samacharsecretary.com

“हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से AI आधारित सत्यापन और जियो-फेंसिंग तकनीक से सुनिश्चित हो रही वास्तविक उपस्थिति

भोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकसित "हमारे शिक्षक" ऐप प्रदेश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम बना रहा है। ऐप के माध्यम से संचालित रियल-टाइम ई-अटेंडेंस प्रणाली एजुकेशन पोर्टल 3.0 से एकीकृत है, जिससे उपस्थिति संबंधी जानकारी तत्काल उपलब्ध होती है और प्रशासनिक निगरानी अधिक प्रभावी बनती है। विभाग की यह पहल पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रशासनिक दक्षता तथा डेटा आधारित प्रबंधन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। तकनीकी नवाचार के माध्यम से विभाग शिक्षा प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ई-अटेंडेंस प्रणाली में AI आधारित Liveness Authentication तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसके तहत कर्मचारी को उपस्थिति दर्ज करते समय पलक झपकाने अथवा मुस्कुराने जैसी लाइव गतिविधि करनी होती है। इससे प्रॉक्सी अथवा फर्जी उपस्थिति की संभावना समाप्त होती है और यह सुनिश्चित होता है कि उपस्थिति वास्तविक व्यक्ति द्वारा ही दर्ज की गई है। साथ ही, जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से कर्मचारी केवल अपने निर्धारित विद्यालय, कार्यालय अथवा प्रशिक्षण केंद्र की निर्धारित सीमा के भीतर से ही उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। इससे कार्यस्थल पर वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित होती है। इससे उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता और सुदृढ़ हुई है। यह सुविधा नियमित कार्यदिवसों के अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य विभागीय गतिविधियों के लिए भी उपलब्ध है। विभागीय अधिकारियों को जिला, विकासखंड, संकुल तथा विद्यालय स्तर तक उपस्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, विश्लेषण एवं रिपोर्ट प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनी है।  

रायसेन के डायल-112 हीरोज खेलते-खेलते घर से निकले 03 वर्षीय गुम बालक को खोजकर परिजनों से मिलाया

भोपाल रायसेन जिले के थाना सुल्तानगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से गुम हुए 03 वर्षीय बालक को खोजकर सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई तलाश एवं सहायता से बालक सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका और परिजनों की चिंता दूर हुई। 08 जूनको राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सुल्तानगंज क्षेत्र अंतर्गत एक 03 वर्षीय बालक गुम हो गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ सैनिक 227  द्वारका प्रसाद एवं पायलट  सुनील कुमार मौके पर पहुँचे और परिजनों से बालक के संबंध में जानकारी प्राप्त की। डायल-112 जवानों ने बालक का फोटो लेकर आसपास क्षेत्र में उसकी तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। लगातार प्रयासों के दौरान बालक तालाब के पास मिला, जहाँ से उसे सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। डायल-112 टीम द्वारा आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार बालक खेलते-खेलते घर से निकल गया था और भटकते हुए तालाब के पास पहुँच गया था।अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों का आभार व्यक्त किया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।  

