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Rajasthan Panchayat Election: बदला चुनाव कार्यक्रम, पहले तीन चरणों की वोटिंग अब इन तारीखों पर होगी

जयपुर राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तारीखों में बड़ा बदलाव किया गया है। धनतेरस पर्व के संबंध में धार्मिक आस्था और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले, दूसरे और तीसरे चरण की चुनाव प्रक्रिया में संशोधन किया गया है। इसके तहत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के साथ पंच-सरपंच के मतदान की तारीखें एक-एक दिन पहले कर दी गई हैं। वहीं, चौथे चरण की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर को होगा। वहीं, पंच-सरपंच के लिए मतदान 24 अक्टूबर, 30 अक्टूबर, 5 नवंबर और 16 नवंबर को कराया जाएगा। बता दें कि पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए चार चरणों में मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होना था। इसी तरह पंच-सरपंच के लिए 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को मतदान होना था। लेकिन, अब राज्य चुनाव आयोग ने पहले तीन चरणों की तारीखों में बदलाव किया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रथम चरण में 21 अक्टूबर को जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान होगा और 22 अक्टूबर को मतदान होगा। 23 अक्टूबर को पंच/सरपंच के लिए नामांकन व 24 अक्टूबर को पंच/सरपंच के लिए मतदान होगा। इसके अलावा 25 अक्टूबर को उप सरपंच का चुनाव होगा। दूसरे चरण में 27 अक्टूबर को जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी और 28 अक्टूबर को मतदान होगा। 29 अक्टूबर को पंच/सरपंच के लिए नामांकन व 30 अक्टूबर को पंच/सरपंच के लिए मतदान। 31 अक्टूबर को उप सरपंच का चुनाव होगा। तीसरे चरण में 2 नवंबर को जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान होगा और 3 नवंबर को मतदान होगा। 4 नवंबर को पंच/सरपंच के लिए नामांकन व 5 नवंबर को पंच/सरपंच के लिए मतदान होगा। 6 नवंबर को उप सरपंच का चुनाव होगा। चुनावी कार्यक्रम में हुआ बदलाव     21 अक्टूबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान/पहुंच।     22 अक्टूबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान।     23 अक्टूबर 2026: पंच/सरपंच के लिए नामांकन।     24 अक्टूबर 2026: पंच/सरपंच के लिए मतदान।     25 अक्टूबर 2026: उप सरपंच का चुनाव।     27 अक्टूबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान/पहुंच।     28 अक्टूबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान।     29 अक्टूबर 2026: पंच/सरपंच के लिए नामांकन।     30 अक्टूबर 2026: पंच/सरपंच के लिए मतदान।     31 अक्टूबर 2026: उप सरपंच का चुनाव।     2 नवंबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए पोलिंग पार्टियों का प्रस्थान/पहुंच।     3 नवंबर 2026: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान।     4 नवंबर 2026: पंच/सरपंच के लिए नामांकन।     5 नवंबर 2026: पंच/सरपंच के लिए मतदान।     6 नवंबर 2026: उप सरपंच का चुनाव।

मेहनत की मिसाल बनी किसान की बेटी, प्रियंका सिहाग ने तीसरे प्रयास में हासिल की 40वीं रैंक; बनीं SDM

