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आतंकी खतरे पर सख्त हरियाणा सरकार, 150 अधिकारियों के साथ एंटी-टेररिस्ट सेल की होगी स्थापना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नए ढांचे और उच्च स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। फरीदाबाद की अल फला यूनिवर्सिटी में संदिग्ध गतिविधि और सामग्री मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ाई है। इसी क्रम में डीजीपी ओपी सिंह ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड अर्थात एटीएस के गठन का विस्तृत प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इसे हरियाणा की आतंकवाद-रोधी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में एटीएस की आवश्यकता, यूनिट की संरचना, मानव संसाधन और संचालन प्रणाली का पूरा खाका शामिल है। सरकार अब यह तय करेगी कि एटीएस का ढांचा उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ऑपरेशन आधारित हो या फिर एनसीआर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा का अलग मॉडल तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली की सीमा, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा-विशेष मॉडल अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय जल्द होने की संभावना है।   अल फला यूनिवर्सिटी मामले के बाद हरियाणा पुलिस ने एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। प्रदेश के 150 थानों को विशेष निगरानी चक्र में शामिल किया गया है। प्रत्येक थाने से एक जवान को प्रतिदिन फील्ड रेकी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण और इंटेलिजेंस जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह रिपोर्ट सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है।   प्रस्ताव के अनुसार एटीएस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने वाली यूनिट के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व-निवारण आधारित एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा। यूनिट का मुख्य फोकस प्रीवेंटिव इंटेलिजेंस, संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान और समय रहते कार्रवाई पर रहेगा। मौजूदा सुरक्षा ढांचा अधिकतर पोस्ट इंसीडेंट रिस्पॉन्स पर आधारित है, जिसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत करने की जरूरत मानी गई है। एटीएस क्यों जरूरी पिछले महीनों में एनसीआर क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ी है। सीमावर्ती दबाव, साइबर संदिग्ध गतिविधियां और हालिया घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ढांचे को प्रीवेंटिव मोड में बदलना आवश्यक है। अल फला यूनिवर्सिटी मामले ने यह जरूरत और अधिक स्पष्ट कर दी है। डीजीप ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस गठन का प्रस्ताव भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि एटीएस बनने से हरियाणा नई रणनीति और अधिक गति के साथ आतंकवाद-रोधी प्रयासों को लागू कर सकेगा ।

इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा हाई-टेक प्लानिंग से: हरियाणा सरकार ने लॉन्च किया ‘जिला मॉडल 2.0’

