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ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सियासी घमासान, बृजभूषण सिंह बोले—और लोगों को बुलाने में क्या दिक्कत?

भोपाल अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक को सही ठहराया है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगली बार जब ऐसी बैठक हो तो उसमें शामिल होने वालों की संख्या बढ़े। बृजभूषण ने न केवल इस बैठक को सही ठहराया, बल्कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नाराजगी और चेतावनी को भी गलत करार दिया। ब्राह्मण विधायकों की इस बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। उन्होंने कहा, "अच्छा होता कि इस बैठक में कुछ और लोग भी शामिल होते। इस बैठक में न तो भाजपा के खिलाफ कुछ बोला गया और न ही मुख्यमंत्री के खिलाफ। जब कोई विरोध ही नहीं हुआ, तो इसमें दिक्कत कहां है? मुझे तो इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती।" भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा विधायकों को दी गई चेतावनी पर बृजभूषण ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की आधिकारिक चेतावनी नहीं है, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष के व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, "प्रदेश अध्यक्ष ने क्यों चेतावनी दी? यह उनकी अपनी सोच हो सकती है। अगर विधायकों ने पार्टी विरोधी कोई वक्तव्य दिया होता, तब मैं समझता कि यह सही है या गलत। लेकिन अपनी जाति या समाज के लिए साथ बैठना कोई अपराध नहीं है।" बृजभूषण शरण सिंह ने राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित किए जाने वाले जातिगत सम्मेलनों का उदाहण दिया। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक पार्टियां खुद जातिवार कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित करती हैं, तो उसे गुनाह नहीं माना जाता। फिर अगर ब्राह्मण या राजपूत विधायक एक साथ बैठ गए, तो इसे लेकर इतना हंगामा क्यों है? उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "मैं इस बैठक का स्वागत करता हूं, मुझे यह पसंद है। अगर किसी को यह बुरा लगा है, तो मुझे नोटिस दिलाइए। जिस दिन जाति आधारित सम्मेलन बंद हो जाएंगे, उस दिन ऐसी बैठकें भी अपने आप बंद हो जाएंगी।" क्या है पूरा विवाद? गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के कुछ ब्राह्मण विधायकों ने एक अनौपचारिक बैठक की थी, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं। इसे पार्टी के भीतर एक गुटबाजी के तौर पर देखा जा रहा था, जिसके बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नाराजगी जाहिर करते हुए अनुशासन बनाए रखने की चेतावनी दी थी। अब बृजभूषण शरण सिंह के इस समर्थन ने पार्टी के भीतर के मतभेदों को सतह पर ला दिया है।

हाईकोर्ट का मानवीय आदेश: नाबालिग रेप पीड़िता की डिलीवरी को मंजूरी, इलाज का खर्च सरकार देगी

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 16 साल की रेप पीड़िता गर्भवती को बच्चे को जन्म देने की इजाजत दी है। यही नहीं कोर्ट ने राज्य सरकार को डिलीवरी का खर्च वहन करने के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि पीड़िता ने आरोपी से शादी की है ऐसे में बिना उसकी सहमति के गर्भपात की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकारी डिलीवरी की जिम्मेदारी संभालेगी। कोर्ट ने बच्चे की डिलीवरी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल में एक्सपर्ट मेडिकल टीम की देखरेख में करवाने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी 11 दिसंबर के आदेश की एक प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई। इस मामले में एक जिला अदालत ने हाई कोर्ट को नाबालिग रेप पीड़िता के गर्भपात के बारे में लिखा था। हाई कोर्ट ने इसके बाद एक मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता की उम्र 16 साल है और उसके पेट में पल रहा बच्चा 29 हफ्ते और 1 दिन का है। मेडिकल बोर्ड ने ये भी बताया कि पीड़िता से गर्भपात करवाने और न करवाने के बारे में भी पूछा गया और उसने बच्चे को जन्म देने का फैसला लिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकारी डिलीवरी की जिम्मेदारी संभालेगी। माता-पिता ने छोड़ा साथ बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने कहा है कि उसने बच्चे के पिता (आरोपी) से शादी की है और वे बच्चे को जन्म देना चाहती है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि लड़की ने अपनी मर्जी से शादी की है और उसके पेरेंट्स बेटी को अपने साथ नहीं रखना चाहते। पेरेंट्स का कहना है कि उनका अपनी बेटी से अब कोई रिश्ता नहीं। बिना सहमति गर्भपात नहीं सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद कोर्ट ने ये सुनिश्चित किया कि पीड़िता की सहमति के बिना गर्भपात नहीं करवाया जा सकता। साथ ही कोर्ट ने बाल कल्याण समिति को निर्देश दिए कि जब तक लड़की 18 साल की नहीं हो जाती तब उसका ख्याल रखना होगा और साथ ही उसके बच्चे की सुरक्षा का भी ख्याल रखना होगा।  

