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गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के पांचवे संस्करण का हुआ शुभारंभ

ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ रोमांचक साहसिक गतिविधियों का मिलेगा आनंद भोपाल ऑल सीजन टेंट सिटी के साथ जल, नभ और थल पर आधारित साहसिक गतिविधियों का प्रमुख आकर्षक गंतव्य 'गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट' के पांचवें संस्करण का मंदसौर जिले के गांधीसागर जलाशय के सुरम्य बैकवाटर पर शुभारंभ हुआ। एमपी टूरिज्म बोर्ड और लल्लूजी एंड सन्स एवं इवोक कैंपिंग के सहयोग से आयोजित यह रिट्रीट पर्यटकों को चंबल के शांत जल विस्तार और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांच और सुकून का अनूठा अनुभव प्रदान करेगा। रिट्रीट में पर्यटक हाई रोप, ज़िपलाइन, एटीवी राइड, साइकलिंग, डुओ साइकिल, एयरगन शूटिंग और पैरामोटरिंग जैसी साहसिक और रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। पर्यटक स्पीड बोट, जेट स्कीइंग, बनाना बोट, ड्रैगन बोट और कयाकिंग का भी रोमांच ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त जंगल सफारी, नाइट वॉक, स्टार गेज़िंग, बोट सफारी, बोट स्पा, योग एवं वेलनेस सत्र तथा इनडोर खेलों की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। गरोठ विधायक श्री चंदर सिंह सिसोदिया और कलेक्टर श्री दिव्यांक सिंह ने रिट्रीट का औपचारिक शुभारंभ किया। स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा प्रोत्साहन रिट्रीट के माध्यम से पर्यटकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं, पारंपरिक जीवनशैली और स्थानीय व्यंजनों से परिचित कराने के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएगे। वर्ष 2023 में शुरू हुआ गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट अपने पांचवें संस्करण के साथ क्षेत्र में प्रकृति-आधारित एवं साहसिक पर्यटन को नई दिशा दे रहा है। गांधीसागर की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से आतिथ्य, परिवहन, खानपान और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट प्राकृतिक सौंदर्य, साहसिक गतिविधियों, लग्जरी प्रवास और सांस्कृतिक अनुभवों का संगम है, जो मध्यप्रदेश को अनुभवात्मक एवं जिम्मेदार पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। गांधीसागर तक सुगम पहुँच: प्रमुख शहरों से सड़क व रेल संपर्क गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट देश-प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा सुलभ है। इंदौर से लगभग 250 से 300 किलोमीटर की दूरी सुगम राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के माध्यम से निजी वाहन, टैक्सी अथवा नियमित बस सेवाओं से 4 से 6 घंटे में तय की जा सकती है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक नागदा या भवानी मंडी जंक्शन उतरकर वहाँ से स्थानीय परिवहन ले सकते हैं। वहीं, राजधानी भोपाल से लगभग 333 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे में पूरा किया जा सकता है। भोपाल से ट्रेन द्वारा आने वाले यात्री निकटतम रेलवे स्टेशनों—भवानी मंडी (55 किमी), मंदसौर (70 किमी) या नीमच (115 किमी) तक पहुँचकर वहाँ से टैक्सी अथवा बस द्वारा आसानी से गांधीसागर पहुँच सकते हैं।  