चंडीगढ़  प्रदेश की नायब सरकार ने जिला स्तर पर विकास को लेकर नया अध्याय खोल दिया है। अब तक विकास योजनाओं पर खर्च होने वाला बजट कई दिशाओं में बिखर जाता था, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 से पूरी व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य ने एक ‘जिला मॉडल 2.0’ तैयार किया है, जिसमें पहली बार अलग-अलग सेक्टरों के लिए तय प्रतिशत, स्पष्ट सीमाएं और कड़ी निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। यह बदलाव केवल पॉलिसी नहीं, बल्कि गांव और कस्बों की वास्तविक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने नई पॉलिसी में बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का निर्णय लिया है। अब जिलों की योजना राशि का 60 प्रतिशत सिर्फ उन कार्यों में लगेगा जिनका जनता रोज उपयोग करती है। इनमें गलियां, नालियां, पेयजल लाइनों का विकास, सिंचाई ढांचा, सड़कें, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट और पशुधन व बागवानी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, बाकी विकास अधूरा ही रहेगा। लंबे समय से शिकायत थी कि जिलों में विकास कार्यों का चयन बिना ठोस ढांचे के होता रहा। कई बार पंचायतें अपनी पसंद से काम चुन लेती थीं, तो कई परियोजनाएं डीडीएमसी स्तर पर मंजूर हो जाती थीं, भले वे योजना के मूल उद्देश्य से बाहर हों। इसी वजह से कई जरूरी कार्य अधर में लटके और बजट का बिखराव बढ़ता गया। नई व्यवस्था में यह स्थिति बदल दी गई है। पहली बार सरकार ने स्पष्ट सूची जारी की है कि कौन से कार्य स्वीकार्य हैं और कौन से नहीं। अब किसी भी स्तर पर मनमानी मंजूरियों का रास्ता बंद होगा। सिर्फ जरूरत के हिसाब से मिलेगी मंजूरी सरकार के अनुसार, अब जिला योजनाओं का फोकस जरूरत पर रहेगा, न कि दबाव पर। जनप्रतिनिधियों के दबाव में भी काम नहीं होंगे, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। फंड का आवंटन इस तरह तय किया गया है कि हर जिला अपनी प्राथमिकता के अनुसार योजना चुने। पिछड़े इलाकों को पहले लाभ मिले। तात्कालिक और महत्वपूर्ण कार्यों को तुरंत स्वीकृति मिले, जबकि कम जरूरी योजनाएं बाद में आएं। सरकार का कहना है कि एक समान फार्मूला सभी जिलों पर लागू नहीं हो सकता, इसलिए हर जिले की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार सेक्टर-वार सीमा तय की गई है। शिक्षा, महिला और बाल विकास को तय हिस्सा नई योजना में तीन ऐसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले अपेक्षाकृत कम फंड मिलता था। इनमें सामुदायिक भवन, स्कूल–कॉलेज और आंगनवाड़ी व बाल पोषण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। नए नियम के अनुसार, इन्हें अब 10-10 प्रतिशत फंड तय रूप से मिलेगा। इससे उन इलाकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से शिक्षा और सामुदायिक सुविधाओं की कमी झेल रहे थे। जिला योजना में निजी एजेंसियों की एंट्री बंद नीति का यह निर्णय सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। अब जिला योजना के तहत किसी भी प्रोजेक्ट में निजी एजेंसियां सीधे शामिल नहीं होंगी। सभी कार्य डीडीएमसी की निगरानी में सरकारी विभागों के माध्यम से ही होंगे। डीडीएमसी में मंत्री अध्यक्ष, उपायुक्त उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि सांसद, विधायक, महापौर और जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और निजी हितों की संभावनाएं खत्म होंगी। फाइल से फील्ड तक ट्रैकिंग मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, निगरानी की कमजोर कड़ी अब समाप्त की जा रही है। नया ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि हर प्रोजेक्ट की शुरुआत, स्वीकृति, लागत और प्रगति ऑनलाइन ट्रैक होगी। डीडीएमसी को नियमित रिपोर्ट देनी होगी। गलत मंजूरियों या लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी। सरकार इसे ‘स्मार्ट निगरानी तंत्र’ बता रही है। जिला दर जिला बदलेगी तस्वीर पहली बार प्राथमिकता आधारित विकास योजनाओं को लागू किया जा रहा है। अब यह नहीं देखा जाएगा कि कौन किसकी परियोजना आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह देखा जाएगा कि जनता के लिए कौन सा काम जरूरी है। फंड का बिखराव रुकेगा और प्रभाव बढ़ेगा। बजट तय ढांचे में चलेगा, जिससे अधूरे काम रुकेंगे नहीं। गांव और कस्बों की बुनियाद मजबूत होगी और सड़क, पानी, नालियों, पुलों तथा स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहले से तेज़ी से सुधरेंगी। अब विकास का केंद्र वे इलाके होंगे जिन्हें लंबे समय से नज़रअंदाज किया जाता रहा।

