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महिला आयोग का चेयरपर्सन पद खाली, मध्यप्रदेश में 26 हजार मामले पेंडिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग में करीब 26 हजार मामले पेंडिंग होने के बावजूद आयोग के अध्यक्ष का पद करीब 6 साल से खाली पड़ा है. राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है और उन्होंने आश्वासन दिया कि वह जल्द ही इस पद को भरने के लिए कदम उठाएंगी.  मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर  सरकार ने हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में कहा कि 1 जनवरी, 2024 से इस वर्ष 20 जून के बीच राज्य में बलात्कार के 10 हजार 840 मामले दर्ज किए गए, जबकि 21 हजार 175 महिलाएं एक महीने से अधिक समय तक लापता रहीं.  आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर दिन बलात्कार के लगभग 20 और महिलाओं के लापता होने के 38 मामले दर्ज किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग सात सदस्यीय पैनल है, जिसमें छह सदस्य सरकार से बाहर के होते हैं और एक सरकार द्वारा नियुक्त होता है. इसके अध्यक्ष का पद जनवरी 2019 से रिक्त है.सागर की वर्तमान लोकसभा सदस्य लता वानखेड़े 1 जनवरी 2016 से 2019 तक इसकी अध्यक्ष थीं.  इसके बाद यह पद लगभग एक साल तक रिक्त रहा और 16 मार्च 2020 को कमलनाथ के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस नेता शोभा ओझा को पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया. हालांकि, चार दिन बाद, 20 मार्च 2020 को कमलनाथ सरकार गिर गई. बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने आयोग के अध्यक्ष के रूप में ओझा की नियुक्ति रद्द कर दी. इसके बाद शोभा ने इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया. हाई कोर्ट ने 22 मई 2020 को अपने आदेश में पद के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा. ओझा ने बाद में जून 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार पर उन्हें काम नहीं करने देने और बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाते हुए पद से इस्तीफा दे दिया. न्यूज एजेंसी से बात करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा, "राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का पद निश्चित रूप से लंबे समय से खाली है और मैं इसे जल्द से जल्द भरने के लिए आवश्यक कदम उठाऊंगी."  उन्होंने यह भी कहा कि पद से संबंधित मामला अदालत में लंबित है, जो इस कदम में एक बाधा है. भूरिया ने स्वीकार किया कि पद खाली रहने के कारण कई शिकायतें लंबित हैं और फैसलों में देरी हो रही है. ओझा ने राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया, "इतने लंबे समय से खाली पड़ा यह महत्वपूर्ण पद दर्शाता है कि यह सरकार महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील है." उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मध्य प्रदेश शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है. आज भी महिलाएं मेरे पास शिकायत लेकर आती हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी हर संभव मदद करती हूं."

और सिंधिया होंगे मौजूद रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव ग्वालियर में, 29 अगस्त से दो दिन तक आयोजन

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और ग्वालियर–चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्वालियर में 29 एवं 30 अगस्त को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, तथा पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी की विशेष उपस्थिति होंगी। राज्यमंत्री लोधी ने बताया कि मध्य प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के साथ–साथ पर्यटन व्यवसायियों, टूर ऑपरेटर्स और होटल इंडस्ट्री के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की जा रहा है। ग्वालियर के पर्यटन श्रेत्र में निवेश को नया आयाम मिलेगा। 'टाइमलेस ग्वालियर: इकोज ऑफ कल्चर, स्पिरिट ऑफ लेगेसी' थीम पर आधारित ये कॉन्क्लेव पर्यटन निवेश, सांस्कृतिक धरोहर, अनुभवात्मक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।   प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि कॉन्क्लेव में होटल, रिसोर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (एलओए) प्रदान किए जाएंगे, एमओयू एवं अनुबंध होंगे। इन परियोजनाओं से स्थानीय समुदाय को पर्यटन आधारित रोजगार प्राप्त होगा और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व के साथ बल मिलेगा। क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण घाेषणाएं होंगी। विशेष पर्यटन प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के विविध पर्यटन स्थलों, पर्यटन इकाइयों, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम स्टे, रिसॉर्ट्स, हैंडलूम/हैंडीक्रॉफ्ट, साहसिक गतिविधियों और सांस्कृतिक धरोहरों को समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे।  प्रमुख सचिव शुक्ला ने बताया कि रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में दो महत्वपूर्ण सत्र होंगे। “टूरिज्म इज अ कल्चरल ब्रिज– ब्रांडिंग ग्वालियर एंड हार्टलैंड ऑफ एमपी” विषय पर पैनल डिस्कशन होगा। इसमें ग्वालियर की सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की रणनीतियों पर विचार होगा। दूसरा पैनल डिस्कशन 'ग्वालियर एंड चंबल राइजिंग– इनबाउंड अपील थ्रू हेरिटेज, लग्जरी एंड एक्सपीरियंस' विषय पर केंद्रित होगा, इसमें विरासत, लग्जरी स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा।  

