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सिंहस्थ 2028 के लिए बिजली सप्लाई होगी बेहतरीन, यूपी की विशेषज्ञ टीम ने व्यवस्थाओं का किया दौरा

उज्जैन  उज्जैन जिले में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारियां की जा रही है। देश के सबसे बड़े आयोजन में किसी तरह की अव्यवस्था ना हो इसके लिए अभी से पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के पावर डिपार्टमेंट की एक एक्सपर्ट टीम पहुंची हुई है। यह टीम सिंहस्थ 2028 के दौरान बिजली की सुचारू सप्लाई के लिए प्लान बनाने के लिए जमीनी इंतजामों का अध्ययन करेगी और जानकारी शेयर करेगी। दरअसल, यूपी की यह एक्सपर्ट टीम शिप्रा नदी के किनारे मेला क्षेत्र में बिजली प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा करेगी। साथ ही आवश्यक प्लानिंग तैयार करेगी। ताकि कार्यक्रम के समय बिना अड़चन के बिजली की सप्लाई बंद नहीं हो। 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान आपको बता दें कि उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यह आयोजन गर्मियों के पीक सीजन में आयोजित होगा। इसके चलते बिजली की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। खासकर एयर कंडीशनर जैसे ज्यादा पावर वाले उपकरणों के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के कारण बिजली की खपत बढ़ जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि उज्जैन शहर और मेला क्षेत्र में सिंहस्थ के दौरान बिजली की मांग लगभग 100 करोड़ यूनिट तक पहुंच जाएगी, जो पिछले सिंहस्थ के दौरान दर्ज की गई 60-70 करोड़ यूनिट से काफी ज्यादा है। 3 दिवसीय दौरे पर आई टीम उत्तर प्रदेश से आई टीम का यह दौरा  19 दिसंबर 2025 तक तय है। विशेषज्ञ के आने उद्देश्य मध्य प्रदेश वेस्टर्न रीजन पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के साथ जानकारी और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करना है। डिस्कॉम वेस्टर्न रीजन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनूप कुमार सिंह ने कहा, 'इस दौरे का मकसद डिस्कॉम को गर्मियों के पीक महीनों के दौरान स्थिर बिजली बनाए रखने में व्यावहारिक जानकारी और विशेषज्ञता हासिल करने में मदद करना है, जब एयर कंडीशनर जैसे हाई-लोड उपकरण बड़े पैमाने पर चलते हैं। 24 घंटे एक्टिव रहेगा कॉल सेंटर विश्वसनीयता और रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर बनाने के लिए, मेला क्षेत्र में 24×7 कॉल सेंटर की योजना बनाई गई है। एक्सपर्ट्स के सुझावों के साथ एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें शिकायतों का तेजी से समाधान और बिजली कटौती या खराबी को ठीक करने के लिए जमीनी स्तर पर तेजी से टीम भेजने पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि रियल-टाइम फॉल्ट का पता लगाने और तेजी से बिजली बहाल करने के लिए मेला नेटवर्क में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन सिस्टम लगाए जाएंगे। व्यापक योजना में लोड फोरकास्टिंग, फीडर-लेवल ऑग्मेंटेशन, महत्वपूर्ण नोड्स पर रिडंडेंसी और बेहतर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी शामिल होने की उम्मीद है ताकि लाखों तीर्थयात्रियों के लिए एक सुचारू त्योहार का अनुभव सुनिश्चित किया जा सके।  

₹2000 करोड़ लागत से पीएम मित्र पार्क, 10 हजार करोड़ निवेश और 2 लाख नौकरियों का वादा

 धार मध्य प्रदेश के धार जिले में पीएम मित्र पार्क से जिले की प्रगति को नई रफ्तार मिलने जा रही है. सरकार का दावा है कि करीब 2 हजार करोड़ की लागत से बनने वाला इस प्रोजेक्ट में 10 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश होगा. नगरीय विकास और धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया, इससे 50 हजार लोगों को सीधे और 1.50 लाख से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. पीएम मित्र पार्क में धागा, कपड़ा, कताई-बुनाई, रंगाई, डिजाइन और वस्त्र निर्माण से जुड़ी हर आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी. मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों में जिले ने धार्मिक, पर्यटन, औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने बताया कि इस समिति में सभी क्षेत्रों के विशेषज्ञों को स्थान दिया गया है, जो जिले के तेजी से विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में वर्ष 2024-25 में 122 सड़कों के नवीनीकरण से 362 किलोमीटर, वर्ष 2025-26 में 45 सड़कों के नवीनीकरण से 118 किलोमीटर मार्गों में सुधार हुआ है. जल जीवन मिशन में 3 लाख 3 हजार 690 घरों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं. शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना में 16 हजार 250 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है. बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेडा और समिति के सदस्यों ने जिले के विकास के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए.

