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अधोसंरचना विकास को रफ्तार देने की तैयारी, एक लाख करोड़ से अधिक खर्च का लक्ष्य

भोपाल  इस वित्तीय वर्ष 2026-2027 में मध्यप्रदेश सरकार ने बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर सड़क, बांध, बिजली, नहर निर्माण सहित विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय का लक्ष्य रखा है। इस राशि में राज्य की अपनी आय, विभिन्न निगमों के संसाधन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से जुटाए जाने वाले ऋण सहित अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं। वास्तविक उपलब्धता और व्यय बजट दस्तावेजों तथा वर्ष के दौरान जारी आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों से स्पष्ट होंगे। विकास परियोजनाओं के लिए इतनी बड़ी राशि का प्रावधान इसीलिए संभव हो सका है, क्योंकि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में हर वर्ष निरंतर वृद्धि हो रही है। जीएसडीपी में बढ़ोतरी होने से राज्य सरकारों की ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ जाती है, हालांकि ऋण की वास्तविक सीमा केंद्र सरकार के नियमों, राजकोषीय उत्तरदायित्व प्रावधानों और अन्य वित्तीय मानकों पर निर्भर करती है। मध्यप्रदेश सरकार इस बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता का उपयोग उपरोक्त विकास परियोजनाओं के लिए कर रही है। इस लक्ष्य का उद्देश्य प्रदेश में चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना और उनके क्रियान्वयन में तेजी लाना है। मध्यप्रदेश में सड़क क्षेत्र की कई परियोजनाओं के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित कार्य भी विभिन्न चरणों में संचालित हैं। इन परियोजनाओं की लागत, वित्तपोषण व्यवस्था और प्रगति का आकलन संबंधित विभागों तथा केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए। इन परियोजनाओं के अंतर्गत बांध, नहर और अन्य जल-संरचनाओं के निर्माण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा बिजली, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए भी विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यों पर होने वाला व्यय परियोजना-विशिष्ट स्वीकृतियों, चरणबद्ध बजट प्रावधानों और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा। इतने बड़े निवेश कार्यक्रम की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि बजट में किए गए प्रावधान वास्तविक परिसंपत्तियों में कितनी तेजी और दक्षता से परिवर्तित होते हैं। परियोजनाओं में समय और लागत की वृद्धि को नियंत्रित करना, भुगतान व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखना तथा प्रत्येक परियोजना के परिणामों की नियमित निगरानी करना वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना धन की व्यवस्था करना। इस लिहाज से सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाना और दूसरी ओर राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना।  यदि राजस्व संसाधनों में वृद्धि, ऋण प्रबंधन, व्यय की प्राथमिकता और परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन के बीच संतुलन कायम रहता है, तो एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्तावित निवेश प्रदेश की दीर्घकालीन अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार के निर्धारित निवेश लक्ष्य का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश की अधोसंरचना क्षमता को मजबूत करना और प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना है। हालांकि, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि लक्ष्य या बजट अनुमान को दर्शाती है; इसे वास्तविक व्यय नहीं माना जा सकता। निर्धारित प्रावधान, ऋण से प्राप्त राशि और परियोजनावार वास्तविक खर्च का अंतिम आकलन वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद उपलब्ध आधिकारिक लेखा और वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर किया जाना अधिक उपयुक्त होगा। "हर जगह, हरसंभव—प्रदेश विकास में सहभागिता” की भावना के साथ अधोसंरचना निर्माण, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इन प्रयासों से विकास की गति तेज होगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। एक लाख करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर व्यय से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने मिलकर करें प्रभावी प्रयास : मंत्री निर्मला भूरिया

