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बालाघाट देश में अटल पेंशन योजना में पहले स्थान पर, 10 जिले टॉप पर

भोपाल  देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को 60 वर्ष की आयु के बाद एक निश्चित पेंशन राशि प्रदान करने के लिए अटल पेंशन योजना चलाई जा रही है। योजना में अधिक से अधिक असंगठित क्षेत्र के लोगों को जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा इस वर्ष 1 मई से 15 जुलाई 2025 तक पूरे देश में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में नए लोगों को जोड़ने और उनका पंजीयन कराने में मध्यप्रदेश के 10 जिलों ने देश के टॉप टेन जिलों में स्थान बनाया है। इसमें बालाघाट जिले ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि राज्य के साथ ही बालाघाट के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। इस अभियान का फाइनल स्कोर पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के द्वारा 18 जुलाई को जारी किया गया। इस अभियान में बालाघाट जिले ने 2992 लक्ष्य के विरूद्ध 12 हजार 507 लोगों को अटल पेंशन योजना से जोड़कर 418 प्रतिशत उपलब्धि हासिल किया है। श्योपुर जिले ने 836 के विरूद्ध 2538 लोगों को जोड़कर 304 प्रतिशत उपलब्धि के साथ दूसरे, अलीराजपुर जिले ने 880 के विरूद्ध 1705 लोगों को जोड़कर 194 प्रतिशत उपलब्धि के साथ तीसरे, उज्जैन जिले ने 5676 के विरूद्ध 10813 लोगों को जोड़कर 191 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे, अनूपपुर जिले ने 1342 के विरूद्ध 2542 लोगों को जोड़कर 189 प्रतिशत उपलब्धि के साथ पांचवे, उमरिया जिले ने 990 के विरूद्ध 1819 लोगों को जोड़कर 184 प्रतिशत उपलब्धि के साथ छटवें, छिंदवाड़ा जिले ने 4994 के विरूद्ध 9148 लोगों को जोड़कर 183 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सातवें, डिंडोरी जिले ने 946 के विरूद्ध 1720 लोगों को जोड़कर 182 प्रतिशत उपलब्धि के साथ आठवें, शहडोल जिले ने 1936 के विरूद्ध 3445 लोगों को जोड़कर 178 प्रतिशत उपलब्धि के साथ नौवें और दमोह जिले ने 1870 के विरूद्ध 3314 लोगों को जोड़कर 177 प्रतिशत उपलब्धि के साथ देश में दसवां स्थान हासिल किया है। अभियान के अंतर्गत अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों के नाम जोड़ने मे देश में प्रथम 10 स्थान पर रहे इन जिलों को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया जाएगा। बालाघाट जिले में कलेक्टर मृणाल मीणा के नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ के साथ समन्वय कर इस योजना में लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अग्रणी बैंक प्रबंधक संजीव कुमार ने इस संबंध में बताया कि सम्पूर्ण देश में अटल पेंशन योजना में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। बालाघाट जिले में अभियान के बाद भी जिले में पात्र लोगों को इस योजना से जोड़ने का काम निरंतर जारी रहेगा और 50 हजार के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। अटल पेंशन योजना भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए तैयार की गई है। यह योजना उन लोगों को पेंशन प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रहना चाहते हैं। इसके लिए 18 से 40 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक, जो असंगठित क्षेत्र के कामगार जैसे दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, आदि पात्र हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का किसी बैंक या डाकघर में बचत खाता होना चाहिए, जो आधार से लिंक हो। इस योजना का लाभ उन लोगों को दिया जाता है जो आयकर दाता नहीं हैं। इसी के साथ आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना जैसे एनपीएस, ईपीएस का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। यह योजना 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन प्रदान करती है, जो 60 वर्ष की आयु के बाद मिलती है।  

दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही, हजारों किलो कबाड़ का उपयोग

