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राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लिए दौसा प्रशासन अलर्ट, 17 हजार से अधिक अभ्यर्थी होंगे शामिल

दौसा राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर प्रतियोगी परीक्षा 2025 (गृह विभाग) का आयोजन 5 और 6 अप्रैल को दौसा मुख्यालय में किया जाएगा। परीक्षा प्रतिदिन दो पारियों में आयोजित होगी, जिसमें सामान्य हिंदी का पेपर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान का पेपर दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। दो पारियों में होगी परीक्षा इस परीक्षा में प्रत्येक पारी में 8,832 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। एक अभ्यर्थी दो पारियों में परीक्षा देगा। इस प्रकार कुल 17,664 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। जिले में परीक्षा संचालन के लिए 24 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 8 सरकारी और 16 निजी केंद्र शामिल हैं। परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौंपी गई है समन्वयक की जिम्मेदारी परीक्षा समन्वयक के रूप में अतिरिक्त जिला कलेक्टर लालसोट और पुलिस समन्वयक के रूप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दौसा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत चार सतर्कता दल बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक दल में एक आरएएस, एक आरपीएस और शिक्षा विभाग का एक अधिकारी शामिल होंगे। ये दल विभिन्न परीक्षा केंद्रों की निगरानी करेंगे। बनाए गए आठ उप-समन्वयक दल इसके अलावा आठ उप-समन्वयक दल बनाए गए हैं, जो कोष कार्यालय से प्रश्नपत्र बॉक्स परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और परीक्षा समाप्ति के बाद सामग्री को वापस कोष कार्यालय में जमा कराने का कार्य करेंगे। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए 40 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। निजी केंद्रों पर दो-दो और सरकारी केंद्रों पर एक-एक प्रधानाचार्य स्तर के अधिकारी तैनात रहेंगे। वहीं प्रत्येक परीक्षा कक्ष में दो वीक्षक और दो कक्षों पर एक रिलीवर/सुपरवाइजर नियुक्त किया जाएगा।

SI भर्ती 2021 रद्द रहेगी, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले पर लगाई मुहर

जयपुर राजस्थान हाइकोर्ट ने शनिवार को एसआई भर्ती 2021 भर्ती परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 पर दिए गए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है. मतलब एसआई भर्ती 2021 रद्द रहेगी. हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने यह फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने एकलपीठ के भर्ती रद्द रखने फैसले को बरकरार रखा है, लेकिन एकलपीठ द्वारा आरपीएससी के सदस्यों के ख़िलाफ़ लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान को रद्द कर दिया है.   रद्द रहेगी SI भर्ती परीक्षा मामले में पर भी कर रहे एडवोकेट हरेंद्र नील बताया कि कोर्ट ने एकलपीठ (सिंगल बेंच) के फैसले को बरकरार रखा है. खंडपीठ ने यह भी माना है कि आरपीएससी सदस्यों के खिलाफ एकलपीठ की टिप्पणी सही है. भर्ती परीक्षा में अब छंटनी कर पाना संभव नहीं है. इसलिए परीक्षा रद्द रहेगी. एसआई भर्ती 2021 परीक्षा के लिए 3 फरवरी 2021 को नोटिफिकेशन जारी हुआ. 859 पदों के लिए 13 से 15 सितंबर 2021 को भर्ती परीक्षा आयोजित हुई. इसमें करीब 7 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया. SI भर्ती परीक्षा में 3 लाख 80 हजार अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में शामिल हुए. 20 हजार 359 अभ्यर्थी फिजिकल टेस्ट के लिए पास हुए. 3 हजार 291 अभ्यर्थी इंटरव्यू में शामिल हुए थे. जिसके बाद 1 जून 2023 को फाइनल रिजल्ट जारी किया गया. परीक्षा में लगे थे धांधली के आरोप परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली के आरोप लगे. जांच एसओजी को सौंपी गई. मामले में आरपीएससी के मेंबर तक के नाम सामने आए. इसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा. आरपीएससी सदस्य रामूराम राईका और बाबूलाल कटरा की गिरफ्तारी हुई. इसके बाद  13 अगस्त 2024 को भर्ती परीक्षा रद्द करने को लेकर याचिका दायर हुई. इस याचिका की लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 28 अगस्त 2025 को भर्ती परीक्षा को रद्द करने का फैसला दिया था, लेकिन चयनित एसआई अभ्यर्थियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी. खंडपीठ ने 8 सितंबर को एकल पीठ के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी. इसके बाद वे अभ्यर्थी जो भर्ती परीक्षा को रद्द करवाना चाहते थे याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को एकल पीठ के फैसले को बहाल करते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ को 3 महीने में फैसला लेने का आदेश दिया. इसके साथ ही चयनित एसआई अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी थी.