हनुमानगढ़  सफलता किसी की मोहताज नहीं होती, और जब इरादे मजबूत हों तो गांव-देहात से निकलकर भी देश-प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं को फतह किया जा सकता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के बरमसर गांव की रहने वाली प्रियंका सिहाग ने इस बात को साबित कर दिखाया है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाली प्रियंका ने लगातार तीन बार राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास की और अब अपने तीसरे प्रयास में प्रदेशभर में 40वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (SDM) बनने का सपना पूरा किया। 21 वर्ष की उम्र में शुरुआत और लगातार 3 बार सफलता प्रियंका सिहाग की यह यात्रा महज एक बार में मिली सफलता नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतरता और कड़ी मेहनत की मिसाल है। पहला प्रयास (RAS-2021): महज 21 वर्ष की उम्र में प्रियंका ने पहली बार परीक्षा दी और पूरे राजस्थान में 599वीं रैंक हासिल की। हालांकि, केवल 1 अंक से सेवा आवंटन रुक जाने के कारण उन्हें पद नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरा प्रयास (RAS-2023): प्रियंका ने अपनी गलतियों से सीख लेते हुए दूसरे प्रयास में 265वीं रैंक प्राप्त की और उनका चयन असिस्टेंट कमर्शियल टैक्स ऑफिसर (ACTO – GST) के पद पर हुआ। तीसरा प्रयास (RAS-2024): शादी के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल राजस्थान 40वीं रैंक हासिल की। इसके बाद सितंबर 2026 में हुए सेवा आवंटन में उन्हें SDM का पद मिला। प्रियंका की शादी बीकानेर जिले के खाजूवाला निवासी दिलीप कुमार भांभू से हुई है, जो राजस्थान तहसील सेवा (2018 बैच) के अधिकारी हैं और वर्तमान में तहसीलदार के पद पर कार्यरत हैं। उनके ससुर आसाराम भांभू भी एक सरकारी शिक्षक हैं। प्रियंका ने बताया कि शादी के बाद RAS-2024 परीक्षा की तैयारी करने और अपना लक्ष्य हासिल करने में उन्हें अपने पति और ससुर का पूरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिला। पारिवारिक संघर्ष और प्रेरणा की कहानी प्रियंका के पिता पुरुषोत्तम सिहाग एक साधारण किसान हैं जो गांव में ही खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां उर्मिला देवी गृहिणी हैं। कॉलेज के दूसरे वर्ष के दौरान प्रियंका ने मोबाइल पर प्रशासनिक अधिकारियों के प्रेरणादायक वीडियो देखे थे, जिसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। युवाओं के लिए प्रेरणादायक सीख प्रियंका सिहाग का संदेश बिल्कुल साफ है कि यदि पहली बार में मनचाही सफलता या रैंक न मिले, तो निराश होने की बजाय अपनी कमियों को सुधारना चाहिए। सही रणनीति, परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत के दम पर जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। सही दिशा में किया गया प्रयास हमेशा रंग लाता है।

सड़क हादसे में महिला की मौत के बाद बवाल, भीड़ ने ट्रक चालक को पकड़ा और केबिन फूंका

उदयपुर राजस्थान के उदयपुर शहर में सोमवार सुबह सड़क हादसे में स्कूटी सवार महिला की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों और आसपास के लोगों ने ट्रक चालक को पकड़ लिया और ट्रक के केबिन में आग लगा दी। इसके बाद लोगों ने सड़क प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही सवीना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने समझाइश कर मामला शांत करवाया और ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। सवीना थाना पुलिस के मुताबिक उदयपुर शहर में तीतरड़ी गुप्तेश्वर रोड पर सुबह करीब 8 बजे हादसा हुआ। तेज रफ्तार ट्रक ने स्कूटी सवार महिला को कुचल दिया। हादसे में निर्मला साहू (48) पत्नी कन्हैयालाल साहू निवासी तीतरड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब ट्रक तीतरड़ी गांव की तरफ आ रहा था और स्कूटी सवार महिला अपने घर की ओर लौट रही थी। जिस जगह हादसा हुआ, वहां से कुछ ही दूरी पर महिला का घर था। ऐसे में हादसे की खबर मिलते ही परिवार के लोग और आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंच गए। भीड़ ने ट्रक में लगाई आग महिला की मौत से गुस्साए लोगों ने ट्रक चालक को मौके पर पकड़ लिया। साथ ही लोगों ने ट्रक के केबिन में आग लगा दी। सड़क पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। लोगों ने पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी का आरोप भी लगाया। पुलिस के अनुसार जिस परिवार ने ट्रक चालक को संरक्षण देने की कोशिश की, उसके खिलाफ भी लोगों ने आक्रोश जताया और हमला करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और चालक को भीड़ से छुड़ाकर सुरक्षित थाने पहुंचाया। पुलिस ने शांत करवाया मामला हादसे के बाद मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने मृतका के परिजनों और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने ट्रक चालक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए। पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, ट्रक चालक को भीड़ के चंगुल से छुड़ाकर पुलिस थाने लाई, जहां पर उससे पूछताछ की जा रही है।

100 फीट चौड़ी होगी न्यू सांगानेर रोड, JDA ने शुरू की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

