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भिंड के मौ थाना क्षेत्र में पुलिस ने 10 हजार के इनामी लुटेरे को दबोचा, मुठभेड़ में घायल

 भिंड  भिंड जिले के मौ थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब बेहट रोड स्थित जमदारा मोड़ पर पुलिस और 10 हजार के इनामी बदमाश के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस को देखते ही बदमाश ने 315 बोर के कट्टे से फायरिंग कर दी, जिसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे घायल कर दियाया। यह पूरी घटना सुबह पांच से साढ़े पांच बजे के बीच हुई। सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस टीम एसपी डॉ. असित यादव के मुताबिक सुबह करीब चार बजे सूचना मिली थी कि ऊमरी-असवार क्षेत्र की लूट की घटनाओं में शामिल बदमाश ग्वालियर से बाइक पर मौ होते हुए लहार की ओर जा रहा है। उसके बाद मौ, बरोही, ऊमरी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बेहट रोड पर घेराबंदी कर दी। जवाबी कार्रवाई में बदमाश घायल सुबह पांच बजे के करीब पुलिस को एक बाइक सवार युवक आता दिखा। पुलिस ने उसे रुकने का संकेत दिया, लेकिन युवक तुरंत बाइक से उतरा और कट्टे से दो फायर कर दिए। पुलिस ने तत्काल जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली बदमाश के दाहिने हाथ में लग गई। घायल अवस्था में वह सड़क पर गिर पड़ा। निखिल दौहरे के रूप में हुई पहचान     गिरफ्तार युवक ने पूछताछ में अपना नाम 22 वर्षीय निखिल पुत्र दीपक दौहरे निवासी मढैयापुरा थाना लहार बताया। पुलिस के अनुसार निखिल अपने साथियों के साथ ऊमरी, असवार और उत्तर प्रदेश सीमा क्षेत्र में कई लूट की वारदातों में शामिल रहा है। एसपी ने बताया कि निखिल एक आदतन अपराधी है और लंबे समय से पुलिस को उसकी तलाश थी। घायल बदमाश का उपचार कराया जा रहा है, जबकि उसके साथियों की तलाश जारी है।  