फसल अवशेष जलाने के बढ़ते मामले: प्रशासन ने 17 किसानों को किया गिरफ्तार

जींद जिले में एक ही दिन में सात जगह धान के अवशेष जलाने के मामले सामने आए हैं। इस पर जिला पुलिस ने सात किसानों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की हैं। जिले में अब तक धान के अवशेष जलाने के आरोप में करीब 70 किसानों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 16 नवंबर को दर्ज हुईं एफआईआर में आरोपी 17 किसानों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए किसानों में ललित खेड़ा से सुमेर, सिंधवीखेड़ा से उमेद सिंह, निडानी से पवन, रधाना से रमेश, दालमवाला से धर्मबीर, बराह कलां से राहुल, निडाना से महेंद्र, पौली से श्रीभगवान, मालवी से धर्मबीर और सुरेंद्र, खरैंटी से सुनील, जुलाना से नसीब सिंह, सिंघवाल से प्रवेश, फुलियां कलां से रामबीर, खरड़वाल से सुरेश, मुआना से सुखा और बड़ौदा से नरेंद्र शामिल हैं।   अब तक जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर अब तक पराली जलाने पर जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर हुई है। इसके अलावा रोहतक में 36, सोनीपत में 10, कैथल में 11, कुरुक्षेत्र और करनाल में 3-3. झज्जर और अंबाला में एक-एक किसान पर एफआईआर दर्ज हुई है। 

हुड्डा बोले— रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल

चंडीगढ़  हरियाणा में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट ने मौजूदा भाजपा सरकार की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस की रैंकिंग पिछले पांच साल में 8वें स्थान से गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई है। हुड्डा के अनुसार 18 बड़े राज्यों में हरियाणा की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। तुलना में बिहार चार पायदान ऊपर है और पड़ोसी पंजाब 7वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर देने में सरकार पूरी तरह असफल रही है। पुलिस में एससी अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में हरियाणा 18 में से 17वें स्थान पर है। एससी सिपाही और ओबीसी कांस्टेबल भर्ती में भी राज्य पिछड़ता दिख रहा है। हुड्डा ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि आरक्षित वर्गों की नियुक्तियां लगभग ठप पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 80 से अधिक गैंग सक्रिय हैं, जो हत्या, लूट, फिरौती और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कांस्टेबल स्तर के 38.9 प्रतिशत पद खाली हैं और महिला अधिकारियों के 17.8 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। प्रति व्यक्ति पुलिस खर्च हरियाणा में मात्र 1,908 रुपये है, जबकि पंजाब में यह 2,604 रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में एक थाने पर औसतन 1,09,325 की आबादी का भार है, जबकि केरल में यह संख्या केवल 23,992 है। हुड्डा ने कहा कि हाल ही में एडीजीपी रैंक के एक अधिकारी और एक एएसआई द्वारा की गई आत्महत्या पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को उजागर करती है। कांग्रेस ने इन घटनाओं की सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार मामले को लगातार टाल रही है

हरियाणा की हवा में जहर: इस जिसे का AQI पहुंचा 500 पार, हेल्थ एक्सपर्ट ने दे डाली चेतावनी

फरीदाबाद  हरियाणा में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। फरीदाबाद का AQI 508 और गुरुग्राम का 498 खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोनीपत, रोहतक, कैथल व कुरुक्षेत्र की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज हुई।  हवा में धुंध ऐसी मिल गई है कि आसमान तक धुंधला पड़ गया है. आज सुबह अलग-अलग शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और साफ कर दिया। कई शहरों में हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।   सबसे बुरा हाल फरीदाबाद का है जहां AQI 508 दर्ज हुआ। यह स्तर खतरनाक श्रेणी में आता है। इतनी ज़हरीली हवा में ज्यादा देर रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. सांस की समस्या आंखों में जलन, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण आम हो जाते हैं। फरीदाबाद में रहने वालों के लिए मास्क पहनना और बाहर कम निकलना ही समझदारी है। गुरुग्राम भी फरीदाबाद से बहुत पीछे नहीं है। यहां AQI 498 दर्ज किया गया जो खतरनाक श्रेणी में ही आता है।बड़े-बड़े ऑफिस, ट्रैफिक की भीड़ और निर्माण कार्य इन सबने हवा को और खराब कर दिया है. सुबह-शाम सड़कों पर चलना मुश्किल होता जा रहा है। सोनीपत में AQI 220 रहा जो गंभीर श्रेणी में आता है। भले फरीदाबाद और गुरुग्राम जितना खराब नहीं लेकिन सेहत पर इसका भी साफ असर पडरहा है। अस्थमा और दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तर काफी खतरनाक है।  

