samacharsecretary.com

भारत-पाक सीमा पर सुरक्षा होगी मजबूत, बाखासर से तनोट तक तारबंदी के साथ बनेगी डामर सड़क

बाड़मेर भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बाखासर रण से जैसलमेर के तनोट तक तारबंदी के समानांतर करीब 225 किलोमीटर लंबी डामर सड़क बनाई जा रही है। रेतीले धोरों और दुर्गम रास्तों के बीच बनने वाली इस सड़क से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को गश्त में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अभी तक तारबंदी के पास कई हिस्सों में जवानों को कच्चे और रेतीले रास्तों से पेट्रोलिंग करनी पड़ती है। धूल और दुर्गम भूभाग के कारण आवाजाही में परेशानी होती है। डामर सड़क बनने से सीमावर्ती चौकियों तक पहुंचना और नियमित गश्त करना आसान होगा। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने परियोजना के लिए तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए है। करीब 260 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के तहत मुनाबाव के पास निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यहां करीब 25 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी है । सीमावर्ती गांवों तक पहुंच भी होगी आसान बाखासर, मुनाबाव और तनोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुरक्षा के साथ स्थानीय जरूरतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। बेहतर आधारभूत ढांचे से निर्माण, रखरखाव और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्यों में सहूलियत मिल सकती है। राजस्थान की पाकिस्तान से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा करीब 1.070 किलोमीटर लंबी है। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर प्रमुख सीमावर्ती जिले हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामरिक सुरक्षा को मिलेगी मजबूती प्रदेश का बड़ा सीमावर्ती हिस्सा थार के रेगिस्तान में आता है। दूर-दूर तक फैले रेतीले इलाके, विरल आबादी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां सीमा सुरक्षा को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में तारबंदी के समानांतर सड़क निर्माण सामरिक दृष्टि से अहम है। बेहतर संपर्क से निगरानी व्यवस्था को मजबूत होगी। संदिग्ध तथा तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयासों को भी इससे सहारा मिलने की उम्मीद है।

जयपुर को मिला नया शॉपिंग हब, पैसिफिक मॉल में 195 ब्रांड्स के साथ हुई शुरुआत

जयपुर  जयपुर के मानसरोवर में रविवार को खुले पैसिफिक मॉल में पहले ही दिन लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। वीकेंड पर खरीदारी करने और घूमने निकले लोग परिवार और दोस्तों के साथ मॉल पहुंचे। सुबह से ही यहां लोगों की आवाजाही शुरू हो गई और मॉल के अलग-अलग फ्लोर पर चहल-पहल नजर आई। युवाओं से लेकर बच्चों और परिवारों तक में इस नए मॉल को लेकर उत्साह दिखा। शॉपिंग के साथ खाने-पीने और मनोरंजन के विकल्प मिलने से यह जगह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। फैशन, फूड और एंटरटेनमेंट के लिए एक ही जगह करीब 11 एकड़ में फैला पैसिफिक मॉल अपने बड़े आकार और ब्रांड्स की रेंज के चलते खास है। यहां खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को कपड़ों, जूतों, एक्सेसरीज और लाइफस्टाइल से जुड़े कई विकल्प मिलेंगे। मॉल में उद्घाटन के समय करीब 195 ब्रांड्स उपलब्ध रहे। इनमें यूनिक्लो, एचएंडएम, मार्क्स एंड स्पेंसर, मैंगो, नाइकी, एडिडास और न्यू बैलेंस जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं। वहीं, माइकल कोर्स, कोच, ह्यूगो बॉस और विक्टोरियाज सीक्रेट जैसे ब्रांड्स भी यहां मौजूद हैं। इस तरह अलग-अलग पसंद और जरूरतों के हिसाब से लोगों को खरीदारी के कई विकल्प एक ही जगह मिल सकेंगे। मॉल में घूमने आने वाले लोग फैशन से जुड़े नए कलेक्शन देख सकते हैं और अपनी पसंद के ब्रांड्स की खरीदारी कर सकते हैं। 450 से ज्यादा स्टोर्स जोड़ने की योजना कंपनी के अनुसार, मॉल का कुल निर्मित क्षेत्र करीब 30 लाख वर्गफुट है, जबकि रिटेल स्पेस लगभग 18 लाख वर्गफुट में फैला है। यहां सात रिटेल फ्लोर और दो होटल फ्लोर बनाए गए हैं। फिलहाल करीब 195 ब्रांड्स के साथ इसकी शुरुआत हुई है। आने वाले समय में यहां 450 से ज्यादा स्टोर्स शुरू करने की योजना है। इससे भविष्य में ग्राहकों के लिए खरीदारी के विकल्प और बढ़ सकते हैं। 'द स्पिरिट ऑफ राजस्थान' का मॉडर्न अंदाज मॉल को 'द स्पिरिट ऑफ राजस्थान' थीम पर तैयार किया गया है। उद्घाटन के मौके पर पैसिफिक ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक बंसल भी मौजूद रहे। पहले दिन की रौनक ने साफ कर दिया कि जयपुर में शॉपिंग और एंटरटेनमेंट के नए ठिकानों को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।

