेस्टिंग लैब भी स्थापित की गई है। शुद्ध जल को 8 नए ओवरहेड टैंक और बेहतर पाइप नेटवर्क से शहर के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचाया जा रहा है। 41 हजार घरों में मीटर युक्त नल कनेक्शन योजना के अंतर्गत पुराने और क्षतिग्रस्त पाइपों को हटाकर नया वितरण नेटवर्क बिछाया गया है। बुरहानपुर में लगभग 41 हजार घरों में मीटरयुक्त नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, इससे लीकेज पर नियंत्रण हुआ है, जल के अपव्यय में कमी आई है और जल वितरण व्यवस्था अधिक सुचारु हुई है। वर्तमान में नगरवासियों को प्रति व्यक्ति लगभग 135 लीटर शुद्ध पेयजल प्रतिदिन मिल रहा है। बुरहानपुर में 275 ट्यूबवेल से जलापूर्ति की जा रही थी, नई प्रणाली से टैंकरों और ट्यूबवेल पर निर्भरता लगभग समाप्त हुई है। क्षेत्र में निरंतर गिरते भूजल स्तर के की समस्या का भी निराकरण होगा। योजना के क्रियान्वयन से लगभग 8 करोड़ की बचत होगी। अब तक नगर निगम द्वारा भूजल आधारित योजना के संचालन संधारण पर वार्षिक व्यय लगभग रूपये 10 से 12 करोड़ था। अब यह व्यय लगभग रूपये 4 करोड़ होगा। सतत सम्पर्क से संभव हुआ योजना का क्रियान्वयन प्रत्येक घर में पंजीकृत नल कनेक्शन सुरक्षित जल उपयोग, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सामुदायिक जिम्मेदारी के प्रति स्थायी व्यवहार परिवर्तन की सोच के साथ, एमपीयूडीसी द्वारा व्यापक स्तर पर संपर्क किया गया। नवीन जल तंत्र में विश्वास को जगाना एक बड़ी चुनौती थी। इसके लिए घर-घर सर्वेक्षण, सामुदायिक परामर्श और फोकस समूह बैठकें और व्यापक सामाजिक आंकलन किया गया। परियोजना के पूर्ण होने के बाद जलजनित रोगों में भी गिरावट दर्ज की गई है। बुरहानपुर जल आवर्धन योजना ने शहर को सुरक्षित, स्वच्छ और सतत् जल आपूर्ति की मजबूत नींव दी है। यह पहल स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण को मजबूती भी दे रही है।  

हरदा बना अंतर्राष्ट्रीय शतरंज का केंद्र, रैपिड चेस टूर्नामेंट का भव्य आयोजन

भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट का भव्य आयोजन हरदा जिले में होने जा रहा है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हरदा जिला शतरंज संगठन के तत्वाधान में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप संपन्न होगा, जिसमें देश-प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों के ख्याति प्राप्त और रेटेड खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। इस टूर्नामेंट की तिथि शतरंज फेडरेशन द्वारा 24 जनवरी शनिवार निर्धारित की गई है। यह टूर्नामेंट कलेक्टर निवास के सामने, इंदौर रोड हरदा डिग्री कॉलेज में होगा, जिसमें देश-विदेश के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इसमें बड़ी संख्या में बालिकाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जिले एवं आसपास के विद्यालयों और महाविद्यालयों से संपर्क कर उन्हें प्रेरित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के खेल स्तर को बेहतर बनाने हेतु पूर्व में प्रशिक्षण-सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बताया कि शतरंज के शौकीनों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है, जहां वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। टूर्नामेंट में कुल 1 लाख 51 हजार रुपये की इनामी राशि और ट्रॉफियां रखी गई है। यह एक रेपिड टूर्नामेंट होगा, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी को 15 मिनट और प्रति चाल 5 सेकंड का अतिरिक्त समय मिलेगा। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के लिये ओपन श्रेणी हेतु 750 रुपये तथा हरदा के स्थानीय खिलाड़ियों के लिये 500 रूपये एन्ट्री फीस निर्धारित की गई है। जीएम/डब्ल्यूजीएम/डब्ल्यूआईएम खिताब धारकों और 2300 से ऊपर रेटेड खिलाड़ियों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। इसके अलावा दिव्यांग खिलाड़ियों को एंट्री फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इच्छुक खिलाड़ी ब्रोशर लिंक https://circlechess.com/brochure?id=49722 व पंजीकरण लिंक https://circlechess.com/registration?id=49722 के माध्यम से टूर्नामेंट के आयोजन के संबंध में जानकारी प्राप्त कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: पेयजल आपूर्ति में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