नायब सैनी बोले—किसान मजबूत होगा, तभी विकसित भारत बनेगा

पलवल  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब हरियाणा का किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से जुड़ा और वैश्विक बाजार के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को राष्ट्रीय नीति के केंद्र में रखकर देश के कृषि भविष्य को मजबूत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को पलवल के नेताजी सुभाष चंद बोस स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी कर रहे थे। इस दौरान हरियाणा के 15 लाख 82 हजार किसानों को 316 करोड़ 38 लाख रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव प्रसारण भी किसानों के साथ देखा और सुना। सैनी ने किसानों से कहा कि वे पारंपरागत खेती के साथ मूल्य संवर्धित फसलों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, एग्री-टूरिज्म, ब्रांडिंग और ‘फार्म-टू-फोर्क’ मॉडल की ओर कदम बढ़ाएं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के चार स्तम्भ गरीब, महिला, युवा और किसान तय किए हैं और इनमें किसान सबसे महत्वपूर्ण है। हरियाणा सरकार इसी सोच के अनुरूप खेती को लाभकारी बनाने पर लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। पराली प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। भावांतर भरपाई योजना के तहत पिछले ग्यारह वर्षों में तीस हजार किसानों को 135 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जहाँ सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होती है और भुगतान 48 घंटे में किसानों को मिल जाता है। डिजिटल व्यवस्था ने योजनाओं का लाभ सरल और पारदर्शी बना दिया है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा, मुख्यमंत्री के पूर्व राजनैतिक सचिव और पलवल के पूर्व विधायक दीपक मंगला, पूर्व विधायक प्रवीण डागर, पूर्व विधायक जगदीश नायर, पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, भाजपा जिलाध्यक्ष विपिन बैंसला, पूर्व जिलाध्यक्ष चरण सिंह तेवतिया, डॉ. हरेन्द्रपाल राणा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव पंकज अग्रवाल, महानिदेशक राज नारायण कौशिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ब्राह्मण धर्मशाला, पलवल में खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम के दादा स्वर्गीय जयपाल गौतम की स्मृति में आयोजित रस्म पगड़ी और प्रेरणा सभा में पहुंचे। उन्होंने तस्वीर पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय जयपाल गौतम का जीवन समाज के लिए प्रेरणा है। सभा में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल कौशिक, हरियाणा भाजा प्रभारी सतीश पुनिया, वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल जैन, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली, जबलपुर से विधायक अभिलाष पांडे, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, लोनी से विधायक नंद किशोर नंदी, पूर्व राज्यसभा सांसद लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स, पूर्व विधायक दीपक मंगला, भाजपा जिलाध्यक्ष विपिन बैंसला, पूर्व जिलाध्यक्ष चरण सिंह तेवतिया और ग्रेट खली सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

