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मध्य प्रदेश में मातृत्व सुरक्षा की सफलता: संस्थानों में डिलीवरी दर हुई 88%

भोपाल। कभी प्रसव के लिए दाईयों और घर के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने वाला मध्य प्रदेश अब संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में प्रसव) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब 88.5 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। साल 2005-06 में यहां संस्थागत प्रसव का स्तर महज 26.2 प्रतिशत था। यानी अधिकांश प्रसव घरों के असुरक्षित वातावरण में होते थे, जिससे मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) का जोखिम बना रहता था। पिछले दो दशकों में सरकार की सजगता और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की मेहनत ने इस तस्वीर को बदल दिया है। योजनाओं ने दिया संबल, 16 हजार रुपये तक की मदद रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80 प्रतिशत था, जो अब 90 प्रतिशत के लक्ष्य को छूने के करीब है। हालांकि, इस मामले में प्रदेश अभी देश में 17वें स्थान पर आता है। सफलता के पीछे जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पर मिलने वाली 1,400 रुपये की नकद राशि है। वहीं, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना भी गरीब और श्रमिक परिवारों के लिए वरदान साबित हुई। इसमें प्रसूता को पोषण और देखरेख के लिए 16,000 रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता दी जाती है। जननी एक्सप्रेस बनी जीवनरेखा दुर्गम इलाकों से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में जननी एक्सप्रेस (108/102) ने अहम भूमिका निभाई है। निश्शुल्क एंबुलेंस सेवा के कारण देरी की वजह से होने वाली घटनाएं काफी कम हो गई हैं। प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जिलो में भी महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं। पहले जीवित बच्चे के जन्म पर गर्भवती महिलाओं को तीन किस्तों में 5,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। आधुनिक सुविधाओं का हुआ विस्तार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम को लक्ष्य कार्यक्रम के तहत हाईटेक बनाया गया है। नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। परिणामस्वरूप, रतलाम और उज्जैन जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को हासिल कर लिया। वहीं इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव का दर 95% से अधिक रहा। जबकि झाबुआ, धार और बड़वानी जिलों में घर पर प्रसव की दर में 40% तक की कमी आई है। देश में संस्थागत प्रसव में शीर्ष राज्य – केरल – 99.8% – तमिलनाडु – 99.7% – गोवा – 99.5% – तेलंगाना – 97.0% – आंध्र प्रदेश – 96.3% मध्य प्रदेश के शीर्ष पांच जिले – इंदौर – 98.2% – भोपाल – 97.6% – ग्वालियर – 96.4% – जबलपुर – 95.8% – रतलाम – 94.5% वर्तमान चुनौतियां – कठिन भौगोलिक क्षेत्र – डिंडोरी, मंडला और झाबुआ जैसे आदिवासी अंचलों में सुदूर वनांचल होने के कारण एंबुलेंस का पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। – सामाजिक मान्यताएं – कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक दाइयों से घर पर प्रसव कराने का चलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जागरूकता का अभाव हालांकि, सरकार 16,000 रुपये तक की सहायता दे रही है, लेकिन शिक्षा की कमी के कारण अभी भी लगभग 11% प्रसव अस्पतालों से बाहर हो रहे हैं। इनका कहना है कि जननी सुरक्षा और प्रसूति सहायता जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं में अस्पताल के प्रति विश्वास जगाया है। हम ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर मानिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। आधुनिक लेबर रूम और बेहतर एंबुलेंस सेवा के समन्वय से हम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संकल्पित हैं – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय रैपिड शतरंज टूर्नामेंट का आयोजन हरदा में, शतरंज प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर

भोपाल  अंतर्राष्ट्रीय शतरंज टूर्नामेंट का भव्य आयोजन हरदा जिले में होने जा रहा है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट हरदा जिला शतरंज संगठन के तत्वाधान में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप संपन्न होगा, जिसमें देश-प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों के ख्याति प्राप्त और रेटेड खिलाड़ी अपने खेल का जौहर दिखाएंगे। इस टूर्नामेंट की तिथि शतरंज फेडरेशन द्वारा 24 जनवरी शनिवार निर्धारित की गई है। यह टूर्नामेंट कलेक्टर निवास के सामने, इंदौर रोड हरदा डिग्री कॉलेज में होगा, जिसमें देश-विदेश के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। यह इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को समर्पित रहेगा। इसमें बड़ी संख्या में बालिकाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए जिले एवं आसपास के विद्यालयों और महाविद्यालयों से संपर्क कर उन्हें प्रेरित किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों के खेल स्तर को बेहतर बनाने हेतु पूर्व में प्रशिक्षण-सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन ने बताया कि शतरंज के शौकीनों और खिलाड़ियों के लिए यह एक बेहतरीन मौका है, जहां वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं। टूर्नामेंट में कुल 1 लाख 51 हजार रुपये की इनामी राशि और ट्रॉफियां रखी गई है। यह एक रेपिड टूर्नामेंट होगा, जिसमें प्रत्येक खिलाड़ी को 15 मिनट और प्रति चाल 5 सेकंड का अतिरिक्त समय मिलेगा। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट के लिये ओपन श्रेणी हेतु 750 रुपये तथा हरदा के स्थानीय खिलाड़ियों के लिये 500 रूपये एन्ट्री फीस निर्धारित की गई है। जीएम/डब्ल्यूजीएम/डब्ल्यूआईएम खिताब धारकों और 2300 से ऊपर रेटेड खिलाड़ियों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। इसके अलावा दिव्यांग खिलाड़ियों को एंट्री फीस में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इच्छुक खिलाड़ी ब्रोशर लिंक https://circlechess.com/brochure?id=49722 व पंजीकरण लिंक https://circlechess.com/registration?id=49722 के माध्यम से टूर्नामेंट के आयोजन के संबंध में जानकारी प्राप्त कर अपना पंजीयन करा सकते हैं।  

दतिया में अनुपयोगी एंबुलेंस का नया रूप, अस्पताल आने वाले परिजनों के लिए रैन बसेरा तैयार

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े नवाचार के लिए जाने जाते हैं। इस बार जिला अस्पताल में उन्होंने ऐसा काम करवाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। वर्षों से कबाड़ में पड़ी अनुपयोगी एंबुलेंस को उन्होंने रैन बसेरा के रूप में विकसित करवा दिया है। अब अस्पताल आने वाले लोगों को एक नया ठिकाना मिला जाएगा। खुले आसमान के नीचे सोते थे परिजन दरअसल, दतिया अस्पताल परिसर में उपचार के दौरान मरीजों के परिजन अक्सर ठंडी रातों में खुले आसमान के नीचे या फर्श पर सोने को मजबूर रहते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कबाड़ संसाधनों के रचनात्मक उपयोग का यह अनूठा मॉडल तैयार किया है। मरम्मत और आवश्यक सुधार के बाद तैयार की गई प्रत्येक एंबुलेंस में चार लोगों के आराम से सोने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। अंदर साफ-सफाई, रोशनी और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया गया है, जिससे परिजनों को सम्मानजनक आवासीय सुविधा मिल सके। अनुपयोगी एंबुलेंस बनी रैन बसेरा फिलहाल एक एंबुलेंस को पूरी तरह रैन बसेरा के रूप में तैयार कर लिया गया है, जबकि तीन से चार अतिरिक्त एंबुलेंसों को भी जल्द ही इसी उद्देश्य से विकसित करने की प्रक्रिया चल रही है। यह पहल न केवल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशील सोच और सेवा भावना का भी परिचायक है। इस संबंध में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बताया कि प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि अनुपयोगी या कबाड़ हो चुके संसाधनों का जनहित में रचनात्मक उपयोग किया जाए, ताकि आम नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था खासतौर पर उन गरीब और दूर-दराज से आने वाले परिवारों के लिए राहत का माध्यम बनेगी, जिनके पास ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती। दतिया प्रशासन की यह पहल अस्पताल आने वाले सैकड़ों मरीजों के परिजनों के लिए सहारा बनेगी और मानवीय शासन, संवेदनशील प्रशासन और संसाधनों के सदुपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोतमा थाना में सौंपा ज्ञापन, पुलिस अधीक्षक को किए गए क्षेत्रीय मुद्दों के प्रति जागरूक