राजस्थान में माइनिंग विवाद ने लिया हिंसक रूप, पूर्व विधायक की मौत के बाद भारी पुलिस बल तैनात

 भरतपुर राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर थाना क्षेत्र में पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की मौत की यह पूरी कहानी महज़ एक अचानक हुआ हादसा नहीं है, बल्कि यह माइनिंग, स्थानीय रसूख और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से सुलग रहे गंभीर आक्रोश की एक बड़ी और डरावनी कहानी है। पूर्वी राजस्थान के इस चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम ने पूरे प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आखिर किन परिस्थितियों में एक पूर्व विधायक को अपनी जान गंवानी पड़ी और इस खूनी संघर्ष के पीछे की असली वजह क्या थी, इसकी पूरी परतें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले कौन थे और यह विवाद इतना कब और कैसे बढ़ा, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर कई बड़े खुलासे हुए हैं। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस हिंसक झड़प के पीछे असल साजिश किसकी थी? किसने किया हमला? 70 से 80 लोगों की उग्र भीड़ का धावा! इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 की शाम को हुई, जब भरतपुर के वैर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भौंडा और रायपुर गांव के करीब 70 से 80 स्थानीय ग्रामीण और अज्ञात लोग लाठी-डंडों, पत्थरों और घातक हथियारों से लैस होकर क्रेशर प्लांट पर अचानक आ धमके। क्रेशर से सटी पहाड़ी पर जब मशीनों के जरिए खनन का काम चल रहा था, तब पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना वहीं मौजूद थे। उग्र भीड़ ने वहां पहुंचते ही सीधा हमला बोल दिया और पूर्व विधायक तथा उनके निजी सुरक्षाकर्मी (बॉडीगार्ड) गगन शर्मा को बुरी तरह घेरकर ताबड़तोड़ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस हिंसक हमले के बीच भीड़ की तरफ से फायरिंग भी की गई, जिसमें अतर सिंह भड़ाना को गोली लगी। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद गोली लगने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है और इसे मेडिकल रिपोर्ट तथा जांच का विषय बताया है क्यों हुआ यह खूनी संघर्ष? क्या है 2 साल पुराना माइनिंग विवाद? इस पूरे खूनी संघर्ष की मुख्य जड़ माइनिंग लीज (खनन पट्टा) और क्रेशर प्लांट के संचालन का रास्ता है, जो पिछले काफी समय से विवादों में था। वैर थाना पुलिस के मुताबिक, यह कोई रातों-रात उपजा विवाद नहीं है, बल्कि भौंडा और रायपुर गांव के ग्रामीणों तथा क्रेशर संचालक (पूर्व विधायक के परिवार) के बीच पिछले करीब 2 वर्षों से तनाव का दौर चल रहा था। यह माइनिंग लीज पूर्व विधायक की पत्नी कमलेश भड़ाना के नाम पर आवंटित थी। स्थानीय ग्रामीणों का लंबे समय से यह आरोप था कि इस क्रेशर और माइनिंग गतिविधियों के कारण उनके पारंपरिक रास्ते बंद हो रहे हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और गांवों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसी मांग को लेकर ग्रामीण पिछले दो साल से लगातार धरने और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार की शाम को जब प्लांट पर दोबारा खनन कार्य और मशीनें सुचारू की गईं, तो लंबे समय से सुलग रहा ग्रामीणों का गुस्सा अचानक ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा और मामूली कहासुनी कुछ ही मिनटों में हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस की भूमिका और इंटेलिजेंस फेलियर! इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जब लगभग एक घंटे तक क्रेशर प्लांट और भौंडा गांव के बीच भारी बवाल और तनाव का माहौल बना रहा, तब सूचना मिलने के बाद वैर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायल पूर्व विधायक और उनके सुरक्षाकर्मी को संभालकर वैर के उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर रेफर किया गया था। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि चूंकि यह माइनिंग विवाद पिछले दो वर्षों से चल रहा था और ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे थे, तो स्थानीय खुफिया तंत्र (इंटेलिजेंस) और पुलिस को इस बात का अंदेशा क्यों नहीं हुआ कि यहां कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है? रविवार को जब विवादित प्लांट पर काम शुरू हुआ, तब वहां पुलिस बल की मौजूदगी का न होना प्रशासनिक ढिलाई को साफ तौर पर दर्शाता है। भारी पुलिस बल तैनात और ताबड़तोड़ दबिश पूर्व विधायक की मौत की दुखद खबर जैसे ही भरतपुर संभाग और उनके गृह क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और भारी तनाव का माहौल बन गया। किसी भी तरह की जातीय, सामाजिक या राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए। भौंडा गांव, क्रेशर साइट और स्थानीय अस्पतालों के आसपास भारी संख्या में पुलिस जाब्ता और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भरतपुर मुख्यालय से अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और विशेष पुलिस फोर्स को वैर भेजा गया है। पुलिस अब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हमलावर ग्रामीणों की पहचान करने में जुटी है तथा मुख्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

