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शाही कब्रिस्तान पहुंची मेट्रो टीम तो भड़के विधायक आतिफ अकील, बेरिकेडिंग पर हुआ हंगामा

भोपाल  भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के फेज-2 के रूट पर उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने फिर आपत्ति उठाई है। सोमवार देर रात जब मेट्रो टीम भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान पहुंची और बेरिकेड्स लगाने शुरू किए तो विधायक का पारा चढ़ गया। उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से कहा कि चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। उनकी मेट्रो के कब्रिस्तान में से अंडरग्राउंड रूट निकालने को लेकर नाराजगी थी। देर रात जब पता चला कि मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी कब्रिस्तान के बाहर बेरिकेड्स लगा रहे और मशीनें लेकर पहुंचे तो वे मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से सख्त लहजे में कहा कि कब्रिस्तान को छोड़कर मेट्रो का काम करें। यहां पर सामान लेकर कैसे आए? यह शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी है। क्या पहले जानकारी दी थी? या अनुमति है? पुलिस वाले सामने खड़े होकर कब्जा करवा रहे हैं। पहले शाही औकाफ से परमिशन लाना, फिर काम करना। बिना अनुमति कोई काम न करें समाज के लोगों के साथ विधायक अकील ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कोई भी कार्य न किया जाए। सभी मशीनों व सामान को तुरंत मौके से हटाया जाए। यह है मेट्रो का फेज-2 बता दें कि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो दौड़ रही है। अब दूसरे फेज के रूट यानी, सुभाषनगर से करोंद तक तेजी से काम चल रहा है। इसकी कुल लंबाई 16.74 किमी है। दूसरे फेस में सुभाषनगर से करोंद की कुल दूरी 9.74 किमी लंबा है, लेकिन 8.77 किमी में होगा। इसमें से 5.38 Km हिस्से में 6 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिस पर 650 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस काम की शुरुआत हो चुकी है। पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा पर स्टेशन बनेंगे। वहीं, बाकी 3.39 किलोमीटर रूट अंडरग्राउंड होगा। इसमें 2 मेट्रो स्टेशन भोपाल रेलवे स्टेशन व नादरा बस स्टैंड भी रहेंगे। यह पूरा काम 890 करोड़ रुपए में होगा। इसी रूट को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में सुनवाई भी चल रही है। जिसमें दोनों पक्ष अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। विधायक की यह आपत्ति इस मामले में विधायक अकील का कहना है कि यहां हमारे बाप-दादा दफन है। कई कब्र हैं। इसलिए कब्रिस्तान में से मेट्रो कतई न गुजरे। वे पहले भी आपत्तियां लगा चुके हैं।

