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भजनलाल शर्मा का संदेश: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने फिर दिखाया राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति एवं साहित्य अद्भुत है। यहां वृक्षों, पेड़ों, पहाड़ों और नदियों को पूजा जाता है। हमें अपनी इस सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आगे बढ़ना है, ताकि आगामी पीढ़ी इससे प्रेरणा ले तथा गर्व की अनुभूति करे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के विकास के साथ-साथ अपनी संस्कृति और साहित्य के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी से साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की भी अपील की। शर्मा गुरुवार को जयपुर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती सदियों से ज्ञान, कला और संस्कृति की संवाहक रही है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल विचारों का उत्सव एवं महासागर है। यह आयोजन साहित्य के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक उजागर करने में मददगार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान साहित्य, संगीत और कला की पुण्य भूमि है। यहां आमेर के किले से लेकर हवा महल तक हर विरासत में संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। पृथ्वीराज रासो राजस्थान की वीरगाथात्मक संस्कृति का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मीरा की भक्ति, ढोला-मारू की कहानियां आज भी करोड़ों हृदयों को स्पर्श करती है। विजयदान देथा, कन्हैयालाल सेठिया, कोमल कोठारी जैसे साहित्यकार राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना की मशाल हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरा भक्ति और शक्ति की धरा है। महाराणा प्रताप, पन्नाधाय, अमृता देवी जैसे शूरवीरों ने अपने त्याग, बलिदान और समर्पण से प्रदेश की मिट्टी को गौरवान्वित किया है। पुस्तक पीढ़ियों तक फैलाती है ज्ञान का प्रकाश शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि हमें गुलदस्ते की जगह पुस्तक भेंट करनी चाहिए क्योंकि पुस्तक पीढ़ियों तक ज्ञान का प्रकाश फैलाती है। श्री शर्मा ने कहा कि किताबें जीवन को समझने का नया दृष्टिकोण देती हैं। साथ ही साहित्य मनुष्य को संवेदना और करुणा से जोड़कर चिंतनशील और विनम्र बनाता है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और जनकल्याण के ग्रंथ श्लोक में लिखे और इस ज्ञान को साहित्य के द्वारा लोगों तक पहुंचाकर लोकप्रिय बनाया। उन्होंने कहा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरों को प्रेरित करने, आजादी के आंदोलन में सेनानियों में जोश भरने, आपातकाल के दिनों में तानाशाही शासन को चुनौती देने से लेकर युद्ध में सेना का हौसला बढ़ाने तक हर समय साहित्य ने राष्ट्रनिर्माण का कार्य किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेम चंद बैरवा, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा, जेएलएफ डायरेक्टर सुश्री नमिता गोखले, श्री विलियम डेलरिंपल, टीमवर्क आटर््स के एमडी श्री संजय रॉय सहित ख्यातनाम लेखक, साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

