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भजनलाल शर्मा सरकार की युवा कल्याण नीति से राजस्थान बनेगा सशक्त और स्वावलंबी

श्रीगंगा नगर. राजस्थान की प्रगति का मार्ग युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और आत्मविश्वास से होकर गुजरता है। इसी मूल भावना को केंद्र में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में युवा कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। उनकी स्पष्ट सोच है कि जब तक युवा सशक्त, शिक्षित, प्रशिक्षित और रोजगारयुक्त नहीं होंगे, तब तक समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियां और योजनाएं इसी दूरदृष्टि का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की युवा कल्याण नीति का मूल उद्देश्य केवल सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को बहुआयामी अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसी क्रम में वर्ष 2026 के लिए एक लाख पदों पर भर्तियों का कैलेंडर जारी किया जाना ऐतिहासिक कदम है। यह कैलेंडर युवाओं के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी तैयारी को समयबद्ध और योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता ने युवाओं में विश्वास को और मजबूत किया है। पिछले दो वर्षों में बिना किसी गड़बड़ी के 351 प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सरकार पेपर लीक जैसी समस्याओं पर सख्त नियंत्रण रखने में सफल रही है। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री की पहल पर अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं, जबकि करीब एक लाख से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। यह आंकड़े युवाओं के प्रति सरकार की गंभीरता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। मुख्यमंत्री की युवा कल्याण नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रोजगार के विविध अवसरों का सृजन है। सरकार द्वारा दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए तीन लाख से अधिक युवाओं को आर्थिक क्षेत्रों से जुड़े कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए गए हैं। यह प्रशिक्षण युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इंटर्नशिप कार्यक्रम के माध्यम से करीब दो लाख युवाओं को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया है, जिससे वे कार्यस्थल की वास्तविक चुनौतियों से परिचित हो सकें। यह पहल युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने में सहायक सिद्ध हो रही है। साथ ही आई-स्टार्ट राजस्थान के अंतर्गत 65 आई-स्टार्टअप लॉन्चपैड नेस्ट की स्थापना और 658 स्टार्टअप्स को लगभग साढ़े 22 करोड़ रुपये की सहायता देकर नवाचार और उद्यमिता को नई गति दी गई है। मुख्यमंत्री युवा संबल योजना भी युवा कल्याण नीति का एक प्रभावशाली उदाहरण है। इस योजना के अंतर्गत अब तक चार लाख से अधिक युवाओं को साढ़े ग्यारह सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि भत्ते के रूप में प्रदान की गई है। यह सहायता न केवल आर्थिक संबल देती है, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करती है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रह सकें। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का शुभारंभ युवाओं के लिए एक नई दिशा लेकर आया है। इस योजना के तहत एक लाख युवाओं को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें सूक्ष्म उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा। यह पहल युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। इसके अतिरिक्त राजस्थान युवा नीति-2026 और राजस्थान रोजगार नीति-2026 का विमोचन मुख्यमंत्री की दीर्घकालिक सोच का परिचायक है। ये नीतियां आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सुरक्षा के नए अवसर सृजित करेंगी। इन नीतियों के माध्यम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि युवा केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के सहभागी हैं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की युवा कल्याण नीति सशक्तिकरण, पारदर्शिता और अवसरों की समानता पर आधारित है। यह नीति युवाओं को न केवल आज की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाती है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भी तैयार करती है।

पाली में प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राज्य बजट में अपेक्षाओं पर किया जनसंवाद