भोपाल के 4 पुलिस थानों का कमाल, बेहतर सेवा के लिए मिला इंटरनेशनल ISO प्रमाणन

भोपाल   राजधानी भोपाल के 4 थाने और एक डीसीपी कार्यालय को बेहतर कार्य के लिए आईएसओ सर्टिफिकेट मिला है. जनता की शिकायतों का निर्धारित समय पर निराकरण करने, अपराधियों को पकड़ने, थाने के रखरखाव और रिकॉर्ड कम्प्यूटराइज्ड होने के साथ जनता के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने पर भोपाल पुलिस कमिश्नरेट के चार थानों और एक एडिशनल DCP कार्यलय जोन-3 को अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन ने सर्टिफिकेट जारी किया है. भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार, एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान और ISO टीम की मौजूदगी में थाना प्रभारियों और अधिकारियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।  भोपाल के इन थानों को ISO सर्टिफिकेट भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा थानों को बेहतर, आधुनिक और जनोन्मुखी बनाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी उपलब्धि मिली है. भोपाल शहर के चार थाने कोलार, बागसेवनिया, अशोका गार्डन और खजूरी सड़क सहित एडिशनल डीसीपी कार्यालय जोन-3 को ISO-9001:2015 सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।  जर्जर थानों का किया गया कायाकल्प भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने शहर के जर्जर पुलिस थानों के जीर्णोद्धार को अभियान के तौर पर शुरू किया है. इन थानों की इमारतें लंबे समय से खराब स्थिति में थीं. पुलिस स्टाफ के साथ-साथ शिकायत लेकर आने वाले आम लोगों और पीड़ितों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. रिकॉर्ड के रखरखाव की स्थिति भी बेहतर नहीं थी. वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इन थानों का कायाकल्प किया गया. पुराने रिकॉर्ड को नियमानुसार नष्ट करने के साथ आवश्यक रिकॉर्ड को व्यवस्थित और संधारित किया गया. आमजन के बैठने के लिए बेहतर व्यवस्था, थाना परिसर का सौंदर्यीकरण और जनोन्मुखी सुविधाओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।  ISO टीम ने गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का किया मूल्यांकन थानों में की गई व्यवस्थाओं, साफ-सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन, जनसुविधाओं और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का ISO टीम द्वारा मूल्यांकन किया गया. मूल्यांकन के बाद बागसेवनिया, अशोका गार्डन, कोलार, खजूरी सड़क थाना और एडिशनल डीसीपी जोन-3 कार्यालय को ISO-9001:2015 प्रमाणन के लिए चयनित किया गया. इससे पहले मिसरोद, रातीबड़ और महिला थाना भी ISO सर्टिफाइड हो चुके हैं।  पुलिस कमिश्नर ने स्टाफ को दी बधाई पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने ISO प्रमाण पत्र मिलने पर चारो थानों के थाना प्रभारियों सहित अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा, '' थानों में की गई जनोन्मुखी व्यवस्थाओं का उद्देश्य आम नागरिकों और पीड़ितों को बेहतर वातावरण और प्रभावी पुलिस सेवा उपलब्ध कराना है.'' उन्होंने अन्य थानों को भी इसी श्रेणी में लाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित किया. साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में भोपाल कमिश्नरेट के अन्य थानों का भी इसी तरह जीर्णोद्धार कर उन्हें ISO-9001:2015 प्रमाणन दिलाने का प्रयास किया जाएगा।  कार्यक्रम में DCP विकास सहवाल, एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित, एडिशनल डीसीपी मिनी शुक्ला, ACP उमराव सिंह, ACP मनोज कुमार, ISO टीम से योगेंद्र द्विवेदी, RI जयसिंह तोमर सहित सभी थाना प्रभारी, पुलिस स्टाफ, गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। 

बागेश्वर धाम केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, SIT करेगी जांच; DNA रिपोर्ट पर उठे अहम सवाल

जबलपुर  बागेश्वर धाम में मार्च में सामने आए नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की अदालत ने आरोपित राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने टीम को यह पता लगाने के लिए जांच करने को कहा है कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किस व्यक्ति ने किया था और उसके गर्भ से मिले भ्रूण का जैविक पिता कौन है। जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। 15 मार्च को अकेली आई थी नाबालिग अभियोजन के मुताबिक, नाबालिग 15 मार्च को अकेले बागेश्वर धाम पहुंची थी। 17 मार्च को उसकी मुलाकात राजू जाटव से हुई। आरोप है कि राजू उसे घर छोड़ने की बात कहकर अपने साथ ले गया और करीब 15 दिनों तक अपने पास रखा। इसके बाद वह नाबालिग को ट्रेन से पचोर ले गया। पुलिस ने राजू की पत्नी की निशानदेही पर नाबालिग को बरामद किया था। जांच के दौरान नाबालिग के गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। गर्भपात के बाद अदालत ने भ्रूण की डीएनए जांच कराने के निर्देश दिए थे। डीएनए रिपोर्ट में राजू को जैविक पिता नहीं माना गया 29 अगस्त को सामने आई डीएनए रिपोर्ट में राजू जाटव को भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया। मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब नाबालिग ने अदालत के समक्ष राजू द्वारा दुष्कर्म किए जाने से इन्कार किया। हालांकि, पुलिस के समक्ष दर्ज उसके पूर्व बयानों में उसने राजू पर जबरन दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। बयानों में अंतर और डीएनए रिपोर्ट के बाद हाई कोर्ट ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाने की जरूरत महसूस की। अब विशेष जांच टीम पूरे मामले की नए सिरे से पड़ताल करेगी और यह पता लगाएगी कि नाबालिग के साथ वास्तव में किसने यौन अपराध किया तथा गर्भ में पल रहे भ्रूण का जैविक पिता कौन था। धाम में अकेले न आएं महिलाएं : धीरेंद्र शास्त्री इधर, 3 अक्टूबर की रात बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महिलाओं और माताओं से अकेले धाम नहीं आने की अपील की। उन्होंने अनजान लोगों और सेवादारों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने की सलाह भी दी। हालांकि, उनकी अपील में इस नाबालिग से जुड़े प्रकरण का कोई सीधा उल्लेख नहीं था।  