राजस्थान में 3-4 दिन बिगड़ा रहेगा मौसम, बीकानेर-श्रीगंगानगर समेत इन जिलों में बारिश की चेतावनी

जयपुर  राजस्थान में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश और तेज ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया है। रविवार सुबह श्रीगंगानगर सहित आसपास के इलाकों में रुक-रुककर बारिश हुई। इस दौरान कई जगह बिजली भी चमकी। मौसम में आए बदलाव से तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्दी का असर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग ने बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और शेखावाटी क्षेत्र के जिलों में मेघगर्जन, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान के मध्य भागों के ऊपर वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर परिसंचरण तंत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में ट्रफ लाइन सक्रिय है। अरब सागर की खाड़ी से हवाओं के साथ नमी मिलने के कारण प्रदेश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला है। इन जिलों में 3-4 दिन मौसम रहेगा खराब बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और शेखावाटी क्षेत्र के जिलों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान और उत्तरी हिस्सों में अगले तीन से चार दिन तक मौसम की ऐसी गतिविधियां जारी रह सकती हैं। श्रीगंगानगर में बारिश, करनपुर में 20 एमएम बरसात श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्रों में शनिवार देर रात से रुक-रुककर बारिश हो रही है। रविवार सुबह कई इलाकों में बारिश के साथ बिजली चमकने से मौसम में ठंडक बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे के दौरान बीकानेर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान श्रीगंगानगर के करनपुर में सर्वाधिक 20 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। नरमा की फसल को लेकर चिंता बढ़ी सूरतगढ़ क्षेत्र में भी बूंदाबांदी हुई। इससे नरमा की कटाई का काम प्रभावित हुआ है। किसानों को चिंता है कि यदि बारिश का दौर जारी रहा तो खेतों में तैयार फसल की कटाई और उपज को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है। फलोदी के ग्रामीण इलाकों में बढ़ी सर्दी पश्चिमी राजस्थान के फलोदी जिले के देणोक, आऊ, घंटियाली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी रविवार को मौसम का असर दिखाई दिया। सुबह से आसमान में काले बादल छाए रहे और दिनभर रुक-रुककर तेज ठंडी हवाएं चलती रहीं। दोपहर बाद हवा की रफ्तार बढ़ने से धूल भरी आंधी जैसा माहौल बन गया। इससे खेतों में काम कर रहे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बादलों और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट के साथ सर्दी का एहसास बढ़ गया। दिन के साथ रात के तापमान में भी गिरावट मौसम में बदलाव का असर प्रदेश के कई शहरों में दर्ज किया गया है। पिछले 24 घंटे के दौरान जोधपुर, फलोदी, बीकानेर, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, कोटा, सिरोही और हनुमानगढ़ में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आई। दिन में गर्मी कम होने के साथ रातें भी ठंडी होने लगी हैं। शनिवार को प्रदेश के 10 शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। उदयपुर में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रहा। 13 और 14 अक्टूबर को फिर बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, 12 अक्टूबर को भी उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में बादल छाए रह सकते हैं। वहीं, 13 और 14 अक्टूबर को एक कमजोर मौसम प्रणाली के प्रभाव से बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मेघगर्जन, 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। किसानों के लिए मौसम विभाग की सलाह बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले आसमान के नीचे रखी तैयार फसलों को भीगने से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है। कृषि उपज मंडियों में खुले में रखे अनाज और अन्य जिंसों को भी बारिश से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच किसानों को आने वाले दिनों में बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर कटाई और उपज के भंडारण की तैयारी करने की जरूरत है।