शुद्ध पेयजल आपूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भागीरथपुरा जलजनित घटना की पुनरावृत्ति रोकने के होंगे पूरे इंतजाम प्रभावित क्षेत्रों का नगरीय प्रशासन अपर मुख्य सचिव करेंगे भ्रमण, देंगे रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने इंदौर में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की संयुक्त बैठक इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना के संबंध में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज इंदौर में समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना की पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति और अब तक की गई व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली तथा स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस संबंध में लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थिति पर सतत निगरानी एवं त्वरित निर्णय सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे को इंदौर में ही तैनात रहने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि नगर निगम की आवश्यकता को देखते हुए पर्याप्त अमला और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर हुई लापरवाही की जांच की जा रही है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने घटना को दु:खद बताते हुए कहा कि इससे सबक लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सरकार पूरी दृढ़ता से कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जलापूर्ति पुनः प्रारंभ होने पर कहीं भी लीकेज या प्रदूषण की आशंका पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति शुद्ध पाई गई है, जबकि शेष हिस्सों में पुरानी एवं क्षतिग्रस्त लाइनों के कारण समस्या सामने आई है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, शासकीय एवं निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वित प्रयासों से इस आपात स्थिति को नियंत्रित किया गया और प्रभावित नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया है। बैठक में बताया गया कि शहर के भागीरथपुरा वार्ड क्रमांक में गंदे पानी की आपूर्ति की आशंका सामने आने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई। बीते दो-तीन दिनों में लगभग 40 हजार से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 2 हजार 456 संदिग्ध मामलों में लक्षण पाए गए। इनमें से 212 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया, जिनमें 50 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि 162 मरीजों का उपचार जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे स्वयं जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न अस्पतालों में जाकर मरीजों से मिले हैं और अधिकांश मरीजों की स्थिति स्थिर है। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के संबंध में अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। बैठक में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्थिति के संबंध में जानकारी दी। इस मौके पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट,सांसद शंकर लालवानी, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, अपर मुख्य सचिव सीएम सचिवालय नीरज मण्डलोई, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाडे़, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव,एमआईसी मेम्बर अभिषेक शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित थे।  

