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मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन विकास निगम की ओर से सौंपा गया 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक सौंपा गया। यह निगम द्वारा अब तक दिया गया सर्वाधिक लाभांश है। राज्य सरकार के अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से यह लाभांश प्रदान किया गया है। निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लाभांश का चेक सौंपा। इस अवसर पर निगम के उपाध्यक्ष  राम मोहन सिंह बघेल और प्रमुख सचिव वन  राघवेंद्र सिंह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के अध्यक्ष  रावत, उपाध्यक्ष  बघेल, प्रमुख सचिव वन  सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन तथा मध्यप्रदेश वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को निगम की विकासोन्मुखी गतिविधियों के लिए बधाई दी। मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से भारत सरकार को उसके अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से 61 लाख 17 हजार रुपए का लाभांश भुगतान किया जाएगा।  

पेड़ कटते रहे, पौधे नहीं लगे: 6911 पेड़ों के मामले में NGT ने पकड़ी भोपाल नगर निगम की लापरवाही

भोपाल   पेड़ काटने की अनुमति देने के बाद पर्यावरण की भरपाई के लिए जमा करोड़ों रुपये भी नगर निगम ठीक से खर्च नहीं कर पाया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सही तरीके से नहीं हुआ और रकम पौधारोपण के बजाय दूसरे कामों में खर्च की गई। इतना ही नहीं, 2021 से राशि का हिस्सा पड़ा हुआ है, जबकि पेड़ काटे जाने के बाद तय मानकों के मुताबिक पौधारोपण तक पूरा नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली स्थिति माना है। साथ ही भोपाल में हरियाली घटने के आंकड़ों पर भी एनजीटी ने चिंता जताई है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच के आदेश के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच नगर निगम द्वारा 6911 पेड़ काटने की अनुमति दी गई, इनके बदले 24,706 पौधे लगाए जाने थे, लेकिन अब तक 19,152 ही लगाए गए। पूरी राशि का उपयोग नहीं वहीं, पेड़ कटाई के एवज में 3.52 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि एक जनवरी 2026 तक सिर्फ 95.85 लाख रुपये ही पौधारोपण और संबंधित कार्यों पर खर्च किए गए। यानी करीब 2.56-2.57 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं किया गया। एनजीटी ने माना कि राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और पौधारोपण भी तय मानकों के मुताबिक नहीं किया गया। एनजीटी ने साफ कहा कि पेड़ काटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण उसी वित्तीय वर्ष या अगले मानसून में किया जाना चाहिए था, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ। समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा निगम एनजीटी ने नगर निगम के रिकार्ड की जांच के बाद कहा कि जमा राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और रकम का कुछ हिस्सा दूसरे कामों में खर्च किया गया। नगर निगम की सुस्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिस पौधारोपण का काम मानसून में पूरा होना चाहिए था, उसके लिए निगम बाद में समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा। एनजीटी ने इस स्थिति को ‘आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला’ बताया। आदेश में पिछले एक दशक में शहर में चार से पांच लाख परिपक्व पेड़ काटे जाने के अनुमान और आइआइएससी के आकलन का उल्लेख है, जिसके अनुसार व्यापक भोपाल शहरी क्षेत्र में ट्री कैनोपी में 44 प्रतिशत कमी आई है। निगम को एक महीने में पूरा करना होगा पौधारोपण एनजीटी ने नगर निगम को एक महीने में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पौधारोपण अतिरिक्त और निर्धारित खुले क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि हरित क्षेत्र का वास्तविक नुकसान पूरा हो सके। इसके लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी। पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सिर्फ पौधारोपण, रखरखाव और पौधों के सर्वाइवल के लिए किया जाए। पुराने पौधारोपण के बीच खाली जगह भरने को क्षतिपूर्ति पौधारोपण नहीं माना जाएगा। निगम को लगाए गए पौधों के सर्वाइवल की जांच कर फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।  