महू में होगा रण संवाद 2025, सेनाओं में नवाचार और रणनीति पर चर्चा

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार देश की तीनों सेनाओं द्वारा युद्ध पद्धति में नवाचार और रणनीतिक विमर्श को लेकर राष्ट्रीय स्तर का रण संवाद 2025 आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को महू के सैन्य संस्थान में होगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister in MP) 27 की शाम कोमध्यप्रदेश में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके साथ सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नेवी चीफ एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह भी उपस्थित रहेंगे। वहीं देशभर के अन्य सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे। इसको लेकर महू शहर के आर्मी क्षेत्र की मुख्य माल रोड को भी बंद किया गया है। कार्यक्रम के तहत 25 से 27 अगस्त तक यह मार्ग पूर्णत: बंद रहेगा। वहीं ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई चौराहा होते हुए चाकू चौराहे से मंडलेश्वर की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। यह है कार्यक्रम देशभर में पहली बार ट्राय-सर्विस सेमिनार रणसंवाद का आयोजन किया जाएगा। जिसकी शुरुआत महू से हो रही है। इसमें विशेष रूप से थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इसमें युद्ध, युद्धनीति और युद्ध-लड़ाई पर तकनीक का प्रभाव विषय पर बातचीत होगी। जिसमें प्रतिष्ठित कमांडर, रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि विचार साझा करेंगे। इसमें युद्ध पद्धति में नवाचार व नई तकनीकों पर विचार विमर्श होगा। विचार विमर्श भविष्य के लिए सशस्त्र बल तैयार करने, युद्ध के अभ्यासियों के लिए अद्वितीय मंच उपलब्ध कराने, शिक्षा जगत और रक्षा उद्योग की सक्रिय भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने को ध्यान में रखकर किया जाएगा। महू के यह मार्ग होंगे बंद आयोजन के तहत महू सेना द्वारा महू में तैयारियां की जा रही है। इसको लेकर महू यातायात पुलिस ने ट्रफिक प्लान भी बनाया है। ट्रैफिक सूबेदार विनोद यादव ने बताया कि 25, 26 और 27 को माल रोड को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इसमें आंबेडकर जन्मभूमि स्मारक के पास राम मंदिर होते हुए डीएसओएमआई तक जा रहे माल रोड पर जाना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। वहीं महू शहर के किशनगंज आरओबी से होते हुए ड्रीमलैंड तक जाने वाले भायाजी मार्ग से माल रोड पर जुड़ने वाले मार्ग भी बंद रहेंगे। इसमें गर्ल्स स्कूल चौपाटी से माल रोड जाने वाला मार्ग, भायाजी मार्ग से गेटवेल अस्पताल होते हुए माल रोड, मदर मेरी स्कूल से, भायाजी मार्ग से बत्तीवाला चौराहा मार्ग और गैरिसन ग्राउंड से माल रोड जुड़ने वाले मार्ग पर आवाजाही बंद रहेगी। इसके पूर्व 23 और 24 को सांकेतिक रूप से बंद किया है ताकि सभी को पता चल सके। यह होगा वैकल्पिक मार्ग इंदौर की ओर से किशनगंज आरओबी से आने वाले मार्ग गर्ल्स स्कूल चौपाटी से भायाजी मार्ग से होते हुए ड्रीमलैंड चौराहे पर जाएंगे। ड्रीमलैंड से डीएसओएमआई होते हुए चाकूल चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग खुला रहेगा। इससे महू से मंडलेश्वर व मानपुर की ओर जाने मार्ग पर जा सकेंगे। इसके लिए भायाजी मार्ग पर खड़े वाहनों को हटवाया जाएगा। ताकि यातायात सुगम रहे। 26-28 अगस्त तक महू नो फ्लाईंग जोन आयोजन के दौरान 26 से 28 अगस्त तक महू को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है। महू और आसपास के इलाके में कोई ड्रोन भी नहीं उड़ा सकेंगे। पहली बार तीनों सेनाओं का साझा मंच देश में पहली बार तीनों सेनाओं का संयुक्त सेमिनार (Three Armies of India Joint Seminar) हो रहा है। इसमें थल सेना, जल सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इस संवाद में युद्ध, युद्धनीति और युद्ध पर आधुनिक तकनीक के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें सेनाओं के अफसर बल्कि रक्षा उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी विचार साझा करेंगे।

मेयर भार्गव का ऐलान: सराफा चौपाटी यथावत, 80 दुकानदारों के लिए 2000 व्यापारियों की आवाज़ अनसुनी