सरकार का बड़ा फैसला: JAG प्रमोशन से पहले IAS ट्रेनिंग जरूरी

चंडीगढ़  केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारियों के लिए अनिवार्य मिड-करियर ट्रेनिंग कार्यक्रम (फेज-थ्री एमसीटीपी) की तिथियों की घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि यह प्रशिक्षण केवल एक पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि पदोन्नति से जुड़ी अनिवार्य शर्त है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त सचिव (प्रशिक्षण) छवि भारद्वाज द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि फेज-थ्री पूरा किए बिना किसी भी अधिकारी को जूनियर प्रशासनिक ग्रेड (जेएजी) में नियुक्ति नहीं दी जाएगी। यह प्रावधान आईएएस वेतन नियमों के तहत अनिवार्य है। केंद्र ने स्पष्ट कहा है कि फेज-थ्री एमसीटीपी के लिए आवश्यक तैयारियां – संस्थान, विशेषज्ञ, पाठ्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय साझेदार संस्थाएं लंबी प्रक्रिया के बाद तय की जाती हैं। इसलिए नामांकन में देरी या अनुपस्थित रहने को गंभीरता से देखा जाएगा। यह प्रशिक्षण आईएएस अधिकारियों के करियर के सबसे निर्णायक चरणों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद ही उच्च प्रशासनिक ज़िम्मेदारियों की ओर उनका मार्ग प्रशस्त होता है। यह प्रशिक्षण पांच जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आयोजित होगा। सभी अधिकारियों को चार जनवरी को अकादमी में उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशिक्षण के विभिन्न मॉड्यूल – नीति-निर्माण, नेतृत्व विकास और प्रशासनिक रणनीति समय पर प्रारंभ किए जा सकें। 2016 बैच को ‘अंतिम अवसर’ इस राउंड की सबसे अहम बात यह है कि 2016 बैच को फेज-थ्री में भाग लेने का तीसरा और अंतिम अवसर दिया गया है। 2017 बैच के लिए यह दूसरा अवसर और 2018 बैच के लिए पहला अवसर होगा। केंद्र ने साफ शब्दों में कहा है कि 2016 बैच को इस प्रशिक्षण के लिए आगे कोई अवसर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही, 2010 से 2015 बैच तक के अधिकारी ‘केस टू केस’ आधार पर शामिल किए जाएंगे, यदि वे सेवा-नियमों के अनुरूप पात्र हों। सेवानिवृत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान भी स्पष्ट केंद्र ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों की सेवा 31 दिसंबर, 2029 से पहले समाप्त होने जा रही है, उन्हें नामांकित न किया जाए। प्रशिक्षण के बाद कम से कम तीन वर्ष की शेष सेवा अनिवार्य मानी गई है, ताकि अधिकारी प्रशिक्षण के बाद उसके व्यावहारिक लाभ के साथ उच्च दायित्व निभा सकें। 12 दिसंबर तक करना होगा रजिस्ट्रेशन सभी अधिकारियों को 12 दिसंबर तक ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करना होगा। यह पंजीकरण कार्मिक मंत्रालय की वेबसाइट पर ही किया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकारों को अपने-अपने अधिकारियों की सहमति और नामांकन 19 दिसंबर तक केंद्र को भेजना अनिवार्य किया गया है। किसी भी प्रश्न के लिए अकादमी ने अपना ईमेल पता साझा किया है। हरियाणा के 26 आईएएस के नाम हरियाणा सरकार की ओर से जारी पत्र में राज्य कैडर के 26 आईएएस अधिकारियों के नाम सूचीबद्ध किए गए हैं, जिन्हें फेज-थ्री एमसीटीपी के लिए पात्र माना गया है। इनमें अम्मा तसनीम (2012), निशांत कुमार यादव (2013), पार्थ गुप्ता (2013), अजय कुमार (2013), प्रदीप दहिया (2013), मनदीप कौर (2013), मुनिश शर्मा (2014), विक्रम (2014), रानी नगर (2014), मोनिका गुप्ता (2014), राहुल हुड्डा (2015), मोहम्मद इमरान रज़ा (2015), उत्तम सिंह (2015), अभिषेक मीणा (2016), राहुल नरवाल (2016), विवेक भारती (2016), हरीश कुमार वशिष्ठ (2016), रणेंद्र सिंह छिल्लर (2016), विश्राम कुमार मीणा (2017), स्वप्निल रविंद्र पाटिल (2017), जिल्हा गुप्ता (2017), वैशाली शर्मा (2017), रचिन गुप्ता (2018), आयुष सिन्हा (2018), अपराजिता (2018) और अखिल पिलानी (2018) शामिल हैं।

हरियाणा में अजब कारनामा: मंत्री ने खोली सड़क, लेकिन निर्माण करना ही भूल गए अधिकारी