कोतमा आज भारतीय जनता पार्टी विधानसभा क्षेत्र कोतमा, जिला अनूपपुर के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा कोतमा थाना पहुंचकर माननीय पुलिस अधीक्षक अनूपपुर के नाम ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय को सौंपा गया। यह ज्ञापन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कोतमा विधायक आदरणीय श्री दिलीप जायसवाल जी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर की गई अमर्यादित, आपत्तिजनक तथा अशोभनीय टिप्पणियों के विरोध में सौंपा गया। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर की गई यह टिप्पणी न केवल जनप्रतिनिधि के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाली है, बल्कि समाज में वैमनस्य एवं अशांति फैलाने का भी प्रयास है। इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध हैं। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई कि—     •    आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले सर्वोच्च सत्ता नाम के अख़बार की जांच की जाए कि यह नियम अनुसार चल रहा है या नहीं      •    रामबाबू चौबे जो कि सर्वोच्च सत्ता का संपादक बताता है अपने आप को उसके विरुद्ध FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए     •    भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त कदम उठाए जाएँ भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट से कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, इसलिए दोषियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई अपेक्षित है।

IAS नागार्जुन बी. गौड़ा के नेतृत्व में खंडवा में जल संरक्षण की मिसाल, साइकिल पर पानी ढोने वाले बच्चे की कहानी

खंडवा  राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने से मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम रोशन हुआ है। यह सफलता सिर्फ एक सरकारी योजना का नतीजा नहीं, बल्कि जिला पंचायत सीईओ IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा के व्यक्तिगत संघर्ष और बचपन के अनुभवों का परिणाम है। कर्नाटक के सूखाग्रस्त तिप्तूर से आए नागार्जुन गौड़ा ने पानी की किल्लत को करीब से देखा है, जिसने उन्हें जल संरक्षण को अपना मिशन बनाने के लिए प्रेरित किया। कौन हैं नागार्जुन गौड़ा IAS नागार्जुन गौड़ा का जन्म 5 मई 1992 को कर्नाटक के तुमकुरु जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके माता-पिता शिक्षक हैं। उनके गांव में पानी की कमी एक बड़ी समस्या थी, जिसे उन्होंने बचपन में खुद झेला। यही अनुभव उन्हें जल संरक्षण के प्रति समर्पित करने का कारण बना। नतीजा यह निकला कि खंडवा को 'सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला' घोषित किया गया और 2 करोड़ रुपये का राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के तहत दिया गया। 18 नवंबर 2025 को दिल्ली में राष्ट्रपति से पुरस्कार लेते हुए IAS नागार्जुन गौड़ा ने कहा था, 'जब जल संचय, जन भागीदारी योजना शुरू हुई, तो यह मेरे लिए व्यक्तिगत हो गया।' पानी के लिए करना पड़ता था संघर्ष नागार्जुन गौड़ा बताते हैं कि उन्हें अपने बचपन में पानी के लिए बोरवेल से कुछ बाल्टी पानी लाने के लिए साइकिल से लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वे कहते हैं, “कभी-कभी मैं उस बोरवेल के लीवर को 10 मिनट तक खींचता था, तब जाकर एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता था।” उन्होंने चित्रदुर्ग जैसे सूखे इलाकों का भी जिक्र किया, जो दशकों से सूखे की मार झेल रहे हैं। पत्नी भी हैं आईएएस डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नागार्जुन गौड़ा ने UPSC की परीक्षा दी और 2019 बैच के IAS अधिकारी बने। उनकी पत्नी सृष्टि जयंत देशमुख ने भी UPSC में अच्छी रैंक हासिल की थी। बाद में नागार्जुन गौड़ा का कैडर मध्य प्रदेश ट्रांसफर हो गया। खंडवा में जिला पंचायत सीईओ के पद पर रहते हुए, नागार्जुन गौड़ा ने 'जल संचय, जन भागीदारी' (JSJB) अभियान को एक बड़े आंदोलन का रूप दिया। इस अभियान में गांव के कर्मचारियों से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक, सभी ने मिलकर किसानों, स्कूलों और आम लोगों को वर्षा जल संचयन अपनाने के लिए प्रेरित किया। जिले में 1.25 लाख से अधिक काम इस अभियान के कारण खंडवा जिले में 1.25 लाख से अधिक जल संरक्षण के काम हुए, जिनमें रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, रिचार्ज पिट और ट्रेंच जैसे 40 हजार से ज्यादा काम शामिल थे। इसी मेहनत के दम पर खंडवा को राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिला। एआई तस्वीरों को लेकर विवाद हालांकि, हाल ही में यह पुरस्कार AI-जनरेटेड तस्वीरों को लेकर विवादों में आ गया है। सोशल मीडिया पर IAS नागार्जुन गौड़ा को ट्रोल भी किया जा रहा है। इस पर उन्होंने और खंडवा जिला प्रशासन ने सफाई दी है कि JSJB पोर्टल और ‘कैच द रेन' (CTR) पोर्टल अलग-अलग हैं। खंडवा जिला प्रशासन के अनुसार, JSJB अवार्ड के मूल्यांकन में केवल असली तस्वीरों का ही इस्तेमाल हुआ था, जबकि CTR पोर्टल पर कुछ AI तस्वीरें शैक्षणिक उद्देश्य से अपलोड की गई थीं, जिनका राष्ट्रीय जल अवार्ड से कोई लेना-देना नहीं है। एक मीडिया रिपोर्ट में गलत खबरें छापी गई थीं, जिसका खंडवा जिला प्रशासन ने खंडन किया है।  