सिवनी  दुनिया की सबसे बड़ी बाघ प्रतिमा पेंच टाइगर रिजर्व में आकार ले रही है, जिसे सिवनी जिले के स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार किया जा रहा है।हजारों किलो कबाड़ (स्क्रैप) से तैयार हो रही बाघ की आकृति का दीदार पेंच पहुंचने वाले पर्यटक व आम नागरिक 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस से कर सकेंगे। पेंच प्रबंधन का दावा है कि खवासा में अनपयोगी कबाड़ से तैयार हो रही बाघ की प्रतिमा दुनिया में अब तक बनी बाघ प्रतिमाओं में सबसे बड़ी होगी।पेंच टाईगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार स्क्रैप से बनाई जा रही बाघ प्रतिमा की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मिशन लाइफ से ली गई है। पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश सिंह ने बताया कि मिशन लाइफ के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के तीन आर (3R) सूत्रों में रिड्यूस (Reduce), रियूस (Ruse) एवं रिसाईकल (Recycle) भावना के अंतर्गत पेंच टाइगर रिजर्व में लोहे के स्क्रैप मटेरियल से एक विशालकाय बाघ प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। जनवरी माह में लोहे के अनुपयोगी सामग्रियों जैसे पुरानी साईकिल, पाइप, जंग लगी लोहे की चादरें आदि विविधतापूर्ण सामग्रियों से प्रतिमा का निर्माण प्रारंभ किया गया था, जो अब वह लगभग अपनी पूर्णता पर है। जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह एक सिंह को बनाया था और वह सिंह भी अनुपयोगी लोहे की सामग्री से बना डिजाइन था उसी से प्रेरणा लेकर लोहे के स्‍क्रैप मटेरियल के इस बाघ कलाकृति की संकल्पना की गई है। यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि इंटरनेट में उपलब्ध वल्र्ड रिकार्ड एकेदमी के अनुसार दुनिया में सबसे बड़ी बाघ की मूर्ति अमेरिका के जार्जिया राज्य में है जो 8 फिट ऊंची और 14 फिट लंबी है। जबकि पेंच टाइगर रिजर्व में बन रही लोहे के स्क्रैप मटेरियल की यह बाघ कलाकृति पूर्ण होने के बाद 16 फिट से अधिक उंची व 36 फिट से भी अधिक लंबी होगी। उल्लेखनीय है कि मठ मंदिर में कबाड़ से महादेव की आकर्षक प्रतिमा तैयार करने वाले कलाकार विक्की और उनके साथियों द्वारा इस विशालकाय प्रतिमा को तैयार किया जा रहा है।  

उज्जैन महाकुंभ में पहली बार AI का कमाल, यूपी की विशेषज्ञ टीम संभालेगी मोर्चा

उज्जैन  साल 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ आस्था का सुपर हाईटेक मेला होने वाला है। जिसकी तैयारियां पुलिस महकमे द्वारा अभी से ही शुरू कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि सिंहस्थ मेले का पूरा क्राउड मैनेजमेंट ही एआइ तकनीक के जरिए किया जाएगा। भीड़ प्रबंधन के लिए एआई इनेबल कैमरा, आरएफआईडी रिस्टबैंड, ड्रोन सर्विलांस और मोबाइल एप ट्रैकिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ मेला में पहली बार साइबर मॉनिटरिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। साइबर यूनिट डिजिटल माध्यमों से फैलने वाली अफवाहों से लेकर ऑनलाइन ठगी की कोशिशों पर नियंत्रण का काम करेंगी। साथ ही इस यूनिट द्वारा सोशल मीडिया कंटेंट और डिजिटल गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। वहीं मोबाइल नेटवर्क बाधित नहीं हो इसके लिए अस्थायी मोबाइल टॉवर, हाई- स्पीड डेटा कनेक्टिविटी की योजना गई है। यूपी का दल जल्द आएगा उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर यूपी का एक दल जल्द उज्जैन का दौरा करने वाला है। जिसके दौरे में प्रबंधन की बारीकियां समझी जाएंगी। दल में वह अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने प्रयागराज महाकुंभ मेले में महत्वपूर्ण जिमेदारियां निभाई है। बता दें, इससे पहले डीजीपी कैलाश मकवाना ने भी अधिकारियों की बैठक लेकर महाकुंभ में तकनीकी मदद लेने पर जोर दिया था।

स्वस्थ पर्यावरण की ओर कदम: इंदौर में शुरू होगा मध्यप्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन

     इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला ऑक्सीजन गार्डन, लगेंगे लाखों पौधे     अगले एक साल में 50 टन कचरा कम करने का लक्ष्य।     तीन साल पहले सूखा कचरा 650-750 टन था।     अब शहर में सूखा कचरा 450-500 टन हो गया है। इंदौर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत देशभर में अब तक 141 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। पीएम मोदी के आव्हान पर यह पर्यावरणीय जनांदोलन निरंतर प्रगति पर है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश सरकार के नेतृत्व में यह संकल्प तेजी से धरातल पर साकार होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा और मार्गदर्शन तथा जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की सक्रिय पहल से प्रदेश में पहली बार "ऑक्सीजन गार्डन" की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है।   इंदौर शहर अब ग्रीन सिटी बनने की तैयारी में जुटा है। दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण के सम्मान समारोह के बाद हुई राउंड टेबल कांफ्रेंस में इंदौर निगम ने अपने ग्रीन सिटी बनने वाले का भविष्य का रोडमैप बताया। इसमें कचरे के साथ पानी व ऊर्जा के माडल पर काम किया जाएगा। शहर की लगातार बढ़ती आबादी, भौगोलिक स्तर पर शहर को होते विस्तार के कारण इंदौर बढ़ते कचरे को कम करने के लिए अभी से प्रयासरत है। इंदौर में हर दिन 1250 टन गीला व सूखा कचरा उत्पन्न होता है। पिछले तीन साल में इंदौर ने 250 टन सूखा कचरा कम किया। तीन साल में 19 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम किया गया। वहीं अगले एक साल में इंदौर नगर निगम 21 से 22 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कचरा कम करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस तरह इंदौर में अगले एक साल में 250 टन के अलावा 50 टन अतिरिक्त कचरा कम करने की तैयारी है। इंदौर में 11 एकड़ में विकसित होगा ऑक्सीजन गार्डन इंदौर के कनाडिया क्षेत्र स्थित गुलमर्ग परिसर के पीछे 11 एकड़ के पहाड़ी क्षेत्र में इस विशाल हरित परियोजना की शुरुआत की जाएगी। इस संबंध में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इस क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यावरणीय केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा, अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, इंदौर जनपद अध्यक्ष विश्वजीत सिंह सिसोदिया सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। औषधीय पौधों और पक्षी विहार से सजेगा हरित क्षेत्र इस पहाड़ी क्षेत्र पर नीम, पीपल, बरगद, अशोक, आम, महुआ, रेन ट्री, जामुन, उंबर सहित लाखों की संख्या में औषधीय एवं छायादार प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। यह ऑक्सीजन गार्डन न केवल नागरिकों को शुद्ध वायु प्रदान करेगा, बल्कि पक्षियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के आगमन से यह स्थल एक प्राकृतिक पक्षी विहार और पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। पौधों की सिंचाई के लिए गुलमर्ग परिसर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट से पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी मंत्री सिलावट ने दिए हैं। जन भागीदारी से बनेगा पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसमें पद्मश्री एवं पद्मभूषण सम्मानित नागरिकों, व्यापारी संगठनों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, किसान संगठनों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। यह ऐतिहासिक पहल आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसी अवसर पर सिलावट ने कनाडिया क्षेत्र की गौशाला का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।  तीन साल में 190 टन गीले कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड जाने से रोका शहर के घरों व प्रतिष्ठानों से पिछले तीन साल में 190 टन कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड पहुंचने से रोका गया। इसके लिए इंदौर में 56 हजार घरों के लोगों का विशेष सहयोग मिला। इन घरों में होम कंपोस्टिंग यूनिट के माध्यम से घरों में ही गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। वही शहर के उद्यानों में पिट कंपोस्टिंग, आर्गेनिक वेस्ट वाटर व ड्रम कंपोस्ट के माध्यम से हरित कचरे का निपटान गार्डन परिसर में ही किया जा रहा है। 287 संस्थानों ने 30 टन प्रतिदिन कचरा किया कम शहर में 287 संस्थाएं ऐसी हैं जो प्रतिदिन 30 किलो से ज्यादा कचरा देती हैं। ऐसे संस्थानों में होटल, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक संस्थान हैं। इन संस्थानों ने गीले कचरे के खाद बनाने के उपक्रम लगाए और सूखे कचरे की छंटाई की यूनिट लगाई। परिणामस्वरूप प्रतिदिन 30 टन कचरा नगर निगम को मिलना कम हुआ। इस तरह कचरे का परिवहन हुआ कम मोबाइल कंपोस्टिंग वैन : चार वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन आठ से नौ टन गीला कचरा एकत्र कर उससे खाद बनाई जा रही है। बायोसीएनजी प्लांट : कबीटखेड़ी व चोइथराम मंडी में बायोसीएनजी प्लांट में 35 टन कचरे से गैस बनाई जा रही है। यह कचरा शहर में खत्म हो रहा है। बढ़ते कचरे के नियंत्रण के लिए भविष्य की तैयारी वर्तमान में ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 550 टन प्रतिदिन गीले कचरे से खाद बनाने का संयंत्र लगाया गया है। इसकी क्षमता बढ़ाकर 800 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इस तरह यह विश्व का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट बन जाएगा। ग्रीन इंदौर के लिए ये भी हो रहे प्रयास     इंदौर नगर निगम शहर की वायु गुणवत्ता का स्तर 50 से कम करने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहा है।     सोलर मित्र योजना के तहत अगले तीन साल में शहर के शत-प्रतिशत घरों में सोलर पैनल से बिजली बनाने के संयंत्र लगाने की योजना। फिलहाल एक माह में एक करोड़ से अधिक विद्युत यूनिट बचाई गई।     1 लाख 70 हजार घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे। अगले तीन साल में छह लाख घरों में लगवाने की योजना।     हरित क्षेत्र बढ़ा रहे हैं। अभी शहर में छह स्थानों पर सिटी फारेस्ट विकसित किए गए हैं। शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष पौधे लगाए जाएंगे। इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे     ग्रीन इंदौर बनाने के लिए इंदौर निगम लगातार काम कर रहा है। भविष्य में इंदौर को ग्रीन सिटी बनाएंगे। हमने … Read more