एक जनवरी को पदोन्नति का ऐलान, IAS-IPS और IFS अधिकारियों की खुलेगी किस्मत

भोपाल   एमपी कैडर के 71 आईएएस और 21 आईपीएस अफसरों को आज प्रमोशन मिलने वाला है। एक जनवरी 2026 से प्रमोट होने वाले इन अफसरों में जीएडी के सचिव एम सेलवेंद्रन का भी नाम है। जिन्हें प्रमुख सचिव पद पर प्रमोट किया जाएगा। सेलवेंद्रन पहले ही प्रमोशन की पात्रता रखते थे लेकिन डीओपीटी द्वारा प्रमुख सचिव के लिए 25 साल की सेवा की पात्रता तय करने के चलते उन्हें एक जनवरी से पदोन्नत किया जाएगा। दूसरी ओर आईपीएस अफसरों में अनंत कुमार सिंह या आशुतोष राय को एडीजी से डीजी पद पर प्रमोट करने का आदेश गृह विभाग जारी करेगा। इसी तरह आईएफएस अफसरों के भी प्रमोशन आदेश जारी होंगे। नए साल 2026 की शुरुआत मध्य प्रदेश के अफसरों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आ रही है. प्रदेश कैडर के 71 आईएएस और 21 आईपीएस अधिकारियों को नए साल में प्रमोशन का गिफ्ट मिलने वाला है. इसके साथ ही आईएफएस अधिकारियों के प्रमोशन आदेश भी आज जारी होने की संभावना है. सभी प्रमोशन 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माने जाएंगे. जीएडी से लेकर गृह विभाग तक हलचल सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और गृह विभाग ने प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है. नए साल के पहले ही दिन कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल जाएंगी. एम. सेलवेंद्रन बनेंगे प्रमुख सचिव जीएडी सचिव एम. सेलवेंद्रन को प्रमुख सचिव पद पर प्रमोट किया जाएगा. यह प्रशासनिक स्तर पर एक अहम पदोन्नति मानी जा रही है. IPS में DG-ADG लेवल पर बड़ा फेरबदल आईपीएस कैडर में भी बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं. आईपीएस अधिकारियों अनंत कुमार सिंह या आशुतोष राय में से किसी एक को एडीजी से डीजी पद पर प्रमोट करने का आदेश गृह विभाग जारी कर सकता है. प्रमोद वर्मा बनेंगे ADG प्रमोद वर्मा, जो वर्तमान में जबलपुर रेंज के आईजी हैं, उन्हें प्रमोट कर एडीजी बनाया जाएगा. तीन नए IG, 13 बनेंगे DIG कई अफसरों की पदोन्नति रुकी आईएएस अफसरों में सचिव और अपर सचिव पद के लिए तरुण भटनागर, अनुराग चौधरी और संतोष कुमार वर्मा की पदोन्नति रुक गई है। इसके अलावा ऋषि गर्ग के विरुद्ध भी विभागीय जांच के चलते पदोन्नति रुकी है। इसलिए इन अधिकारियों के अलावा प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव, उप सचिव के पदों पर आईएएस अधिकारियों को पदोन्नति दी जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग शाम को इसके आदेश जारी करेगा। इसके साथ ही राज्य प्रशासनिक सेवा के अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर पद पर प्रमोट होने वाले अफसरों की भी वर्तमान पदस्थापना स्थल पर पदोन्नति की जा सकती है। इस प्रमोशन लिस्ट में: तीन आईपीएस अधिकारी आईजी के पद पर प्रमोट होंगे, इनमें 2008 बैच के ए. शियास और ललित शाक्यवार शामिल हैं. 1999 बैच के निरंजन वी. वायंगणकर को भी आईजी बनाया जाएगा. इसके अलावा 13 आईपीएस अधिकारी डीआईजी के पद पर प्रमोट होंगे. नए साल की शानदार शुरुआत कुल मिलाकर, नए साल की पहली तारीख एमपी के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए नई जिम्मेदारियों और नई रैंक के साथ शुरू होने जा रही है. इसे अफसरों के लिए सरकार का बड़ा न्यू ईयर गिफ्ट माना जा रहा है. इन आईपीएस अफसरों को मिल सकता है प्रमोशन एक जनवरी से उच्च पद पर प्रमोट होने वाले अफसरों में जिन आईपीएस अफसरों को प्रमोशन मिल सकता है