इंदौर  इंदौर को स्वाद की राजधानी का दर्जा दिलाने वाली सराफा चौपाटी को लेकर सोना-चांदी बेचने वाले कारोबारी विरोध में है। इसे लेकर नगर निगम में मेयर ने बैठक ली थी। जिसमें चौपाटी के दुकानदार और सराफा कारोबारी शामिल हुए। मेयर ने बैठक में कहा कि निगम यह फैसला ले चुका है कि सराफा चौपाटी नहीं हटेगी। यह इंदौर की पहचान है, लेकिन चौपाटी में सुरक्षा और लगने के समय का ध्यान रखा जाएगा। बैठक में सराफा व्यापारियों ने कहा कि पहले चौपाटी में परंपरागत व्यंजनों की दुकानें लगती थी। दुकानदार अपने घरों से व्यंजन बनाकर लाते थे, लेकिन अब वहां पर व्यंजन बनाए जाते है। इससे आग लगने का खतरा बना रहता है। दुकानों में लाखों रुपये के जेवर रखे रहते है। इसके अलावा चौपाटी लगाने के लिए दुकानदार जल्दी आ जाते है, जबकि अब सोने-चांदी खरीदने के लिए ग्राहक रात में भी आते है। महापौर बोले- सराफा चौपाटी इंदौर की परंपरा और धरोहर है बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि सराफा चौपाटी केवल स्वाद का केंद्र ही नहीं, बल्कि इंदौर की परंपरा और धरोहर है। इंदौर को स्वाद की राजधानी बनाने में सराफा चौपाटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा, अनुशासन और परंपरा को बनाए रखने के लिए नगर निगम पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। महापौर ने बताया कि निगम की जन समिति में लंबे विचार-विमर्श और सुझावों के बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि सराफा चौपाटी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ विश्व प्रसिद्ध है और इसे परंपरागत व्यंजनों के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में जारी रखना आवश्यक है। सराफा व्यापारी बोले- हम दुकान किराए पर नहीं देंगे तो कहां लगाएंगे सराफा व्यापारी एसो. के मंत्री बसंत सोनी ने कहा कि 1 सितंबर से सराफा व्यापारी चौपाटी के दुकानदारों को किराए पर आगे की जगह नहीं देंगे तो वे दुकान कहां लगाएंगे। हमें सुरक्षा ज्यादा जरूरी है। चौपाटी के लिए जगह कहीं भी दी जा सकती है, वहां सभी पार्किंग, गैस लाइन सहित अन्य सभी सुरक्षा के इंतजाम किए जाना चाहिए। ​​​​​​ सराफा व्यापारी एसोसिएशन ने कहा कि इतनी अधिक संख्या में दुकानें लगने के कारण यदि हादसा होता है तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी अंदर तक नहीं पहुंच पाएगी। अफरा-तफरी में बड़ा हादसा भी होने की आशंका है। कई बार सफाई भी नहीं करते। इस वजह से सराफा व्यापारियों को अगले दिन परेशानी होती है। इस कारण चौपाटी के कारण हमारा धंधा प्रभावित हो रहा है। हम चाहते है कि चौपाटी को सराफा के बजाए कही और शिफ्ट किया जाए। मेयर भार्गव ने कहा कि सराफा चौपाटी विश्व प्रसिद्ध है। वह इंदौर की पहचान है। वह परंपरागत व्यंजनों के साथ सुरक्षित तरह से लगे। हम यह चाहते हैै। सराफा चौपाटी हटा नहीं सकते। चौपाटी लगने का समय क्या होगा, उसे नियमित करेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात एक दम स्पष्ट है कि सराफा इंदौर की धरोहर है। इंदौर को स्वाद की राजधानी बनने में सराफा की बड़ी भूमिका है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए चौपाटी का संचालन होगा। उसका समय तय होगा। इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि सराफा कारोबारियों का भी नुकसान न हो। हमने सराफा चौपाटी के संचालन के लिए एक कमेटी भी गठित की थी। उसकी रिपोर्ट में भी सुरक्षा पर जोर दिया गया। सुरक्षा व अन्य व्यवस्था के लिए निगमायुक्त को किया अधिकृत एमआईसी द्वारा सराफा चौपाटी की सुरक्षा व अन्य व्यवस्था के लिए निगम आयुक्त को अधिकृत किया गया है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सराफा व्यापारियों का हित सुरक्षित रहेगा और चौपाटी लगाने वालों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। दोनों पक्षों से सुझाव लिए गए हैं और उन्हीं के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। ​​​​​​बैठक में ये लोग मौजूद थे बैठक में निगम आयुक्त शिवम वर्मा, महापौर परिषद सदस्य निरंजन सिंह चौहान, अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर सहित सराफा व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी, कोषाध्यक्ष अजय लाहोटी, कार्यकारी सदस्यय अविनाश शास्त्री एवं सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी व व्यापारी मौजूद थे। सराफा चौपाटी को लेकर कांग्रेस की मांग इधर, कांग्रेस ने कहा है कि इस प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र में सराफा बाजार की परंपरागत बहुमूल्य विरासत को बनाए रखना आवश्यक है। अवैध और अनुचित तरीके से चौपाटी का विस्तार न केवल व्यापारियों को प्रभावित करता है बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक पहचान को भी धूमिल करता है। वहीं सराफा व्यापारियों का कहना है कि अगर चौपाटी की दुकानें लगानी हैं तो सिर्फ उन्हें अनुमति मिले जो सालों से व्यापार कर रहे हैं। जिनमें 70 अधिक दुकानदार शामिल हैं, सिर्फ उन्हें अनुमति दी जाए या फिर सभी को हटाया जाए। ऐसे विवादों और असुविधाओं को देखते हुए नगर निगम को चाहिए कि वह सराफा क्षेत्र की साफ-सफाई, सुरक्षा व नियोजन में तत्काल सुधार करे।  

उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल

गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को दी जायेगी प्राथमिकता : अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती शमी उपार्जन व्यवस्था में सुधार: अब गोदामों में ही बनेगा उपार्जन केन्द्र, सरकार की नई पहल खाद्य विभाग का फैसला: गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को मिलेगी प्राथमिकता प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप भोपाल गो-डॉउन में ही उपार्जन केन्द्र बनाने को प्राथमिकता दी जायेगी। जिससे उपार्जित अनाज के परिवहन में लगने वाला खर्च बच सके। अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने यह बात प्रोक्योरमेंट रिफार्म पर हुई स्टेट लेवल वर्कशॉप में कही। वर्कशॉप कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुई। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर मुख्य सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर, भारत सरकार में संयुक्त सचिव सुसी. शिखा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अपर मुख्य सचिव श्रीमती शमी ने कहा कि गत रबी सीजन में लगभग 9 लाख किसानों से 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया और लगभग 20 हजार करोड़ रूपये किसानों के खाते में अंतरित किये गये। गेहूं के उपार्जन में राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया गया है। इसी तरह लगभग 6 लाख 50 हजार किसानों से 43.5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। उपार्जन के लिये किसानों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आधार नम्बर को भी जोड़ा गया है। उपार्जन केन्द्रों से ही मिलर्स को धान देने का प्रावधान किया गया है। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। पीडीएस दुकानों में अनाज ले जाने वाले वाहनों की सघन मॉनिटरिंग की जाती है। प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केन्द्र के रूप में विकसित करने की भी योजना है। वर्तमान में इंदौर में यह कार्य शुरू कर दिया गया है। उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न लेने वाले उपभोक्ताओं की ई-केवायसी कराई जा रही है। ई-केवायसी के बाद अपात्र लोगों को बाहर किया गया है और लगभग 5 लाख 70 हजार नये उपभोक्ताओं को सूची में जोड़ा गया है। वर्कशॉप में भारत सरकार के अपर सचिव एवं वित्तीय सलाहकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव शंकर ने आयोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्कशॉप में उपस्थित अधिकारी अपने सुझाव जरूर दें। शंकर ने कहा कि उपार्जन की प्रक्रिया को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, इस संबंध में गहन विमर्श किया जायेगा। भारत सरकार की संयुक्त सचिव पॉलिसी एण्ड एफसीआई सुसी. शिखा ने बिलिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सब्सिडी की जानकारी प्रतिमाह भेजें। उन्होंने मध्यप्रदेश की गुड प्रेक्टिसेस के बारे में भी जानकरी दी और विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की। जनरल मैनेजर एफसीआई विशेष गढ़पाले ने प्रोक्योरमेंट सेंटर सेल्फ असेसमेंट प्रोग्राम (पीसीएसएपी) के बारे में जानकारी दी। आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा ने गेहूं और धान के उपार्जन के संबंध में बनाये गये एक्शन प्लान की जानकारी दी। उन्होंने उपार्जन प्रक्रिया के सरलीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये। एमडी नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा ने उपार्जन और भंडारण की प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं से अवगत कराया। अश्विनी गुप्ता ने फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। अन्य उपस्थित अधिकारियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये।  

मध्यप्रदेश हैल्थ केयर फैसिलिटी और इनोवेशन में निभा रहा है अग्रणी भूमिका : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

