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MP में कुदरत और इंजीनियरिंग का अनोखा संगम, बागदेव के जंगलों में X आकार में मिलते हैं हाईवे और रेलमार्ग

इटारसी  इटारसी के पास बागदेव के घने जंगलों में एक ऐसा नजारा है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. यहां ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग एक-दूसरे को X आकार में पार करते हैं. ऊंचाई से देखने पर रोड और रेलवे ट्रैक का यह संगम बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों के बीच बना यह स्थान पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।  पहाड़ी कटेगी,बनेगा नया कलवर्ट ब्रिजइटारसी के बागदेव की तस्वीर बदलने की तैयारी लेकिन इस खूबसूरत जगह पर सफर करना फिलहाल आसान नहीं है. रेलवे पुल के नीचे सड़क का रास्ता संकरा होने के कारण यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. खासकर छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।  अब इस समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेलवे मिलकर बड़ा विकास कार्य करने की तैयारी में हैं. इसके तहत सड़क और रेलवे दोनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।  वर्तमान में इस रेल पुल के नीचे एकल मार्ग होने के कारण यहां वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है। अब एनएचएआई और रेलवे मिलकर यहां एक मेगा डबल एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं। इस विस्तृत योजना के तहत, हाईवे को टू-लेन करने के लिए पास की पहाड़ी को काटकर रास्ता निकाला जाएगा। नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनेगा : मुख्य रेल ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा, इस महत्वपूर्ण गलियारे की क्षमता बढ़ाने के लिए यहां तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल तैयार किए जाएंगे। इस बड़े विकास कार्य के पूरा होने पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारह मुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों व श्रद्धालुओं का सफर पूरी तरह से सुगम और बाधा रहित हो जाएगा। पहाड़ी काटकर चौड़ा होगा हाईवे योजना के अनुसार नेशनल हाईवे को टू-लेन किया जाएगा. इसके लिए पास की पहाड़ी के एक हिस्से को काटकर सड़क के लिए एक्सट्रा जगह बनाई जाएगी. इससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और जाम की समस्या काफी कम होने की उम्मीद है।  रेलवे पुल के नीचे बनेगा नया कलवर्ट मुख्य रेलवे ढांचे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा. इससे सड़क को पर्याप्त चौड़ाई मिलेगी और वाहनों के निकलने के लिए बेहतर रास्ता तैयार होगा. इसके साथ ही भविष्य में रेल यातायात बढ़ाने के लिए तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल बनाए जाने की योजना है. इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में भी सुविधा होगी।  यह परियोजना पूरी होने के बाद सड़क और रेलवे दोनों का आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है. तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं को जाम से राहत मिलेगी. इसके साथ ही बागदेव का यह अनोखा X आकार का संगम आने वाले समय में और सुगम और  आकर्षक पर्यटन की जगह बन सकता है।  मध्य प्रदेश के इटारसी के पास बागदेव के जंगलों में ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेलवे लाइन एक 'एक्स' (X) आकार में एक दूसरे को पार करती हैं, जो ऊपर से देखने पर बहुत सुंदर दिखाई देता है। रेलवे ब्रिज के नीचे सड़क संकरी होने के कारण यहाँ अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। विशेष रूप से छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यातायात की समस्या को हल करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को दो-लेन बनाया जाएगा जिसके लिए पहाड़ी को काटा जाएगा, और रेलवे ब्रिज के नीचे पर्याप्त चौड़ाई के साथ एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा।

अमरकंटक में बनेगी नई सैटेलाइट सिटी, नर्मदा उद्गम की सुरक्षा के लिए 11 हजार हेक्टेयर में होगा विकास