जयपुर जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने न्यू सांगानेर रोड को 100 फीट चौड़ा करने की कवायद तेज कर दी है। जेडीए ने सोमवार को न्यू सांगानेर रोड पर करीब 260 मकान और दुकानों से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा और यातायात को डायवर्ट किया गया। बता दें कि गुर्जर की थड़ी चौराहे से सोडाला तिराहे तक करीब 3 किलोमीटर एरिया में अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। जेडीए की टीम ने पहले चरण में गुर्जर की थड़ी चौराहे से लजीज रेस्टोरेंट तक करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। दुकानों के बाहर बने रैंप, चबूतरे, फुटपाथ, सीढ़ियां, टिनशेड और बाउंड्रीवॉल हटाई गईं। एक दुकान की टिनशेड हटाने के दौरान व्यापारी अंदर ही खड़ा रहा। मौके पर मौजूद पुलिस जेडीए अधिकारियों ने उसे बाहर निकलने के लिए कहा। लेकिन, जब वह नहीं माना तो उसे पुलिस की मदद से बाहर निकाला गया। वहीं, कई व्यापारियों ने कार्रवाई से पहले खुद ही निर्माण हटाना शुरू कर दिया था। हालांकि कुछ व्यापारियों ने त्योहार के समय कार्रवाई का विरोध करते हुए कारोबार प्रभावित होने की बात कही है। जेडीए के अनुसार न्यू सांगानेर रोड की चौड़ाई कई जगह अवैध निर्माण के कारण 40 से 60 फीट तक रह गई है, जबकि यह सड़क 100 फीट चौड़ी है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद सड़क को निर्धारित चौड़ाई में लाने की कार्रवाई की जा रही है। जेडीए को 6 अक्टूबर को कोर्ट में कार्रवाई की पालना रिपोर्ट पेश करनी है। विधायक ​गोपाल शर्मा भी मौके पर मौजूद अतिक्रमण के खिलाफ हो रही कार्रवाई को देखने के लिए स्थानीय विधायक गोपाल शर्मा भी समर्थकों के साथ मौके पर मौजूद हैं। इस मामले में बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि गुर्जर की थड़ी के 1 किमी के दायरे में सड़क पर हुए अवैध कब्ज़े के खिलाफ जेडीए की यह कार्रवाई की जा रही है। जेडीए यह कार्रवाई राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार कर रहा है। लेकिन, समस्या तब पैदा होती है जब लोगों के पास पहले से ही 40 साल पुराने कानूनी कागज़ात हों। उन्होंने कहा कि सीमांकन में बड़ी गलतियां हुई हैं और इसके सबूत सरकार को सौंपे जा चुके हैं। जब हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख नजदीक आती है, तभी जेडीए कार्रवाई शुरू करता है इससे पहले जेडीए ने पिछले रविवार को न्यू सांगानेर रोड पर लाल निशान दीवारों पर लगाए थे। सोडाला चौराहे से गुर्जर की थड़ी तक करीब 2.5 किलोमीटर हिस्से में जेडीए की 5 टीमों ने रोड नापा था। सड़क के दोनों ओर के करीब 260 निर्माण सड़क सीमा क्षेत्र में चिह्नित किए गए थे। मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई 100 फीट निर्धारित है, जबकि मौके पर कई स्थानों पर सड़क 50 से 60 फीट तक ही है।

सीतामाता अभयारण्य बना दुर्लभ मेंढकों का ठिकाना, राजस्थान में पहली बार सामने आईं खास प्रजातियों की मौजूदगी

