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फिर करवट लेगा मौसम: जयपुर समेत 10 जिलों पर ऑरेंज अलर्ट, 12 जिलों में यलो चेतावनी

जयपुर राजस्थान में मौसम फिर करवट लेने वाला है। मौसम विभाग ने जयपुर समेत 10 जिलों में आज से तीन दिन तक कड़ाके की सर्दी के साथ बारिश और आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 12 जिलों के लिए यलो अलर्ट घोषित किया गया है। मंगलवार सुबह जयपुर के कई इलाकों में बूंदाबांदी देखने को मिली। मौसम विभाग के मुताबिक, आंधी-बारिश का यह दौर थमने के बाद अगले दो दिन घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। इसके बाद 31 जनवरी से 1 फरवरी के बीच एक नया वेदर सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे फिर बारिश हो सकती है। बादलों से गिरा तापमान सोमवार शाम से जयपुर और आसपास के जिलों में घने बादल छाए रहे। मंगलवार सुबह धूलभरी हवा और हल्की बारिश के चलते मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। मावठ की संभावना बढ़ने से महीने के आखिरी दिनों में तेज सर्दी लौटने की आशंका है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। सोमवार को बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कई जिलों में दोपहर बाद बादल छाए रहे। इससे ठंडी हवाएं कमजोर पड़ीं और लोगों को कड़ाके की सर्दी से कुछ राहत मिली। इस दौरान अधिकतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 27.5 डिग्री सेल्सियस पाली में रिकॉर्ड किया गया। 28-29 जनवरी को कोहरा, 31 से फिर बारिश संभव मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, 28 और 29 जनवरी को कई जिलों में घना कोहरा छा सकता है और ठंडी हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, 31 जनवरी से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होगा, जिसके असर से 31 जनवरी और 1 फरवरी को प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाने और हल्की बारिश होने के आसार हैं। प्रदेश के प्रमुख शहरों का तापमान (26 जनवरी): अजमेर में अधिकतम तापमान 21.7 और न्यूनतम 6.4 रहा। भीलवाड़ा में अधिकतम 21.8 और न्यूनतम 7.5, जबकि अलवर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 2.2 दर्ज किया गया। जयपुर का तापमान 20.6 और 6.7 रहा। पिलानी में अधिकतम 20 और न्यूनतम 3, सीकर में अधिकतम 21 और न्यूनतम 0.5, तथा कोटा में अधिकतम 21.5 और न्यूनतम 10.4 रहा। चित्तौड़गढ़ में पारा 25.6 और 9.4 के बीच रहा, उदयपुर में 23.7 और 8.9, बाड़मेर में 24.6 और 9.3, जबकि जैसलमेर में अधिकतम 19.5 और न्यूनतम 7 रहा। जोधपुर में तापमान 25.8 और 9.2, बीकानेर में 21.1 और 5, चूरू में 21.4 और 2.7, तथा गंगानगर में 20.1 और 6.5 दर्ज किया गया। नागौर में अधिकतम 22.1 और न्यूनतम 1.1, बारां में 22 और 8.5, जालौर में 26.2 और 8.7, सिरोही में 21.5 और 5, तथा फतेहपुर में अधिकतम 22.4 और न्यूनतम सबसे कम 0.1 रहा। करौली में तापमान 20.4 और 2.5, दौसा में 22.1 और 1.4, प्रतापगढ़ में 25.8 और 11.9, झुंझुनूं में 20.7 और 3.2, तथा पाली में अधिकतम तापमान सबसे ज्यादा 27.5 और न्यूनतम 3.6 रहा।

