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डेजर्ट नेशनल पार्क में नई स्पाइडर प्रजाति मिली, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

 जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क से एक बड़ी खोज सामने आई है. इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर की नई प्रजाति ‘मोग्रस शुष्का' को खोजा है. इस खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है. यह शोध European Journal of Taxonomy और Zootaxa जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुआ है. इससे यह स्पष्ट है कि यह खोज वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. चार नई प्रजातियों की पहचान इस अध्ययन में सिर्फ ‘मोग्रस शुष्का' ही नहीं बल्कि तीन अन्य नई प्रजातियों की भी पहचान की गई है. इनमें मोग्रस पुणे लैंगेलुरिलस सह्याद्री और लैंगेलुरिलस उदयपुरीन्सिस शामिल हैं. यह खोज दर्शाती है कि रेगिस्तान में अभी भी कई अनदेखे जीव मौजूद हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘मोग्रस शुष्का' अत्यधिक गर्मी कम नमी और रेतीले माहौल में आसानी से खुद को ढाल लेती है. यह प्रजाति Rajasthan और Gujarat के शुष्क इलाकों में पाई जाती है. पुरानी प्रजातियों की भी नई जानकारी शोध में कुछ पहले से ज्ञात प्रजातियों की अधूरी जानकारी भी पूरी की गई. मोग्रस राजस्थानेंसिस के नर का पहली बार वैज्ञानिक विवरण मिला जबकि कुछ अन्य प्रजातियों की मादाओं का भी पहली बार वर्णन किया गया. एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि मोग्रस लारिसाए नामक मकड़ी जो पहले केवल कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में पाई जाती थी उसे पहली बार भारत में दर्ज किया गया. पारिस्थितिकी में मकड़ियों की बड़ी भूमिका विशेषज्ञों का कहना है कि मकड़ियां कीटों की संख्या नियंत्रित कर फसलों की रक्षा करती हैं और फूड चेन को संतुलित बनाए रखती हैं. दुनिया भर में मकड़ियां हर साल लगभग 300 मिलियन टन कीट खा जाती हैं. रेगिस्तानी जैव विविधता का नया आयाम डेजर्ट नेशनल पार्क अब सिर्फ गोडावण जैसे बड़े जीवों के लिए नहीं बल्कि सूक्ष्म जीव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है. यहां करीब 120 प्रकार की स्पाइडर प्रजातियां पाई जाती हैं जो इसकी समृद्ध पारिस्थितिकी को दर्शाती हैं.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसल,आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत खारिज

 जयपुर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक परीक्षा घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने आरएएस चयनित हनुमाना राम की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने पहले नोटिस जारी किया था लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया. सरकार ने साफ कहा कि आरोपी का आचरण बेहद गंभीर है और उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए. अदालत ने राज्य के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राहत देने से मना कर दिया. डमी अभ्यर्थी बनकर दी कई परीक्षाएं जांच में सामने आया कि हनुमाना राम ने तीन लोगों के लिए डमी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दी. इसके अलावा उसने कई अन्य परीक्षाओं में भी प्रॉक्सी के तौर पर हिस्सा लिया. इनमें पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 और पटवार भर्ती परीक्षा 2021 शामिल हैं. आरोपी हनुमाना राम पढ़ाई में तेज माना जाता था. उसने आरएएस 2018 में 22वीं रैंक हासिल की थी और एक अन्य परीक्षा में दूसरी रैंक भी लाई थी. इसके बावजूद उस पर संगठित पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने के आरोप लगे हैं. जांच में सामने आई गहरी संलिप्तता शुरुआती एफआईआर में आरोपी का नाम नहीं था लेकिन जांच के दौरान उसकी भूमिका सामने आई. इससे संकेत मिलता है कि वह किसी बड़े परीक्षा रैकेट का हिस्सा था और लगातार ऐसे अपराधों में शामिल रहा. अदालत ने बताए गंभीर प्रभाव राज्य सरकार ने तर्क दिया कि ऐसे कृत्य से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ता है. अगर जिम्मेदार पद पर चयनित व्यक्ति ही ऐसा करें तो यह पूरे सिस्टम के लिए खतरा बन जाता है. साथ ही राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि याचिकाकर्ता आरएएस अधिकारी नियुक्त हुआ है तो वह राज्य को बेच देता. आगे अदालत ने कहा कि आरोपी का व्यवहार एक बार की गलती नहीं बल्कि लगातार किया गया अपराध है. ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है.