प्रतापगढ़ सीतामाता अभयारण्य में कॉमन ट्री फ्रॉग और पेंटेड कालौला जैसी दुर्लभ मेंढक प्रजातियों की मौजूदगी सामने आई है। इन प्रजातियों का यहां पाया जाना अभयारण्य की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। राजस्थान में टोड और मेंढकों की सबसे अधिक प्रजातियां सीतामाता अभयारण्य और इसके आसपास के क्षेत्र में मिलती हैं। रिटायर्ड असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ फॉरेस्ट डॉ. सतीश के. शर्मा के अनुसार, कॉमन ट्री फ्रॉग और पेंटेड कालौला की मौजूदगी प्रदेश के किसी अन्य क्षेत्र में सामने नहीं आई है। इन दोनों दुर्लभ प्रजातियों का सीतामाता अभयारण्य में पाया जाना इसे राजस्थान में मेंढकों की विविधता के लिहाज से खास बनाता है। जमीन में छिपता है पेंटेड कालौला पेंटेड कालौला मध्यम आकार का मेंढक है, जिसकी पीठ का रंग गहरा चॉकलेट या महोगनी भूरा होता है। इसके शरीर के दोनों किनारों पर तांबे जैसे भूरे, क्रीम या गुलाबी-नारंगी रंग की मोटी पट्टियां पाई जाती हैं। इसका शरीर गोल-मटोल, सिर छोटा और थूथन छोटा व गोल होता है। पिछले पैरों में कुदाल जैसी कठोर संरचना होती है, जिसकी मदद से यह जमीन में गड्ढा खोदकर खुद को छिपा लेता है। यह पेड़ों और दीवारों पर भी चढ़ने में सक्षम है। पेंटेड कालौला मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है, जबकि दिन के समय पत्तों के नीचे या जमीन में छिपा रहता है। पेंटेड फ्रॉग की खास पहचान 'पेंटेड फ्रॉग' को राजस्थान का सबसे खूबसूरत मेंढक बताया जाता है। इसकी पीठ, हाथों और पैरों पर काले-भूरे और चमकीले लाल रंग के निशान होते हैं। वहीं, 'ट्री फ्रॉग' का रंग फीका भूरा होता है, लेकिन इसे राज्य का आकर्षक मेंढक माना जाता है। ट्री फ्रॉग और बुश फ्रॉग 'राकोफोरिडी' परिवार से संबंधित हैं। नमी वाली जमीन, जलाशय, झाड़ियों और पेड़ों पर विभिन्न प्रजातियों के मेंढक पाए जाते हैं। पेड़ों पर रहना पसंद करता है ट्री फ्रॉग वन्यजीव विशेषज्ञ मंगल मेहता के अनुसार, कॉमन ट्री फ्रॉग सीतामाता अभयारण्य और आसपास के इलाकों में पाया जाता है। यह पानी के बजाय पेड़ों पर रहना पसंद करता है। इसकी उंगलियों के सिरों पर चिपचिपे और चौड़े डिस्क होते हैं, जिनकी मदद से यह पेड़ों के तनों और दीवारों जैसी सीधी सतहों पर चढ़ सकता है।

एक्सप्रेसवे से गांवों तक शराब की सप्लाई, चार दिन में 54 लाख की खेप पकड़ी

सवाईमाधोपुर  पंचायती राज चुनाव की सरगर्मी बढ़ने से पहले ही जिले में अवैध शराब की आवाजाही ने पुलिस व प्रशासन की नींद उड़ा दी है। महज चार दिन के भीतर पुलिस और आबकारी विभाग की दो अलग-अलग कार्रवाइयों में करीब 54 लाख रुपए की शराब पकड़ी। एक ओर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रक में भरकर पंजाब बिक्री की अवैध अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप लाई जा रही थी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाके में कार के जरिए देशी शराब की पेटियां पहुंचाई जा रही थीं। लगातार पकड़ी जा रही इन खेपों ने चुनाव से पहले शराब तस्करी के नेटवर्क और