सेना दिवस पर जयपुर में अर्जुन टैंक और धनुष तोप का शानदार प्रदर्शन

जयपुर  आज भारतीय सेना दिवस पर भव्य परेड का आयोजन किया गया, जहां भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अनुशासन की झलक जयपुरवासियों को देखने को मिली. परेड में खासतौर पर भारतीय सेना के जवानों ने मार्च-पास्ट से लेकर आसमान में हेलीकॉप्टर की फ्लाई-पास्ट का भव्य प्रदर्शन किया, जिससे महला रोड पर पूरी तरह देशभक्ति का माहौल बना रहा. परेड के दौरान भारतीय सेना के भव्य हथियारों, जिनमें अर्जुन टैंक, के-9 वज्र, धनुष तोप, बीएमपी, सिलिका जैसे अत्याधुनिक हथियारों और बख्तरबंद वाहनों का प्रदर्शन किया गया. भारतीय सेना के भव्य हथियारों में शामिल उन स्वदेशी हथियारों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें भारतीय सेना की सबसे खास ताकत माना जाता है. ऐसे खास हथियारों को लेकर सेना की भव्य प्रदर्शनी में सेना के जवानों से बातचीत की गई. जवानों ने बताया कि भारतीय सेना के हथियारों में वैसे तो सभी हथियार बेहद खास हैं, लेकिन उनमें अर्जुन मार्क-1 टैंक और धनुष तोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जो पूरी तरह भारत में बने हैं. अपनी खास खूबियों के चलते ये हथियार सेना के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियारों में से एक माने जाते हैं. अर्जुन मार्क-1 टैंक अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच (आर्मर) से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. वहीं धनुष तोप भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है, जिसमें डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों के चलते यह सेना के लिए बेहद खास मानी जाती है. जबरदस्त फायर पावर और मजबूत कवच के लिए फेमस है अर्जुन टैंक  भारतीय सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन मार्क-1 टैंक हाइड्रोलिक सिस्टम के कारण रेगिस्तान से लेकर सड़कों तक चलने में सक्षम है. अर्जुन मार्क-1 टैंक भारत का स्वदेशी मेन बैटल टैंक है, जिसे खासतौर पर भारतीय सेना के लिए तैयार किया गया है, जो युद्ध के समय सेना के लिए खासा मददगार साबित होता है. यह टैंक विशेष रूप से अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच से मिलने वाली सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. टैंक में ऐसा फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है, जिसके चलते यह 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलते हुए भी दिन, रात या किसी भी मौसम में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इसी टैंक का नया वर्जन अर्जुन मार्क-1A 72 नए फीचर्स और सुधारों के साथ सेना में शामिल किया गया है, जिससे इसकी परफॉर्मेंस और भरोसेमंद क्षमता पहले से बेहतर हुई है. जवान बताते हैं कि अगर इसकी बनावट और खासियत की बात करें तो अर्जुन टैंक को डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है. इसमें 4 सैनिक बैठकर इसे संचालित करते हैं, इसकी लंबाई 10,640 मिमी और चौड़ाई 3,866 मिमी है, जबकि इसकी ऊंचाई 3,030 मिमी है. इसका वजन 62.5 टन है, जिसके चलते यह भारतीय सेना के सबसे भारी टैंकों के बेड़े में शामिल है. इसकी मुख्य तोप 120 मिमी की है, जो जबरदस्त फायर पावर प्रदान करती है. टैंक में खासतौर पर विमान-रोधी मशीन गन भी लगी है, जिसके चलते हवाई हमलों के समय भी टैंक से फायर किया जा सकता है, इस टैंक की मारक क्षमता 5 किलोमीटर तक है. भारतीय सेना की स्वदेशी आर्टिलरी ताकत है धनुष  सेना के जवान बताते हैं कि अर्जुन टैंक के अलावा भारतीय सेना के पास स्वदेशी आर्टिलरी ताकत के रूप में धनुष तोप भी है, जो डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमैटिक गन लेइंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है. जवान बताते हैं कि धनुष तोप मध्यम गन श्रेणी का हथियार है, जो कई किलोमीटर तक चलने में सक्षम है। इसका वजन 12.7 टन है. धनुष तोप खासतौर पर 30 डिग्री दाएं-बाएं और -3 डिग्री से 70 डिग्री तक ऊंचाई में फायर करने में सक्षम है. इसके अलावा धनुष तोप की मैन फायरिंग दर की बात करें तो यह 15 सेकंड में 3 राउंड और 60 मिनट में 60 राउंड की तीव्र गति से फायर करने में सक्षम है. धनुष में लगी तोप 155 मिमी/45 कैलिबर की है, जो 38 से 40 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम है.