उसमें डीजी का एक पद है। अगर आज शाम तक अनंत कुमार सिंह की एमपी वापसी की सूचना गृह विभाग को मिल जाती है तो वे डीजी के पद पर प्रमोट हो जाएंगे अन्यथा एडीजी आजाक आशुतोष राय को डीजी के पद पर प्रमोट किया जाएगा। जबलपुर आईजी प्रमोद वर्मा को प्रमोट कर एडीजी बनाया जाएगा, उनकी पदस्थापना फिलहाल जबलपुर में ही रहेगी। उनके पास शहडोल आईजी रेंज का भी चार्ज है। तीन अधिकारी आईजी के पद पर प्रमोट होंगे। जिसमें 2008 बैच के ए शियास और ललित शाक्यवार शामिल हैं। इनके अलावा 1999 बैच के निरंजन वी वायंगणकर भी आठ साल की देरी से आईजी बनेंगे। हालांकि उनके बैच के अफसर अब एडीजी बन चुके हैं। 13 आईपीएस अधिकारी डीआईजी के पद पर प्रमोट होंगे एक जनवरी से मिलने वाली पदोन्नति में 13 आईपीएस अधिकारी डीआईजी बनेंगे। इसमें से कई अधिकारी वर्तमान में जिलों में एसपी के पद पर पदस्थ हैं। डीआईजी बनने वालों में वर्ष 2010 और वर्ष 2011 बैच के चार-चार और वर्ष 2012 बैच के पांच आईपीएस अफसर शामिल हैं। इन्हें डीआईजी बनाए जाने के बाद भी पदस्थापना यथावत रखने के संकेत हैं, क्योंकि चुनाव आयोग की एसआईआर कार्यवाही के चलते फिलहाल कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारियों की पदस्थापना 21 फरवरी तक रुकी रहेगी। ये अफसर चुनाव आयोग की परमिशन से ही स्थानांतरित किए जा सकेंगे। खंडवा एसपी मनोज राय, भोपाल जोन-2 के डीसीपी विवेक सिंह, झाबुआ एसपी डॉ शिवदयाल, धार एसपी मयंक अवस्थी, रीवा एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, भिंड एसपी असित यादव, एसआरपी भोपाल राहुल लोढ़ा और एसआरपी जबलपुर सिमाला प्रसाद प्रमोट होकर डीआईजी बनेंगे।

मध्य प्रदेश के 32 प्रमुख प्रशासनिक चेहरे 2026 में होंगे रिटायर, मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई IAS-IPS के नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश प्रशासनिक गलियारे के लिए साल 2026 बड़े बदलावों वाला साबित होने वाला है। प्रदेश कैडर के 16 आईएएस और 16 आईपीएस अधिकारी अगले साल सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इन प्रमुख नामों में प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन भी शामिल हैं, जो सितंबर 2026 में रिटायर होंगे। उन्हें दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो सरकार को नए प्रशासनिक मुखिया की नियुक्ति करनी होगी। पदों के लिए मचेगी होड़ इतनी बड़ी संख्या में सीनियर अधिकारियों के रिटायर होने से सरकार के सामने एडीजी इंटेलिजेंस, आईजी लॉ एंड ऑर्डर और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे अहम पदों के लिए नए चेहरों की तलाश की चुनौती होगी। साथ ही, मुख्य सचिव अनुराग जैन को यदि दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो प्रशासनिक मुखिया का पद भी खाली हो जाएगा। गौरतलब है कि साल 2025 में भी 29 अधिकारी रिटायर हुए थे, जिनमें से मुख्य सचिव और डीजीपी को विशेष सेवा वृद्धि (एक्सटेंशन) दी गई थी। यह आईएएस हैं शामिल 16 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपनी सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। मार्च 2026 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की चेयरमैन स्मिता भारद्वाज, अप्रैल में राजस्व विभाग के अपर सचिव संजय कुमार, मई में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय, जून के महीने में एमपी खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के एमडी माल सिंह भयड़िया, अगस्त में खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव और बालाघाट के अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे, सितंबर में मुख्य सचिव अनुराग जैन और चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार रिटायर हो रहे हैं। अक्तूबर से दिसंबर तक ये IAS रिटायर होंगे अक्टूबर