भोपाल  मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) का व्यापक मैदानी तंत्र तैयार किया गया है। अब बाल विवाह के हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लक्षित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अकादमी में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम की रणनीति, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के समन्वय पर मंथन हुआ। महिला एवं बाल विकास मंत्री  निर्मला भूरिया ने कहा है कि बाल विवाह मुक्त मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए शासन, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने होंगे। बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए तैनात बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (CMPO) केवल कानून के क्रियान्वयनकर्ता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत हैं। मंत्री  भूरिया मंगलवार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA), 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ही बाल विवाह के मामलों में समयबद्ध हस्तक्षेप, समन्वय और संवेदनशील कार्रवाई के लिए सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और कौशल का वास्तविक प्रभाव मैदानी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। मंत्री  भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश ने बाल विवाह रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार 20-24 वर्ष की महिलाओं में 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह का अनुपात NFHS-5 के 23.1 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ से बाल विवाह उन्मूलन को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली है। मध्यप्रदेश में भी बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रभावी, समन्वित और सतत प्रयासों को मजबूत किया जा रहा है। 35 हजार से अधिक अधिकारियों को का दायित्व  भूरिया ने बताया कि प्रदेश में 35 हजार से अधिक बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों (CMPOs) को विभिन्न विभागों से नामित किया गया है। यह व्यवस्था ग्राम स्तर तक निगरानी और बाल विवाह की सूचना मिलने पर त्वरित हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने के लिए है । जिला स्तर से लेकर अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और नगरीय क्षेत्रों तक अधिकारियों की मौजूदगी का उद्देश्य यही है कि बाल विवाह की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई प्रशासन के किसी दूरस्थ स्तर तक पहुंचने का इंतजार न करे, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही त्वरित हस्तक्षेप संभव हो। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना में 18 वर्ष से पहले विवाह होने पर लाभ नहीं मिलने का प्रावधान बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और परिवारों को बाल विवाह से दूर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल को गति देने पर जोर  भूरिया ने कहा कि विभाग द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत ऐसे ग्रामों को मान्यता दी जा रही है, जहां पिछले एक वर्ष में कोई बाल विवाह नहीं हुआ है। यह पहल केवल बाल विवाह रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समुदाय को बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करने का माध्यम है।उन्होंने कहा कि किशोरियों के लिए जीवन कौशल शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व विकास जैसे कार्यक्रम उन्हें अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में सक्षम बना रहे हैं। मंत्री  भूरिया ने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों से कहा कि देवउठनी ग्यारस जैसे संवेदनशील अवसरों को देखते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए अभी से तैयारियां तेज करना जरूरी है।उन्होंने कहा कि बाल विवाह के जोखिम वाले परिवारों तक केवल कानूनी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ पहुंचना होगा। गरीबी, सामाजिक दबाव, असुरक्षा और अवसरों की कमी कई बार बाल विवाह के पीछे कारण बनते हैं। ऐसे में कानून के साथ परामर्श, शिक्षा, सामाजिक सहयोग और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। बाल विवाह रोकथाम के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लक्षित कार्रवाई जरूरी : आयुक्त संदीप जी.आर. आयुक्त महिला बाल विकास  संदीप जी.आर. ने कहा है कि मध्यप्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए अब सामान्य प्रयासों से आगे बढ़कर बाल विवाह प्रभावित क्षेत्रों में हॉटस्पॉट आधारित और लक्षित कार्रवाई पर विशेष ध्यान देना होगा। जिन ग्राम पंचायतों, विकासखंडों और जिलों में बाल विवाह की घटनाएं अधिक हैं, वहां उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर योजनाबद्ध एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के प्रयासों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए जिला, अनुभाग, तहसील, विकासखंड, सेक्टर, ग्राम और शहरी निकाय स्तर तक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, ताकि बाल विवाह की पहचान, रोकथाम और आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी तंत्र विकसित हो सके।  संदीप ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय विकास एवं आवास विभाग भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग के बिना बाल विवाह की रोकथाम के प्रयास पूर्ण नहीं हो सकते। इसी व्यापक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (BBBP) योजना की जिला कार्ययोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) के सुदृढ़ प्रवर्तन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास  छोटे सिंह ने कहा कि पंचायतों की भूमिका केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकार भी उनकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पंचायत विकास योजनाओं और ग्राम सभाओं में बाल विवाह रोकथाम को प्रमुखता से शामिल किया जाए तथा ग्राम सभा में चर्चा हो कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के लिए सही है या गलत। विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार ने कहा कि प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक ब्लॉक और क्षेत्र में बाल विवाह पूरी तरह रोका जाए। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के कार्यों की नियमित समीक्षा के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय … Read more

लाड़ली बहना योजना: 41वीं किस्त का इंतजार खत्म, अक्टूबर में 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में आएंगे ₹1,500

