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कृषि भाव अपडेट: भावांतर योजना में आज का रेट 4056 रुपए/क्विंटल

भावांतर योजना में आज का मॉडल रेट 4056 रुपए प्रति क्विंटल जारी भोपाल भावांतर योजना 2025 अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 11 नवंबर को 4056 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है, जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था।  

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने किया पीएनबी की डिजिटल पहल का उद्घाटन

नई दिल्ली  देश के सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने अपने कॉर्पोरेट कार्यालय में माननीय केंद्रीय सतर्कता आयुक्त श्री प्रवीण कुमार श्रीवास्तव के दौरे के साथ बढ़ी हुई सतर्कता और पारदर्शिता की दिशा में, अपनी यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इस कार्यक्रम के तहत, "पीएनबी की विजिलेंस मैनुअल 2025" का 5वाँ संस्करण और त्रैमासिक पत्रिका "पीएनबी विजिल" का सितंबर 2025 के अंक का अनावरण  किया गया। इस अवसर पर एमडी एवं सीईओ श्री अशोक चंद्र, कार्यपालक निदेशक (ईडी) श्री बिभु प्रसाद महापात्र, सीवीओ श्री राघवेंद्र कुमार, और बैंक के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।इसके अतिरिक्त, बैंक ने कई प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया, जिनमें कर्मचारी जवाबदेही पोर्टल का संपूर्ण डिजिटलीकरण, आचरण जोखिम ढाँचा (कर्मचारियों के लिए) और पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) के लिए डिजिटल समाधान शामिल हैं। ये पहल पीएनबी की अपने परिचालन में दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। इस कार्यक्रम में सतर्कता योद्धाओं को भी सम्मानित किया गया, यह उन कर्मचारियों के अनुकरणीय प्रयासों को मान्यता देने के लिए किया गया जिन्होंने बैंक के नैतिक मूल्यों को बनाए रखने में असाधारण समर्पण का प्रदर्शन किया है। श्री प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, माननीय केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने कहा: "हमारे समाज का कल्याण , हमारी अर्थव्यवस्था का विकास और आजीविका का सृजन पंजाब नैशनल बैंक जैसे बैंकों द्वारा प्रदान किए गए समर्थन और वित्तपोषण से गहराई से जुड़े हुए हैं। हमारा लक्ष्य सतर्कता की ऐसी संस्कृति का निर्माण करना है जहाँ कार्य दंड के भय से नहीं, बल्कि सही काम करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित हों। यह संस्कृति व्यक्ति, संगठन और समाज को बड़े पैमाने पर लाभान्वित करती है, जिससे बैंक, अर्थव्यवस्था और अंततः राष्ट्र के विकास में योगदान मिलता है, क्योंकि हम 2047 तक 'विकसित भारत' की दिशा में काम कर रहे हैं।" श्री अशोक चंद्र, एमडी एवं सीईओ, पीएनबी, ने कहा: "जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अपना मार्ग प्रशस्त कर रहा है l हम पर, सबसे बड़े बैंकों में से एक के रूप में, जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। हम सत्यनिष्ठा, नैतिकता, और पारदर्शिता पर आधारित गुणात्मक, सतत, और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सतर्कता, विशेष रूप से निवारक सतर्कता ( प्रिवेंटिव विजिलेंस ) , यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि प्रगति सुदृढ़ शासन और जवाबदेही के साथ जुड़ी रहे। इन मूल्यों से प्रेरित होकर, पीएनबी विश्वास और नैतिक उत्कृष्टता के माध्यम से भारत की विकास यात्रा का समर्थन करने के लिए समर्पित है।" श्री राघवेंद्र कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), पीएनबी, ने कहा: "इन डिजिटल पहलों का शुभारंभ पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी की संस्कृति के निर्माण के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अपने सतर्कता ढाँचे के साथ प्रौद्योगिकी को एकीकृत करके, हम न केवल परिचालन दक्षता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि विश्वसनीयता बैंक के भीतर हर प्रक्रिया की आधारशिला बनी रहे।" पीएनबी द्वारा सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2025 का अनुपालन सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और नैतिक शासन के प्रति उसकी गहन प्रतिबद्धता का प्रमाण है। 27 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी सत्यनिष्ठा प्रतिज्ञा के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम में एक लाख से अधिक कर्मचारियों और बहुतायत में ग्राहकों ने भाग लिया। बैंक ने डिजिटल और मूलभूत पहलों के माध्यम से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की। 11,000 एटीएम (ATMs), मोबाइल ऐप्स और व्हाट्सएप बैंकिंग पर सतर्कता संदेशों को प्रदर्शित करने से लेकर 8,000 से अधिक ग्राम सभाओं में जागरूकता अभियान आयोजित करने तक, पीएनबी ने सत्यनिष्ठा के संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुँचाया।  विभिन्न प्रतियोगिताओं, वॉकथॉन और साइक्लोथॉन में कर्मचारियों की जबरदस्त भागीदारी, साथ ही रक्तदान शिविरों के दौरान 4,300 यूनिट रक्त का संग्रह, सतर्कता और सेवा की भावना को दर्शाता है। सतर्कता संबंधी सभी शिकायतों में शून्य लंबित मामले, व्यापक क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और उत्तरदायी परिसंपत्ति प्रबंधन में बैंक की उपलब्धि, निवारक सतर्कता और संस्थागत जवाबदेही पर इसके ध्यान को और उजागर करती है। ये निरंतर प्रयास एक जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में पीएनबी की भूमिका की पुष्टि करता हैं, जो सत्यनिष्ठा की संस्कृति के निर्माण और विकसित भारत 2047 की ओर भारत की यात्रा में योगदान देने के लिए समर्पित है।   

