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सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा होगी हाईटेक, RPF ने मांगे 4500 जवान, ड्रोन और 700 CCTV कैमरे

उज्जैन  उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मेगा प्लान तैयार कर लिया है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवान, डॉग स्क्वॉड, ड्रोन और 700 हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की मांग का प्रस्ताव भेजा गया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लेकर सभी फ्लैग स्टेशनों तक चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जाएगी। RPF थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान उज्जैन मुख्य रेलवे स्टेशन पर दो डॉग स्क्वॉड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, मोहनपुरा, पंवासा, चिंतामन और विक्रमनगर में बन रहे फ्लैग स्टेशनों पर एक-एक डॉग स्क्वॉड की तैनाती रहेगी। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक ड्रोन भी तैनात किया जाएगा, जो आसमान से पूरे क्षेत्र की निगरानी करेगा। इसके साथ ही 700 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों की मांग की गई है, जिन्हें सभी स्टेशनों पर लगाया जाएगा, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि कैमरों की नजर से बच न सके। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवानों की मांग का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है। इसीलिए पड़ी जरूरत सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इनमें से अधिकांश श्रद्धालु ट्रेनों के माध्यम से उज्जैन पहुंचेंगे। रेलवे इस दौरान 7800 विशेष ट्रेनों के संचालन की योजना बना रहा है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए RPF और जीआरएपी दोनों ने अतिरिक्त बल की मांग की है। जीआरएपी भी है तैयार उज्जैन जीआरएपी ने भी 6000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग का प्रस्ताव भेजा है। फ्लैग स्टेशन परिसरों में अस्थायी थाने स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक थाने में 100 पुलिसकर्मी 24 घंटे, सातों दिन (24×7) शिफ्ट के आधार पर तैनात रहेंगे। सिंहस्थ 2028 सुरक्षा प्लान • अतिरिक्त RPF बल – 4500 जवान • डॉग स्क्वॉड – उज्जैन स्टेशन पर 2, बाकी फ्लैग स्टेशनों पर 1-1 • ड्रोन – हर स्टेशन पर 1 • CCTV – 700 अत्याधुनिक कैमरे • GRP बल – 6000 अतिरिक्त जवान • स्पेशल ट्रेनें – 7800 प्लान 

डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार से नव निर्माण तक : 2.5 वर्षों में लोक निर्माण विभाग की कार्य पद्धत्ति में आया ऐतिहासिक परिवर्तन डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग हर सड़क, हर परियोजना में गुणवत्ता का संकल्प भोपाल कभी सड़क और भवन निर्माण तक सीमित समझा जाने वाला मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आज नवाचार, तकनीकी आधुनिकीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व तथा लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के मार्गदर्शन में पिछले 2.5 वर्षों के दौरान विभाग ने केवल अधोसंरचना निर्माण ही नहीं किया, बल्कि कार्यप्रणाली में ऐसे परिवर्तनकारी सुधार लागू किए हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट सोच रही है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि वह पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी, तकनीकी दक्षता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इसी सोच को आधार बनाकर लोक निर्माण विभाग ने अनेक अभिनव पहलें शुरू की हैं। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मॉडल : लोक कल्याण सरोवर सड़क निर्माण कार्यों के दौरान आवश्यक मिट्टी एवं मुरम की खुदाई को विभाग ने पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी बनाने का अभिनव निर्णय लिया। अब “लोक कल्याण सरोवर” विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में विभाग द्वारा 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर निर्मित किए गए, जिन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं हुआ। इन सरोवरों के लिए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर विशेष डिजिटल मॉड्यूल विकसित किया गया है, जो निर्माण स्थलों के समीप ऐसे स्थानों की पहचान करता है जहाँ वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। यह पहल जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सड़कों से भूजल संवर्धन की नई पहल जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट की चुनौती को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सड़क किनारे “ग्राउंड वाटर रिचार्ज बोर” निर्माण की अभिनव योजना प्रारंभ की है। प्रत्येक किलोमीटर पर रिचार्ज बोर विकसित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 840 किलोमीटर लंबाई की सड़कों पर लगभग 1000 रिचार्ज बोर निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल सीधे धरती के भीतर पहुंच सकेगा। ग्रीन बिल्डिंग की दिशा में निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में सभी नवीन शासकीय भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों एवं ऊर्जा दक्षता सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 1500 से अधिक अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा GRIHA काउंसिल के साथ समझौता कर भवन निर्माण को राष्ट्रीय ग्रीन मानकों से जोड़ा गया। वर्षा जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन अब प्रत्येक नए भवन निर्माण का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं।  लोकपथ एप लोक निर्माण विभाग द्वारा 2 जुलाई 2024 को शुरू किया गया “लोकपथ मोबाइल ऐप” नागरिक सहभागिता आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़क संबंधी शिकायतों की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सीधे विभाग तक पहुंचा सकते हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए चार दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।     आज यह प्लेटफॉर्म केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन का प्रतीक बन चुका है। हजारों शिकायतों का त्वरित निराकरण कर विभाग ने जनविश्वास को मजबूत किया है। तकनीक आधारित औचक निरीक्षण : गुणवत्ता पर शून्य समझौता गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने देश में अपनी तरह की अनूठी सॉफ्टवेयर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है। प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को सॉफ्टवेयर द्वारा रैंडम तरीके से चयनित 35 परियोजनाओं का निरीक्षण किया जाता है। अब तक लगभग 980 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 77 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए, 28 को ब्लैकलिस्ट किया गया, 16 कंसल्टेंट्स को नोटिस दिए गए, एक को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा 105 अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले 38 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा भी प्राप्त हुई। यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि विभाग में गुणवत्ता और जवाबदेही पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 14 मंडलीय प्रयोगशालाओं को 61 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। साथ ही 14 मोबाइल प्रयोगशालाएं भी शुरू की गई हैं, जो निर्माण स्थल पर ही गुणवत्ता परीक्षण कर सकती हैं। 25 निजी प्रयोगशालाओं को भी एम्पैनल किया गया है जिससे स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित हो सके। बिटुमिन गुणवत्ता सुधार का बड़ा निर्णय प्रदेश की सड़कों की दीर्घकालिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने बिटुमिन की खरीद केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों—आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल से ही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जीआईएस आधारित डिजिटल क्रांति भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से विभाग ने 71 हजार 210 किलोमीटर सड़कों, 2 हजार 975 भवनों और 1 हजार 426 पुलों का जियो-टैग्ड सर्वेक्षण पूरा किया है। अब प्रत्येक परिसंपत्ति डिजिटल मानचित्र पर उपलब्ध है। इसी आधार पर रोड नेटवर्क मास्टर प्लान, बजट मॉड्यूल, डीपीआर मॉड्यूल तथा परियोजनाओं के वैज्ञानिक समय निर्धारण जैसे अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे योजना निर्माण अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख हुआ है।  अभियंताओं की क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान विभाग ने पहली बार 1700 से अधिक अभियंताओं का प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन (Training Need Assessment) कर व्यापक क्षमता निर्माण ढांचा विकसित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 जनवरी 2026 को इसके साथ प्रशिक्षण कैलेंडर, लोक कल्याण सूचकांक और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौतों का शुभारंभ किया।  प्रदेश का पहला इंजीनियर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट लोक निर्माण विभाग के इतिहास में पहली बार एक समर्पित इंजीनियरिंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ETRI) की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित यह संस्थान केवल लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी निर्माण विभागों के अभियंताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।    पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने यह सिद्ध किया है कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यदि तकनीक, पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन विकास … Read more