आईआईटी मुंबई, आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ और एम्स के मनोचिकित्सक देंगे मार्गदर्शन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित "सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026" में प्रदेश के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य युवाओं को नई दिशा, प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराना है। कॉन्क्लेव में प्रदेश से 20 हजार से अधिक युवा सहभागिता करेंगे। कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों की जानकारी एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं से संवाद कर उनकी आकांक्षाओं, विचारों और अपेक्षाओं को जानेंगे तथा उच्च शिक्षा एवं तकनीकी विकास पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी करेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार भी उपस्थित रहेंगे। जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल तथा कबीर कैफे द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी। विशेषज्ञ देंगे मानसिक स्वास्थ्य और कॅरियर संबंधी मार्गदर्शन कॉन्क्लेव में आईआईटी मुंबई और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ युवाओं को शिक्षा, तकनीकी विकास, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। एम्स के मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे। 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों एवं विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विभाग युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं, अवसरों और गतिविधियों से परिचित कराएंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर एवं सेडमैप द्वारा स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से संबंधित गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।  80 से अधिक प्रदर्शनी कक्षों में दिखेगी अवसरों और संभावनाओं की तस्वीर कॉन्क्लेव में विभागों, संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और नवोदित उद्यमों के 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। इनमें रोजगार, प्रशिक्षण, कॅरियर, उद्यमिता, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी एवं गतिविधियां प्रदर्शित की जाएंगी। विश्वविद्यालयों द्वारा शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, कॅरियर मार्गदर्शन और ड्रोन प्रौद्योगिकी सहित भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर प्रस्तुतियां दी जाएंगी। विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता तक मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से विभिन्न नवोदित उद्यम अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन करेंगे। युवा इन नवाचारों के माध्यम से विचार को उत्पाद और उत्पाद को उद्यम में बदलने की प्रक्रिया को समझ सकेंगे। इससे उन्हें स्वयं का उद्यम स्थापित करने तथा नए विचारों पर कार्य करने के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष फोकस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी, अर्धचालक प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत वाहन (EV) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां कॉन्क्लेव के प्रमुख विषयों में शामिल रहेंगी। इन क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और रोजगार की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। कॅरियर से साइबर सुरक्षा तक विविध विषयों पर मार्गदर्शन कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन, कौशल विकास, मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग एवं रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों एवं संबंधित विभागों द्वारा जानकारी दी जाएगी। पुलिस विभाग द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग, जन-सुरक्षा और युवा संवाद से जुड़े विषयों पर जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 युवाओं को शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार, विचार से नवाचार और नवाचार से उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराएगा।  

4.47 लाख नाम डिलीट होने के बाद अब घर-घर पहुंचेगा BLO अमला, इंदौर में फिर जुड़ेगा वोटर लिस्ट में नाम