बिजली कार्मिक करेंगे शिकायतों का तत्काल समाधान

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने बिजली उपभोक्‍ताओं की सुविधा को देखते हुए फ्यूज ऑफ कॉल (विद्युत अवरोध को दूर करना) समय पर अटेण्ड करने के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने कहा है कि कंपनी के समस्त मैदानी अधिकारी अथवा कार्मिक अपने मोबाइल फोन को 24 घंटे चालू रखें एवं उपभोक्‍ताओं के कॉल अटेंड करें। इसके साथ ही क्षेत्रीय मुख्‍य महाप्रबंधक, संभागीय उप महाप्रबंधक एवं सभी मैदानी अधिकारी कॉल सेन्‍टर 1912, व्‍हाट्सऐप चैटबोट तथा स्‍थानीय वाट्सऐप ग्रुप एवं अन्‍य माध्‍यम से प्राप्‍त होने वाली विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्‍काल समाधान करना सुनिश्चित करें। सभी मैदानी अधिकारियों से कहा है कि वे सीआरएम पोर्टल पर सतत निगरानी रखें और जनप्रतिनिधि तथा उपभोक्‍ताओं से संवाद बनाये रखें। कंपनी ने कहा है कि ऑंधी, बारिश के दौरान एवं अन्य व्यवधान के कारण हुए बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज कराने के लिए कंपनी ने उपभोक्ताओं को अनेक विकल्प प्रदान किये हैं। अब उपभोक्ताओं के पास विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए कॉल सेन्टर के टोल फ्री नंबर 1912, व्हाट्सएप नंबर 0755-2551222, मोबाइल ऐप ‘उपाय (UPAY) अथवा कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in का विकल्प मौजूद है। उपभोक्ता इन विकल्पों में से किसी भी एक विकल्प का उपयोग कर अपनी विद्युत व्यवधान संबंधी शिकायतें दर्ज कर आसानी से निराकरण करा सकते हैं। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए अपने मोबाइल में कंपनी के व्हाटसऐप नंबर 07552551222 को सेव कर मैसेज “Hi” लिखकर भेजें एवं आगामी संदेशों का पालन करें। इसी प्रकार प्ले स्टोर एवं ऐप स्टोर के माध्यम से उपाय ऐप को डाउनलोड कर एवं उसके उपयोग से भी अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकते है। कंपनी के पोर्टल portal.mpcz.in पर जाकर एलटी सर्विसेज पर क्लिक करें उसके उपरांत कंपलेंट पर क्लिक करें तथा आगामी निर्देशों का पालन करें अथवा 1912 पर कॉल कर आईवीआरएस के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने कहा है कि बिजली कार्मिक विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें तथा कोई कार्मिक बिना परमीशन के अवकाश पर न जाए। यदि अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। आंधी, तूफान और बारिश के दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमेनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखें। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाए रखें। 

उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री  परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री  परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा  अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए  संजय वास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण वास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप वास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन का आयोजन किया जाये

भोपाल मध्यप्रदेश टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं शासी निकाय की बैठक प्रमुख सचिव वन  संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक में टाइगर फाउण्डेशन समिति की 21वीं बैठक का अनुमोदन किया गया। बैठक में वन्य एवं वन्य-जीव संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं प्रस्तावों की समीक्षा की गई। संरक्षित क्षेत्रों, वन मण्डलों में वन्य-जीव संरक्षण, आवास विकास, मानव वन्य-जीव संघर्ष न्यूनीकरण, अनुसंधान, अध्ययन, जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन के साथ ब्लैकबक कैप्चर ऑपरेशन से संबंधित कार्यों के लिये लगभग 22.79 करोड़ की राशि के प्रस्ताव स्वीकृत किये गये। समिति के वर्ष 2026-27 के वार्षिक कार्य-योजना (एपीओ) का भी अनुमोदन किया गया। साथ ही टाइगर फाउण्डेशन समिति की 22वीं बैठक की कार्यसूची के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रमुख सचिव  यादव ने कहा कि टाइगर फाउण्डेशन समिति की बैठक हर 3 माह में आयोजित की जाये। उन्होंने कहा कि इससे कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता आयेगी।  यादव ने कहा कि वन्य-जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूकता बढ़ाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर चरवाहा सम्मेलन आयोजित करने पर बल दिया गया। बैठक में जिन कार्यों की स्वीकृति दी गई है, उन्हें नियमानुसार गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-जीव डॉ. समीता राजौरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास), अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव)  एल. कृष्णमूर्ति एवं संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान बैठक में उपस्थित रहे। अपर पुलिस महानिदेशक एवं अध्यक्ष टाइगर सेल, सदस्य सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक माधव राष्ट्रीय उद्यान, मुख्य वन संरक्षक, वन वृत्त सागर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, क्षेत्र संचालक कान्हा, बाँधवगढ़, पेंच और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व वर्चुअली शामिल हुए।  

PM स्वनिधि योजना को घर-घर पहुंचाने की तैयारी, 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान

प्रदेश में पीएम स्वनिधि योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिये 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान जिला स्तर पर स्वनिधि महोत्सव और नगरीय निकायों में लगेंगे लोक कल्याण मेले प्रदेश में 10 लाख से अधिक पथ विक्रेता हुए लाभान्वित भोपाल  प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने देश में एक गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की है। राज्य शासन, नगरीय निकायों तथा ऋणदाता संस्थाओं के समर्पित प्रयासों एवं सक्रिय सहयोग से प्रदेश में अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को सफलतापूर्वक लाभान्वित कर उनके स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया जा चुका है। इस योजना की पहुँच को अंतिम छोर तक और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के समस्त क्षेत्रों में 01 जून 2026 से विशेष अभियान संचालित किया जा रह है, जो 30 जून तक चलेगा। जिला स्तर होंगे 'स्वनिधि महोत्सव' अभियान के अंतर्गत जिला मुख्यालयों पर “स्वनिधि महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा।महोत्सव में पीएम स्वनिधि योजना के सफल लाभार्थियों तथा उनके परिवारजनों की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों, उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियों का उत्सव मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफल वेंडर्स को सम्मानित करना तथा योजना से जुड़े सभी संबंधित हितधारकों के मध्य इसके प्रति और अधिक व्यापक जागरूकता का संचार करना है। नगरीय निकायों में सजेंगे 'लोक कल्याण मेले' नगरीय निकाय स्तर पर “लोक कल्याण मेलों” के माध्यम से 'पथ विक्रेताओं के लिए सेवाएँ आपके द्वार' की पावन संकल्पना का क्रियान्वयन किया जाएगा। इन मेलों के माध्यम से जरूरतमंद वेंडर्स को वित्तीय, सामाजिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिये बिना गारंटी के 15 हजार रूपये तक की आसान ऋण सुविधा, न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता, क्रेडिट कार्ड एवं डिजिटल लेनदेन के लिए प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही बैंकर्स एवं पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित कर अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सुलभ कराई जाएगी तथा 'नगरीय निकाय सहायता केंद्रों' के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी सुनिश्चित किया जाएगा। सेन्सस टाउन में 'स्वनिधि कैंप' से अंत्योदय की परिकल्पना अभियान में सेन्सस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” का आयोजन कर दूरस्थ व अर्द्धें-शहरी क्षेत्रों में निवासरत पथ विक्रेताओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विशेष शिविरों के माध्यम से छूटे हुए और नए पथ विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें योजना की जानकारी दी जाएगी। ऋण स्वीकृति के लिए उनके पंजीयन की त्वरित कार्यवाही पूरी की जाएगी जिससे कोई भी पात्र वेंडर लाभ से वंचित न रहे।  