मोहन सरकार का प्रशासनिक सर्जरी प्लान! CMO में नई टीम, 15 अफसरों के तबादले संभव

भोपाल  मध्यप्रदेश के 3 प्रमुख सचिव (पीएस), 2 संभागायुक्त और 10 कलेलटरों पर तबादले की तलवार लटकी है। कभी भी इनके तबादले किए जा सकते हैं। ये सभी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ है, इनमें से 75 फीसद पहले से नई पदस्थापना की जुगत में हैं तो, कुछ को सरकार बदलने का मन बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिवों में अमित राठौर, गुलशन बामरा और सोनाली पोंकशे वायंगंकर का नाम बताया जा रहा है। इनके पास क्रमश: वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभाग है। जहां पर ये दो साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पदों पर नए सिरे से जमावट की सुगबुगाहट है। हाल में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि उनका काम किसी युवा आइएएस को दिया जा सकता है। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के पास इलैया राजा टी और कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे दो युवा सचिव हैं। बीते बुधवार को भी 29 IAS का हो चुका है तबादला बता दें कि बीते बुधवार सरकार ने 29 आइएएस का तबादला किया था, जिनमें से 20 फीसद आइएएस को बदलने की जिम्मेदारी ऐन वक्त पर ली गई। अभी भी आइएएस खेमे में कुछ नामों के बदलाव के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। कई अफसरों से अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए गए। पशुपालन में पीएस, खादी बोर्ड में आएंगे नए एमडी आइएएस माल सिंह जून माह में सेवानिवृब होंगे। वे फिलहाल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी है, जबकि जुलाई में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृब हो रहे हैं। वे पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव है। इन दोनों ही आइएएस के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके पास मौजूद जिम्मेदारी किसी अन्य आइएएस (MP Transfer cmo) को देनी होगी। तबादलों को हर बार चुनौती देते हैं हजारों शासकीय सेवक तबादलों के बाद अब 1000 से अधिक मामलों में स्थगन की आशंका है। मध्यप्रदेश के 75 फीसद विभागों ने इससे बचने के लिए हाईकोर्ट जबलपुर समेत हाईकोर्ट की दोनों खंडपीठ में केविएट दायर कर दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बार तबादलों के बाद हजारों की संख्या में शासकीय सेवक कोर्ट चले जाते हैं और तबादलों को चुनौती दे देते हैं। एक विभाग प्रमुख ने बताया कि जो तबादले (MP Transfer IAS Transfer) प्रशासकीय आधार पर किए जाते हैं, उनमें स्थगन की स्थिति कई बार बनती है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते इस साल पहले ही न्यायालयों में केविएट लगा दी है। ताकि स्थगन से पहले विभाग को भी पक्ष रखने का मौका मिल सके। पूर्व में इन कमियों के कारण शासकीय सेवकों को आसानी से स्थगन मिल गए, बाद में ऐसे प्रकरण लंबे चलते हैं और स्थगन खारिज कराना मुश्किल हो जाता है। स्थगन मिला तो विभागाध्यक्षों को करनी पड़ती है सुनवाई कानून मामलों के जानकारों का कहना है कि स्थगन स्थाई नहीं होते, बल्कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित शासकीय सेवक को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। यह सुनवाई तबादला (MP Transfer IAS Transfer CMO Transfer) करने वाले विभाग के प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे संबंधित शासकीय सेवक के तर्कों से संतुष्ट न हों तो तबादला यथावत रखते हैं। ये कमिश्नर, जिन्हें बुलाने की तैयारी  मनोज खत्री, ग्वालियर- कब से पदस्थ- 29 जून 2024 सुरभि गुप्ता, शहडोल – कब से पदस्थ – 18 नवंबर 2024 ये पीएस, जिनकी बदल सकती है जिम्मेदारी (MP Transfer PS) अमित राठौर, वाणिज्य कर – कब से पदस्थ – 25 जनवरी 2024 गुलशन बामरा, जनजातीय कार्य – कब से पदस्थ – 12 नवंबर 2024 सोनाली पोंकशे वायंगंकर, सामाजिक न्याय – कब से पदस्थ 12 अगस्त 2024 इन कलेक्टर्स को वापल बुला सकती है सरकार (MP Transfer of Collectors) कलेक्टर – जिला – कब से पदस्थ     रुचिका चौहान- ग्वालियर – 11 नवंबर 2024     केदार सिंह – शहडोल – 13 अगस्त 2024     गिरीश मिश्रा – राजगढ़ – 12 अगस्त 2024     रिजू बाफना – शाजापुर – 5 जनवरी 2024     अदिति गर्ग – मंदसौर – 29 जुलाई 2024     पार्थ जायसवाल – छतरपुर – 6 अगस्त 2024     मृणाल मीना – बालाघाट – 12 अगस्त 2024     हर्षल पंचोली – अनूपपुर – 13 अगस्त 2024     हिमांशु चंद्रा – नीमच – 13 अगस्त 2024     किरोड़ीलाल मीना – भिंड – 16 फरवरी 2024

महंगे पेट्रोल से परेशान गिग वर्कर्स का बड़ा फैसला, इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाकर बढ़ाई कमाई