भयानक हादसा: एक्सप्रेसवे पर ट्रक ने 4 KM तक घसीटी कार, चार जिंदगियां खत्म

दौसा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ है। उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन कर नोएडा लौट रहे पांच दोस्तों की कार एक अज्ञात वाहन (संभवतः ट्रक) से टकरा गई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में सवार 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद ट्रक कार को कई किलोमीटर तक सड़क पर घसीटता हुआ ले गया। दर्शन कर लौटते समय काल बन गई रफ्तार पुलिस के अनुसार हादसा एक्सप्रेसवे के चेनेज नंबर 194 (पापड़दा और नांगल राजावतान थाना क्षेत्र) के पास हुआ। कार (हरियाणा नंबर) में सवार सभी पांच लोग नोएडा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वे उज्जैन से दर्शन कर वापस अपने घर लौट रहे थे। तेज रफ्तार कार आगे चल रहे किसी अज्ञात भारी वाहन में पीछे से जा घुसी। टक्कर के बाद कार बुरी तरह पिचक गई और लोहे का गोला बन गई। इस हादसे में एकमात्र जीवित बचे युवक ने अस्पताल में पुलिस को जो बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। घायल युवक के मुताबिक टक्कर के बाद भी ट्रक चालक ने गाड़ी नहीं रोकी। वह कार को अपने साथ फंसाकर कई किलोमीटर तक तेज रफ्तार में घसीटता रहा। इसी दौरान कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर सवार 4 लोगों की जान चली गई। पुलिस की कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही पापड़दा और नांगल राजावतान पुलिस मौके पर पहुंची। कार में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। घायल युवक को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों की अभी आधिकारिक पहचान नहीं हो पाई है लेकिन उनके पास मिले दस्तावेजों के आधार पर परिजनों को सूचित किया जा रहा है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है।

जयपुर में राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 का भव्यता पूर्ण आयोजन

जयपुर (राजस्थान)। देशभर में सामाजिक सेवा और उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने वाला प्रतिष्ठित  “राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 (Rashtriya Gaurav Puraskar 2026)”  का आयोजन 26 जनवरी को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में भव्य एवं गरिमामय रूप में आयोजित किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित उन विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, प्रशासन, कला, संस्कृति, नवाचार और राष्ट्र निर्माण व मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आयोजक संस्था YSS India के अध्यक्ष श्री कमल चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार का उद्देश्य उन कर्मठ नागरिकों को सम्मान देना है, जो अपने कार्यों से समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। यह मंच केवल सम्मान का नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, सेवा और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करने का माध्यम है। Yss के मीडिया प्रभारी जर्नलिस्ट डा. अखिल बंसल के अनुसार कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में जस्टिस एन. के. जैन, आईपीएस अनिल जैन, ग्रुप कैप्टन रि.आर. सी. त्रिपाठी, रि. कैप्टन सुखराम यादव, सी. आई. हरेन्द्र सिंह राज. पुलिस, लै. क. शीतलकृष्ण गायकवाड, रि. आर्मी आफीसर सी. के. सक्सेना, रि. आ. आ. मुकेशकुमार, रि. आ. आ. बलवीर सिंह की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, मीडिया कवरेज और भव्य मंच व्यवस्था की गई । सम्मानित प्रतिभागियों को सम्मान पत्र, ट्रॉफी, राष्ट्रीय पदक एवं आधिकारिक पहचान पत्र सम्माननीय अतिथियों द्वारा प्रदान किए गये। पिछले वर्षों की सफलता के बाद इस वर्ष कार्यक्रम का स्वरूप और भी व्यापक एवं प्रभावशाली बनाया गया जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक और रचनात्मक कार्यों को नई पहचान मिल सके। राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 का आयोजन गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति, एकता और सामाजिक चेतना के संदेश को और अधिक मजबूत करेगा। अगला समारोह इसी भव्यता के साथ 15 अगस्त-26 को दिल्ली में आयोजित होगा।      राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार प्राप्त करने वालों में अथाई मीडिया इंटरनेशनल के डा. अखिल बंसल-जयपुर,सुरेन्द्र पाण्डया-जयपुर,शैलेन्द्र जैन-अलीगढ, डा. राजीव जैन-आगरा, डा. राजीव प्रचण्डिया-अलीगढ, सुरेन्द्र मिश्रा-भोपाल, अजित बंसल-जयपुर, पारस जैन 'पार्श्वमणि'- कोटा, मयंक जैन-अलीगढ, डा. रीना सिन्हा-मुम्बई तथा डा. मीना जैन-उदयपुर प्रमुख थीं।

रोपवे, पहाड़ियां और भक्ति का संगम: जयपुर का वैष्णो देवी मंदिर क्यों बन रहा है धार्मिक पर्यटन की पहचान