ईरान-इजराइल तनाव का राजस्थान पर ‘साइड इफेक्ट’, शेखावाटी के हजारों प्रवासियों का वतन लौटना हुआ मुश्किल

जयपुर/सीकर  पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों ने राजस्थान के लोगों और उनके सुनहरे सपनों के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा साइड इफेक्ट अब जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर साफ नजर आ रहा है। खाड़ी देशों को जोड़ने वाली लाइफलाइन कही जाने वाली उड़ानें न केवल रद्द हो रही हैं, बल्कि जो बची हैं, उनका किराया आसमान छू रहा है। 24 घंटे की देरी और रूट का फेरबदल ईरान के ऊपर से हवाई क्षेत्र बंद होने और सुरक्षा कारणों से विमान कंपनियों ने जयपुर से अपनी उड़ानों में भारी कटौती की है। इसका सबसे बुरा असर जयपुर-अबू धाबी और दुबई रूट पर पड़ा है। पहले जहां जयपुर से रोजाना दो उड़ानें संचालित होती थीं, अब केवल एक शाम की फ्लाइट ही उड़ान भर पा रही है। दुबई की दोनों नियमित उड़ानें लगातार रद्द चल रही हैं, जबकि मस्कट की फ्लाइट अब सप्ताह में केवल दो दिन ही संचालित हो रही है। शेखावाटी (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) के हजारों प्रवासी, जो ईद या छुट्टियों पर घर आने की तैयारी में थे, अब अधर में लटके हैं। किराया नहीं, 'करंट' लगा रही हैं टिकटें युद्ध के कारण विमानों को अब लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ा है। इटली और खाड़ी देशों से भारत आने वाली टिकटें, जो पहले 50,000 रुपये के आसपास थीं, अब 1,50,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। एक सामान्य मजदूर या कामगार के लिए तीन गुना किराया देना नामुमकिन साबित हो रहा है। शेखावाटी के प्रवासियों का छलका दर्द सीकर के जालेऊ निवासी हसन खान की कहानी उन हजारों लोगों की बानगी है जो इस समय खाड़ी देशों के एयरपोर्ट पर फंसे हैं। हसन बताते हैं, 'मेरी शारजाह-जयपुर फ्लाइट बिना सूचना रद्द कर दी गई। मुझे दुबई से टैक्सी के जरिए मस्कट भेजा गया और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर जयपुर पहुंच सका। इस सफर में जितना पैसा खर्च हुआ, उससे कहीं ज्यादा मानसिक तनाव झेलना पड़ा।' कई प्रवासियों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा, तो उनका वतन लौटना तो दूर, वहां नौकरी बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। व्यापार और पर्यटन पर भी संकट जयपुर एयरपोर्ट से होने वाला 'कार्गो व्यापार' भी प्रभावित हुआ है। कीमती पत्थर, रत्न और हस्तशिल्प का निर्यात करने वाले व्यापारियों के ऑर्डर फंसे हुए हैं। पर्यटन सीजन के अंत में विदेशी सैलानियों की आवाजाही में भी गिरावट दर्ज की गई है।

जब हेल्पलाइन की दूसरी तरफ से गूंजी मुख्यमंत्री की आवाज, सीएम के निर्देश पर मिनटों में हुआ जनसमस्याओं का समाधान

जयपुर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय में राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 का अचानक दौरा कर सबको चौंका दिया। वह न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे, बल्कि खुद हेल्पलाइन पर आए नागरिकों से सीधी बातचीत भी की और उनकी परेशानियां सुनीं। जब कॉल करने वालों को एहसास हुआ कि दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री हैं, तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। सीएम के निर्देश पर तुरंत हुआ काम इस मौके पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर शिकायत का निपटारा संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान दो मामले सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। पहला मामला चूरू के एक नागरिक का था, जिन्हें 10 साल पुरानी मतदाता सूची उपलब्ध न होने के कारण मूल निवास प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने तत्काल ई-मित्र के जरिए आवेदन को फिर से प्रक्रिया में लिया और तहसील कार्यालय ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया। दूसरा मामला जयपुर की एक महिला का था, जिन्होंने एलपीजी सिलेंडर की देरी से डिलीवरी की शिकायत की थी। सिलिंडर की आपूर्ति सुनिश्तित मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिस पर महिला ने संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने हेल्पलाइन के विभिन्न अनुभागों का बारीकी से अवलोकन किया और शिकायत निपटाने की प्रक्रिया, नागरिक संतुष्टि दर तथा अधिकारियों के निरीक्षण से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर तैनात कर्मियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार की जाए और नियमित रूप से उसकी निगरानी की जाए। समय पर दें शिकायतों का समाधान सीएम भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मकसद महज शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध और संतोषजनक समाधान देना है। उन्होंने हर विभाग को निर्देश दिए कि शिकायत निपटाने की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और नागरिकों की संतुष्टि दर लगातार बढ़ाई जाए।  