 ग्वालियर पीठ पर भारी – भरकम डिलीवरी बैग, माथे पर पसीने की बूंदें और दिल में पेट्रोल के मीटर को देखकर बढ़ती धडकऩे…। ये आज के देशभर की सड़कों का कड़वा सच है। वहीं, बात करें मध्य प्रदेश के ग्वालियर की तो शहर में अचलेश्वर मंदिर की चौखट से लेकर महाराज बाड़े की तंग और व्यस्त गलियों तक जो युवा शहर की रफ्तार बने हुए थे, उनके बजट को भी पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने हिलाकर रख दिया है। आलम ये है कि, कमाई 'सेंटीमीटर' में सिमटती चली जा रही है और पेट्रोल के खर्च 'किलोमीटर' की रफ्तार से भागते चले जा रहा है, लेकिन ग्वालियर के बड़ी आबादी के युवाओं ने भी हार मानने के बजाय एक 'स्मार्ट' ऑप्शन खोज निकाला है। ईंधन की इस बेलगाम बढ़ती आग से बचने के लिए शहर के करीब 60 फीसदी गिग वर्कर्स ने पेट्रोल को 'बाय – बाय' कह दिया है और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की राह थाम ली है। जुगाड़ और स्मार्ट वर्क का नया फॉर्मूला ग्वालियर की इस गिग इकोनॉमी का पूरा गणित ही बदलकर रख दिया है। शहर में 750 से अधिक गिग वर्कर्स एक्टिव हैं, जो रोजाना डिलिवरी पहुंचाते हुए 50 से 80 किलो मीटर तक की यात्रा शहर के भीतर ही तय कर लेते हैं। दिनभर में 7 से 8 ऑडर्स निपटाने और प्रति ऑर्डर 50 से 100 रुपए कमाने वाले इन युवाओं के लिए पेट्रोल का खर्च एक गहरा आर्थिक घाव बन रहा था। ऐसे में उन्होंने तीन बड़े बदलाव किए हैं। बाइक को कहा अलविदा, ई-स्कूटर का स्वागत कई युवाओं ने अपनी पुरानी पेट्रोल बाइक बेच दी और बची – खुची जमा पूंजी से डाउन पेमेंट देकर नया ई-स्कूटर घर ले आए। किराए की सवारी का सहारा जो युवा नया वाहन खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकते, वे अब किराए की ई – बाइक लेकर रोजाना की पेट्रोल की मार से खुद को बचा रहे हैं। लंबी दूरी को सीधे 'नो' अब आंख मूंदकर ऑडर्स नहीं उठाए जा रहे। युवाओं ने 'फिल्टरिंग' शुरू कर दी है। लंबी दूरी के ऑडर्स को छोड़कर कम दूरी वाले ट्रिप्स से ईंधन और समय का संतुलन बिठाया जा रहा है। रोजगार का बढ़ता ग्राफ और चुनौती… रोजगार कार्यालय के उप संचालक (रोजगार) पवन कुमार भिवटे कहते हैं कि, ग्वालियर में गिग वर्कर्स का काम तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक सिंगल रोजगार मेले से ही कंपनियों को 20 – 25 युवा मिल जाते हैं और सालभर में 200 से ज्यादा युवा इस क्षेत्र से जुड़ रहे हैं। चूंकि, इनका पूरा काम दोपहिया वाहन पर ही टिका है, इसलिए पेट्रोल का महंगा होना सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर रहा है। पेट्रोल की टंकी जेब खाली कर रही थी शहर के एक गिग वर्कर श्याम कुमार ने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि, पहले बाइक से ही दिनभर भागदौड़ होती थी, लेकिन जब पेट्रोल के दाम बजट से बाहर होने लगे तो ईवी ही एकमात्र रास्ता बचा। मैं रोजाना करीब 8 पार्सल डिलीवर करता हूं और हाल ही में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर शिफ्ट हुआ हूं, जिससे अब कुछ बचत हो पाती है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखण्डता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी 23 जून से 6 जुलाई तक का पखवाड़ा डॉ. मुखर्जी को होगा समर्पित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को निधन 23 जून 1953 को हुआ, जिसे राष्ट्रहित में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विशेष व्यवस्था के विरोध में आंदोलन किया था, उनका बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, चिंतक, सांसद और दूरदर्शी राजनेता थे। डॉ. मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने वैचारिक राजनीति और संगठन निर्माण पर बल दिया और राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का संदेश दिया। डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से उनकी जयंती 6 जुलाई तक विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों के महापौर तथा नगरपालिका अध्यक्ष को मुख्यमंत्री निवास से वी.सी. के माध्यम से संबोधित कर यह निर्देश दिए। जनसेवा का अभियान हो पखवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। पखवाड़े के दौरान युवा सम्मेलन, निबंध प्रतियोगिता और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा मार्गों और उद्यानों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जा सकता है। इस प्रकार की पहल के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन, आवश्यक रूप से किया जाए तथा सक्षम स्तर से सभी स्वीकृतियां अवश्य ली जाएं। पखवाड़ा जनसेवा का अभियान होना चाहिए। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं। यह पखवाड़ा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।  