बीयर का बोलबाला, मध्य प्रदेश में पियक्कड़ों की पहली पसंद बनी ठंडी बीयर

भोपाल मध्य प्रदेश में शराब पीने का तरीका बदल गया है। अब लोग 'ठंडी बीयर' सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह देसी दारू और IMFL (इंडियन-मेड फॉरेन लिकर) दोनों से आगे निकल गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीयर की बिक्री IMFL से तीन गुना ज्यादा है, जबकि देसी दारू की बिक्री IMFL से दोगुनी है, लेकिन बीयर से कम है। एमपी में बीयर का प्रेम बढ़ा यह बदलाव पिछले पांच सालों में आया है। 2021-22 तक, एमपी में देसी दारू की बिक्री सबसे ज्यादा होती थी। लेकिन अब बीयर की खपत हर साल बढ़ रही है और पिछले तीन सालों से यह सबसे ऊपर है। बीयर के बाद, एमपी में सबसे ज्यादा देसी दारू पी जाती है। 2020-21 में देसी दारू की 899.16 लाख प्रूफ लीटर बिक्री हुई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1522.76 लाख प्रूफ लीटर हो गई। 2025-26 में नवंबर तक 921.79 लाख प्रूफ लीटर देसी दारू की खपत हो चुकी थी। पांच सालों में दोगुनी हुई अंग्रेजी खपत IMFL की बिक्री भी पिछले पांच सालों में दोगुनी हुई है, लेकिन यह बीयर और देसी दारू से कम है। 2020-21 में IMFL की 420.65 लाख प्रूफ लीटर बिक्री हुई थी, जो 2024-25 में बढ़कर 720.75 लाख प्रूफ लीटर हो गई। 2025-26 में नवंबर तक 555.90 लाख प्रूफ लीटर IMFL की खपत हुई। 2020-21 और 2021-22 में देसी दारू की बिक्री क्रमशः 899.16 लाख प्रूफ लीटर और 1020.50 लाख प्रूफ लीटर थी। वहीं, इसी दौरान बीयर की बिक्री 840.77 लाख बल्क लीटर और 962.42 लाख बल्क लीटर थी। विधानसभा में मंत्री ने दी जानकारी यह जानकारी डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 18 दिसंबर को राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर दी। शराब की बिक्री बढ़ने से सरकार के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 में आबकारी विभाग का राजस्व 9520.96 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 15254 करोड़ रुपये हो गया।

दुनिया में घटे गिद्ध, पन्ना में बढ़ी उड़ान, पर्यावरण के लिए अच्छी खबर

पन्ना  देश और दुनिया में गिद्धों की संख्या लगातार घटती जा रही है, लेकिन इसके विपरीत दक्षिण पन्ना वनमंडल अंतर्गत पवई क्षेत्र के जंगलों में गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही पेंटेड स्टार्क और दुर्लभ ब्लैक स्टार्क जैसे पक्षियों की मौजूदगी भी बढ़ी है, जिसे पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से बेहद सुखद संकेत माना जा रहा है। शीत ऋतु के आगमन के साथ ही दक्षिण पन्ना वनमंडल की पवई रेंज में प्रवासी पक्षियों की सक्रियता देखी जा रही है। हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर यूरेशियन ग्रिफॉन और हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध, पेंटेड स्टार्क तथा दुर्लभ ब्लैक स्टार्क यहां पहुंचे हैं। ये प्रवासी पक्षी आगामी लगभग तीन माह तक पवई के घने जंगलों में प्रवास करेंगे। यूरोपीय गिद्धों की मौजूदगी भी दर्ज की गई वन विभाग के अनुसार, यूरेशियन ग्रिफॉन गिद्ध कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया से, जबकि हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध हिमालय, तिब्बत और मध्य चीन क्षेत्र से लंबी यात्रा कर पवई पहुंचे हैं। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पवई के जंगलों में यूरोपीय गिद्धों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है, जो हजारों किलोमीटर की यात्रा कर यहां तक पहुंचे हैं। सुरक्षित और अनुकूल आवास बनकर उभरा है वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयासों और सतत वन प्रबंधन के चलते दक्षिण पन्ना वनमंडल प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बनकर उभरा है। यह क्षेत्र की जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाने के साथ-साथ गिद्ध संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक और उत्साहजनक संकेत है।  