दीया कुमारी ने कहा- ‘हमारी संस्कृति को प्रमोट करना है, यह हमारी पहचान है’

जयपुर  राजस्थान के जयपुर में मकर संक्रांति के मौके पर टूरिज्म डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित पतंग महोत्सव में राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह सच में एक खूबसूरत इवेंट था। पूरे जयपुर में आतिशबाजी हो रही थी। यहां आए पर्यटकों को भी काफी आनंद मिला है। लोग अपने घरों से पटाखे चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बहुत अच्छा दिन है, मकर संक्रांति के दिन लोगों ने सुबह पतंगें उड़ाईं, लोग अब आतिशबाजी देख रहे हैं, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।  यह हमारी संस्कृति है, हमारा त्योहार है और इसे बढ़ावा देना चाहिए, नई पीढ़ी को समझना चाहिए और इसे आगे बढ़ाना चाहिए। डिप्टी सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ऐसे इवेंट्स को बढ़ावा देने की कोशिश करती है, हमने घूमर फेस्टिवल किया, हम इसे हर जिले तक ले जाने की कोशिश करेंगे, यह बहुत जरूरी है। हम यहां टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन टूरिस्ट्स को अच्छा अनुभव देना जरूरी है, जो हमारे पास पहले से है, अगर हम उन्हें बचाकर रखें, उन्हें बेहतर बनाएं, कनेक्टिविटी दें, तो यह भी एक उपलब्धि होगी। एक्स पोस्ट में डिप्टी सीएम ने लिखा कि मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जयपुर के विश्व-प्रसिद्ध हवामहल पर राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित भव्य लालटेन प्रज्ज्वलन एवं आतिशबाजी कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रंग-बिरंगी लालटेनें और आतिशबाजी ने हवामहल की ऐतिहासिक भव्यता को और भी आकर्षक बना दिया। यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने का एक सुंदर प्रयास है। राजस्थान की लोकसंस्कृति, पर्व-परंपराओं और पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से भविष्य में प्रदेश के सभी जिलों में इस प्रकार के विशिष्ट और आकर्षक आयोजनों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि हर अंचल की पहचान विश्वभर में स्थापित हो सके। उन्होंने आगे लिखा कि भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्यों एवं समर्पित कार्यकर्ता बंधुओं के साथ हर्षोल्लास एवं पारस्परिक सौहार्द के साथ मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। वरिष्ठजनों का सान्निध्य और कार्यकर्ताओं का उत्साह संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक है।

सास और पांच बहुएं समेत परिवार के छह सदस्य हुए एक साथ निधन, अंतिम संस्कार से लौटते समय हुआ हादसा