Insurance Claim पर बड़ा फैसला: बीमारी छिपाने का आरोप लगाने पर बीमा कंपनियों को देना होगा सबूत

भोपाल  अब बीमा कंपनियां केवल यह कहकर क्लेम खारिज नहीं कर सकेंगी कि बीमित व्यक्ति ने अपनी पुरानी बीमारी छिपाई है। उपभोक्ता आयोग ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में आरोप लगाने वाली बीमा कंपनी को ठोस सबूत भी पेश करने होंगे, अन्यथा क्लेम रोकना ‘सेवा में कमी’ माना जाएगा। उपभोक्ता कानून के तहत केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। कंपनी को दस्तावेजी साक्ष्य के साथ यह साबित करना होता है कि बीमारी पहले से मौजूद थी और उसे जानबूझकर छिपाया गया। बीमा दावा खारिज करने के मामलों में कंपनियों की मनमानी पर भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। भोपाल उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (बेंच-2) ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए उपभोक्ता को 1.63 लाख रुपए का क्लेम 7% ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए मुआवजा और वाद व्यय भी देने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि आयोग ने यह फैसला हाल ही में सुनाया है। क्या था पूरा मामला देवास निवासी नसरुद्दीन खान ने वर्ष 2020 में चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से ‘आरोग्य संजीवनी’ पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 29 जुलाई 2020 से 28 जुलाई 2021 तक थी। इस पॉलिसी के लिए उन्होंने 4554 रुपए का प्रीमियम जमा किया था। बीमा अवधि के दौरान 12 जून 2021 को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें भोपाल के फ्यूचर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां 7 दिन इलाज चला और कुल 1,63,156 रुपए का खर्च आया। इलाज के बाद किया क्लेम, कंपनी ने टालमटोल की परिवादी ने अस्पताल में भर्ती होने की सूचना तत्काल बीमा कंपनी को दी और सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ क्लेम भी प्रस्तुत किया। इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक क्लेम पर कोई निर्णय नहीं लिया। कई बार फोन और व्यक्तिगत संपर्क करने के बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया। बीमा कंपनी ने 27 जुलाई 2022 को पत्र जारी कर दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रस्तुत दस्तावेज गलत और मनगढ़ंत हैं। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि बीमित ने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारी छिपाई थी, जो नियमों का उल्लंघन है। उपभोक्ता आयोग में पहुंचा मामला क्लेम खारिज होने के बाद परिवादी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने 1.63 लाख रुपए की क्लेम राशि के साथ 18% ब्याज, 2 लाख रुपए क्षतिपूर्ति और 20 हजार रुपए वाद व्यय की मांग की। उनका कहना था कि उन्होंने कोई जानकारी नहीं छिपाई और कंपनी ने गलत तरीके से दावा निरस्त किया। कंपनी ने समय-सीमा का उठाया मुद्दा बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि परिवाद देरी से दायर किया गया है और इसलिए यह स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने पुनः यही तर्क दिया कि पॉलिसी लेते समय बीमारियों की जानकारी छिपाई गई थी। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों, बिल, जांच रिपोर्ट और डिस्चार्ज समरी का परीक्षण किया। इससे स्पष्ट हुआ कि परिवादी वास्तव में बीमार था और अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया गया था। इलाज में खर्च की गई राशि भी दस्तावेजों से प्रमाणित हुई। बीमा कंपनी आरोप साबित नहीं कर पाई आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने धोखाधड़ी के आरोप तो लगाए, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। न ही कोई ऐसा दस्तावेज दिया गया जिससे यह साबित हो सके कि परिवादी को पहले से बीमारी थी। आयोग ने माना सेवा में कमी आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी का यह कृत्य ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है। बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) पर आधारित होता है, लेकिन जब कंपनी दावा खारिज करती है तो आरोप सिद्ध करना उसी की जिम्मेदारी होती है, जो यहां पूरी नहीं हुई। वहींआयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल देरी के आधार पर उपभोक्ता के अधिकार खत्म नहीं होते। यदि उपभोक्ता लगातार अपने अधिकार के लिए प्रयास कर रहा है, तो देरी को उचित कारण मानकर माफ किया जा सकता है। आदेश: ब्याज सहित क्लेम और मुआवजा दें आयोग ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी दो माह के भीतर परिवादी को 1,63,156 रुपए 7% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा 10,000 रुपए मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षति के लिए और 5,000 रुपए वाद व्यय के रूप में देने होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा। उपभोक्ता आयोग का स्पष्ट रुख उपभोक्ता आयोग ने अपने हालिया फैसले में कहा कि बीमा अनुबंध ‘अत्यंत सद्भावना’ (Utmost Good Faith) के सिद्धांत पर आधारित होता है, लेकिन यदि बीमा कंपनी किसी दावे को धोखाधड़ी बताकर खारिज करती है, तो उस आरोप को प्रमाणित करना उसी की जिम्मेदारी है। बिना सबूत के क्लेम खारिज करना गलत है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद, संरक्षण कार्यों की ली विस्तृत जानकारी