मदद के नाम पर खाली हो सकता है आपका बैंक खाता, ‘एक कॉल’ वाले इस नए साइबर फ्रॉड से ऐसे बचें

जयपुर भीड़भाड़ वाले बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या किसी पार्क में अगर कोई घबराया हुआ शख्स आपसे कहे भाई साहब, एक जरूरी कॉल करनी है” तो जरा ठहर जाइए। यह मासूम सी लगने वाली गुजारिश अब एक खतरनाक साइबर साजिश का हिस्सा बन चुकी है। राजस्थान में तेजी से फैल रहे इस नए फ्रॉड ने पुलिस और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग अब सीधे डिजिटल फ्रॉड करने के बजाय लोगों की भावनाओं और इंसानियत को निशाना बना रहे हैं। “एक कॉल” का बहाना बनाकर वे कुछ ही सेकंड में ऐसा खेल कर जाते हैं कि पीड़ित को देर तक पता ही नहीं चलता कि उसके साथ क्या हो गया। कैसे रचते हैं ठगी का जाल? डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, ठग पहले सार्वजनिक जगहों पर ऐसे लोगों को तलाशते हैं जो जल्दी मदद करने को तैयार दिखें। फिर वे इमरजेंसी का हवाला देकर मोबाइल मांगते हैं कभी कहते हैं बैटरी खत्म हो गई, कभी किसी परिजन की तबीयत खराब होने की बात करते हैं। जैसे ही मोबाइल उनके हाथ में आता है, वे तेजी से एक खास कोड डायल करते हैं। यही वह पल होता है, जब खेल शुरू हो जाता है। इस कोड के जरिए कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव कर दी जाती है, जिससे आपके फोन पर आने वाले ओटीपी सीधे ठग के नंबर पर पहुंचने लगते हैं। इसके बाद ठग को आपके बैंक खाते, यूपीआई ऐप, सोशल मीडिया या व्हाट्सएप तक पहुंच बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता। वह आराम से पासवर्ड रीसेट करता है और खाते से पैसे साफ कर देता है और आपको भनक तक नहीं लगती। स्पाइवेयर का भी खतरा मामला यहीं खत्म नहीं होता। कई मामलों में ठग आपके फोन में चुपके से स्पाइवेयर या की-लॉगर इंस्टॉल कर देते हैं। ये ऐसे खतरनाक टूल होते हैं जो आपके हर टाइप किए गए शब्द, पासवर्ड, बैंक डिटेल और निजी बातचीत को रिकॉर्ड कर लेते हैं। यानि, एक बार फोन हाथ में देने के बाद आपकी पूरी डिजिटल जिंदगी किसी अनजान व्यक्ति के नियंत्रण में जा सकती है। रिश्तों का भी कर सकते हैं दुरुपयोग साइबर अपराधी यहीं नहीं रुकते। वे आपके कॉन्टैक्ट्स चुरा लेते हैं और फिर आपके परिवार या दोस्तों को मैसेज या कॉल कर “इमरजेंसी” का ड्रामा रचते हैं। “मैं मुसीबत में हूं, तुरंत पैसे भेजो” ऐसे मैसेज भेजकर वे आपके करीबी लोगों से भी पैसे ठग लेते हैं। कानूनी झंझट में भी फंस सकते हैं आप इस पूरे खेल का एक और खतरनाक पहलू है। अगर कोई ठग आपके फोन से किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए कॉल करता है, तो जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आपका नंबर सामने आएगा। ऐसे में आप बिना गलती के भी पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकते हैं। कैसे बचें इस ‘एक कॉल’ के जाल से? राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मदद जरूर करें, लेकिन सतर्कता के साथ। अगर कोई कॉल करने के लिए कहता है, तो फोन खुद अपने हाथ में रखें, नंबर खुद डायल करें और स्पीकर पर बात कराएं। किसी भी अनजान व्यक्ति को अनलॉक मोबाइल देना खतरनाक हो सकता है। अगर गलती से आपने फोन दे दिया है, तो तुरंत अपने मोबाइल में *#21# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग चेक करें और ##002# डायल कर उसे बंद कर दें। साथ ही अपने सभी पेमेंट ऐप्स पर मजबूत पिन और बायोमेट्रिक लॉक जरूर लगाएं। शिकायत कहां करें? अगर आप या आपका कोई परिचित इस तरह की ठगी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर कार्रवाई से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