संभावित खपत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 29 सितंबर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे स्थित कुश्तला टोल प्लाजा पर आबकारी विभाग ने संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली तो उसमें पंजाब में बिक्री के लिए निर्धारित अवैध अंग्रेजी शराब की 599 पेटियां मिलीं। जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 52 लाख रुपए बताई गई। कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। इसके चार दिन बाद ही रवांजना डूंगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक कार को पकड़ा। पुलिस को देखकर चालक ने टैक्सी मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पीछा कर वाहन को रोक लिया। तलाशी में 50 पेटियों में 2400 पव्वे देशी शराब भरी मिली। पुलिस ने शराब जब्त कर दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। बरामद शराब की कीमत करीब दो लाख रुपए बताई गई। एक्सप्रेस-वे से गांवों तक शराब की सप्लाई चार दिन के अंतराल में सामने आई दोनों कार्रवाई का तरीका अलग जरूर है, लेकिन दोनों मामलों ने जिले में शराब की आवाजाही की तस्वीर सामने रख दी है। एक तरफ एक्सप्रेसवे जैसे बड़े परिवहन मार्ग का इस्तेमाल लाखों रुपए की शराब की खेप लाने के लिए किया जा रहा था, तो दूसरी तरफ ग्रामीण सड़कों से शराब की पेटियां ले जाई जा रही थीं। ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर जिले में कहां खपाने के लिए लाई जा रही थी। नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती पुलिस और आबकारी विभाग ने कार्रवाई कर शराब जब्त कर ली, लेकिन अब असली चुनौती उस नेटवर्क तक पहुंचने की है, जहां से यह शराब जिले में भेजी जा रही है और जहां इसकी सप्लाई होनी थी। खासकर 52 लाख रुपए की बड़ी खेप का जिले तक पहुंचना यह सवाल खड़ा करता है कि इसके पीछे सप्लायर से लेकर स्थानीय स्तर पर खपत कराने वाले लोग कौन हैं। चुनाव से पहले यदि ऐसे नेटवर्क की कड़ियां नहीं तोड़ी गई तो ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की आवाजाही रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहेगा। चुनावी माहौल में बढ़ी चिंता पंचायती राज चुनाव को लेकर गांवों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। संभावित प्रत्याशी और समर्थक मतदाताओं से संपर्क में जुटने लगे हैं। ऐसे समय में लगातार शराब की बड़ी खेप पकड़ा जाना सामान्य तस्करी से आगे की चिंता पैदा करता है। चुनाव के दौरान अवैध शराब की खपत रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहती है। यही वजह है कि चुनाव से पहले पकड़ी गई इन खेपों ने निगरानी और नाकाबंदी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इनका कहना है… जहां से भी शराब तस्करी के मामले सामने आए हैं, हमने कार्रवाई की है। पंचायतीराज चुनाव को लेकर डीएसटी टीम को भी निर्देश दिए है। आगे भी सूचना मिलते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। – ज्येष्ठा मैत्रेयी, पुलिस अधीक्षक, सवाईमाधोपुर  