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चीता मित्रों से किया संवाद और चीता संरक्षण की ली जानकारी राष्ट्रपति ने चीता मित्रों के प्रयासों को सराहा ग्वालियर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने दो दिवसीय कूनो नेशनल पार्क के प्रवास के दौरान सोमवार को चीता मित्रों से संवाद कर चीता संरक्षण के प्रयासों की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने चीता मित्रों से चर्चा करते हुए उनके द्वारा चीतों की सुरक्षा और आमजन के बीच चीतों के व्यवहार को लेकर किये जा रहे जन-जागरूकता के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सभी चीता मित्रों से वन-टू-वन चर्चा कर परियोजना के लिए उनके द्वारा मानसेवी रूप से किये जा रहे प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को चीता मित्रों ने अवगत कराया कि कूनो नेशनल पार्क से लगे सभी ग्रामों में चीता मित्र मौजूद है, जिनके द्वारा चीतो की सुरक्षा के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। चीतो के आबादी क्षेत्र में आवागमन की स्थिति पर किये जाने वाले कार्यों के संबंध में सभी को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि स्वभाविक रूप से चीते किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते है। चीता जब आबादी क्षेत्र अथवा खेतों में दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को अवगत कराया जाये, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुँचे। भारत में चीतों की पुनर्बसाहट के लिए यह परियोजना अति महत्वपूर्ण है। इस दौरान चीता मित्र कुलदीप आदिवासी सिलोरी, संग्राम आदिवासी एवं कु. राजनदंनी आदिवासी हथेडी, श्रीमती मल्हा आदिवासी सेसईपुरा, शिवम आदिवासी पालपुर, विनोद आदिवासी पैरा, रामलखन आदिवासी कराहल, लालाराम आदिवासी सेसईपुरा, दौलतराम आदिवासी सेसईपुरा और सतीश आदिवासी मोरावन मौजूद रहें। इस अवसर पर वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव, पीसीसीएफ शुभरंजन सेन, कमिश्नर सुरेश कुमार, आईजी सचिन अतुलकर, कलेक्टर सुशीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल, सीसीएफ उत्तम कुमार, डीएफओ आर थिरूकुराल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहें। उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की पुनर्स्थापन योजना को लगभग साढ़े तीन वर्ष से अधिक का समय हो गया है। नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका एवं बोत्सवाना से चीतों को लाया गया है, वर्तमान में देश में चीतों की संख्या 52 है, जिनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में तथा 03 चीते मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण में मौजूद है। भारत में जन्मे चीतो की संख्या 32 है, चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ रहा है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु चीता मित्रों से संवाद के उपरांत हेलीकॉप्टर से ग्वालियर के लिये रवाना हुई। हेलीपेड पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मीनिस्टर इन वेटिंग एवं जिले के प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने आदरपूर्वक विदाई दी।  

ATS जांच में बड़ा खुलासा! संदिग्ध आतंकी ने उगले राज, मिशन-2047 के तहत सक्रिय था मॉड्यूल