डीजीपी कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

भोपाल देशभक्ति, अनुशासन और जनसेवा के मूल्यों से ओतप्रोत 78वें नव आरक्षकों ने मंगलवार को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में कठिन प्रशिक्षण के उपरांत भव्य दीक्षांत परेड के माध्यम से अपनी दक्षता, अनुशासन और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने बतौर मुख्य अतिथि परेड की सलामी ली तथा खुली जिप्सी में सवार होकर परेड का निरीक्षण किया। लगभग एक वर्ष के कठिन, अनुशासित एवं बहुआयामी प्रशिक्षण के उपरांत 983 नव आरक्षक विधिवत रूप से मध्यप्रदेश पुलिस की मुख्यधारा में शामिल हुए, जिनमें 787 महिला एवं 196 पुरुष नव आरक्षक सम्मिलित हैं। दीक्षांत समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण)  रवि कुमार गुप्ता, पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष कुमार सिंह, पुलिस महानिरीक्षक इंदौर ग्रामीण जोन  अनुराग, पुलिस महानिरीक्षक विसबल इंदौर  चंद्रशेखर सोलंकी, पुलिस महानिरीक्षक आरएपीटीसी इंदौर  धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, उप पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) पुलिस मुख्यालय  मनीष कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक इंदौर ग्रामीण  राजेन्द्र कुमार वर्मा, सेनानी प्रथम वाहिनी  अभिषेक आनंद, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार,  दिनेश चंद्र सागर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं पुलिस परिवारजन उपस्थित रहे। समारोह को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन सभी नव आरक्षकों के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने परेड के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह दीक्षांत परेड प्रदेश के प्रशिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सबसे बड़े एवं प्रभावशाली पासिंग आउट समारोहों में से एक है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थान की उपलब्धियों, उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था तथा देश के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल होने पर संस्थान के अधिकारियों एवं प्रशिक्षण स्टाफ को बधाई दी। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी शक्ति उसके हथियार, अधिकार अथवा कानून नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है। जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आता है तो वह केवल कानूनी सहायता नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और न्याय की अपेक्षा लेकर आता है। यह विश्वास किसी नियम पुस्तिका से नहीं मिलता, बल्कि पुलिसकर्मी के व्यवहार, कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण से अर्जित होता है। उन्होंने कहा कि आज अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक अपराधी डिजिटल माध्यमों, मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक एवं स्मार्ट पुलिसिंग के इस युग में पुलिसकर्मी को केवल शारीरिक रूप से सक्षम होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, मानसिक रूप से संतुलित, निर्णयक्षम और नैतिक रूप से दृढ़ होना भी आवश्यक है। प्रशिक्षण भले ही आज पूर्ण हो रहा हो, लेकिन सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्दी शक्ति का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का प्रतीक है। वर्दी अधिकार अवश्य देती है, लेकिन उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी भी देती है। समाज पुलिसकर्मी को उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और चरित्र से पहचानता है। वर्दी की वास्तविक प्रतिष्ठा उसके अधिकार में नहीं, बल्कि उसे पहनने वाले व्यक्ति के आचरण और संवेदनशीलता में निहित होती है। डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का लक्ष्य केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक आधारित, जनसहभागी, पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार पुलिस व्यवस्था का निर्माण करना है। हमारा उद्देश्य मध्यप्रदेश पुलिस को देश की सबसे आधुनिक, संवेदनशील और विश्वसनीय पुलिस संस्थाओं में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलवाद जैसी गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती को समाप्त कर मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश पुलिस एवं सभी सुरक्षा बलों को बधाई दी। डीजीपी ने साइबर अपराध और नशे को समाज एवं युवा पीढ़ी के सामने उभरती दो सबसे बड़ी चुनौतियां बताते हुए कहा कि ये ऐसे शत्रु हैं जो दिखाई कम देते हैं लेकिन समाज को भीतर से खोखला कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में चलाए गए ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का व्यापक आंदोलन था। उन्होंने नव आरक्षकों से इस अभियान को आगे बढ़ाने और समाज को सुरक्षित एवं नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े मानव समागमों में से एक है। सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और तकनीकी समन्वय में पुलिस की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज प्रशिक्षण पूर्ण कर रहे अनेक नव आरक्षक उस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।  मकवाणा ने कहा कि ईमानदारी, संवेदनशीलता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति एवं उत्कृष्ट चरित्र ही एक सफल पुलिसकर्मी की पहचान है। उन्होंने सभी नव आरक्षकों से प्रशिक्षण के दौरान ली गई शपथ को जीवनभर स्मरण रखने और मध्यप्रदेश पुलिस के मूल मंत्र ‘देशभक्ति-जनसेवा’ को अपने आचरण से चरितार्थ करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रशिक्षुओं के अभिभावकों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्य को केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया है। उनके संस्कार, त्याग और विश्वास का ही परिणाम है कि आज उनके बेटे-बेटियां इस गौरवपूर्ण अवसर का हिस्सा बने हैं। उत्कृष्ट प्रशिक्षण और नवाचारों का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव पुलिस अधीक्षक पीटीसी इंदौर मती वाहनी सिंह ने अपने प्रतिवेदन में बताया कि पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर देश के प्रतिष्ठित आरक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली द्वारा इसे दो बार देश के सर्वश्रेष्ठ आरक्षक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। संस्थान में अब तक 77 बुनियादी प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से 27 हजार से अधिक आरक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस सेवा में योगदान दे चुके हैं। आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, साइबर जागरूकता, हार्टफुलनेस, वात्सल्य छात्रावास, किलकारी झूलाघर, पर्यावरण संरक्षण एवं अन्य नवाचारों के माध्यम से संस्थान पुलिस प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित कर रहा है। सांस्कृतिक संध्या में झलकी भारतीय संस्कृति, प्रतिभा और रचनात्मकता दीक्षांत समारोह के पूर्व 08 जून को पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में 78वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र के समापन अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया गया। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य एवं विशेष पुलिस … Read more