इंसानियत की मिसाल, खुद गोद ली गई माँ ने भारत के बीमार बच्चे को अपनाकर निभाया ममता का रिश्ता

झुंझुनू झुंझुनूं से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो भावुक करने वाली है। एक इटालियन दंपती ने उस डेढ़ साल के मासूम बच्चे को गोद लिया है जिसके दिल में जन्म से ही छेद है। बच्चे की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद इस दंपती ने एक पल भी नहीं सोचा और उसे अपनाने का फैसला कर लिया। इटालियन दंपती ने लिया गोद यह फैसला न सिर्फ उस मासूम की ज़िंदगी बदलने वाला है बल्कि यह इंसानियत और बेशर्त मोहब्बत की एक अनमोल मिसाल भी बन गया है।यह बच्चा करीब डेढ़ साल पहले अपनी नन्ही सी उम्र में प्रीमैच्योर हालत में पालना गृह में छोड़ दिया गया था। जांच के दौरान जब उसके दिल में छेद का पता चला तो उसकी देखभाल शिशु गृह में ही शुरू की गई। इस नाज़ुक बच्चे को एक परिवार की सख्त ज़रूरत थी और आखिरकार वह ज़रूरत उस दंपती ने पूरी की जो हज़ारों मील दूर से उसके लिए चले आए।बच्चे को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के तहत संपन्न हुई। चार महीने तक चला दस्तावेजीकरण शिशु गृह के सुपरिटेंडेंट अंकित कुमार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय गोद लेने की प्रक्रिया काफी लंबी और पेचीदा होती है। इस मामले में करीब चार महीने तक गहन जांच और दस्तावेज़ीकरण चला, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस मासूम को उसका नया परिवार मिल गया। इस पूरी कहानी में सबसे भावुक करने वाला पहलू यह है कि बच्चे को गोद लेने वाली माँ खुद भी करीब 35 साल पहले कोलकाता से एक इटालियन परिवार द्वारा गोद ली गई थीं। भारत से उनका यह गहरा भावनात्मक रिश्ता ही था जिसने उन्हें यहीं से बच्चा गोद लेने के लिए प्रेरित किया और वह भी ऐसा बच्चा जिसे सबसे ज्यादा प्यार और देखभाल की दरकार थी। दंपती ने बताया कि 2017 में शादी के बाद से ही उनके मन में किसी बच्चे को गोद लेने की चाहत थी। उनके लिए बच्चे की बीमारी कभी रुकावट नहीं बनी। उनका कहना है कि वे उसे बस भरपूर प्यार देना चाहते हैं और एक ऐसा भविष्य जहां वह सुरक्षित और खुशहाल रहे। इस मासूम के आने से उनका परिवार पूरा हो गया है।  

हज यात्रियों को साथ रखने होंगे 3000 रियाल, डिजिटल होगी कुर्बानी की प्रक्रिया और ठगी रोकने को बना ‘नुसुक मसार’ पोर्टल