MP में हाईटेक सुरक्षा की शुरुआत: 15 अगस्त से सक्रिय होगी सेंट्रलाइज्ड 112 सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब आपातकालीन सेवाएं और भी आसान और तेज हो जाएगी। 15 अगस्त 2025 से प्रदेश में इमरजेंसी सर्विसेज के लिए एक नया एकीकृत नंबर 112 शुरू होने जा रहा है। अब आपको पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। बस एक नंबर 112 डायल करें, और मदद तुरंत आपके दरवाजे पर पहुंचेगी। इस नई पहल के तहत मध्यप्रदेश सरकार डायल 112 सेवा को हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड बनाने जा रही है। इसके लिए एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर तैयार किया जा रहा है, जो सीधे सेंट्रल सर्वर से जुड़ा होगा। इस सेवा के तहत सड़कों पर बोलेरो नियो और स्कॉर्पियो जैसी हाईटेक इमरजेंसी गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी, जो आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। 1200 नए वाहन मिलेंगे नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में 1200 नए बोलेरो नियो “फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल” तैनात किए जाएंगे. ये वाहन जीपीएस, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन सिस्टम और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मदद पहले से कहीं तेज़ और सटीक हो सकेगी. 10 साल तक चली ये सेवा बता दें कि डायल-100 सेवा वर्ष 2015 में सिर्फ पांच साल के लिए शुरू की गई थी, लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं, निविदा प्रक्रिया में देरी, कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों के चलते यह सेवा 10 वर्षों तक चली. अब बीवीजी कंपनी के बजाय जीवीके कंपनी को नई डायल-112 सेवा का संचालन सौंपा गया है. पुलिस का ये दावा पुलिस विभाग का दावा है कि नई सेवा के माध्यम से प्रदेशवासियों को और भी अधिक भरोसेमंद, तेज़ व स्मार्ट सुरक्षा मिलेगी. नई तकनीक के इस्तेमाल से घटना स्थल तक पहुंचने का औसत समय भी घटेगा, जिससे आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इस ऐलान के बाद से लोगों में नई सेवा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. 112 के साथ शुरू होगा मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय  फिलहाल, प्रदेश में इमरजेंसी सेवाओं के लिए डायल 100 नंबर का उपयोग होता है, जिसकी स्कीम 2015 में शुरू हुई थी और यह 5 साल के लिए थी। अब डायल 112 के साथ मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। तो, 15 अगस्त से तैयार रहें, क्योंकि मध्यप्रदेश में आपकी सुरक्षा और सहायता के लिए सिर्फ एक कॉल काफी होगी- डायल 112. 