भोपाल:मुंह पर गमछा बांधकर कैफे में टूटे 20 बदमाश, तलवार-डंडों से मचाई दहशत

 भोपाल राजधानी भोपाल में एक बार फिर बदमाशों के हौसले बुलंद हो गए हैं. शहर के होशंगाबाद रोड स्थित मैजिक स्पॉट कैफे में बदमाशों ने जमकर तोड़फोड़ की. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.  मिसरोद थाना इलाके में मैजिक स्पॉट कैफे संचालक सक्षम गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार शाम 7:00 बजे करीब 20 से 25 बदमाश मुंह पर कपड़ा बांध अपने हाथों में डंडे, तलवार, बेसबॉल डंडा लेकर आए और दुकान का फर्नीचर, कांच का सामान फोड़कर चले गए. एक कर्मचारी को हाथ में तलवार भी लगी है. साथ ही एक ग्राहक को डंडा मारा था, जिससे उसकी उंगली फैक्चर हो गई.  कैफे संचालक ने बताया, ''मेरा कभी किसी से कोई भी विवाद नहीं हुआ. पुलिस में FIR दर्ज कराई है, जिसमें पुलिस ने बलवा, तोड़फोड़ मारपीट की धाराएं लगाकर हमको मदद का आश्वासन दिया है. ये गुंडे हाथों में तलवारें, डंडे और अन्य हथियार लेकर कैफे के अंदर घुस आए. उन्होंने वहां जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी. कैफे का काउंटर तोड़ दिया, कांच के शीशे चकनाचूर कर दिए, फर्नीचर को तहस-नहस कर दिया. डिस्प्ले में रखी चीजें और मशीनें भी नहीं बख्शीं. सब कुछ तोड़ते-फोड़ते हुए ये बदमाश चिल्ला रहे थे और डर का माहौल बना रहे थे. कैफे में मौजूद कर्मचारियों को भी इन गुंडों ने नहीं छोड़ा. उन्होंने स्टाफ के साथ मारपीट की. डंडों और तलवारों से हमला किया, जिससे कई कर्मचारी घायल हो गए. कैफे में उस समय कुछ ग्राहक भी मौजूद थे. जैसे ही तोड़फोड़ शुरू हुई, ग्राहक अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे. कोई बाहर की ओर भागा, तो कोई छिपने की कोशिश करने लगा. पूरा कैफे अफरा-तफरी से भर गया. यह पूरी घटना कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे नकाबपोश बदमाश एक-एक करके चीजें तोड़ रहे हैं. काउंटर पर कूदकर सामान फेंक रहे हैं, ग्लास फोड़ रहे हैं और फर्नीचर पर डंडे बरसा रहे हैं. यह फुटेज सामने आने के बाद इलाके में दहशत फैल गई. लोग सहम गए कि इतनी बड़ी संख्या में गुंडे दिनदहाड़े कैसे हमला कर सकते हैं. कैफे के मालिक बहुत डर गए. उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की. मिसरोद थाने में जाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाई. मालिक ने बताया कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश या फिर जबरन वसूली की वजह से हो सकता है. उन्होंने कुछ नामों का जिक्र किया. एफआईआर में योगी, निखिल, अभिषेक और कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए. पुलिस ने इन नामों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. अब पुलिस जांच कर रही है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से बदमाशों की पहचान करने की कोशिश हो रही है. इलाके में लोगों का कहना है कि गुंडागर्दी बढ़ रही है, पुलिस को सख्ती दिखानी चाहिए. नया कैफे खुला था, लोग खुशी-खुशी आते थे, लेकिन इस घटना ने सबको डरा दिया. उम्मीद है कि जल्दी ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे और कैफे मालिक को न्याय मिलेगा.यह घटना बताती है कि शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है. आम लोग सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए पुलिस को सक्रिय रहना होगा. दो संदेही उठाए, पूछताछ कर रही पुलिस डीसीपी विवेक सिंह ने बताया कि एफआईआर में जिन नामों का जिक्र था, उनमें से दो को राउंड अप कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। हमने 2 संदेहियों को उठाया है। उनके बयान लिए जा रहे हैं। अभी वजह स्पष्ट नहीं है, रंजिश थी या कोई पुराना विवाद, इसकी पड़ताल की जा रही है। तीन थानों की संयुक्त टीमें लगीं हमले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीमें लगाई हैं। जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया और कटारा हिल्स शामिल हैं विवेक सिंह ने बताया, तीनों थानों की टीमें अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही हैं। फुटेज, शक के आधार, रूट मैप, और संभावित विवादों को लेकर जांच की जा रही है। हमलावरों ने अपने चेहरे बांध रखे थे, जिससे पहचान में दिक्कत हो रही है। लेकिन पुलिस को कुछ क्लू मिले हैं, जिन पर टीमें काम कर रही हैं। कैफे संचालक सक्षम गिरि ने योगी, निखिल, अभिषेक समेत पांच नामजद और अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई है।   डीसीपी जोन 2 विवेक सिंह ने बताया कि मैजिक स्पॉट कैफे में कुछ बदमाशों ने तोड़फोड़ की है. कैफे संचालक शुभम गोस्वामी ने थाने जाकर FIR दर्ज कराई है. तत्काल पुलिस ने मारपीट, बलवा, आर्म्स एक्ट की धारा लगाकर जांच शुरू कर दी है.  पुलिस अफसर ने बताया कि कई थानों की टीम बदमाशों को पकड़ने के लिए लगाई हुई है. कैफे मालिक की तरफ से अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसकी किसी से पुरानी रंजिश है या नहीं. कैफे संचालक ने कुछ संदेहियों के फोटो दिए हैं, उसी के आधार पर दो से तीन लोगों को पुलिस ने राउंडअप किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित कलेक्टर भव्या मित्तल, खरगोन की सफलता पर एक्सपर्ट्स खुश

