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शहपुरा में कार्रवाई: अवैध रूप से रखी गई 384 बोरी धान ज़ब्त

शहपुरा में अवैध रूप से भण्डारित 384 बोरी धान जब्त. शहपुरा में कार्रवाई: अवैध रूप से रखी गई 384 बोरी धान ज़ब्त अवैध भंडारण का खुलासा: शहपुरा में 384 बोरी धान जब्त की गई जबलपुर   धान उपार्जन में फर्जीवाड़ा रोकने की जा रही कार्यवाही के तहत आज गुरुवार को शहपुरा मंडी प्रांगण के पीछे स्थित सचिन जैन एवं जानी गुमास्ता की दुकान से अवैध रूप से भंडारित 384 बोरी धान जब्त की गई है। जब्त की गई धान को खरीदी केंद्र ले जाने मिनी ट्रक में लोड किया जा रहा था। धान के अवैध भंडारण को कृषि विभाग की टीम द्वारा पकड़ा गया। कृषि अधिकारियों द्वारा तुरंत इसकी सूचना एसडीएम शहपुरा को दी गई। एसडीएम शहपुरा मदनसिंह रघुवंशी ने कृषि उपज मंडी सचिव के साथ मौके पर पहुंचकर धान की जब्ती की कार्यवाही की।  एसडीएम शहपुरा ने बताया कि धान के अवैध भंडारण में लिप्त दोनों व्यापारियों को बिना लाइसेंस के अनाज की खरीदी करते और विक्रय करते भी पाया गया है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार शहपुरा तहसील में किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करने वाले व्यापारियों या बिचौलियों पर पैनी नजर रखी जा रही है और कार्यवाही के लिये अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। एसडीएम शहपुरा के अनुसार उपार्जन व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाने के लिये धान का अवैध संग्रह करने वाले व्यापारियों और बिचौलियों के विरुद्ध कार्यवाही लगातार जारी और खरीदी केंद्रों पर गलत नाम उपज का विक्रय करने पर आपराधिक प्रकरण भी दर्ज कराए जाएंगे।

ग्वालियर–मुरैना के लोग पासपोर्ट के लिए सबसे ज्यादा सक्रिय, भिंड पिछड़ा

भिंड भिंड शहर के हनुमान बजरिया स्थित बड़े डाकघर परिसर में 19 अप्रैल 2025 को शुरू किए गए पासपोर्ट सेवा कार्यालय ने सात महीनों में अपनी पहचान मजबूत कर ली है। हालांकि पासपोर्ट बनवाने में भिंड जिले के लोगों की संख्या उम्मीद से कम है, लेकिन ग्वालियर और मुरैना जिले के लोगों का रुझान अप्रत्याशित रूप से अधिक देखा जा रहा है। सात महीने में 10 हजार पासपोर्ट जारी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि सात महीनों में करीब 15 हजार आवेदन आए, जिनमें से 10 हजार पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। रोजाना औसतन 30 से 40 लोग कार्यालय पहुंचकर पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं।   ग्वालियर और मुरैना के लोग क्यों आ रहे अधिक? पासपोर्ट कार्यालय के इंचार्ज अभिषेक छत्रसाल के अनुसार ग्वालियर में पासपोर्ट सेवा केंद्र पहले से संचालित है, लेकिन भिंड कार्यालय के शुरू होने के बाद यहां दस्तावेजी जांच और अन्य प्रक्रिया आसान होने से ग्वालियर-मुरैना क्षेत्र के लोग भी यहां आने लगे हैं। उन्होंने बताया कि कई आवेदक ग्वालियर केंद्र पर लंबी वेटिंग से बचने के लिए भिंड कार्यालय को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, मुरैना के लोगों के लिए भिंड की दूरी अपेक्षाकृत कम होने से वे यहां बड़ी संख्या में आ रहे हैं। भिंड जिले में उत्साह कम, फिर भी बदल रहा ट्रेंड शुरू में उम्मीद थी कि भिंड के हजारों युवा पासपोर्ट बनवाने के लिए भारी संख्या में पहुंचेंगे। लेकिन शुरुआती महीनों में आवेदन संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पासपोर्ट प्रक्रिया को लेकर जागरूकता की कमी बताई जा रही है। हालांकि पिछले दो महीनों में भिंड जिले के लोगों में भी पासपोर्ट बनवाने को लेकर रुझान बढ़ा है। स्थानीय युवाओं ने बताया कि विदेश में रोजगार और स्कॉलरशिप अवसरों की जानकारी मिलने से अब अधिक लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए जागरूक हो रहे हैं। आवेदन प्रक्रिया में सुधार से बढ़ रही संख्या पासपोर्ट कार्यालय के इंचार्ज ने छत्रसाल के मुताबिक कार्यालय में स्टाफ की संख्या और काउंटर बढ़ाए जाने से आवेदन प्रक्रिया तेज हुई है। अब आवेदकों को वेरिफिकेशन में अधिक समय नहीं लग रहा। पुलिस वेरिफिकेशन को भी डिजिटल मोड से तेज किया गया है। इसी वजह से आवेदन स्वीकृति और पासपोर्ट डिलीवरी दोनों की गति बढ़ी है। पासपोर्ट बनवाने के मुख्य कारण ग्वालियर-मुरैना से आ रहे अधिकांश आवेदन विदेश रोजगार, स्टडी वीजा और परिवार पुनर्मिलन (एफआर) श्रेणी के हैं। वहीं भिंड जिले से आने वाले आवेदकों में ज्यादातर टूरिस्ट वीजा, स्टूडेंट, और जाब श्रेणी के लोग शामिल हैं। 