मध्य प्रदेश की अहम रेल लाइन: तीन जिलों को जोड़कर इंदौर से जबलपुर का सफर होगा आसान

इंदौर इंदौर के मांगलिया क्षेत्र में इंदौर-बुधनी रेल लाइन का कार्य प्रारंभ हो गया है। यहाँ के खेतों और खलिहानों में रेलवे के लिए ब्रिज, अंडरपास तथा ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। कुल 205 किलोमीटर लंबी इस लाइन के बन जाने से एक हजार से अधिक कस्बे और गाँव सीधे तौर पर रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। तय समयसीमा की तुलना में यह कार्य काफी पिछड़ चुका है, परंतु अब पूरी लाइन को पूर्ण करने का लक्ष्य वर्ष 2030 निर्धारित किया गया है। इंदौर, देवास और सीहोर जैसे तीन जिलों को जोड़ने वाली यह मध्य प्रदेश की एक बड़ी रेल परियोजना है, जो इंदौर से जबलपुर के बीच की दूरी को कम करेगी। जिन गांवों से यह लाइन गुजर रही है, वहाँ के किसान इस योजना का विरोध कर रहे थे। इस कारण प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने में कई बाधाएं आईं, लेकिन अब अधिकांश गांवों में भू-अर्जन की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इस परियोजना का सर्वाधिक विरोध पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में देखा गया था। इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में हो रहे विलंब का विषय लोकसभा में भी उठाया जा चुका है। इंदौर के मांगलिया गाँव और बुधनी के बीच इस नई रेल लाइन के कार्य को 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई है। इस बार के रेल बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वाधिक राशि का प्रावधान किया गया है। अब तक इस परियोजना पर लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जिसमें से अधिकांश राशि मुआवजे के वितरण में खर्च हुई है। सांसद शंकर लालवानी के अनुसार अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और रेलवे की समीक्षा बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा है।    प्रोजेक्ट से फायदा यह फायदा – इंदौर से मुंबई और दक्षिण भारत के यात्रा समय में कमी आएगी। – भोपाल और इटारसी के व्यस्त मार्ग (घाट सेक्शन बुदनी से बरखेड़ा ) को बायपास कर बुधनी को इंदौर से सीधे जोड़ना। – यह रेल लाइन बुधनी के मौजूदा यार्ड से शुरू होकर इंदौर के पास पश्चिम रेलवे के मांगलिया गांव स्टेशन से जुड़ेगी। – रेल लाइन सीहोर, देवास एवं इंदौर जिलों को जोड़ेगी। किसानों को अपनी उपज बड़े शहरों तक लाने में आसानी होगी। – यह रेललाइन नसरुल्लागंज, खातेगांव और कन्नौद जैसे कस्बों व गांवों को जोड़ेगी। इन क्षेत्रो में अभी वर्तमान में कोई रेल संपर्क नहीं हैं।    

भोपाल स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे, भारतीय राग गंभीर बीमारियों में भी दे रहे राहत