राज्यपाल पटेल ने किया गुजरात के बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय का भ्रमण

राज्यपाल  पटेल ने गुजरात के बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय राजपीपला का किया भ्रमण भगवान बिरसा मुंडा को किया नमन, छात्रावास पहुंचे भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल मंगलवार को गुजरात के नर्मदा जिले के राजपीपला के भगवान बिरसा मुंड़ा विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने परिसर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक डॉ. दर्शना बेन वसावा भी मौजूद थी। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि बिरसा मुंडा विश्वविद्यालय की प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की संकल्पना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रावास का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों की आवास व्यवस्थाओं की समीक्षा की। विश्वविद्यालय के स्वरूप और विकास के विषय में विश्वविद्यालय प्रबंधन से चर्चा की। राज्यपाल  पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़- मां के नाम” अभियान के तहत पौध-रोपण किया। राज्यपाल के आगमन पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। राज्यपाल  पटेल को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मधुकर पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय जनजातीय कला, विरासत, संस्कृति, औषधीय प्रणालियों, भाषा और साहित्य का संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए समर्पित है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों की परंपराएँ और ज्ञान प्रणाली, व्यापक सामाजिक पुनर्जागरण में योगदान दें सके। कुलपति डॉ. पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों जैसे मानविकी, वाणिज्य, विज्ञान, कानून, शिक्षा, आदिवासी पारंपरिक कला, शिल्प और कौशल आधारित शिक्षा में स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर, व्यावसायिक और पी.एच.डी. तक के शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है।  बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2017 मे हुई थी। इसका उद्देश्य विशेष रूप से गुजरात और विकासशील क्षेत्रों की जनजातीय आबादी के संदर्भ में परिवर्तनकारी और नवीन शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करना है। विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्रों के तीव्र विकास को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी, कौशल-आधारित, व्यावसायिक, प्रबंधन, पर्यटन, जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक मूल्य प्रणालियों और अन्य संबंधित क्षेत्रों में शैक्षिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय कला, संस्कृति, परंपरा, भाषा, औषधीय प्रथाओं, रीति-रिवाजों, वन-आधारित आर्थिक गतिविधियों, वनस्पतियों, जीवों, और जनजातीय क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित ज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध है।  