राजस्थान में चार चरणों में होंगे पंचायती राज चुनाव, किसानों के लिए शुरू हुई विशेष पुरस्कार योजना

बीकानेर  राजस्थान में पंचायत चुनाव का एलान होने के बीच किसानों के लिए अच्छी खबर है। खेती में नए प्रयोग, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन करने वाले किसानों को अब सम्मानित किया जाएगा। कृषि विभाग ने कृषि उन्नति योजना के कृषि विस्तार उपमिशन (आत्मा) के तहत पुरस्कार योजना शुरू की है। इसके तहत प्रत्येक पंचायत समिति से अलग-अलग कृषि गतिविधियों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच किसानों का चयन किया जाएगा। पंचायत समिति स्तर पर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन-डेयरी एवं मत्स्य पालन, जैविक खेती तथा नवाचारी खेती एवं कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन इन पांच श्रेणियों में एक-एक किसान चुना जाएगा। चयनित किसानों को पंचायत समिति, जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। आधुनिक तकनीक अपनाने वाले किसानों को प्राथमिकता चयन में उन किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो कृषि विभाग के निर्धारित 21 मूल मंत्रों की पालना करते हुए प्रमाणित बीज, बीज उपचार, कृषि यंत्रीकरण, विभागीय पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज और हाईटेक कृषि तकनीकों का इस्तेमाल कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर रहे हैं। पंचायत समिति से राज्य स्तर तक होगा चयन पंचायत समिति स्तर पर चयनित किसानों में प्रत्येक गतिविधि के दो-दो सर्वश्रेष्ठ किसानों को जिला स्तर के लिए चुना जाएगा। इस तरह जिला स्तर पर कुल 10 किसानों का चयन होगा। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों से चयनित किसानों में से प्रत्येक श्रेणी में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले किसानों सहित राज्य स्तर पर कुल 10 सर्वश्रेष्ठ किसानों को सम्मानित किया जाएगा। तीन स्तर पर मिलेगी पुरस्कार राशि चयनित किसानों को पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। पंचायत समिति स्तर पर 10 हजार रुपए, जिला स्तर पर 25 हजार रुपए और राज्य स्तर पर 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। आत्मा योजना के तहत पूर्व वर्षों में पुरस्कृत किसानों का दोबारा चयन नहीं किया जाएगा। पुरस्कार के लिए योग्य किसानों के नाम स्वयं किसान, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, संस्था या कोई अन्य व्यक्ति प्रस्तावित कर सकता है। प्रस्ताव के साथ कृषि अथवा संबद्ध क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों का विवरण और पांच से सात फोटो देना जरूरी होगा। पंचायत चुनाव की घोषणा के बीच यह योजना किसानों के लिए अपने बेहतर कृषि कार्य और नवाचार को पहचान दिलाने का अवसर भी देगी। राजस्थान में चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 23 अक्टूबर से मतदान शुरू राजस्थान में शनिवार को पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर, दूसरे चरण का 29 अक्टूबर, तीसरे चरण का 4 नवंबर और चौथे चरण का मतदान 14 नवंबर को होगा। चुनाव परिणाम 20 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। 37 जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 25 और 27 नवंबर को होंगे। 25 नवंबर को जिला प्रमुख और 27 नवंबर को प्रधान का चुनाव कराया जाएगा। वहीं 26 नवंबर को उपजिला प्रमुख तथा 28 नवंबर को उपप्रधान का चुनाव होगा। कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होगा। ऐसे में इन जिलों में जिला प्रमुख और प्रधान का चुनाव बाद में कराया जाएगा। हालांकि यहां जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव अन्य जिलों के साथ ही होंगे। धनतेरस पर भी होगा मतदान सरपंचों के चुनाव भी चार चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 6 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान होगा। तीसरे चरण में 3,605 ग्राम पंचायतों में धनतेरस के दिन वोट डाले जाएंगे। सरपंच और पंच चुनाव के नतीजे मतदान वाले दिन देर रात तक घोषित कर दिए जाएंगे। पंचायतीराज चुनाव में पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी 51.82 प्रतिशत और महिला मतदाताओं की 48.18 प्रतिशत है। 41 जिलों में जयपुर में सबसे अधिक 18.99 लाख मतदाता हैं, जबकि जैसलमेर में सबसे कम 4.36 लाख मतदाता हैं। पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इस बार मतदाताओं को महज दो दिन के अंतराल में दोबारा मतदान करना होगा। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए एक साथ वोटिंग होगी, जबकि इसके दो दिन बाद पंच और सरपंच के चुनाव के लिए फिर मतदान करना होगा।