मध्यप्रदेश पुलिस का विशेष यातायात अभियान संपन्न

54 हजार से अधिक लापरवाह वाहन चालकों पर कार्रवाई 3 लाख से अधिक नागरिकों एवं विद्यार्थियों को किया सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भोपाल सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को रोकने और सुरक्षित यातायात संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया गया प्रदेशव्यापी विशेष प्रवर्तन एवं जन-जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पुलिस मुख्यालय, भोपाल एवं पुलिस परिवहन एवं शोध संस्थान (PTRI) के निर्देशन में 10 दिनों तक संचालित इस अभियान में नियमों के उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के दौरान प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों, विभिन्न सार्वजनिक एवं शैक्षणिक स्थानों पर कुल 2,582 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें विद्यार्थियों तथा अन्य नागरिकों सहित लगभग 3 लाख 15 हजार 483 लोगों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रमों के माध्यम से हेलमेट एवं सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग सहित सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए नागरिकों को प्रेरित किया गया। स्थानीय टीवी चैनलों के माध्यम से भी प्रचार-प्रसार गतिविधियों के जरिए यातायात नियमों के पालन का संदेश प्रसारित किया गया। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोट एवं मृत्यु की आशंका को कम करने के लिए दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट तथा चार पहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों द्वारा सीटबेल्ट के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। अभियान के दौरान हेलमेट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालान बनाए गए, जिनसे 1 करोड़ 23 लाख 85 हजार 300 का समन शुल्क वसूला गया। इसी प्रकार सीटबेल्ट का उपयोग नहीं करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध चालान बनाए गए तथा 61 लाख 40 हजार 852 का समन शुल्क वसूल किया गया। इस प्रकार हेलमेट एवं सीटबेल्ट के नियमों का उल्लंघन करने पर कुल 54 हजार 767 चालान बनाए गए और 1 करोड़ 85 लाख 26 हजार 152 का समन शुल्क वसूल किया गया। यातायात नियमों की लगातार अवहेलना करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए 1,812 प्रकरणों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए जाने के लिए परिवहन विभाग (RTO) को प्रस्ताव भेजे गए। इससे स्पष्ट है कि अभियान का उद्देश्य केवल मौके पर चालानी कार्रवाई तक सीमित न रहकर नियमों के लगातार उल्लंघन पर प्रभावी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी रहा। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस विशेष अभियान के माध्यम से प्रवर्तन और जन-जागरूकता को साथ लेकर सड़क सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। सुरक्षित यातायात केवल पुलिस की कार्रवाई से नहीं, बल्कि प्रत्येक सड़क उपयोगकर्ता के जिम्मेदार व्यवहार से सुनिश्चित होता है। इसी उद्देश्य से नागरिकों और विशेषकर युवा वर्ग को हेलमेट, सीट बेल्ट तथा अन्य यातायात नियमों के नियमित पालन के लिए प्रेरित किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि दोपहिया वाहन चलाते समय मानक एवं गुणवत्तापूर्ण हेलमेट अनिवार्य रूप से धारण करें तथा चार पहिया वाहन में यात्रा करते समय सीट बेल्ट का सदैव उपयोग करें। वाहन चलाते समय गति सीमा सहित सभी यातायात नियमों का पालन करें और स्वयं के साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। सुरक्षित यातायात व्यवहार को दैनिक जीवन की आदत बनाकर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जन हानि को रोकने में सहभागी बनें।  

विशेष अभियान की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की समीक्षा, आवेदनों के संधारण एवं ऑनलाइन प्रविष्टि के दिए निर्देश

भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी म.प्र. संजीव कुमार झा ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी उप जिला निर्वाचन अधिकारियों से चर्चा कर नए एवं छूट गए  पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए संचालित विशेष अभियान की समीक्षा की। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झा ने निर्देश दिए कि विशेष अभियान अन्तर्गत आयोजित शिविरों को प्रभावी एवं सार्थक बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक नए मतदाताओं से फॉर्म-6 प्राप्त किए जा सकें। उन्होंने शिविरों में प्राप्त आवेदनों की जानकारी का व्यवस्थित संधारण करने तथा उन्हें ऑनलाइन दर्ज करने के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। मध्यप्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में नए एवं वंचित पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के उद्देश्य से विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि “कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।” भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश के निर्देशन में अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। बैठक में जिलेवार जानकारी के संकलन एवं समीक्षा, फॉर्म-6 के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की जांच तथा सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भी चर्चा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी म.प्र. श्री आर.पी.एस. जादौन, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री राजेश यादव एवं श्री वीरेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

