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गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, 21 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री देवड़ा ग्राम पिपलिया कराड़िया में 21 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपलिया कराड़िया में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से किए गए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि गांव जब आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, बच्चों एवं अभिभावकों को स्वच्छता अभियान में सहभागी बनाने तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज मल्हारगढ़ क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में सड़कों का व्यापक विकास हुआ है। सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, भवन एवं बिजली सहित प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे प्रदेश तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 01 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित पिपलिया कराड़िया गांव से हाईस्कूल पहुंच मार्ग एवं 01 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से निर्मित खण्डेरियामारू से नावनखेड़ी मार्ग का लोकार्पण किया। उन्होंने 7 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से लिलदा से नाहरगढ़ पित्याखेड़ी मार्ग का भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही 6 करोड़ 90 लाख 97 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरी तथा 1 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पिपलिया कराड़िया का भी लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम पाल्यामारु एवं ग्राम लीलदा में 65-65 लाख रुपये की लागत से निर्मित 2 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि के साथ जिले के अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

भोपाल में पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन, संचालक लोक शिक्षण ने किया शुभारम्भ

पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन भोपाल में संचालक लोक शिक्षण ने किया कार्यशाला का शुभारम्भ भोपाल राष्ट्रीय शैक्षिक नेतृत्व परिषद (एनसीएसएल) नीपा द्वारा 5 राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश की लीडरशिप एकेडमी की समीक्षा एवं योजना निर्माण कार्यशाला का आयोजन भोपाल में एनसीएसल (नेशनल लीडरशिप एकेडमी) नीपा द्वारा जा रहा है। यह कार्यशाला समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी तथा सीमेट के योजना निर्माण तथा लीडरशिप संबंधी कार्यो के राज्यों में संपादित कार्यों का रिव्यू एवं आगामी योजना निर्माण के संबंध में आयोजित की जा रही है। भोपाल के अशोका लेकव्यू में 29 से 31 दिसम्बर 2025 तक संचालित होने वाली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ संचालक लोकशिक्षण डी.एस. कुशवाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सीमेट के संचालक एवं उप सचिव प्रमोद सिंह, नीपा नई दिल्ली की कार्यशाला प्रभारी डॉ. तृप्ति सिंह, डॉ. योगेश पहाड़िया, डॉ. पंकज सिंह भी उपस्थित थे। कार्यशाला में विभिन्न आमंत्रित राज्यों द्वारा अपने अपने राज्यों में संपादित अनुकरणीय कार्यो (बेस्ट प्रेक्टिसेस) का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रत्येक प्रदेश से 5 से 6 अधिकारियों की सहभागिता की जा रही है। एनसीएसएल नीपा द्वारा मध्यप्रदेश लीडरशिप एकेडमी की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। वर्तमान में यह लीडरशिप एकेडमी, सीमेट के माध्यम से संचालित है। इसका नामांकन वर्ष 2023-24 में किया गया था। लीडरशिप एकेडमी के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक से लेकर राज्य स्तरीय अधिकारियों के लीडरशिप कार्यक्रमों, मॉड्यूल निर्माण और प्रशिक्षण आदि का संचालन संपादित किया जाता है। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केन्द्र एवं जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा उपलब्ध कराये गये कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा, विकास की दिशा में अहम कदम

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में रीवा बायपास निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में 6-लेन बायपास के अंतर्गत रतहरा चौराहा मार्ग के चौड़ीकरण और कैनाल क्रॉसिंग से जुड़े तकनीकी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि रीवा बायपास निर्माण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निर्माण के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्या को तत्काल उच्च स्तर में अग्रेषित किया जाए, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके और परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो। बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मॉर्थ) के क्षेत्रीय अधिकारी रविन्द्र कुमार तथा मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) के मुख्य अभियंता  राकेश जैन उपस्थित रहे।  

मंत्री कुशवाहा का बयान: समावेशी विकास के लिए सामाजिक न्याय से लेकर कृषि-उद्यानिकी तक मजबूत नींव रखी