 इंदौर  मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर घर-घर दस्तक शुरू हो चुकी है। करीब सात माह पहले जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान बीएलओ ने दो बार मतदाताओं से संपर्क किया था, फॉर्म भरवाए थे और दस्तावेजों की जांच की थी, वहीं काम अब फिर से किया जाएगा। एसआइआर के बाद हटे मतदाताओं की जानकारी लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) फिर से उनके पते पर दस्तक देंगे। यदि वह पते पर मिलते हैं और पात्र पाए जाते हैं, तो उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाएगा। SIR के दौरान घटे मतदाता, अब नाम जुड़वाने का मिला फिर मौका एसआइआर से पहले जिले में 28 लाख 67 हजार 294 मतदाता थे। एसआइआर के बाद 23 दिसंबर 2025 की प्रारंभिक सूची में संख्या घटकर 24 लाख 20 हजार 171 रह गई। यानी एक ही प्रक्रिया में 4.47 लाख नाम बाहर हो गए थे। एसआईआर के दौरान ही 66,825 नाम जोड़े गए। वहीं 21 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित हुई, जिसमें 24 लाख 86 हजार 996 मतदाता थे। अब सात माह बाद फिर से बीएलओं विलोपित मतदाताओं की जांच कर नाम जोड़ने का कार्य करेंगे। सोमवार को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने इस अभियान की समीक्षा की। उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पवार ने सभी ईआरओ को पात्र मतदाताओं को चिन्हित कर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि 18-19 वर्ष के मतदाताओं के नाम भी इस दौरान प्राथमिकता से नाम सूची में शामिल किए जाएं। एक माह तक यह अभियान चलेगा। 10 माह में 5वीं बार दस्तक: 2003 की जानकारी देने का बंधन खत्म बीते वर्ष अक्टूबर से अब तक मतदाताओं से बीएलओ द्वारा चार बार संपर्क किया जा चुका है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच एसआइआर प्रक्रिया के दौरान दो बार बीएलओ मतदाता के घर पहुंचे थे। वहीं फार्म प्राप्त नहीं होने पर जनवरी में एक बार फिर से छूटे मतदाताओं की जांच की गई थी। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत की मतदाता सूची तैयार करने के लिए भी घर-घर संपर्क किया गया। अब फिर पांचवी बार बीएलओं अपने बूथ में विलोपित मतदाता की जांच करेंगे। एसआइआर के दौरान 2003 की सूची में नाम या परिवार के किसी सदस्य का नाम मांगा गया था, लेकिन अब इसकी बाध्यता नहीं है। फार्म-6 के साथ भरा जाने वाला डिकलेरेशन फार्म हटा दिया गया है। एसआइआर के दौरान पुरानी सूची से अपना संबंध साबित नहीं कर पाने वाले मतदाताओं के लिए अब पात्रता के आधार पर नाम जुड़वाने का रास्ता खुला है। यह भी पढ़ें- खाद की ई-टोकन प्रणाली बनी मुसीबत… 10 मिनट में खत्म हो रहे टोकन, डीएपी-यूरिया के लिए तरस रहे किसान नाम जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे…     जन्म तारीख का प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र, तारीख लिखी मार्कशीट, पासपोर्ट और पैन कार्ड।     पते का प्रमाण: पहचान पत्र, बिजली बिल, बैंक पासबुक, सरकारी कर्मचारी होने पर कार्ड, जमीन के दस्तावेज।     किरायेदार के लिए: जन्म प्रमाण पत्र के साथ, पते के प्रमाण में किरायानामा दस्तावेज और मकान मालिक का बिजली बिल।     पता बदलने पर: मतदाता को वर्तमान ईपीक नंबर के साथ फार्म-8 भरना होगा और नए पते का प्रमाण देना होगा।     युवा मतदाता: फार्म-6 भरना होगा, जिसमें माता-पिता के नाम के साथ जन्म और पते का प्रमाण देना होगा।  

नगरीय निकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नगर पालिका परिषद वारासिवनी भी राष्ट्रीय स्तर पर पुरूस्कृत