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर सिर्फ ऐतिहासिक किलों और महलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। जयपुर के पूर्वी हिस्से में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित वैष्णो देवी माता मंदिर आज न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि आसपास मौजूद खोले के हनुमान मंदिर और आधुनिक रोपवे सुविधा के चलते यह पूरा क्षेत्र एक समग्र धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। पहाड़ियों में बसा वैष्णो देवी माता मंदिर जयपुर का वैष्णो देवी माता मंदिर जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी धाम से प्रेरित माना जाता है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचते ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। यहां माता वैष्णो देवी के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की गुफा रूपी प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं को उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थों की अनुभूति कराती हैं। नवरात्र, नववर्ष और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जयपुर के प्रसिद्ध खोले के हनुमान जी मंदिर परिसर में पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन माता वैष्णो देवी मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी अपनी मनोकामनाएं लिए माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। रोपवे: श्रद्धा और सुविधा का आधुनिक संगम इस धार्मिक क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत है यहां संचालित रोपवे सेवा, जिसने पर्यटन के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। रोपवे के जरिए श्रद्धालु और पर्यटक कम समय में पहाड़ी तक पहुंच सकते हैं। जैसे-जैसे रोपवे ऊपर चढ़ता है, अरावली की हरियाली, घाटियां और जयपुर शहर का विहंगम दृश्य मन को मोह लेता है। यह सुविधा बुजुर्गों, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बन गई है। यही कारण है कि रोपवे ने इस पूरे क्षेत्र को पारंपरिक तीर्थ से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक पर्यटन स्थल का रूप दे दिया है। 45 मिनट की जगह 5 मिनट का समय श्री नरवर आश्रम सेवा समिति खोल के हनुमान जी प्रन्यास के महामंत्री बृजमोहन शर्मा के मुताबिक खोल के हनुमान जी मंदिर परिसर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्रों के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। रोपवे की शुरुआत होने से भक्तों और पर्यटकों को काफी सुविधा मिल रही है. श्रद्धालु सैकड़ों सीढ़ियां चढ़कर खोले के हनुमान जी मंदिर की पहाड़ियों पर बने माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन करते हैं. सीढ़ियों से करीब 45 मिनट का समय लगता है, लेकिन अब रोपवे के जरिए केवल 5 मिनट में माता वैष्णो देवी मंदिर पहुंच सकते हैं। खोले के हनुमान: आस्था का प्राचीन केंद्र वैष्णो देवी माता मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित खोले के हनुमान मंदिर जयपुर के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। हर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु खोले के हनुमान के दर्शन के बाद वैष्णो देवी माता मंदिर तक की यात्रा करते हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक धार्मिक परिक्रमा मार्ग जैसा अनुभव देता है। पर्यटन की नजर से बढ़ता आकर्षण बीते कुछ वर्षों में यह क्षेत्र केवल स्थानीय श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। देश के अन्य राज्यों और विदेशी पर्यटक भी अब जयपुर के इस धार्मिक सर्किट को अपनी यात्रा सूची में शामिल कर रहे हैं। मंदिर परिसर, पहाड़ी वातावरण, रोपवे की रोमांचक यात्रा और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक स्पिरिचुअल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर रही है। सुबह की आरती से लेकर शाम की आराधना तक, यहां का माहौल पर्यटकों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। जयपुर के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान खोले के हनुमान, वैष्णो देवी माता मंदिर और रोपवे—तीनों मिलकर जयपुर को एक नया धार्मिक पर्यटन चेहरा दे रहे हैं। आमेर किला, सिटी पैलेस और हवा महल देखने आने वाले पर्यटक अब इस क्षेत्र को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। इससे न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय रोजगार और आसपास के इलाकों के विकास को भी गति मिल रही है। कुल मिलाकर, जयपुर का वैष्णो देवी माता मंदिर और खोले के हनुमान क्षेत्र आज आस्था, प्रकृति और आधुनिक सुविधाओं का ऐसा संगम बन चुका है, जो श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है।

खेजड़ी संरक्षण की लड़ाई तेज हुई, बीकानेर में 2 फरवरी को होगा महापड़ाव

जोधपुर राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जोधपुर संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुसार आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर विशाल महापड़ाव एवं आंदोलन आयोजित किया जाएगा।  अभियान के तहत साधु-संतों के सानिध्य में बाड़मेर, सांचौर, जालौर और जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क किया गया। पर्यावरण प्रेमियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ा गया। इस दौरान खेजड़ी वृक्ष के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर लोगों में गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। बिश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य पर्यावरण प्रेमी भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। मीडिया से बातचीत में आंदोलन संयोजक परसराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत को कमतर नहीं आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाए गए, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परसराम बिश्नोई ने दो टूक कहा कि हरे पेड़ों की कटाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खेजड़ी की रक्षा के लिए मां अमृता देवी के नेतृत्व में दिए गए 363 बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि यह परंपरा आज भी समाज को संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देती है। अभियान के तहत बाड़मेर, सांचौर, भीनमाल और जोधपुर के कई गांवों में जनसंपर्क किया गया है। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान फलोदी, नागौर, बीकानेर के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक विस्तारित किया जाएगा। खेजड़ी बचाओ अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनता जा रहा है।  