प्रदेश के किसानों को बाजार से दोगुनी मिलेंगे दाम, राज्य बनेगा ऑयल सीड हब

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में खेती और यहां का शरबती गहूं देश दुनिया में पहचान रखता है. प्रदेश में खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयोग भी होते रहे हैं. यही वजह है कि लगातार कृषि क्षेत्र में अग्रसर मध्य प्रदेश अब ऑयल सीड हब बनने जा रहा है. जिसके तहत प्रदेश के तीन जिलों में स्पेशल प्रोग्राम चलाया जाएगा. यहां के किसान अब तीन फसलों के बीज खरीदेंगे नहीं बल्कि उगायेंगे और ये बीज सरकार के जरिए अन्य किसानों की आपूर्ति करेंगे. ये सभी जानते हैं कि, किसी भी फसल से उसके बीज का दाम काफी ज्यादा होता है. लेकिन आम तौर पर किसान बीज सहकारी समितियों की मदद से खरीदते हैं. गेहूं और धान को हटाकर मध्य प्रदेश में तिलहन फसलें यानी सोयाबीन, सरसों और मूंगफली की खेती भी प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में लगायी जाती है. लेकिन इन फसलों के लिए बढ़ते रकबे के हिसाब से कृषि संस्थान भी पर्याप्त बीज नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं. यही वजह है कि अब मध्य प्रदेश में एक विशेष प्रोजेक्ट लाया गया है, जो किसानों के लिए उन्नत खेती के साथ भी कमाई का नया जरिया बनेगा. मध्य प्रदेश में तिलहन फसलों के लिए सीड हब प्रोजेक्ट भारत सरकार ने ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को ऑयल सीड हब प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया है. जिसके तहत मध्य प्रदेश के तीन जिलों में प्रदेश भर के किसानों को तिलहन फसलों के बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज तैयार कराये जाएंगे, जिसे सीड हब नाम दिया गया है. इन सीड हब में तीन प्रमुख फसलों के बीज तैयार कराये जाएंगे. पहले ऑयल सीड हब सीहोर में स्थापित किया जाएगा. जहां सोयाबीन के बीज तैयार होंगे. दूसरा मूंगफली के लिए शिवपुरी में और तीसरा हब मुरैना में सरसों के बीज के लिए है. चंबल में किसानों के सिर चढ़ी मूंगफली राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि, ''पिछले कुछ वर्षों में मालवा के अलावा चंबल के शिवपुरी क्षेत्र में किसान मूंगफली की फसल लगाने लगे हैं. ऐसे में उन्हें मूंगफली की नई नई प्रजातियों की जरूरत है. कृषि विश्वविद्यालय ने मूंगफली की दो किस्में तैयार भी की हैं. इसके अलावा इस क्षेत्र में मूंगफली का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल के मुकाबले इस साल भी लगभग 1 लाख हेक्टेयर रकबा मूंगफली का बढ़ा है. ऐसे में मूंगफली के बीज किसानों को उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. सीड हब प्रोजेक्ट इसे नई दिशा देगा. कैसे काम करता है सीड हब प्रोग्राम? सीड हब प्रोग्राम के तहत विश्वविद्यालय द्वारा किसी क्षेत्र में चयनित किसानों को फसल के बीज उपलब्ध कराये जाते हैं. इसके बाद किसान इनकी बुवाई कर फसल तैयार करता है. फसल में समय पर और जरूरी पोषण के लिए अच्छी गुणवत्ता का खाद दिया जाता है, और फसल पकने पर उसे हार्वेस्ट कर लिया जाता है. यह कार्य कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में पूरा किया जाता है. यही फसल उन्नत किस्म के बीज के तौर पर तैयार होगी और फिर कृषि विश्वविद्यालय उनसे यह फसल बीज के लिए लेगा. उसे प्रोसेस करेगा और फिर अन्य किसानों को उपलब्ध कराएगा. किसान क्यों नहीं करते आम फसल को बीज की तरह उपयोग? कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु के मुताबिक, ''आम तौर पर तैयार फसल का उपयोग किसान बीज के तौर पर नहीं कर पाते हैं. जिसकी बड़ी वजह है फसल में अलग अलग तरह के बीजों का समावेश. असल में जब किसान खेत में फसल की बुवाई करता है तो उसके लिए कई किस्म के बीज उपयोग ले लेता है. उदाहरण के लिए जब सरसों की बुवाई होती है तो उसमे कई बार काली सरसों के साथ कम पड़ने पर पीली सरसों या दूसरी वेराइटी के बीज बो दिए जाते हैं. जिसकी वजह से खेत में तैयार फसल में वेरिएशन आ जाता है और किसानों को उस सरसों को फसल की तरह ही बेचना पड़ता है. क्योंकि वह फसल सिर्फ तेल या सरसों के उपयोग की ही होती है. लेकिन सीड हब प्रोग्राम में किसानों को एक ही वेराइटी का बीज उपलब्ध कराया जाएगा और उससे तैयार फसल बीज के तौर पर उपयोग हो सकेगी. खुद नहीं, किसानों से ही क्यों तैयार करायेंगे बीज? असल में मूल रूप से फसलों के बीज तैयार करने की व्यवस्था कृषि संस्थानों पर होती है (निजी कंपनियों को छोड़कर), लेकिन यहां लगायी जाने वाली फसलें काफी सीमित क्षेत्र में ही लगायी जा सकती हैं. ऐसे में डिमांड के अनुसार, बीज व्यापक मात्रा में यहां तैयार नहीं किया जा सकता. इस स्थिति में किसान एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि किसान अपने ही खेत में बीज के लिए फसल लगाएगा तो कृषि विश्वविद्यालय को अलग से जमीन की भी जरूरत नहीं होगी. साथ ही तैयार बीज से किसानों के लिए बीज की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी. इस सब में किसानों को कैसे होगा फायदा? जब सवाल आता है कि, पूरी मेहनत किसान की बीज संस्थान लेगा तो किसानों का क्या फायदा? तो आपको बता दें कि यह किसान के लिए फायदेमंद सौदा होगा. क्योंकि, पहले तो इस प्रोग्राम के तहत कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल के जरिए बीज तैयार करना सिखायेंगे. जिससे भविष्य में वे खुद अपनी ही फसलों से भी बीज तैयार कर सकेंगे और उन्हें बाहर से बीज नहीं खरीदना पड़ेगा जो उनकी लागत को कम करेगा. दूसरा बड़ा फायदा फसल के दाम में अंतर आएगा. क्योंकि अमूमन आम फसल के दाम काफी कम होते हैं लेकिन उस फसल का बीज ऊंचे दाम पर बिकता है. उदाहरण के लिए सोयाबीन फसल का रेट लगभग 3 हजार से 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि सोयाबीन के बीज की कीमत बाजार में 7 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक उपलब्ध है. जब विश्व विद्यालय उनकी तैयार फसल खरीदेगा तो वह बीज के रेट पर खरीदेगा तो उन्हें दोगुने से तीन गुना तक ज्यादा दाम मिलेगा जो उनकी आय बढ़ाएगा. किसान चाहे तो खुद के द्वारा तैयार बीज अन्य किसानों को भी बेच सकेंगे. प्रदेश में कहां-कहां बनाये जाएंगे सीड हब जैसा की हमने पहले बताया कि, चंबल अंचल के शिवपुरी क्षेत्र … Read more