एक क्लिक में 160 करोड़ की मदद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अनुग्रह सहायता योजना की राशि का वितरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 दिसम्बर 2025 को मंत्रालय, भोपाल में संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 7 हजार 227 प्रकरणों में राशि रुपये 160 करोड़ सिंगल क्लिक के माध्यम से वितरित करेंगे। कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं विभिन्न स्थानों पर माननीय मंत्री गण एवं स्थानीय जन प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। संबल योजना, प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें अनुग्रह सहायता योजना के अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 01 लाख रूपये तथा अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना के अंतर्गत जहाँ एक ओर महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये दिये जाते हैं तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के बच्चों को महावि‌द्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा में शिक्षा के लिए सम्पूर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार ‌द्वारा वहन किया जाता है। भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना के अंतर्गत सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के अंतर्गत समस्त लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खा‌द्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि संबल योजना प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसमें श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहायता प्राप्त होती है वास्तविक अर्थों में यह श्रमिकों का संबल है। मध्यप्रदेश की यह योजना देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये भी निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनायें संचालित की जाती है। इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है।अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक निःशुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है। प्रदेश सरकार द्वारा योजना प्रारंभ 1 अप्रैल 2018 से अब तक 1 करोड़ 83 लाख श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया गया है।पंजीयन प्रक्रिया निरंतरित है। श्रम विभागीय योजनांतर्गत वर्तमान तक 7 लाख 76 हजार से अधिक प्रकरणों में राशि रूपये 7 हजार 383 करोड़ से अधिक के हितलाभ दिये जा चुके हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में हो रहा है सांस्कृतिक अभ्युदय

भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे तानसेन मूर्धन्य संगीतज्ञ पं. राजा काले और पं. तरुण भट्टाचार्य तानसेन अलंकरण से हुए विभूषित  साधना परमार्थिक संस्थान समिति मण्डलेश्वर एवं रागायन संगीत समिति ग्वालियर को मिला राजा मानसिंह तोमर सम्मान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक अभ्युदय हो रहा है। आज दुनिया भारत की ओर देख रही है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत शनै:-शनै: अपनी अद्वितीय छाप छोड़ता जा रहा है। राज्य सरकार कला-संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव “तानसेन संगीत समारोह” का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तानसेन संगीत समारोह प्रदेश का उल्लेखनीय और प्रतिष्ठित समारोह है। संगीत सम्राट तानसेन की सुर और तान ने ग्वालियर को दुनिया में अलग पहचान दिलवाई है। तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुष थे। संगीत सम्राट तानसेन ने गुरु स्वामी हरिदास जी के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखकर नए आयाम दिए हैं। उनकी तान सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। तानसेन की ख्याति ऐसी थी कि अकबर ने उन्हें अपने नवरत्नों में शामिल किया है। वैदिक काल से शास्त्रीय संगीत हमारे जीवन और संस्कृति का हिस्सा है और सामवेद इसका साक्षी है। इसके पहले अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला ने तानसेन समारोह के महत्व को बताते हुए रूपरेखा की जानकारी दी। सभी सम्मानित कलाकारों को दी बधाई तानसेन समारोह के शुभारंभ के साथ राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण एवं राजा मानसिंह तोमर सम्मान समारोह का आयोजन भी हुआ। इसमें प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. राजा काले मुम्बई को वर्ष 2024 एवं सुविख्यात संतूर वादक पं. तरुण भट्टाचार्य को वर्ष 2025 के तानसेन अलंकरण से विभूषित किया गया। इसी तरह मण्डलेश्वर की साधना परमार्थिक संस्थान समिति को वर्ष 2024 एवं ग्वालियर की रागायन संगीत समिति को वर्ष 2025 का राजा मानसिंह तोमर सम्मान से अलंकृत किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सम्मानित विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।   उल्लेखनीय है कि ग्वालियर में 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक “तानसेन समारोह” आयोजित हो रहा है। जाहिर है ग्वालियर की फिज़ाएँ अगले पाँच दिनों तक सुर, ताल व राग की बारिश में सराबोर रहेंगी। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश और दुनियाँ के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव " तानसेन समारोह " में इस बार अलग ही रंग भरे गए हैं। राज्य शासन के संस्कृति विभाग की उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी व मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा जिला प्रशासन व नगर निगम के सहयोग से हर साल तानसेन संगीत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य समारोह में 10 संगीत सभाएँ होंगी तानसेन संगीत समारोह में इस साल 10 संगीत सभाएं होंगी। पहली सभा सोमवार को सायंकाल को तानसेन समाधि परिसर में बनाए गए भव्य मंच पर सजी। इसके बाद हर दिन यहीं पर प्रातः एवं सायंकालीन सभाएं होंगी। समारोह के तहत 18 दिसम्बर को प्रात:काल 10 बजे से दो संगीत सभायें समानांतर रूप से सजेंगी। यह सभायें तानसेन समाधि स्थल के मुख्य मंच व मुरैना जिले के सुप्रसिद्ध बटेश्वर मंदिर परिसर में संगीत सभा सजेगी। समारोह के आखिरी दिन 19 दिसंबर को प्रातःकालीन सभा संगीत शिरोमणि तानसेन की जन्मस्थली बेहट में और इस साल के समारोह की अंतिम संगीत सभा सायंकाल गूजरी महल परिसर में सजेगी। ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री धर्मेंद्र लोधी, विधायक श्री मोहन ठाकुर, विधायक श्री सुरेश राजे, महापौर श्रीमती शोभा सिकरवार, संचालक संस्कृति श्री एनपी नामदेव सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित थे। 