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 'सभी के लिए आवास' के संकल्प को मध्यप्रदेश की धरा पर साकार करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन एवं दूरदर्शी नेतृत्व के फलस्वरूप मध्यप्रदेश को 'प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पुरस्कार-2026' से पुरस्कृत किया गया है। विश्व आवास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री  तोखन साहू ने यह प्रतिष्ठित पुरूस्कार प्रदान किया। राज्य शासन की ओर से नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त  संकेत भोंडवे तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के राज्य मिशन संचालक  शिशिर गेमावत ने पुरूस्कार प्राप्त किया। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के बी.एल.सी. (लाभार्थी आधारित निर्माण) घटक के सर्वोत्कृष्ट एवं सुव्यवस्थित क्रियान्वयन तथा स्वीकृत आवासों की तुलना में सर्वाधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कराने में मध्यप्रदेश संपूर्ण देश में अग्रणी रहा है। एक लाख से कम आबादी वाले नगरीय निकायों की श्रेणी में उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित करते हुए नगर पालिका परिषद वारासिवनी को भी बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत सर्वाधिक आवास पूर्ण करने पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से अलंकृत किया गया। आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास  भोंडवे ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी से प्रदेश के लाखों वंचित एवं जरूरतमंद शहरी परिवारों के अपने पक्के घर का स्वप्न साकार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में योजना का पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है। मिशन संचालक  गेमावत ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में योजना के विभिन्न घटकों के अंतर्गत अब तक 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 9 लाख से अधिक निर्मित आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं। प्रदेश में योजना के बहुआयामी एवं सुगम क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक अभिनव प्रयोग तथा नीतिगत सुधार किए गए हैं। समाज के अंतिम छोर पर खड़े भूमिहीन पात्र परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टे वितरित किए गए, जिससे वे बी.एल.सी. घटक के अंतर्गत मिलने वाले लाभों से वंचित न रहें। इस ऐतिहासिक सफलता में राज्य स्तरीय मिशन टीम, जिला प्रशासन, नगरीय निकायों, संबद्ध विभागों, समर्पित हितग्राहियों एवं समस्त हितधारकों का सहयोगात्मक योगदान व कर्मठता प्रशंसनीय रही है।  

प्रदेश में हवाई सुविधाओं का विस्‍तार, अब होंगे हर 150 किलोमीटर पर एयरपोर्ट, 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और हर 45 किलोमीटर पर हेलीपैड