 फतेहपुर शेखावाटी,      राजस्थान में एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया. फतेहपुर शेखावाटी में एक ही परिवार की सात महिलाओं की एक साथ मौत हो गई. यह हादसा इतना भयावह था कि जिसने भी दृश्य देखा, उसकी आंखें नम हो गईं. एनएच-52 पर हरसावा गांव के पास तेज रफ्तार कार पहले एक पिकअप से टकराई और फिर सामने से आ रहे ट्रक में जा घुसी. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह पिचक गई. हादसे में सास, उनकी पांच बहुएं और बेटी ने मौके पर या इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि चालक और एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गए. फतेहपुर सदर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुरा गांव निवासी परिवार हाल ही में लक्ष्मणगढ़ गया था. परिवार की बुजुर्ग महिला मोहिनी देवी की ननद, लक्ष्मणगढ़ निवासी कैलाश देवी का निधन हुआ था. पूरा परिवार उनके अंतिम संस्कार में शामिल होकर शाम करीब चार बजे वापस गांव लौट रहा था. परिवार चार गाड़ियों में सवार था. तीन गाड़ियों में पुरुष बैठे थे, जबकि एक कार में महिलाएं और चालक मौजूद थे. किसी को अंदेशा नहीं था कि यह यात्रा उनके जीवन की सबसे आखिरी और सबसे दर्दनाक यात्रा बन जाएगी. तेज रफ्तार, ओवरटेक और पल भर में तबाही प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हरसावा गांव के पास पहुंचते ही कार चालक ने ओवरटेक करने की कोशिश की. इसी दौरान तेज रफ्तार के कारण कार का संतुलन बिगड़ गया. पहले कार पास से गुजर रही पिकअप से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे ट्रक में जा घुसी. हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के लोग और हाइवे से गुजर रहे वाहन चालक मौके पर पहुंच गए. कार के अंदर महिलाएं बुरी तरह फंसी हुई थीं. काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इन सात महिलाओं की गई जान इस भीषण सड़क हादसे में सास मोहिनी देवी (80) और बहू चंदा देवी (55), तुलसी देवी (45), बरखा देवी (35), आशा देवी (60), संतोष देवी (45) और बेटी इंदिरा (60) की मौत हुई. सभी एक ही परिवार से थीं. बरखा देवी ने जयपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ा. हादसे में सोनू (35) और कार चालक वसीम (25) गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज जारी है. परिवार के सदस्यों ने बताया कि लक्ष्मणगढ़ से रवाना होने से पहले ही ड्राइवर वसीम को कार धीमी गति से चलाने की हिदायत दी गई थी. अंतिम संस्कार के बाद माहौल पहले से ही गमगीन था. बावजूद इसके, रास्ते में चालक ने ओवरटेक करने के चक्कर में रफ्तार बढ़ा दी और यही लापरवाही सात जिंदगियों पर भारी पड़ गई. गांव में पसरा मातम, चूल्हे तक नहीं जले एक ही परिवार की सात महिलाओं की मौत की खबर जैसे ही रघुनाथपुरा गांव पहुंची, पूरा गांव शोक में डूब गया. घर-घर सन्नाटा पसर गया. मोहल्ले में रात को किसी के घर चूल्हा नहीं जला. मोहिनी देवी के पति का पहले ही निधन हो चुका था. अब परिवार की महिलाएं ही घर की धुरी थीं. संतोष देवी के पति सब्जी की दुकान चलाते हैं और उनके दो बेटे व एक बेटी हैं. तुलसी देवी के पति विदेश में मजदूरी करते हैं और छुट्टी पर गांव आए हुए थे. आशा देवी के पति गैस एजेंसी में कार्यरत हैं. हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमा सक्रिय हो गया. फतेहपुर सदर थाना के सीआई सुरेंद्र तम देगड़ा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. शवों को धानुका अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया. घायलों की स्थिति जानने के लिए कलेक्टर मुकुल शर्मा एसके अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को त्वरित और बेहतर इलाज के निर्देश दिए. विधायक हाकम अली, भाजपा नेता श्रवण चौधरी, एडीएम रतनलाल स्वामी, एएसपी डॉ. तेजपाल सिंह, पालिका अध्यक्ष मुश्ताक नजमी समेत कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे. सीएम और राज्यपाल ने जताया शोक इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने गहरा शोक व्यक्त किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि फतेहपुर शेखावाटी में हुए सड़क हादसे की खबर अत्यंत दुःखद है. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति और शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करें. गौरतलब है कि एनएच-52 पर इससे पहले भी ऐसे दर्दनाक हादसे हो चुके हैं. दो साल पहले भी संक्रांति के दिन ही नरोदड़ा बस स्टैंड के पास हुए सड़क हादसे में भी सात लोगों की जान गई थी. उस समय एक अनियंत्रित कार डिवाइडर से टकराकर दूसरी ओर से आ रही बोलेरो से भिड़ गई थी. लगातार हो रहे हादसे एनएच-52 की सुरक्षा व्यवस्था और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

जैसलमेर में हेलीबोर्न सर्वे से सामने आई खुशखबरी, 64 स्थानों पर मिलेंगे भूजल के भंडार