भोपाल  भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मिक ध्वनियां अब सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने विज्ञान की प्रयोगशाला में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। एम्स भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा की समीक्षा आधारित स्टडी ने यह साबित किया है कि भारतीय क्लासिकल राग न सिर्फ मस्तिष्क को शांत और सक्रिय रखते हैं, बल्कि दिल को स्वस्थ, सांसों को संतुलित और तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता भी रखते हैं। अध्ययन में शामिल 28 शोधपत्रों और 6 विशेषज्ञों के सहयोग ने यह बताया कि संगीत, विशेष रूप से राग, हमारे शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय करते हैं जो दर्द घटाते और मन को संतुलित रखते हैं। यह शोध रागों को केवल कला नहीं, बल्कि विज्ञान आधारित थेरेपी के रूप में सामने रखने का काम करता है। दिल पर भी दिखते हैं बेहतर रिजल्ट डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि संगीत सुनते समय दिल की धड़कन (हार्ट रेट) स्वाभाविक रूप से ऊपर–नीचे होती है। यह बदलाव दिल की “एक्सरसाइज” की तरह काम करता है। यदि पल्स लगातार एक समान रहे तो सडन कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ता है, लेकिन संगीत सुनने पर रिदमिक बदलाव दिल को मजबूत बनाते हैं। राग से होने वाले असर     तनाव घटता है     फोकस बढ़ता है     भावनात्मक संतुलन बनता है     नशा छुड़ाने में मदद मिलती है     न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में रिकवरी तेज होती है राग सिर्फ संगीत नहीं एक विज्ञान है डॉ. वरुण मल्होत्रा बताते हैं कि राग की मूल परिभाषा ही यह है कि जो मन को आनंद के रंग से भर दे, वही राग है। हर राग का एक व्यक्तित्व होता है, एक प्रभाव होता है। कुछ राग मन को शांत करते हैं, कुछ ऊर्जा बढ़ाते हैं, जबकि कुछ दिमाग के गहरे हिस्सों को सक्रिय कर हीलिंग की प्रक्रिया तेज करते हैं। राग के स्वर दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करते हैं जो मूड, हॉर्मोन, याददाश्त, फोकस और दर्द नियंत्रण को संभालते हैं। स्वर कंपन (vibrations) ब्रेन सेल्स में माइक्रो-एक्टिवेशन करते हैं। राग सुनने से एंडॉर्फिन और एनकेफेलिन जैसे प्राकृतिक दर्द-निवारक हार्मोन एक्टिव होते हैं, जो शरीर में हीलिंग की गति तेज कर देते हैं। एंडॉर्फिन है नैचुरल मूड-लिफ्टर एंडॉर्फिन हमारे शरीर में बनने वाले प्राकृतिक हॉर्मोन हैं, जो दर्द, तनाव या टेंशन होने पर दिमाग से रिलीज होते हैं। इन्हें शरीर का “फील-गुड केमिकल” भी कहा जाता है, क्योंकि ये दर्द कम करते हैं, स्ट्रेस घटाते हैं और मूड को खुश रखते हैं। जब आप एक्सरसाइज करते हैं, हंसते हैं, पसंदीदा खाना खाते हैं, सेक्स करते हैं या मसाज लेते हैं, तब एंडॉर्फ़िन बढ़ते हैं। यही वजह है कि ऐसी गतिविधियों