एक्टर राजपाल यादव पर कोर्ट का शिकंजा, महू सिविल न्यायालय ने जारी किया जमानती वारंट

 महू   फिल्म अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महू सिविल न्यायालय ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई महू निवासी और फिल्म फाइनेंसर प्रकाश जाजू की ओर से दायर प्रकरण की सुनवाई के दौरान की गई। पंचम व्यवहार न्यायाधीश फरहान मसूद कुरैशी ने वारंट जारी करते हुए संबंधित थाने को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 25 लाख दिए, पोस्ट डेटेड चेक हुए बाउंस प्रकरण में प्रकाश जाजू की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राधेश्याम अग्रवाल के अनुसार, जाजू पिछले करीब 30-40 वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं और फिल्मों के लिए फाइनेंसिंग का काम करते हैं। उनकी फर्म निर्मला जानकी सिनेमा के नाम से है। अधिवक्ता के मुताबिक, प्रकाश जाजू ने अभिनेता राजपाल यादव को 25 लाख रुपये दिए थे। इस लेन-देन को लेकर दोनों पक्षों के बीच एग्रीमेंट भी हुआ था। रकम की वापसी के लिए राजपाल यादव की ओर से पोस्ट डेटेड चेक दिए गए थे। आरोप है कि एग्रीमेंट में तय शर्तों के अनुसार रकम वापस नहीं की गई। जब जाजू ने चेक बैंक में लगाए तो वे बाउंस हो गए। चेक बाउंस के बाद कोर्ट पहुंचा मामला चेक बाउंस होने के बाद प्रकाश जाजू की ओर से परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत महू न्यायालय में प्रकरण दायर किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राजपाल पुत्र नौरंग यादव, निवासी रुनवाल हाइट, लोखंडवाला के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। 13 अक्टूबर तक पेश होने के निर्देश कोर्ट की ओर से जारी वारंट के बाद अब अभिनेता राजपाल यादव को 13 अक्टूबर तक न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी। प्रकाश जाजू मूल रूप से महू के रहने वाले हैं, हालांकि वर्तमान में मुंबई में निवास करते हैं। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अपने वित्तीय कारोबार के दौरान राजपाल यादव को यह रकम दिए जाने की बात कही है।

यात्रियों के लिए जरूरी खबर! 15 अक्टूबर को ललितपुर से वापस लौटेगी शताब्दी, कई ट्रेनें रहेंगी प्रभावित