2026 को घोषित किया गया कृषि आधारित उद्योग वर्ष, सीएम ने सरपंचों को दी जानकारी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को जंबूरी मैदान में आयोजित सरपंच महासम्मेलन को संबोधित करते हुए पंचायतों और ग्रामीण विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय शासन प्रणाली में पंचायतों को जितनी शक्ति है, वह बड़े पदधारकों के पास भी नहीं है और प्रत्येक सरपंच अपनी पंचायत के लिए बड़ा योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने पंचायतों के लिए कई घोषणाएं कीं। इसमें प्रत्येक पंचायत के लिए 50,000 रुपए की राशि प्रदान करने की बात कही। साथ ही कहा कि वर्ष 2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में घोषित किया जाएगा और कृषि उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार के माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। मेडिकल और एग्रीकल्चर कॉलेजों की स्थापना भी तेजी से की गई है। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिए पंचायतों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने हर गांव के अंदर शांति धाम के निर्माण के लिए भी आवश्यक राशि देने का आश्वासन दिया। भोपाल के जंबूरी मैदान पर सरपंचों के अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों की मौजूदगी में सरपंच सम्मेलन का आयोजन हुआ। सीएम ने कहा कि एक बात समझ लो कोई सचिव अगर काम नहीं करेगा तो उसे हटा देंगे। सचिव-सहायक सचिव इनकी क्या औकात? आपको लगता है कि सरपंच के मामले में कोई दिक्कत आ रही है और सरकार ने कोई निर्णय किया है तो उसे ठीक करने का काम हमारा है। जब भी सरकार के स्तर पर कोई निर्णय होगा तो उसके क्रियान्वयन में कठिनाई आएगी तो उसे हल करने का काम सरकार का है। सीएम ने कहा कि इतना बड़े देश में प्रधानमंत्री मोदी ने 10-11 सालों में न जाने कितनी चीजों की चिंता की। इसलिए हमारे देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर हमको भरोसा है। जब लाल सलाम को आखिरी सलाम हो रहा है तो ये कहां लगेंगे जो भी होंगे सब ठिकाने लगेंगे। ये देश को पूरा भरोसा है। दिल्ली ब्लास्ट के मृतकों के लिए रखा मौन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हुए ब्लास्ट में मारे गए लोगों के लिए 2 मिनट का मौन रखवाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें कल की घटना को भूलना नहीं है। हमारे देश की प्रगति और बढ़ने वाले कदम दुनिया में अलग प्रकार से निकल रहे हैं। ऐसे में दुश्मन भी पता नहीं, कितने प्रकार से प्रयास करते हैं। इस मामले में गृह मंत्री जी पूरी जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हुए बम धमाकों में दिवंगतों की याद में 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर पूरा भरोसा है और देश की सुरक्षा में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  आपके पास जो पावर वो बडे़ पद वालों को भी नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके जो विषय आए हैं उनके लिए हमारी सरकार पूरी तरह से आपके साथ है। जब सरपंच के सामने बैठेंगे तो सचिव, रोजगार सहायक को भी आना ही चाहिए,इनके बिना बात थोड़े बनती है। त्रिस्तरीय शासन प्रणाली में जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री हमको दिखते हैं। आपको जो पावर हैं वो पावर तो बडे़-बडे़ पद वालों को भी नहीं हैं। एक सरपंच जो कर सकता है वो कोई नहीं कर सकता। एक पंचायत के हर घर की गिनती पंचायत और सरपंच के पास रहती है। हमारे इतने बडे़ प्रदेश में बड़ी आबादी गांवों में रहती है अगर प्रदेश की तस्वीर, तकदीर बदलने का काम आपके बिना नहीं हो सकता। 24 नवंबर को होगी त्रिस्तरीय पंचायतों की कॉन्फ्रेंस सीएम ने कहा- पिछले बार 23-24 और 25 जुलाई को त्रिस्तरीय पंचायत के अधिकारियों का कार्यक्रम हुआ था। इस बार 24-25 और 26 नवंबर को भोपाल में कॉन्फ्रेंस होने वाली है। उसमें कुछ बातें मैं भी जोड़ना चाहता हूं। जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है तो पंचायत और आसपास लगी नगरीय निकाय के बीच कई बार टकराव होता है। जब नगरीय निकाय होता है उनके पास पार्षद, सीएमओ होते हैं बहुत सारी चीजें होती हैं। पंचायत में सचिव और सहायक सचिव ही होते हैं। ऐसा कोई समाधान निकले की हमारी पंचायत भी जिंदा रहे और वो विकास का काम भी बंद न हो। इसका मैकेनिज्म बनाने की जरूरत है। पंचायतें नया गांव बसाएं, सरकार साथ है सीएम ने कहा- विदिशा में उदाहरण है कि आवासीय व्यवस्था में खुद की प्लानिंग से नया गांव बसाया। इसमें क्या परेशानी है उन कामों को भी किया जा सकता है।  