भोपाल  फिलहाल 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलते हैं। अक्टूबर यानी इसी महीने में 41वीं किस्त आने वाली है, जिसकी राशि अब भी 1,500 रुपये ही तय है। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक, यानी जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 किस्तों में महिलाओं के खातों में कुल 65,396 करोड़ रुपये जा चुके हैं। आमतौर पर लाड़ली बहना योजना की राशि महीने में एक बार पात्र महिलाओं के आधार लिंक बैंक खाते में 10 से 15 तारीख के बीच DBT के जरिए भेजी जाती है. इसी वजह से अक्टूबर की किस्त को लेकर 10 से 15 अक्टूबर के आसपास राशि आने की उम्मीद जताई जा रही है. लेकिन जब तक सरकार की ओर से तारीख का ऐलान नहीं होता, इसे पक्की तारीख नहीं माना जा सकता. मौजूदा सरकारी जानकारी के मुताबिक पात्र महिला को 1,500 रुपये प्रति माह उसके स्वयं के आधार लिंक और DBT सक्रिय बैंक खाते में दिए जाते हैं।  किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी।  ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस     सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.     वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.     अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें     इसके बाद कैप्चा भरें.     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.     वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.     लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट पैसा नहीं आए तो क्या करें? अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है।  इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें।  40वीं किस्त में ट्रांसफर हुए ₹1,835 करोड़ से ज्यादा 13 सितंबर 2026 को जारी की गई 40वीं किस्त में 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 महिलाओं के खातों में 1,835 करोड़ रुपये से ज्यादा गए। मौजूदा दर पर यह खर्च सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये बैठता है। राज्य के कुल बजट का 5.4% हिस्सा योजना के नाम वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 23,883 रुपये करोड़ रखे गए हैं। यह राशि राज्य के कुल बजट (4.38 लाख करोड़ रुपये) का करीब 5.4 प्रतिशत है। शुरुआती अनुमान से दोगुना हुआ खर्च घोषणा के वक्त योजना का अनुमान इससे आधा था। फरवरी 2023 में जब शुरुआती गणना की गई थी, तब सालाना खर्च करीब 12,000 करोड़ रुपये आंका गया था, क्योंकि उस समय सहायता राशि 1,000 रुपये तय की गई थी।

डायल-112 से क्राइम सीन तक, BHEL मैदान में दिखी न्याय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर

डायल-112 से क्राइम सीन और वैज्ञानिक साक्ष्य तक—न्याय की पूरी प्रक्रिया का सजीव प्रदर्शन बीएचईएल दशहरा मैदान में 14 विशेष ज़ोन में नवीन न्याय संहिताओं की दी जा रही है जानकारी नाट्य मंचन से समझाई जा रही पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली भोपाल  केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा 03 अक्टूबर को भेल दशहरा मैदान में शुभारंभ की गई नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आधुनिक पुलिसिंग और न्याय प्रक्रिया को आमजन के लिए सरल एवं सहज तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रदर्शनी में अपराध की सूचना प्राप्त होने से लेकर पुलिस रिस्पॉन्स, घटनास्थल की जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी यात्रा को 14 विशेष ज़ोन में मॉडल, डिजिटल तकनीक, वीडियो और सजीव नाट्य मंचनके माध्यम से समझाया जा रहा है।नागरिकों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों को पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है। 07 अक्टूबर तक चलने वाली इस पांच दिवसीय प्रदर्शनी में प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे, दोपहर 1:00 बजे, 3:30 बजे तथा शाम 5:00 बजेस्थानीय रंगकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, डॉक्टर्स एवं अभियोजन अधिकारियों द्वारा सजीव नाट्य मंचन किया जा रहा है। संजीव नाट्य मंचन के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि किसी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस किस प्रकार कार्रवाई करती है और विभिन्न चरणों से गुजरते हुए मामला न्यायालय तक कैसे पहुंचता है। डायल-112—एक कॉल से पुलिस रिस्पॉन्स तक की पूरी प्रक्रिया लाइव प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश पुलिस कीडायल-112 की प्रर्दशनी प्रमुख आकर्षण बनी हुई है। इसमें आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर पुलिस टीम के घटनास्थल तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को लाइव डेमो के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है। कंपनी प्रतिनिधियों द्वाराकॉल टेकरकी भूमिका निभाते हुए आपातकालीन कॉल प्राप्त करने, कॉलर से आवश्यक जानकारी लेने और घटना का विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया दिखाई जा रही है। इसके बाद पुलिस कर्मचारियों द्वाराडिस्पैचरकी भूमिका में सूचना का विश्लेषण कर संबंधित पुलिस टीम को घटनास्थल के लिए रवाना करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। प्रदर्शनी में यह भी बताया जा रहा है कि डायल-112 पर प्राप्त सूचना की रिसीविंग, सूचना संकलन, डिस्पैच, पुलिस रिस्पॉन्स और वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग किस प्रकार एक समन्वित व्यवस्था के तहत की जाती है। प्रदेश स्तर से लेकर संभागीय एवं जिला स्तर तक 1200 FRV वाहनोंकी गतिविधियों की निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था को भी प्रदर्शित किया गया है। डायल-112 के माध्यम से आधुनिक संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों, त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स और विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय को सरल भाषा में समझाया जा रहा है। क्राइम सीन से न्यायालय तक—हर साक्ष्य की अपनी भूमिका प्रदर्शनी के एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में 3D क्राइम सीन मॉडलके माध्यम से गंभीर अपराध के घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच को सजीव रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। नाट्य मंचन के माध्यम से ग्रामीण परिवेश में एक झोपड़ी के सामने का घटनास्थल दिखाया गया है, जहां गोली चलने और चाकू से हमला किए जाने की सूचना प्राप्त होती है। घटनास्थल पर चाकू, बोतल, बटन, कारतूस का खोखा और रक्त के संभावित निशान जैसे साक्ष्यों को प्रदर्शित किया गया है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस द्वारा सबसे पहले घटनास्थल को सुरक्षित किए जाने और साक्ष्यों के संरक्षण पर ध्यान देने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार FSL टीम, फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ और डॉग स्क्वाडकी सहायता लेकर वैज्ञानिक जांच किस प्रकार आगे बढ़ाई जाती है, इसे रोल-प्ले के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है। घटनास्थल कीस्केल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी, संभावित फिंगरप्रिंट और जैविक साक्ष्यों का परीक्षण, कारतूस के खोखे के आधार पर आसपास के क्षेत्र की व्यवस्थित सर्च तथा अन्य भौतिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की प्रक्रिया को भी सरल भाषा में बताया जा रहा है। यदि घटना की परिस्थितियों के अनुसार किसी संदिग्ध की पहचान होती है, तो मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उपलब्ध GSR परीक्षण किटसे प्राथमिक परीक्षण की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की जा रही है। प्राथमिक परीक्षण का परिणाम प्राप्त होने के बाद अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष के लिए आवश्यक नमूनों को कन्फर्मेटरी परीक्षण हेतु राज्य न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इसी प्रकार फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ द्वारा संभावित फिंगरप्रिंट विकसित एवं लिफ्ट किए जाने तथा उन्हें नियमानुसार सुरक्षित रखने की प्रक्रिया बताई जा रही है। साइबर सुरक्षा—सतर्क रहें, सुरक्षित रहें प्रदर्शनी में साइबर अपराधों से बचाव और ठगी की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जा रही है। नागरिकों को बताया जा रहा है कि साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। साइबर ठगी के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ का विशेष महत्व है। घटना की सूचना जितनी जल्दी मिलेगी, ठगी की रकम को ट्रैक करने और उपलब्ध प्रक्रिया के माध्यम से उसे फ्रीज कराने के प्रयास उतने ही प्रभावी हो सकते हैं। प्रदर्शनी में ₹25,000 से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में E-Zero FIR, ऑनलाइन जॉब स्कैम, ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड एवं इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे मामलों से सावधान रहने की जानकारी दी जा रही है। नागरिकों को म्यूल अकाउंट के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है—किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता उपयोग करने देना अथवा अनजान लोगों से खाते में राशि लेकर नकद देना साइबर अपराध में संलिप्तता का कारण बन सकता है। साथ ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली ठगी के प्रति सचेत करते हुए बताया जा रहा है कि पुलिस में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या धनराशि की मांग पर घबराएं नहीं और तत्काल संबंधित माध्यम से शिकायत करें। आज नाट्य मंचन से आगे बढ़ेगी प्रदर्शनी की कहानी प्रदर्शनी मेंआज 06 अक्टूबर को वैज्ञानिक अनुसंधान चरणका विशेष रूप से नाट्य मंचन किया जाएगा। इस चरण में घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक जांच के लिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को FSL विशेषज्ञों, फोरेंसिक विशेषज्ञों तथा डॉक्टर/मेडिकल टीमकी भूमिका के माध्यम से समझाया जाएगा। इसके अतिरिक्‍त प्रदर्शनी में ‘ऑपरेशन मुस्कान’को विशेष फीचर के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश, विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमों की कार्रवाई, पहचान एवं सत्यापन तथा उन्हें सुरक्षित रूप से … Read more

मध्य प्रदेश में बढ़ने लगी ठंडक, सुबह की गुनगुनी धूप दे रही राहत; बारिश को लेकर आया अपडेट