प्रदेश की आर्थिक समृद्ध‍ि में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बढ़ी भूमिका

वर्तमान में 4.26 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में बनी सुविचारित नीतियों से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रोजगार सृजन को भी गति मिली है। वर्तमान में 4.26 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं। इससे औद्योगिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। आत्मनिर्भरता को मिला आधार राज्य सरकार द्वारा किए गए निवेश प्रोत्साहन उपायों का सीधा असर नई इकाइयों की स्थापना के रूप में सामने आया है। वर्ष 2022-23 में 67,332 मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के पंजीकरण से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 1,13,696 तक पहुँच गई है। नीतिगत सुधारों का सीधा असर उद्योगों के सामने आने वाली प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही ‘जनविश्वास (संशोधन) विधेयक 2024’ के माध्यम से उद्योगों पर लगाए गए दंडात्मक प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाया गया है। इंडस्ट्रियल लैंड अलॉटमेंट सिस्टम और सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से भूमि आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाएँ पारदर्शी और समयबद्ध हुई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। एमएसएमई सेक्टर से एक करोड़ से अधिक को रोज़गार प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर एक मजबूत आधार के रूप में उभरा है। वर्तमान में 20.43 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और ट्रेड जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह सेक्टर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और एक करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार उपलब्ध करा रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है, बल्कि छोटे व्यापार, सेवाओं और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिला है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हुआ है। लॉजिस्टिक्स से उद्योगों को मिला रास्ता औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को मजबूत करना आवश्यक था। इसी दृष्टि से राज्य में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, इनलैंड कंटेनर डिपो और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार काम किया जा रहा है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान से जुड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के उद्योगों को देश के प्रमुख बाजारों और निर्यात केंद्रों से जोड़ने में सहायता की है। इससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आई है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है। स्टार्टअप से भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक बनाने के लिए नवाचार और कौशल विकास को समान रूप से महत्व दिया गया है। राज्य में 6000 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर्स नवाचार को सहयोग दे रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है। स्टार्टअप पॉलिसी 2025 के तहत सीड फंडिंग, कैपिटल फंड और एन्ट्रेप्रेन्योर इन रेजिडेंस प्रोग्राम जैसे प्रयास युवाओं को रोजगार सृजन से जोड़ने का काम कर रहे हैं। आने वाले समय में प्रत्येक जिले में प्लग एण्ड प्ले मॉडल पर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर्स स्थापित किए जाने से स्थानीय नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी।  