रियल-टाइम ग्रिड प्रबंधन से बढ़ेगी उत्पादन दक्षता

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत उत्पादन क्षेत्र में तकनीकी आधुनिकीकरण और ग्रिड प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की  सिंगाजी ताप विद्युत गृह, दोंगलिया के सभी विद्युत उत्पादन इकाइयों में केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के नवीनतम निर्देशों के अनुरूप उन्नत Deviation Settlement Mechanism (DSM) System को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया गया है। यह प्रणाली विद्युत गृह को वास्तविक समय में ग्रिड की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सटीक, त्वरित एवं प्रभावी ढंग से संचालन करने में सक्षम बनाएगी। इसके साथ ही पॉवर जनरेटिंग कंपनी राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने, निर्धारित विद्युत उत्पादन के अनुपालन और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा चुकी है। इस उपलब्धि पर मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि, “डीएसएम विद्युत उत्पादन कंपनियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रणाली है। सटीक पूर्वानुमान, स्मार्ट जनरेशन प्रबंधन तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग में इसकी भूमिका निर्णायक है। इस उन्नत का सफल क्रियान्वयन न केवल ग्रिड संतुलन को और मजबूत करेगा, बल्कि कंपनी को आधुनिक, दक्ष एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्युत उत्पादन प्रणाली विकसित करने में भी यहां भूमिका निभाएंगी।” क्या होता है DSM सिस्टम विद्युत उत्पादन क्षेत्र में केवल बिजली उत्पादन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड के साथ उसका संतुलित समन्वय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इसी उद्देश्य से केन्द्रीय नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2024 में Deviation Settlement Mechanism (DSM) Regulations लागू किए गए हैं। DSM एक ऐसी नियामकीय व्यवस्था है, जिसके माध्यम से निर्धारित (Scheduled) एवं वास्तविक (Actual) विद्युत उत्पादन अथवा उपभोग के बीच होने वाले अंतर की निगरानी और प्रबंधन किया जाता है। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रिड अनुशासन को सुदृढ़ करना तथा विद्युत प्रणाली को सुरक्षित, स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखना है। डीएसएम प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उत्पादन इकाइयों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप संचालन के लिए सक्षम बनाती है। इससे ग्रिड स्थिरता में सुधार, परिचालन दक्षता में वृद्धि, डीएसएम शुल्कों में कमी तथा नियामकीय अनुपालन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। वर्तमान समय में जब नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और ग्रिड संचालन अधिक जटिल होता जा रहा है, ऐसे में उन्नत डीएसएम प्रणाली आधुनिक विद्युत गृहों के लिए एक अनिवार्य तकनीकी उपकरण के रूप में उभर रही है।  सिंगाजी ताप विद्युत गृह में स्थापित उन्नत डीएसएम सिस्टम के माध्यम से अब ग्रिड फ्रीक्वेंसी, घोषित क्षमता (Declared Capacity), शेड्यूल्ड जनरेशन (Scheduled Generation) तथा वास्तविक विद्युत उत्पादन की लाइव मॉनिटरिंग एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। नियंत्रण कक्ष में स्थापित बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन पर उपलब्ध यह जानकारी संचालन अभियंताओं को त्वरित निर्णय लेने, उत्पादन को ग्रिड की आवश्यकताओं के अनुरूप समायोजित करने तथा संभावित विचलनों को न्यूनतम रखने में बेहद मददगार साबित होगी।  