खरगोन  जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में पश्चिम क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया है। कलेक्टर भव्या मित्तल को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने जिले में 4.21 लाख जल संरचनाएं बनाकर 2.31 करोड़ घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में कलेक्टर को यह सम्मान दिया। 25 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिली इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 'जल संचय जनभागीदारी 1.0' के तहत उत्कृष्ट काम करने के लिए सम्मानित किया। खरगोन जिले को पश्चिमी क्षेत्र में श्रेणी 3 के तहत 13वां स्थान मिला है, जिसके लिए उसे 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है। जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जांच भी हो चुकी है। नदियों को बचाने के लिए किया काम खरगोन जिले ने नदियों को बचाने और उनके किनारों को सुधारने के लिए भी बहुत अच्छा काम किया है। नर्मदा, नानी, वंशावली और बोराड़ नदियों के 8000 हेक्टेयर खराब हो चुकी जमीन को स्टॉप डैम, चेक डैम, खेत तालाब और लूस बोल्डर स्ट्रक्चर जैसी चीजों से ठीक किया गया है। जो छोटी नदियां पहले नवंबर या दिसंबर तक सूख जाती थीं, वे अब अप्रैल तक बहती रहती हैं। कुंदा नदी के आसपास से 627 जगहों पर अवैध कब्जे हटाए गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराए सभी जल स्त्रोत इन कब्जों से खाली हुई 106 एकड़ जमीन पर 'निधिवन' नाम का एक पर्यटन स्थल बनाया गया है। जिले में कुल 4,21,182 कृत्रिम जलभरण संरचनाएं बनाई गई हैं, जैसे काउंटर ट्रेंच, चेक डैम, पर्काेलेशन टैंक, गली प्लग और गैबियन। इनसे भूजल स्तर बढ़ा है। जिले के सभी जल स्रोतों की जानकारी इकट्ठा करके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई है और 45 पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया है। जिले में सूक्ष्म सिंचाई के तहत 48,975 हेक्टेयर जमीन आती है, जिसमें इस साल 3,290 हेक्टेयर नई जमीन जोड़ी गई है। इससे 37,042 किसानों को फायदा हो रहा है। केंद्र की योजनाओं में भी आगे जिले में 156 नए अमृत सरोवर बनाए गए हैं, जिससे कुल 2,31,75,828 घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ी है। इन कामों को ग्रामीण विकास विभाग की वाटरशेड विकास- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 और मनरेगा के तहत किया गया है। जिले में क्या क्या हुआ जिले में गंदे पानी को फिर से इस्तेमाल करने के लिए 15 इकाइयां, 4 मलजल उपचार संयंत्र और 94 अपशिष्ट स्थिरीकरण कुंड चालू हैं। 5400 हेक्टेयर जमीन पर 30 लाख पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत पेड़ जीवित हैं। मनरेगा के तहत 3,80,000 पौधे और निजी बागों में 2,66,412 अमरूद के पौधे लगाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर बढ़ा है। जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए 2,277 सफाई अभियान चलाए गए, 605 क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, 200 ग्राम पंचायतों में कलश यात्रा निकाली गई और 147 जल चौपाल का आयोजन किया गया। इससे लोगों और सरकारी कर्मचारियों को जल संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया। जल सरंक्षण काम की जियो टैगिंग भी की 'जल संचय जनभागीदारी 1.0' अभियान के तहत 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जियो-टैगिंग करके पोर्टल पर जांच की गई है। इनमें खेत तालाब, स्टॉप डैम, कंटूर-ट्रेंच, सोकपिट, चेकडैम, कपिलधारा जैसी जल संरचनाएं शामिल हैं। इन संरचनाओं से लोगों की मदद से बारिश का पानी जमा करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों को भी ठीक किया गया है। इस अभियान के तहत जिले में 757 जल संरक्षण के काम अभी चल रहे हैं।

इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में बिजली बिल भुगतान की सुविधा शुरू

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को प्रदत्त सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे। 

सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।  

डिजिटल सुविधा से पेंशनरों को राहत: अब चंद रुपये खर्च कर, घर बैठे बनवाएं जीवन प्रमाण पत्र