राजस्थान में किसानों को सालाना ₹12,000 सम्मान निधि, BJP ने पंचायत चुनाव के लिए किए बड़े ऐलान

जयपुर राजस्थान में आगामी त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने ग्रामीण विकास और किसानों तथा युवाओं के कल्याण पर केंद्रित अपना आधिकारिक चुनावी घोषणा पत्र 'ग्राम विकास संकल्प पत्र' जारी कर दिया है। जयपुर स्थित पार्टी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह-प्रभारी कविता पाटीदार, कुलजीत सिंह चहल और संगठन महामंत्री ने संयुक्त रूप से इस संकल्प पत्र का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का मुख्य उद्देश्य गांवों का सर्वांगीण विकास कर वहां से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकना है। गांवों में ही मिलेंगी शहर जैसी सुविधाएं, नहीं करना पड़ेगा पलायन संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पिछले 30-40 सालों में लोगों ने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए गांवों से शहरों की तरफ रुख किया है, जिससे शहरों पर आबादी का दबाव बढ़ा है। भाजपा सरकार अब ऐसी नीति पर काम कर रही है जिससे ग्रामीणों को इलाज और बुनियादी जरूरतों के लिए बार-बार शहर न जाना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर ग्राम पंचायत में मूलभूत सुविधाओं जैसे- पक्की सड़कें, 24 घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य सरकार का लक्ष्य गांवों में ही संपूर्ण विकास मॉडल तैयार करना है ताकि वहां के नागरिक अपने गृहनगर में ही सम्मानजनक जीवन बिता सकें। युवाओं के लिए 'अटल ज्ञान केंद्र' और हर पंचायत में खेल मैदान गांव के युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए संकल्प पत्र में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सीएम भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक भव्य खेल मैदान (Playground) विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही, गांवों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए हर ग्राम पंचायत में 'अटल ज्ञान केंद्र' खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर हाई-स्पीड इंटरनेट समेत तमाम डिजिटल और अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि युवा गांव में रहकर ही अपनी कोचिंग और ऑनलाइन पढ़ाई पूरी कर सकें। जल परियोजनाओं पर जोर किसानों और पशुपालकों के कल्याण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालकों के लिए द्वार तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से मोबाइल वैन सेवा की शुरुआत की गई है। राजस्थान के लगभग 1 करोड़ से अधिक जरूरतमंदों को खाद्यान्न सुरक्षा योजना से जोड़ा गया है और बेघर लोगों को पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं पानी के संकट पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईआरसीपी (ERCP) और यमुना जल समझौते जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं पर पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से काम शुरू हुआ है। 10 बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से 4 का सीधा लाभ राजस्थान के किसानों को मिलने जा रहा है। सीएम ने यह भी रेखांकित किया कि बीजेपी ने अपने विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र के लगभग 78 प्रतिशत वादों को रिकॉर्ड समय में पूरा कर दिखाया है, और यही पारदर्शिता पंचायत चुनावों में भी कायम रहेगी। बीजेपी के 'ग्राम विकास संकल्प पत्र' के 10 बड़े संकल्प गांवों से पलायन रोकना और शहरी सुविधाएं: सरकार का मुख्य ध्येय गांवों में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों की ओर रुख न करना पड़े। हर ग्राम पंचायत में अटल ज्ञान केंद्र: गांवों के छात्र-छात्राओं और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूर न जाना पड़े, इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में हाई-स्पीड इंटरनेट युक्त 'अटल ज्ञान केंद्र' खोले जाएंगे। प्रत्येक पंचायत में आधुनिक खेल मैदान: ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य की हर ग्राम पंचायत में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी: किसानों के आर्थिक संबल को मजबूत करने के लिए किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर 12,000 रुपए सालाना किया जा रहा है, जिससे अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। सिंचाई और जल परियोजनाओं का धरातलीकरण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ईआरसीपी और यमुना जल समझौते से जुड़ी बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है, जिससे प्रदेश के कई जिलों को पानी मिलेगा। पशुपालकों के लिए मोबाइल चिकित्सा सेवा: गांवों और ढाणियों में पशुधन की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए विशेष मोबाइल पशु चिकित्सा वैन की शुरुआत की गई है, जो घर-द्वार पर इलाज उपलब्ध कराएगी। हर बेघर को पक्का आवास: ग्रामीण इलाकों में जिनके पास रहने के लिए पक्के मकान नहीं हैं, उन्हें आवास योजनाओं के तहत प्राथमिकता से पक्के आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। खाद्यान्न सुरक्षा योजना का विस्तार: राजस्थान के लगभग 1 करोड़ से अधिक जरूरतमंद और पात्र परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा स्कीम से जोड़ा गया है, ताकि किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े। विधानसभा संकल्प पत्र की तर्ज पर पारदर्शिता: पार्टी ने वादा किया है कि जिस प्रकार विधानसभा चुनाव के 78 प्रतिशत वादों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है, उसी तर्ज़ पर पंचायत स्तर पर भी सभी विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे होंगे। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर रोक: गांव के विकास के लिए आने वाला बजट और योजनाएं सीधे धरातल तक पहुंच सकें, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और भ्रष्टाचार पर सख्त रोक लगाई जाएगी।