गांवों की सरकार के लिए घमासान: चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले राजस्थान में राजनीतिक दलों की घेराबंदी

जयपुर राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल ग्रामीण अंचलों से सामने आ रही है, जहां शहरी निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद अब सारा फोकस पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों पर टिक गया है। चुनाव की तारीखों के आधिकारिक ऐलान से ठीक पहले प्रदेश की दोनों प्रमुख सियासी पार्टियों- भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने गांवों की सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए अंदरखाने अपनी पूरी ताकत झोंकना शुरू कर दिया है। दोनों ही दलों की इस अचानक बढ़ी सक्रियता ने राज्य की ग्रामीण राजनीति में एक नया और दिलचस्प रोमांच पैदा कर दिया है, जिससे हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार गांवों का ऊँट किस करवट बैठेगा। जमीनी स्तर पर राजनीतिक तापमान तेजी से उबल रहा है और दोनों दल कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और मजबूत संगठन तंत्र के बल पर गांवों में सेंध लगाने की फिराक में है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी अपनी पुरानी रणनीतियों को दरकिनार कर पूरी आक्रामकता के साथ मैदान में उतर चुकी है। इस छिपी हुई रस्साकशी और गुप्त रणनीतियों के बीच आइए जानते हैं कि आखिर चुनावी घोषणा से ठीक पहले गांवों की सियासत के इन परदे के पीछे क्या कुछ पक रहा है। पंचायती राज के रण में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और पार्टी का पूरा संगठन तंत्र इस वक्त मैदान में सक्रिय हो चुका है। रणनीतिक रूप से उठाए गए एक बड़े कदम के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने महज कुछ ही दिनों के अंतराल में राज्य के 19 जिलों का ताबड़तोड़ दौरा कर डाला। इन दौरों का मकसद केवल सरकारी योजनाओं का लोकार्पण या शिलान्यास करना भर नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सियासी संदेश छिपा था—सीधे तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर जमीनी फीडबैक लेना। इन तूफानी दौरों में ब्यावर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, खैरथल-तिजारा, कोटा, झालावाड़, अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर, फलोदी, सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे संवेदनशील जिले शामिल रहे। सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के पांच दिग्गज नेताओं ने भी राज्य के 23 जिलों और विभिन्न संगठनात्मक जोन में कमान संभाल रखी है। राधा मोहन दास अग्रवाल: राष्ट्रीय महामंत्री एवं राजस्थान प्रभारी ने खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर और दौसा में गुप्त और महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकें कीं। मदन राठौड़: प्रदेश अध्यक्ष ने टोंक, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा और राजसमंद का दौरा कर जमीनी तैयारियों के पेंच कसे। अन्य वरिष्ठ नेता: प्रदेश सह प्रभारी विजया राहटकर, राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी और संगठन महामंत्री अजय कुमार ने भी मोर्चे पर डटकर अंदरूनी हालात की समीक्षा की। कांग्रेस की रणनीति: जिलों और संभागों में घेराबंदी दूसरी ओर, हालिया नगरीय निकाय चुनावों के नतीजों से सबक लेते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और चुनाव की घोषणा से पहले ही संगठन को पूरी तरह एक्टिव मोड में ला दिया है। पार्टी ने इस बार केवल कागजी बैठकों के बजाय सीधे धरातल पर उतरकर जिला और संभाग स्तर पर विशाल सभाएं करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। इन सभाओं में पार्टी के तमाम शीर्ष और कद्दावर नेता खुद शिरकत करेंगे, ताकि कार्यकर्ताओं के मुरझाए चेहरों में नया जोश भरा जा सके और उन्हें चुनावी वैतरणी पार करने के लिए तैयार किया जा सके। इस आक्रामक रणनीति की शुरुआत नागौर के डेगाना से हो चुकी है, जिसके बाद बीकानेर में भी शक्ति प्रदर्शन किया गया। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से चार अलग-अलग चरणों में ऐसे कार्यक्रमों का पूरा खाका तैयार किया है। कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सहित तमाम दिग्गज नेता अलग-अलग जिलों और संभागों में जाकर न केवल कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर रहे हैं, बल्कि टिकट वितरण और संभावित प्रत्याशियों को लेकर अभी से अंदरखाने गुणा-भाग बिठाने में जुट गए हैं। आमने-सामने के दावे और सियासी रोमांच मैदान में उतरी दोनों ही पार्टियों के बयानों से साफ जाहिर है कि इस बार का पंचायत चुनाव किसी जंग से कम नहीं होगा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का दावा है कि राज्य और केंद्र सरकार के विकास कार्यों और अनुशासित संगठन की बदौलत ग्रामीण जनता एक बार फिर भगवा पर ही भरोसा जताएगी। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का पलटवार है कि गांवों की जनता मौजूदा सरकार की कार्यशैली से त्रस्त है और जनता का यह छिपा हुआ गुस्सा इस चुनाव में बड़ा उलटफेर करेगा। बहरहाल, आचार संहिता लगने से ठीक पहले इन राजनीतिक चालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का पंचायती राज चुनाव बेहद रोमांचक और कड़े संघर्ष वाला होने वाला है।  