ग्वालियर  अगासोद यार्ड रीमॉडलिंग के चलते रेलवे ने कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। इसके तहत नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस को 15 अक्टूबर को ललितपुर से ही वापस लौटाया जाएगा। वहीं, रानी कमलापति-नई दिल्ली शताब्दी भी इसी दिन रानी कमलापति के बजाय ललितपुर से रवाना होगी। इसके अलावा कई ट्रेनों को दो से पांच घंटे तक पुनर्निर्धारित समय पर चलाया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों को रास्ते में रोककर नियंत्रित किया जाएगा। बता दें कि, अगासोद यार्ड रीमॉडलिंग का असर 12002 नई दिल्ली-रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस पर पड़ेगा। 15 अक्टूबर को यह ट्रेन ललितपुर में ही यात्रा समाप्त करेगी। इसी तरह 12001 रानी कमलापति-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस भी 15 अक्टूबर को रानी कमलापति के बजाय ललितपुर से ही रवाना होगी। ये ट्रेनें दो से पांच घंटे की देरी से चलेंगी रेलवे ने आठ ट्रेनों को पुनर्निर्धारित समय पर चलाने का निर्णय लिया है। 16031 चेन्नई-श्री माता वैष्णो देवी कटरा 14 अक्टूबर को चार घंटे, 12652 हजरत निजामुद्दीन-मदुरै 15 अक्टूबर को पांच घंटे, 19484 सहरसा-अहमदाबाद 14 अक्टूबर को दो घंटे और 11077 पुणे-जम्मू तवी 14 अक्टूबर को पांच घंटे देरी से चलेगी। 12650 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर 15 अक्टूबर को चार घंटे, 12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम तीन घंटे, 18238 अमृतसर-बिलासपुर तीन घंटे और 12138 फिरोजपुर कैंट-मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस चार घंटे पुनर्निर्धारित समय पर चलेगी। कुछ ट्रेनों को मार्ग में नियंत्रित कर चलाने का निर्णय लिया गया है। 12138 फिरोजपुर कैंट-मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को 10 से 14 अक्टूबर तक 90 मिनट, 12648 हजरत निजामुद्दीन-कोयंबटूर को 14 अक्टूबर को 90 मिनट और 12650 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर को 10 से 13 अक्टूबर तक 90 मिनट नियंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा 12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम को 10, 12 और 13 अक्टूबर को 60 मिनट, 18238 अमृतसर-बिलासपुर को 10 से 14 अक्टूबर तक 60 मिनट, 12630 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर को 14 अक्टूबर को 30 मिनट और 22686 को 10 व 13 अक्टूबर को 30 मिनट नियंत्रित किया जाएगा। साहिबाबाद यार्ड में निर्माण कार्य से बदलेगा बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस का मार्ग दिल्ली रेल मंडल के साहिबाबाद यार्ड में निर्माण कार्य के चलते आठ अक्टूबर को बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस बदले मार्ग से संचालित होगी। रेलवे के अनुसार साहिबाबाद यार्ड में समपार संख्या चार के स्थान पर सीमित ऊंचाई वाले भूमिगत मार्ग के निर्माण के लिए आरसीसी गर्डर लगाने और सुरक्षा प्लेटें स्थापित करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए पावर और यातायात ब्लॉक लिया गया है। गाड़ी संख्या 22200 बलरामपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस साहिबाबाद से आनंद विहार टर्मिनल, तिलक ब्रिज और हजरत निजामुद्दीन के बजाय साहिबाबाद-दिल्ली जंक्शन-नई दिल्ली-हजरत निजामुद्दीन होकर चलेगी।

कस्बों-नगरों से राजधानी तक सफर हुआ आसान, विकास की रफ्तार बढ़ी : CM यादव

कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गाडरवारा क्षेत्र के नागरिकों ने किया मुख्यमंत्री निवास में अभिनन्दन गाडरवारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है। अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।  

भोपाल में 2.89 लाख पेड़ों पर मंडराया संकट! 791 किमी सड़क नेटवर्क के प्रस्ताव से विशेषज्ञ चिंतित