जैसलमेर  भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से 2021-22 में राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में किए गए हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे (Heliborne Geophysical Survey) के नतीजे अब सामने आ रहे हैं. इस सर्वे से जैसलमेर जिले में 64 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां भूजल उपलब्ध हो सकता है. इनमें से कई जगहें ऐसी हैं जहां पहले के पारंपरिक तरीकों से पानी नहीं मिल पाया था. यह खोज पश्चिमी राजस्थान के सूखे इलाकों में पानी की समस्या का स्थाई समाधान दे सकती है. सर्वे का विवरण हेलीबोर्न सर्वे हेलिकॉप्टर से किया जाता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल तकनीकों का इस्तेमाल कर जमीन के नीचे 500 मीटर तक की जानकारी ली जाती है. यह तरीका तेज, सटीक और बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है. सर्वे से भूजल के स्रोत, उनकी गहराई, मीठे और खारे पानी के क्षेत्र, प्राचीन नदी मार्ग (पेलियोचैनल) और कृत्रिम रिचार्ज के लिए उपयुक्त जगहों की जानकारी मिलती है. यह सर्वे केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), जल शक्ति मंत्रालय और CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI), हैदराबाद ने किया. राजस्थान में कुल 66,810 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया, जिसमें जैसलमेर, जोधपुर और सीकर जैसे प्राथमिकता वाले जिले शामिल हैं. जैसलमेर जिले में करीब 15,000 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया गया. पोकरण क्षेत्र में बड़ी सफलता वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोखरण तहसील का ज्यादातर हिस्सा भूजल की दृष्टि से कमजोर माना जाता है. लेकिन हेलीबोर्न सर्वे से फलसूंड से छायन, धुडसर से राजगढ़ तक के इलाकों में भूजल भंडार मिलने की संभावना जगी है. कुल 64 स्थानों पर भूजल की उपलब्धता बताई गई है. इनमें से अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां पेयजल की किल्लत आम है. पहले जांच में पानी नहीं मिला था. फलसूंड इलाका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भूजल मिलना एक बड़ी उपलब्धि होगी. हालांकि पोकरण और भनियाणा में नहर का पानी उपलब्ध है, लेकिन इन स्थानों पर नलकूप बनाकर आपात स्थिति में लोगों को पानी मिल सकेगा. सर्वे के फायदे     भूजल के नए स्रोत ढूंढने में मदद.     कृत्रिम रिचार्ज (जमीन में पानी भरने) के लिए सही जगहों की पहचान.     जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान.     सांकड़ा ब्लॉक जैसे शुष्क इलाकों में उच्च-रिजॉल्यूशन एक्विफर मैपिंग से जल संकट से राहत मिलेगी. यह सर्वे राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग प्रोग्राम (NAQUIM) का हिस्सा है, जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3.88 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करेगा. इससे जल संरक्षण और सतत विकास में बड़ी मदद मिलेगी.  डॉ. इणखिया ने कहा कि यह रिपोर्ट जैसलमेर जिला कलेक्टर और राज्य भूजल बोर्ड को भेजी गई है. अब इन स्थानों पर आगे जांच और नलकूप निर्माण से लाखों लोगों को फायदा होगा.