अमरकंटक  मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा उद्गम स्थल को प्रदूषण से बचाने के लिए अमरकंटक सैटेलाइट सिटी बसाएगी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र का दायरा सात हजार से बढ़ाकर 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया है। चार गांवों की जमीन पर होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं बनेंगी। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा।मध्य प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए सरकार यहां एक सुनियोजित नया शहरी क्षेत्र विकसित करेगी। इसके लिए अमरकंटक के निवेश क्षेत्र का दायरा 7 हजार से बढ़ाकर 11,657 हेक्टेयर से अधिक कर दिया गया है। नर्मदा उद्गम स्थल की सुरक्षा इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई थी। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) ने इसके लिए निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है। योजना के तहत पर्यटकों के ठहरने की जगह नर्मदा के उद्गम स्थल से दूर बनाई जाएगी। दुकानें और दूसरी कारोबारी गतिविधियां भी वहां से हटाई जाएंगी। इसका मकसद गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकना है। नर्मदा को प्रदूषण से बचाना मकसद इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद हुई। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। इसके लिए पर्यटकों की नई बसाहट और व्यावसायिक गतिविधियों को उद्गम स्थल से दूर ले जाने की योजना है, ताकि सीवेज नर्मदा में न पहुंचे। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें होटल, सड़क और आवासीय क्षेत्रों की जगह तय की जाएगी। इन 4 गांवों में बनेगी सैटेलाइट सिटी सैटेलाइट सिटी के लिए चुने गए चार गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी। नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है। नर्मदा उद्गम (Narmada river origin) का इलाका धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम है। इसी वजह से सरकार वहां सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करना चाहती है। क्या इससे उद्गम पर दबाव घटेगा? योजना का मकसद पर्यटन का बोझ उद्गम से दूर रखना है। अमरकंटक सैटेलाइट सिटी कहां बनेगी? निवेश क्षेत्र (वह इलाका जिसमें विकास की योजना बनती है) का दायरा बढ़ा है। पहले यह करीब सात हजार हेक्टेयर था। अब यह 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है। नई सैटेलाइट सिटी चार गांवों की दो हजार 134.14 हेक्टेयर जमीन पर बसेगी। यह इलाका अमरकंटक के मुख्य संवेदनशील क्षेत्र से दूर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी। इन 4 गांवों में बनेगा नया शहर अमरकंटक सैटेलाइट सिटी (Amarkantak satellite city) के लिए पोंडी, लालपुर, बरसोत और सेंदुखार गांव चुने गए हैं। इन चारों गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को कम बाधाओं में सुनियोजित शहरी क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी। ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं। पोंडी सबसे बड़ा हिस्सा है। यहां 999.21 हेक्टेयर जमीन है और आबादी 1,554 है। लालपुर में 447.97 हेक्टेयर जमीन और 810 लोग हैं। बरसोत में 417.14 हेक्टेयर जमीन और 521 लोग हैं। सेंदुखार में 269.80 हेक्टेयर जमीन और सिर्फ 69 लोग हैं। चारों गांवों की कुल आबादी करीब तीन हजार है। 15 गांव/क्षेत्रीय इकाइयों का मास्टर प्लान अमरकंटक के मुख्य क्षेत्र और नई सैटेलाइट सिटी समेत कुल 15 क्षेत्रीय इकाइयों को नए निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है। कृषि भूमि पर कॉटेज और स्विमिंग पूल अमरकंटक के विकास के लिए 2020 में मास्टर प्लान में बदलाव कर कृषि भूमि पर ‘कृषि पर्यटन’ को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था। मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कृषि भूमि पर कॉटेज, कैंपिंग साइट, रेस्टोरेंट, योग-नेचुरोपैथी केंद्र, वेलनेस/आध्यात्मिक केंद्र और स्विमिंग पूल की अनुमति दी गई। इसके अलावा गैर-प्रदूषणकारी उद्योग, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मकता से रूबरू होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत कल 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल, भोपाल में विद्यार्थियों की चित्रकला प्रदर्शनी एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों का अवलोकन करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी प्रतिभा एवं रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थिति रहेंगे। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश सरकार द्वारा सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी प्रदेश भर के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व, रचनात्मकता और जनभागीदारी से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मेरे सपनों का भारत थीम पर आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थी अपने चित्रों के माध्यम से विकसित और सशक्त भारत की अपनी कल्पना प्रस्तुत करेंगे। वहीं भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थी अपने विचारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और सेवा भावना में युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखेंगे।  