के बाद मन हल्का और अच्छा महसूस होता है। शरीर को हेल्दी और मानसिक रूप से स्ट्रॉन्ग रखने में एंडॉर्फ़िन की बड़ी भूमिका होती है। एनकेफेलिन दर्द भगाने वाला केमिकल एनकेफेलिन एक प्राकृतिक न्यूरोपेप्टाइड है, जो हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम में बनता है। यह शरीर के अंदर ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़कर दर्द कम करने में मदद करता है, इसलिए इसे नेचुरल एनाल्जेसिक यानी प्राकृतिक पेनकिलर कहा जाता है। यह तनाव और भावनाओं को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है, जिससे मन शांत रहता है। एनकेफेलिन पांच अमीनो एसिड से बना होता है और मुख्य रूप से ब्रेन में पाया जाता है। जब शरीर दर्द, चोट या तनाव महसूस करता है, तब एनकेफेलिन तुरंत सक्रिय होकर राहत देता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)  न्यूरोसाइंस अध्ययन ने यह सिद्ध किया है कि भारतीय राग न केवल मन को छूते हैं, बल्कि मस्तिष्क की गहराई में भी स्पष्ट और मापनीय बदलाव उत्पन्न करते हैं। यूएसए के फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने किया है। इसमें आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों का भी सहयोग रहा। अध्ययन में आधुनिक ईईजी माइक्रोस्टेट विश्लेषण तकनीक का उपयोग कर 40 प्रतिभागियों के मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को विश्लेषित किया गया। यह तकनीक मस्तिष्क की बहुत ही सूक्ष्म और क्षणिक स्थितियों को रिकॉर्ड करती है, जिससे विज्ञानी यह समझ पाए कि कौन-से राग मस्तिष्क की किन गतिविधियों को सक्रिय या शांत करते हैं। न्यूरो सर्जरी में भी बेहतर रिजल्ट न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. अमित अग्रवाल की स्टडी में यह पाया गया कि सर्जरी के दौरान और बाद में म्यूजिक सुनने से मरीजों की रिकवरी बेहतर होती है। उनका फोकस, सहयोग और मानसिक स्थिरता बढ़ती है, जिससे उपचार तेज होता है। मशीन बताती है दिमागी कितना सक्रिय? एम्स में एक विशेष रूसी तकनीक आधारित न्यूरो–चेक मशीन है, जिसकी कीमत लगभग ढाई लाख रुपए है। यह मशीन सिर्फ 5 मिनट में यह बता देती है कि व्यक्ति के दिमाग का कौन सा हिस्सा ज्यादा सक्रिय है, दैनिक ऊर्जा स्तर कब हाई या लो होता है और उसकी सांसों का पैटर्न कैसा है। निजी अस्पतालों में यही टेस्ट 25,000 रुपए तक में होता है, जबकि एम्स में यह मुफ्त है। संगीत सुनने से इस टेस्ट में दिल और दिमाग दोनों में सुधार दर्ज हुआ। 40 से 45 मिनट सुनना चाहिए डॉ. मल्होत्रा कहते हैं कि राग बच्चों में ध्यान, भावनात्मक संतुलन और मानसिक विकास को तेज करते हैं। यह कला ही नहीं, एक वैज्ञानिक तरीका है, जो बच्चों को बेहतर जीवन, बेहतर करियर और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य देता है। 40–45 मिनट सुनने पर नींद, बीपी और फोकस में सुधार आता है।