कलेक्टर की अभिनव पहल :-मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में विद्यार्थी, परीक्षार्थी और कामकाजी युवाओं की काउंसलिंग करेंगे मानसिक विशेषज्ञ.

कलेक्टर की अभिनव पहल :-मानसिक तनाव और अवसाद की स्थिति में विद्यार्थी, परीक्षार्थी और कामकाजी युवाओं की काउंसलिंग करेंगे मानसिक विशेषज्ञ. जबलपुर   परीक्षाओं या कामकाज को लेकर विद्यार्थियों, किशोरों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और अवसाद को देखते हुये कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की पहल पर जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा "मनसा" नाम से काउंसलिग का अनूठा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों, परीक्षार्थियों, कामकाजी युवाओं एवं महिलायें मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक असंतुलन और निर्णय लेने में कठिनाई जैसी स्थितियों में मनोचिकित्सकों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से निः शुल्क परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम के शुरुआती चरण में ऐसे योग्य काउंसलर्स का पैनल तैयार किया जाएगा जो समाज हित में स्वेच्छा से सेवाएं देने के तत्पर हैं। इसके लिये एक लिंक https://forms.gle/zPsaLdjzedenVxWy7 जेनरेट की गई है। इस लिंक पर इच्छुक मनोचिकित्सक या इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। उन्हें इस लिंक पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता और मोबाइल नम्बर दर्ज करने के साथ-साथ शैक्षणिक योग्यता से सबंधित सर्टिफिकेट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करना होंगे। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जबलपुर जिले के सभी योग्य मनोचिकित्सकों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मंगलवार 9 दिसम्बर तक अपना रजिस्ट्रेशन कराकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक पहल में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.