इतिहास से रहस्य तक: तात्या टोपे ने जहां काटे 45 दिन, वही रकमगढ़ किला बना भूतिया कहानियों का केंद्र

जयपुर इतिहास से जुड़ा रकमगढ़ किला राजस्थान के राजसमंद जिले से करीब 10 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित रकमगढ़ किला एक छोटी पहाड़ी पर बना ऐतिहासिक किला है। यह किला आज खेड़ाना पंचायत क्षेत्र में आता है और इसका इतिहास एशिया की प्राचीनतम मीठे पानी की कृत्रिम झीलों में शामिल राजसमंद झील से भी जुड़ा हुआ है। आकार में भले ही यह किला छोटा हो, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है। आज़ादी की लड़ाई में रकमगढ़ की भूमिका जानकारी के अनुसार, इस किले का निर्माण कोठारिया रियासत के तत्कालीन राव साहब ने करवाया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह किला उस समय चर्चा में आया, जब महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने यहां लगभग 45 दिनों तक अंग्रेजों से बचकर शरण ली थी। जैसे ही अंग्रेजों को इसकी भनक लगी, उन्होंने रकमगढ़ किले पर हमला कर दिया। उस समय तात्या टोपे ने कोठारिया राव जी से सहायता की गुहार लगाई, जिसके बाद कोठारिया किला और रकमगढ़ के बीच तोपों से जबरदस्त गोलाबारी हुई। आज भी किले की दीवारों पर उस संघर्ष के निशान देखे जा सकते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का आगमन कहते हैं कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को तात्या टोपे पर हुए हमले की जानकारी मिली, तो वह स्वयं उनकी सहायता के लिए रकमगढ़ किले तक पहुंचीं। अंग्रेजों को पीछे हटाने के बाद तात्या टोपे ने यह स्थान छोड़ दिया, लेकिन तब से यह किला उनकी वीरता, साहस और बलिदान की मूक गवाही देता हुआ आज भी खड़ा है। किले से जुड़ी रहस्यमय कथाएं इतिहास के साथ-साथ रकमगढ़ किला अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी जाना जाता है। आबादी से दूर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण आसपास के गांवों में यहां भूत-प्रेत होने की चर्चाएं लंबे समय से चलती आ रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि तात्या टोपे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपना सुरक्षित खजाना इसी किले की जमीन में दबाया था। इसी विश्वास के चलते कई लोगों ने वर्षों पहले किले के भीतर 5 से 10 फीट तक गहरे गड्ढे खोद डाले। काले सांप की लोककथा स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, किले के पास दो लोक देवताओं के मंदिर हैं और कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा काला सांप उस खजाने की रखवाली करता है। मान्यता है कि उस सांप के सिर पर धार्मिक निशान मौजूद हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जिन्हें सपने में माताजी के दर्शन होते हैं, वे किले से धन निकाल सकते हैं और उस सांप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, बीते समय में सांप के काटने से कुछ लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे इन कहानियों को और बल मिला। खंडहर में बदलती ऐतिहासिक धरोहर आज यह किला कोठारिया राजपरिवार की निजी संपत्ति माना जाता है। निजी स्वामित्व और वारिसों के कारण, पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद इसकी देखरेख पर अब तक विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। संरक्षण के अभाव में यह किला धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, लेकिन इसकी जर्जर दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम, वीरता और इतिहास की अनकही कहानियां बयां करती हैं। रकमगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई, वीरता और लोककथाओं का जीवंत प्रतीक है। जहां एक ओर यह तात्या टोपे और झांसी की रानी के शौर्य की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर रहस्य और किंवदंतियों के कारण लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।