दुग्ध संकलन के साथ किसानों की आय बढ़ाने हो रहे हैं समन्वित प्रयास : पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री पटेल

सुनियोजित रणनीति अपनाते हुए किये जा रहे हैं नवाचार गौवंश के अवैध परिवहन पर वाहन किये जायेंगे राजसात पशुओं की नस्ल सुधार के लिए संचालित है हिरण्यगर्भा अभियान दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य दो वर्ष की उपलब्धि और आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना की दी जानकारी भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये निरंतर प्रयास कर रही है। हमारा यह सतत प्रयास रहा है कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत आधार बनाया जाए। श्री पटेल ने बताया कि पिछले 02 वर्षों में प्रदेश ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर निरंतर प्रगति की है। हमने शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यकमों के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने का संकल्प दृढ़ता से निभाया है। हमारी सरकार ने गौवंश के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में निराश्रित पशुओं के लिए नवीन गौशाला नीति बनाई है। राज्यमंत्री श्री पटेल शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभा हॉल में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों से साझा कर रहे थे। गौसंवर्धन राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा कि गौवंश की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश का देश में दूसरा स्थान है। प्रदेश के 1.87 करोड़ गौवंश में से लगभग 70 प्रतिशत गौवंश अवर्णित नस्ल के हैं। शासन द्वारा निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन के लिए लगभग 2500 से अधिक गौशालाओं में 4 लाख 75 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश को आश्रय दिया गया है। इसके अतिरिक्त गौशालाओं में निराश्रित गौवंश के व्यवस्थापन हेतु दिए जाने वाले अनुदान की राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रूपये प्रतिदिन/गौवंश की गई है। राज्य शासन द्वारा गौशालाओं के अनुदान के बजट को 250 करोड प्रति वर्ष से बढ़ाकर 505 करोड़ कर दिया गया है, जिसमे से 369.02 करोड़ की राशि गौशालाओ को वितरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरदर्शिता और संकल्पशक्ति के प्रतिफल से हमारी सरकार ने 'स्वावलंबी गौशालाओं (कामधेनु निवास) की स्थापना नीति 2025' लागू की है। निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना के लिए 5 हजार गौवंश के लिये अधिकतम 130 एकड़ भूमि उपयोग हेतु दी जाएगी। साथ ही प्रत्येक 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ दी जा सकेगी। इस योजना में 20 स्वावलम्बी गौशाला की स्थापना हेतु निविदा जारी की गयी, जिसकी अंतिम दिनांक 29 दिसम्बर है। दुग्ध उत्पादन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा अनुसार देश के दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 09 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के उददेश्य से अभिनव योजना "डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना" प्रारंभ की गई है। एक हितग्राही को एक आवेदन पर एक इकाई (25 दुधारू पशु) या एक से अधिक इकाई (अधिकतम 08 इकाईयों, 200 दुधारू पशु) लेने की पात्रता होगी। योजना अंतर्गत देशी नस्ल की गाय की इकाई की लागत 36 रूपये लाख तथा संकर नस्ल की गाय तथा भैंस की इकाई की लागत 42 लाख रूपये है। मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम के अंतर्गत पशुपालकों के भैसपालन की रूचि के अनुरूप दो दुधारू भैंस उपलब्ध करायी जाती है। पहले इस योजना को मात्र 3 जिलों सीहोर, विदिशा एवं रायसेन जिलों में थी, जिसे वर्ष 2024-25 से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। सहकारिता के माध्यम से दुग्ध संकलन व प्रसंस्करण सरकार द्वारा सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड को उन्नयन करने के उद्देश्य से एम.पी. स्टेट को-ओपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड तथा संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन एवं प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मध्य होने वाले सहकार्यता अनुबंध पर सहमति दी गई तथा सहकार्यता अनुबंध किया गया। हमारा लक्ष्य राज्य में औसत दुग्ध संकलन तीन वर्षों में 33 लाख लीटर प्रतिदिन से अधिक करना। सहकारिता अंतर्गत ग्रामों का कवरेज आगामी 3 वर्षों में बढ़ाकर 15 हजार से अधिक ग्रामों को कवर करना तथा दुग्ध सहकारी समिति सदस्यों की संख्या बढ़ाकर कुल 470 हजार करना। इस हेतु राज्य में 4000 करोड से अधिक का निवेश होगा। दुग्ध संघो द्वारा दूध खरीद मूल्यों में 2.50 रूपये से 8.50 रूपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई। हिरण्यगर्भा अभियान प्रदेश में पशुपालकों को समृद्ध करने हेतु पशुओं का नस्ल सुधार एक महत्वपूर्ण साधन है, इस हेतु "हिरण्यगर्भा अभियान" संचालित किया जा रहा है। परम्परागत सीमन डोज की जगह सॉर्टेड सेक्सड सीमन के ज्यादा से ज्यादा उपयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर लगभग 11500 हजार कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) को प्रशिक्षित किया गया है। इन प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं में से अक्रियाशील कार्यकर्ता की पहचान कर उन्हें क्रियाशील तथा क्रियाशील कार्यकर्ताओं को रिफेंशर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। दुग्ध संपर्क समृद्धि अभियान प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को दो गुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूर्ती हेतु आयोजित इस अभियान में पशुपालकों को पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार से होने वाले आर्थिक लाभ के विषय पर गृह भेंट कर उन्नत पशुपालन हेतु प्रेरित किया जा रहा है। अभियान तीन चरणों में संचालित होना है। प्रथम चरण में 10 या अधिक गाय भैंस के पशुपालक, द्वितीय में 5 या अधिक के पशुपालक तथा तृतीय चरण में 5 से कम पशुसंख्या वाले पशुपालक सम्मिलित होंगे। 