भोपाल  उत्तरी हवा से वातावरण में ठंडक का अहसास अब धीरे-धीरे होने लगा है। सर्दी के आगमन के बीच सुबह की गुनगुनी धूप अब लोगों को भाने लगी है। मौसम के इस बदलते मिजाज से ये संभावना जताई जा रही है आगामी दिनों में ठंड का असर बढ़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना है। जबलपुर सहित आस-पास का मौसम भी आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है। इसके बाद जबलपुर सहित मप्र में भी ठंड का असर तेजी से बढ़ सकता है। फिलहाल मौसम पूरी तरह से शुष्क है। सुबह और रात में हल्की ठंडक का अहसास हो रहा है वहीं दिन में धूप निकल रही है। सात से 12 अक्टूबर तक आंशिक रूप से मौसम में बदलाव देखा जा सकेगा। इंदौर में रात का तापमान सबसे कम प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि, दिन में तेज धूप खिल रही है। इससे अधिकतम तापमान 37 डिग्री से ऊपर चल रहा है। दूसरी ओर, रात में ठंडक बढ़ गई है। बीती रात इंदौर में सबसे कम 17.2 डिग्री, बैतूल में 17.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.6 डिग्री, पचमढ़ी में 18 डिग्री और अमरकंटक में 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। इस बार सामान्य से कम हुई बारिश बता दें कि इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को यह एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदाई ले ली। इस बार कम पानी गिरा, 30 जिलों में असर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं। तापमान 21 डिग्री के आसपास फिलहाल दिन का तापमान जहां 32 डिग्री के ऊपर बना हुआ है वहीं रात का न्यूनतम तापमान 20-21 डिग्री के आसपास बना हुआ है। सोमवार को हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी रहा। अधिकतम तापमान 34.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम का पूर्वानुमान मौसम शुष्क रहेगा सूर्योदय- 6: 04 सूर्यास्त- 5: 53 तापमान अधिकतम -34.0 न्यूनतम – 21.5 आर्दता-66 -45

RE-2 पर निगम की कार्रवाई के दौरान हंगामा, पथराव के बाद पुलिस का लाठीचार्ज; 2 घायल, 2 हिरासत में

इंदौर  इंदौर में इस समय विकास कार्यों की तेजी और प्रशासनिक चुनौतियों की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं. एक तरफ जहां शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई है. आरई-2 प्रोजेक्ट की तीन साल से अटकी कनेक्टिविटी को पूरा करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने बड़ा अभियान शुरू किया है. बंगाली चौराहे से पिपलियाना के बीच सड़क निर्माण में बाधा बन रही तीन बस्तियों- पिपलियाना-शेरकांकड़, शिवनगर और शिव दर्शन नगर में बुलडोजर की कार्रवाई जारी है. इस दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशानस पथराव किया. इसका वीडियो भी सामने आया है. पथराव को देखते हुए पुलिस ने लाठी चार्ज किया।  टीम जेसीबी, पोकलेन और पुलिस बल के साथ बिचौली कांकड़, शिव नगर और शिव दर्शन नगर पहुंची। कार्रवाई का कुछ लोगों ने विरोध किया। इसके बाद रिमूवल टीम और पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्लास्टिक पाइप से लोगों को खदेड़कर स्थिति नियंत्रित की। पथराव में दो लोगों को चोटें आईं, जिन्हें अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है। पिपलियाना-शेरकांकड़ में 70 से ज्यादा, शिवनगर में 115 और शिव दर्शन नगर में 72 आवासों को चिन्हित किया गया है.  लगभग 300 परिवारों के मकानों और अन्य अवैध निर्माणों को हटाकर सड़क के एक किलोमीटर हिस्से को खाली कराया जा रहा है. मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और नगर निगम का अमला तैनात है. इसके बावजूद लोगों ने विरोध और पथराव किया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. माहौल शांत होते ही तुरंत ही काम किया जाएगा।  4.25 किमी लंबी सड़क, 3.20 किमी काम पूरा एसडीएम घनश्याम धनगर के अनुसार, RE-2 की कुल लंबाई 4.25 किमी और चौड़ाई 45 मीटर है। इसमें 3.20 किमी सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। करीब एक किलोमीटर हिस्सा तीन साल से अधूरा है। प्रोजेक्ट पर करीब 55 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। सड़क के रास्ते में कुल सात बस्तियां बाधक हैं। 325 परिवारों का हो चुका व्यवस्थापन पिपलियाहाना-बिचौली कांकड़ क्षेत्र में 325 परिवारों का पहले ही व्यवस्थापन किया जा चुका है। इनमें 303 परिवार आवासीय प्रकोष्ठों में रह रहे हैं। कोर्ट के स्थगन आदेश के कारण 22 मकान नहीं हटाए गए थे। कोर्ट के निर्णय के बाद इन परिवारों को आवास आवंटित कर 15 दिन का नोटिस दिया गया है। वहीं, 22 मकानों के अलावा बने 58 अवैध कच्चे झोपड़े हटाए जा चुके हैं। शांति नगर, पंचमुखी हनुमान मंदिर नायता रोड, स्कंदधाम कॉलोनी और आरटीओ के पास की बस्ती के परिवारों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना के नीलगिरि परिसर में शिफ्ट किया जा चुका है। अब शिव नगर और शिव दर्शन नगर की बारी शिव नगर में 80 मकानों में 117 परिवार और शिव दर्शन नगर में 55 मकानों में 72 परिवार रह रहे हैं। इनका भी नीलगिरि परिसर में व्यवस्थापन किया जाना है। निगम के अनुसार, बाधाएं हटने के बाद RE-2 के बचे हिस्से का निर्माण शुरू कराया जाएगा। सड़क पूरी होने से भूरी टेकरी, पीपल्याहाना, बंगाली और नायता मुंडला आरटीओ क्षेत्र को वैकल्पिक कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे आवागमन आसान होने के साथ मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। स्वच्छता पर हड़ताल की मार दूसरी ओर, देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की पहचान पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से असर पड़ा है. अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर वाल्मीकि समाज और सफाईकर्मी काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे शहर के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है।  जगह-जगह लगे कचरे के ढेर नेहरू नगर सहित कई रेजिडेंशियल और कमर्शियल एरिया की सड़कों पर कचरे के अंबार लग गए हैं. कचरा गाड़ियां न आने और डोर-टू-डोर कलेक्शन रुकने से गलियों में बदबू फैल रही है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन अब वैकल्पिक व्यवस्था कर शहर को वापस साफ सुथरा बनाने और हड़तालियों से बातचीत कर समाधान निकालने के प्रयास में जुटा है। 