एसआईआर :- 96.19 फीसदी मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण.  सिहोरा विधानसभा में भी हुआ शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा. जबलपुर   मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के अंतर्गत जिले में 96.19 प्रतिशत मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है। इनमें 12.07 फीसदी एएसडीआर श्रेणी के मतदाता तथा ऑनलाइन गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाता भी शामिल हैं।  जिले की आठ विधानसभा क्षेत्र में से आज गुरूवार को विधानसभा क्षेत्र सिहोरा ने भी शत प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रत्रकों के डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया है। विधानसभा क्षेत्र पाटन और बरगी में दो दिन पहले शत-प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्रों के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा किया जा चुका है।  जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्‍त गुरूवार की शाम 8 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा क्षेत्र पनागर में 99.60, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर उत्‍तर में 94.11, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पश्चिम में 92.68, विधानसभा क्षेत्र जबलपुर पूर्व में 91.87 तथा विधानसभा क्षेत्र जबलपुर केंट में 89.05 फीसदी मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूर्ण हो चुका है।  जिले में कुल मतदाताओं की संख्‍या 19 लाख 25 हजार 472 है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार इनमें से एएसडीआर श्रेणी के मतदाताओं को मिलाकर अभी तक 18 लाख 52 हजार 018 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। एएसडीआर की श्रेणी में अभी तक 2 लाख 32 हजार 391 मतदाताओं की संख्‍या दर्ज हुई है। इनमें मृत मतदाताओं की संख्‍या 49 हजार 969, अनुपस्थित मतदाताओं की संख्‍या 55 हजार 603, स्‍थायी रूप से स्‍थानांतरित मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 12 हजार 838 है तथा अन्‍य मतदाताओं की संख्‍या 1 हजार 322 है। मतदाताओं के गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में 12 हजार 641 मतदाताओं द्वारा भरे गये ऑनलाइन गणना प्रपत्र भी शामिल है। कुल डिजिटाइजड गणना पत्रकों में नो मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्‍या 1 लाख 36 हजार 807 है।

एल्युमिनियम बर्तन से दूरी, सतना में मिडडे मील में लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल अनिवार्य

सतना   सतना जिले के IAS अधिकारी व जिला पंचायत सीईओ ने मिड-डे मील लोहे के बर्तन में बनाने का फरमान जारी किया है. इसके पीछे तर्क दिया है कि लोहे की कड़ाही में साग-सब्जी या अन्य सामग्री पकाने से बच्चों में एनीमिया की आशंका कम हो जाएगी. जिले के स्व सहायता समूहों के बीच इस आदेश की चर्चा जोरों पर है. लोहे के बर्तन में खाना पकाने से क्या लाभ हैं आइए जानते हैं. सतना जिला पंचायत सीईओ ने दिया आदेश जिला पंचायत सीईओ मझगवा महिपाल सिंह गुर्जर ने स्व सहायता समूह को खाना पकाने के लिए बर्तन बदलने के निर्देश दिए हैं. वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले बर्तन एलुमिनियम को दरकिनार करने की सलाह दी गई है. मामले के अनुसार मझगवा ब्लॉक में में स्व सहायता समूह की महिलाओं को मिड-डे मील बनाने के बर्तन बदलने के लिए पत्र जारी हुआ है. पत्र में लिखा "ग्राम पंचायतो में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत महिला स्व सहायता समूह मिड-डे मील का संचालन स्कूलों में किया जा रहा है. देखने में आया है कि आपके द्वारा एल्मूनियम की कड़ाही में सब्जी एवं अन्य खाद्य पदार्थ पकाये जाते हैं." WHO ने भी माना- लोहे के बर्तन का लोहा पत्र में उल्लेख किया गया है "विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) ने लोहे के बर्तनों के उपयोग को आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया को कम करने की सलाह दी है. अतः आप समस्त को निर्देर्शित किया जाता है कि एल्मूनियम या जर्मन एल्मूनियम की कड़ाही की जगह अनिवार्यतः लोहे की कड़ाही में साग, भाजी अन्य खाद्य पदार्थ बनाना सुनिश्चित करें, जिससे कि आयरन तत्व की आपूर्ति हो सके." शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रखते हैं लोहे के बर्तन आपको ये समझना जरूरी है कि आयरन इंसान के शरीर के लिए बहुत आवश्यक मिनरल है. आयरन ही फेफड़ों से पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई करता है. आयरन से हीमोग्लोबिन भी बनता है. इसलिए पहले के लोग शरीर में आयरन के स्तर बनाए रखने के लिए लोहे के बर्तनों में सब्जी वगैरह बनाते थे. क्योंकि ऐसा करने से शरीर में आयरन का स्तर बढ़ाता है, खून की कमी दूर होती है. एक तथ्य ये भी है कि थकान, कमजोरी और शरीर में दर्द आयरन की कमी से ही होता है. लोहे की कड़ाही का खाना देर तक रहता गर्म शरीर में आयरन की कमी होने के कारण ही लोग डॉक्टर की सलाह पर विभिन्न प्रकार के सप्लीमेंट्स लेते हैं. लेकिन अगर सप्लीमेंट्स की जगह लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल किया जाए तो आयरन की कमी पूरी हो सकती है. इसके अलावा अगर आप लोहे की कड़ाही में खाना पकाएंगे, तो खाना लंबे समय तक गर्म रहेगा. भोपाल की 60 साल की गृहिणी जानकी बताती हैं "वह तो हमेशा से ही लोहे की कड़ाही में सब्जी पकाती हैं. उनकी सास की ये सीख आज भी वह अमल में ला रही हैं." क्या कहते हैं चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ भोपाल के नर्मदा अस्पताल की सीनियर डायटीशियन डॉ.अमिता सिंह ने बताया "आयरन के बर्तन में बना नियमित खाना खाने से शरीर में आयरन की कमी पूरी हो सकती है, लेकिन यह तभी कारगर होगा, जब इस खाने में खटाई यानि विटामिन सी भी मिलाया जाए. आयरन के बर्तन में पका हुआ खाना खाने से केवल उन लोगों में ही आयरन की मात्रा इंप्रूव होगी, जिन्हें मामूली आयरन की जरूरत है. लेकिन यदि किसी को सीवियर एनीमिया है, तो फिर उसे डॉक्टर से सलाह लेनी की जरूरत है." 