जयपुर  मुकद्दस हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर की राह थोड़ी अलग होगी। 21 अप्रैल से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव कुर्बानी की प्रक्रिया को लेकर किया गया है। अब कोई भी हाजी निजी स्तर पर जानवर खरीदकर कुर्बानी नहीं दे सकेगा। इस बार पूरी व्यवस्था को डिजिटल और सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है। जेब में रखने होंगे 3000 रियाल, खाना बनाने पर रोक इस बार हज यात्रियों के लिए एक और महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि उन्हें अपने साथ कम से कम 3000 सऊदी रियाल की व्यवस्था करके ले जानी होगी। हज के दौरान इस बार यात्रियों को खुद खाना बनाने की इजाजत नहीं होगी। यह राशि उनके खाने-पीने, होटल के छोटे-मोटे खर्चों और अन्य निजी जरूरतों के लिए अनिवार्य की गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे कैंपों में आग लगने का खतरा कम होगा और सफाई बनी रहेगी। ठगी और जालसाजी पर लगेगा लगाम? अक्सर देखा जाता था कि मक्का में कुर्बानी के नाम पर जायरीन के साथ धोखाधड़ी होती थी। कुछ जालसाज एक ही जानवर की अलग-अलग एंगल से फोटो दिखाकर कई लोगों से पैसे ऐंठ लेते थे। इसी 'फोटो वाली ठगी' और गंदगी को रोकने के लिए सऊदी अरब सरकार ने नुसुक मसार पोर्टल अनिवार्य कर दिया है। अब कुर्बानी के लिए केवल आधिकारिक 'अदाही प्रोजेक्ट' के माध्यम से ही ऑनलाइन जानवर बुक किए जा सकेंगे। जिन यात्रियों ने फॉर्म में कुर्बानी की सहमति दी है, उन्हें अब हज कमेटी के जरिए ही निर्धारित राशि जमा करानी होगी। 6 अप्रैल है 'डेडलाइन': आखिरी किस्त जमा करना जरूरी शेखावाटी के हज सेवक सुभाषचन्द्र वर्मा के अनुसार, जयपुर एम्बार्केशन पॉइंट से जाने वाले यात्रियों के लिए तीसरी और अंतिम किस्त जमा कराने की तारीख बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी गई है। तीसरी किस्त के रूप में 17,290 रुपये जमा कराने होंगे। हज यात्रा का कुल खर्च लगभग 3.52 लाख रुपये है, जिसे तीन किश्तों में जमा करना होता है। यदि 6 अप्रैल तक भुगतान नहीं हुआ, तो फ्लाइट कन्फर्मेशन रद्द हो सकती है। पेमेंट के तरीके: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प यात्री Haj Suvidha ऐप या वेबसाइट के जरिए नेट बैंकिंग/क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। ऑफलाइन विकल्प के लिए एसबीआई या यूनियन बैंक की शाखाओं में चालान जमा कराया जा सकता है। इसके लिए 'यूनिक बैंक रेफेरेंस नंबर' होना अनिवार्य है।

RPSC को मिली बड़ी राहत, 2.21 लाख ओवरएज अभ्यर्थियों के अरमानों पर फिरा पानी और सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित किया अपना आदेश

जयपुर  राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2025 की परीक्षा से महज दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की स्पेशल वेकेशन बेंच ने अपने पिछले आदेश में बड़ा संशोधन किया है। कोर्ट के इस 'यू-टर्न' ने जहां राजस्थान लोक सेवा आयोग को राहत दी है, वहीं हजारों ओवरएज अभ्यर्थियों के सपनों पर पानी फेर दिया है। क्या था गुरुवार का आदेश और क्यों बदला? गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यापक आदेश जारी करते हुए SI भर्ती-2021 के उन सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी थी, जो ओवरएज होने के कारण 2025 की भर्ती का फॉर्म नहीं भर पाए थे। इस आदेश से करीब 2.21 लाख नए अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन, RPSC ने शुक्रवार को अदालत में गुहार लगाई कि परीक्षा 5 और 6 अप्रैल को प्रस्तावित है। आयोग ने तर्क दिया कि 7.5 लाख अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड जारी हो चुके हैं और परीक्षा केंद्रों पर पूरी तैयारी है। इस अंतिम घड़ी में 2.21 लाख नए लोगों से फॉर्म भरवाना और उन्हें परीक्षा में बैठाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। अब किसे मिलेगा मौका? सुप्रीम कोर्ट ने RPSC की दलीलों को वाजिब मानते हुए अपने आदेश को सीमित कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह लाभ अब केवल मुख्य याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा और उन 713 अभ्यर्थियों तक ही सीमित रहेगा जिन्होंने पहले हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिन अभ्यर्थियों ने अब तक कोर्ट में याचिका दायर नहीं की थी, उन्हें इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने दोटूक कहा- 'एक व्यक्ति दूसरे के लिए राहत की मांग नहीं कर सकता।' RPSC ने कोर्ट को बताया कि 713 याचिकाकर्ताओं को पहले ही प्रवेश पत्र जारी किए जा चुके हैं, वे परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। अभ्यर्थियों में मायूसी, RPSC ने ली चैन की सांस आयोग की ओर से अधिवक्ता राजेश सिंह चौहान ने पक्ष रखते हुए बताया कि बिना तैयारी के इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को शामिल करना पूरी परीक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर सकता था। इधर, हजारों ऐसे अभ्यर्थी जो गुरुवार के आदेश के बाद किताबों की धूल झाड़कर तैयारी में जुटे थे, वे अब इस 'मॉडिफाई' आदेश से ठगे से महसूस कर रहे हैं। राजस्थान में 5 और 6 अप्रैल को दो चरणों में होने वाली इस परीक्षा पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं। अब यह साफ हो गया है कि केवल वही लोग मैदान में होंगे जिनके पास वैध एडमिट कार्ड हैं और जो कानूनी लड़ाई का हिस्सा रहे हैं। पुलकित सक्सेना