दिल्ली ब्लास्ट पर सख्त रुख, CM मोहन यादव बोले: दोषियों को छोड़ना मुमकिन नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक गंभीर हमले की घटना पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ऐसी किसी भी चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस बयान के दौरान उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद थे। दोषियों को सख्त चेतावनी मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ सरकार हमेशा से सख्त रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दोषियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। दिल्ली ब्लास्ट पर सीएम मोहन यादव की कड़ी प्रतिक्रिया, बोले- 'दोषी बख्शे नहीं जाएंगे', बताया गृह मंत्री हर पल की ले रहे जानकारी, जांच जारी     “ऐसी घटना करने वाले भारत सरकार द्वारा न पहले कभी बख़्शे गए हैं और ना कभी बख़्शे जाएंगे, भारत सरकार की कार्रवाई हमेशा तगड़ी रही है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश सीएम यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ऐसी किसी भी घटना से निपटने में पूरी तरह सक्षम और तैयार है। गृह मंत्रालय कर रहा है जांच मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस पूरे मामले को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और इसकी जांच सीधे गृह मंत्रालय की निगरानी में हो रही है। उन्होंने कहा कि माननीय गृह मंत्री स्वयं इस मामले को देख रहे हैं। डॉ. यादव ने कहा, “जो कुछ भी हुआ माननीय गृहमंत्री जी उसकी जांच कर रहे हैं और सारी बातें विस्तार से प्रेस में बताने वाले भी हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि जांच पूरी होने के बाद गृह मंत्री खुद मीडिया के सामने विस्तृत जानकारी साझा करेंगे। हमले में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस दुर्भाग्यपूर्ण हमले में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “हम हमले में जान गंवाने वालों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”

कलेक्टर की कार्रवाई: कर्मचारियों को कॉल कर समय पर आने को कहा, 13 सस्पेंड

मुरैना   कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने  ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है. बिल्कुल फिल्म नायक की तरह, कलेक्ट्रेट से ही वीडियो कॉल के जरिए पंचायत भवनों की लाइव उपस्थिति चेकिंग शुरू की गई. सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मुख्यालय पर अनुपस्थित रहने पर 8 पटवारी और 4 सचिव सहित 13 शासकीय कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया. अनुपस्थित रहने पर 13 सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज कलेक्टर द्वारा सभी कर्मचारी को समय पर मुख्यालय पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद सरकारी कर्मचारी समय पर मुख्यालय नहीं पहुंच रहे थे. जिसके बाद सोमवार को जिला अधिकारी ने कर्मचारियों को वीडियो कॉल किये, जिसमें 8 पटवारी और 5 सचिव सहित कुल 13 लोग मुख्यालय पर मौजूद नहीं थे. कलेक्टर ने बिना कोई बहाना सुने 13 सरकारी कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया. साथ ही विकासखंड मुख्यालय पर अटैच करने के निर्देश भी जारी किए. इस कार्रवाई से कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है. दोपहर तक नहीं पहुंचे पंचायत भवन मुरैना में  प्रशासनिक मोर्चे पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को अनिल कपूर की फिल्म 'नायक' की याद दिला दी. कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में से ही पंचायत भवनों पर अचानक वीडियो कॉलिंग के द्वारा उपस्थिति चेकिंग शुरू कर दी. एक-एक कर कई कर्मचारियों को कॉल लगाया. इस दौरान कई कर्मचारी पंचायत भवन पर अनुपस्थि पाए गए. जिससे कलेक्टर पूरी तरह नायक मोड में आ गए. उन्होंने तत्काल 13 को सस्पेंड के आदेश सुना दिए. इस कार्रवाई से जिलेभर में हड़कंप मचा हुआ है. निजी कामों में व्यस्त पाए गए कर्मचारी जानकारी के अनुसार, कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने सरकारी योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पटवारियों को प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं हल करने के निर्देश दिए हैं. इसी प्रकार पंचायत सचिव/जीआरएस को सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंचायत भवन में बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करने के निर्देश दिये हैं. जनता के काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर्मचारी उनके आदेश का अनुपालन ठीक तरह से कर रहे है या नहीं, इसकी वस्तुस्थिति जानने के लिए सोमवार की दोपहर उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में जनपद सीईओ और तहसीलदारों की बैठक ली. इस बैठक में उन्होंने सीईओ व तहसीलदारों के जरिये पटवारी और पंचायत सचिव/जीआरएस से वीडियो कॉन्फ्रेंस के से बातचीत की. बातचीत के दौरान पता चला कि कार्यालय समय में कोई पटवारी अपने घर के निजी कार्यों में व्यस्त हैं, तो कोई बाजार में खरीददारी कर रहा है. ऐसी ही स्थिति पंचायत सचिव-जीआरएस की पाई गई. कलेक्टर लोकेश कुमार ने बताया कि "वीडियो कॉल के माध्यम से पटवारी और सचिवों की लोकेशन चेक किया था, क्योंकि उनको पंचायत भवन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्या समाधान के निर्देश दिए गए थे, लेकिन 13 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है." निलंबन सूची में शामिल पटवारियों के नाम     सुजान सिंह गुर्जर (बानमौर)     समल मनोरथ पाठक (पोरसा)     अजय गुर्जर (मुरैना ग्रामीण)     शिवराज तोमर (मुरैना शहर)     मयंक यादव (अंबाह)     सोनू जादौन (सबलगढ़)     दुर्गेश शर्मा (कैलारस)     संजीव तिवारी (जौरा) निलंबित पंचायत सचिव/जीआरएस     नरेश सिंह तोमर, ग्राम पंचायत कोटरा     हाकिम जाटव, ग्राम पंचायत बर्रेड     सौरभ सिकरवार, जीआरएस (ग्रामीण संसाधन सहायक)     रामरूप कुशवाह, ग्राम पंचायत सुनावली     नरेश, ग्राम पंचायत ककरारी