जयपुर. नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन व पाली जिला प्रभारी श्री झाबरसिंह खर्रा ने सोमवार को आगामी बजट 2026-27 में जिले की अपेक्षाओं को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, महिला प्रतिनिधियों एवं युवाओं के साथ जनसंवाद किया। इस अवसर पर पाली जिले के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। जनसंवाद के दौरान हेमावास बांध एवं बांडी नदी से प्राप्त जल का अधिक से अधिक उपयोग किसानों तक पहुंचाने, जल प्रदूषण से निजात के लिए पाली-जालौर-बालोतरा होते हुए पाइपलाइन व्यवस्था विकसित करने तथा प्रदूषित जल को शहर से बाहर ले जाने के सुझाव दिए गए। सीईटीपी के कार्य को सरकार द्वारा सीधे अपने नियंत्रण में लेकर शीघ्र एवं प्रभावी समाधान के लिए आग्रह किया। इस अवसर पर शहर के प्रवेश द्वार रजत विहार के पास नाली निर्माण, बांडी नदी पर स्थित पुल के नवनिर्माण, अतिवृष्टि के समय मुख्य मार्ग बाधित होने की समस्या के समाधान के लिए नए पुल के शीघ्र निर्माण, नगर निगम क्षेत्र में रंगमंच के पुनर्निर्माण तथा सोनाई मांझी बायपास निर्माण को लेकर सुझाव दिए गए। चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए शहर के सरकारी चिकित्सालय में न्यूरोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट एवं नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति, शहर के मध्य स्थित डिस्पेंसरी में हृदय रोग संबंधी प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध  पाली में निर्मित मेडिकल कॉलेज का नाम महाराणा प्रताप की माता जयवंती बाई के नाम पर किए जाने का सुझाव भी दिया गया। इसके अतिरिक्त रोहट एवं मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में खारे पानी की समस्या, पार्षदों को समय पर फंड उपलब्ध कराने, ताकि वार्डों में सफाई एवं निर्माण कार्य सुचारू रूप से हो सकें, स्टार्टअप फाउंडेशन गठन जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रभारी मंत्री खर्रा ने उपस्थित जनसमूह को आश्वस्त किया कि जनसंवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों को गंभीरता से संकलित कर आगामी बजट में यथासंभव शामिल किया जाएगा ताकि पाली जिले के विकास को नई दिशा मिल सके। इस अवसर पर पूर्व उपसभापति महेंद्र बोहरा, सुनील भण्डारी, अतिरिक्त जिला कलक्टर बजरंग सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर, सीलिंग ओम प्रभा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश चौधरी भी मौजूद रहे। इसके साथ ही खर्रा ने कलक्ट्रेट में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर विभागवार प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक दिशा— निर्देश दिए। खर्रा ने बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड, काश्तकारों को ऋण वितरण एवं फसल बीमा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने पंच गौरव योजना के कार्यों, व्यय स्थिति तथा नवीन बास्केटबाल ग्राउंड निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया की जानकारी लेकर शीघ्र कार्य प्रारंभ करने को कहा। संपर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण एवं अस्वीकृत प्रकरणों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने के निर्देश भी दिए गए। जल मिशन की समीक्षा करते हुए लंबित नल व विद्युत कनेक्शनों को शीघ्र पूर्ण करने के फॉलो-अप शिविरों में लंबित प्रकरणों का तीन दिवस में निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया। जिला कलक्टर एल. एन. मंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से सड़कों, अटल प्रगति पथ एवं अन्य विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। 

किसी की पेंशन बंद नहीं, सत्यापन के बाद पुनः प्रारंभ हो जाएगी: अविनाश गहलोत

जयपुर. सामाजिक न्याय एवं अधिकरिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले सभी लाभार्थियों से वार्षिक सत्यापन शीघ्र करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लाभार्थी की पेंशन बंद नहीं की गई है। सत्यापन के अभाव में रोकी भी गई है तो वार्षिक सत्यापन के बाद पुनः आरंभ हो जाएगी। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुशासन में विभाग की मंशा ज्यादा से ज्यादा पात्र पेंशनर्स को नियमित सामजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराने की है। विभाग हर वो प्रक्रिया अपनाता है जिससे पेशनर्स को बिना किसी परेशानी के सुगमता से पेंशन मिलती रहे। सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों  को प्रति वर्ष स्वयं का भौतिक सत्यापन करवाना आवश्यक होता है। भौतिक सत्यापन का कार्य 1 नवम्बर से 31 दिसम्बर की अवधि में संचालित किया जाता है। इस अवधि में वार्षिक सत्यापन नहीं करवाने वाले पेंशनर्स की पेंशन का भुगतान रोका जा सकता है। लेकिन सत्यापन के बाद रुकी हुई पेंशन फिर से चालू हो जाती है। गहलोत ने कहा कि लाभार्थी घर से भी एन्ड्राइड मोबाइल पर Rajasthan social pension and Aadhar face RD एप के जरिए लाभार्थी के फेस रिकाग्निशन के आधार पर भौतिक सत्यापन कर सकते हैं। इसके अलावा लाभार्थी वार्षिक भौतिक सत्यापन के लिए ई-मित्र कियोस्क/ई-मित्र प्लस आदि केन्द्रों पर अंगुली की छाप (Finger Print Impression – Biometrics) से करवा सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी को ई-मित्र कियोस्क पर निर्धारित शुल्क 50 रुपए एवं ई-मित्र प्लस पर 10 रुपए का भुगतान करना होता है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क है।