DAVV में डेटा गड़बड़ी, उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजने की तैयारी

इंदौर  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी सरकारी कालेज से प्राध्यापकों के अवकाश को लेकर ब्यौरा मांगा है। यह जानकारी केंद्र सरकार के समर्थ पोर्टल पर अपलोड की जानी है। इसे लेकर अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण यह है कि विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में वर्ष 2012 से अब तक प्राध्यापकों की छुट्टियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके चलते समर्थ पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने को लेकर कोई डेटा नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक अब प्रोफेसरों को आगे से अवकाश के लिए पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन मुताबिक बीते कई वर्षों से प्राध्यापकों की छुट्टियों से संबंधित आवेदन न तो संकलित किए गए और न ही उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया। अब जब उच्च शिक्षा विभाग ने अचानक यह जानकारी मांगी है तो विश्वविद्यालय के पास प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस डेटा नहीं है। इस स्थिति का पता चलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग ने दो दिनों के भीतर समर्थ पोर्टल पर छुट्टियों की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन रिकॉर्ड के अभाव में यह कार्य लगभग असंभव नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना किसी दस्तावेज या आवेदन के सही जानकारी देना मुश्किल है। इससे विश्वविद्यालय की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इस संकट से निपटने के लिए डीएवीवी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। पत्र के माध्यम से विभाग को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा और समयसीमा में छूट या वैकल्पिक समाधान की मांग की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। इसके लिए छुट्टियों से जुड़े रिकार्ड को व्यवस्थित और डिजिटल रूप में संधारित करने पर भी विचार किया जा रहा है। कुलसचिव प्रज्वल खरे का कहना है कि प्रोफेसरों के अवकाश से जुड़ा रिकॉर्ड अव्यवस्थित है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। वैसे उच्च शिक्षा विभाग को एक रिपोर्ट भी भेजेंगे।

रीवा बना पर्यटकों की पसंद, 80% बुकिंग के साथ होम स्टे और बैलगाड़ी में मजेदार अनुभव