1 जनवरी को खजराना गणेश मंदिर में भव्य भोग, तिल चतुर्थी पर लगेगा सवा लाख लड्डुओं का आशीर्वाद

इंदौर  लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में 31 दिसंबर और 1 जनवरी को भक्तों की ज्यादा संख्या को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। नए साल और तिल चतुर्थी महोत्सव के दौरान भक्तों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। मंदिर परिसर में भीड़ मैनेजमेंट, पानी की व्यवस्था, पार्किंग, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम समय पर पूरे करने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं को सुगम और आधुनिक सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंदिर में भगवान गणेश का विशेष श्रंगार किया जाएगा। इन दिनों पूरे मंदिर परिसर में विशेष लाइटिंग और फूलों से सजावट भी की जाएगी। दुनिया भर में हजारों लोगों की आस्था का केंद्र इंदौर का खजराना गणेश मंदिर अब उन करोड़पति मंदिरों में शुमार है, जहां हर साल करोड़ों का दान आता है. अब यहां भगवान के लिए 6 किलो सोने का मुकुट तैयार किया जा रहा है. गणेश जी का मुकुट तैयार हो जाने के बाद माता रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के भी मुकुट बनाने की तैयारी चल रही है. बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु 31 दिसंबर की रात और 1 जनवरी की सुबह मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर में कई व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिससे भक्तों को दर्शन करने में आसानी हो। इसके साथ ही पुलिस व्यवस्था भी मंदिर में लगाई जाती है। मंदिर में दर्शन के लिए स्टेप्स के साथ कई बदलाव किए जाते हैं। साथ ही ये प्रयास भी किए जाते हैं कि भक्तों को ज्यादा देर तक लाइन में इंतजार ना करना पड़े। सालाना बढ़ रही खजराना मंदिर की दान राशि इंदौर में होलकर रियासत के समय से ही खजराना गणेश मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र रहा है. इस मंदिर को देवी अहिल्याबाई होल्कर ने बनवाया था. तभी से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने को लेकर मंदिर की प्रसिद्धि दुनिया भर में फैली हुई है. यही वजह है कि न केवल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ रही है, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की राशि भी सालाना कई करोड़ रुपये हो चुकी है. 31 दिसंबर को 11 बजे तक ही एंट्री     नव वर्ष की पूर्व संध्या और पहले दिन श्रद्धालुओं के लिए कई व्यवस्था की जाएंगी।     31 दिसंबर की रात 11 तक ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।     इसके बाद मंदिर में 1 जनवरी को सुबह 4 बजे से मंदिर में दोबारा दर्शन शुरू किए जाएंगे।     