भोपाल. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रसाद नड्डा ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरगामी सोच से हमारा देश बदल रहा है। हम विकास के हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के विस्तार में भारत ने पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली से स्वास्थ्य सुधार के लिए तैयार की गई योजनाओं और स्वास्थ्य कार्यक्रमों को मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व तरीके से अमली जामा पहनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के दूसरे राज्यों के लिए एक उदाहरण बन रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार, विस्तार और नवाचार में मध्यप्रदेश नेतृत्व कर रहा है। केन्द्रीय मंत्री नड्डा सोमवार को जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्कृतिक सूचना केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिमोट का बटन दबाकर श्योपुर और सिंगरौली जिले में नवनिर्मित नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों का वर्चुअली लोकार्पण किया। केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने इन दोनों मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स की 100-100 सीटों के प्रवेश के लिए केन्द्र सरकार की ओर से लैटर ऑफ परमिशन भी राज्य सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि लैटर ऑफ परमिशन के जरिए इन दोनों मेडिकल कॉलेज के संचालन और प्रवेश की प्रक्रिया भी आज से ही प्रारंभ कर दी गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि हमारी नई स्वास्थ्य नीति में हमने बीमार होने के बाद इलाज करने की पुरानी व्यवस्था के बजाय नागरिक बीमार ही न पड़ें, इसके लिए प्रिवेन्टिव और प्रमोशनल हेल्थ केयर पर फोकस किया। टोटल हैल्थ केयर सेक्टर में हम विकास और विस्तार की एक नई कहानी लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का पहला ऐसा देश है, जिसने अपनी अधिकतम आबादी को बीमारी की इलाज के लिए 5 लाख रुपये सालाना हैल्थ कवरेज दिया है। आयुष्मान भारत निरामयम् योजना के जरिए हमने यह कर दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वास्थ्य विभाग का अमला इस उपलब्धि के लिए बधाई और साधुवाद के पात्र हैं। केन्द्रीय मंत्री नड्डा और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में बैतूल, पन्ना, धार और कटनी जिले में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर स्थापित होने वाले नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के लिए संबंधित निवेशक समूहों के साथ अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान भी किए गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 8 लाख पात्र वरिष्ठ नागरिकों को ‘वय वंदना कार्ड’ के वितरण कार्य का शुभारंभ करते हुए मंच से 5 वरिष्ठ नागरिकों को वय वंदना के पीवीसी कार्ड का वितरण किया। साथ ही रिमोट का बंटन दबाकर ‘आयुष्मान सखी’ स्मार्ट चैटबॉट और आशा संवाद कार्यक्रम की शुरुआत भी की। मातृ-गर्भावस्था आहार प्रचार सामग्री एवं मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड का विमोचन भी किया गया। राज्य सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ के तहत एक करोड़ लोगों की लीवर स्क्रीनिंग पूरी कर ली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा हासिल की गई इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले के समर्पण की सराहना की और बधाई दी। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। स्वस्थ भारत से ही सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण होगा। नड्डा ने कहा कि मध्यप्रदेश हैल्थ सैक्टर में नेतृत्व प्रदान कर रहा है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर क्रांतिकारी बदलाव कर रही है। पहले हमारी स्वास्थ्य नीति क्योरेटिव थी अर्थात बीमारी के बाद उसका इलाज करना। अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में होलिस्टिक पॉलिसी बनी है, जिसमें प्रिवेंटिव क्योर, हैल्थ प्रमोशन जैसी बातों पर ध्यान दिया गया। एक लाख 77 हजार आरोग्य मंदिरों में डेंटल केयर, मेंटल केयर, कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई। 30 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति की आरोग्य मंदिर के माध्यम से हेल्थ स्क्रीनिंग शुरू की गई। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में सबसे अच्छा हैल्थ सिस्टम है। पांच करोड़ से अधिक माताओं और बच्चों की स्क्रीनिंग भारत सरकार डिजिटली करती है। आशा वर्कर्स ने अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया है। गर्भावस्था के समय महिलाओं के 5 चैकअप होते हैं। पांच करोड़ एंटी नेटल चेकअप हमारे रोबस्ट हेल्थकेयर सिस्टम को दर्शाता है। इसी प्रकार वैक्सिनेशन के क्षेत्र में भी आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि आज देश में 89 प्रतिशत बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है। मातृ मृत्यु-दर आज 130 से घटकर 93 पर आ गई है। शिशु मृत्यु-दर घटकर 39 प्रतिशत पर आ चुकी है, जबकि दुनिया में यह दर 11 प्रतिशत है। देश भर में 5 करोड़ 20 लाख लोगों को हाइपरटेंशन और 3 करोड़ 50 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित मिले हैं। भारत सरकार सिकल सेल एनीमिया की स्कीनिंग के लिए तेजी से कार्य कर रही है। टीबी के मरीजों की भी तेजी से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 12 करोड़ 74 लाख परिवारों अर्थात 50 करोड़ से अधिक आबादी को आयुष्मान योजना के माध्यम से 5 लाख रुपए तक का हैल्थ कवरेज दिया है। इस योजना में हैल्थ वर्कर और आशा वर्कर भी शामिल हो चुकी हैं। अब 'वय वंदन कार्ड' के माध्यम से देश में 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। दुनिया में कोई बीमा कंपनी ऐसी सुविधा नहीं देती। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि देश में कुल 780 मेडिकल कॉलेज और इनमें 1 लाख 70 हजार एमबीबीएस की सीटें हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी 5 साल में यूजी-पीजी की 75 हजार मेडिकल सीटें और बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। यह प्रधानमंत्री के नीतिगत फैसलों को दर्शाता है। छोटे शहरों में मेडिकल कॉलेज खोलने से डॉक्टर उन्हीं क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाएंगे। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि नीट के जरिए आज 13 भाषाओं में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है। अब गांव के बच्चे … Read more