माह में लोकायुक्त संगठन की सचिव अरुणा गुप्ता और गृह मंत्रालय में पदस्थ आशीष श्रीवास्तव, नवंबर में राजस्व विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे, कलेक्टर—शिवपुरी के रविंद्र कुमार चौधरी और शहडोल के केदार सिंह, दिसंबर 2026 में राजस्व मंडल के सचिव ललित दाहिमा और आयुष विभाग के अपर सचिव संजय कुमार मिश्रा, आर्कियोलॉजी विभाग की कमिश्नर उर्मिला शुक्ला भी इसी वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की सूची में शामिल हैं। रिटायर होने वाले आईपीएस की लिस्ट जनवरी: जगदीश डावर (एसपी, बड़वानी) फरवरी: अंशुमान सिंह (आईजी, लॉ एंड ऑर्डर) मार्च: हिमानी खन्ना (आईजी, सागर रेंज) अप्रैल: सविता सोहाने (डीआईजी, शहडोल) मई: महेश चंद्र जैन (डीआईजी, नारकोटिक्स, इंदौर) जून: संजीव शमी (स्पेशल डीजी, टेलीकॉम) और संजय तिवारी (आईजी, प्लानिंग) जुलाई: आलोक रंजन (डायरेक्टर, एनसीआरबी), अरविंद सक्सेना (आईजी, ग्वालियर रेंज) और शशिकांत शुक्ला (आईजी, एफएसएल) अगस्त: अजय कुमार शर्मा (चेयरमैन, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन), आशुतोष राय (एडीजी, आजाक पीएचक्यू), ए. साई मनोहर (एडीजी, इंटेलिजेंस) और मिथलेश शुक्ला (आईजी, नर्मदापुरम) अक्टूबर: सोनाली मिश्रा (डीजी, रेलवे पुलिस बोर्ड) दिसंबर: कैलाश मकवाना (डीजीपी)

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में विदिशा की दो बेटियां कर्तव्य पथ पर कदम रखेंगी

विदिशा   नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष विदिशा की बेटियां भी कदमताल करती नजर आएंगी. राजमाता विजया राजे सिंधिया शासकीय कन्या (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय विदिशा की एनसीसी कैडेट्स सार्जेंट दामिनी विश्वकर्मा और लांस कॉरपोरल सिमरन अहिरवार का चयन गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए हुआ है. बेहद कठिन प्रक्रिया के बाद चयन इन दो बेटियों के चयन से महाविद्यालय के साथ ही पूरे विदिशा जिले में खुशी की लहर है. विदिशा की 14 एमपी बटालियन एनसीसी से कुल 5 कैडेट्स का चयन हुआ है, जिनमें से दो कैडेट्स कन्या महाविद्यालय से होना जिले में बालिका सशक्तिकरण और अनुशासनात्मक प्रशिक्षण की मजबूती को दर्शाता है. कैडेट्स का चयन बेहद कठोर प्रक्रिया के बाद किया गया, जिसमें शारीरिक दक्षता, ड्रिल, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा ली गई. कम संसाधन के बाद भी छुआ शिखर कैडेट्स सार्जेंट दामिनी विश्वकर्मा बीसीएसी तृतीय वर्ष की छात्रा हैं. वह दीवानगंज क्षेत्र के ग्राम अंबाड़ी की निवासी हैं और कृषक परिवार से आती हैं. वहीं लांस कॉरपोरल सिमरन अहिरवार बीए तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, जो विदिशा जिले के दूरस्थ ग्राम नरखेड़ा ताल से संबंध रखती हैं. सिमरन वर्तमान में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास विदिशा में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनकी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है. लेफ्टिनेंट कर्नल सनी वैद्य का मार्गदर्शन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल विकास गुप्ता (शौर्य चक्र) एवं प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सनी वैद्य के मार्गदर्शन में दोनों कैडेट्स ने लगातार दो माह तक आरडीसी चयन प्रक्रिया में भाग लिया. विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों और कैंपों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद उनका अंतिम चयन हुआ. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी.डी. अहिरवार एवं एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट डॉ. विनीता प्रजापति ने इस उपलब्धि को छात्राओं की अनुशासनप्रियता, समर्पण और निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया. 