भीड़ से मिलेगी मुक्त,उत्तर पश्चिम रेलवे का बड़ा फैसला, 76 स्टेशनों पर बनेंगे अत्याधुनिक पैसेंजर होल्डिंग एरिया

जयपुर गर्मियों का मौसम शुरू होते ही रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ उमड़ने लगती है और कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने समय रहते तैयारी पूरी कर ली है। रेलवे ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाने और कई लंबी दूरी की ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़ने का ऐलान किया है। यह व्यवस्था 15 जुलाई तक जारी रहेगी। हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलेंगी उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि गर्मियों की छुट्टियों में रेलवे पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ जाता है, जिससे कन्फर्म सीट मिलना मुश्किल हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं और अधिकांश लंबी दूरी की ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े गए हैं। इसके साथ ही कुछ ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ाई गई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा यात्री आसानी से सफर कर सकें। 76 स्टेशनों पर बनेंगे होल्डिंग एरिया ट्रेनों में सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में दी गई लिखित जानकारी में बताया कि देश के 76 प्रमुख स्टेशनों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस समर्पित यात्री होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इन जगहों को इसलिए तैयार किया जा रहा है, ताकि पीक आवर्स में प्लेटफॉर्म पर होने वाली भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सके। ये सुविधाएं मिलेंगी इन होल्डिंग एरिया में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, टिकट काउंटर, ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन, इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन सूचना बोर्ड और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरे, लगेज स्कैनर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और अग्निशमन प्रणाली भी लगाई जाएगी। इसके अलावा आरओ पेयजल और पुरुष, महिला व दिव्यांगजन के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा भी होगी। बता दें कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस तरह का एक मॉडल होल्डिंग एरिया पहले ही शुरू किया जा चुका है, जिसे यात्रियों ने काफी सराहा है और इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ में उल्लेखनीय कमी आई है।  

जयपुर में विदेशी इन्फ्लुएंसर के फोटोशूट पर बवाल, हथिनी ‘चंचल’ की मौत से उठा रंगों पर सवाल

जयपुर जयपुर की पहचान ‘पिंक सिटी’ के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसी पहचान को दर्शाने के लिए किया गया एक फोटोशूट अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर द्वारा हाथी और एक महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगकर किया गया फोटोशूट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। शुरुआत में यह वीडियो आकर्षण का केंद्र बना, लेकिन कुछ ही समय बाद उसी हाथी की मौत की खबर सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। जानकारी के मुताबिक, यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गांव में किया गया था। जानकारी के अनुसार, रूस की इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने ‘पिंक सिटी’ की थीम पर यह शूट कराया था। इसमें 65 वर्षीय हथिनी ‘चंचल’ और मॉडल यशस्वी को गुलाबी रंग से रंगा गया था। यह वीडियो करीब तीन महीने पहले पोस्ट किया गया था, लेकिन डेढ़ महीने पहले हाथी की मौत के बाद यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया। पशु प्रेमियों और पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि हाथी जैसे संवेदनशील जानवर को किसी भी तरह के रंग या केमिकल से रंगना उसकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कई कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह रंग ही हाथी की मौत का कारण हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवाद बढ़ने के बाद वन विभाग हरकत में आया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ जाकर जानवर के साथ क्रूरता की गई है, तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बबलू खान ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हाथी को केवल कुछ समय के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी भी हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथिनी पहले से ही वृद्ध थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। दूसरी ओर, इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने भी सोशल मीडिया पर सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि शूट के दौरान ऑर्गेनिक और स्थानीय पेंट का इस्तेमाल किया गया था, जो त्योहारों में भी प्रयोग होता है और जानवरों के लिए सुरक्षित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने जयपुर में कई सप्ताह बिताए और सभी प्रक्रियाओं का ध्यान रखा। इस बीच, पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राजस्थान में पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन सभी को नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक स्तर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पशु अधिकार संगठनों की सख्ती की मांग है।