 भोपाल भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है। सड़क का नेटवर्क, विशेषज्ञों ने जताई चिंता  भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।में भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर पर्यावरणविदों और शहर के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। योजना के तहत 18 से 75 मीटर तक चौड़ी सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण से 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में एनएचएआइ की 16.44 किमी लंबी सड़क के लिए लगभग 6,000 पेड़ काटे गए थे। इस आधार पर देखें तो पूरे 791.42 किमी नेटवर्क के निर्माण से सांकेतिक रूप से करीब 2.89 लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल सकती है। 1,450 रुपए प्रति पेड़ की मुआवजा दर के अनुसार इसका सांकेतिक मूल्य लगभग 42 करोड़ रुपए बनता है। इससे पहले भी बायपास और विभिन्न सड़क परियोजनाओं के नाम पर राजधानी में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है। डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। इस प्रकार की ओवरलैपिंग से व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता मिल सकती है।  गौरव वैद्य के अनुसार वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़कों का अंतिम रेखांकन, संबंधित मार्गों पर मौजूद वर्तमान वनस्पति की स्थिति, भू-अधिग्रहण की वास्तविक आवश्यकताएं और सड़कों के वास्तविक चौड़ीकरण का विस्तार जैसी बातों पर निर्भर करेगा।30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़भोपाल में काटे जाएंगे 2.89 लाख पेड़।  ओवरलैपिंग मार्किंग पर उठे सवाल मैनिट भोपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आकिटेक्चर एंड प्लानिंग के एचओडी प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है।  प्रस्तावित सड़क नेटवर्क का ढांचा 18 मीटर चौड़ी सड़कें- 111 24 मीटर चौड़ी सड़कें- 103 30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48 45 मीटर चौड़ी सड़कें- 17 60 मीटर चौड़ी सड़कें- 15 ये नई सड़कें देंगी नया आकार 09 मीटर- 2 सड़कें 12 मीटर- 4 सड़कें 15 मीटर- 2 सड़कें 70 मीटर- 4 सड़कें 75 मीटर-6 सडकें प्रोजेक्ट भोपाल की हरियाली के लिए खतरा पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। वहीं मैनिट के प्रो. डॉ. धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है। वित्तीय एवं पर्यावरणीय मानक एनएचएआइ संदर्भ दरः 365 पेड़ प्रति किलोमीटर संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़ निर्धारित मुआवजा दरः 1,450 रुपए प्रति पेड़ अनुमानित कुल मुआवजा राशिः लगभग 42 करोड़ रुपए  

गुना में बाल विवाह की चौंकाने वाली तस्वीर, 25% युवतियों की शादी 18 से पहले; 39% पुरुष 21 से पहले बने दूल्हे

 गुना  गुना में कम उम्र में शादी की परंपरा कानून और जागरूकता के बावजूद खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के आंकड़े बताते हैं कि 20 से 24 वर्ष की उम्र की हर चार में करीब एक युवती का विवाह 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुका था। जिले में इसका अनुपात 25.9% है। पांच साल पहले हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में यह 28.1% था, यानी कमी तो आई, लेकिन राज्य के 20% औसत से गुना अभी भी काफी ऊपर है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पुरुषों के आंकड़े में सामने आई है। 25 से 29 वर्ष की उम्र के 39% पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हुई। इसके पहले के सर्वे में यह अनुपात 21.8% था। यानी पांच साल में कम उम्र में शादी करने वाले पुरुषों का अनुपात 17.2% अंक बढ़ गया। राज्य का औसत 25% है। पुरुषों का आंकड़ा सबसे बड़ा अलार्म; 5 साल में 21.8% से 39% : बाल विवाह की चर्चा में आमतौर पर लड़कियों के आंकड़ों पर फोकस रहता है, लेकिन गुना में पुरुषों का आंकड़ा ज्यादा बड़ा सवाल खड़ा करता है। 25-29 वर्ष के 39% पुरुषों की शादी 21 साल से पहले हुई। पांच साल पहले यह अनुपात 21.8% था। यानी इसमें करीब 80% की सापेक्ष बढ़ोतरी हुई है। राज्य में 21 साल से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का औसत 25% है। गुना का आंकड़ा इससे 14 प्रतिशत अंक अधिक है। शादी जल्दी तो मातृत्व भी जल्दी, किशोरियों में आंकड़ा 8.5% कम उम्र में विवाह का एक और संकेत किशोरियों के मातृत्व के आंकड़े में दिखता है। जिले में 15-19 वर्ष की 8.5% किशोरियां सर्वे के समय या तो मां बन चुकी थीं या गर्भवती थीं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 5.5% था। यानी पांच साल में इसमें 3% अंक की बढ़ोतरी हुई। मप्र का औसत 5.6% है, जबकि गुना इससे भी ऊपर है। इसके पीछे कारण शिक्षा भी है। जिले में 15-49 वर्ष की केवल 18.9% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि प्रदेश में इसका औसत 33.7% है। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्रदेश के मुकाबले बालिका शिक्षा में गुना की स्थिति बेहद खराब है। यही स्थिति लड़कों की शिक्षा में भी है।  