कलेक्टर के निर्देश पर भोपाल में फूड क्वालिटी चेक, कई प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूने

भोपाल.  कलेक्टर भोपाल के निर्देशानुसार आज गांधी नगर एवं बैरागढ़ क्षेत्र के खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिरायु मेडिकल कॉलेज स्थित स्टूडेंट मेस (भोपाल कैटर्स) से बेसन का नमूना, विकास डिस्ट्रीब्यूटर्स पंजाब नेशनल बैंक रोड बैरागढ़ से पेय पदार्थों के दो नमूने तथा जया डेयरी एंड स्वीट्स गांधी नगर से खाद्य एवं पेय पदार्थों के तीन नमूने जांच हेतु लिए गए, जिन्हें खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। खाद्य कारोबारकर्ताओं को प्रतिष्ठान पर खाद्य लाइसेंस की प्रति चस्पा करने, अखाद्य रंग का उपयोग नहीं करने तथा परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री जे.पी. विश्वकर्मा एवं श्री जे.पी. लववंशी उपस्थित रहे।

स्टूडेंट्स को शिवराज की अपील: भारत में ही ज्ञान और प्रतिभा का करें इस्तेमाल

भोपाल  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) भोपाल के 12वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छात्रों से भावुक अपील की कि वे देश छोड़कर बाहर न जाएं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल को भारत की प्रगति में ही लगाए।  समारोह में संस्थान की नई इनोवेशन मैगजीन और ब्रॉशर का विमोचन हुआ तथा रिसर्च और स्टार्टअप उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा भी दिया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और IISER चेयरपर्सन प्रो. अरविंद आनंद नाटू विशेष रूप से मौजूद रहे। छात्रों को मिला विशेष सम्मान इस वर्ष बायोकेमिस्ट्री विभाग के छात्र कौशिक मेहंदी को प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। शैक्षणिक प्रदर्शन, नेतृत्व कौशल और योगदान के आधार पर उन्हें डायरेक्टर गोल्ड मेडल के लिए भी चुना गया। इसके अलावा संस्थान ने बेस्ट एकेडमिक परफॉर्मेंस की सूची घोषित की, जिसमें वरुण अजीत नायर, आशीष शुक्ला, देवाशीष तिवारी, कौशिक मेहंदी, महेश और अगम दीप सिंह समेत अन्य छात्रों के नाम शामिल हैं। 423 छात्र-छात्राएं स्नातक हुए संस्थान के डायरेक्टर प्रो. गोवर्धन दास ने बताया कि इस बार कुल 423 छात्र-छात्राओं ने स्नातक किया। इनमें 227 बीएसएमएस, 51 बीएस, 56 एमएस और 89 पीएचडी शामिल हैं। उन्होंने स्नातकों को भविष्य के इनोवेटर्स और लीडर्स बताते हुए कहा कि IISER ने बहुविषयक शिक्षा को प्रोत्साहन दिया है और अब नेचुरल साइंसेस के साथ सोशल साइंसेस, ह्यूमैनिटीज और इंजीनियरिंग पर भी काम कर रहा है। इस सत्र से नए पाठ्यक्रम शुरू प्रो. दास ने यह भी बताया कि इस सत्र से संस्थान में बीटेक और एमए (लिबरल आर्ट्स) कोर्स भी शुरू किए गए हैं। IISER भोपाल की छात्र संख्या लगभग तीन हजार के करीब पहुंच चुकी है और इनमें लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थी महिलाएं हैं। यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। 