परीक्षाओं में नकल पर सख्ती, मध्यप्रदेश के 4 महानगरों में विशेष अदालतें

मध्यप्रदेश शासन ने परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिये सख्त कदम उठाते हुए चार महानगरों मे किया फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तत्काल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के दिये थे आदेश मध्यप्रदेश फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करने वाला देश का बना सबसे पहला राज्य फास्ट ट्रैक न्यायालयों के लिए विशेष अभियोजकों की हुई नियुक्ति भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के फैसले के बाद मध्यप्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार और उच्च न्यायालय द्वारा राज्य में पेपर लीक और नकल से जुडे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए चार विशेष अदालतों का गठन किया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करने वाला भारत का सबसे पहला राज्य मध्यप्रदेश बन गया है। विशेष फास्ट ट्रेक कोर्ट परीक्षाओं मे नकल रोकने के लिए बनाई गई त्वरित जाँच/कानूनी प्रणाली या उडनदस्तों से संबंधित है। इन फास्ट-ट्रैक अदालतों को चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर मामले का निपटारा (ट्रायल पूरा) करने का लक्ष्य दिया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट मे पैरवी विशेष अभियोजक करेंगें। संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व मे एसआईटी का गठन किया गया है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, और जबलपुर महानगरों में बनाई जायेगी, जिनका कार्यक्षेत्र निर्धारित किया गया है। भोपाल : भोपाल मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिलों के मामलों की सुनवाई करेगी। इंदौर : इंदौर में फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास और आसपास के मालवा-निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी। ग्वालियर : ग्वालियर मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिलों का अधिकार क्षेत्र इसके पास है। जबलपुर : जबलपुर मे फास्ट-ट्रेक विशेष न्यायालय के अंर्तगत जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल और महाकौशल/बुंदेलखंड के अन्य जिलों के मामले यहां सुने जाएंगे। राज्य शासन ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की है। विशेष अभियोजक इन प्रकरणों में साक्ष्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण, गवाहों के समुचित प्रबंधन और न्यायालयीन पैरवी पर विशेष ध्यान देंगे। इससे मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने में सहायता मिलेगी। राज्य शासन का यह प्रयास मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों के मामलों में प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।  

अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में ‘पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास’ पर संगोष्ठी का शुभारंभ

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति संरक्षण के लिए कृतज्ञता के भाव से समाज में ऐसी मान्यताएं स्थापित कीं, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। पृथ्वी को माँ मानने की मान्यता हमारे देश की विशिष्ट संस्कृति को दर्शाती है। प्रकृति से उतना ही ग्रहण करना चाहिए, जितना आवश्यक हो। उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ प्रकृति को लौटाने का भाव भी निरंतर बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। यही भारतीय दर्शन और विचार का मूल आधार है। संगोष्ठी में विभिन्न विषयविद, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। उच्च शिक्षा मंत्री परमार अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल एवं मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विद्यमान मान्यताओं के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को व्यापकता के साथ समाज के सामने लाने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण की भावना केवल विचारों और चर्चाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार में उतारना होगा। प्लास्टिक का उपयोग न करने जैसे पर्यावरण-अनुकूल व्यवहारों को जनजीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता के साथ व्यक्तिगत आचरण में भी बदलाव लाना होगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों और प्राध्यापकों की है। वे स्वयं अपने आचरण में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना अपनाएं, ताकि विद्यार्थी भी इन मूल्यों को आत्मसात कर सकें। संपूर्ण समाज को समझना होगा कि भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति और विकास के प्रयासों के कारण वन संपदा नष्ट न हो। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना समय की आवश्यकता है। माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ संगोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देव आनंद हिंडोलिया ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कुलसचिव श्रीमती स्वाति वशिष्ठ एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. चित्रलेखा सोनी (कड़ेल) ने अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. अनिल कोठारी ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की महत्ता पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्रों में पर्यावरणीय चुनौतियों पर विमर्श संगोष्ठी के प्रथम दिवस दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रो. रविन्द्र कान्हेरे ने बीज वक्तव्य किया। प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. गौतम ने पर्यावरण की वैश्विक दृष्टि पर विचार रखे, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निदेशक डॉ. विद्यार्थी ने पर्यावरण के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा प्रकृति के प्रति उत्तरदायी जीवनशैली के महत्व पर विमर्श को प्रोत्साहित करना है। कुलसचिव श्रीमती स्वाति वशिष्ठ ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।  

अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में खोन और कुटियाट्टम से जीवंत हुई रामकथा