परिवहन विभाग के प्रवर्तन अमले को चालानी कार्रवाई के लिये मिली पीओएस मशीनें

प्रदेश में 45 रोड सेफ्टी एण्ड इन्फोर्समेंट प्वाइंट के माध्यम से जाँच भोपाल  परिवहन विभाग ने प्रदेश में वाहन चेकिंग की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने तथा सुशासन के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत राज्य के परिवहन चेकपोस्टों को बंद कर दिया है। इनके स्थान पर 45 रोड सेफ्टी एण्ड इन्फोर्समेंट चेकिंग प्वाइंट जाँच का कार्य कर रहे हैं। जाँच कार्य के लिये प्रवर्तन बल(इन्फोर्समेंटफोर्स) को बॉडीवॉर्न कैमरे उपलब्ध कराये गये हैं। इन कैमरों की निगरानी में पीओएस मशीन के माध्यम से वाहनों के विरुद्ध ऑनलाइन चालानी कार्रवाई की जा रही है। राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों द्वारा ई-चेकपोस्ट मॉडल के माध्यम से ऑनलाइन मोटरयान कर जमा करने की सुविधा दी गई है। प्रवर्तन अमले द्वारा बॉडीवॉर्न कैमरे का उपयोग करने से वाहन चेकिंग के दौरान प्रत्येक कार्यवाही की मॉनीटरिंग वास्तविक समय (रियल टाइम) में कंट्रोल एण्ड कमाण्ड सेंटर के माध्यम से की जा रही है। परिवहन विभाग की इस व्यवस्था से न केवल वाहन चालकों में विश्वास बढ़ा है, बल्कि वाहन चेकिंग के दौरान आने वाली अवैध वसूली की शिकायतेंभी काफी कम हो गई हैं। इस व्यवस्था से परिवहन विभाग ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इण्डिया के सपने को साकार किया है। कैशलेस चालानी कार्रवाई परिवहन विभाग के अमले को पीओएस मशीन उपलब्ध कराने से वाहनों के विरुद्ध की जाने वाली चालानी कार्रवाई को ऑनलाइन तथा कैशलेस रूप में किया जा रहा है। प्रदेश में मोटरयान परिवहन से संबंधित प्रावधानों के उल्लंघन पर स्व-चलित पद्धति ई-डिटेक्शन को नवम्बर-2025 से लागू कर दिया गया। फेसलेस सेवा देने के मामले में मध्यप्रदेश देश में अव्वल परिवहन विभाग की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा आम जनता को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वाहनों के रजिस्ट्रेशन, परमिट तथा ड्रायविंग लायसेंस आदि से संबंधित सेवाओं को एनआईसी के पोर्टल 'वाहन तथा सारथी' ऐप के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है। इस व्यवस्था में आवेदक कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सेवा प्राप्त कर पा रहा है। केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित फेसलेस सेवाओं की सूची में से प्रदेश में समस्त सेवाओं को फेसलेस रूप में प्रदान किये जाने से मध्यप्रदेश सम्पूर्ण देश में अव्वल देश बन गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने काशी विश्वनाथ मंदिर में किए दर्शन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी प्रवास के दौरान सोमवार को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने काल भैरव मंदिर पहुंचकर भी पूजा-अर्चना की। इससे पूर्व रविवार की रात्रि वाराणसी पहुंचने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के निकट जौनपुर जनपद के ग्राम समसपुर पनियरिया पहुंचकर उत्तर प्रदेश सरकार में खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गिरीश चंद्र यादव और उनके परिजन से भेंट एवं चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री गिरीश चंद्र यादव के पिता श्री सवधू यादव के निधन पर दु:ख व्यक्त करते हुए शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में समग्र औद्योगिक विकास की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