विकास एवं सेवा के दो वर्ष सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की रखी मजबूत नींव : मंत्री कुशवाहा म.प्र. उद्यानिकी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य 2 वर्षों में उद्यानिकी रकबे में हुई सवा 3 लाख हैक्टेयर की वृद्धि भोपाल  सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन–2047 और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेश में गत 2 वर्षों में उद्यानिकी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हुए उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी 3 वर्षों में विभाग की कार्य योजनाओं के संबंध में अवगत कराया। उद्यानिकी में रिकॉर्ड वृद्धि गत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 25.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादन 389.10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 425.68 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। प्रदेश की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मध्यप्रदेश मसाला उत्पादन में प्रथम, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय और फल उत्पादन में चतुर्थ स्थान पर है। जीआई टैग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रीवा का सुंदरजा आम और रतलाम का रियावन लहसुन जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। प्रदेश की 15 फसलों का जीआई पंजीयन कराया गया है। इजराइल के तकनीकी सहयोग से मुरैना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा और हरदा में नए सीओई विकसित किए जा रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत 8,198 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं और 3,113 उद्यमियों को 108.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। सेंसर आधारित स्वचलित फर्टिगेशन, मखाना क्षेत्र विस्तार, एग्जोटिक सब्जी क्लस्टर, हाईटेक नर्सरी और इंक्यूबेशन सेंटर जैसे नवाचार लागू किए जा रहे हैं। आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना आगामी तीन वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 33.39 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, 15 हजार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और 25 फसलों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026: कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यानिकी को बढ़ावा, खाद्य प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास मंत्री कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत दो वर्षों में सामाजिक और शारीरिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव और प्रभावी पहल की हैं। दिव्यांगजनों की क्षमताओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6 लाख 97 हजार दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 41.87 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की जा रही है। साथ ही 9 लाख 89 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कृषि–उद्यानिकी के क्षेत्र में किए गए ये प्रयास प्रदेश को समावेशी, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, तकनीक और रोजगार पर विशेष फोकस दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 17 जिलों में शासकीय एवं अशासकीय विशेष विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया गया है। श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा प्रारंभ की गई है। अब तक 34 हजार 649 दिव्यांगजनों को 59 हजार से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। रोजगार सृजन के क्रम में 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था एटिपिकल एडवांटेज के साथ 2 दिसंबर 2025 को एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक संस्था द्वारा 5 दिव्यांगजनों को रोजगार दिया जा चुका है। खेल, विवाह प्रोत्साहन और विशेष उपलब्धियां दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 958 दंपत्तियों को लाभ दिया गया है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तैराकी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सत्येन्द्र लोहिया, रामबरन पाल एवं सद्दाम खान को पाँच–पाँच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वृद्धजनों का सम्मान: सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदेश में 81 वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें राज्य, केंद्र और जनसहयोग से संचालन हो रहा है। प्रति हितग्राही 2,200 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण सहायता सहित अन्य आवश्यक व्ययों का वहन किया जा रहा है। मंत्री कुशवाहा ने बताया कि राजधानी भोपाल में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पेड ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 100 प्रतिशत ई-केवाईसी प्रदेश की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 54 लाख से अधिक हितग्राहियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण किया गया है। प्रतिमाह 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित की जा रही है। नशामुक्त भारत अभियान: जनभागीदारी से जागरूकता “विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र” अभियान के तहत प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सहायता योजना: बड़ा सामाजिक संबल विगत 2 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 1 लाख 52 हजार हितग्राहियों को 838.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। पात्रता और आयोजन प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए योजना में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो सकें।  

कृषि मंत्री कंषाना ने की मंडी प्रांगणों को कृषि उन्मुख बनाने की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने की अपील