भारत-पाक बॉर्डर से सटे इलाकों में पाकिस्तानी सिम और आवाजाही पर 2 माह तक बैन

श्रीगंगा नगर. भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे श्रीगंगानगर जिले के इलाकों में राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तानी लोकल सिम कार्ड के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। श्रीगंगा नगर जिला मजिस्ट्रेट डॉ. मंजू ने बताया कि सीमा से लगे पाकिस्तानी क्षेत्र में स्थापित मोबाइल टॉवरों का नेटवर्क भारतीय सीमा के भीतर तीन से चार किलोमीटर तक आ सकता है, जिससे सुरक्षा संबंधी खतरे की आशंका बनी रहती है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है। शाम 7 से सुबह 6 बजे तक नो-गो जोन आदेशानुसार भारत-पाक बॉर्डर सटे 3 किमी के दायरे में शाम 7 से सुबह 6 बजे तक लोगों के आवागमन पर पूरी तरह बैन रहेगा। श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़ और घड़साना उपखंड से लगती सीमा पर यह नियम लागू होगा। वहीं, सिंचाई के लिए जाने वाले किसानों को बीएसएफ या सेना के अधिकारियों से परमिशन लेनी होगी। आदेश उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किया है कि जिले के किसी भी ऐसे क्षेत्र में, जहां पाकिस्तानी नेटवर्क के जरिए संपर्क संभव है। पाकिस्तानी लोकल सिम के उपयोग पर रोक कोई भी व्यक्ति पाकिस्तानी लोकल सिम का उपयोग नहीं करेगा और न ही किसी को इसकी अनुमति दी जाएगी। आदेश का उल्लंघन करने पर दोषी के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 15 जनवरी से आगामी दो माह की अवधि तक प्रभावशील रहेगा।

रॉयल राजस्थान: घूमने की 10 शानदार जगहें, जो आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर हों

जयपुर राजस्थान को यूं ही राजाओं की धरती नहीं कहा जाता। किले, महल, झीलें, रेगिस्तान और वन्यजीवन—यहां का हर रंग यात्रियों को अलग अनुभव देता है। इतिहास की गूंज, परंपराओं की खुशबू और प्रकृति की भव्यता राजस्थान को भारत के सबसे खास पर्यटन राज्यों में शामिल करती है। अगर आप भारत में घूमने की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान की ये 10 जगहें आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। आमेर किला, जयपुर जयपुर की पहाड़ियों पर स्थित आमेर किला राजपूत शौर्य और स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। ऊंचे दरवाजे, नक्काशीदार दीवारें और शीश महल इसकी पहचान हैं। दिन के समय इसकी भव्यता और शाम को रोशनी में नहाया किला इतिहास को जीवंत कर देता है। सर्दियों का मौसम यहां घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। उदयपुर सिटी पैलेस झीलों के शहर उदयपुर का सिटी पैलेस राजस्थानी और मुगल स्थापत्य का खूबसूरत संगम है। महल के आंगन, बालकनियां और संग्रहालय मेवाड़ राजघराने की शाही जिंदगी की झलक दिखाते हैं। पिछोला झील के किनारे बना यह महल सितंबर से मार्च के बीच सबसे ज्यादा आकर्षक लगता है। जैसलमेर किला थार रेगिस्तान के बीच खड़ा जैसलमेर किला आज भी आबाद है। सुनहरे पत्थरों से बना यह किला सूरज की रोशनी में अलग ही रंग बिखेरता है। इसकी गलियों में घूमते हुए सदियों पुरानी जीवनशैली को करीब से महसूस किया जा सकता है। सर्दियों में यहां का मौसम घूमने के लिए आदर्श रहता है। रणथंभौर नेशनल पार्क वन्यजीवन प्रेमियों के लिए रणथंभौर किसी सपने से कम नहीं। यहां खुले जंगल में बाघ को देखने का रोमांच अलग ही स्तर का होता है। इसके साथ ही पक्षी, हिरण और ऐतिहासिक खंडहर इस पार्क को खास बनाते हैं। अक्टूबर से जून तक का समय सफारी के लिए उपयुक्त माना जाता है। पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर अरावली की गोद में बसा पुष्कर आध्यात्मिक शांति का केंद्र है। पवित्र झील के चारों ओर बने घाट और ब्रह्मा मंदिर इस शहर की पहचान हैं। यहां की गलियों में घूमते हुए संस्कृति और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। अक्टूबर से मार्च के बीच पुष्कर सबसे ज्यादा जीवंत रहता है। मेहरानगढ़ किला, जोधपुर नीले शहर जोधपुर के ऊपर स्थित मेहरानगढ़ किला राजस्थान के सबसे प्रभावशाली किलों में से एक है। इसकी ऊंचाई से पूरा शहर एक अलग ही रंग में नजर आता है। किले के भीतर मौजूद संग्रहालय और शाम का लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को खास अनुभव देता है। हवा महल, जयपुर जयपुर का हवा महल अपनी अनोखी बनावट के लिए दुनियाभर में मशहूर है। सैकड़ों झरोखों वाली यह इमारत राजघराने की महिलाओं के लिए बनाई गई थी। सुबह की रोशनी में इसका गुलाबी रंग बेहद आकर्षक दिखाई देता है। चित्तौड़गढ़ किला राजपूती वीरता और बलिदान की गाथाओं का प्रतीक चित्तौड़गढ़ किला भारत का सबसे बड़ा किला माना जाता है। विजय स्तंभ और मंदिरों से सजा यह किला इतिहास प्रेमियों को गहराई से प्रभावित करता है। सर्दियों में यहां घूमना सबसे आरामदायक रहता है। थार रेगिस्तान और कैमल सफारी रेत के टीलों के बीच ऊंट सफारी राजस्थान के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। सूर्यास्त के समय बदलते रंग और रात में तारों से भरा आसमान रेगिस्तान को जादुई बना देता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है। केवलादेव घना नेशनल पार्क, भरतपुर भरतपुर स्थित यह पक्षी अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा है। सर्दियों में यहां प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा देखने को मिलता है। शांत वातावरण और हरियाली इसे खास बनाती है। राजस्थान क्यों है खास राजस्थान सिर्फ किलों और महलों तक सीमित नहीं है। यहां के मेले, लोक संगीत, रंगीन बाजार और पारंपरिक खानपान हर यात्रा को यादगार बना देते हैं। चाहे इतिहास में रुचि हो या प्रकृति से लगाव, राजस्थान हर यात्री को कुछ न कुछ खास जरूर देता है।