श्यामसर गांव में ऐतिहासिक मायरा, चार भाइयों ने बहन को दिया करोड़ों का उपहार

 नागौर राजस्थान में नागौर जिले के श्यामसर गांव में भाई-बहन के रिश्ते ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे मारवाड़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर में चर्चा की लहर पैदा कर दी है. यहां चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए ऐसा मायरा भरा, जो अब इतिहास बन गया है. यह मायरा सिर्फ धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और संस्कारों का अनोखा संगम बनकर सामने आया है. इतिहास रच गया मायरा श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की बेटी रामी देवी के परिवार में शादी का अवसर था. उनके बच्चों के विवाह समारोह में मायरे की रस्म के दौरान उनके चार भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर दिल खोलकर मायरा भरा. 21 लाख 51 हजार रुपये नगद, 25 बीघा खेती योग्य जमीन,7 बरी सोना, 21 बरी चांदी, 51 हजार रुपये टीका-  कुल मिलाकर यह मायरा 1 करोड़ 51 लाख रुपये का रहा, जिसने इस परंपरा को एक नई ऊंचाई दे दी. 1 करोड़ 51 लाख का उपहार स्थानीय लोगों के अनुसार, 'इतना बड़ा मायरा पहले कभी नहीं देखा गया. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह घटना यह भी दिखाती है कि जहां कई जगह मायरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, वहीं श्यामसर के इन भाइयों ने इसे फिर से भावनाओं और जिम्मेदारी का उत्सव बना दिया. पूरा इलाका इस अनोखे मायरे की चर्चा कर रहा है. आस-पास के गांवों से लोग इस आयोजन को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. सोशल स्तर पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इसे राजस्थानी परंपरा का स्वर्णिम उदाहरण बता रहे हैं. परंपरा और आधुनिकता का संगम राजस्थान में मायरा केवल रस्म नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. श्यामसर की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी परंपराएं जीवित हैं, बस उन्हें निभाने का जज्बा होना चाहिए. क्या श्यामसर का यह मायरा आने वाले समय में नई परंपरा बनेगा? या फिर यह केवल एक अनोखी मिसाल बनकर रह जाएगा? श्यामसर का यह मायरा केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है.

अजमेर में पानी सप्लाई बहाल, कई इलाकों को राहत

अजमेर अजमेर में बीसलपुर पाइपलाइन मरम्मत का काम पूरा हो गया. 30 घंटे का शटडाउन खत्‍म हो गया. कई इलाकों में सप्लाई बहाल हो गई. कल तक जलापूर्ति पूरी तरह पटरी पर आने की उम्मीद है. अब लोगों को पानी की समस्‍या नहीं होगी. पहले की तरह से पानी की सप्‍लाई शुरू हो जाएगी. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने बीसलपुर-अजमेर पेयजल परियोजना के अंतर्गत 30 घंटे का शटडाउन लिया था. 30 घंटे का शटडाउन अजमेर में 12 अप्रैल रात 12 बजे से 14 अप्रैल सुबह 6 बजे तक 30 घंटे पेयजल सप्लाई बंद थी. इस दौरान 1600 एमएम और 1500 एमएम पाइपलाइन पर जरूरी तकनीकी कार्य किए गए. इन इलाको में सप्लाई बाधित शटडाउन के कारण अजमेर शहर के साथ-साथ ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, सरवाड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित रही. शहर के प्रमुख इलाकों में वैशाली नगर, पंचशील, आदर्श नगर, माकड़वाली रोड, धोलाभाटा, क्रिश्चियनगंज, केसरगंज, रामगंज, सिविल लाइंस, फॉयसागर रोड और दरगाह क्षेत्र सहित कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बंद थी. लोगों को हुई परेशानी? 30 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहने से नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. घरों में पानी स्टोरेज सीमित होने से खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई जैसी दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ी. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा.