मप्र में उपार्जन केंद्रों की गुणवत्ता और सुविधाओं से केंद्रीय मंत्री को कराया अवगत

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को दिये जा रहे खाद्यान्न में चावल की जगह गेहूं की मात्रा बढ़ाई दी जाये। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश में चावल की जगह गेहूं का उपयोग बहुतायत में होता है। समय – समय पर यह देखने में आता है कि कुछ व्यापारी हितग्राहियों को प्रलोभन देकर उनसे कम दाम में चावल खरीद लेते है, जिससे बाजार में दुरूपयोग की घटनाएं सामने आती हैं। इस समस्या के समाधान के लिये मप्र में पात्र हितग्राहियों को दिये जाने वाले खाद्यान्न में गेहूं की मात्रा बढ़ाई जाना हितकारी होगा। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने यह सुझाव नई दिल्ली में केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी से भेंट के दौरान दिया। केन्द्रीय खाद्य मंत्री श्री जोशी को मध्यप्रदेश में उपार्जन केंद्रों में सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के संबंध में किये जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। साथ ही बताया कि प्रदेश में विकेन्द्रीयकृत उपार्जन योजना के तहत समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं में से सरप्लस मात्रा उपार्जन अवधि के पश्चात् गोदामों से सी-मोड में भारतीय खाद्य निगम को प्रदान की जाती है। वर्ष 2021-22 के लिये 2.89 प्रति क्विंटल लोडिंग एव हेण्डलिंग व्यय की स्वीकृति नहीं की गई थी। मंत्री श्री राजपूत ने अनुरोध किया कि भारतीय खाद्य निगम द्वारा गोदामों से उठाव किये गये गेहूं की लोडिंग एवं हेण्डलिंग व्यय की राशि अभी तक स्वीकृत नहीं की गई है, जिसे शीघ्र जारी किया जाये। 1500 करोड़ का अनुदान भुगतान जल्द कराने का आग्रह खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने केंद्रीय खाद्य मंत्री श्री जोशी को अवगत कराया कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत वर्ष 2020-21 से 2022-23 तक की अवधि में पात्र परिवारों को वितरित किये गये खाद्यान्न- का डाटा भारत सरकार के अन्न वितरण पोर्टल पर उपलब्ध है। इस डाटा को भारत सरकार के सेंट्रल रिपोजिटरी पोर्टल पर अपलोड करने की अनुमति देने के साथ 1500 करोड़ के अनुदान राशि के बकाया भुगतान को जल्द किये जाने का अनुरोध किया। इस पर केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने अधिकारियों से चर्चा कर जल्द भुगतान कराये जाने का भरोसा खाद्य मंत्री श्री राजपूत को दिया। श्री राजपूत ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री से खरीफ विपणन वर्ष 2014-15 से 2018-19 तक के समर्थन मूल्य पर उपार्जित 2.95 लाख मीट्रिक टन मोटे अनाज के उपार्जन प्लान की स्वीकृति दिये जाने का अनुरोध किया है। भारत सरकार की नीति के अनुसार समर्थन मूल्य पर उपार्जित मोटे अनाज का वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत पात्र परिवारों को गेहूं के आवंटन के विरूद्ध वितरण कराया जा चुका है। मंत्री श्री राजपूत ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उपार्जन प्लान की स्वीकृति प्राप्त न होने से वितरित किये गये मोटे अनाज पर मिलने वाली अनुदान की राशि लंबित है, जिसका शीघ्र भुगतान कराया जाये। उपार्जन पर कमीशन की राशि बढ़ाये जाने का किया अनुरोध केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री जोशी से मुलाकात के दौरान खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं को गेहूं एवं धान के उपार्जन पर मिलने वाले कमीशन में 2013 के बाद से कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि अन्य राज्यों को कमीशन मद में अधिक राशि का भुगतान किया जा रहा है। समितियों को उपार्जन कार्य में हो रहे व्यय की प्रतिपूर्ति न होने से हो रही हानि से अवगत कराते हुये खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने केन्द्र सरकार से उपार्जन पर कमीशन की राशि 43 रूपये प्रति क्विंटल किये जाने का अनुरोध किया। केन्द्री्य खाद्य मंत्री श्री जोशी ने इस पर अधिकारियों से चर्चा कर जल्द राशि बढ़ाये जाने का आश्वासन दिया। श्री राजपूत ने उपार्जन केन्द्रों पर खाद्यान्न की भराई, तुलाई, छापा एवं लोडिंग कार्य के लिये गेहूं और धान पर 17.72 रूपये लेबर व्यय का भुगतान 23 रूपये प्रति क्विंटल बढ़ाये जाने का भी आग्रह किया है।  