पी.एम. मित्र पार्क में 89 परिवारों के पुनर्वास का पहला चरण, 24 परिवारों को सौंपे पक्के घर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक परियोजनाओं को केवल निवेश के रूप में नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी सोच के साथ धार जिले के ग्राम भैंसोला में विकसित हो रहा देश का पहला पी.एम. मित्र पार्क में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पी.एम. मित्र पार्क की भूमि पर निवासरत कुल 89 परिवारों के पुनर्वास के लिए एम.पी.आई.डी.सी. द्वारा समीप ही सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी विकसित की जा रही है। इस पुनर्वास योजना के प्रथम चरण में 24 परिवारों को पक्के मकान बनाकर सौंपे गए और विधि-विधान के साथ उनका गृह प्रवेश कराया गया। शेष परिवारों को भी चरणबद्ध रूप से आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार औद्योगिक विकास करते हुए हर परिवार का ख्याल रखा जायेगा। इसी नीति के तहत पी.एम. मित्र पार्क के लिए प्रभावित परिवारों को केवल आवास ही नहीं बल्कि बेहतर जीवन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। 89 पक्के मकान, 140 भूखण्ड और पूर्ण आधारभूत सुविधाएँ पी.एम. मित्र पार्क के लिए विकसित की जा रही पुनर्वास कॉलोनी में कुल 89 टू बी.एच.के. पक्के मकान तथा 140 विकसित भूखण्ड शामिल हैं। कॉलोनी में बिजली, नल से जल, सड़क, नाली और एस.टी.पी. जैसी सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ आंगनवाड़ी केंद्र, प्राथमिक विद्यालय, पार्क और सामुदायिक भवन विकसित किए गए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे परिसर को बाउंड्रीवॉल से कवर किया गया है। 13.48 करोड़ रु. की पुनर्वास योजना, अप्रैल 2026 तक पूर्ण यह संपूर्ण पुनर्वास परियोजना लगभग 13.48 करोड़ रु. की लागत से विकसित की जा रही है। प्रत्येक मकान की लागत लगभग 6 लाख रु. है। परियोजना को अप्रैल 2026 तक पूरा कर शेष सभी हितग्राहियों को चरणबद्ध रूप से मकान सौंपे जाएंगे। विकसित किए गए 140 भूखण्ड भविष्य में अन्य विस्थापन कार्यों के लिए उपयोग में लाए जाएंगे। देश के पहले पी.एम. मित्र पार्क में उद्योग स्थापना और पुनर्वास का यह संतुलित मॉडल यह दर्शाता है कि प्रदेश सरकार के लिए औद्योगिक प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। 

विद्युत आपूर्ति और संबंधित विषयों पर अनुशंसाएं देने के लिए मंत्री समूह गठित

भोपाल राज्य शासन द्वारा विद्युत आपूर्ति एवं इससे जुड़े विषयों पर अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के लिये मंत्री समूह का गठन किया गया है। मंत्री समूह में श्री जगदीश देवड़ा उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर/वित्त/योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री एंदल सिंह कंषाना मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास और श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर मंत्री ऊर्जा विभाग को शामिल किया गया है। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा समूह के समन्वयक एवं अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग समूह के सह-समन्वयक होंगे। मंत्री समूह वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक सब्सिडी के प्रस्ताव में युक्तियुक्तकरण की स्थिति पर निर्णय, दिनांक 31 अगस्त 2023 तक के संयोजित भार वाले घरेलू उपभोक्ताओं के देयकों में अस्थगित की गई 4800 करोड़ रूपये की बकाया राशि को विद्युत वितरण कंपनियों को उपलब्ध कराने अथवा उसकी वसूली के संबंध में निर्णय और ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर के खराब होने पर उसके बदलने के लिये पात्रता नियम में परिवर्तन पर निर्णय के संबंध में अपनी अनुशंसाएं राज्य शासन को देगा।  

भोपाल के पांच प्रमुख रूटों पर दौड़ेंगी ई-बसें, यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV निगरानी, विशेष वर्ग को मिलेगी राहत

भोपाल शहर में मार्च-अप्रैल-26 में संचालित होने वाली ई-बसें पांच रूटों पर चलेंगी। इन रूटों पर चलने वाली 100 बसों में 80 हजार से ज्यादा यात्रियों को लाभ मिलेगा। 25 करोड़ 44 लाख रूपए खर्च इन बसों के संचालन एवं चार्जिंग के लिए कस्तूरबा नगर व संत हिरदाराम नगर में अत्याधुनिक डिपो के निर्माण, विद्युत सहित अन्य कामों पर करीब 25 करोड़ 44 लाख रूपए खर्च किए जा रहे हैं। यह जानकारी शनिवार को फंदा में विक्रमादित्य स्वागत द्वार और ई-बस सेवा के लिए डिपो के निर्माण कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर मालती राय ने दी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों में केन्द्र शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष रूप से व्हीलचेयर सहित चढ़ने के लिए आटोमेटिक लिफ्ट प्रावधानित है। होंगी ये सुविधाएं इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा एवं विशेषकर महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में आधुनिकतम आईटीएमएस व्यवस्था अंतर्गत बसों की रीयल टाइम ट्रेकिंग, सीसीटीवी कैमरा का लाइव फील्ड, जीपीएस डिवाइस, पेनिक बटन, पैसेंजर काउंटर एवं पैसेंजर इंफारमेशन सिस्टम संस्थापित किए जाएंगे। लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों को शामिल करेंगे और जनसंख्या घनत्व के मान से पांच रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है।