टोंक में कल 70 KG का दड़ा करेगा झमाझम बारिश की भविष्यवाणी

टोंक/जयपुर.  टोंक जिले के आवां कस्बे में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले दड़ा महोत्सव की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं। राजपरिवार की ओर से आयोजित इस महोत्सव के लिए गढ़ पैलेस में दक्ष कारीगर पिछले 15 दिनों से दड़ा बनाने का कार्य कर रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध इस महोत्सव के आयोजनकर्ता राजपरिवार की महारानी विजया देवी और कुंवर कार्तिकेय सिंह ने बताया कि इस वर्ष भी दड़ा महोत्सव का आयोजन परंपरागत धूमधाम से किया जाएगा। ऐसे होता है तैयार लकड़ी के बुरादे, बजरी और टाट से बना यह फुटबॉलनुमा दड़ा तकरीबन 70 किलो वजन का होता है। इसे बनाने में 15 दिन की कड़ी मेहनत लगती है। तैयार होने के बाद इसे पानी में भिगोकर और अधिक मजबूत और सख्त बनाया जाता है। वर्तमान में आवां के विशेषज्ञ ग्रामीण इसकी तैयारी में जुटे हैं। युवा और बुजुर्गों में इसे लेकर खासा उत्साह है। रियासत काल से आवां कस्बे में दड़ा महोत्सव का आयोजन राजपरिवार की ओर से होता आ रहा है। परंपरागत रूप से खेले जाने वाला यह खेल मौजूदा फुटबॉल से मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें खिलाड़ियों की संख्या हजारों में होती है। गांव के बीच स्थित गोपाल चौक में खेले जाने वाले इस खेल में दो गोल पोस्ट अखनियां दरवाजा और दूनी दरवाजा होते हैं, जिनकी दूरी लगभग एक किलोमीटर होती है। दड़ा करता है भविष्यवाणी करीब 20 गांवों के तीन हजार लोग इस खेल में भाग लेते हैं, जबकि दस हजार दर्शक मकानों की छतों और चौक में जमा होकर खेल का आनंद लेते हैं। मान्यता है कि यदि दड़ा दूनी दरवाजे की ओर जाता है तो वर्षा अच्छी होती है और साल सुकाल का माना जाता है, जबकि अखनियां दरवाजे की ओर जाने पर अकाल का संकेत माना जाता है। सैनिकों की भर्ती से हुई थी शुरुआत आवां के युवा सरपंच दिव्यांश महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि राजस्थानी संस्कृति के प्रतीक इस अद्भुत खेल की शुरुआत एक शताब्दी पहले राव राजा सरदार सिंह ने सेना में वीर योद्धाओं की भर्ती के उद्देश्य से की थी। समय के साथ यह परंपरा महोत्सव के रूप में विकसित हो गई।

राजस्थान में 2 रुपए घटे सरस दूध के भाव

जयपुर. सवाई माधोपुर एवं करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरस दूध की कीमतों में कमी की घोषणा की है। संघ के प्रबंध संचालक सुरेश कुमार सेन ने बताया कि दुग्ध क्रय दरों में कमी होने के कारण यह निर्णय किया है। अब सरस गोल्ड दूध का एक लीटर पैक 68 रुपए में और टीएम दूध का एक लीटर पैक 52 रुपए में उपलब्ध होगा। पहले इनकी कीमत क्रमशः 70 रुपए और 54 रुपए थी। नई दरें 13 जनवरी से लागू होंगी और उपभोक्ता सरस बूथ व शॉप एजेंसियों से दूध प्राप्त कर सकेंगे। गुणवत्ता पर विशेष जोर संघ ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में कमी के बावजूद दूध की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं तक शुद्ध और पौष्टिक दूध पहुंचाना ही संघ का उद्देश्य है। दूध की कीमतों में कमी से आमजन को सीधी राहत मिलेगी। रोजाना सरस दूध का उपयोग करने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक दृष्टि से सहायक साबित होगा। संघ के अनुसार उपभोक्ताओं को उचित दर पर गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की दरों में आई कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