दमोह भारतीय डाक विभाग ने पेंशनधारकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब वरिष्ठ नागरिकों को जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बैंक या डाकघर के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डाक विभाग की नई सेवा के तहत पोस्टमैन स्वयं पेंशनधारक के घर पहुंचकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र तैयार करेगा। इसके लिए मात्र 70 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। यह सुविधा बुजुर्गों को सुरक्षित व आरामदायक वातावरण में घर बैठे प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है। प्रमाण पत्र बनने के बाद यह सीधे ऑनलाइन माध्यम से संबंधित पेंशन प्रदाता संस्थान को भेज दिया जाता है, जिससे अलग से जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। सेवा के सुचारू संचालन हेतु इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक दमोह शाखा के प्रबंधक लक्ष्मीनारायण पाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।   जानकारी व सहायता के लिए मोबाइल नंबर 9893115877 जारी किया गया है। इस सेवा के अंतर्गत 81 वर्षीय कुलदीप कुमार चौबे (एमपीआरडीसी से सेवानिवृत्त) का जीवन प्रमाण पत्र ब्रांच पोस्ट मास्टर ब्रजेश पटेल ने उनके घर जाकर बनाया। इसी प्रकार लीला देवी विश्वकर्मा, गोपाल और नीमा बाई नामदेव के प्रमाण पत्र भी उनके घर पर ही तैयार किए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे छतरपुर के चंद्रनगर स्थित पांच सितारा राजगढ़ पैलेस होटल का उद्घाटन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव छतरपुर के चंद्रनगर में करेंगे पांच सितारा होटल राजगढ़ पैलेस का शुभारंभ पन्ना जिले को देंगे 82.62 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात छतरपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 19 नवम्बर को छतरपुर जिले के चन्द्रनगर में द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस का उद्घाटन और पन्ना जिले के शाहनगर में विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। चंद्रनगर के पांच सितारा लग्जरी होटल से प्रदेश सहित जिले में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भी हमारी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहर और वन्य प्राणी पर्यटन की ओर आकर्षित होंगे। राज्य सरकार द्वारा राजगढ़ पैलेस के नवीनीकरण और जीर्णोंद्धार कर उसे पांच सितारा होटल के रूप में संचालित करने के लिए ओबेरॉय समूह को लीज पर दिया गया है। द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस चंद्रनगर के पास मानगढ़ और मनियागढ़ की पहाड़ियों के मध्य हर-भरे वातावरण के बीच स्थित है। बुन्देला राजवंश द्वारा निर्मित 350 साल पुराना यह महल भारतीय स्थापत्य और पारंपरिक बुंदेलखंड की विशेषताओं का मिश्रण है। द ओबेरॉय समूह द्वारा विकसित राजगढ़ पैलेस होटल में महलनुमा रेस्टोरेंट, भव्य बैंक्वेट हॉल सहित 66 भव्य कक्ष उपलब्ध हैं। यह कॉर्पोरेट आयोजन, डेस्टीनेशन वेडिंग्स, सामाजिक समारोह आदि के लिए आदर्श स्थान के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत शाहनगर के खेल परिसर आमा में आयोजित हितग्राही सम्मेलन में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहाँ 82.62 करोड़ के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे।  

बस परमिट नियमों में होगा बड़ा बदलाव, 899 बसों पर लटकी तलवार, समय सीमा के साथ जांच के आदेश

भोपाल राज्य सरकार बस परमिट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। अब किसी भी बस को उसके रूट के लिए उतनी ही अवधि का परमिट दिया जाएगा, जितनी उसकी निर्धारित आयु है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बस का संचालन निर्माण तिथि से 15 वर्ष तक ही संभव है, तो परमिट भी अधिकतम 15 वर्ष तक का ही होगा। वर्तमान व्यवस्था में परमिट पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जिसके कारण कई मामलों में बसों के परमिट 15 वर्ष से भी अधिक अवधि के लिए वैध दिखाई देते हैं। जबकि राज्य के भीतर बस संचालन की अधिकतम सीमा 15 वर्ष और अंतरराज्यीय संचालन की सीमा 10 वर्ष तय है।   हाल ही में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर उन 899 बसों की सूची भेजी है जिनके परमिट 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी किए गए हैं। सचिव ने आशंका जताई है कि ये बसें संभवतः अभी भी चल रही होंगी, इसलिए इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ऐसे नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत बसों के परमिट उनकी अधिकतम आयु की अवधि के भीतर ही सीमित रहेंगे। अधिकारियों के अनुसार, परमिट वाहन मालिक के नाम पर जारी होता है, जिसमें बस नंबर और रूट का उल्लेख रहता है। पांच वर्ष का परमिट इसलिए दिया जाता था ताकि बस की 15 वर्ष की अवधि पूरी होने पर मालिक उसी रूट पर अनुमति लेकर दूसरी बस संचालित कर सके और नया परमिट लेने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन अब नई व्यवस्था में यह समयसीमा बस की अधिकतम आयु से आगे नहीं जाएगी।  

एमपी जेलों में 46 हजार कैदियों के बीच एनआरआई भी पड़ सकते हैं परेशान, एसआईआर ने बढ़ाई टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है. ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है. एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है. सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी. 46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है. ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है. अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सिंहस्थ का विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं

सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।