बालाघाट की बड़ी उपलब्धि: आयुष्मान कार्ड बनाने में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान

भोपाल  आयुष्‍मान योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाने का विशेष अभियान पूरे देश में 14 अप्रैल 2025 से प्रारंभ किया गया है। इस अभियान में सर्वाधिक आयुष्‍मान कार्ड बनाने के मामले में बालाघाट जिला 81 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश में पहले स्‍थान पर है। बैतूल जिला 78 प्रतिशत के साथ दूसरे एवं अनुपपुर जिला 77 प्रतिशत के साथ तीसरे स्‍थान पर है। बालाघाट जिले में कलेक्‍टर श्री मृणाल मीणा के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ के निर्देशन में इस कार्य को एक मिशन के रूप में किया जा रहा है। बालाघाट जिले में 1 लाख 31 हजार 468 पात्र लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाये जाने है। 16 जुलाई तक जिले में 1 लाख 7 हजार 54 लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाकर बालाघाट ने पहला स्थान पाया है। मध्यप्रदेश में 16 जुलाई तक 5 लाख 66 हजार 967 आयुष्‍मान कार्ड बनाये का लक्ष्य है। जिसमें से केवल बालाघाट जिले में 1 लाख 7 हजार 54 कार्ड बनाये गए है। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश में बने हर पांच आयुष्‍मान कार्ड में एक कार्ड बालाघाट जिले का बना है। इस उपलब्धि को हासिल करने में स्‍वास्‍थ्‍य, ग्रामीण विकास एवं महिला एवं बाल विकास विभाग का विशेष योगदान रहा है। आयुष्‍मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के व्यक्ति को एक साल में 5 लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। योजना में आयुष्‍मान कॉर्ड धारक व्‍यक्ति का उपचार योजना में पंजीकृत अस्‍पताल में किया जाता है। मरीज के उपचार पर आए खर्च की राशि शासन द्वारा संबंधित अस्‍पताल को प्रदान कर दी जाती है।

वाल्मी में तीन दिवसीय अल्पविराम आनंद कार्यशाला संपन्न

भोपाल आनंद विभाग द्वारा तीन दिवसीय  'आनंदम सहयोगी' प्रशिक्षण कार्यशाला का 16 से 18 जुलाई 2025 तक वाल्मी, भोपाल में आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों ने नकारात्मक विचार छोंड़ने तथा व्यवहार से रिश्तों में सुधार करने का निर्णय लिया। प्रतिभागियों ने कहा कि सगे संबंधियों को भी इस  कार्यशाला से जुड़ने का अवसर मिले जिससे कि उनके जीवन में आनंद का प्रसार हो। राज्य आनंद संस्थान द्वारा ‘खाद्य, नागरिक, आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों  के लिए कार्यक्रम में भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया गया, जिससे वे जनसेवा के रूप में बेहतर योगदान दे सकें। प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य, कार्य में आनंद, सकारात्मक सोच तथा सामूहिक सहभागिता जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया।  विभिन्न जिलों से  ‘खाद्य, नागरिक, आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के कुल 56 अधिकारी/कर्मचारी  इस कार्यशाला में शामिल हुए। सत्र संचालन में राज्य आनंद संस्थान के मास्टर ट्रेनर श्री गणेश कनाडे, श्री संतोष तिवारी, श्रीमती मुक्ति राय, श्रीमती पुष्पेंद्र सिसोदिया , सुश्री श्रद्धा ठाकुर तथा कार्यक्रम संयोजक के रूप में श्री प्रदीप महतो उपस्थित रहे।  राज्य आनंद संस्थान, आनंद विभाग के डायरेक्टर श्री सत्य प्रकाश आर्य ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया।  