बाल विवाह पर अब और कसेगा शिकंजा, सीएमपीओ को मिलेगा कानून और कार्रवाई का गहन प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को और प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों का राज्य स्तरीय क्षमतावर्धन किया जा रहा है। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से 6 अक्टूबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, बाल विवाह के प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई तथा अन्य संबंधित कानूनों के साथ इसके जुड़ाव पर अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया करेंगी। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ सामान्य प्रशासन, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी और अधिसूचित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी शामिल होंगे। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिले से लेकर ग्राम स्तर तक तथा नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद स्तर पर सीएमपीओ अधिसूचित किए गए हैं। इनमें बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। कानून की जानकारी से लेकर जमीनी कार्रवाई तक होगा प्रशिक्षण प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीएमपीओ को केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि बाल विवाह की सूचना मिलने से लेकर उसके प्रभावी प्रतिषेध, संबंधित विभागों के साथ समन्वय, प्रकरणों की रिपोर्टिंग और प्रभावित बालिकाओं के संरक्षण तक उनकी भूमिका को स्पष्ट और प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के साथ किशोर न्याय अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के आपसी जुड़ाव की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में बाल विवाह के प्रकरणों में कानून के अनुरूप कार्रवाई, संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल की सतत निगरानी और उस पर प्रकरणों की प्रभावी रिपोर्टिंग के संबंध में भी सीएमपीओ की क्षमतावृद्धि की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय की भी दी जाएगी जानकारी कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को विस्तार से समझाने के साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सोसायटी फॉर इन्लाइंटमेंट एण्‍ड वॉलेन्टरी एक्शन एण्ड अनदर वर्सस यूनियन ऑफ इंडिया एण्ड अदर मामले में दिए गए निर्णय की जानकारी भी दी जाएगी। यह सत्र बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। बाल विवाह के प्रकरणों में पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचायती राज संस्थाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। इसी विषय पर विभिन्न विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों की पैनल चर्चा होगी, जिसमें बाल विवाह रोकथाम के लिए आपसी सहयोग और मैदानी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई पर विचार-विमर्श किया जाएगा। किशोरियों के अनुभव बताएंगे कि बाल विवाह रोकना क्यों जरूरी कार्यशाला में बाल विवाह रोकने के लिए स्वयं आगे आई किशोरी बालिकाओं को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे अधिकारियों को बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को जमीनी अनुभवों के माध्यम से समझने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण और उन्हें बाल विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा होगी। बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार की गई व्यावहारिक मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया जाएगा। इन सामग्रियों का उद्देश्य सीएमपीओ को कानून के साथ मैदानी परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए व्यावहारिक दिशा प्रदान करना है। पुलिस से पंचायत तक सभी विभागों की भूमिका होगी स्पष्ट कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और उनसे अपेक्षाओं को भी रेखांकित किया जाएगा। पुलिस की भूमिका, विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, पंचायत एवं ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र तथा नगरीय निकायों की जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन वात्सल्य, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ टीम, स्टेट सपोर्ट टीम तथा संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी भी सहभागिता करेंगे। यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में शामिल होंगे। विशेषज्ञ देंगे कानून और मैदानी कार्रवाई का प्रशिक्षण कार्यशाला में बाल अधिकार एवं बाल विवाह से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे। सु भारती अली, बाल अधिकार विशेषज्ञ, नई दिल्ली बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सहित बाल विवाह रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण देंगी।  गुरमुख सिंह लांबा, अधिवक्ता एवं वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार, किशोर न्याय समिति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर पीसीएमए के जेजे एक्ट, पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता से जुड़ाव की जानकारी देंगे।  गोविंद बेनीवाल, बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ, मध्यप्रदेश सीएमपीओ की भूमिका, जिम्मेदारियों और बाल विवाह के प्रकरणों की रिपोर्टिंग से संबंधित प्रशिक्षण देंगे। वरिष्ठ अधिकारी करेंगे मार्गदर्शन कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त  संदीप जी. आर., सचिव मती जी.व्ही. रश्मि, पंचायत राज संचालनालय के संचालक सह आयुक्त  छोटे सिंह, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त  संकेत भोंडवे, मध्यप्रदेश पुलिस में महिला सुरक्षा के विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मार्गदर्शन करेंगे। पुलिस उप महानिरीक्षक (सामुदायिक पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजगढ़ के  देवदत्त तथा पंचायत राज संचालनालय के उप निदेशक  सुधीर जैन भी बाल विवाह रोकथाम में अपने विभागों की भूमिका और आपसी समन्वय के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों से संवाद करेंगे।  

कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान कृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है। अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।  

महात्मा गांधी सान्दीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया संसद भवन का भ्रमण

भोपाल  महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ। पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया। विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।     भोपाल  महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ। पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया। विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।  