मंडी प्रांगणों को कृषि उन्मुख बनाने की प्रभावी कार्ययोजना करें तैयार : कृषि मंत्री कंषाना मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के संचालक मंडल की 144वीं बैठक भोपाल  किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि मंडी प्रांगणों को कृषक उन्मुख बनाये जाने के लिये प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाये। किसानों को मंडियों में बेहतर सुविधाएं, पारदर्शी विपणन व्यवस्था एवं फसलों का उचित मूल्य दिलाना भी सुनिश्चित किया जाये। कृषि मंत्री कंषाना मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के संचालक मंडल की 144वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सभी प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किये गये। बैठक में सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास निशांत बरबड़े, प्रबंध संचालक मंडी बोर्ड कुमार पुरुषोत्तम, पंजीयन सहकारी संस्था तथा मंडी बोर्ड के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव     किराये के वाहनों के देयक भुगतान की संचालक मंडल से स्वीकृति।     म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आवंटित वाहनों में माह अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक अवधि में पात्रता से अधिक डीजल/पेट्रोल व्यय की स्वीकृति।     भारत सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान अंतर्गत प्राईस डिफिसिट पेमेंट स्कीम में खरीफ वर्ष 2025 के लिये सोयाबीन भावांतर भुगतान।     योजना के सतत् क्रियान्वयन के लिये ऋण लिये जाने की स्वीकृति बावत्।     राष्ट्रीय कृषि बाजार योजनांतर्गत / राष्ट्रीय कृषि विकास योजना / बोर्ड निधि मद अंतर्गत स्वीकृत प्रोजेक्ट एपीएमसी में क्लीनिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग फेसिलिटी के संबंध में।     किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग सह अध्यक्ष मंडी बोर्ड से प्राप्त प्रस्ताव के अनुक्रम में बोर्ड निधि मद स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों का अनुसमर्थन।     प्रदेश अंतर्गत विभिन्न मण्डी समितियों में बोर्ड निधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों का अनुसमर्थन।     प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों में अपशिष्ट प्रबंधन के लिये वित्तपोषण बोर्ड निधि मद से करने सम्बन्धी अनुमोदन।  

मध्यप्रदेश का 2026 हॉलीडे कैलेंडर घोषित, 127 दिन होंगे अवकाश, फाइव-डे वर्किंग नियम लागू