340 करोड़ का अनुदान मिला प्रो. दास ने संस्थान की रिसर्च बेस्ड उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि अब तक IISER भोपाल के 847 प्रोजेक्ट्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय 45 एजेंसियों से फंडेड हुए हैं। संस्थान को कुल मिलाकर करीब 340 करोड़ रुपए का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है। उनकी फैकल्टी ने 4,000 से अधिक पियर-रि‍व्यूड लेख प्रकाशित किए हैं, 60 से अधिक पेटेंट हासिल किए गए हैं और 50 से अधिक संस्थानों के साथ एमओयू दर्ज हैं। वर्तमान में संस्थान में लगभग 160 नियमित फैकल्टी सदस्य कार्यरत हैं और यह संख्या विस्तार के रास्ते पर है। IISER में केन्द्र और राज्य सरकार के सहयोग से स्टेट ऑफ आर्ट हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो आज के कटिंग-एज टेक्नोलॉजी के अनुरूप अनुसंधान को सशक्त बनाने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा संस्थान में रिसर्च पार्क का विकास भी जोरों पर है, ताकि रिसर्च बेस्ड स्टार्टअप और उद्योगों को सहयोग और संसाधन मिल सके। प्रो. दास ने कहा, IISER भोपाल ने कृषि व टेक्नोलॉजी के संयोजन पर भी विशेष बल दिया है। संस्थान ने प्रस्ताव रखा है कि यहां एक सेंटर फॉर एग्रो टेक्नोलॉजी रिसर्च स्थापित किया जाए, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नयी नयी तकनीकों के माध्यम से किसानों की आजीविका में सुधार लाना होगा। संस्थान की रिसर्च टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को कृषि से जोड़ने पर काम कर रही है। जिससे ताकि किसान यह जान सकें कि कौन-सी फसल कब और किस तरीके से लगानी चाहिए, संभावित जोखिम क्या हैं और उनसे निपटने के वैधानिक तथा तकनीकी उपाय क्या हो सकते हैं। ड्रोन इमेजरी की मदद से फसलों की सटीक निगरानी, रोगों का शीघ्र पता और जल प्रबंधन संभव होगा। जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इसके अलावा संस्थान में प्रकाशित शोधों में सिकल सेल एनीमिया के इलाज के लिए स्टेम सेल तकनीक पर भी काम चल रहा है, जो बीमारियों के नए उपचार के रास्ते खोल सकते हैं। मंत्री नहीं, मामा बनकर आया हूं समारोह को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि IISER का परिसर देखकर उन्हें दिव्यता का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा – नाटू साहब ने मेरा परिचय मंत्री के रूप में दिया, लेकिन मैं यहां मामा बनकर आया हूं।' चौहान ने छात्रों से कहा कि भारत की पुरानी विद्वता आज भी हमें ज्ञान का प्रकाश देती है और नए शोधकर्ताओं का कर्तव्य है कि वे इस विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा- 'देश छोड़कर मत जाना, असली सुख तब है जब आपका ज्ञान अपने देश और समाज के काम आए।' किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग उन्होंने छोटे और संसाधन सीमित किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग पर जोर दिया। जिसमें मधुमक्खी पालन, पशुपालन और विविध फसल प्रबंधन कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकें। चौहान ने छात्र-उद्यमियों से कहा कि यदि उनके पास प्रोजेक्ट हैं तो वे भोपाल में उपलब्ध हैं; और यदि वे दिल्ली में हैं तो संपर्क कर सकते हैं। वे दोनों जगहों पर सहायता के लिए तत्पर हैं। दीक्षांत का अर्थ दीक्षा का अंत नहीं दीक्षांत समारोह के अंत में प्रो. दास और अतिथियों ने स्नातकों को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि दीक्षा का अर्थ अध्ययन का अंत नहीं, बल्कि प्रारम्भ है। अब ज्ञान के साथ कौशल है और उसका प्रयोग समाज के उत्थान के लिए होना चाहिए।  