राजस्थान में LPG संकट से बढ़ी मुश्किलें, घरेलू कनेक्शन नहीं मिलने पर महंगा कमर्शियल सिलेंडर लेने की मजबूरी

जयपुर राजस्थान में नए घरेलू गैस कनेक्शन नहीं मिलने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। करीब सात महीने से नए घरेलू गैस कनेक्शन जारी करने पर रोक के कारण उन परिवारों को इंतजार करना पड़ रहा है, जो नया घर बनाने या उसमें प्रवेश करने के बाद रसोई शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के सामने खाना बनाने के लिए गैस की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है। 1400 गैस एजेंसियों पर नए कनेक्शन के लिए पहुंच रहे लोग प्रदेश में करीब 1400 गैस एजेंसियों पर नए घरेलू कनेक्शन के लिए लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में नए घरेलू गैस कनेक्शन जारी नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते कुछ परिवार व्यावसायिक गैस कनेक्शन लेने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में बड़ा अंतर घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत में बड़ा अंतर होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम का घरेलू गैस सिलेंडर 945 रुपए में मिलता है, जबकि 10 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 1650 रुपए बताई गई है। ऐसे में व्यावसायिक सिलेंडर लेना लोगों के लिए महंगा विकल्प साबित हो सकता है मंत्रालय के राहत के ऐलान से भी नहीं मिली राहत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान पैदा हुए गैस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च में नए घरेलू गैस कनेक्शन जारी करने पर रोक लगा दी थी। 25 जून को मंत्रालय की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद नए कनेक्शन शुरू होने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को राहत नहीं मिली। जल्द कदम उठाने की मांग, केंद्र को लिखा पत्र नए घरेलू गैस कनेक्शन नहीं मिलने से परेशान लोगों ने जल्द समाधान की मांग की है। रिपोर्ट में राजस्थान राज्य स्तरीय समन्वयक (गैस कंपनियां) मनोज गुप्ता के हवाले से कहा गया है कि इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से कदम उठाया जाएगा। वहीं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार, नए कनेक्शन जारी करने पर लगी रोक हटाने का प्रयास किया गया है। अब लोगों को इंतजार है कि घरेलू गैस कनेक्शन की प्रक्रिया कब दोबारा शुरू होगी और उन्हें कब राहत मिलेगी।

तरंग शक्ति अभ्यास में भारत की ताकत देख प्रभावित हुए विदेशी एयर चीफ, ऑपरेशन सिंदूर पर भी चर्चा