गडकरी सफल नवाचारों को साझा कर अन्य राज्यों में अपनाएं

भोपाल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में देशभर के अच्छे प्रयोगों और नवाचारों को साझा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘बैंक ऑफ आइडियाज, इनोवेशन एंड रिसर्च’ जैसी वेबसाइट बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी राज्य या विभाग में सफल हुए प्रयोगों को दूसरे राज्यों में भी अपनाया जाना चाहिए, जिससे उनके अनुभवों का व्यापक लाभ मिल सके। केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने भूमि अधिग्रहण को सड़क परियोजनाओं की प्रमुख चुनौती बताते हुए कहा कि लगभग 1.60 लाख भूमि अधिग्रहण प्रकरण लंबित हैं। उन्होंने टेंडर जारी करने से पहले भूमि अधिग्रहण संबंधी कार्रवाई पूरी करने का सुझाव दिया, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से बचा जा सके। सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि दुर्घटनाओं में 18 से 36 वर्ष के युवाओं की बड़ी संख्या में मृत्यु देश के लिए गंभीर क्षति है। उन्होंने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों और 60 प्रतिशत राज्य सरकारों की सड़कों पर होती हैं। केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने व्हाइट टॉपिंग तथा अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी विचार करने का सुझाव दिया। केंद्रीय मंत्री  गडकरी ने केवड़िया (गुजरात)। अधोसंरचना विकास में पीएम गति शक्ति के व्यापक और व्यावहारिक उपयोग की मध्यप्रदेश की पहल को राष्ट्रीय मंच पर सराहना मिली है। गुजरात के केवड़िया में आयोजित चिंतन शिविर में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने पीएम गति शक्ति पर केंद्रित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने सर्वेक्षण, सड़क नेटवर्क की योजना, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, बजट और निर्माण कार्यों की समय-सीमा निर्धारित करने में इस प्लेटफॉर्म के उपयोग के मध्यप्रदेश के अनुभव साझा किए। सत्र में बताया गया कि प्रदेश के कुछ नवाचारों को राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी अपनाया जा रहा है। मंत्री  सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति को अधोसंरचना विकास के लिए एक व्यापक डिजिटल आधार के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए इसे विभागों की नियमित कार्यप्रणाली से जोड़ना होगा। मध्यप्रदेश ने प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न मॉड्यूल विकसित कर इस दिशा में व्यावहारिक पहल की है। केंद्रीय मंत्री  गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित चिंतन शिविर में लगभग 18 राज्यों के लोक निर्माण मंत्रियों ने सहभागिता की। लगभग सभी राज्यों के लोक निर्माण विभागों और सड़क निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। शिविर में अधोसंरचना विकास, तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और परियोजनाओं की निगरानी पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। चिंतन शिविर में भाग लेने आए लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने सोमवार सुबह पहले लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' के दर्शन किए एवं सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। 74,370 किलोमीटर सड़कें, 2,601 सरकारी भवन और 3,654 पुल जियो-टैग लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने बताया कि गांधीनगर स्थित भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर मध्यप्रदेश के लिए लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। इसके माध्यम से प्रदेश की 74,370 किलोमीटर सड़कों, 2,601 सरकारी भवनों और 3,654 पुलों को जियो-टैग किया जा चुका है। इससे अधोसंरचना संबंधी जानकारी को सटीक भौगोलिक पहचान के साथ उपलब्ध कराने में मदद मिली है। प्रदेश ने रोड नेटवर्क मास्टर प्लान मॉड्यूल भी विकसित किया है। पीएम गति शक्ति के भू-स्थानिक डेटा का उपयोग कर तैयार रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से मौजूदा सड़क नेटवर्क, क्षेत्रीय आवश्यकताओं और भविष्य की प्राथमिकताओं का बेहतर विश्लेषण संभव हुआ है। डीपीआर, बजट और समय-सीमा निर्धारण से जुड़ा पीएम गति शक्ति मंत्री  सिंह ने बताया कि प्रस्तावित सड़कों के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया को भू-स्थानिक डेटा से जोड़ने के लिए डीपीआर मॉड्यूल विकसित किया गया है। इसी प्रकार बजट मॉड्यूल के माध्यम से वार्षिक बजट तैयार करने की प्रक्रिया को पीएम गति शक्ति से जोड़ा गया है। विभिन्न प्रस्तावों और योजनाओं को एक साथ देखने से संभावित दोहराव की पहचान करने और उसे दूर करने में मदद मिल रही है। इससे उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग का आधार तैयार हुआ है। निर्माण कार्यों के लिए विकसित टाइमलाइन मॉड्यूल से परियोजनाओं की वास्तविक समय-सीमा निर्धारित करने और तय समय-सीमा के अनुरूप प्रगति की समीक्षा करने की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार सर्वेक्षण और डेटा संग्रह से लेकर योजना, डीपीआर, बजट तथा निर्माण की समय-सीमा तक पीएम गति शक्ति को विभागीय कार्य प्रणाली से जोड़ा जा रहा है। क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन तक बढ़े उपयोग लोक निर्माण मंत्री  सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति की क्षमताओं का उपयोग परियोजना क्रियान्वयन, प्रगति की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुबंध प्रबंधन तक बढ़ाया जाना चाहिए। विभागों की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुसार नए मॉड्यूल, इंटरफेस और सुविधाएं विकसित करने के लिए बायसेग-एन के साथ और अधिक समन्वय किया जा सकता है। मंत्री  सिंह ने राज्यों से अपनी तकनीकी चुनौतियों, आवश्यकताओं और संभावनाओं पर खुले मन से चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पीएम गति शक्ति पर डेटा अपलोड करने के साथ उसका नियमित निर्णयों और कार्यों में उपयोग आवश्यक है। सत्र से नए विचार, व्यावहारिक सुझाव और सार्थक समाधान सामने आना ही चिंतन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए। मध्यप्रदेश की पहल को बायसेग-एन ने सराहा, अन्य राज्यों में भी अपनाए जा रहे नवाचार बायसेग-एन के निदेशक  विनय ठाकुर ने पीएम गति शक्ति की विभिन्न सुविधाओं और निर्माण कार्यों में इसके उपयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण मंत्री  सिंह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल की है।  सिंह स्वयं तीन-चार बार BISAG-N, गांधीनगर पहुंचकर कार्यों की समीक्षा और मार्गदर्शन कर चुके हैं। निदेशक  ठाकुर ने बताया कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मध्यप्रदेश के कुछ नवाचारों को लागू किया गया है। उन्होंने इसे राज्यों के बीच सफल प्रयोगों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परियोजनाओं की निगरानी पर चर्चा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन  संतोष यादव ने ड्रोन तकनीक से सड़क परियोजनाओं की निगरानी और विश्लेषण की जानकारी दी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से निर्माण कार्यों में संभावित देरी और लागत वृद्धि का पूर्व आकलन करने तथा एनएचएआई के डेटा लेक सिस्टम के उपयोग … Read more