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में विमानन सेवाओं और अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नागरिकों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ ही आपातकालीन सेवाओं, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने के लिए एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप और हेलीपैड के नेटवर्क का नागरिक विमानन नीति-2025 के अंतर्गत विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में एयरपोर्ट बढ़कर 8 हो गए हैं और शीघ्र ही इनकी संख्‍या 10 हो जाएगी। इसी तरह से प्रदेश से अंतर्राष्‍ट्रीय उड़ानों की संख्‍या भी निरंतर बढ़ रही है। पहले दुबई और अब अबूधाबी के साथ इंदौर का हवाई संपर्क स्‍थापित हुआ है। सिंहस्‍थ-2028 के लिये भी दताना-मताना एयरपोर्ट का विस्‍तार हो रहा है। नए एयरपोर्ट के विकास, सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड का निर्माण और पीएम एयर एम्बुलेंस एवं पीएम हेली पर्यटन सेवा से प्रदेश में हवाई सुविधाएं अधिक सुगम और व्यापक हो रही हैं। प्रदेश में सुदृढ़ हो रहा विमानन नेटवर्क मध्यप्रदेश में वर्तमान में 8 एयरपोर्ट, 20 से अधिक एयरस्ट्रिप और 220 हेलीपैड हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 5 प्रमुख एयरपोर्ट इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो संचालित थे। वर्ष 2024-25 में रीवा, दतिया और सतना को जोड़कर एयरपोर्ट की संख्या 8 हो गई है। उज्जैन और शिवपुरी में एयरपोर्ट के विकास का कार्य प्रगति पर है। हर 150 किमी पर एयरपोर्ट, 75 किमी पर एयरस्ट्रिप और 45 किमी पर हेलीपैड की योजना प्रदेश में हवाई सुविधाओं को और व्यापक बनाने के लिए हर 150 किलोमीटर पर एयरपोर्ट, हर 75 किलोमीटर पर एयरस्ट्रिप और हर 45 किलोमीटर पर हेलीपैड विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड विकसित करने की योजना है। पांच नए एयरपोर्ट की स्वीकृति प्रक्रियाधीन, सिंगरौली को प्राथमिकता प्रदेश में पांच नए एयरपोर्ट के विकास की स्वीकृति केंद्र सरकार के स्तर पर प्रक्रियाधीन है। इनमें सिंगरौली को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही उड़ान योजना अंतर्गत प्रदेश की 10 एयरस्ट्रिप को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इनमें सिंगरौली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल शामिल हैं। राज्य सरकार को मिल रहा नया विमान – व्यय रह जाएगा एक तिहाई प्रदेश में विमानन और वायु सेवाओं का विकास हो रहा है तथा राज्‍य शासन को नया शासकीय विमान मिल रहा है। देश में कई राज्‍यों जैसे- उत्‍तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, जम्‍मू कश्‍मीर, छत्‍तीसगढ़ इत्‍यादि में स्‍वयं के विमान ‍एवं हेलीकॉप्‍टर हैं। भौगोलिक दृष्टि से बड़ा राज्‍य होने के कारण मध्‍यप्रदेश में त्‍वरित पहुँच एवं आकस्मिक परिस्थितियों में विमान एवं हेलीकॉप्‍टर की तुलनात्‍मक रूप से अधिक आवश्‍यकता रहती है। कोविड-19 के दौरान प्रदेश सरकार का विमान कोविड की अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण दवा रेमडेसिविर को प्रदेश के विभिन्‍न स्‍थानों में ले जाते हुए ग्‍वालियर में क्षतिग्रस्‍त हो गया था। इसके बाद से लगातार चार्टर्ड (किराये) के विमान का उपयोग किया जा रहा है। शासकीय विमान आने से राज्य सरकार का व्‍यय प्रतिमाह एक तिहाई ही रह जाएगा। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा से मरीजों को मिल रही त्वरित सहायता प्रदेश में 29 मई 2024 से पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। आयुष्मान कार्डधारियों को प्रदेश में और प्रदेश से बाहर शासकीय और आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों तक निःशुल्क हवाई परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। गैर-आयुष्मान हितग्राहियों को प्रदेश के शासकीय अस्पताल तक निःशुल्क और प्रदेश के बाहर निर्धारित दरों पर सेवा उपलब्ध कराई जाती है। प्रदेश में परिवहन के लिए जिला कलेक्टर और प्रदेश के बाहर परिवहन के लिए चिकित्सा शिक्षा संचालक की अनुमति की आवश्यकता होगी। भुगतान वाले मामलों में स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के माध्यम से उपलब्धता के आधार पर सेवा दी जाती है। अब तक 186 मरीजों एवं दुर्घटना पीड़ितों को इस सेवा का लाभ दिया गया है। पीएम हेली पर्यटन सेवा से आस्था, विरासत और प्रकृति के सुगम दर्शन पीएम हेली पर्यटन सेवा के माध्यम से पर्यटकों को प्रदेश में आस्था, विरासत और प्रकृति के सुगम दर्शन कराए जा रहे हैं। पीपीपी मॉडल पर तीन वर्ष के अनुबंध के तहत पीएम हेली पर्यटन सेवा संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत आधुनिक सिंगल एवं ट्विन इंजन हेलीकॉप्टरों के माध्यम से न्यूनतम 6 सीटों की सुविधा उपलब्ध है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर, हेरिटेज पर्यटन के लिए भोपाल-चंदेरी-ओरछा तथा वाइल्ड लाइफ पर्यटन के लिए जबलपुर-मैहर-चित्रकूट-कान्हा-बांधवगढ़ सेक्टर निर्धारित किए गए हैं। चंदेरी और ओरछा में जॉय राइड की सुविधा भी उपलब्ध है। अब तक 5,200 से अधिक यात्रियों ने हेली सेवा का उपयोग किया है, जबकि 680 से अधिक जॉय राइड संचालित की जा चुकी हैं। ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा flyola.in और transbharat.in के माध्यम से उपलब्ध है। इंदौर-अबूधाबी सीधी उड़ान से अंतर्राष्ट्रीय हवाई संपर्क को मिला नया आयाम इंदौर से अबूधाबी के बीच सीधी उड़ान मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 के अंतर्गत वित्त पोषित प्रदेश की पहली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान है। लगभग 3 घंटे 15 मिनट की इस सीधी उड़ान से अबूधाबी के साथ हवाई संपर्क स्थापित हुआ है। इससे विकास, व्यापार, पर्यटन और वैश्विक निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में विकसित हो रहा दताना-मताना एयरपोर्ट उज्जैन के दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास आरसीएस उड़ान 5.2 के अंतर्गत किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में 1,800 मीटर लंबा रनवे विकसित किया जा रहा है, जिसे भविष्य में 2,700 मीटर तक बढ़ाया जाएगा। सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत यह एयरपोर्ट महत्वपूर्ण होगा। उज्जैन और शिवपुरी एयरपोर्ट का कार्य पूर्ण होने के बाद प्रदेश में एयरपोर्ट की संख्या 10 हो जाएगी। मध्यप्रदेश में एयरपोर्ट, एयरस्ट्रिप्स, हेलीपैड और नए हवाई मार्गों के विस्तार के साथ प्रदेश के विभिन्न अंचलों को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। शासकीय हवाई बेड़े में शामिल होने जा रहा नया विमान, उज्जैन में दताना-मताना एयरपोर्ट का विकास, नए एयरपोर्ट एवं एयरस्ट्रिप्स का विस्तार, सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थायी हेलीपैड तथा मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 के प्रावधान प्रदेश के विमानन नेटवर्क को व्यापक आधार प्रदान कर रहे हैं। सिंहस्थ-2028 सहित प्रदेश में बढ़ती विकास गतिविधियों के दृष्टिगत हवाई अधोसंरचना का यह विस्तार प्रदेश में हवाई संपर्क को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध करा रहा है।  