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' के दौरान दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और शीर्ष वायुसेना अधिकारियों की नजरें भारत के आसमान पर टिकी रहीं। जोधपुर के रेगिस्तानी इलाके में आयोजित इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे यूरोपीय मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों ने भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ अपने परिचालन समन्वय और उच्च स्तरीय पेशेवर क्षमता की खुलकर सराहना की है। जर्मन और फ्रेंच एयर चीफ्स ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के आसमान में उड़ान भरना बिल्कुल वैसा ही अनुभव देता है जैसा कि यूरोप में उड़ान भरते समय महसूस होता है। भारतीय व्यवस्था को बताया शानदार जोधपुर एयरवेस पर आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जर्मन वायुसेना कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गुंटर कात्ज ने अपने पायलटों के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने एयरक्रू से जोधपुर के मरुस्थलीय इलाकों में उड़ान भरने के अनुभव के बारे में पूछा, तो पायलटों का जवाब था कि उन्हें यूरोप में अपने होम बेस और भारत में मिशन को अंजाम देने में कोई अंतर महसूस नहीं हुआ। जर्मन एयर चीफ के अनुसार, भारत में भी बिल्कुल वही सेटअप, वही प्रक्रियाएं और वही फ्लो है जो वे अपने देश में अपनाते हैं। इसी तरह फ्रांस के सशस्त्र बलों के इंस्पेक्टर जनरल, जनरल स्टीफन ग्रोएन ने भी अपने राफेल स्क्वाड्रन कमांडर के हवाले से यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच वर्षों से चले आ रहे मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और नियमित संयुक्त अभ्यासों की वजह से बहुराष्ट्रीय स्तर के ऐसे बड़े अभियानों में किसी भी प्रकार की कोई रुकावट या परेशानी नहीं आती है। अमरिकी वायुसेना ने भी भारतीय नेतृत्व और अनुभवों को सराहा यूएस एयर फोर्स पेसिफिक एयर फोर्सेज (PACAF) के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर ने भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान 'ऑपरेशन सिंदूर' के अनुभवों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। श्नाइडर ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों के बीच एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना सभी मित्र देशों की सेनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य की चुनौतियों से मिलकर निपटा जा सके अभ्यास में छाया 'ऑपरेशन सिंदूर' इस बहुराष्ट्रीय युद्ध अभ्यास के दौरान अभ्यास निदेशक एयर वाइस मार्शल राज ठाकुर ने एक विशेष जानकारी साझा करते हुए बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर प्रतिभागी देशों ने काफी गहरी रुचि दिखाई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा 7 मई 2025 को सीमा पार संचालित 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत लश्कर-ए-तैयाबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के 9 बड़े ठिकानों को तबाह कर 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर किया गया था। सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (SMEE) सत्रों के दौरान भारतीय वायुसेना ने मित्र देशों के अधिकारियों को इस सफल और रणनीतिक ऑपरेशन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी, जिसे सभी देशों ने बेहद ध्यान से सुना और सराहा।

नवरात्र पर मातम में बदली खुशियां, पल्लू-नोहर हाईवे पर पिकअप ने 4 युवकों को कुचला; 3 की मौत

पल्लू (हनुमानगढ़)  राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में पल्लू-नोहर मेगा हाईवे पर रविवार अलसुबह दर्दनाक हादसा हो गया। मां ब्रह्माणी के दर्शन करने के लिए पैदल जा रहे युवकों के जत्थे को पीछे से तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी ने टक्कर मार दी। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को उपचार के लिए रेफर किया गया है। हादसे के बाद इलाके में शोक की लहर फैल गई। दर्शन के लिए पैदल निकले थे युवक थाना प्रभारी जगदीश के अनुसार, रावतसर तहसील के किकरालिया गांव से युवकों का एक जत्था रविवार अलसुबह मां ब्रह्माणी के दर्शन करने के लिए पैदल रवाना हुआ था। प्रथम शारदीय नवरात्र के अवसर पर युवक मंदिर में धोक लगाकर मन्नत मांगने जा रहे थे। इसी दौरान पल्लू से करीब 16 किलोमीटर दूर झेदासर और माहेला गांव के बीच पल्लू-नोहर मेगा हाईवे पर हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, पैदल जा रहे युवकों को पीछे से तेज रफ्तार में आई पिकअप गाड़ी ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। तीन युवकों की मौत, एक की हालत गंभीर हादसे में किकरालिया गांव निवासी अशोक (21) पुत्र राजू, अजय (27) पुत्र हंसराज और मोहित (22) पुत्र कुलदीप की मौत हो गई। वहीं, रुपेश (25) पुत्र दयाराम गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को उपचार के लिए रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुए चारों युवक एक ही परिवार के चाचा-ताऊ के बेटे थे। इस घटना से परिवार में मातम छा गया। पिकअप छोड़कर चालक फरार हादसे के बाद पीछे से आ रहे एक कार चालक ने पिकअप गाड़ी का पीछा किया और उसे रुकवा लिया। हालांकि, पिकअप चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाई और आवश्यक कार्रवाई की। पुलिस ने तीनों मृतकों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए। मृतकों के परिजनों ने पुलिस थाने में मर्ग दर्ज करवाने के साथ अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस अब हादसे के संबंध में जांच कर रही है और फरार चालक की तलाश की जा रही है।

राजस्थान पंचायत चुनाव में महिला आरक्षण अहम, राजसमंद के 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित

राजसमंद जिला प्रमुख की कुर्सी पर किसका कब्जा होगा, इसकी सियासी पटकथा जिला परिषद के चुनाव से ही लिखी जाएगी। राजसमंद में जिला परिषद के 29 वार्डों का आरक्षण तय होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के सामने उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति तक कई चुनौतियां होंगी। जिला प्रमुख का पद अनारक्षित है, लेकिन जिला परिषद के 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने से महिला उम्मीदवारों और चुनाव जीतकर आने वाली महिला सदस्यों की भूमिका भी अहम रहने वाली है। ऐसे में जिला प्रमुख की कुर्सी पर नजर लगाए बैठे दावेदारों को अपने वार्ड में जीत के साथ जिला परिषद में समर्थन का गणित भी साधना होगा। महिला आरक्षण ने चुनावी समीकरणों में एक महत्वपूर्ण पहलू जोड़ दिया है। दोनों प्रमुख दलों के लिए महिला वार्डों में मजबूत उम्मीदवार उतारना और जिला परिषद में अधिक से अधिक सदस्य जिताना अहम रहेगा। टिकट वितरण से लेकर चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले समीकरणों तक, हर कदम जिला प्रमुख की कुर्सी की लड़ाई को प्रभावित कर सकता है। राजसमंद जिला परिषद के कुल 29 वार्डों में अलग-अलग श्रेणियों के तहत महिला आरक्षण निर्धारित किया गया है। इनमें सामान्य महिला के आठ, ओबीसी महिला के दो, एससी महिला के दो और एसटी महिला के दो वार्ड शामिल हैं। इस तरह कुल 14 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन वार्डों में जीत दर्ज करने वाले सदस्य जिला परिषद की राजनीति का हिस्सा बनेंगे। जिला प्रमुख के चुनाव में उनकी भूमिका कितनी अहम होगी, यह चुनाव परिणाम और राजनीतिक दलों के संख्याबल पर निर्भर करेगा। हालांकि, महिला आरक्षण को जिला प्रमुख की कुर्सी का सीधा फैसला मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन चुनावी रणनीति बनाते समय इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकेगा। भाजपा-कांग्रेस की असली परीक्षा टिकट वितरण में जिला परिषद चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के सामने सबसे पहली चुनौती सही उम्मीदवार चुनने की होगी। महिला आरक्षित वार्डों में टिकट के दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा रहेगी, वहीं अन्य श्रेणियों के वार्डों में भी पार्टी को स्थानीय समीकरणों और जीत की संभावनाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। भाजपा और कांग्रेस के लिए टिकट वितरण केवल प्रत्याशियों की सूची तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा। उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता और अपने क्षेत्र में समर्थन जुटाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। टिकट किसे मिलता है और किस दावेदार को इंतजार करना पड़ता है, इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ सकता है। जिला प्रमुख के दावेदारों को साधना होगा पूरा संख्या बल जिला प्रमुख का पद अनारक्षित होने से दावेदारी का दायरा खुला है। लेकिन जिला प्रमुख बनने के लिए केवल चुनाव लड़ना या अपने वार्ड में जीत दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। जिला परिषद में निर्वाचित सदस्यों का समर्थन और चुनाव के बाद बनने वाले राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे। इसी कारण जिला प्रमुख पद के संभावित दावेदारों की रणनीति अपने वार्ड से आगे तक जा सकती है। उन्हें पार्टी के भीतर समर्थन, दूसरे क्षेत्रों के निर्वाचित सदस्यों के साथ तालमेल और जिला परिषद में अपने पक्ष को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए सदस्य संख्या और समर्थन का गणित अहम रहेगा। आरक्षण की पूरी तस्वीर: किस श्रेणी में कितने वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड सामान्य महिला: वार्ड 15, 18, 19, 22, 23, 25, 27 और 28 ओबीसी महिला: वार्ड 10 और 26 एससी महिला: वार्ड 11 और 13 एसटी महिला: वार्ड 6 और 9 अन्य आरक्षित वार्ड सामान्य: वार्ड 1, 7, 14, 16, 17, 20 और 29 ओबीसी: वार्ड 2, 5 और 12 एससी: वार्ड 21 और 24 एसटी: वार्ड 3, 4 और 8 टिकट से ताज तक, हर चाल पर रहेंगी निगाहें राजसमंद जिला परिषद चुनाव में अब नजरें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा और कांग्रेस किन चेहरों पर भरोसा जताती हैं और कौन अपने वार्ड में जीत दर्ज कर जिला परिषद तक पहुंचता है। इसके बाद जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए राजनीतिक दलों का संख्याबल और निर्वाचित सदस्यों का समर्थन अहम होगा। फिलहाल इतना तय है कि जिला प्रमुख की कुर्सी की लड़ाई केवल एक पद की दावेदारी नहीं, बल्कि जिला परिषद में राजनीतिक ताकत स्थापित करने की कवायद भी होगी। 29 वार्डों के इस चुनावी मैदान में 14 महिला आरक्षित वार्ड भी सियासी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेंगे। टिकट वितरण से लेकर चुनाव परिणाम तक, भाजपा और कांग्रेस की हर चाल पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।  