31 दिसंबर को पुजारी जयदेव भट्ट महाआरती करेंगे। खजराना गणेश मंदिर में 6 जनवरी से तिल चतुर्थी महोत्सव शुरू होगा। जिसमें सात दिवसीय तिल चतुर्थी मेला भी लगेगा। तिल चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश का सवा लाख लड्‌डूओं का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इस महोत्सव की शुरुआत ध्वजा पूजन के साथ होगी। मंदिर में विशेष सजावट भी की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि श्रद्धालुओं के लिए अनेक ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि मंदिर की वेबसाइट को अपडेट किया जाए। नया पोर्टल और एप भी शुरू कि जाए। सहयोग राशि के लिए क्यूआर कोड की सुविधा भी शुरू की जाए। बता दे कि बुध‌वार को कलेक्टर ने मंदिर का दौरा भी किया जहां उन्होंने मंदिर के विकास के लिए बनाए गए मास्टर प्लान को भी देखा और मीटिंग में दिशा-निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने विकास कामों को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश भी दिए। दान राशि से बन रहा सोने का मुकुट इतना ही नहीं मंदिर के कई ऐसे प्रमुख दानदाता हैं, जो मंदिर परिसर में चाहे धर्मशाला हो, शैक्षणिक परिसर हो या फिर अन्य कोई संसाधन, वे गुप्त दान के जरिए मंदिर की हर व्यवस्था के लिए तैयार रहते हैं. अब यहां पर दान राशि से ही भगवान का मुकुट बनाया जा रहा है, जो करीब 6 किलो सोने से तैयार किया जा रहा है. 8 करोड़ रुपए का तैयार हो रहा है मुकुट मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट बताते हैं कि "मंदिर में हर महीने में 40 से 50 लाख रुपए का दान प्राप्त हो रहा है. इसी अनुपात में सालाना दान राशि करोड़ों में जमा हो जाती है. भगवान के लिए सोने का मुकुट जो बनाया जा रहा है उसकी कीमत करीब 7-8 करोड़ रुपए है. फिलहाल डेमो के लिए चांदी का मुकुट तैयार किया गया है, जिनकी डिजाइन और स्वरूप फाइनल होने के बाद उन्हें स्वर्ण में तैयार किया जाएगा." तिल चतुर्थी पर लगेगा सवा लाख लड्डुओं का भोग आगामी तिल चतुर्थी के अवसर पर खजराना गणेश मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का भोग लगेगा. इस दौरान यहां 3 दिवसीय मेला भी लगेगा, जो 6, 7 और 8 जनवरी को आयोजित होगा. तिल चतुर्थी पर बड़ी संख्या में भक्त खजराना मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं. इनके लिए इंदौर जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने सुविधाजनक दर्शन की व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है. प्रतिवर्ष होने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग भगवान को गुड-तिल भी अर्पित करने आते हैं. मध्य प्रदेश के 5 धनी मंदिर की लिस्ट सबसे ज्यादा कमाई करने वाला मंदिर है उज्जैन का बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग. इसकी नेटवर्थ सैकड़ों करोड़ में है. वहीं, दूसरे नंबर पर मैहर का मां शारदा देवी धाम है. इसके बाद ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है जिसकी सालाना इनकम 37 से 40 करोड़ के आसपास है. वहीं, चौथे स्थान पर है सलकनपुर की दुर्गा माता का मंदिर जो देवी बीजासन के रूप में जाना जाता है. इंदौर का खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश का 5वां सबसे धनी मंदिर खजराना गणेश इस लिस्ट में पांचवे नंबर पर है जिसकी सालाना नेटवर्ट 6 से 7 करोड़ रुपए आंकी गई है. यह दान और चढ़ावे से आने वाली रकम है.

इंद्रेश उपाध्याय की शादी की भव्य तैयारियाँ, करीबी दोस्तों के साथ धूमधाम से मनाया गया विवाह समारोह