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल : राज्यमंत्री जायसवाल

विभागीय उपलब्धियों की दी जानकारी भोपाल  विकास और सेवा के 2 वर्ष कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योजना के तहत ऋण प्रकरणों की स्वीकृति में मध्यप्रदेश का देश में चौथा और ऋण वितरण में तृतीय स्थान है। पिछले 2 वर्षों के दौरान 436.34 करोड़ रुपये के 48 हजार 63 ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये हैं। इसी तरह 378.06 करोड़ रुपये के 42 हजार 559 ऋण प्रकरण वितरित किये गये हैं। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने यह जानकारी होटल अशोका लेक व्यू में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान दी। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार हस्तशिल्प और हैण्डलूम से जुड़े विभाग के ब्रॉण्ड- मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत के उत्पाद मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाइयों और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केन्द्रों सहित लोकों में विक्रय के लिए आकर्षक रूप से प्रदर्शित कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि साड़ी पहनने की गौरवशाली परम्परा को प्रोत्साहित करने के लिए इंदौर में हुए साड़ी वॉकथान जैसे आयोजन प्रदेश के अन्य शहरों में आयोजित किये जायेंगे। रेशम उत्पादन गतिविधियों का प्रदेश के अन्य जिलों में विस्तार तथा इस गतिविधि में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश के विभिन्न प्रकार के उत्पादों के जीआई टैग प्राप्त करने की जानकारी का संकलन किया जायेगा। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिथियों को भेंट करने के लिए प्रदेश के हेरिटेज महेश्वरी स्टॉल का चयन किया गया है। विभाग द्वारा यह स्टॉल विशेष रूप से गोंड पेंटिंग और बेलमेटल से सुसज्जित लकड़ी के बॉक्स में प्रदाय किए जा रहे हैं। इन स्टॉल की मांग विदेशी दूतावासों से भी प्राप्त हुई है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि विभाग द्वारा 2 लाख 16 हजार 13 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसी तरह 85 हजार 536 हितग्राहियों को टूल-किट वितरण एवं 2 लाख 45 हजार 513 हितग्राहियों को ई-वाउचर वितरण किया गया है। उन्होंने कहा कि हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम द्वारा 4207.15 लाख रुपये तथा खादी बोर्ड द्वारा 2311.89 लाख रुपये का विक्रय एम्पोरियम और प्रदर्शनियों के माध्यम से किया गया है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में डिण्डोरी जिले के रॉट आयरन, उज्जैन जिले के बटिक प्रिंट, ग्वालियर जिले के कालीन शिल्प, बालाघाट जिले के बारासिवनी हाथकरघा साड़ी एवं जबलपुर जिले के पत्थर शिल्प को जीआई टैग प्रदान किये गये हैं। सीहोर के लकड़ी के खिलौने तथा नीमच के नांदना प्रिंट के लिये जीआई टैग प्रदान कराने की कार्यवाही भी पूर्ण की गयी है। भारत सरकार से नेशनल हैण्डलूम एक्सपो 45 लाख, स्टेट हैण्डलूम एक्सपो 90 लाख, जिला प्रदर्शनी मेला 12 लाख, इंदौर में साड़ी वॉकथान 20 लाख, राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस 14 लाख सहित कुल राशि 181 लाख रुपये प्राप्त कर 32 मेलों और प्रदर्शनियों के आयोजन से 16 हजार 780 शिल्पियों को मॉर्केट उपलब्ध कराया गया है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर इंदौर में साड़ी वॉकथान का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 27 हजार महिलाओं द्वारा भागीदारी की गयी थी। इस कार्यक्रम के लिये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ है। शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत 875.21 लाख रुपये के वस्त्र सप्लाई कर 3132 बुनकरों को 1.27 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि खादी उत्पादन केन्द्रों के माध्यम से 1015.21 लाख का उत्पादन एवं 650 बुनकरों तथा कारीगरों को रोजगार से जोड़ा गया। खादी बोर्ड द्वारा सेवा पखवाड़ा अंतर्गत 427 बुनकरों का चयन कर खादी वस्त्र उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। निजी क्षेत्र में मलबरी पौध-रोपण 439 एकड़, शासकीय रेशम केन्द्रों पर मलबरी पौध-रोपण 276 एकड़ सहित कुल 715 एकड़ में 3.51 किलोग्राम मलबरी कोकून उत्पादन कर 5451 किसानों को लाभान्वित किया गया है। साथ ही 1388 कोकून हितग्राहियों से 808.10 लाख टसर कोकून उत्पादन कराया गया। विभाग के नवाचार राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिये विभिन्न नवाचार किये जा रहे हैं। एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत जरी-जरजोदी एवं जूट, लकड़ी के खिलौने, बाग प्रिंट, सीधी कारपेट, चंदेरी साड़ी, दतिया गुड़ एवं उज्जैन के बटिक प्रिंट के उत्पादों की ब्रॉण्डिंग एवं विपणन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली, भोपाल हाट तथा जवाहर चौक भोपाल में मृगनयनी के साथ खादी के संयुक्त नवीन एम्पोरियम प्रारंभ किये गये हैं। रीवा एवं भोपाल में देवी अहिल्याबाई बुनकर मेले का आयोजन किया गया, जिसमें 75 शिल्पियों द्वारा भागीदारी तथा फैशन-शो का प्रदर्शन हुआ। प्रदेश के बाहर मृगनयनी एम्पोरियम द्वारा बैंगलुरु, हैदराबाद एवं गोवा में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मृगनयनी कोलकाता द्वारा भुवनेश्वर में भारत सरकार के हैण्डलूम एक्सपो में भागीदारी की गयी। इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में भी भागीदारी हुई। नगद रहित व्यवहारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से हाथकरघा विकास निगम द्वारा समस्त भुगतान बैंकों के माध्यम से डिजिटली किये जा रहे हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के समस्त विभागीय उत्पादन केन्द्रों एवं विपणन संबंधी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिये ईआरपी सॉफ्टवेयर तैयार करवाया गया है।  

एम.पी. ट्रांसको के लखनादौन सबस्टेशन में जटिल ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल संपन्न