अकादमिक संस्थाओं, उद्योग और डेवलपर समुदाय के सहयोग से लगेंगे छह तकनीकी स्टॉल

भोपाल  मुख्यमंत्री युवा सम्मेलन 6 अक्टूबर को लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में आयोजित होगा। सम्मेलन में प्रदेश के युवाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवाचार, आधुनिक तकनीकों, कौशल विकास, इंटर्नशिप और उद्यमिता के अवसरों से परिचित कराया जाएगा। मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमपीएसईडीसी) द्वारा सम्मेलन में छह स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स और प्रौद्योगिकी उद्यमिता सहित विभिन्न उभरते तकनीकी क्षेत्रों में प्रदेश में हो रहे कार्यों तथा उपलब्ध अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सहभागिता में एक स्टॉल एमपीएसईडीसी का होगा, जबकि पांच स्टॉल अकादमिक संस्थानों, उद्योग एवं डेवलपर समुदाय से जुड़ी संस्थाओं द्वारा लगाए जाएंगे। स्टॉल्स पर तकनीकी गतिविधियों के लाइव प्रदर्शन के साथ युवाओं के लिए उपलब्ध इंटर्नशिप, कौशल विकास और स्टार्टअप सहायता से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी। एमपीएसईडीसी के स्टॉल पर आईटी, आईटीईएस एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में राज्य के निवेश प्रोत्साहन ढांचे तथा विद्यार्थियों और स्नातकों के लिए संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम की जानकारी दी जाएगी। आईआईटी इंदौर दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन द्वारा अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं उद्यमिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इज़ी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के स्टॉल पर ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से शासन, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में मानव रहित हवाई प्रणालियों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। द ओरिजिन गिल्ड द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में मध्यभारत में विकसित हो रहे समुदाय आधारित नेटवर्क और एआई विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रदर्शित किया जाएगा। गूगल डेवलपर ग्रुप (जीडीजी), भोपाल द्वारा डेवलपर्स के कौशल उन्नयन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। वहीं यंगोवेटर के स्टॉल पर रोबोटिक्स, ऑटोमेटेड गाइडेड व्हीकल्स (एजीवी), ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स और ऑटोमेशन समाधानों का प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री युवा सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की यह सहभागिता प्रदेश के युवाओं को तकनीकी क्षेत्र की संस्थाओं, उद्योगों और नवाचार से जुड़े समुदायों से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी। इससे युवा अपने तकनीकी कौशल को रोजगार, करियर और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ सकेंगे। प्रदेश की प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था में युवाओं को प्रमुख सहभागी बनाने की दिशा में यह सहभागिता महत्वपूर्ण होगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वन विकास निगम की ओर से सौंपा गया 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से 16 करोड़ 74 लाख 2 हजार रुपए के लाभांश का चेक सौंपा गया। यह निगम द्वारा अब तक दिया गया सर्वाधिक लाभांश है। राज्य सरकार के अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से यह लाभांश प्रदान किया गया है। निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को लाभांश का चेक सौंपा। इस अवसर पर निगम के उपाध्यक्ष  राम मोहन सिंह बघेल और प्रमुख सचिव वन  राघवेंद्र सिंह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निगम के अध्यक्ष  रावत, उपाध्यक्ष  बघेल, प्रमुख सचिव वन  सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन तथा मध्यप्रदेश वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को निगम की विकासोन्मुखी गतिविधियों के लिए बधाई दी। मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम की ओर से भारत सरकार को उसके अंशदान पर 44.13 रुपए प्रति शेयर की दर से 61 लाख 17 हजार रुपए का लाभांश भुगतान किया जाएगा।  