काव्य-मानस में शुक्रवार को आमजन को मिलेगा मंच, श्रीरामचंद्र-केंद्रित भजन, गान, कविता एवं रचनाएँ प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर भोपाल संस्कृति विभाग और श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा रवींद्र भवन परिसर में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ के चौथे दिन दर्शकों को भारत और थाईलैंड की समृद्ध नाट्य परंपराओं के माध्यम से श्रीरामकथा के विविध प्रसंग देखने को मिले। इस अवसर पर यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर में शामिल थाईलैंड के 'श्री रामाकेन दल' ने पारंपरिक मुखौटों और मुद्राओं के साथ रामाकिएन पर आधारित मारीच-प्रसंग, सीता-हरण तथा राम-रावण युद्ध का जीवंत मंचन किया। केरल की दो हज़ार वर्ष पुरानी शास्त्रीय परंपरा 'कुटियाट्टम' शैली में शक्तिभद्र-रचित संस्कृत नाटक ‘आश्चर्यचूड़ामणि’ के चतुर्थ अंक ‘जटायुवधम्’ की सशक्त प्रस्तुति दी गई। कुटियाट्टम केंद्र (केरलम) और 'नेपथ्य' संस्था के कलाकारों ने रावण-जटायु संवाद, युद्ध और जटायु के सर्वोच्च बलिदान के मार्मिक दृश्य को पारंपरिक मुद्राओं और भावपूर्ण अभिनय से साकार किया। मंच पर रावण की भूमिका मार्गी मधु चाक्यार, जटायु की भूमिका नेपथ्य राहुल चाक्यार और सीता की भूमिका नेपथ्य आरती ने निभाई, जबकि मिझावु और इडक्का वाद्यों की संगत ने दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। संचालक (संस्कृति) एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विविध कला-विधाओं के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों को आमजन, विशेष रूप से युवाओं तक पहुँचाना है। उत्सव के अंतर्गत तीन दिवसीय 'कौशलेय की वन-गमन गाथा' कथा-वाचन (स्टोरीटेलिंग) सत्र का भी शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र में अलवर के श्री अंकित अवस्थी ने 'श्रीरामचंद्र वन-गमन पथ' पर अपने विचार रखते हुए युवा पीढ़ी (Gen-Z) को रामायणकालीन संस्कृति से जोड़ने और चित्रकूट के त्याग, मर्यादा व पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। इसके उपरांत मुंबई की सुश्री अमि गणात्रा ने 'वाल्मीकि के हनुमान – बुद्धिमताम् वरिष्ठम्' विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पष्ट किया कि वाल्मीकि रामायण में श्रीहनुमान को केवल बाहुबली ही नहीं, बल्कि अपार बौद्धिक क्षमता, संवाद-कुशलता और वेद-व्याकरण के ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उत्सव के पाँचवें दिन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से रवींद्र भवन के अंजनी सभागार में ‘काव्य-मानस’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें श्रीराम पर केंद्रित भजन, कविता, गान और दोहे प्रस्तुत करने के लिए आमजन निःशुल्क सहभागिता कर सकते हैं। इससे पहले प्रातः 11 बजे 'राम-लेखन कला' (टाइपोग्राफी) कार्यशाला होगी। सायं 5 बजे कथा-वाचन सत्र में श्री संदीप द्विवेदी एवं आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज का व्याख्यान होगा। इसके बाद सायं 7 बजे से कर्नाटक की 'यक्षगान' और ओडिशा की 'ओडिसी' नृत्य-शैली में रामकथा का भव्य मंचन किया जाएगा।  

राज्यपाल पटेल ने नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का किया उदघाटन