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी साल 2026 के लिए सरकारी छुट्टियों का कैलेंडर फाइनल कर लिया है। नए कैलेंडर के साथ ये भी स्पष्ट हो गया है कि, अगले वर्ष राज्य के सरकारी कर्मचारियों को कितने दिन छुट्टी मिलेगी और कितने दिन काम करना होगा। ये आम लोगों के लिए भी लाभकारी होगा, इसी के आधार पर हम संबंधित विभाग में काम के लिए कार्य दिवस में जा सकेंगे। राज्य सरकार के अनुसार, साल 2026 में कुल 127 दिन छुट्टी रहेगी। ऐसे में यहां 238 दिन सरकारी दफ्तर खुलेंगे। इन अवकाशों में शनिवार, रविवार और सार्वजनिक छुट्टी भी शामिल हैं। छुट्टियों पर गौर करें तो साल 2026 में 52 शनिवार, 52 रविवार और 23 सार्वजनिक अवकाश शामिल हैं। यानी पूरे साल में आधे से ज्यादा दिन कार्यालय बंद रहेंगे। कार्यदिवसों की संख्या 238 रहेगी, जिसमें सामान्य प्रशासन और शासकीय कामकाज किया जाएगा। 2025 की तुलना में एक छुट्टी का इजाफा साल 2025 की तुलना में 2026 में कर्मचारियों को एक सार्वजनिक अवकाश अधिक मिलेगा। सरकार ने इस बार गणेश चतुर्थी (14 सितंबर) को भी सार्वजनिक अवकाश की सूची में शामिल किया है, जिससे कुल सार्वजनिक छुट्टियों की संख्या 23 हो गई है। इसके अलावा, कर्मचारियों को 62 ऐच्छिक अवकाशों की एक लंबी सूची भी दी गई है, जिसमें से वे अपनी सुविधानुसार किन्हीं तीन छुट्टियों का चुनाव कर सकते हैं। साल 2026 में सरकारी कर्मचारियों को 2025 की तुलना में एक सार्वजनिक अवकाश अधिक मिलेगा। इस बार गणेश चतुर्थी को सार्वजनिक अवकाश की सूची में जोड़ा गया है। 14 सितंबर को पड़ने वाली इस छुट्टी के शामिल होने से कुल सार्वजनिक अवकाशों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। इससे त्योहारों के दौरान कर्मचारियों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। ऐच्छिक अवकाश भी निर्धारित इसके अलावा राज्य सरकार ने कर्मचारियों के लिए 62 ऐच्छिक अवकाश भी निर्धारित किए हैं। हालांकि, इनमें से कर्मचारियों को सिर्फ 3 छुट्टियां ही चुनने की अनुमति होगी। ये अवकाश अलग-अलग धर्मों, समाजों और स्थानीय पर्वों से जुड़े हैं, ताकि कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत आस्था और जरूरत के हिसाब से छुट्टी दी जा सके। 6 बड़े त्योहार वीकेंड पर हालांकि, इस कैलेंडर में कर्मचारियों को थोड़ी चिंता में डालने वाली बात भी सामने आई है। वो ये कि, साल 2026 में पड़ने वाले 6 प्रमुख त्योहार और जयंतियां शनिवार या रविवार को पड़ रही हैं। इसका मतलब ये है कि, इन मौकों पर अलग से अतिरिक्त छुट्टी नहीं दी गई है। इससे लगातार छुट्टियों का फायदा उठाने की संभावनाएं कम हुई हैं और लंबी यात्रा या पारिवारिक योजनाओं पर असर पड़ने की संभावना बढ़ी है। फाइव-डे वर्किंग सिस्टम रहेगा सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि सप्ताह में पांच दिन काम करने की व्यवस्था यानी फाइव-डे वर्किंग सिस्टम आगे भी जारी रहेगा। ये व्यवस्था कोरोना महामारी के दौरान लागू हुई थी और तब से कर्मचारी इसे बनाए रखने की मांग कर रहे थे। लंबे समय से चर्चा थी कि, पहले और तीसरे शनिवार को कार्यदिवस बनाया जा सकता है, लेकिन सरकार ने फिलहाल इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया है। ड्यूटी आवर में भी कोई बदलाव नहीं सरकार के स्तर पर काम के घंटे बढ़ाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन था। हालांकि इस पर कर्मचारियों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, मौजूदा ड्यूटी आवर ही लागू रहेंगे। नए कैलेंडर के साथ अब कर्मचारियों और विभागों की वार्षिक कार्ययोजना भी इसी के अनुसार तय की जाएगी। शनिवार-रविवार ने 'खाई' 6 छुट्टियां, कर्मचारियों को नुकसान हालांकि 2026 में 6 महत्वपूर्ण त्योहार और जयंतियां शनिवार या रविवार को पड़ रही हैं, जिससे कर्मचारियों को अलग से छुट्टी का लाभ नहीं मिल पाएगा। इन प्रमुख त्योहारों के वीकेंड पर पड़ने से कर्मचारियों को लगातार मिलने वाली छुट्टियों के अवसर कम हो गए हैं, जिसका असर उनके घूमने-फिरने या लंबे अवकाश की योजनाओं पर पड़ सकता है। कर्मचारियों के लिए 62 ऐच्छिक अवकाशों का विकल्प सार्वजनिक अवकाशों के अलावा, कर्मचारी दिए गए 62 ऐच्छिक अवकाशों में से कोई भी तीन चुन सकते हैं: अवकाश नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन (1 जनवरी 2026 से लागू) सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1977 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, जो 1 जनवरी, 2026 से लागू होंगे। इन बदलावों का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ेगा।     संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव): महिला कर्मचारियों को मिलने वाले 730 दिनों के संतान पालन अवकाश के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अवकाश के पहले 365 दिनों के लिए पूरा वेतन मिलेगा, लेकिन दूसरे 365 दिनों के लिए केवल 80% वेतन का ही भुगतान किया जाएगा। यह अवकाश 18 वर्ष तक की संतान के लिए स्वीकृत होगा।     अवकाश लेने की सीमा: एक कैलेंडर वर्ष में कोई भी कर्मचारी तीन बार से अधिक संतान पालन अवकाश नहीं ले सकेगा। हालांकि, एकल महिला (सिंगल मदर) कर्मचारियों को विशेष छूट देते हुए एक कैलेंडर वर्ष में छह बार तक यह अवकाश लेने की पात्रता दी गई है।     शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश: प्रदेश के साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को अब वर्ष में दस दिन के अर्जित अवकाश की पात्रता होगी, जो उनके लिए एक बड़ी राहत है। 5-डे वर्किंग सिस्टम रहेगा जारी प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि सप्ताह में पांच दिन (सोमवार से शुक्रवार) काम करने की व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी। कोरोना महामारी के दौरान संक्रमण को रोकने के लिए इस व्यवस्था को लागू किया गया था। लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि सरकार पुरानी व्यवस्था (पहले और तीसरे शनिवार को कार्य दिवस) को फिर से बहाल कर सकती है, लेकिन फिलहाल इसे यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही काम के घंटे बढ़ाए जाने को लेकर भी प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बनी। दशहरा से पहले अतिरिक्त छुट्टी का प्रस्ताव खारिज भोपाल के जिला प्रशासन ने दशहरा के एक दिन पहले स्थानीय अवकाश का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा था। विभाग ने इसे आगे भी बढ़ाया, लेकिन मुख्य सचिव कार्यालय से इसे हरी झंडी नहीं मिली। इसका कारण यह बताया गया कि अक्टूबर महीने में पहले से ही कई छुट्टियां थीं … Read more