ओंकारेश्वर में नए साल पर भारी भीड़ की संभावना, VIP सुविधाएं अस्थायी रूप से बंद

खंडवा  ओंकारेश्वर नर्मदा पावन क्षेत्र में नर्मदा नदी का प्रत्येक पत्थर-कंकड़ भगवान शिव का ही स्वरूप माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास है कि ओंकारेश्वर नर्मदा में जल के स्पर्श मात्र से पुण्य प्राप्ति होती है। यहां का कण-कण शिवम हैं। यही कारण है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान पाने वाले ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को केवल एक पल ही निहारने के लिए देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालु बेताब रहते हैं। अंग्रेजी नव वर्ष का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। भक्तों का मानना है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से कष्ट और सभी संकट नष्ट होते हैं मोक्ष की प्राप्ति होती है। डिप्टी कलेक्टर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने विशेष चर्चा में बताया कि नये साल के पहले दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर आने की संभावना है। इस दिन सामान्य द्वार से ही दर्शन कर सकेंगे। प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा बंद रहेगी।  दर्शन के साथ ही आम नागरिकों को दर्शन होंगे। सीढ़ियों की बजाय भक्त ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के रैंप से गुजरकर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासक मुकेश काशिव ने बताया कि कतार में लगने वाले भक्तों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन में दो से ढाई घंटे का समय लगेगा। एक समय में चार लोग ही ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर पाते हैं। काशिव के अनुसार बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। दिसंबर अंतिम पखवाड़े से ही भक्तों की भारी भीड़ प्रत्येक दिन आ रही है। प्रशासन का लक्ष्य की देश-विदेश से आने वाले भक्तों को दर्शन और स्नान में किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। मंदिर ट्रस्ट के सभी कर्मचारी समय-समय पर अपनी सेवाएं देने में लगे हैं। ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि वर्तमान में प्रतिदिन 50 हजार से लेकर 60 श्रद्धालु ओंकारेश्वर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव के दर्शन करने पहुंचे रहे हैं। नये वर्ष 2026 में यह आंकड़ा लाखों को पार कर जाएगा। स्थान की कमी के कारण मंदिर दर्शन करने में समय लगता है, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति अन्य तीर्थ स्थान की तरह नहीं है। ओंकार पर्वत पर  पहाड़ी पर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव का मंदिर सदियों पुराना बना है। इसलिए प्रशासन भी मंदिर में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं कर सकता है। कोरोना कल के बाद से लगातार श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचने की संख्या बहुत ही बड़ी है। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनोख सिंधिया ने बताया कि पुलिस प्रशासन ने छोटे वाहनों को रोकने के लिए कार पार्किंग सुविधा है। वैसे एक दर्जन स्थानों पर पार्किंग की सुविधा की गई है। प्रतिदिन श्रद्धालु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं। नव वर्ष में भी यह नर्मदा नदी में स्नान के ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी लगते हैं। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शनों का अपना महत्व है। हर भक्त यहां आकर दर्शन करने को आतुर रहता है। पुलिस विभाग की कई कंपनियां होमगार्ड के जवान स्थानीय पुलिस बल भी लगाया गया है। ओंकारेश्वर पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नवलकिशोर शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू यानी खुद प्रगट होने वाला स्वरूप है। इसकी स्थापना से पुरानी कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार अयोध्या के इच्छाव्कु वंश के राजा मांधाता में नर्मदा तट पर स्थित पर्वत पर भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। बड़ी संख्या में भक्ति मांधाता दीप ओंकार पर्वत की साथ किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने आते हैं। ओंकारेश्वर मंदिर के पंडित निलेश पुरोहित ने बताया कि एक कथा यह भी है कि विंध्याचल पर्वत ने नारद मुनि से शेमारू पर्वत की प्रशंसा सुनी तो खुद की श्रेष्ठता के लिए शिव की आराधना की। उसके बाद शिव ने प्रगट होकर उसे ओंकारेश्वर और ममलेश्वर में विभाजित किया। एक अन्य कथा के अनुसार असुरों से हार जाने के बाद देवताओं ने भगवान शिव की प्रार्थना की। तब भगवान शिवा ओंकारेश्वर स्वरूप में प्रकट होकर असुरों का संहार किया। ओम के आकार के दीप पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थिति है। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और नर्मदा नदी के स्थान से भी तीर्थ स्नान का पूर्ण मिलता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मुख्य दीप पर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के दक्षिण तक ब्रह्मपुरी में स्थित है। शास्त्रों में उल्लेख है कि अन्य तीर्थ की यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक वहां का जल ओंकारेश्वर में अर्पित नहीं किया जाए। मान्यता यह भी है कि भगवान शिव और माता पार्वती हर दिन इस मंदिर में रात्रि विश्राम के लिए आते हैं। इस कारण प्रतिदिन मंदिर में चौपड़ पासे से की बिछात बिछाई जाती है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में आदि गुरु शंकराचार्य जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे देखने भी लोग आते हैं। यह आध्यात्मिक और संस्कृति का केंद्र एकात्माधाम और अद्वैत लोग संग्रहालय बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यहीं शंकराचार्य ने युवा काल में अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा ग्रहण की थी।  

स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं मजबूत और व्यापक: उप मुख्यमंत्री शुक्ल, प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएं

स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं हो रही हैं व्यापक एवं सुदृढ़: उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं स्वास्थ्य अमले को सतत प्रयासों के लिए दी बधाई, समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का किया आह्वान भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने समस्त प्रदेशवासियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यशस्वी नेतृत्व में देश वैश्विक मंच पर अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है, भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और "विश्वगुरु" बनने के लक्ष्य के और निकट पहुँच चुका है। इसी राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में सशक्त, सक्षम और सुदृढ़ता की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। स्वास्थ्य मानकों में निरंतर सुधार और स्वास्थ्य सेवाएं व्यापक एवं सुदृढ़ हो रही हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट चिकित्सा उपकरणों, एमआरआई, सीटी स्कैन, कैथ लैब, लिनियर एक्सेलेरेटर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, डायलिसिस यूनिट और सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं का तीव्र विस्तार किया गया है। चिकित्सा शिक्षा में सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों, एमबीबीएस, पीजी और सुपरस्पेशियलिटी सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं साथ ही स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हुई हैं। उज्जैन में अत्याधुनिक मेडिसिटी का विकास किया जा रहा है। महिला एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्धता उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी गर्भवती माताओं से आग्रह है कि वे अनिवार्य एएनसी जाँच अवश्य कराएँ। हर माह की 9 और 25 तारीख को एएनसी जाँच अवश्य करायें। इससे मातृ और शिशु स्वास्थ्य का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान और अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा हैं। प्रदेश सरकार इन पुनीत कार्यों को प्रोत्साहित कर रही है। युवाओं और नागरिकों से आह्वान है कि वे आगे आकर रक्तदान व अंगदान के लिए संकल्प लें। एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर विशेष बल दे रही है। योग, संतुलित आहार, प्राकृतिक खेती से प्राप्त स्वच्छ भोजन और भारतीय जीवनशैली न केवल व्यक्ति को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। "स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ पर्यावरण" ही विकसित मध्यप्रदेश की आधारशिला है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में कई एंटीबायोटिक दवाएँ के कम प्रभावी होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका प्रमुख कारण बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक और गलत उपयोग है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक की सलाह से, निर्धारित मात्रा और अवधि तक ही लें। यह सावधानी न केवल आपके स्वास्थ्य, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों में क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान, सिकल सेल उन्मूलन मिशन, निक्षय भारत अभियान, स्वस्थ यकृत मिशन, आयुष्मान भारत योजना, नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज नियंत्रण और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, आशा, एएनएम और सभी स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा सराहनीय है। उन्होंने स्वास्थ्य अमले को अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सतत प्रयासों के लिए बधाई दी है और इसी समर्पण के साथ सेवा जारी रखने का आह्वान किया है।  