सीलबंद Maaza में प्लास्टिक मिला, आयोग का बड़ा फैसला

  जैसलमेर खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कंपनी को कड़ा सबक सिखाया है. माजा (Maaza) कोल्ड ड्रिंक की सीलबंद बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा मिलने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी और विक्रेताओं पर कुल 2.50 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है. साथ ही आयोग ने परिवादी को क्षतिपूर्ति रकम के तौर पर 40 हजार रुपये और परिवाद लड़ने में हुए खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया है. माजा की बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा दरअसल, 16 जुलाई 2025 को जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से माजा कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी. जब उन्होंने बोतलों की जांच की तो वह यह देखकर दंग रह गए कि माजा कोल्ड ड्रिंक की बोतल पूरी तरह सीलबंद थी, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई चीज नजर आई. इस पर ताषर ने स्वास्थ्य के साथ इसे खिलवाड़ लापरवाही मानते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी ने वह सीलबंद बोतल साक्ष्य के तौर पर आयोग के सामने पेश की. आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गोड की पीठ ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद गुणवत्ता में कमी गंभीर लापरवाही है. निरीक्षण में कोल्ड ड्रिंक की बोतल के अंदर बाहरी पदार्थ मिलने की पुष्टि हुई. परिवादी को 40 हजार रुपये देने का आदेश साक्ष्यों और बहस के आधार पर आयोग ने 9 अप्रैल 2026 को कंपनी को दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया. आयोग ने कंपनी को परिवादी को 40,000 रुपए क्षतिपूर्ति राशि और 10,000 रुपए परिवाद व्यय देने के निर्देश दिए. साथ ही उत्पाद की गुणवत्ता में गंभीर कमी को देखते हुए 2 लाख रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश भी दिया गया. परिवादी के अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

Udaipur में अचानक तापमान उछाल, मौसम विभाग ने दी हीटवेव की चेतावनी

  जैसलमेर राजस्थान के जैसलमेर में भीषण गर्मी पड़ने लगी है. तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे ज्यादा है. दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने हालात और भी मुश्किल कर दिए. सड़कों पर सन्नाटा नजर आया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले.   आने वाले समय में और बढ़ेगा तापमान शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए प्याऊ और मटकी का ठंडा पानी राहगीरों के लिए राहत का जरिया बन रहा है. लोग रुककर पानी पीते नजर आ रहे हैं, जिससे कुछ हद तक गर्मी से राहत मिल रही है. मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सावधानी बरतने, दोपहर में धूप से बचने और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है. उदयपुर के तापमान में अचानक उछाल उदयपुर में पिछले तीन दिनों में तापमान में अचानक उछाल देखने को मिला हैं. सोमवार को तापमान 39.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो कि इस महीने का सबसे गर्म दिन रहा. यहीं नहीं, मौसम विभाग ने इस सप्ताह आसमान साफ रहने और तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई हैं. वहीं मंगलवार दोपहर को अचानक गर्म हवाएं चलने लगी और हीटवेव का अहसास दिलाने लगी.    इस बार सामान्य रहेगी बारिश   इस साल मानसून को लेकर तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आ रही है.  मौसम विभाग के पहले पूर्वानुमान में साफ कहा गया है कि देश में इस बार सामान्य से कम बारिश हो सकती है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी लगभग 8 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है. मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह अल नीनो को माना जा रहा है.  यह प्रशांत महासागर के पानी के गर्म होने की स्थिति होती है जो भारत में मानसून को कमजोर कर देती है.  इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है जिससे मानसून की शुरुआत और उसकी रफ्तार दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

अजमेर में पानी संकट के बीच अवैध कनेक्शन से पानी चोरी का मामला सामने आया

 माखुपुरा राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के विदा होते ही सूर्यदेव ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. अजमेर में पारा 36.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जिले में पेयजल संकट गहराने लगा है. इस संकट के बीच, माखुपुरा इलाके में पानी चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जनता के पीने के पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही थी. जिसकी भनक  जलदाय विभाग को लगते ही टीम ने  कार्रवाई करते हुए इस पूरे खेल का खुलासा कर दिया. खेत में टैंक बनाकर पीने के पानी का कर रहा था स्टोरेज मामला माखुपुरा इलाके का है जहां जलदाय विभाग ने  जांच के दौरान पाया की आरोपी ने न केवल मुख्य पाइपलाइन से कनेक्शन लिया, बल्कि खेत में टैंक बनाकर पानी का स्टोरेज भी कर रहा था. मामले की जांच कर रहे विभाग के जेईएन बीना मीणा ने जलापूर्ति निरीक्षण के दौरान इस अवैध कनेक्शन को पकड़ा. जांच के दौरान पाया कि माखुपुरा के रहने वाले लेखराज के खेत तक सीधे एक पाइपलाइन जोड़ी गई थी. जब उससे कनेक्शन के वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका. जिसके बाद इसकी सूचना विभाग को दी. सूचना के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर एईएन सत्यवीर ने कार्रवाई की. आदर्श नगर थाने में आरोपी के खिलाफ  पानी की चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई.  मामले को लेकर विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि यह केवल पानी चोरी का केस नहीं है. बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और आम जनता के हक पर डाका डालने जैसा है. इलाके में अवैध कनेक्शन की जांच में जुटा जलदाय विभाग फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. साथ ही यह पता लगाने का काम कर रहा है कि कहीं इस तरह के अवैध कनेक्शन इलाके में और तो नहीं हैं. यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अजमेर में कई इलाकों में पानी की किल्लत बनी हुई है. ऐसे में पीने के पानी का दुरुपयोग और अवैध दोहन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