भोपाल  मध्यप्रदेश में आतंकी नेटवर्क के खुलासे के बाद गिरफ्तार किए गए इजहार उल हक ने खुलासा किया है कि ये लोग पाकिस्तानी आतंकी ग्रुप से जुड़े हुए थे और मिशन 2047 पर काम कर रहे थे। एटीएस की जाँच के दौरान आतंकी ने माना है कि सभी आतंकी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स, जैसे-व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान स्थित आकाओं के संपर्क में थे। इनका उद्देश्य देशभर में नेटवर्क खड़ा करना, युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें स्लीपर सेल के रूप में तैयार करना था। इसके तहत पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के एजेंडे को साल 2047 तक देश में लागू करना मुख्य मकसद था। एटीएस के अनुसार, इस एजेंडे का उद्देश्य देश में कट्टर इस्लामिक कानून लागू करना बताया गया है। पूछताछ में इजहार ने बताया कि देशभर में तैयार हो रहे उनके कथित मुजाहिद्दीन समय आने पर एक साथ बाहर आएंगे और शासन को उखाड़ फेंकेंगे। यह भरोसा उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दिलाया था। उन्हें शपथ दिलाई गई थी कि समय आने पर उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करने जैसे काम करने होंगे। इनका मकसद ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ यानी PFI के ‘मिशन-2047’ के लिए काम कर रहे थे। एटीएस के मुताबिक, पीएफआई का मकसद साल 2047 तक देश में इस्लामी कानून लागू करना है। पूछताछ में इजहार उल हक ने बताया है कि वक्त आने पर सभी आतंकी एक साथ बाहर आएँगे और शासन को उखाड़ फेकेंगे। उन्हें टारगेट किलिंग और देश में डर का माहौल पैदा करना है। सदस्यों के काम करने के तरीके पर पूछताछ जारी बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार इजहार उल हक से पूछताछ में कथित नेटवर्क की भूमिका और उसके सदस्यों के काम करने के तरीके को लेकर जानकारी मिली है। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे और किस स्तर तक इसकी गतिविधियां फैली हुई थीं। तमाम जानकारियां हासिल करने के लिए एटीएस ने इजहार को 22 जून तक रिमांड पर लिया हुआ है। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कहा- जिहादी बनो, शहादत मिलेगी फराज से पूछताछ में सामने आए इनपुट के मुताबिक सभी संदिग्ध कथित तौर पर पाकिस्तानी वॉट्सएप ग्रुप के संपर्क में थे। जांच के अनुसार, फराज पाकिस्तानी हैंडलर्स के कहने पर अन्य युवकों को जोड़ने का काम शुरू कर चुका था। इसका मकसद युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करना था। एटीएस की पूछताछ में फराज ने इसकी पुष्टि की है। नईम के संपर्क में रहा था फराज पूछताछ में फराज ने बताया कि वह पिछले 5-6 सालों से देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था। नईम ने ही फराज और बिहार निवासी संदिग्ध आतंकी का परिचय कथित पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था। हैंडलर्स ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के नाम पर प्रभावित किया और वीडियो कॉल के जरिए शपथ दिलाई कि वह सच्चा जिहादी बनेगा। हैंडलर्स द्वारा दिए गए कामों को अंजाम तक पहुंचाएगा और जिहाद के रास्ते पर चलते हुए अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा। भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान के लोगों से संपर्क चारों संदिग्धों ने पूछताछ में टेलीग्राम और वॉट्सएप ग्रुप के जरिए भारत और पाकिस्तान में नेटवर्क से जुड़े सक्रिय लोगों के संपर्क में रहने की बात स्वीकार की है। फराज को सोशल मीडिया ग्रुप में 'खालिद सैफुल्ला' के नाम से जाना जाता था। हैंडलर्स ने कथित तौर पर लोगों में भय पैदा करने और समय आने पर बताए गए टारगेट पर कार्रवाई करने का टास्क दिया था। गौरतलब है कि इजहार उल हक को बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार किया गया था। जबकि मोहम्मद फराज को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उसे खालिद सैफुल्लाह नाम से पाकिस्तानी हैंडलर ने लश्कर कमांडर के तौर पर पेश किया था। उसका काम स्लीपर सेल तैयार करना था। इसी तरह नईम अब्दुल्ला यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया था। वह मोम्मद फराज को ऑनलाइन ग्रुप से जोड़ा था। आरोपितों के पास से संदिग्ध डिजिटल दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई थी, जिसकी फोरेंसिक जाँच चल रही है। फराज को दिए थे पासपोर्ट बनवाने के निर्देश हैंडलर्स ने फराज को पासपोर्ट बनवाने के निर्देश भी दिए थे। उसे भरोसा दिलाया गया था कि किसी अन्य देश के रास्ते पाकिस्तान बुलाया जाएगा, जहां उसे मुजाहिदीन बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एटीएस की दबिश के दौरान फराज के कमरे से मिली जिहादी सामग्री की जांच की जा रही है।

तबादला आदेशों से MSME विभाग में नाराजगी, अब जूनियर अधिकारियों को मिली वरिष्ठों की CR लिखने की जिम्मेदारी