मोहन सरकार की 5 नई पहल: आयुष्मान तर्ज पर इलाज का खर्च कार्ड से सीधे कवर होगा

भोपाल  नए साल 2026 की शुरुआत मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकती है। राज्य सरकार आयुष्मान भारत की तर्ज पर एक नई और बड़ी स्वास्थ्य सुविधा योजना शुरू करने की तैयारी में है, जिससे इलाज के खर्च को लेकर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही चिंता दूर हो सकेगी। इस प्रस्तावित योजना के तहत प्रदेश के कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने वाली है। अब तक जहां कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च पहले खुद उठाना पड़ता था और बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, वहीं नई व्यवस्था में अस्पताल में सीधे कार्ड के जरिए इलाज संभव होगा। हरियाणा और राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी सरकारी कर्मचारियों के लिए एक संगठित और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा मॉडल लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। नए साल में मोहन सरकार की 5 बड़ी सौगातें:  1. मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना: कैशलेस इलाज वर्तमान में कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है और बाद में सरकार की ओर से कुछ राशि लौटाई जाती है. उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च लगभग 20 लाख रुपए आता है, लेकिन सरकार केवल 4 लाख रुपए देती है। नई योजना में 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज मिलेगा। कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, बाकी राशि सरकार वहन करेगी। सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक इलाज का प्रावधान है। 2. 21 साल बाद सरकारी बस सेवा शुरू अप्रैल 2026 से मध्य प्रदेश में 21 साल बाद फिर से सरकारी बसें दौड़ेंगी. नई व्यवस्था 'जनबस' के नाम से शुरू होगी। 25 जिलों के 6 हजार से ज्यादा रूट पर कुल 10,879 बसें चलेंगी.ई-बसें भी होंगी शामिल नेशनल ई-बस स्कीम के तहत इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में 582 ई-बसें चलाई जाएंगी। ये बसें मौजूदा सिटी बसों से सस्ती होंगी और ग्रामीण इलाकों तथा आदिवासी क्षेत्रों को शहरों से जोड़ेंगी। 3. पेंशन नियम में बदलाव: बेटियों को फायदा अब 25 साल से अधिक उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटियों को भी परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। यह बदलाव केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप किया गया है और कर्मचारी आयोग की अनुशंसा पर वित्त विभाग की सहमति मिल चुकी है। 4. छुट्टियों का नया कैलेंडर और EL का फायदा 1 जनवरी 2026 से मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के लिए 48 साल पुराने अवकाश नियम बदलकर नए नियम लागू होंगे। बीमारी और मातृत्व अवकाश आसान होंगे, रोस्टर अनिवार्य होगा और EL साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को क्रेडिट होगी। शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी 10 दिन की EL मिलेगी। 5. सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म लगभग 24 साल पुराने नियम को हटाकर तीन संतान वाले उम्मीदवारों को भी सरकारी नौकरी में पात्र बनाया जाएगा। पुराने मामलों में अब कार्रवाई नहीं होगी। यह बदलाव मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राहत लाएगा।  क्या है ये योजना यह प्रस्तावित मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य के अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए लाई जा रही है। इसके तहत सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना में प्रदेश के भीतर और बाहर के चिन्हित निजी अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर बेहतर इलाज मिल सके। कितना देना होगा अंशदान इस योजना के संचालन के लिए कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन से 250 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का मासिक अंशदान लिया जाएगा। बाकी राशि सरकार द्वारा वहन की जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होगा और कर्मचारियों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा लाभ योजना का लाभ स्थायी, अस्थायी और संविदा कर्मचारियों के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारियों के परिवारों को भी मिलेगा। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा और ऊषा कार्यकर्ता, नगर सैनिक, कोटवार और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में काम कर रहे कर्मचारी भी इसके दायरे में शामिल किए जा रहे हैं। अनुमान है कि इस योजना से 15 लाख से ज्यादा लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, जिससे प्रदेश के लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत गारंटी मिल सकेगी। एनबीटी डेस्क