पेड़ कटते रहे, पौधे नहीं लगे: 6911 पेड़ों के मामले में NGT ने पकड़ी भोपाल नगर निगम की लापरवाही

भोपाल   पेड़ काटने की अनुमति देने के बाद पर्यावरण की भरपाई के लिए जमा करोड़ों रुपये भी नगर निगम ठीक से खर्च नहीं कर पाया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सही तरीके से नहीं हुआ और रकम पौधारोपण के बजाय दूसरे कामों में खर्च की गई। इतना ही नहीं, 2021 से राशि का हिस्सा पड़ा हुआ है, जबकि पेड़ काटे जाने के बाद तय मानकों के मुताबिक पौधारोपण तक पूरा नहीं किया गया। ट्रिब्यूनल ने इसे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली स्थिति माना है। साथ ही भोपाल में हरियाली घटने के आंकड़ों पर भी एनजीटी ने चिंता जताई है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच के आदेश के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच नगर निगम द्वारा 6911 पेड़ काटने की अनुमति दी गई, इनके बदले 24,706 पौधे लगाए जाने थे, लेकिन अब तक 19,152 ही लगाए गए। पूरी राशि का उपयोग नहीं वहीं, पेड़ कटाई के एवज में 3.52 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि एक जनवरी 2026 तक सिर्फ 95.85 लाख रुपये ही पौधारोपण और संबंधित कार्यों पर खर्च किए गए। यानी करीब 2.56-2.57 करोड़ रुपये का उपयोग ही नहीं किया गया। एनजीटी ने माना कि राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और पौधारोपण भी तय मानकों के मुताबिक नहीं किया गया। एनजीटी ने साफ कहा कि पेड़ काटने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण उसी वित्तीय वर्ष या अगले मानसून में किया जाना चाहिए था, लेकिन नगर निगम की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ। समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा निगम एनजीटी ने नगर निगम के रिकार्ड की जांच के बाद कहा कि जमा राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ और रकम का कुछ हिस्सा दूसरे कामों में खर्च किया गया। नगर निगम की सुस्ती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिस पौधारोपण का काम मानसून में पूरा होना चाहिए था, उसके लिए निगम बाद में समिति बनाने और योजना तैयार करने में लगा रहा। एनजीटी ने इस स्थिति को ‘आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला’ बताया। आदेश में पिछले एक दशक में शहर में चार से पांच लाख परिपक्व पेड़ काटे जाने के अनुमान और आइआइएससी के आकलन का उल्लेख है, जिसके अनुसार व्यापक भोपाल शहरी क्षेत्र में ट्री कैनोपी में 44 प्रतिशत कमी आई है। निगम को एक महीने में पूरा करना होगा पौधारोपण एनजीटी ने नगर निगम को एक महीने में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पौधारोपण अतिरिक्त और निर्धारित खुले क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि हरित क्षेत्र का वास्तविक नुकसान पूरा हो सके। इसके लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी। पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सिर्फ पौधारोपण, रखरखाव और पौधों के सर्वाइवल के लिए किया जाए। पुराने पौधारोपण के बीच खाली जगह भरने को क्षतिपूर्ति पौधारोपण नहीं माना जाएगा। निगम को लगाए गए पौधों के सर्वाइवल की जांच कर फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।