खंडवा में फर्जीवाड़े का आरोप: कलेक्टर और सीईओ ने कहा, अवॉर्ड के लिए लगाए गए सभी आरोप झूठे

खंडवा   केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान (JSJB 1.0)’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए खंडवा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। खंडवा के कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ राष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड लेने दिल्ली गए थे। दो करोड़ रुपए की इनाम राशि जिले को मिला था। अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस इनाम के लिए फर्जीवाड़ा हुआ है। काम दिखाने के लिए एआई की तस्वीरें अपलोड की गईं। इन आरोपों पर खंडवा कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ ने सच बताया है। साथ ही मीडिया की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। छवि धूमिल करने की है कोशिश खंडवा जिला प्रशासन ने आधिकारिक रूप से उस रिपोर्ट को भ्रामक, तथ्यहीन और प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है। जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का अभियान से कोई संबंध नहीं है। समाचार बिना सत्यापन और अपूर्ण जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया। अभियान में 1.29 लाख जल संरक्षण कार्यों की फोटो अपलोड डॉ. गौड़ा ने जानकारी दी कि JSJB 1.0 अभियान पिछले वर्ष शुरू हुआ था और 31 मई 2025 को समाप्त हो चुका था। अभियान के दौरान जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी स्तर पर जनभागीदारी से विभिन्न संरचनाएं तैयार कराई गईं। मीडिया रिपोर्ट में 1714 फोटो की जानकारी उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में मात्र 1714 फोटो अपलोड करने का दावा किया गया है, जबकि वास्तविक रूप से 1,29,046 कार्यों की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई, जिसका डेस्क और फील्ड वेरिफिकेशन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया गया। इसी आधार पर खंडवा को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इन संरचनाओं में रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट, डगवेल-बोरवेल रिचार्ज, चेकडैम और स्टॉपडैम की मरम्मत, गली प्लग, बोल्डर वॉल, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन पॉन्ड सहित कई कार्य शामिल थे। प्रशासन के अनुसार अभियान में न्यूनतम लागत और अधिकतम जनभागीदारी को सिद्धांत बनाया गया। आरोपों पर दी सफाई अक्टूबर 2025 की जिन फोटो को आधार बनाकर आरोप लगाए गए हैं, वे जल शक्ति अभियान- कैच द रेन के पोर्टल की हैं, जो JSJB 1.0 से पूरी तरह अलग है। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि पुरानी जनसुनवाई शिकायतों को मिलाकर भ्रम फैलाने का प्रयास है। गौड़ा ने कहा कि रिपोर्ट पुरानी जनसुनवाई शिकायतों पर आधारित है, जिन पर पहले ही जांच और कार्रवाई की जा चुकी है। इसे राष्ट्रीय पुरस्कार से जोड़ना एक सुनियोजित भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। कौन हैं डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता गौरतलब है कि डॉ नागार्जुन बी गौड़ा 2019 बैच के अधिकारी हैं। हरदा में पोस्टिंग के दौरान भी इन पर जुर्माना माफ करने और जमीन खरीदने के आरोप लगा थे। वह मूल रूप से कर्नाटक के निवासी हैं। एमबीबीएस करने के बाद 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले मणिपुर कैडर मिला था। इसके बाद कैडर ट्रांसफर करवाकर एमपी आए है। अभी खंडवा जिला पंचायत के सीईओ हैं। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल की वजह से चर्चा में हैं। इसी काम में जिला प्रशासन पर खेल करने का आरोप लगा है।