भोपाल  वाणिज्यिक कर विभाग के बाद अब मध्यप्रदेश के एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) विभाग में तबादलों और प्रभार आदेशों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के भीतर आरोप लग रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज कर जूनियर अधिकारियों को बड़े पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस फैसले का विभाग के कई अधिकारी खुलकर विरोध कर रहे हैं। विवाद 15 और 16 जून को जारी हुए प्रभार आदेशों को लेकर है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग ने ऐसी व्यवस्था लागू कर दी है जिसे कर्मचारी "चार्ज के ऊपर चार्ज" की व्यवस्था बता रहे हैं। यानी जिन अधिकारियों का मूल पद सहायक प्रबंधक है और जो वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं, उन्हें जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (डीआईसी) के महाप्रबंधक का प्रभार सौंप दिया गया है। इन अधिकारियों को मिला महाप्रबंधक का प्रभार     सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप     जेपी तिवारी को रीवा     शिवशंकर सिंह को निवाड़ी     सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड     राममूर्ति खरे को अनूपपुर     अजय तिवारी को शिवपुरी     बीएल अहिरवार को दमोह जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है। यही नियुक्तियां पूरे विवाद की मुख्य वजह बनी हुई हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ये सभी अधिकारी प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उन्हें महाप्रबंधक जैसे उच्च पद का प्रभार सौंपा गया है। 60 से ज्यादा राजपत्रित अधिकारी होने के बावजूद नहीं मिला मौका अधिकारियों का कहना है कि विभाग में एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित वर्ष 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद इन अधिकारियों को नजरअंदाज कर प्रभारी प्रबंधकों को महाप्रबंधक का प्रभार देने से विभाग में असंतोष बढ़ गया है। अधिकारियों का सवाल है कि जब नियमित रूप से चयनित और वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं, तो उन्हें जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई। पदोन्नति रोकी, फिर भी बड़े पदों का प्रभार दिया विभाग के भीतर यह भी नाराजगी है कि लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित है। अधिकारियों का कहना है कि एक ओर विभाग पदोन्नति नहीं कर रहा, वहीं दूसरी ओर प्रभारी व्यवस्था के जरिए जूनियर अधिकारियों को वरिष्ठ पदों का प्रभार देकर वरिष्ठता और योग्यता को दरकिनार किया जा रहा है। कई अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था विभागीय पदक्रम और सेवा नियमों के विपरीत है तथा इससे वरिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा। जूनियर अधिकारी लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर विवाद की एक बड़ी वजह गोपनीय चरित्रावली (सीआर) भी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में अब वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी ऐसे अधिकारियों के अधीन काम करेंगे जो मूल रूप से वर्ग-3 सेवा श्रेणी से हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह सेवा संरचना और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिहाज से असामान्य स्थिति है। प्रशासनिक आधार पर उठ रहे सवाल विभाग के भीतर चर्चा है कि यदि नियमित राजपत्रित अधिकारी उपलब्ध हैं, तो फिर प्रभारी व्यवस्था के जरिए उच्च पदों का प्रभार देने के पीछे क्या प्रशासनिक आधार अपनाया गया है। इसी कारण इन आदेशों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विभाग में असंतोष का माहौल इन आदेशों के बाद विभाग के कई अधिकारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वरिष्ठता, योग्यता और चयन प्रक्रिया को महत्व देने के बजाय प्रभार व्यवस्था के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं। इससे विभाग में असंतोष और निराशा का माहौल बन गया है। फिलहाल विभाग की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन प्रभार आदेशों को लेकर चर्चा और विरोध लगातार बढ़ रहा है।

राष्ट्रपति के MP दौरे का समापन, कूनो भ्रमण के बाद ग्वालियर से दिल्ली रवाना; राज्यपाल रहे मौजूद

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्यप्रदेश के भ्रमण के उपरांत 22 जून को सुबह 10.35 बजे वायुसेना के विमान से ग्वालियर से दिल्ली रवाना हुईं। राष्ट्रपति श्योपुर जिले के कूनों से प्रात: 9.15 बजे हैलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा ग्वालियर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आए। ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सिकरवार ने विदाई दी। विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, डीजी होमगार्ड सुश्री प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायु सेना के अधिकारी उपस्थित थे। कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण, चीता परिवार को नजदीक से देखा। कूनो नेशनल पार्क के दो दिवसीय दौरे पर आई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को सुबह चीता सफारी से कूनो के जंगल का भ्रमण किया। उन्होंने चीता और उनके शावकों को नजदीक से देखा। राष्ट्रपति ने सफारी के बाद आदिवासी समाज के चीता मित्र, सफारी ड्राइवर और गाइड से बातचीत की। प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों ने श्योपुर जिले की पहचान से जुड़े उपहार भी राष्ट्रपति को भेंट किए हैं। कुछ ही देर में वह कूनो से प्रस्थान करेगी।