फरीदाबाद  हरियाणा के फरीदाबाद में प्रशासन की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है, जहां मंत्री से सड़क का उद्घाटन तक करा लिया गया, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। दरअसल बल्लभगढ़–तिगांव–मंझावली मार्ग की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए तिगांव में करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी रोड बननी थी। तीन अक्टूबर को इस रास्ते के निर्माण कार्य का शुभारंभ प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर द्वारा नारियल फोड़कर किया गया था। निर्माण कार्य के शुभारंभ के बाद के बाद से अधिकारियों ने यह भी दावा कर दिया था कि कुछ दिनों में काम शुरू हो जाएगा। हालांकि डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस देरी की वजह से रोजाना 30 हजार से अधिक वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि यह मार्ग दर्जनभर से अधिक गांवों को सीधे जोड़ता है। प्रस्तावित फिरनी को सीमेंटेड बनाया जाना है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग पांच करोड़ रुपये है।   सात मीटर सड़क चौड़ी की जा चुकी है इसके साथ ही, विभाग की ओर से पानी निकासी के लिए नाली बनाने की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि बल्लभगढ़ से तिगांव के सरकारी स्कूल तक सात मीटर सड़क को 16 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ा किया जा चुका है। मंत्री राजेश नागर की सिफारिश पर इस सड़क चौड़ीकरण परियोजना को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी, जबकि परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने अपने कोटे से इसके लिए बजट उपलब्ध कराया था। मंझावली पुल शुरू होते ही बढ़ेगा यातायात दबाव यमुना नदी पर मंझावली पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। हरियाणा की ओर से सड़क भी बन गई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सड़क बनना बाकी है। इसके पूरा होते ही ग्रेटर नोएडा तक आवागमन शुरू हो जाएगा। इससे तिगांव की मुख्य सड़क पर वाहनों का भार कई गुना बढ़ जाएगा। यदि फिरनी का चौड़ीकरण समय पर नहीं हुआ, तो यहां लगातार जाम की स्थिति बनी रह सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल भी किसी आयोजन जैसे शादी-ब्याह के समय सड़क पर लंबा जाम लग जाता है, और पुल चालू होने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से समस्या और गंभीर हो जाएगी।

ASI पत्नी नियुक्ति मामला: अगले महीने मिल सकती है बड़ी राहत, सरकार पूरा करेगी मांग

रोहतक जींद के जुलाना निवासी एएसआई संदीप लाठर की पत्नी संतोष को लेक्चरर पद पर अगले माह तक नौकरी दी जाएगी। अगले सप्ताह बैठक कराकर परिवार की यह मांग पूरी कराई जाएगी । मुख्यमंत्री से दोबारा बात कराने की जरूरत पड़ी तो यह प्रयास भी किया जाएगा। यह आश्वासन मंत्री कृष्णलाल पंवार ने एएसआई के परिवार को सोमवार रात एमडीयू में मुलाकात के दौरान दिया।  एएसआई संदीप लाठर के ममेरे भाई लाढ़ौत निवासी संजय ने बताया कि मंत्री से मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई मुलाकात में जिन मांगों पर सहमति बनी थी उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। एएसआई मामले में निष्पक्ष जांच की जा रही है। इसमें जल्दी ही परिवार को भी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।  

16 लाख किसानों को बड़ी सौगात: हरियाणा सरकार ने बांटे 15,728 करोड़ रुपये, जानें किस जिले को सबसे ज्यादा लाभ

चंडीगढ़  प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी कर दी। इस किस्त के तहत देशभर के करोड़ों किसानों के खातों में मदद राशि भेजी गई, जिसमें हरियाणा के लगभग 16 लाख किसान भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े और किसानों को मिली इस राहत पर खुशी व्यक्त की। सीएम ने बताया कि प्रधानमंत्री की अगुवाई में कृषि क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहे हैं और किसान कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होनें कहा कि आज हरियाणा के 15 लाख 82 हजार किसानों के बैंक खातों में सम्मान निधि भेजी गई।  वहीं, पलवल जिले के 74,299 किसानों को कुल 14 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त, पूरे राज्य में फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को 15,728 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की गई है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कई किसानों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है और प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जो 24 फसलों की खरीद MSP पर सुनिश्चित करते हैं। किसानों को समय पर भुगतान मिल सके इसके लिए राज्य सरकार ने ई-खरीद एप्लिकेशन की शुरुआत की है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से किसान घर बैठे अपनी फसल बिक्री के लिए ई-गेट पास बनवा सकते हैं और 48 घंटे के भीतर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।