राजस्थान में 12 लाख लखपति दीदी के बाद अब युवाओं को बनाएगी आर्थिक संपन्न

जयपुर. राजस्थान की सियासत और अर्थव्यवस्था के बीच मंगलवार को एक ऐसी तस्वीर उभरी, जिसने आने वाले वर्षों की दिशा का संकेत दे दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बोलना शुरू किया, तो यह सिर्फ आंकड़ों की प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव की झलक थी। मुख्यमंत्री ने कहा- प्रदेश में 19 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर 12 लाख से ज्यादा महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। अब ये लखपति दीदी मिलेनियर दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। यह सुनते ही साफ हो गया कि सरकार की नजर अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को अगले स्तर तक ले जाने की है। अपराध में कमी, भरोसे में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान एक और अहम संकेत दिया। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के अंतिम दो वर्षों (फरवरी 2022 से दिसंबर 2023) की तुलना में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में अपराधों में करीब 12 प्रतिशत तक की कमी आई है। राजस्थान जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था में जनता के बढ़ते भरोसे का भी संकेत माना जा रहा है। बजट 2026-27 पर टिकी निगाहें इस पूरे कार्यक्रम का असली मकसद था— बजट पूर्व चर्चा। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, युवाओं, उद्योग जगत, व्यापारियों, सेवा क्षेत्र, कर सलाहकारों और युवा प्रोफेशनल्स से सीधे संवाद किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि महिला प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों को बजट 2026-27 में यथासंभव शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि आने वाला बजट केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ का प्रतिबिंब बनने की कोशिश करेगा। उद्योग और निवेश: राजस्थान की नई पहचान उद्योग, सेवा क्षेत्र और युवा प्रोफेशनल्स के साथ हुई चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की समृद्धि से ही विकास को नई गति मिलती है। उन्होंने एमएसएमई, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और तकनीकी सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में उद्यमशीलता ने राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को तेजी से बदला है। मुख्यमंत्री के शब्दों में— “आज राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।” यह बयान उस समय आया जब राज्य सरकार लगातार निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक विस्तार को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है। वागड़ क्षेत्र पर विशेष फोकस कार्यक्रम का एक अहम पड़ाव तब आया जब मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर जिले से आए युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और राजस्थान का गौरव भी। वागड़ क्षेत्र, जो आदिवासी बहुल माना जाता है, वहां सरकार लगातार सशक्तिकरण के फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वागड़ क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, जो आने वाले समय में पूरे दक्षिण राजस्थान की तस्वीर बदल सकते हैं। बेणेश्वर धाम का सौंदर्यीकरण कार्यक्रम के दौरान बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण को लेकर एक प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। इसे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मौके पर सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा भी मौजूद रहे। सत्ता, समाज और संकेत इस बैठक में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास भवानी सिंह देथा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस चर्चा को और खास बना दिया। राजस्थान में लखपति दीदी से मिलेनियर दीदी तक का सफर, अपराध में कमी, निवेशकों का भरोसा और आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस— ये सभी संकेत एक ही ओर इशारा करते हैं। प्रदेश अब सिर्फ योजनाओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की तस्वीर गढ़ने की कोशिश में जुटा है।

भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, 3 बच्चों के माता-पिता को निकाय-पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने का मिलेगा मौका

जयपुर राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. भजनलाल सरकार दो संतान बाध्यता वाले पुराने कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रही है. सूत्रों के मुताबिक करीब 30 साल पुराने इस प्रावधान में बदलाव के लिए आगामी विधानसभा बजट सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है. संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता मिल सकती है. जानकारी के अनुसार पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की योजना थी, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. अब सरकार सीधे विधानसभा में विधेयक लाकर बदलाव करने की तैयारी में है. पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभाग अपने-अपने स्तर पर ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज चुके हैं, जिन्हें जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. क्या है वर्तमान प्रावधान राज्य में 27 नवंबर 1995 से लागू कानून के तहत तीन या उससे अधिक संतान वाले माता-पिता पंचायत और निकाय चुनावों में प्रत्याशी नहीं बन सकते. इस नियम के दायरे में पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, सभापति और महापौर जैसे पद शामिल हैं. नियम का उल्लंघन कर गलत जानकारी देकर चुनाव जीतने पर प्रत्याशी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जेल तक का प्रावधान भी है. यह शर्त राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 और पंचायती राज अधिनियम में दर्ज है. पहले देश के कई राज्यों में इस तरह की दो संतान नीति लागू थी, लेकिन समय के साथ अधिकतर राज्यों ने इसे खत्म कर दिया है. राजस्थान में हालांकि यह नियम अब तक पंचायत और निकाय चुनावों के लिए जारी है. सरकारी कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार पहले ही दो संतान के नियमों में शिथिलता दे चुकी है. पहले जहां दो से अधिक संतान होने पर वेतनवृद्धि और पदोन्नति पर रोक लगती थी, वहां अब कुछ राहत दी जा चुकी है. लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए पंचायत-निकाय चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी अभी भी लागू है, जिसे हटाने के लिए अब सरकार कानूनी बदलाव की तैयारी कर रही है.