छतरपुर वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज 5 दिसंबर को जयपुर के होटल ताज आमेर में हरियाणा की शिप्रा के साथ शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इस शुभ अवसर पर देशभर के साधु-संतों और कई प्रसिद्ध हस्तियों की मौजूदगी रहेगी। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी उनके परम मित्र हैं और विवाह समारोह में शामिल हो रहे हैं। शादी की रस्में शुरु हो गई है। मशहूर है दोनों की दोस्ती वृंदावन के इंद्रेश महाराज और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री दोनों की ही दोस्ती काफी मशहूर है। दोनों अक्सर साथ में देखे जाते हैं। जब हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री की पदयात्रा निकली थी, तब इंद्रेश महाराज उनके साथ ही थे। दोनों एक-दूसरे की कथाओं में जाते रहते हैं। इंद्रेश महाराज के विवाह को लेकर भी शास्त्री ने कहा था कि इंद्रेश के विवाह में उनकी मां ही गीत गाएंगी। हाल ही में आए थे घर प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय हाल ही में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की जन्मस्थली आए थे। उन्होंने शास्त्री की मां के हाथों से बने देशी चूल्हे पर कड़ी-पुड़ी और चाय का स्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने उस झोपड़ी को भी देखा जहां धीरेंद्र शास्त्री का बचपन बीता था। बाबा रामदेव ने भी लिए मजे हाल ही में सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में बागेश्वर बाबा और बाबा रामदेव भी पहुंचे हुए थे। वहां अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि यशस्वी मुख्यमंत्री अपने बालक की शादी यहां कर रहे, इससे बड़ी-बड़ी जगहों में डेस्टिनेशन वेडिंग कर लाखों-करोड़ों खर्च करने वालों का खर्चा बचेगा। लोग कहेंगे कि मैं भी अपने बालक का विवाह सामूहिक कन्या विवाह समारोह में कराउंगा। इसका मतलब यह नहीं कि आप लोग कहें कि आप भी कर लो।' इस पर परिसर में जोर के ठहाके लगने लगे। तभी बाबा रामदेव उठे और उन्होंने बाबा बागेश्वर को संबोधित करते हुए कहा कि 'चिंता मत करो महाराज आपका भी विवाह यहीं सामूहिक कन्या विवाह समारोह में ही कराएंगे।' सिर्फ बात ही हो रही लंबे समय से पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विवाह की बातें मीडिया और उनके समर्थकों में हो रही हैं। हालांकि कभी भी धीरेंद्र शास्त्री ने इन बातों का खंडन नहीं किया। वह विवाह की बात को बड़ी ही होशियारी से टाल देते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका नाम कभी कथावाचक जया किशोरी तो कभी देवी चित्रलेखा से जुड़ा है। वह खुद कई बार इन बेसिर-पैर की बातों का खंडन कर चुके हैं। बागेश्वर बाबा अपनी कथाओं में भी बिना तारीख बताए कई बार श्रोताओं को अपने विवाह के प्रीतिभोज में आमंत्रित कर चुके हैं। मित्र के विवाह से पड़ेगा दवाब अब उनके परम मित्र इंद्रेश महाराज के विवाह के बाद उनके ऊपर भी विवाह का दवाब बनेगा। उनकी माताजी कई बार उनसे निवेदन कर चुकी हैं। उनके पैतृक मकान में एक तस्वीर भी लगी है, जिसमें शास्त्री की मां उनके कान ऐंठ रही हैं, और उस पर लिखा है,'अब तो शादी कर ले मेरे लाल…' अब उनकी शादी की शुभ घड़ी कब आएगी, यह तो किसी को नहीं पता है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि वह जल्द ही शादी के बंधन में बंध जाएंगे।  