उथली और खेत खदानों से आए 79 हीरे, पन्ना कार्यालय में तैयार नीलामी

पन्ना  मध्य प्रदेश की हीरा नगरी पन्ना लोगों को रंक से राजा बनाने की पहचान रखती है. यहां आए दिन मजदूर-किसान और जिसने खदान ली हो, उसे हीरे मिलते रहते हैं. जिन लोगों को यह हीरे मिलते हैं, वे हीरा कार्यालय में जमा करते हैं. जिसके बाद जब हीरों की निलामी होती है, तो उसके पैसे हीरा मिलने वाले लोगों को दिए जाते हैं. पन्ना में हीरा कार्यालय सन 1961 में खुला था. तब से लगातार यहां पर शासकीय रूप से हीरे जमा होते हैं. उनकी सरकार द्वारा व्यवस्थित नीलामी कराई जाती है और 12% टैक्स काटकर बाकी राशि हीरा पाने वाले के खाते में ट्रांसफर की जाती है. यहां होती है हीरों की नीलामी सन 1961 से लेकर अभी तक यहां पर हीरों की लगातार नीलामी होती आ रही है. हीरा कार्यालय पहले कलेक्ट्रेट भवन, महेंद्र भवन में संचालित होता था. 2017 में नए कलेक्ट भवन बन जाने के कारण यह हीरा कार्यालय वहां पर शिफ्ट हो गया है. 27 अक्टूबर 2025 को नया हीरा कार्यालय बन गया है. हालांकि वहां पर अभी ये शिफ्ट नहीं हुआ है. नए कलेक्ट भवन में ही संचालित हो रहा है. यहां पर शासन द्वारा शासकीय रकवा हीरा खदान के लिए खोले गए हैं. जिन पर शासन स्तर पर पट्टा बनाया जाता है. इन्हीं खदानों को उथली हीरे की खदान बोला जाता है. निजी खेत खदान भी होती है, जहां पर लोग अपने खेतों में हीरे की खदान खोदते हैं. जिन लोगों को हीरा मिलता है, वे सभी लोग उसे हीरा कार्यालय में जमा कराते हैं. इन्हीं हीरो की नीलामी शासन स्तर पर होती है. जिसमें देश के कोने-कोने से हीरा व्यापारी पन्ना पहुंचते हैं और हीरे की नीलामी में हिस्सा लेते हैं. जो हीरा उन्हें पसंद आता है, उसे वह खरीद लेते हैं. पिछली नीलामी में 3 करोड़ की हुई थी बिक्री पिछली वर्ष हीरे की नीलामी 4 दिसंबर से 6 दिसंबर 2024 तक चली थी. यह नीलामी तीन दिनों की थी. जिसमें देश के कोने-कोने से हीरा व्यापारी यहां पर पहुंचे थे. इस नीलामी में मुख्य आकर्षण का केंद्र 32 कैरेट और 19 कैरेट का हीरा था. जो अच्छी कीमत में बिके थे. इस नीलामी में करीब 3 करोड़ रुपए के हीरे की बिक्री हुई थे. अभी तक इतने हीरे हुए जमा पिछली नीलामी दिनांक 6 दिसंबर 2024 के बाद से आज दिनांक 10 दिसंबर 2025 तक हीरा कार्यालय में कुल 79 नग हीरे जमा हुए हैं. जिनका वजन 142.84 कैरेट है. इसमें मुख्य आकर्षण का केंद्र 17.11 कैरेट का हीरा है. जो प्रकाश कुशवाहा निवासी नयापुरवा को दिनांक 17 दिसंबर 2024 को मिला था. यह हीरा इस वर्ष जमा हुए हीरों में सबसे बड़ा है. पिछली नीलामी में भी कुछ हीरे बच गए थे, जो नीलाम नहीं हो सके थे, उनकी संख्या करीब 40 है. रामेश्वर जाटव लिपिक हीरा कार्यालय पन्ना ने बताया कि "अभी तक कुल 79 नग हीरे जमा हुए हैं. पिछले वर्ष नीलामी में 40 नग हीरे शेष बचे थे. आगामी जल्द होने वाली नीलामी में इन सभी हीरो को बिक्री के लिए रखा जाएगा."