RPSC में डिप्टी कमांडेंट भर्ती में बिना वैकेंसी के करवाया एग्जाम

जयपुर. RPSC की ओर से 11 जनवरी 206 को डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें 17 सेंटर बनाए गए थे। जहां 255 कैंडिडेट्स ही शामिल हुए थे। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आयोग ने 4 पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें ओबीसी और एसटी के 1-1 और एससी के दो पद थे। इस भर्ती के लिए आर्मी का एक्स कैप्टन होना जरूरी है। एक्स सर्विस मैन वर्ग के जिन 34 लोगों ने आवेदन किए, वे भी एक्स आर्मी कैप्टन हैं या नहीं, एग्जाम भी देने आए या नहीं, इस पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। वहीं, करीब 4 हजार से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थी थे, जिन्होंने न तो फॉर्म विड्रॉ किया और न ही एग्जाम देने गए। इस कारण सिर्फ 255 लोगों ने एग्जाम दिया। जबकि आवेदन करने वालों में एक्स आर्मी मैन 34 ही हैं। अब यदि इन 34 लोगों ने आरपीएससी की क्वालिफिकेशन पूरी नहीं की तो भर्ती के सभी पद खाली रह जाएंगे। खास बात यह भी रही कि जिस वर्ग के लिए भर्ती में पद ही नहीं थे, उनमें भी सैकड़ों लोगों ने इस भर्ती के लिए फॉर्म भर दिए और कई लोगों ने एग्जाम भी दिए। बता दें, आयोग की चेतावनी के बाद 6 हजार लोगों ने आवेदन विड्रॉ कर लिए, उसके बाद भी ये स्थिति है। भर्ती और एग्जाम के यह रोचक तथ्य EWS, जनरल और MBC में कोई वैकेंसी ही नहीं थी। इसके बावजूद कैंडिडेट्स ने आवेदन किए। ST का एक पद है और 791 ने आवेदन किए, जबकि एक्स सर्विस मेन केवल एक ही है। SC के दो पद है, लेकिन आवेदन एक हजार लोगों ने किए, जबकि एक्स सर्विस मेन 3 ही है। भर्ती निकालने पर 10 हजार से ज्यादा आवेदन हुए, चेतावनी के बाद 6 हजार विड्रॉ कर लिए। RPSC ने 4 हजार 221 कैंडिडेट्स के एग्जाम की व्यवस्था की, लेकिन एग्जाम में 255 ही आए। एग्जाम एक सेंटर पर ही हो सकता था, लेकिन फॉर्म ज्यादा भरने के कारण 17 सेंटर बनाए गए। एग्जाम एक लाख के खर्चे में हो सकता था, उसके लिए आयोग को 20 लाख खर्चा करना पड़ा। मार्च 2025 में निकाली वैकेंसी – RPSC ने 18 मार्च 2025 को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमाडेंट के 4 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए 24 मार्च से 22 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। वैकेंसी में आवेदन करने के लिए केवल सेना के कैप्टन स्तर के सेवानिवृत्त/त्यागपत्र देने वाले भूतपूर्व अधिकारी अथवा इमरजेंसी और शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त/विमुक्त कैंडिडेट्स ही योग्य थे। बिना योग्यता वालों ने बड़ी संख्या में भरे फॉर्म इस भर्ती में बिना योग्यता वाले कई लोगों ने भी आवेदन कर दिए। ऐसे में 10 हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन आए, जिनकी जांच में कई अयोग्य पाए गए। इन्हें फॉर्म वापस लेने का मौका दिया गया। आयोग ने फॉर्म विड्रॉ नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 217 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी। विज्ञापन के मुताबिक, योग्यताधारी अभ्यर्थियों को भी अपना सेवानिवृत्ति प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन पत्र के साथ अपलोड करने के निर्देश दिए। इसके बाद करीब 6 हजार कैंडिडेट्स ने आवेदन फॉर्म विड्रो कर लिए।