मकर संक्रांति पर जयपुर में पतंग बिक्री से ₹18 करोड़ का कारोबार

जयपुर. मकर संक्रांति को लेकर बाजार में पतंगों की खरीद-फरोख्त परवान पर है। देर रात तक बाजार में पतंग-मांझा खरीदने वालों की भीड़ उमड़ रही है। पतंग व्यापारियों की मानें तो इस बार डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक पतंगों की बिक्री होने की उम्मीद है। साथ ही मांझा-डोर की चरखी भारी मात्रा में बिकने की भी उम्मीद है। पतंग मार्केट में 18 करोड़ से अधिक के कारोबार होने के अनुमान से व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं। जयपुर शहर के हांडीपुरा, जगन्नाथशाह का रास्ता, किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार व हल्दियों का रास्ता में पतंगों की 300 से अधिक दुकानें है। जहां सुबह से देर रात तक पतंग और मांझा-डोर के साथ चरखी की खरीदारी हो रही है। मकर संक्रांति के नजदीक आने के साथ ही ग्राहकों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिन से ग्राहकी एक साथ बढ़ी है। बाजार में इस बार छोटी पतंगों से लेकर 4 फीट की पतंगें बिक रही हैं। परंपरागत चांददारा, गिलासदारा जैसी कई डिजायन की अद्धा, मझौली व पोणी पतंगें अधिक बिक रही हैं। इसके साथ ही पन्नी की लटकन, झालर जैसी फैंसी पतंगें भी ग्राहक खरीद रहे हैं। बीकानेर से फर्रूखाबाद तक के व्यापारी स्थानीय व्यापारियों के साथ बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, फर्रूखाबाद के साथ बीकानेर, सीकर सहित प्रदेश के कई शहरों से कारोबारियों ने यहां आकर पतंगों की दुकानें लगाई है। बीकानेर से आए पतंग व्यापारी असलम खान ने बताया कि वे दो माह पहले ही दुकान लगाने के लिए जयपुर आए हैं। दिसंबर तक होलसेल कारोबार हुआ, अब रिटेल में पतंगें बेच रहे हैं। छुट्टियों ने बढ़ाई रौनक इस बार स्कूलों की छुट्टियां आने और रविवार व शनिवार का अवकाश होने से शहर में मकर संक्रांति से पहले ही खूब पतंगें उड़ रही है। इससे बच्चों और युवाओं का उत्साह है, वहीं बाजार में भी रौनक दिखाई दे रही है। कळपने के सामान की दुकानों में भीड़ मकर संक्रांति पर दान-पुण्य के साथ 14-14 वस्तुएं कळपने का विशेष महत्व है, इसे लेकर बाजार में कळपने के सामानों की दुकानों पर भीड नजर आ रही है। दुकानदारों ने संक्रांति को लेकर 14-14 वस्तुओं के पैकेट बना रखे हैं, जो बाजार में 30 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए तक बिक रहे हैं। प्लास्टिक के आयटम, सर्दी के ऊनी कपड़े, सुहाग व शृंगार की वस्तुएं अधिक बिक रही हैं। विशिंग लैम्प-पटाखों की बिक्री भी बढ़ी मकर संक्रांति पर विशिंग लैम्प व पटाखों की बिक्री खूब हो रही है। व्यापारियों की मानें तो संक्रांति तक एक करोड़ रुपए से अधिक के विशिंग लैम्प बिकने की उम्मीद है। 600 से 1500 रुपए रोज कमा रहे कारीगर पतंग व मांझा तैयार करने वाले कारीगर इन दिनों 600 से 1500 रुपए रोज कमा रहे हैं। एक पतंग 10 से 15 कारीगरों के हाथों में होकर निकलने के बाद तैयार होती है। इसमें महिलाओं भी पतंग बनाने में सहयोग करती है। वहीं एक कारीगर एक दिन में 12 रील मांझा तैयार कर देता है। इन पतंग बाजारों में भीड़ 1- जगन्नाथशाह का रास्ता (हांडीपुरा)। 2- किशनपोल बाजार। 3- चांदपोल बाजार। 4- हल्दियों का रास्ता। एक नजर… 1- 1500 से अधिक दुकानें है शहर में पतंगों की, 250 से अधिक होलसेल की दुकानें। 2- 2 से 150 रुपए तक की एक पतंग बिक रही बाजार में। 3- 250 से 2000 रुपए तक बिक रहा 3 रील की एक मांझा चरखी। 4- 20 फीसदी महंगी हो गई पतंगें पिछले साल के मुकाबले। (बड़ी दुकानों पर प्रति दुकान एक से डेढ़ लाख तक पतंगें बिक रही)। डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक बिक जाएगी पतंगें जयपुर में पतंगों का मार्केट बढ़ता जा रहा है। इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक पतंगें बिक जाएगी। पतंग और मांझे का 18 करोड़ से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। पिछले साल के मुकाबले इस बार ग्राहकी 30 फीसदी बढ़ी है। – संजय गोयल, अध्यक्ष, जयपुर पतंग उद्योग