जनकल्याणकारी गतिविधियों से संबंधित कार्यक्रम होंगे आयोजित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 9 जून का दिन विशेष महत्व का है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष के निरंतर कार्यकाल का आज के बाद रिकॉर्ड बनने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी को मंत्रि-परिषद की ओर से बधाई देते हुए कहा कि इस उपलब्धि के लिए 5 से 21 जून तक प्रदेश में कल्याणकारी गतिविधियों से संबंधित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदेश के एक लाख संविदा कर्मचारी-अधिकारियों की 4.5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर ने उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग जनकल्याण एवं उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाहा को जन्म दिवस की मंगलकामनाएं दीं। प्रत्येक विकासखंड और नगरीय निकायों पर लगेंगे जनकल्याण शिविर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2026 तक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 5 जून 2026 विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रत्येक विकास खण्ड, नगरीय निकायों में "एक पेड मां के नाम" अभियान संचालित किया गया। अभियान में प्लास्टिक अपशिष्ट की सफाई एवं शासकीय कार्यालयों, स्कूल एवं छात्रावास में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। अभियान के अंतर्गत 12 से 18 जून 2026 की अवधि में जिले के प्रत्येक विकास खण्ड, नगरीय निकाय मुख्यालयों पर जनकल्याण शिविर आयोजित होंगे। इनमें केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के छूटे हुए पात्र लाभार्थियों के पंजीकरण किए जायेंगे। शिविर 03 दिवसीय होगा। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 19 एवं 20 जून 2026 को प्रत्येक जिले में 2 स्थानों पर कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अन्य अनुभवी व्यक्तियों द्वारा प्रदर्शन तथा व्याख्यान सहित प्राकृतिक खेती कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2026 प्रत्येक विकासखण्ड और नगरीय निकायों में स्थानीय योग समूह के सहयोग से मनाया जाऐगा। स्थानांतरण की समय-सीमा 15 जून तक ही रहेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने स्थानांतरण के लिए 15 जून की समय-सीमा निर्धारित की है। सभी विभाग 15 जून तक स्थानांतरण नीति का पालन करते हुये स्थानांतरण की कार्यवाही पूरी कर लें। समय-सीमा नहीं बढ़ेगी। सोलर रूफटॉप को करें प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में प्रदेश में अब तक 2 लाख से अधिक उपभोक्ता नामांकित हो चुके है। अगले 6 माह में 6 लाख से अधिक नामांकन करना है। मार्च 2027 तक घरों की छत पर पीएम सूर्य घर योजना का लाभ लेकर सोलर सिस्टम लगवाने वाले उपभोक्ताओं को निर्धारित सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को अपने-अपने प्रभार के जिलों में अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ने के लिए प्रयास करने के निर्देश दिए। लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों को प्रदेश से 3 हजार 835 करोड़ रूपए का हुआ निर्यात मुख्यमंत्री डॉ. यदव ने बताया कि 6 जून 2026 को इंदौर में आयोजित भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश फोरम-2026 में लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को प्रदेश में निवेश, उत्पदान और नवाचार के लिये आमंत्रित किया। वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश का लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन देशों को निर्यात बढ़कर 3 हज़ार 835 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष से 19 प्रतिशत अधिक है। इसमें फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र की विशेष भूमिका रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया‍कि इंदौर में आयोजित फोरम में 15 देशों के व्यापार प्रतिनिधि के साथ भारत में उरुग्वे, पेरू, पनामा रिपब्लिक, अल-सल्वाडोर, क्यूबा और ग्वाटेमाला के राजदूत और गुयाना के हाई कमिश्नर शामिल हुये। उर्वरक के लिए हर जिले में नियुक्त करें नोडल अधिकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष कमजोर मानसून के पूर्वानुमान और खाड़ी में युद्ध की स्थिति के कारण उर्वरक की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है। खाड़ी की वर्तमान स्थिति को देखते हुये उर्वरक की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उर्वरक की उपलब्धता की स्थिति के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी और एक मोबाइल नंबर स्थापित करने के निर्देश दिए। नीति आयोग की बैठक 11 जून को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नई दिल्ली में 11 जून को नीति आयोग की बैठक "इन्क्लूसिव हृयूमन डेव्हलपमेंट फॉर विकसित भारत @ 2047" थीम पर रखी गई है। मिशन GYAN – गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी इन सभी के समग्र विकास के लिये कार्य किया जाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया‍कि आगामी वर्ष युवा वर्ष होगा, सभी विभाग युवाओं पर केंद्रित योजनाएं बनाए।  