MP के युवाओं के लिए बड़ा ऐलान, साल में दो बार PSC परीक्षा; CM मोहन यादव ने 20 हजार युवाओं से किया संवाद

भोपाल  मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भोपाल के लाल परेड मैदान में युवाओं से संवाद किया है। 20000 युवाओं से संवाद के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। इस दौरान युवाओं के बीच मशहूर सिंगर जुबिन नौटियाल ने अपनी प्रस्तुति दी है। जुबिन ने कहा कि हमें युवाओं से मिलने का मौका मिला है। वहीं, सीएम मोहन यादव ने कहा कि अब मध्य प्रदेश में दो बार पीएससी की परीक्षाएं होंगी। चलते-चलते युवाओं को संबोधित किया सीएम मोहन यादव का यूथ कॉन्क्लेव में बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि मंच पर चलते-चलते युवाओं को संबोधित किया। संबोधन के दौरान क्रिकेट मैच का जिक्र किया है। साथ ही कहा कि हमने युवाओं के जरिए क्रिकेट मैच में पाकिस्तान को पटखनी दी है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सबसे युवा प्रदेश है। साथ ही यहां बेरोजगारी दर भी सबसे कम है। हमारे राज्य में सारे असंभव काम पूरे हो रहे मोहन यादव ने कहा कि हमारे यहां सारे असंभव काम हो रहे हैं। अब मध्य प्रदेश इंडस्ट्री लगाने वाले प्रदेश बन गया है। नए मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं। हमारे राज्य में अलग-अलग सरकारी पदों पर 85000 लोगों को नौकरियां मिली हैं। हम युवाओं को अपने बीच में पाकर यह पाते हैं कि अब सही समय है। अगले साल से दो बार होगी पीएससी युवाओं के लिए सीएम मोहन यादव ने एक बड़ी घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा है कि अभी तक प्रदेश में एमपीपीएससी की परीक्षा एक बार होती थी लेकिन अब साल में दो बार होगी। उन्होंने कहा कि युवा मित्रों के लिए हम दो पीएससी की परीक्षा करवाने वाले हैं। 12 यूनिवर्सिटी खोलेंगे सीएम मोहन यादव ने कहा कि हम प्रदेश में नए 12 यूनिवर्सिटी खोलेंगे। हम लोग लगातार प्रदेश के आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे। मोहन यादव ने कहा कि हम अगले साल युवा वर्ष के रूप में मनाएंगे। मोहन यादव ने बच्चों के बीच गमछा भी लहराया है। वर्ष 2027 युवा वर्ष में शासकीय कॉलेज में अनुसंधान करने वालों का 25000 की स्कॉलरशिप प्रतिमाह मिलेगी । हमारी सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ्री में कोचिंग की व्यवस्था कर रही है। सभी शासकीय महाविद्यालयों में भी यह व्यवस्था होगी। मोहन यादव, सीएम एआई रोडमैप को लेकर सवाल एक छात्रा ने सीएम मोहन यादव से एआई रोडमैप को लेकर सवाल किया है। मोहन यादव ने कहा कि एआई सिटी और नॉलेज एमपी में बन रही है। सरकार अपनी तरफ से स्टार्टअप के लिए पांच-पांच लाख रुपए का अनुदान दे रही है। इंदौर, रीवा और उज्जैन में हम आईटी पार्क बना रहे हैं। देश का सबसे बड़ा टेलीकॉम हब हम ग्वालियर में बनाने जा रहे हैं। वहीं, सीएम खेल को बढ़ावे की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि भोपाल में सबसे बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बन रहा है। हम हर विधानसभा क्षेत्र में स्टेडियम बना रहे हैं। हम स्पोर्ट्स को और आगे बढ़ाएंगे।