मध्यप्रदेश में शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बड़ा बदलाव, 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और आयुष महाविद्यालयों की शुरुआत

प्रदेश में 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना, शिक्षा में गुणात्मक सुधार का नया अध्याय मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) का परिसर अब भोपाल के RGPV में संचालित आयुष क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्वीकृति और 800 आयुष आरोग्य मंदिरों का संचालन प्रारंभ उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उपलब्धियों की दी जानकारी भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में "दो वर्षों की विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजनाओं" को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग के दो वर्षों की उपलब्धियां एवं आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना साझा की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, प्रमुख सचिव आयुष डी पी आहूजा, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा आर माहेश्वरी एवं आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारगण उपस्थित थे। उच्च शिक्षा की प्रमुख विभागीय उपलब्धियां और नवाचार उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग अपनी स्पष्ट नीतियों और नवाचारों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के अनुरूप उच्च शिक्षा को गुणात्मक, बहुविषयक, रोजगारोन्मुखी और समावेशी बनाने के लिए विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। शैक्षणिक सुधार और नवीन विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूर्ण रूप से लागू किया गया है । साथ ही, वर्तमान सत्र से एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और अंतःविषय (Interdisciplinary) विकल्प भी शुरू किए गए हैं । तीन नए विश्वविद्यालयों—गुना में क्रांतिवीर तात्या टोपे, खरगोन में क्रांति सूर्य टंट्या भील, और सागर में रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक, कुल 55 महाविद्यालयों को 'प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में उन्नत किया गया है । इसके लिए ₹336 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है और 1845 नवीन पद सृजित किए गए हैं। रोजगार और प्लेसमेंट, भारतीय ज्ञान परंपरा का संरक्षण मंत्री परमार ने बताया कि स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के तहत 378 रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों के जरिए 16,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है । अब तक 1,655 विद्यार्थियों का प्रत्यक्ष प्लेसमेंट सुनिश्चित हुआ है । इसके अलावा, IIT दिल्ली के सहयोग से 68 कॉलेजों में AI और FinTech जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। परमार ने बताया कि पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करने के लिए विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं ताकि विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें । डिजिटल नवाचार, छात्र कल्याण मंत्री परमार ने बताया कि विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और मोबाइल-फ्रेंडली बनाया है, जिससे पोर्टल शुल्क समाप्त होने पर विद्यार्थियों को ₹5 करोड़ का सीधा लाभ हुआ है । प्रदेश में 1047 स्मार्ट क्लासरूम, 200 वर्चुअल लैब और 544 ई-लाइब्रेरी विकसित की गई हैं। वर्ष 2024-25 में 'गांव की बेटी योजना' से 1.34 लाख से अधिक और 'प्रतिभा किरण योजना' से 7,500 से अधिक छात्राएं लाभान्वित हुई हैं । अनुसूचित जाति/जनजाति के लगभग 3.91 लाख विद्यार्थियों को निशुल्क पुस्तकें और स्टेशनरी प्रदान की गई है । भर्ती प्रक्रिया एवं सकल नामांकन अनुपात मंत्री परमार ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए लोक सेवा आयोग के माध्यम से वर्ष 2022 में 2053 पदों पर भर्ती की गई और वर्तमान में 2197 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। परमार ने कहा कि आने वाले समय में सकल नामांकन अनुपात (GER) को वर्तमान 28.9% से बढ़ाकर 35% तक ले जाने का लक्ष्य है । मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर अनुभव, अनुसंधान और व्यावहारिक ज्ञान के पथ पर अग्रसर है। तकनीकी शिक्षा की प्रमुख विभागीय उपलब्धियां और नवाचार तकनीकी शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन और कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश का तकनीकी शिक्षा विभाग प्रदेश के युवाओं को 'आत्मनिर्भर' और 'वैश्विक प्रतिस्पर्धी' बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। "विकास और सेवा के 2 वर्ष" के अंतर्गत विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रमों में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। प्रवेश और नामांकन में बड़ी उछाल मंत्री परमार ने बताया कि सत्र 2025-26 में विभाग द्वारा चलाए गए विशेष जागरूकता अभियानों के कारण शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों के सकल नामांकन में 21.38% की वृद्धि हुई है। वहीं, ऑनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 25.99% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। छात्र कल्याण और वित्तीय सहायता मंत्री परमार ने बताया कि प्रदेश के मेधावी छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 78,218 लाभार्थियों को ₹750 करोड़ की राशि वितरित की गई। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के तहत 14,447 विद्यार्थियों को ₹14.55 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। शैक्षणिक नवाचार और राष्ट्रीय संस्थान मंत्री परमार ने बताया कि मध्यप्रदेश के लिए यह गर्व का विषय है कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU), गांधीनगर का परिसर अब भोपाल स्थित RGPV में स्थापित हो चुका है, जहाँ सत्र 2025-26 से प्रवेश भी प्रारंभ हो गए हैं। साथ ही, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के 50 मेधावी विद्यार्थियों को IIT इंदौर और 50 छात्राओं को MANIT भोपाल में अध्ययन की विशेष सुविधा प्रदान की गई है । भविष्य की कार्ययोजना और सुधार मंत्री परमार ने बताया कि आगामी वर्षों में विभाग AI, ड्रोन तकनीक जैसे नवीनतम पाठ्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगा। प्रदेश के सभी शासकीय तकनीकी संस्थानों में एक समर्पित 'डिजिटल सेल' का गठन किया जाएगा और विद्यार्थियों की उपस्थिति 'सार्थक ऐप' के माध्यम से रियल-टाइम सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, सिंगरौली में ₹76.56 करोड़ की लागत से खनन प्रौद्योगिकी महाविद्यालय (College of Mining Technology) का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। परमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन … Read more