पति की प्रताड़ना का खूनी अंत: पत्नी ने हथौड़ी से सिर पर किए वार, फिर दबाया गला

इंदौर  गांधी नगर थाना क्षेत्र के जंबूड़ी गांव में घरेलू हिंसा और रोजाना के विवाद से तंग आकर एक महिला ने अपने ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपित पत्नी ने पहले सोते हुए पति के सिर पर हथौड़ी से मारा और फिर गला दबाकर पति को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने आरोपित पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पति रोज करता था परेशान पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान संतोष डावर (45) पिता रामचंद्र डावर के रूप में हुई है। मृतक संतोष देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर पर विमानों में ईंधन भरने का काम करता था। परिजन और आसपास के रहवासियों के अनुसार संतोष को बहुत ज्यादा शराब पीने की लत थी। वह रोजाना शराब के नशे में धूत होकर घर आता था और अपनी पत्नी सूरज बाई व बच्चों के साथ मारपीट करता था। रात में सबको जान से खत्म कर दूंगा पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रविवार शाम को भी संतोष शराब पीकर घर आया और पत्नी सूरज बाई से विवाद करने लगा। बात इतनी बढ़ गई कि संतोष ने पत्नी और बच्चों को धमकी दी कि आज रात तुम सबको जान से खत्म कर दूंगा। डरी हुई पत्नी ने इसके बाद घटनाक्रम को अंजाम दिया।  

बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से किया सीधा संवाद

भोपाल किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव का जिला स्तरीय कार्यक्रम सोमवार को कृषि उपज मंडी, चंगेरा, नीमच में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए नीमच के किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने किसानों से कृषि गतिविधियों, शासन की किसान हितैषी योजनाओं से मिल रहे लाभ, कृषि क्षेत्र में नवाचार तथा किसानों की आवश्यकताओं के संबंध में बात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीमच जिला उन्नत कृषि, आधुनिक खेती एवं कृषि व्यापार के क्षेत्र में प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। जिले में अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी, सतावरी, चिरायता, आंवला, बहेरा और नीम सहित विभिन्न औषधीय फसलों का उत्पादन होता है। चिया सीड, लहसुन, मेथी एवं धनिया सहित अनेक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं व्यापार में भी नीमच की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ एवं आधारशिला बताया। नीमच मंडी की बढ़ती आवक और आय का किया उल्लेख मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीमच कृषि उपज मंडी की कृषि व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नीमच मंडी ए-ग्रेड मंडी है और औषधीय फसलों के व्यापार के लिए एशिया के प्रमुख केंद्रों में अपनी पहचान रखती है। वर्ष 2023-24 में मंडी में 53.46 लाख क्विंटल कृषि उपज की आवक हुई थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 72 लाख क्विंटल हो गई। इसी अवधि में मंडी की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 34.5 करोड़ रुपये हो गई। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिले में 10 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा कृषि के साथ अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि क्षेत्र का दायरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए संचालित परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुरा-मनासा सूक्ष्म वृहद सिंचाई परियोजना से 212 गांवों की 67 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो सकेगी। इसी प्रकार जावद-नीमच एवं खुमान सिंह शिवाजी सिंचाई योजनाओं के पूर्ण होने से एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जिले में कृषि का रकबा बढ़ेगा तथा बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलेगा। चीता परियोजना से पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गांधीसागर अभयारण्य में चीता परियोजना के आने से नीमच जिले में पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नीमच को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी। कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन एवं मत्स्यपालन को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने तथा गांधीसागर जलाशय सहित जिले में मत्स्य उत्पादन से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के प्रशासक  महेंद्र सिंह यादव, जावद विधायक  ओमप्रकाश सकलेचा, नीमच विधायक  दिलीप सिंह परिहार, मनासा विधायक  अनिरुद्ध माधव मारू ने संबोधित किया। प्रगतिशील किसानों एवं मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील किसानों  श्याम कारपेंटर,  हरीश पाटीदार,  किशोर कुमार पाटीदार एवं  अनिल धाकड़ को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं 11 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। महोत्सव में कृषि वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक कृषि पद्धतियों, फसल उत्पादन, पशुपालन तथा किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी गई। आयोजन स्थल पर कृषि एवं विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं और कृषि तकनीकों से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में कलेक्टर  हिमांशु चंद्रा, अपर कलेक्टर  बी.एस. कलेश,  जयपाल सिंह चावड़ा, कप्तान सिंह,  कपिल यार्डे,  वंदना खंडेलवाल, नगर पालिका अध्यक्ष  स्वाति चोपड़ा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, हितग्राही एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।  

कूनो में गूंजी चीतों की नई पीढ़ी की किलकारी, KJP-21 ने दिए 5 स्वस्थ शावक; संख्या बढ़कर 60

कूनो में गूंजी चीतों की नई पीढ़ी की किलकारी भारतीय धरा पर जन्मे शावकों की पीढ़ी ले रही अंगड़ाईयां मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को दिया जन्म चीतों की संख्या अब बढ़कर हुई 60 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट चीते से जुड़ी टीम को दी बधाई भोपाल  मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उ़़द्यान में चीता प्रोजेक्ट अंतर्गत 5 अक्टूबर सोमवार को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई। भारतीय धरती पर जन्मी 32 माह की मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या बढ़कर अब 60 हो गई है, इसमें से 41 भारतीय धरती पर जन्में चीते शामिल है। भारत में जन्मी मादा चीता केजेपी-12 और मुखी के बाद केजेपी-21 तीसरी मादा चीता है, जिसने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया। यह उपलब्धि देश में चीता संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के प्रयासों की सफलता और चीतों की नई पीढ़ी की विस्तार की दिशा में मील का पत्थर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रोजेक्ट चीता से जुड़े वन्य अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हें मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर वन्य जीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है। बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है। भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।   भारत में बोत्सवाना वंशावली की हुई शुरूआत केजेपी-21 के पाँच शावकों का जन्म एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी लेकर आया है। इनके पिता बोत्स्वाना के लाया गया नर चीता है। इन शावकों के जन्म के साथ भारत में बोत्सवाना वंशावली की शुरूआत हुई है। इससे देश में बढ़ती चीता आबादी में एक नई अनुवांशिक वंशावली का समावेश हुआ है। चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ा भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिये निरंतर किये जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।  