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया है कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, वह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि भर नहीं है। यह देश के विकास की अमूल्य निधि है। दीक्षांत भावी जीवन की नई जिम्मेदारियों और नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव है। राज्यपाल पटेल गुरूवार को ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के द्वादश (12वें) दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में आप सबने जो सीखा है, उन्हें आचरण में भी उतारें। राज्यपाल ने कहा कि अपने ज्ञान का उपयोग कृषि की ऐसी व्यवस्था में करें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर भावी पीढ़ियों का भविष्य संवारे। दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदकों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि दिनेश कुलकर्णी, विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, प्रमंडल के सदस्यगण, कुलसचिव अजय कौशल एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मंचासीन थे। इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे तथा जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि कृषि शिक्षा की सार्थकता देश की मिट्टी, जल, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के संरक्षण के साथ करोड़ों किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करने में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। बदलाव के इस दौर में विज्ञान, तकनीक और नए विचारों के सहारे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। जलवायु परिवर्तन, घटती जोत, मिट्टी की सेहत और जल संकट जैसी वर्तमान चुनौतियों के समाधान खोजकर उत्पादन की अस्थिरता को खत्म करना होगा। राज्यपाल पटेल ने कृषि विद्यार्थियों से कहा कि उनकी प्रतिभा की परीक्षा प्रयोगशाला के शोध पत्रों में नहीं अपितु ड्रोन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव तकनीक जैसी आधुनिक विधियों को खेतों तक ले जाने में है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों से कहा कि कृषि शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान से जोड़कर किसानों की खुशहाली के लिये नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि फास्ट फूड के सेवन से बचें। मिलेट्स (मोटे अनाज) को अपने भोजन में प्रमुख स्थान दें। स्वस्थ रहकर ही सफल जीवन के साथ-साथ समाज और  देश के निर्माण में योगदान दिया जा सकता हैं। राज्यपाल पटेल ने उपाधि प्राप्त सभी विद्यार्थियों को बधाई तथा शुभकामनायें दीं। उन्होंने विद्यार्थियों में शिक्षा, प्रतिभा और समर्पण से कृषि क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर विकसित भारत के संकल्प को गति देने का भरोसा भी जताया। समारोह के विशिष्ट अतिथि कुलकर्णी ने कहा कि खेती केवल व्यवसाय ही नहीं, हमारी संस्कृति की जीवन पद्धति भी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में समाहित पंच महाभूतों के साथ सामंजस्य स्थापित कर किसानों को खेती के लिये प्रोत्साहित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। दीक्षांत समारोह में कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने दीक्षोपदेश दिया। विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन और विश्वविद्यालय में हुए उन्नत कृषि के नवाचारों की जानकारी दी।  दीक्षांत समारोह में गत 01 अक्टूबर 2025 से 30 सितम्बर 2026 के बीच उपाधि पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक के 345, स्नातकोत्तर के 294 एवं पीएचडी के 27 विद्यार्थियों सहित कुल 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि शामिल हैं। कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थापित यूनिट का किया शुभारंभ राज्यपाल पटेल ने गुरुवार को कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित सीएआईई (एग्रीकल्चर इंक्यूबेशन एण्ड एंटरप्रेन्योरशिप) में नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन का उदघाटन किया। जैविक उत्पादों एवं खाद्य प्रसंस्करण पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल पटेल को बताया गया कि सेंट्रल प्रोसेसिंग लाइन यूनिट में फूड प्रोसेसिंग और जैविक उत्पादों का प्रशिक्षण स्थानीय किसानों, एफपीओ तथा कृषि विद्यार्थियों को दिया जायेगा।  यूनिट की स्थापना राज्य शासन, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय एवं नाबार्ड के सहयोग से की गई है। चीफ जनरल मैनेजर नाबार्ड श्रीमती एस. सरस्वती भी मौजूद थी।  

भरत यादव ने सचिव जनसंपर्क विभाग का कार्यभार ग्रहण किया

भोपाल भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी भरत यादव ने गुरुवार को मंत्रालय,वल्लभ भवन में सचिव जनसंपर्क विभाग का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उप सचिव कैलाश बुन्देला ने  यादव का स्वागत किया। नवागत सचिव श्री भरत यादव ने विभागीय कार्यों की जानकारी भी ली तथा आवश्यक निर्देश दिये।विभाग के कर्मचारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल का संदेश: ‘डिग्री के साथ संस्कार मिले, तभी सार्थक है शिक्षा’

ग्वालियर  शिक्षा तभी सार्थक होती है जब डिग्री संग छात्र संस्कारी हो। साथ ही उसकी शिक्षा का उपयोग उसके लिए तो हो ही, साथ ही समाज को भी लाभ मिले और समाज में बदलाव आए। यह बात प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने राजमाता विजायराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में छात्रों व मौजूद गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कही। दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना है। शोध और नवाचार की सार्थकता भी तभी है, जब उसका लाभ प्रयोगशालाओं और पुस्तकों से निकलकर खेतों तक पहुंचे और किसान से लेकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन बेहतर बनाए। समारोह को समारोह के विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने भी संबोधित किया। दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को उपाधि मिली। चार छात्रों को स्वर्ण पदक दिए गए। साथ ही तीन छात्रों को सरताज बहादुर सिन्हा स्मृति पुरस्कार दिए गए।  