राज्यपाल पटेल ने कहा, विजेता खिलाड़ी महिला सशक्तिकरण का प्रतीक हैं

विजेता खिलाड़ी महिला सशक्तिकरण का प्रतीक : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने किया ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप-2025 की विजेता खिलाड़ियों का सम्मान राष्ट्रीय टीम की प्रदेश की खिलाड़ियों ने लोकभवन में की सौजन्य भेंट भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ब्लाइंड महिला टी-20 वर्ल्ड कप – 2025 की विजेता टीम की बेटियां महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। कार्यक्रम में विजेता होना दिव्यांगजनों के हौसलें और दिव्यता का उत्कृष्ट उदाहरण है। बेटियों की उपलब्धि प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग महिला खिलाड़ियों ने मध्यप्रदेश और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया है। राज्यपाल पटेल सोमवार को राष्ट्रीय ब्लाइंड महिला टी-20 टीम की प्रदेश की खिलाड़ी सुसुषमा पटेल, सुसुनीता सराठे और सुदुर्गा येवले से लोकभवन में चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल ने तीनों खिलाड़ियों का शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। उन्होंने खिलाड़ियों और उनके कोच का भी उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल पटेल ने उन्हें बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। भारतीय महिला (ब्लाइंड) क्रिकेट टीम ने 23 नवम्बर 2025 को कोलंबो में आयोजित टी-20 वर्ल्डकप के फ़ाइनल मैच में नेपाल को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस राष्ट्रीय टीम में मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सुसुनीता सराठे , दमोह ज़िले की सुसुषमा पटेल और बैतुल ज़िले की सुदुर्गा येवले प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल रहीं हैं।  