ग्रिड फेल की स्थिति में बहु-सबस्टेशन सिस्टम रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण भोपाल  प्रदेश के ट्रांसमिशन ग्रिड की आपातकालीन तैयारियों, सिस्टम रिस्टोरेशन क्षमता तथा बहु-स्तरीय समन्वय को परखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन जिला सिवनी में एक अत्यंत जटिल ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल सफलतापूर्वक पूरी की गई। यह अभ्यास पेंच हाइडल पावर हाउस के तकनीकी समन्वय से संपन्न हुआ। बहु-सबस्टेशन ग्रिड रिस्टोरेशन बना चुनौतीपूर्ण अभ्यास एम पी ट्रांसको के मुख्य अभियंता श्री प्रदीप सचान के अनुसार इस अभ्यास में सामान्य मॉकड्रिल की तुलना में कहीं अधिक जटिलता रही, क्योंकि इसमें चरणबद्ध रूप से कई सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया। मॉकड्रिल के दौरान पेंच पावर हाउस से 132 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी, वहां से 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी तथा आगे 220 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन तक विद्युत आपूर्ति को पूरी तरह नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से बहाल किया गया। इस मॉकड्रिल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि पूरे जटिल अभ्यास के दौरान 33 के.व्ही. फीडरों पर केवल 25 मिनट के सीमित व्यवधान में पूरे सिस्टम के रिस्टोरेशन का सफल परीक्षण किया गया। उत्कृष्ट समन्वय से मिली सफलता मॉकड्रिल के दौरान स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एस.एल.डी.सी.) जबलपुर, कंट्रोल रूम तथा फील्ड स्टाफ के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा। सामान्यतः ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल में एक या दो सबस्टेशनों तक ही अभ्यास सीमित रहता है, जबकि इस मॉकड्रिल में तीन प्रमुख सबस्टेशनों को जोड़ते हुए ग्रिड रिस्टोरेशन किया गया, जो तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण है। ऐसे की गई ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल एम.पी. ट्रांसको सिवनी के कार्यपालन अभियंता श्री अरुण कुमार वैद्य ने बताया कि ब्लैक स्टार्ट मॉकड्रिल को वास्तविक ग्रिड फेल्योर जैसी परिस्थितियों के अनुरूप चरणबद्ध ढंग से संपन्न किया गया । सबसे पहले धीरे-धीरे लखनादौन सबस्टेशन का लोड बरगी पावर हाउस से बंद कर पेंच पावर हाउस पर स्थानांतरित किया गया। इसके पश्चात नियंत्रित लोड की स्थिति में जनरेटर को क्रमिक रूप से बंद कर वास्तविक ब्लैकआउट जैसी स्थिति उत्पन्न की गई। इसके बाद जनरेटर को पुनः चालू कर सावधानीपूर्वक लोड बढाते हुये चरणबद्ध रूप से 132 के.व्ही. सबस्टेशन लखनादौन में सामान्य विद्युत आपूर्ति बहाल की गई। पूरी प्रक्रिया के दौरान वोल्टेज एवं फ्रिक्वेंसी नियंत्रण, सिस्टम स्थिरता तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया।  

मालवा निमाड़ में इस वर्ष 1.71 लाख से ज्यादा नए बिजली कनेक्शन दिए

भोपाल  मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस कैलेंडर वर्ष में अब तक 1 लाख 71हजार 500 नए बिजली कनेक्शन जारी किए गए है। यह पिछले वर्ष से करीब दस प्रतिशत ज्यादा है। इंदौर राजस्व संभाग में करीब 1.10 लाख कनेक्शन जारी हुए है। इंदौर जिले में 51 हजार से अधिक कनेक्शन जारी हुए है। धार जिले में 13300, खरगोन जिले में 12000, खंडवा जिले में 9250, बड़वानी में 6800, बुरहानपुर में 6740, झाबुआ में 5300, अलीराजपुर में 3100 से ज्यादा कनेक्शन दिए गए है। उज्जैन संभाग के सातों जिले में 61 हजार से ज्यादा नए बिजली कनेक्शन (एनएससी) जारी किए गए है। कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि मांग के मुताबिक नए सर्विस कनेक्शन एनएससी प्रदान किए जा रहे हैं, ये कनेक्शन ऑन लाइन या ऑफ लाइन दोनों प्रकार के आवेदन दर्ज कर विधिवित दस्तावेजों के साथ प्राप्त किए जा सकते है। उज्जैन जिले में 16716 प्रदान किए गए है। मंदसौर जिले में 10700, रतलाम जिले में 10560, देवास जिले में 9359, नीमच में 5780, शाजापुर में 5300, आगर जिले में 4460 कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। सभी नए कनेक्शनों एवं जारी बिल, लोड इत्यादि की जानकारी संबंधित उपभोक्ता पोर्टल mpwz.co.in एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के ऊर्जस ऐप से प्राप्त भी कर सकते हैं।