लाड़ली बहनों का लाभ रुका, मध्यप्रदेश में 1500 रुपए की बढ़ी राशि क्यों नहीं मिली?

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी और लोकप्रिय लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा अपडेट आया है। सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि एमपी की 10 हजार से ज्यादा लाड़ली बहनों को योजना से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद साफ हो गया है कि इन महिलाओं को अगले महीने यानी सितंबर महीने में आने वाली 28वीं किस्त से 1250 रुपए का लाभ नहीं मिलेगा। बता दें कि लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई थी। इस योजना को शुरू हुए दो साल और कुछ महीने का समय ही हुआ है, लेकिन इन दो साल चंद महीनों में अब तक कुल 3.92 लाख से ज्यादा महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटाए जा चुके हैं। यानी दिवाली की भाईदूज से मिलने वाली बढ़ी हुई राशि के 1500 रुपए के लाभ से भी ये वंचित हो गई हैं।  1390 महिलाओं की राशि रोकी, स्पष्ट नहीं कारण योजना के तहत जून महीने तक 2,76,439 महिलाओं के खाते में राशि आती रही लेकिन जुलाई में केवल 2,75,178 महिलाओं के खाते में राशि आईं। इस तरह 1261 महिलाएं योजना के लाभ से वंचित हो गई। इन महिलाओं की शिकायत पर विभागीय अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर जांच पड़ताल कर महिला एवं बाल विकास संचालनालय भोपाल के आयुक्त को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। शासन स्तर पर इस मामले में जांच चल ही रही थी कि अगस्त महीने में 129 और महिलाओं की राशि रूक गई। इस तरह से अगस्त महीने में जून की तुलना में 1390 महिलाओं को योजना की राशि नहीं मिली। जिन महिलाओं की राशि रोकी गई है उनकी ओर से लगातार शिकायतें जारी हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शासन स्तर से मौखिक रूप में बताया गया कि महिलाओं ने पेंशन योजना के तहत राशि प्राप्त की है। इस कारण उनकी बहना योजना की राशि नहीं आई। यह बात और है कि अभी संचालनालय से लिखित रूप में कोई भी कारण स्पष्ट नहीं किया गया है और न ही पोर्टल में कारण दर्ज हुआ है। जबकि महिलाओं के अपात्र होने पर कारण पोर्टल पर ही स्पष्ट हो जाता है। पोर्टल पर पात्रों की सूची में शामिल इसके अलावा योजना की लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि उनकी ओर से पेंशन योजना का लाभ नहीं लिया गया है। पेंशन का लाभ लिया जाता तो पोर्टल पर अपात्र घोषित कर दिया जाता, लेकिन पोर्टल पर वह पात्रों की सूची में शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ विनीता लोढ़ा बताती हैं कि जुलाई और अगस्त में कई महिलाओं की राशि नहीं आई है। इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही कारण स्पष्ट होगा। जो महिलाएं पात्र होंगी, उन्हें हर हाल में योजना का लाभ दिया जाएगा। लाड़ली बहना योजना से क्यों काटे जा रहे नाम -सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग वजहों से लाखों बहनों को योजना से बाहर किया गया है। इनमें बड़ा कारण पात्र महिलाओं का 60 वर्ष से अधिक आयु का होना है। इस बड़े कारण से इस महीने- 10,963 महिलाएं योजना के लाभ के लिए अपात्र घोषित की गई हैं। इन्हें अगस्त के बाद लाड़ली बहना योजना की राशि नहीं मिलेगी। -अपात्र पाई गई महिलाओं की संख्या 690 है। -इनमें लाभ का परित्याग करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इनकी संख्या 890 है। -इनमें से 646 लाभार्थी महिलाएं ऐसी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। -कुछ कारणों से समग्र पोर्टल से हटाई गई महिलाओं की संख्या 426 है। -आधार से समग्र डि-लिंक महिलाओं की संख्या 505 है। -यानी दो ही चंद महीनों में ही 3,92,912 महिलाओं को अपात्र घोषित किया गया है। इन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ यदि आप एमपीकी रहने वाली हैं, योजना से जुड़ी हैं या आवेदन करने का विचार कर रही हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका नाम भी इस योजना से कभी भी काटा जा सकता है। लेकिन कब कटेगा नाम… -जब आप 60 वर्ष से अधिक आयु की हो गई हों। -अविवाहित महिलाओं ने भी यदि अपना नाम योजना से जुड़वा लिया है, या वह जुड़ने के बारे में सोच रही हैं, तो उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। ये योजना केवल विवाहित, विधवा, परित्यक्ता महिलाओं को ही दिया जा रहा है। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक है। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार का कोई सदस्य पूर्व सांसद/विधायक रह चुका हो। -ऐसी महिलाएं जिनके परिवार में कोई सदस्य सरकारी सेवा या पद पर हो, उन्हें इस योजना का पात्र नहीं माना गया है। सूची से हट जाए नाम तो क्या करें? -नजदीकी CSC सेंटर या पंचायत कार्यालय से जानकारी लें। -60 साल से कम उम्र होने के बावजूद नाम कटने पर आपत्ति दर्ज कराएं। -सुनिश्चित करें कि आपका आधार और समग्र पोर्टल सही तरीके से लिंक हो। -विभागीय हेल्पलाइन पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराएं। समग्र पोर्टल से जुड़ी बड़ी समस्या डाटा में यह भी सामने आया है कि कई महिलाएं 'आधार से समग्र डि-लिंक होने के कारण सूची से बाहर हो रही हैं। यदि आधार और समग्र ID का कनेक्शन टूट जाता है तो सिस्टम लाभार्थी की पहचान सत्यापित नहीं कर पाता। ऐसे में DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) अटक जाता है और महिला को अपात्र मान लिया जाता है।

शादी के बाद खुशखबरी! कन्यादान विवाह योजना से नवयुगल को मिलेंगे 49 हजार रुपए

भोपाल  मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में शामिल नवयुगल जोड़ों को शादी के बाद से राशि का इंतजार था, जो अब खत्म होता नजर आ रहा है। सरकार द्वारा बजट आवंटित करने से हितग्राहियों को भी चेक प्रदान किए जा रहे हैं। जिले में अलग-अलग जगह शिविरों लगाकर हितग्राहियों को चेक दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 30 अप्रेल को उमरबन में जिला प्रशासन द्वारा सामूहिक विवाह का आयोजन किया था, जिसमें रिकॉर्ड दो हजार जोड़े शामिल हुए थे। शासन की योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 49 हजार की राशि प्रदान की जाना थी। लेकिन बजट नहीं होने से यह राशि अभी तक नहीं मिली थी। जारी हो गया बजट जिला पंचायत सीईओ अभिषेक चौधरी ने बताया कि अब शासन से बजट जारी हो चुका है। जिले में 25 अगस्त यानी आज शिविरों के माध्यम से चेक प्रदान किए गए। इसकी शुरुआत मनावर और धरमपुरी से हो रही है। दोनों ही जगह पर केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर द्वारा हितग्राहियों को चेक दिया। इसी प्रकार 26 अगस्त को गंधवानी और कुक्षी, 29 अगस्त को बदनावर और 30 अगस्त को सरदारपुर में शिविर का आयोजन किया जाएगा।