कोटा में PM मोदी, पूर्व CM गहलोत, अमिताभ बच्चन समेत 50 मूर्तियों वाला अनूठा मंदिर

कोटा. देशभर में देवी-देवताओं के मंदिर बहुत हैं, लेकिन शिक्षा नगरी कोटा में नयापुरा स्थित कर्मयोगी भारत माता भवन में एक ही स्थान पर न सिर्फ देवी-देवताओं और आराध्यों के दर्शन होंगे, बल्कि संतों, महापुरुषों, नेताओं, अभिनेताओं और खेल व कला जगत से जुड़ी हस्तियों के भी दर्शन किए जा सकेंगे। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मयोगी सेवा संस्थान ने देश के महापुरुषों का विशेष ‘मंदिर’ तैयार किया है। इसमें देवी-देवताओं समेत करीब 50 मूर्तियों की स्थापना की गई है। इनमें भारत रत्न सम्मानित विभूतियां, विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के माध्यम से विश्वभर में देश का मान बढ़ाने वाले महापुरुष, देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारी, शिक्षा नगरी के विकास में योगदान देने वाले जनप्रतिनिधि, क्रिकेट के भगवान, स्वर कोकिला, आजादी के नायक और सदी के महानायक तक शामिल हैं। चार मंजिला कर्मयोगी भवन में वर्ष 2023 में तीन प्रतिमाओं की स्थापना से इसकी शुरुआत की गई थी। संस्थान के संस्थापक राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ का मानना है कि संभवतः ऐसा कोई अन्य भवन नहीं है, जहां एक ही स्थान पर इतनी विविध हस्तियों की मूर्तियों की स्थापना की गई हो। भारत के ये नौ रत्न भवन के अलग-अलग भागों में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न इंदिरा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. भीमराव आंबेडकर, राजीव गांधी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर और मदर टैरेसा की मूर्तियां स्थापित की गई है। इनके अलावा श्रद्धा व आस्था के प्रतीक भगवान राम, महादेव, हनुमान, देवी दुर्गा, देवी सरस्वती, राधा-कृष्ण, भगवान परशुराम, भगवान देवनारायण, महाराजा अग्रसेन, बाबा रामदेव, तेजाजी महाराज, भगवान झूलेलाल, मीनेश भगवान, महर्षि वाल्मीकि, भगवान महावीर की मूर्तियों की स्थापना की गई है। देशभक्ति भावना के प्रतीक भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, स्वामी विवेकानंद, चंद्रशेखर आजाद, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस, महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और झांसी की रानी, शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह और खेतसिंह खंगार की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं। गायिका लता मंगेशकर, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन, मुंशी प्रेमचंद, हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की प्रतिमाएं भी मंदिर में स्थापित हैं। शहर व देश के ये गौरव देशभर में कोटा का नाम रोशन करने वाले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विकास की दृष्टि से कोटा को विशेष पहचान दिलाने वाले पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, ‘जादूगर’ के नाम से प्रख्यात पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। कर्मयोगी का कहना है कि मोदी के कार्यकाल में कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं, इसी कारण उनकी प्रतिमा यहां स्थापित की गई है। भारत बनेगा कोहिनूर – महात्मा गांधी और सुभाषचंद्र बोस के मध्य 7 फीट ऊंची व 5 फीट चौड़ी भारत माता की आकृति दीवार में उकेरी गई है। प्रतिमा के दोनों ओर शेरमुख बनाए गए