प्रभारी मंत्री बिश्नोई ने जनसंवाद में सुनी ग्रामीणों की परिवेदनाएं

जयपुर. प्रभारी मंत्री के.के. विश्नोई की अध्यक्षता में सिरोही जिले के पालडी एम. में रात्रि चौपाल एवं जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। उन्होंने रात्रि चौपाल में आमजन की परिवेदनाओं को सुना और संबंधित को निस्तारण के लिए निर्देशित किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि आमजन के समस्याओं का समयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वीबीजीरामजी गांवों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक सशक्त माध्यम है इससे गांवों में प्रगति का पथ अग्रसर होगा। वीबीजीरामजी से भारत के विकसित भारत में बदलने की संकल्पना सत्य सिद्ध होगी। गांव मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा। किसान एवं श्रमिकों के समृद्ध होने से भारत विकसित होगा। यह योजना सिर्फ रोजगार की योजना न हो के गांवों को सशक्त करने का माध्यम है। प्रभारी मंत्री ने इस दौरान ग्रामीणों की परिवेदनाओं को सुनते हुए उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करने के लिए अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन दोनो ही सामुहिक रूप से क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए सतत प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा नियमित रूप से क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की बात कही एवं बताया कि भारत अब विश्व में अपनी विशेष पहचान कायम करते हुए निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। रात्रि चौपाल में विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को संबंधित दस्तावेज एवं लाभ प्रदान किया गया। रात्रि चौपाल में राजस्व विभाग द्वारा 3 सम्मानजनक नाम दर्ज किए गए। जिसमें बजट घोषणा क्रियान्विति के तहत राजकीय कृषि महाविद्यालय सिरोही उच्च शिक्षा विभाग राजस्थान को 30 हेक्टेयर भूमि यानि 185 बीघा भूमि आवंटन के भू अभिलेख उपलब्ध कराए व भूमि का कब्जा सुपुर्द दस्तावेज राजकीय महाविद्यालय के सहायक आचार्य को सौपा गया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा 4 स्वामित्व कार्ड, 2 जन्म प्रमाण पत्र व 1 विवाह प्रमाण पत्र संबंधित को सौपा गया। महिला अधिकारिता विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाडो योजना के लाभार्थियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। वही आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लाभार्थियों की गोद भराई की गई। पशुपालन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की पॉलिसी का वितरण किया गया। उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में अनुदान की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के दस्तावेज प्रदान किए गए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 31 हजार का चैक पंकुदेवी भगाराम मेघवाल को व मुद्रा ऋण योजना के तहत अनाराम हिरागर को 50 हजार रूपये अनुदान का चैक प्रदान किया गया। सांसद लुंबाराम चौधरी ने रात्रि चौपाल में विभिन्न विभागों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने इस दौरान पशुपालकों, किसानों सहित विभिन्न वर्ग की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रत्येक पात्र को लाभान्वित होने की बात कही। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने रात्रि चौपाल में प्रभारी मंत्री बिश्नोई का स्वागत करते हुए कहा कि रात्रि चौपालों के माध्यम से जनता की समस्याओं का निस्तारण करना एक अनुपम पहल है उन्होंने इस दौरान उपस्थित सभी पात्र को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया।

राजस्थान के राज्यपाल बागडे से मिले मिजोरम के गवर्नर

जयपुर. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से बुधवार को मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने लोकभवन पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। राज्यपाल से उनकी यह शिष्टाचार भेंट थी। भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया श्रीगंगानगर. भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक (वेटरन्स डे) दिवस 14 जनवरी 2026 को सैनिक विश्राम गृह श्रीगंगानगर में मनाया गया। इसमें मुख्य अतिथि वेटरन कर्नल श्री संदीप शर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी श्री आत्मेश बेनीवाल की अध्यक्षता में दो मिनट का मौन व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेना मेडल आॅ केप्टेन रामकिशन यादव, श्रीमती रतना कंवर वीरांगना शहीद सुगन सिंह, श्रीमती सरस्वती देवी माता शहीद काॅन्सटेबल सुभाष, वरिष्ठ पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर किशनलाल लिम्बा को शाॅल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिले के पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं एवं उनके आश्रित भूतपूर्व सैनिक सहित अन्य मौजूद रहे।