भोपाल में होगा भारतीय सेना का ऐतिहासिक राष्ट्रीय समारोह

आपकी सेना–आपके पास" थीम के साथ सेना के शौर्य और सामर्थ्य का साक्षी बनेगा भोपाल भोपाल मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार भोपाल में भारतीय सेना के राष्ट्रीय स्तर का गौरवशाली आयोजन होने जा रहा है, जो प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि और गर्व का अवसर होगा। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि यह समारोह देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को करीब से जानने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, नागरिकों में राष्ट्रभक्ति, सैन्य सेवाओं के प्रति सम्मान और देश की सुरक्षा के प्रति जागरूकता का भाव सुदृढ़ करेगा। आगामी 15 जनवरी 2027 को भोपाल में आयोजित होने वाले भारतीय सेना दिवस के राष्ट्रीय समारोह को लेकर गुरुवार को मंत्री सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम स्थित मेजर ध्यानचंद हॉल में उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, खेल और युवा कल्याण विभाग, संस्कृति सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय सैन्य आयोजनों को दिल्ली से बाहर देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय सेना ने भोपाल में सेना दिवस समारोह आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस आयोजन की मुख्य थीम "आपकी सेना–आपके पास" रखी गई है, जो भारतीय सेना और आम नागरिकों के बीच आत्मीय जुड़ाव को और मजबूत करेगी। भोपाल के विभिन्न स्थलों पर दिखेगा भारतीय सेना का सामर्थ्य सेना दिवस-2027 के अवसर पर भोपाल के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर मुख्य परेड के साथ अनेक भव्य एवं रोमांचक कार्यक्रम होंगे। बीएचईएल स्थित कालीबाड़ी मार्ग में मुख्य आर्मी-डे परेड आयोजित होगी, जिसमें भारतीय सेना के अनुशासित दस्तों और सैन्य सामर्थ्य का भव्य प्रदर्शन होगा। टीटी नगर स्टेडियम, भोपाल में शौर्य संध्या ‘रणहुंकार’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें आड़ा-खड़ा और भगोरिया जैसे पारंपरिक लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं जंबूरी मैदान में भारतीय सेना के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का स्टेटिक एवं डायनेमिक डिस्प्ले होगा। नागरिकों को आधुनिक सैन्य प्रणालियों को करीब से देखने तथा उनकी कार्यक्षमता और संचालन को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े तालाब के वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में इंटीग्रेटेड कॉम्बैट डिस्प्ले के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमता, रणनीतिक कौशल और समन्वित सैन्य कार्रवाई का प्रदर्शन किया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े मुख्य कार्यक्रम और तिथियां 1 नवंबर 2026 (मध्य प्रदेश स्थापना दिवस) से मेरी माटी अभियान की शुरुआत होगी, जिसके तहत विभिन्न जिलों से मिट्टी एकत्रित कर शौर्य स्मारक में संकल्प वृक्ष लगाया जाएगा। सेना दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत 9 जनवरी 2027 से होगी। 9 से 12 जनवरी के बीच सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी, लाइव डेमो और एयर-शो/वाटर स्पोर्ट्स बड़ा तालाब, अटल पथ, जंबूरी मैदान में की जाएगी। 15 जनवरी सेना दिवस पर मुख्य परेड भोपाल के भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर होगी। साथ ही टीटी नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम देशभक्ति से ओतप्रोत शौर्य संध्या (रणहुंकार) का आयोजन किया जाएगा। पहली बार शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में दिखेगा सेना दिवस का भव्य आयोजन भोपाल में आयोजित होने वाला यह राष्ट्रीय समारोह इसलिए भी विशेष है, क्योंकि आर्मी-डे परेड किसी सैन्य छावनी तक सीमित नहीं रहकर शहर के सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी। सेना के विभिन्न दस्तों, टैंकों, ड्रोन और अत्याधुनिक सैन्य प्रणालियों के प्रदर्शन से नागरिकों को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक और सामरिक क्षमताओं को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक चंचल शेखर, संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव, अपर सचिव (खेल एवं युवा कल्याण) अजय श्रीवास्तव, भारतीय सेना के पश्चिम मध्यप्रदेश सब एरिया के मेजर जनरल विकास लाल, कर्नल सुब्रत मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।