MSP पर फसल बेचने का मौका, 10 अक्टूबर तक करा सकते हैं पंजीयन; 3 लाख से अधिक किसान जुड़े

समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत 10 अक्टूबर तक होगा पंजीयन भोपाल खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 3 लाख 5 हजार 82 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं। जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, नर्मदापुरम में 16 हजार 398, भोपाल में 8 हजार 599, रीवा में 94 हजार 384, शहडोल में 21 हजार 456 और सागर संभाग में 16 हजार 155 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा। सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा। सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा। आधार नंबर का वेरिफिकेशन पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।  

CM यूथ कॉन्क्लेव-2026: 6 अक्टूबर को 20 हजार युवाओं से संवाद करेंगे मोहन यादव, नई तकनीकों पर चर्चा

भोपाल  भोपाल में 6 अक्टूबर को सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 आयोजित होगा, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।AI, रोबोटिक्स, ड्रोन जैसी भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान।मध्य प्रदेश की युवा शक्ति को रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और नई तकनीकों से जोड़ने के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। कॉन्क्लेव में युवाओं को कॅरियर और रोजगार के नए विकल्पों के साथ ही नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं से भी रूबरू कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रविवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां तय समय-सीमा में पूरी करने और युवाओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।कॉन्क्लेव में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और नई तकनीकों पर विशेष सत्र और गतिविधियां होंगी।  विशेषज्ञों के साथ शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और स्टार्टअप भी इसमें शामिल होंगे। युवाओं को बदलते जॉब मार्केट, नए कौशल की जरूरत, स्वरोजगार की संभावनाओं और अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उद्योग, एमएसएमई, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष, पुलिस और साइबर सुरक्षा समेत कई विभाग युवाओं के लिए संचालित योजनाओं और अवसरों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर और सेडमैप की ओर से भी स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे।  इनमें विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, संस्थाओं और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार, कॅरियर, प्रशिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। विश्वविद्यालयों की ओर से ड्रोन तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कॅरियर से जुड़े प्रोजेक्ट और प्रस्तुतियां भी होंगी। युवा कॉन्क्लेव में भविष्य की तकनीकों को खास जगह दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और रिसर्च की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से नवोदित उद्यम अपने उत्पाद और नए प्रयोग प्रदर्शित करेंगे। युवा इन स्टार्टअप के जरिए यह समझ सकेंगे कि किसी विचार को उत्पाद, सेवा और सफल उद्यम में कैसे बदला जा सकता है।  कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन और कौशल विकास के साथ मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग, रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ जानकारी देंगे। पुलिस विभाग की ओर से महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग और जन-सुरक्षा से जुड़े विषयों पर युवाओं के साथ संवाद किया जाएगा।CM मोहन यादव ने मंडला को दिया 460 करोड़ का तोहफा, टाइगर सफारी-जू से पान की खेती तक कई बड़े ऐलानयुवा कॉन्क्लेव में ज्ञान और मार्गदर्शन के साथ मनोरंजन का भी इंतजाम रहेगा।  कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां युवाओं का उत्साह बढ़ाएंगी।सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को संवाद, कौशल, कॅरियर, रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ 20 हजार से अधिक युवाओं का संवाद और 80 से ज्यादा प्रदर्शनी कक्ष इस आयोजन को प्रदेश के युवा केंद्रित बड़े आयोजनों में शामिल करेगा। सरकार का जोर युवा प्रतिभा और ऊर्जा को सही अवसर देकर विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ाने पर है।