विश्व मंच पर चमका मध्य प्रदेश: सीएम यादव के विदेश दौरे से खुले निवेश और विकास के द्वार

भोपाल 'मैंने ऐसा कभी नहीं देखा कि किसी नेता ने 30 मिनट की चर्चा के बाद एमओयू साइन कर लिया हो.., मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, बेहिचक निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे.., एमपी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, हर सेक्टर में निवेशकों का स्वागत है…, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.., जोत से जोत जले.., एमपी और बार्सिलोना जुड़वा भाई हैं..।' ये चंद भाषणों की लाइनें हैं जो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई-स्पेन की यात्रा से निकलकर आई हैं। इन लाइनों से यह पता चलता है कि सीएम डॉ. मोहन यादव एक प्रभावी लीडर के रूप में उभर रहे हैं। पहले यूके-जर्मनी-जापान यात्रा और फिर दुबई-स्पेन यात्रा ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वैश्विक उद्योगपतियों पर उनका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनकी ताजा यात्रा को मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।   गौरतलब है कि सीएम डॉ. यादव स्पेन पहुंचे तो उनका भारतीयों ने जोरदार स्वागत किया। उन्होंने मैड्रिड और बार्सिलोना में यहां विश्व की अग्रणी कंपनियों के शीर्ष पदाधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सीएम डॉ. यादव का अंदाज उद्योगपतियों को बेहद पसंद आया। निवेशक मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों से संतुष्ट दिखाई दिए। स्पेन की नामी सेनेटरीवेयर कंपनी रॉका ग्रुप के कॉर्पोरेट संचालन निदेशक पाउ अबेलो ने सीएम डॉ. यादव को देवास स्थित कंपनी की इकाई ‘रॉका बाथरूम प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ की जानकारी की। कंपनी ने देवास में 164.03 करोड़ का निवेश किया है, साथ ही 400 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया है। इस जानकारी के बीच कंपनी ने प्रदेश के मुखिया को यूनिट के विस्तार और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। लालीगा के मैचों में हो सकता है चमत्कार दूसरी ओर, सीएम डॉ. यादव ने स्पोर्ट्सफन टीवी एसएल के सह-संस्थापक सिद्धार्थ तिवारी के साथ भी बैठक की। इसमें तिवारी ने उन्हें सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग से मध्यप्रदेश में फुटबॉल की प्रतिभाओं को खोजा जा सकता है। इसी तरह अमेक (Association Multisectorial de AMEC) के निदेशक एलेजांद्रो गैलेगो अल्काइडे ने सीएम डॉ. यादव से कहा कि उनकी कंपनी राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग, मीडिया एनालिटिक्स, एआई आधारित संचार रणनीतियों औरै अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की पहचान को सशक्त करने की दिशा में सहयोग कर सकती है। इस यात्रा के दौरान सबसे खास रहा उनका लालीगा लीग का दौरा। हो सकता है कि आगामी लालीगा के मैचों में दुनियाभर के करोड़ों दर्शकों को मध्यप्रदेश के सांची और भीमबैठका जैसे टूरिज्म स्पॉट देखने को मिलें। अगर वाकई ऐसा होता है तो प्रदेश में टूरिज्म सेक्टर में न केवल टूरिस्टों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि भारी रोजगार भी मिलेगा। दुबई के निवेशक भी हुए प्रभावित स्पेन की ही तरह सीएम डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा भी सफल रही। वे यहां भी 13 से 15 जुलाई के बीच विभिन्न व्यापारिक बैठकों और निवेश संवाद कार्यक्रमों में शामिल हुए। उनकी यह यात्रा मध्यप्रदेश के विकास यात्रा की एक मजबूत नींव साबित होगी। राज्य की मोहन सरकार ने इस विकास यात्रा को इस भावना के साथ डिजाइन किया था कि यह राज्य के आर्थिक विकास और वैश्विक साझेदारियों के लिए एक मजबूत आधार बने। दुबई में सीएम डॉ.यादव ने डीपी वर्ल्ड, जाएफजा (जेबेल अली फ्री ज़ोन), भारतीय उद्यमियों और निवेशकों के साथ कई रणनीतिक बैठकें की। एक बैठक में भारत मार्ट जैसे महत्वाकांक्षी वैश्विक व्यापार केंद्र को लेकर सहमति भी बनी। अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि ने भी मध्यप्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।