दुकान-मकान तोड़ने से प्रभावित लोगों को राहत, नगर निगम ने शुरू की मुआवजे की प्रक्रिया

 ग्वालियर शहर में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों के लिए जिनकी दुकानें और मकान तोड़े गए थे, उन्हें छह साल के लंबे इंतजार के बाद अब राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने इन प्रभावितों को मुआवजा के रूप में फ्लोर एरिया रेशो (FAR) देने की कवायद शुरू कर दी है। किला गेट, सेवा नगर, हजीरा, मुरार नदी और एलिवेटेड रोड के निर्माण में बाधा बनी संपत्तियों को तोड़ने के समय मुआवजा के रूप में टीडीआर (ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट) या एफएआर देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह मामला वर्षों से लंबित था। क्या है एफएआर (FAR) का नियम टीएंडसीपी के अफसरों के अनुसार, सरकार ने वर्ष 2018 में टीडीआर नियम बनाए थे। इसके तहत, यदि किसी सरकारी योजना के लिए लोगों की निजी जमीन, मकान या भवन लिया जाता है, तो उन्हें बढ़ा हुआ फ्लोर एरिया रेशो (FAR) दिया जाता है। भवन स्वामी इस एफएआर को किसी बिल्डर या अन्य व्यक्ति को बेच सकते हैं। एफएआर का अनुपात जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन कीमत के आधार पर तय किया जाता है। टीएंडसीपी ने अब शुरू की प्रक्रिया अब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने इस दिशा में कदम उठाया है। टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक केके कुशवाह ने नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, हाउसिंग बोर्ड सहित सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि यदि उन्होंने किसी की निजी जमीन या मकान को निर्माण कार्य में लिया है, तो वे संबंधित स्वामियों से आवेदन लेकर उन्हें भेजें। प्रभावित लोग टीडीआर या एफएआर के लिए टीएंडसीपी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुशवाह ने बताया कि एफएआर करीब 6 से 7 महीने में संबंधित को मिल जाता है और यह दस साल के लिए वैलिड रहता है। इन क्षेत्रों के लोग होंगे लाभान्वित इस कवायद से ग्वालियरशहर के 400 से अधिक संपत्ति स्वामी लाभान्वित होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से किला गेट से सेवा नगर और हजीरा तक के 281 संपत्ति स्वामी, मुरार मरघट रोड के 72, और एलिवेटेड रोड फेज-1 व फेज-2 के करीब 143 संपत्ति स्वामी शामिल हैं।

आधुनिक ड्रोन सिस्टम के साथ बीएसएफ का नया स्कूल, पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच शुरू