हैं। एक हाथ में कोहिनूर दर्शाया गया है, जो यह संदेश देता है कि अब तक ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाला भारत, आगे चलकर ‘कोहिनूर’ बनेगा। करीब 56 फीट की ऊंचाई पर तीन मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जबकि शेष प्रतिमाएं लगभग 50 फीट की ऊंचाई तक स्थापित की गई हैं। इनमें 12 प्रतिमाएं 3-3 फीट ऊंची हैं और शेष 15-15 इंच की हैं। सभी प्रतिमाएं सफेद संगमरमर से तैयार की गई हैं। बड़ी प्रतिमाओं का वजन लगभग 250 किलो और छोटी प्रतिमाओं का वजन 50-50 किलो है। कला, संस्कृति, सद्भाव और देशभक्ति का संदेश संस्थान के कर्मयोगी और अल्का दुलारी का मानना है कि यह मंदिर महापुरुषों द्वारा बताए गए आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही यह सद्भाव, कला, संस्कृति, अध्ययन और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। कर्मयोगी बताते हैं कि उनके परिसर में 15 अगस्त और 26 जनवरी का विशेष महत्व है। मंदिर निर्माण के प्रेरक उनके पिता मेवालाल जैन का जन्म, मृत्यु और विवाह 26 जनवरी को हुआ, जबकि दादा श्रीबख्श जैन का जन्म और विवाह 15 अगस्त को हुआ था। इसी कारण 26 जनवरी को मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन मां कांता जैन करेंगी।

वंदे मातरम् रैली: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के साथ जवानों और नागरिकों ने जताया देशभक्ति का जोश

जयपुर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने आज विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र के अंबाबाड़ी में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन तथा सांस्कृतिक एवं नैतिक प्रशिक्षण फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रभक्ति भाव जागरण ‘वंदे मातरम्’ रैली में शिरकत की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बालक-बालिकाओं सहित आमजन की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति श्रद्धा, त्याग और समर्पण की भावना का प्रतीक है। यह मंत्र स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक देशवासियों में राष्ट्रप्रेम, एकता और आत्मगौरव की चेतना जागृत करता रहा है। ऐसी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रैलियां हमारी सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय चेतना और नागरिक कर्तव्यों के प्रति संकल्प को और अधिक सशक्त करती हैं।   उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् शब्द नहीं, बल्कि शौर्य, साहस, त्याग, बलिदान और समर्पण का भाव है, जिस पर प्रत्येक देशवासी को गर्व है। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी को इतिहास और महापुरुषों के बारे में जानकारी देने तथा उन्हें सही दिशा दिखाने की आवश्यकता पर बल दिया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की डबल इंजन सरकार निरंतर विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।  कार्यक्रम में जयपुर सांसद श्रीमती मंजू शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर महानगर प्रचारक श्री प्रशांत, एचएसएस फाउंडेशन के अध्यक्ष सुभाष बापना, सचिव सोमकांत शर्मा, उपाध्यक्ष शीला अग्रवाल, आरएसएस के क्षेत्रीय संघचालक डॉ. रमेश, संस्कार भारती के राजस्थान अध्यक्ष अरुण, भाजपा जिला अध्यक्ष अमित गोयल सहित एचएसएस फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में बालक-बालिकाएं उपस्थित रहे।