DAVV छात्रा दुष्कर्म केस: धर्म परिवर्तन के दबाव में आरोपी इंदौर से दबोचा गया

इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की छात्रा ने मुस्लिम युवक हम्स शेख पर दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत एफआईआर लिखवाई है। आरोपित ने छात्रा के साथ जबरदस्ती की और मुसलमान बनने के लिए धमकाया। तिलक नगर टीआई मनीष लोधा के मुताबिक संचार नगर निवासी हम्स पुत्र सादिक शेख पीड़िता के साथ पढ़ता था। सहपाठी होने के कारण उसकी बातचीत होने लगी थी। युवक ने पीड़िता के घर जाकर दुष्कर्म किया हम्स ने छात्रा को शादी का प्रस्ताव दिया तो उसने फटकार दिया। कुछ दिन उसने दूरी बनाई, लेकिन बाद में माफी मांग कर दोबारा बातचीत करने लगा। 26 जुलाई को हम्स पीड़िता के घर आ गया और उसकी के साथ जबरदस्ती की। इसके बाद वह ब्लैकमेल करने लगा। अगस्त में शादी होने के बाद पीड़िता को लगा कि वह अब परेशान नहीं करेगा। लेकिन वह शादी करने और मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता ने पति को घटना बताई और बुधवार रात हम्स के खिलाफ केस दर्ज करवाया।   छात्रा ने हिंदू संगठन से मांगी थी मदद हिंदू संगठन की मदद से पकड़ा आरोपित हम्स से परेशान छात्रा ने हिंदू संगठन और करणी सेना के कार्यकर्ताओं से भी मदद मांगी थी। आरोपित कॉलेज आने-जाने के दौरान छात्रा को परेशान करता था। छात्रा द्वारा घटना बताने पर हम्स को पिपल्याहाना से पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। उस वक्त पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। आरोप है कि हम्स के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष अजहर शेख ने काल लगाकर कार्रवाई न करने का दबाव बनाया था।

सरकारी अस्पताल में दलाली का खेल! MY के डॉक्टरों पर 10% कमीशन के लिए मरीज रेफर करने के गंभीर आरोप

इंदौर शहर के शासकीय अस्पतालों से डॉक्टर मुनाफा कमाने के लालच में मरीजों को लामा कर निजी अस्पतालों में भेज रहे हैं। हाल ही में एमवाय अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के एक डॉक्टर द्वारा इंडेक्स अस्पताल में मरीज को लामा कर भेजने का मामला सामने आया है। मरीज ने खुद इसकी शिकायत की थी कि रातभर जमीन पर बिना इलाज के रखा और सुबह डॉक्टर ने निजी अस्पताल में जाने के लिए कहा। मामले में डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटने की कार्रवाई की गई है। एक मरीज को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजने पर डॉक्टर को 10 प्रतिशत कमिशन मिलता है। यानी तीन लाख का इलाज यदि मरीज का निजी अस्पताल में हो रहा है तो डॉक्टर को इसके एवज में 30 हजार रूपये मिलते हैं। यह खेल आयुष्मान योजना के नाम पर तेजी से चल रहा है।   रोजाना 10 से अधिक मरीज जाते है निजी अस्पताल एमवायएच अस्पताल में आने वाले मरीज को यह कहा जाता है कि निजी अस्पताल में बेहतर सुविधा के साथ निश्शुल्क उपचार मिल जाएगा। एमवाय अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, रोजाना 10 से अधिक मरीज अधूरे इलाज में लामा करवाकर निजी अस्पताल में चले जाते हैं। इनमें से कुछ अपनी मर्जी से जाते हैं, बाकि डॉक्टर कमिशन के चक्कर में पहुंचा देते हैं। मरीजों को ले जाने में एंबुलेंस गैंग भी सक्रिय, रोक लगाने पर प्रशासन फेल एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों के अलावा मरीजों को ले जाने में एंबुलेंस गैंग भी सक्रिय है।   करीब एक वर्ष पहले मरीजों को एमवाय अस्पताल से निजी अस्पताल लेकर जाने पर एंबुलेंस गैंग का मुखिया दीपक वर्मा पकड़ाया था। इस दौरान जूनियर डॉक्टरों ने उसकी पिटाई कर दी थी। इसके बाद दीपक और असलम आदि को परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। इसमें वार्ड बॉय और अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। कभी कार्रवाई करते हुए नजर नहीं आता पूर्व संभागायुक्त ने इस दौरान अस्पताल में निजी एंबुलेंस वाहन को परिसर में पार्किंग करने पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इन्हें रोकने पर प्रशासन फेल नजर आ रहा है। अभी एमवाय अस्पताल में तिरूपती बालाजी एंबुलेंस से राहुल और बहादुर, श्री बालाजी एंबुलेंस से दीपक, एकाक्ष सामाजिक संस्था से रामगोपाल श्रीवास्तव आदि सक्रिय है। लेकिन प्रशासन इनपर कभी कार्रवाई करते हुए नजर नहीं आता है। निजी अस्पतालों के एजेंट घुमते हैं अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाने वाले कई एजेंट घुमते हैं। पूर्व में भी इस तरह के लोगों को पकड़ा गया है। इन्हें मरीजों के हिसाब से निजी अस्पताल में कमिशन मिलता है। इसके लिए यह मरीजों को एमएलटी, एक्सरे सहित अन्य जांच होने के बाद निजी अस्पताल में आपरेशन के लिए लेकर चले जाते हैं। इसमें सबसे अधिक मरीज हड्डी रोग विभाग, न्यूरोसर्जरी, कैंसर, मेडिसिन विभाग आदि के होते हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में लामा रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमने हाल ही में एक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की है। लामा रोकने के लिए एक कमेटी भी बनाई जा रही है। जो लामा कर जाने वाले सभी मरीजों का रिव्यू करेगी। – डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