बनास नदी पर बना राजस्थान का सबसे लंबा पुल, ₹134.74 करोड़ की लागत से तैयार हुआ 3.34 किमी हाई-लेवल ब्रिज

जयपुर राजस्थान के बुनियादी ढांचे और सड़क विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। टोंक जिले के गहलोद गांव के पास बनास नदी पर प्रदेश के सबसे लंबे हाई-लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। लगभग 134.74 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के पूरा होने से उन हजारों ग्रामीण इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली है, जिन्हें हर साल मानसून के मौसम में जलभराव और आवागमन बाधित होने की वजह से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) के वित्तीय सहयोग से बनाए गए इस पुल ने राज्य में सिविल इंजीनियरिंग और आपदा-रोधी निर्माण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। भौगोलिक रूप से देखें तो यह पूरा इलाका हर साल बारिश के दिनों में मुख्यधारा से कट सा जाता था। बनास नदी में उफान आने पर पुराना रपटा या कॉजवे पूरी तरह पानी में डूब जाता था या क्षतिग्रस्त हो जाता था, जिससे टोंक, मालपुरा, पीपलू और अजमेर के बीच का संपर्क लंबे समय के लिए टूट जाता था। मजबूरी में स्थानीय लोगों और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 30 से 40 किलोमीटर का लंबा अतिरिक्त चक्कर काटकर सफर करना पड़ता था। लेकिन अब इस 3.34 किलोमीटर लंबे हाई-लेवल ब्रिज के शुरू हो जाने से इस पूरे क्षेत्र के लोगों को साल के 365 दिन सुरक्षित, सुगम और बारहमासी कनेक्टिविटी मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। 3.34 km लंबाई, 243 टन की भार क्षमता इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट की संरचनात्मक और तकनीकी बारीकियों पर नजर डालें तो इसे बेहद उच्च मानकों के तहत तैयार किया गया है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस हाई-लेवल ब्रिज की कुल लंबाई 3.34 किलोमीटर (3,340 मीटर) है, जिसमें लगभग 2 किलोमीटर का मुख्य पुल और 1.34 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़कें शामिल हैं। मजबूत स्पैन संरचना: इस मुख्य पुल में 40-40 मीटर की लंबाई वाले कुल 50 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट स्पैन बनाए गए हैं, जो इसे अत्यधिक मजबूत बनाते हैं। भार वहन क्षमता: इस ब्रिज की लोड-बेयरिंग कैपेसिटी करीब 243 टन आंकी गई है, जो भारी मालवाहक वाहनों और कमर्शियल ट्रैफिक के आवागमन के लिए पूरी तरह मुफीद है। सख्त लोड टेस्टिंग: पुल की मजबूती और गुणवत्ता की पुष्टि के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत 5 चरणों में इसकी कड़ी लोड टेस्टिंग पूरी की गई। टेस्टिंग के दौरान इसमें 92 प्रतिशत की संरचनात्मक रिकवरी दर्ज की गई, जबकि 85 प्रतिशत या इससे अधिक रिकवरी को ही तकनीकी रूप से संतोषजनक माना जाता है। क्षेत्रीय विकास और आम जनता को मिलने वाले लाभ इस नए हाई-लेवल ब्रिज के निर्माण से केवल टोंक जिला ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और कस्बों के बीच आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होंगी। इस पुल के शुरू होने से मुख्य रूप से पीपलू, मालपुरा, टोडारायसिंह, फागी और अजमेर क्षेत्र के निवासियों को सीधा फायदा मिलेगा। कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने, मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाने और विद्यार्थियों के दैनिक आवागमन में आने वाली बाधाएं अब पूरी तरह दूर हो जाएंगी। ग्रामीण अंचलों के लोगों का यह सफर अब न केवल समय बचाने वाला होगा, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी होगा।

पंचायत चुनाव से पहले कोटा में विकास की रफ्तार तेज, सड़क-पुलिया समेत 150 कार्यों पर खर्च होंगे ₹158.90 करोड़

कोटा पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ऐनवक्त पहले मंत्री और विधायक सक्रिय हो गए है। कोटा जिले को एक ही दिन में 214 करोड़ रुपए की सौगात मिली। जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में 236 किलोमीटर से अधिक सड़क और आधारभूत ढांचा मजबूत होगा। भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रेम गोचर ने बताया कि राज्य सरकार की वर्ष 2026-27 की बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कोटा जिले में तेजी से काम हो रहा है। कोटा जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में सड़क, मिसिंग लिंक, नॉन-पैचेबल सड़क, पुलिया एवं अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े 150 विकास कार्यों पर करीब 158.90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन कार्यों के माध्यम से करीब 236.32 किलोमीटर क्षेत्र में सड़क और कनेक्टिविटी से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इनकी स्वीकृतियां जारी कर दी गई है। जिले में 45 नॉन-पैचेबल सड़क कार्य और 10 मिसिंग लिंक सहित कुल 55 कार्यों पर 62.52 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा जिले में 49 क्षतिग्रस्त पुलियाओं के पुनर्निर्माण एवं सुधार के लिए करीब 11.59 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। जिलाध्यक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, विधायक कल्पना देवी का आभार जताया। कोटा शहर में 15 करोड से अधिक के सड़क कार्य कोटा शहर में भी सड़क और कनेक्टिविटी सुधार पर विशेष फोकस किया गया है। कोटा उत्तर में चार नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 5.02 करोड़ रुपए तथा कोटा दक्षिण में छह नॉन-पैचेबल सड़क कार्यों पर 6.82 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त कोटा दक्षिण में दो मिसिंग लिंक कार्यों के लिए 3.15 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है। कोटा उत्तर एवं दक्षिण में इन कार्यों पर कुल 14.99 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ऊर्जा मंत्री ने 56 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कोटड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति (लक्ष्मीपुरा) में आयोजित समारोह में 56 करोड़ 39 लाख रुपए से अधिक की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास किया। ऊर्जा मंत्री ने क्षेत्र में कृषि, बिजली और सड़क तंत्र को मजबूत करने वाले कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स की आधारशिला रखी। उन्होंने हरीश चन्द्र सागर परियोजना के तृतीय चरण के अंतर्गत मुख्य नहर और माइनरों में पक्की लाइनिंग के लिए 21.77 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी कर काम शुरू कराया।