 डबरा  देश की सीमाओं की सुरक्षा अब आधुनिक ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित महिला जवानों के हाथों में होगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने इस विशेष टीम को 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' नाम दिया है। इसके लिए देश का पहला 'स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर' बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में शुरू किया है, जहां महिला जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर का उद्घाटन 2 सितंबर 2025 को बीएसएफ के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने किया था। यह भारत में बीएसएफ का अपनी तरह का पहला व्यवस्थित स्कूल है, जहां ड्रोन वॉरियर्स और ड्रोन कमांडो तैयार किए जाएंगे। पंजाब फ्रंटियर का पहला बैच वर्तमान में, पंजाब फ्रंटियर की 30 महिला जवानों का पहला बैच 6 सप्ताह की ट्रेनिंग ले रहा है। इन्हें ड्रोन हमलों से निपटने, ड्रोन के माध्यम से हमला करने के टिप्स, ड्रोन उड़ाने, नियंत्रित करने और निगरानी मिशनों के लिए डेटा एकत्रित करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्वालियर के डबरा स्थित बीएसएफ अकादमी ने ड्रोन ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें इन प्रशिक्षित महिला जवानों ने ड्रोन वॉर को लेकर डैमो दिया। इसमें लोकेशन का पता लगाना, हमला कर लौटना और कंट्रोल रूम से प्लान तैयार करना जैसे इवेंट शामिल थे। महिलाएं कमांड भूमिका का पालन अच्छी तरह करती हैं- डॉ. शमशेर सिंह बीएसएफ अकादमी के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह ने बताया कि महिला प्रहरियों को प्रशिक्षित करने के पीछे उनका यह मानना है कि महिलाओं में धैर्य, आत्मविश्वास, सटीक निशाना लगाने के साथ ही वे कमांड भूमिका का अच्छी तरह से पालन करती हैं। डॉ. सिंह ने जोर दिया कि वर्तमान में युद्ध और बॉर्डर सुरक्षा में ड्रोन टेक्नोलॉजी के बिना काम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, आने वाले दिनों में ड्रोन से निगरानी रखना, दुश्मन के ड्रोन को गिराना और ऑपरेशन लॉन्च करना आदि काम होंगे। प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक निदेशक ने बताया कि ड्रोन केवल हमला करने या निगरानी के लिए ही नहीं, बल्कि आपात स्थिति में प्राथमिक इलाज पहुंचाने में भी सहायक होंगे, खासकर उन दुर्गम स्थानों पर जहां घायल जवान तक तुरंत पहुंचना संभव नहीं होता। यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 'दुर्गा ड्रोन वाहिनी' की ये महिला जवान हर परिस्थिति में सीमाओं पर देश विरोधी दुश्मनों से निपटने के लिए तैयार रहेंगी।

नगर निगम ने 2,500 से अधिक कर्मचारियों का 16-31 अक्टूबर का बकाया वेतन दिया

भोपाल  मध्यप्रदेश में नगर निगम प्रशासन ने सोमवार को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का 16-31 अक्टूबर तक का बकाया वेतन जारी कर दिया। इससे 2,500 से अधिक कर्मचारियों के बीच खुशी की लहर है, जिनका लगभग 1.80 करोड़ रुपए का वेतन नए अटेंडेंस सिस्टम लागू होने के कारण रुका हुआ था। नए अटेंडेंस सिस्टम से हुई थी देरी नगर निगम में हाल ही में लागू किए गए नए अटेंडेंस सिस्टम के कारण कर्मचारियों के वेतन में देरी हुई थी। इससे पहले सात नवंबर को निगम प्रशासन ने 1-15 अक्टूबर का वेतन जारी किया था, लेकिन बाकी बकाया राशि न मिलने से कर्मचारी असंतोष जता रहे थे। कर्मचारियों ने कियाथा प्रदर्शन कर्मचारियों ने इससे पहले माता मंदिर मुख्यालय के सामने जमा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। सफाई कर्मचारियों की नाराजगी इतनी अधिक थी कि उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर कचरा वाहन नहीं चलाए, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। निगमायुक्त संस्कृति जैन के हस्तक्षेप के बाद ही सफाई कार्य फिर से शुरू हो सका था। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वासन दिया था कि 16-31 अक्टूबर का वेतन 10-11 नवंबर को जारी किया जाएगा। प्रशासन ने अपना वादा निभाते हुए 10 नवंबर को ही वेतन जारी कर दिया।