SIR को लेकर CM मोहन यादव का बड़ा संदेश, बोले- अफवाहों पर न दें ध्यान, आधिकारिक जानकारी पर करें भरोसा

 भोपाल  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फार्म छह, घोषणा सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए केवल निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मतदाता सूची को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की स्थिति को लेकर एक्स पर पोस्ट कर यह बात कही। साथ ही 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवाओं से अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की अपील की। निर्धारित प्रक्रिया पर विश्वास करें सीएम   मोहन यादव ने कहा कि एसआईआर को लेकर किसी भी तरह के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। फॉर्म 6 और डिक्लेयेरशन सहित पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित है। सही जानकारी के लिए सिर्फ निर्वाचन आयोग की आधिकारिक जानकारी और निर्धारित प्रक्रिया पर ही विश्वास करें। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेरा आग्रह है कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके सभी युवा अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य दर्ज कराएं और प्रत्येक नागरिक अपने नाम की भी पुष्टि करे। आइए, अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगा रहे आरोप  बता दें मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रहा हैं। इसको लेकर सीजेपी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा हैं। इनके द्वारा एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देकर आरोप लगाया जा रहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 माह के करीब 14 बार मतदात सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा हैं।   लोकतंत्र की मजबूती के लिए अद्यतन सूची जरूरी उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह बेहद जरूरी है कि मतदाता सूची भी अद्यतन, पारदर्शी और विश्वसनीय हो। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। प्रत्येक नागरिक मतदाता सूची में अपने नाम की पुष्टि करें। आइए, हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं और एक विश्वसनीय मतदाता सूची के निर्माण में सहभागी बनें। 10 अप्रैल तक चलाया जा रहा है विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 10 अप्रैल तक मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। एक अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वालों के साथ जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गए, उनके नाम जोड़ने के लिए आवेदन लिए जाएंगे।  

Jabalpur News: नया मोहल्ला में अचानक ढहा जर्जर मकान, रास्ता हुआ ब्लॉक; लोगों को बचाया गया