शासकीय डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई: मरीजों को निजी अस्पताल भेजने का मामला, एक निलंबन–एक की वेतन कटौती

इंदौर शासकीय अस्पतालों से लाखों रुपये वेतन लेने के बाद भी यहां के डॉक्टर अपनी जेब भरने में ही व्यस्त रहते हैं। प्रदेश का सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल एमवायएच हमेशा से मरीजों को निजी अस्पताल में भेजने के लिए चर्चा में रहा है। एक बार फिर निजी अस्पताल में मरीज को भेजने का मामला सामने आया है। मामले में एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है। इसी प्रकार ड्यूटी के समय घर पर आराम कर रही महिला सीनियर डॉक्टर को निलंबित करने की कार्रवाई की गई है। दरअसल, कुछ दिनों पहले अस्पताल में रात के समय रतलाम से न्यूरोसर्जरी विभाग में एक मरीज इलाज के लिए आया। रातभर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उसका इलाज करने के बजाय जमीन पर रखा। इसके बाद उससे कहा कि आयुष्मान कार्ड है तो इंडेक्स अस्पताल में इलाज करवाओ और उसे भेज दिया। मामले में मरीज द्वारा लिखित शिकायत के बाद जांच की गई। जांच में सामने आया कि विभाग में एमसीएच के विद्यार्थी द्वारा मरीज को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। इसके एवज में उसे निजी अस्पताल की ओर से राशि भी मिलती है। मामले में जांच के बाद डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है।   कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, ड्यूटी डॉक्टर नहीं मिली एमवाय अस्पताल में जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगती है, वे इस दौरान निजी अस्पताल में रहते हैं या फिर घर पर आराम करते रहते हैं। हाल ही में सिमरोल सड़क हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया था, लेकिन इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में कोई ड्यूटी डॉक्टर नहीं था। हादसे के बाद डीन पहुंचे तो कोई डॉक्टर नहीं मिला। दो घंटे बाद ड्यूटी पर महिला सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर पहुंची। कारण पूछने पर कहा कि घर पर थी। इस बीच कलेक्टर भी पहुंचे। लापरवाही सामने आने के बाद डीन ने महिला डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया है। सीनियर डॉक्टर भी गिरोह में शामिल एमवाय अस्पताल में मरीजों को लापरवाही कर निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजने के लिए कई गिरोह बने हुए हैं। इन गिरोह में सीनियर डॉक्टर भी शामिल हैं। उन्हीं के संरक्षण में ड्यूटी डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर द्वारा यह कार्य किया जाता है। अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर तो अपने ही खुद के अस्पताल में मरीजों को लापरवाही करवाकर ले जाते हैं। इसी प्रकार पेट रोग विभाग, मेडिसिन विभाग, न्यूरोसर्जरी विभाग आदि से भी मरीज बाहर जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इनके गिरोह में एंबुलेंस संचालक, स्टाफ, आउटसोर्स कंपनी के कर्मचारी भी शामिल रहते हैं। यही कारण है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। डॉ. अरविंद घनघोरिया, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने कहा कि एमवायएच से मरीज को लापरवाही कर निजी अस्पताल में भेजने के मामले में कार्रवाई की गई है। एक डॉक्टर का 15 दिन का वेतन काटा गया है। इसके साथ ही ड्यूटी पर मौजूद नहीं होने पर सीनियर रेजिडेंट को बर्खास्त किया गया है। मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।