ग्वालियर स्टेशन की सुरक्षा में लापरवाही: 33 सीसीटीवी कैमरे डेढ़ साल से बंद, यात्रियों की सुरक्षा खतरे में

ग्वालियर  झांसी मंडल का दूसरा बड़ा स्टेशन ग्वालियर है। जहां प्रतिदिन करीब 65 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है। वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही आ रही है। स्टेशन परिसर में लगभग डेढ साल से जीआरपी के 33 सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हुए है। जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इन बंद कैमरों के कारण किसी भी घटना के बाद फुटेज तक नहीं मिल पाते है। जिससे महीनों तक उस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। जबकि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़ भाड़ वाले इलाके में सीसीटीवी निगरानी काफी जरूरी है। स्टेशन परिसर में चोरी, झपटमारी, गुमशुदगी या संदिग्ध गतिविधियों के मामले जीआरपी के पास ही आते है। रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के चलते इन कैमरों को हटा दिया गया है। इंटरसिटी में चोरी का नहीं लगा सुराग ग्वालियर से इंदौर की तरफ जाने वाली इंटरसिटी में 20 नवंबर को एक महिला यात्री के ट्रेन में चढ़ते समय बैग से आभूषणों का डिब्बों गायब हो गया। महिला यात्री के पर्स में से किसी ने इस डिब्बे को निकाल लिया। इस मामले में जीआरपी नैरोगेज ने कुछ लोगों से पूछताछ की। लेकिन फुटेज नहीं मिलने से अभी तक चोर पकड़ में नहीं आ पाए है। इसी तरह की अन्य घटनाएं भी हो चुकी है। लेकिन फुटेज के चक्कर में जांच पूरी नहीं हो पाई है। इससे पीडि़त आज भी थानों के चक्कर काट रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद रेलवे स्टेशन पर लगातार कैमरे नहीं होने से अपराधियों के हौसले भी बुलंद है। यहां सबसे ज्यादा प्लेटफार्म एक पर परेशानी है। जबकि सबसे ज्यादा यात्रियों की भीड़ भी इसी प्लेटफार्म पर रहती है। ऐसे में अपराधी भी इसी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निशाना किसी भी घटना को लेकर बनाते है। सबसे अच्छे जीआरपी के कैमरे वहीं बंद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए रेलवे, आरपीएफ और जीआरपी के कैमरे लगे हुए है। इसमें सबसे अच्छी क्वालिटी के कैमरे जीआरपी के ही है। यहीं कैमरें बंद पड़े हुए है। उसके बाद सबसे खराब क्वालिटी के कैमरे के है। इन कैमरों में पास के लोग ही नहीं दिखते है। वहीं आरपीएफ के कैमरें प्लेटफॉर्म चार पर सबसे ज्यादा है। इनका कहना है एजीएम से कर चुके है शिकायत कैमरें न होने की शिकायत अभी हाल ही में एजीएम के निरीक्षण के दौरान की थी। लेकिन कैमरे न होने से कई बार मामले नहीं सुलझ पाते है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर रेलवे के कई अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन कुछ नहीं हुआ है। दीपशिखा सिंह, टीआई नैरोगेज जीआरपी अधिकारियों को है जानकारी जीआरपी के कैमरे लगभग डेढ साल से बंद है। इसकी जानकारी रेलवे के अधिकारियों को भी है। इन कैमरों के बंद होने से कई बार हमारी जांचे भी प्रभावित होती है। ऐसे में काफी परेशानी आ रही है। इसके लिए स्टेशन निर्माण कर रही कंपनी से भी अब बात करेंगे। जितेंद्र सिंह चंदेलिया, टीआई जीआरपी