जयपुर में ग्लोबल हैप्पीनेस फोरम, राज्यपाल ने कहा- विकास के साथ मानवीय मूल्यों पर भी दें ध्यान

जयपुर  राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि खुशी, कल्याण और स्वतंत्रता ही मानव विकास का मुख्य आधार है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सभी मिलकर कार्य करे। उन्होंने कहा कि खुशी के लिए विवेक, समझदारी, ईमानदारी और नैतिकता ही सबसे महत्वपूर्ण है। यह सब गुण यदि समाज में व्याप्त हो जाएं तो सब ओर हैप्पीनेस का प्रसार हो सकता है। उन्होंने देश और समाज के लिए सबको चिंतन और मनन करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि इस समय में झूठ को सच बताने की होड़ मच रही है। पर, सजग रहेंगे सत्य सदा सत्य ही रहेगा। उन्होंने देश में 80 करोड़ लोगों को केंद्र सरकार मुफ्त अनाज प्रदान कर रही है। सभी के स्वास्थ्य की विश्व की सबसे बड़ी "आयुष्मान भारत" योजना चलाई जा रही है। देश तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ रहा है, यह बहुत से देशों को पच नहीं रहा है। उन्होंने सुशासन और पारदर्शिता के साथ भेदभाव मुक्त वातावरण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि खुशहाली का पैमाना केवल धन-दौलत या भौतिक सुख-सुविधाएं नहीं हैं, बल्कि यह मानसिक शांति, अच्छे स्वास्थ्य और मजबूत रिश्तों का एक गहरा अहसास है। उन्होंने कहा कि विकास का जो मॉडल पश्चिम के देशों ने अपनाया है, उसमें जीडीपी दर में वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय, आर्थिक प्रगति को ही मुख्य आधार बनाया है। किसी भी विकसित देश के लिए यह सब जरूरी है परन्तु इन—सबसे अधिक जरूरी है मानवीय मूल्य। राज्यपाल बागडे शनिवार को बिड़ला सभागार में वर्ल्ड हैप्पीनेस फाउंडेशन, इण्डिया चैप्टर, जयपुर द्वारा आयोजित"ग्लोबल हैप्पीनेस फोर्म एण्ड फैस्टिवल जयपुर 2026" में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारत को गुलामी के दौर में भूखे मरने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड मैकाले ने भारतीय शिक्षा पद्धति को बर्बाद किया। हमारे गुरुकुल बंद करवा दिए। देश को गुलाम रखने के लिए उद्योग धंधे बंद कर लोगों को भूखे मरने की स्थितियां पैदा की। फिर भी अंग्रेजों के कहा कि हम भारत में समृद्धि ला रहे है। इसके जवाब में 1922 में महात्मा गांधी ने भाषण में बताया कि देश में भूखे मरने की स्थितियां आ रही है। इससे बचने के लिए हमें स्वदेशी पर जोर देना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि प्रसन्नता की कुंजी यह है कि हम अपने पास जो हैं, उसमें संतोष का अनुभव करें। खुशी केवल पैसे से नहीं आ सकती। इसके लिए बहुत भाग दौड़ के साथ शरीर पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने एलेन मस्क को सर्वाधिक धनी बताते हुए कहा कि पैसा सब कुछ नहीं है। वह चाहते हैं कि उनकी कम्पनिया यहां स्थापित हो। वह चाहते हैं उनका बाजार भारत बने, पर यहां के लोग सब समझते हैं। राज्यपाल ने कहा कि ऐसी कोई वस्तु नहीं जो भारत में पैदा नहीं होती। इससे बहुत से देशों का बाजार बंद हो रहा है। अब वह नहीं चाहते भारत तेजी से विकसित हो। इसलिए देश को कमजोर करने के लिए बहुत से ताकते काम कर रही है। उन्होंने कहा कि टेलेंट तो भारत में तैयार होते हैं, विकसित देशों में नहीं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी से कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने व्यक्ति नहीं समग्रता के विकास पर सदा ध्यान दिया। इसी से व्यक्ति, परिवार, समाज का विकास हो सकता है। सभी की खुशहाली संभव है।