रीवा  नए साल 2026 के आगमन का उत्साह चरम पर है और इसका सीधा असर रीवा के पर्यटन पर भी साफ दिखाई दे रहा है. 31 दिसंबर और 1 जनवरी को लेकर जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल और आस्था के केंद्र सैलानियों से गुलजार हो चुके हैं. यहां ठंडी फिजा और विंध्य की मनमोहक वादियां पर्यटकों को बड़ी संख्या में रीवा की तरफ खींच कर ला रही है. हालात यह हैं कि शहर के लगभग सभी होटलों की बुकिंग धड़ाधड़ शुरू है. जबकि सेमरिया क्षेत्र के पुरवा में बने होम-स्टे भी ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग के जरिए तेजी से फुल होते जा रहे हैं, क्योंकि रीवा के 4 सबसे खूबसूरत वाटर फॉल में से एक पूर्वा वाटर फॉल इसी क्षेत्र में है. नए वर्ष पर रीवा में बढ़ी पर्यटकों की संख्या रीवा में बीते कुछ वर्षों की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि इस बार न्यू ईयर पर रीवा में पर्यटन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि रीवा का पर्यटन अब केवल शहरी होटल और स्थलों तक सीमित नहीं रहा. पर्यटक अब ग्रामीण जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. गांवों में बने होम-स्टे, प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट और आसपास के हरियाली से भरपूर इलाके सैलानियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. पर्यटक क्यों कर रहें रीवा का रुख रीवा में कई ऐसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र हैं, जिनके बारे में जानकर पर्यटक नए वर्ष को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में यहां का रुख कर रहे हैं और रीवा को अपना बेहतरीन डेस्टिनेशन मान रहे हैं. यहां कल-कल बहती सुंदर नदियां, मनमोहक झरने, घने जंगल और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थल पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं. इसके साथ ही ग्रामीण संस्कृति को नजदीक से देखने और सादगी भरे जीवन का अनुभव करने का अवसर भी सैलानियों को रीवा की ओर खींच रहा है. न्यू ईयर के अवसर पर परिवारों और युवाओं की बढ़ती मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि रीवा अब नेचर और बेस्ट एक्सपीरियंस टूरिज्म के रूप में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना चुका है. रीवा में टेंपल टूरिज्म का नया दौर रीवा अब सिर्फ हरियाली, झरनों और जंगलों तक सीमित पहचान नहीं रखता, बल्कि यहां का टेंपल टूरिज्म भी तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है. श्रद्धा आस्था और सुकून की तलाश में रीवा का रुख करने वाले पर्यटक अब एक ही यात्रा में मंदिरों के दर्शन, प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों का अनुभव कर रहे हैं. यही अनोखा संगम रीवा को खास बनाता है, जहां आस्था, प्रकृति और इतिहास एक साथ सांस लेते नजर आते हैं. बढ़ती पर्यटक आमद और विविध अनुभवों की उपलब्धता ने रीवा को विंध्य क्षेत्र का उभरता हुआ पर्यटन केंद्र बना दिया है, जो हर वर्ग के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. ग्रामीण इलाकों के होम स्टे में छाई न्यू ईयर की रौनक न्यू ईयर के आगमन के साथ ही रीवा की होटल इंडस्ट्री और गांवों में बने होम स्टे पूरी तरह गुलजार नजर आ रहें है. शहर के ज्यादातर छोटे-बड़े होटलों से लेकर प्रीमियम होटल और रिसॉर्ट्स तक में एक सप्ताह पहले से ही लगभग फुल होने की कगार पर हैं. होटल संचालकों के मुताबिक 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सेलिब्रेट करने के लिए पहले ही बुकिंग हो चुकी हैं. यहां विंध्य के सतना, सीधी, शहडोल, सिंगरौली के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार समेत छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से पर्यटक बड़ी संख्या में रीवा पहुंच रहे हैं. नए साल में युवा ग्रुप की पसंदीदा जगह बन रहा रीवा परिवारों के साथ-साथ युवाओं के ग्रुप भी नए साल का जश्न मनाने के लिए रीवा को अपनी पसंद बना रहे हैं. कुछ सैलानी विंध्य क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो वहीं कई पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और ग्रामीण जीवन के अनूठे अनुभव की तलाश में रीवा का रुख कर रहे हैं. रीवा में है प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर और कई पर्यटन स्थल नववर्ष के अवसर पर रीवा शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ने की प्रबल संभावना है. ठंडक भरे सुहावने मौसम और नव वर्ष के माहौल के चलते पर्यटकों की आवाजाही में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. विशेष रूप से प्रसिद्ध मंदिरों, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, झरनों, पिकनिक स्पॉट और ऐतिहासिक धरोहरों पर पर्यटकों की संख्या अधिक रहने की उम्मीद है. होम स्टे बने आकर्षण का केंद्र न्यू ईयर के मौके पर इस बार रीवा के ग्रामीण क्षेत्रों में बने होम-स्टे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सेमरिया क्षेत्र के पुरवा गांव में विकसित किए गए 10 होम-स्टे खासतौर पर सैलानियों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं. होम-स्टे संचालक पुरवा गांव के निवासी अभय मिश्रा के अनुसार "यहां करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की गई है." यहां पर्यटकों को कराई जाती है बैल गाड़ी से गांव की सैर इन होम-स्टे की पहचान केवल ठहरने की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की आत्मा से रू-बरू कराने वाला अनुभव भी प्रदान करते हैं. संचालकों के अनुसार सैलानियों को बैलगाड़ी के माध्यम से पुरवा गांव, पुरवा वाटरफॉल, बसामन मामा और गौवंश अभ्यारण्य का भ्रमण कराया जाता है. इस दौरान पर्यटक गांव की गलियों से गुजरते हुए खेत-खलिहान, तालाब, पारंपरिक दिनचर्या और ग्रामीण परिवेश को नजदीक से देखते हैं, जिससे वे गांव की परंपराओं और ग्रामीणों की जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझ पाते हैं. प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है रीवा यही कारण है कि न्यू ईयर के मौके पर प्रकृतिक की गोद और सादगी भरे माहौल की तलाश में पहुंचे पर्यटक इन ग्रामीण होम-स्टे को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं. यहां सैलानियों को शुद्ध देसी बघेली भोजन परोसा जा रहा है, जिसमें स्थानीय व्यंजनों का पारंपरिक स्वाद झलकता है. वहीं शाम ढलते ही बघेली लोकगीतों और … Read more