बच्चों के नाम बदलने की पहल, शिक्षा विभाग ने तैयार की 3000 नामों की लिस्ट

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन हजारों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खबर है, जिन्हें अपने अजीबोगरीब नाम या सरनेम की वजह से अक्सर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी. शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर शिक्षा विभाग ने 'सार्थक नाम अभियान' की पूरी तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि बच्चे के आत्मविश्वास का आधार होता है. इसी सोच के साथ अब उन बच्चों के नाम और उपनाम बदले जाएंगे जो सुनने में नकारात्मक या अर्थहीन लगते हैं. विभाग ने तैयार की 3 हजार 'सार्थक' नामों की लिस्ट इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3000 सार्थक और गौरवपूर्ण नामों की एक आधिकारिक लिस्ट तैयार की है. इस लिस्ट में बालिकाओं के लिए 1529 और बालकों के लिए 1409 बेहतरीन नाम शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि ये नाम बच्चों की राशि और उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि अभिभावक अपनी पसंद और विश्वास के अनुसार सही नाम का चुनाव कर सकें. शिक्षा मंत्री का कहना है कि अक्सर जानकारी के अभाव में बच्चों के नाम 'कजोड़मल', 'शेरू' या 'घीसा' जैसे रख दिए जाते हैं, जिससे बड़े होने पर उन्हें समाज में अजीब लगता है. विभाग अब इन नामों की जगह सम्मानजनक विकल्प दे रहा है. इस अभियान का एक अहम पहलू बच्चों के सरनेम में बदलाव करना भी है. सरकार ने उन उपनामों को बदलने का सुझाव दिया है जो आज के दौर में गरिमापूर्ण नहीं माने जाते. शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इन पुराने उपनामों की जगह 'वाल्मीकि' या अन्य सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए. इससे न केवल बच्चों की सामाजिक छवि बेहतर होगी, बल्कि उनमें जातिगत हीन भावना को खत्म करने में भी मदद मिलेगी. शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह अभियान पूरी तरह से स्वैच्छिक है और किसी पर भी नाम बदलने का दबाव नहीं बनाया जाएगा. चयन के लिए पेरेंट्स की लिखित सहमति जरूरी स्कूलों में होने वाली एसएमसी (SMC) और पीटीएम (PTM) बैठकों के दौरान शिक्षक उन बच्चों की पहचान करेंगे जिनके नाम सुधारने की जरूरत है. इसके बाद विभाग द्वारा सुझाई गई लिस्ट अभिभावकों को दिखाई जाएगी. यदि माता-पिता अपने बच्चे का नाम या सरनेम बदलने के लिए तैयार होते हैं, तो उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही सरकारी दस्तावेजों, शाला दर्पण पोर्टल और यूडीआईएसई प्लस पर नाम बदला जाएगा. यह प्रक्रिया फिलहाल कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के लिए ही लागू की गई है. विरोध के स्वर: नाम जरूरी या सुविधाओं में सुधार? जहां सरकार इसे बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए एक क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं कुछ संगठनों ने इसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संयुक्त अभिभावक संघ और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को बच्चों के नाम बदलने के बजाय निजी स्कूलों की मनमानी फीस रोकने, स्कूलों के जर्जर ढांचे को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. उनका तर्क है कि नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक बदलाव है, जबकि शिक्षा का असली सुधार धरातल पर सुविधाओं को बढ़ाने से होगा.