बारां का लहसुन बनेगा वैश्विक ब्रांड, जीआई टैग से बढ़ेगी पहचान और दाम

बारां राजस्थान के कृषि मानचित्र पर अपनी खास पहचान रखने वाला बारां जिले का लहसुन अब जल्द ही वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जिले के लहसुन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति बारां ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत लहसुन की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव तैयार कर बौद्धिक संपदा कार्यालय, चेन्नई भेजा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होगा और बारां के लहसुन को जीआई टैग मिल जाएगा। कृषि उपज मंडी समिति ने करीब एक माह पूर्व इस दिशा में पहल की थी। प्रस्ताव कृषि महाविद्यालय बारां, कृषि विश्वविद्यालय कोटा और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे ‘आवेदक समूह उत्पादकों’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है, जो कृषि उत्पाद बाजार समिति बारां के नाम से पंजीकृत होगा। जीआई टैग मिलने से जिले के लहसुन को कानूनी संरक्षण मिलेगा और उसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी। लहसुन उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी बारां दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में स्थित बारां जिला लहसुन उत्पादन के मामले में प्रदेश में अग्रणी है। औषधीय श्रेणी की इस फसल में बारां क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता—तीनों ही दृष्टियों से राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में औसतन 89,805 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की बुवाई होती है, जिसकी औसत उत्पादकता 5,916 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। वहीं बारां जिले में औसतन 30,714 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है और उत्पादकता 6,133 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। पिछले तीन-चार वर्षों से जिले में औसतन 16 लाख क्विंटल लहसुन मंडियों में पहुंच रहा है। क्यों खास है बारां का लहसुन बारां के लहसुन की अलग पहचान का सबसे बड़ा कारण यहां की काली मिट्टी है, जिसमें पोटाश तत्व की मात्रा अधिक पाई जाती है। पोटाश लहसुन की गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध को बेहतर बनाता है। लहसुन की कली में पाए जाने वाले ‘डाई एमिल डाई सल्फाइड’ नामक ऑर्गेनो सल्फर यौगिक के कारण इसकी तेज गंध और औषधीय गुण लंबे समय तक बने रहते हैं। कम तापमान और अनुकूल जलवायु भी इसकी गुणवत्ता को और बढ़ाती है। जीआई टैग से क्या होगा फायदा जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक पहचान से जोड़ता है और यह प्रमाणित करता है कि उसकी गुणवत्ता और विशेषताएं उसी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इससे नकली या मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बारां के लहसुन को नई पहचान मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले के कृषि और विपणन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।  

राजस्थान में भीषण शीतलहर के बीच 13 जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं

जयपुर. राजस्थान में जारी भीषण शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए राज्य के कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं और कहीं-कहीं स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। छात्रों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 12 और 13 जनवरी के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में तापमान लगातार गिर रहा है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजस्थान के 11 जिलों में शीतलहर को लेकर रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 14–15 जनवरी के बाद ही ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है। जिलावार स्कूलों को लेकर आदेश जयपुर में कक्षा 5 तक के सभी स्कूलों में 12 और 13 जनवरी को अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल 14 जनवरी से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। नागौर में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 और 13 जनवरी को बंद रहेंगे। दौसा में कक्षा 8 तक के सभी छात्रों के लिए 12 जनवरी से अवकाश घोषित किया गया है। सीकर में कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल बंद किए गए हैं। जालोर में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 से 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। झुंझुनूं में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों की छुट्टियां 13 जनवरी तक बढ़ा दी गई हैं। झालावाड़/जूनागढ़ में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 और 13 जनवरी को बंद रहेंगे। डूंगरपुर में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, हनुमानगढ़ में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में सोमवार को अवकाश रहेगा, जबकि मंगलवार को लोहड़ी का अवकाश रहेगा। स्कूल 14 जनवरी से खुलेंगे। अजमेर में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल अगले आदेश तक सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। चूरू में कक्षा 8 तक के स्कूलों में सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। जोधपुर संभाग में सभी स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलाए जाएंगे। बच्चों को लेकर प्रशासन की अपील लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाकर ही स्कूल भेजें और जिला स्तर पर जारी होने वाले निर्देशों पर नजर बनाए रखें। राज्य में ठंड का प्रकोप फिलहाल जारी रहने की संभावना है, ऐसे में आने वाले दिनों में स्कूलों को लेकर और भी आदेश जारी किए जा सकते हैं।