22 लाख महिलाओं का शौर्य! ‘शौर्या दल’ को 2030-31 तक जारी रखने पर MP कैबिनेट की मुहर

शौर्या दल 22 लाख महिलाओं की देश की सबसे बड़ी साइलेंट आर्मी एमपी कैबिनेट ने दी वर्ष 2030-31 तक निरंतरता को मंजूरी भोपाल  मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों की गलियों से गुज़रते हुए अगर आपको साड़ी का पल्लू संभाले या कॉलेज का बैग टांगे महिलाओं की कोई टोली दिखाई दे, तो उन्हें सिर्फ राहगीर समझने की भूल मत कीजिएगा। यह मध्यप्रदेश की 'शौर्या दल' सेना है—बिना वर्दी के समाज की वो 'गार्डियन' जो आज देश में महिला सशक्तिकरण की सबसे बुलंद हुंकार बन चुकी है ,जिसने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को कागजों से निकालकर धरातल पर साकार कर दिखाया है। वर्ष 2013  में महज़ 6 जिलों से शुरू हुआ यह कारवां आज प्रदेश के कोने-कोने में फैल चुका है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसे अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) तक लगातार जारी रखने का महत्वपूर्ण फैसला किया है। अपराध पर 'प्री-एंट्री बैन': पुलिस से पहले पहुंचती है यह 'जाबांज टोली' शौर्या दल की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि ये अपराध होने के बाद मोमबत्तियां नहीं जलातीं, बल्कि अपराध होने से पहले ही उसकी कमर तोड़ देती हैं। किसी घर में घरेलू हिंसा की सुगबुगाहट हो, किसी गांव में गुपचुप बाल विवाह मंडप सज रहा हो, या कोई संदिग्ध मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) का जाल बुन रहा हो—शौर्या दल का खुफिया नेटवर्क तुरंत एक्टिव हो जाता है। 15 से 45 वर्ष की ये जांबाज महिलाएं पुलिस और कानून के हस्तक्षेप से पहले अपनी 'सामुदायिक समझाइश' के ब्रह्मास्त्र से बड़े-बड़े मामलों को शांति से सुलझा देती हैं। 22 लाख से अधिक की 'साइलेंट आर्मी', जहां किशोरी और गृहणी हैं एक साथ यह देश का शायद सबसे अनोखा और विशाल सामाजिक नेटवर्क है, जिसमें वर्तमान में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और बेटियाँ सीधे तौर पर जुड़ी हैं। इस दल की खूबसूरती देखिए—एक तरफ जहां 7.64 लाख कॉलेज और स्कूल जाने वाली नई पीढ़ी की लड़कियां अपने तकनीकी और आधुनिक विचारों के साथ इसमें शामिल हैं, वहीं दूसरी तरफ 14.88 लाख अनुभवी गृहणियां और बुजुर्ग महिलाएं हैं, जो समाज की विविधताओं से भलीभाँति परिचित हैं। युवा जोश और अनुभव जब एक मंच पर आता है, तो दकियानूसी सोच और नकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण को घुटने टेकने ही पड़ते हैं। आदिवासी अंचलों से शहरों तक हक की हुंकार महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक की महिलाओं को अपनी बंदिशें तोड़कर खुलकर सांस लेने का मौका दिया है। आज ये शौर्या दल सिर्फ सुरक्षा कवच नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर महिलाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करने का जरिया बन चुके हैं। महिलाएं अब सिर्फ सरकारी योजनाओं की कतारों में खड़ी नहीं होतीं, बल्कि अपने मौलिक अधिकारों के लिये लड़ना सीख चुकी हैं। देश के लिए नया रोल मॉडल बना 'मध्यप्रदेश' शौर्या दल ने यह साबित कर दिया है कि असली महिला सशक्तिकरण तब आता है जब चाबी खुद महिलाओं के हाथ में सौंप दी जाए। समाज की नकारात्मक सोच और रूढ़ियों पर प्रहार करता मध्यप्रदेश का यह 'शौर्या मॉडल' आज पूरे देश के सामने एक मिसाल है, जो यह संदेश देता है कि जब महिलाएं खुद अपनी और समाज की रक्षक बन जाएं, तो बदलाव को आने से कोई नहीं रोक सकता।।