जबलपुर   नया मोहल्ला में दरबार होटल के पीछे मौजूद एक 100 साल पुराना मकान देर रात भरभराकर गिर गया. इस मकान में कोई रहता नहीं था लेकिन पीछे रहने वाले लोगों का रास्ता इसी के नीचे से होकर गुजरता था. बीती रात अचानक मकान गिरते ही यहां अफरा-तफरी मच गई. मौके पर पहुंचे जबलपुर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर सौरव मिश्रा ने बताया कि जैसे ही जानकारी मिली तो तुरंत नगर निगम व पुलिस-प्रशासन मौके पर पहुंच गया।  कोई जनहानि नहीं, रास्ता हुआ ब्लॉक सौरभ मिश्रा ने कहा, '' जिस वक्त मकान गिरा उसे वक्त उसके नीचे कोई भी नहीं था बल्कि लोगों ने बताया कि यह केवल हमारा आने जाने का रास्ता था. इस मकान में कोई रहता नहीं था लेकिन फिर भी पीछे रहने वाले 13 लोग इसके पीछे फंस गए क्योंकि उनका रास्ता ब्लॉक हो गया था. इसलिए प्रशासन ने एक साइड वाले घर की बाउंड्री तोड़कर एक अस्थाई रास्ता इन लोगों के लिए शुरू किया है.'' आसपास के लोगों को हिदायत दी गई है कि अभी इस मकान के बचे हुए हिस्से में कोई न जाए, क्योंकि ये काफी पुराना स्ट्रक्चर है. एडिशनल कमिश्नर ने कहा कि, '' आज इस मकान के बचे हुए हिस्से को भी गिरा दिया जाएगा।  पहले भी गिरी हैं कई इमारतें जबलपुर में यह कोई पहला मौका नहीं है जब इस तरह इमारत गिरी हो. 2 महीने पहले जबलपुर में एक पांच मंजिला इमारत भी इसी तरह गिर गई थी. हालांकि, यह गनीमत यह रही कि जबलपुर में किसी जर्जरे इमारत के गिरने से किसी की मौत नहीं हुई।  शहर में 100 से ज्यादा जर्जर इमारतें जबलपुर में 100 से ज्यादा ऐसी इमारतें हैं, जो पूरी तरह जर्जर हैं. नगर निगम के अधिकारियों को कहना है कि इन इमारत के मालिकों को नोटिस दिए हैं. यदि वे खुद इन इमारत को नष्ट नहीं करते हैं तो हमें यह कार्यवाही करनी होगी. नगर निगम की खुद की कुछ इमारते ऐसी हैं, जिनकी हालत बहुत खराब है. शहर में चार इमारतें ऐसी पाई गई हैं, जो बहुत ज्यादा जर्जर हैं और इन्हें जल्द गिराने की कार्रवाई की जाएगी। 

शाही कब्रिस्तान पहुंची मेट्रो टीम तो भड़के विधायक आतिफ अकील, बेरिकेडिंग पर हुआ हंगामा

भोपाल  भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के फेज-2 के रूट पर उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने फिर आपत्ति उठाई है। सोमवार देर रात जब मेट्रो टीम भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान पहुंची और बेरिकेड्स लगाने शुरू किए तो विधायक का पारा चढ़ गया। उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से कहा कि चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। उनकी मेट्रो के कब्रिस्तान में से अंडरग्राउंड रूट निकालने को लेकर नाराजगी थी। देर रात जब पता चला कि मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी कब्रिस्तान के बाहर बेरिकेड्स लगा रहे और मशीनें लेकर पहुंचे तो वे मौके पर पहुंच गए। उन्होंने मेट्रो और पुलिस अफसरों से सख्त लहजे में कहा कि कब्रिस्तान को छोड़कर मेट्रो का काम करें। यहां पर सामान लेकर कैसे आए? यह शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी है। क्या पहले जानकारी दी थी? या अनुमति है? पुलिस वाले सामने खड़े होकर कब्जा करवा रहे हैं। पहले शाही औकाफ से परमिशन लाना, फिर काम करना। बिना अनुमति कोई काम न करें समाज के लोगों के साथ विधायक अकील ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कोई भी कार्य न किया जाए। सभी मशीनों व सामान को तुरंत मौके से हटाया जाए। यह है मेट्रो का फेज-2 बता दें कि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो दौड़ रही है। अब दूसरे फेज के रूट यानी, सुभाषनगर से करोंद तक तेजी से काम चल रहा है। इसकी कुल लंबाई 16.74 किमी है। दूसरे फेस में सुभाषनगर से करोंद की कुल दूरी 9.74 किमी लंबा है, लेकिन 8.77 किमी में होगा। इसमें से 5.38 Km हिस्से में 6 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिस पर 650 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस काम की शुरुआत हो चुकी है। पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा पर स्टेशन बनेंगे। वहीं, बाकी 3.39 किलोमीटर रूट अंडरग्राउंड होगा। इसमें 2 मेट्रो स्टेशन भोपाल रेलवे स्टेशन व नादरा बस स्टैंड भी रहेंगे। यह पूरा काम 890 करोड़ रुपए में होगा। इसी रूट को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में सुनवाई भी चल रही है। जिसमें दोनों पक्ष अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। विधायक की यह आपत्ति इस मामले में विधायक अकील का कहना है कि यहां हमारे बाप-दादा दफन है। कई कब्र हैं। इसलिए कब्रिस्तान में से मेट्रो कतई न गुजरे। वे पहले भी आपत्तियां लगा चुके हैं।