अल नीनो का असर, मानसून कमजोर पड़ने की आशंका

जयपुर अगर आप भीषण गर्मी के बाद झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का यह ताजा अपडेट आपको थोड़ा निराश कर सकता है. विभाग के पहले पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का केवल 92 प्रतिशत ही रह सकती है, यानी सीधा-सीधा 8 प्रतिशत का घाटा. क्यों रूठेंगे बादल? 'अल नीनो' है बड़ी वजह जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मंगलवार को NDTV राजस्थान से बातचीत में बताया कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'अल नीनो' को माना जा रहा है. दरअसल, प्रशांत महासागर का पानी जब गर्म होने लगता है, तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है. इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है, जिससे न सिर्फ मानसून की शुरुआत धीमी होगी, बल्कि उसकी रफ्तार पर भी ब्रेक लग सकता है. राजस्थान समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर आंकड़ों की मानें तो उत्तर भारत के राज्यों- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश होने की आशंका है. मध्य भारत में भी 5 से 10 प्रतिशत की कमी रह सकती है. हालांकि, पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है. पिछले 10 साल में यह दूसरी बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है. जेब और खेती पर पड़ेगा बुरा असर देश की 75 प्रतिशत बारिश मानसून पर टिकी है. अगर बारिश कम हुई, तो धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घट सकता है. जब पैदावार कम होगी, तो बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ सकती है. इसके अलावा, कम बारिश का मतलब है पानी की कमी और बिजली की बढ़ती मांग. राजस्थान में 44 डिग्री का 'टॉर्चर' शुरू मानसून तो बाद में आएगा, लेकिन गर्मी ने अभी से पसीने छुड़ा दिए हैं. पिछले 24 घंटों में बाड़मेर में पारा 41.8 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है. मौसम विभाग का कहना है कि 17 और 18 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में तापमान 42 से 44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अगले कुछ दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में भीषण हीटवेव (लू) चलने की भी चेतावनी दी गई है. आमतौर पर देश में मानसून सीजन के दौरान करीब 87 सेंटीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 80 सेंटीमीटर तक रह सकती है. यह गिरावट भले बहुत बड़ी न लगे लेकिन इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है.

फर्जी ट्रैवल पैकेज से सावधान! यात्रा सीजन में ऑनलाइन ठगी पर पुलिस की चेतावनी

जयपुर चारधाम यात्रा सीजन से पहले राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने श्रद्धालुओं के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह के निर्देश पर जारी इस एडवाइजरी का उद्देश्य यात्रियों को साइबर अपराधियों से बचाना है. डीआईजी ने चेतावनी दी   साइबर क्राइम के डीआईजी शंतनु कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि श्रद्धालु केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल या भरोसेमंद ट्रैवल एजेंसियों के जरिए ही बुकिंग करें. ठग फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सस्ते पैकेज या तुरंत दर्शन के नाम पर लुभावने विज्ञापन डालकर लोगों को फंसाते हैं. एडवाइजरी में लोगों से अपील की गई है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी यूपीआई डिटेल, ओटीपी या कार्ड संबंधी जानकारी साझा न करें और अनचाहे कॉल पर भुगतान करने से बचें. पब्लिक वाई-फाई यूज नहीं करने की सलाह इसके अलावा, यात्रा के दौरान सुरक्षित डिजिटल लेनदेन पर भी जोर दिया गया है.  रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या धर्मशालाओं में पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल कर वित्तीय लेनदेन न करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे डेटा चोरी का खतरा रहता है. पुलिस ने यह भी चेताया है कि पैसे प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं होती, और पिन केवल पैसे भेजते समय ही डाला जाता है.  यात्रियों को सुरक्षित और भीड़भाड़ वाले स्थानों, खासकर बैंक परिसर में स्थित एटीएम का उपयोग करने की सलाह दी गई है. मोबाइल सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखने और पब्लिक यूएसबी चार्जिंग पोर्ट के बजाय पर्सनल पावर बैंक इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. फर्जी काल से सावधान रहें श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे अपनी लाइव लोकेशन केवल विश्वसनीय परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें और मंदिर या पुलिस अधिकारी बनकर आने वाले फर्जी कॉल से सावधान रहें.  किसी भी आपातकालीन स्थिति में पहले सत्यापन करने की सलाह दी गई है. साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है. राजस्थान पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं से सुरक्षित और सतर्क रहकर यात्रा करने की अपील की है.