इंदौर में दूषित जल आपूर्ति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव सख्त, उप यंत्री बर्खास्त, चार अधिकारी निलंबित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में दूषित जल आपूर्ति से संक्रमण को लिया गंभीरता से प्रभारी उप यंत्री को सेवा से किया बर्खास्त जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री निलंबित जांच के लिए समिति गठित इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनसामान्य का स्वास्थ्य, राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। घटना में लापरवाही पाये जाने पर जोन क्रमांक–4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री एवं प्रभारी सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। प्रभारी उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति भी गठित कर दी गई है। डायरिया के बढ़ रहे थे मामले बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज लगातार सामने आ रहे थे। 26 दिसंबर को गोमती रावत की मौत इस पूरे घटनाक्रम की पहली कड़ी थी। इसके बाद धीरे-धीरे बीमार लोगों की संख्या बढ़ती गई और पांच दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा आठ तक पहुंच गया। इसके बावजूद शुरुआती दौर में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहली मौत को पुरानी बीमारी बताकर मामला दबाने की कोशिश भी की गई, लेकिन जब हालात बिगड़ते चले गए तो प्रशासन हरकत में आया। 150 से अधिक लोग हुए बीमार इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक दिल्ली से इंदौर पहुंचे और वर्मा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इसके बाद सामने आया कि 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं और कई अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 125 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें वर्मा हॉस्पिटल में 30, ईएसआईसी हॉस्पिटल में 11, एमवाय हॉस्पिटल में 5, त्रिवेणी हॉस्पिटल में 7 और अरविंदो हॉस्पिटल में 2 मरीज शामिल हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया अभियान स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्वे और उपचार अभियान शुरू किया है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार अब तक 2703 घरों का सर्वे किया जा चुका है और करीब 12 हजार लोगों की जांच की गई है। इनमें से 1146 मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया जबकि 125 से अधिक मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। 18 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भागीरथपुरा की 15 गलियों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरीन टैबलेट, जिंक और ओआरएस का वितरण भी किया जा रहा है। शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइप लाइन जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि भागीरथपुरा में पुलिस चौकी से लगे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज था। आशंका जताई जा रही है कि इसी लीकेज के कारण गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 15 दिनों से बदबूदार और दूषित पानी आने की शिकायत कर रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इन पर हुई कार्रवाई मामले में लापरवाही बरतने पर नगर निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है। जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले को निलंबित किया गया है, प्रभारी सहायक अभियंता योगेश जोशी को सस्पेंड किया गया है, जबकि प्रभारी डिप्टी इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है जिसकी अध्यक्षता आईएएस नवजीवन पंवार कर रहे हैं। दो-दो लाख मुआवजे की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि 70 से अधिक पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जाएगा। जिन लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पैसे जमा किए हैं, उन्हें भी राशि वापस दिलाई जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में 50 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का खाना न खाने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।  