शिक्षा राज़्यमंत्री मदन दिलावर से शहर के प्रबुद्धजनों ने की शिष्टाचार भेंट’

जयपुर. दो दिवसीय जोधपुर प्रवास पर आए राजस्थान सरकार के शिक्षा (विद्यालयी/ संस्कृत) एवं पंचायती राज मंत्री तथा जोधपुर जिले के प्रभारी मंत्री मदन दिलावर से सोमवार को शहर के प्रबुद्धजनों ने सर्किट हाउस में शिष्टाचार भेंट की।  जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. वीरेंद्र सिंह जैतावत तथा राजस्थान ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष मुकेश भारतीय ने सर्किट हाउस पहुंचकर प्रभारी मंत्री मदन दिलावर से मुलाकात की तथा उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। भेंट के दौरान कुलगुरु डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित विषयों पर चर्चा की, वहीं मंत्री दिलावर ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर अन्य गणमान्य नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं।

लोक संस्कृति, और पतंगबाज़ी का 14 को दिखेगा अनूठा संगम

जयपुर. राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त करने वाला काइट फेस्टिवल 2026 इस वर्ष भी अपने भव्य और आकर्षक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ के अनुसार इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी। उनकी उपस्थिति आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान करेगी और यह राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाएगी, जिसके तहत राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन आयुक्त ने कहा कि दो दशकों से भी अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा यह उत्सव आज केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान के इवेंट-बेस्ड टूरिज़्म का प्रमुख और विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है। विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार 14 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले इस उत्सव का एक दिवसीय कार्यक्रम सुबह 11.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक जलमहल की पाल, आमेर रोड, जयपुर पर आयोजित किया जाएगा। ऐतिहासिक जलमहल, शांत झील और खुले आसमान के बीच रंग-बिरंगी पतंगों की उड़ान पर्यटकों और शहरवासियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रचेगी। कार्यक्रम के अंतर्गत लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पतंगों की प्रदर्शनी, पतंग निर्माण का लाइव प्रदर्शन तथा फैंसी पतंग उड़ाने का विशेष डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किया जाएगा। पर्यटकों के आकर्षण के लिए पारंपरिक व्यंजनों का निःशुल्क वितरण, विदेशी सैलानियों के लिए निःशुल्क पतंगें तथा निःशुल्क ऊँटगाड़ी सवारी जैसी विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। शेखावत ने बताया की दिनभर के सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव के बाद शाम 6.30 बजे से आयोजन का दूसरा चरण प्रारंभ होगा। इस दौरान लालटेन उड़ाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसे लालटेन उत्सव का का नाम दिया गया है। इसके बाद हवामहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भव्य आतिशबाज़ी की जाएगी। गुलाबी शहर के आसमान में रोशनी और रंगों से सजी यह आतिशबाज़ी काइट फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण होगी, जो उत्सव को यादगार समापन प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि काइट फेस्टिवल 2026 एक बार फिर यह संदेश देता है कि राजस्थान केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि दिन से रात तक जीने और महसूस करने वाला अनुभव है जहां दिन में आसमान पतंगों से संवाद करता है और रात में ऐतिहासिक धरोहरें रोशनी में नहाकर उत्सव की साक्षी बनती हैं। गौरतलब है कि काइट फेस्टिवल वर्षों से शहरवासियों, देशी पर्यटकों और विदेशी सैलानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस उत्सव के माध्यम से राजस्थान की जीवंत संस्कृति, लोक कला और आतिथ्य परंपरा का अनुभव करते हैं। यह आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसे जिला प्रशासन जयपुर, जयपुर नगर निगम एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का सहयोग प्राप्त है।