भारत की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान, एशियन गेम्स में दिखी नारी शक्ति: निर्मला भूरिया

एशियन गेम्स में दुनिया ने देखा भारत की नारी शक्ति का दम  निर्मला भूरिया भोपाल एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं। इनमें 11 स्वर्ण पदक महिला खिलाड़ियों और महिला टीमों ने जीते। भारत की बेटियों का यह प्रदर्शन केवल खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत और सशक्त होती नारी शक्ति की तस्वीर है। क्रिकेट में भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण जीतकर देश का गौरव बढ़ाया, वहीं महिला कबड्डी और महिला हॉकी टीम ने भी स्वर्णिम सफलता हासिल की। महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम वापसी विशेष रूप से ऐतिहासिक रही, जिसने 44 वर्ष बाद एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों की सफलता महिला सशक्तिकरण की सबसे प्रभावशाली तस्वीर है। आज हमारी बेटियां केवल खेल के मैदान में पदक नहीं जीत रहीं, बल्कि वे देश की करोड़ों बेटियों के सपनों को भी नई दिशा दे रही हैं। उनकी सफलता यह विश्वास मजबूत करती है कि बेटी को अवसर, प्रोत्साहन और विश्वास दिया जाए तो वह किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकती है। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी भारतीय बेटियों ने नए इतिहास रचे। कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में भारत के लिए पहला एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीता। महिला रिकर्व टीम ने भी स्वर्ण अपने नाम किया। निशानेबाजी में नीरू धांडा ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक हासिल किया। मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर भारत के लिए इस खेल में लंबे अंतराल के बाद पदक दिलाया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में मध्यप्रदेश की बेटियों ने भी अपनी प्रतिभा और मेहनत का परचम लहराया। प्रदेश की क्रिकेटर क्रांति गौड़ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनीं। छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचकर स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत और संघर्ष की प्रेरक कहानी है। निशानेबाजी में मध्यप्रदेश की नीरू ढांडा ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने ट्रैप मिक्स्ड टीम में भी स्वर्ण और महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इस तरह नीरू ने एशियन गेम्स में तीन पदक जीतकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया। निशानेबाजी में ही मध्यप्रदेश की आशी चौकसे ने महिला 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि मनीषा कीर ने महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल कर देश का मान बढ़ाया। इसी तरह मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय सेलर हर्षिता तोमर ने 49er FX महिला स्किफ ईवेंट में कांस्य पदक हासिल किया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम सफलता में भी मध्यप्रदेश की बेटियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। ईशिका चौधरी, बिच्छू देवी और सुशीला चानू भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया। एक बेटी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार, समाज और देश की सोच को बदलने की ताकत रखती है। एशियन गेम्स में बेटियों की सफलता उन सभी परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी बेटियों को खेल, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए वातावरण तैयार हुआ है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से लेकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने तक की सोच अब जमीन पर दिखाई दे रही है। मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बेटियों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। एशियन गेम्स की बेटियों की सफलता हमें यह संदेश देती है कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं और नारों तक सीमित नहीं है। सच्चा सशक्तिकरण तब है, जब बेटी अपने सपनों का रास्ता स्वयं चुन सके, अपनी प्रतिभा को पहचान सके और अपनी मेहनत के बल पर दुनिया के सामने अपनी पहचान बना सके। आज कुमकुम मोहोड, नीरू धांडा, लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा, प्रणवी उर्स, मीराबाई चानू और भारतीय महिला टीमों की उपलब्धियां देश की हर बेटी को यह संदेश दे रही हैं—आसमान कोई सीमा नहीं है। एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों ने पदक जीतकर सिर्फ तिरंगा नहीं ऊंचा किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण की नई इबारत भी लिखी है। यह उपलब्धियां आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेंगी और उन्हें यह विश्वास देंगी कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए देश उनके साथ खड़ा है।