नए साल के स्वागत से एक दिन पहले बागेश्वर धाम में भक्तों की भारी उपस्थिति, प्रशासन और पुलिस तैनात

छतरपुर   बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में भक्त धाम पहुंच गए. इसके साथ ही भक्तों ने छतरपुर और खजुराहो के होटलों व धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है. ये भक्त नए साल की शुरुआत बागेश्वर धाम में हनुमानजी महाराज के दर्शन करके करेंगे. बागेश्वर धाम में भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. नए साल का स्वागत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ नए साल के अंतिम दिन भक्तों को संबोधित करते हुए बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा "जानकारी मिली है कि लाखों भक्त खजुराहो व छतरपुर के अलावा बागेश्वर धाम में पहुंच गए हैं. बागेश्वर धाम में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करके नए साल का स्वागत करेंगे. युवाओं में ये बड़ा बदलाव देखा जा रहा है कि लोग नए साल का शुभारंभ धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कर रहे हैं." सनातन धर्म के प्रति जागरूक हुए युवा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा "एक समय था जब युवा नए साल का स्वागत करने के लिए पबों, बारों और महंगे होटलों में जश्न मनाने पहुंचते थे. लेकिन अब युवा अयोध्या में रामलला के दर्शन करके, वाराणसी जाकर और बागेश्वर धाम आकर नए साल का आगाज कर रहे हैं. ये बताता है कि युवा भी सनातन धर्म के प्रति कितने जागरूक हो गए हैं. युवा पीढ़ी में आया ये बदलाव देश और समाज के हित में है." बागेश्वर धाम की रसोई में खास इंतजाम बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है. निःशुक्ल रसोई में विशेष इंतजाम किए गए हैं. इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन ने भी यहां खास इंतजाम किए हैं. यहां पिछले एक साल में करीब 50 लाख लोगों ने भोजन प्रसाद पाया है. रसोई अनवरत चालू रहती है. इसके अलावा एक वर्ष में धाम की गौशाला में 5 हजार पौधे रोपे गए हैं. शिवरात्रि के पावन पर्व पर 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया. कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज दिलाने के लिए बागेश्वर सरकार के मन में प्रेरणा हुई, जिससे दीन दुखियों की मदद के लिए उन्होंने कैंसर अस्पताल बनाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी 2025 को कन्या विवाह महा महोत्सव के अवसर पर आकर कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखी. मुंबई के भिवंडी में बालाजी सनातन मठ की स्थापना कराई गई है. बागेश्वर महाराज ने इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया, फिजी, ओमान, लंदन, दुबई, न्यूजीलैंड जैसे देशों की यात्रा करते हुए यहां कथा के माध्यम से लोगों में सनातन के प्रति जुड़ाव पैदा किया. बागेश्वर के सेवादार कमल अवस्थी कहते हैं "भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. पूरे साल धाम पर धार्मिक आयोजन चलते रहते हैं. सनातन की अलख जगाने के लिए महाराज बागेश्वर लगातार लगे हैं."

राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएँ, सकारात्मक शुरुआत का आह्वान

नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को दी नव वर्ष की शुभकामनाएँ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नववर्ष 2026 के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी है। उन्होंने कहा है कि नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है। यह समय है कि हम बीते अनुभवों से सीख लेते हुए मध्यप्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प लें। राज्यपाल पटेल ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। किसान, युवा, महिलाएँ और वंचित वर्गों का कल्याण सरकार की नीतियों के केंद्र में हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढाँचे और निवेश के क्षेत्र में संतुलित विकास की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि को लाभकारी बनाना, युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ना और मातृशक्ति को सशक्त करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधन और पर्यटन संभावनाएँ हमारे गौरव का आधार हैं।  हमें सदैव स्मरण रखना होगा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के बिना समृद्धि संभव नहीं है। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों का आह्वान  किया है कि सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता, जल संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों को अपनाते हुए विकास की इस यात्रा में सहभागी बने। नववर्ष 2026 में एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।