samacharsecretary.com

रोहतक जेल से पैरोल पर निकला राम रहीम, सिरसा डेरा पहुंचने पर बढ़ी हलचल

सिरसा. डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को 23 दिन की पैरोल मिली है। मंगलवार सुबह साढ़े 6 बजे रोहतक की सुनारिया जेल से निकलकर सिरसा के लिए रवाना हुए। उन्हें लेने के लिए उनकी मुंह बोली बेटी हनीप्रीत इंसा गई थी। चार गाड़ियों के काफिले में गुरमीत सिंह लैंड क्रूजर गाड़ी में सवार था। सुबह साढ़े आठ बजे डेरा प्रमुख का काफिला शाह सतनाम धाम में पहुंचा गया। डेरा प्रमुख के दर्शनों के लिए उसके अनुयायी पहले से ही मौजूद थे। इससे पहले गुरमीत के पैरोल मिलने की सूचना पर रात को डेरे के चारों ओर बेरीकेड्स लगा दिए गए थे और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई है। डेरा के आस पास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा गुरमीत सिंह वर्ष 2026 में पांच जनवरी को 40 दिन की पैरोल पर बाहर आया था। तब शाह सतनाम सिंह का अवतार दिवस था। इस वर्ष में उसकी दूसरी पैरोल है। इससे पहले वह 15 बार पैरोल और फरलो ले चुका है और अब उसकी 16 वीं पैरोल है। रणजीत हत्याकांड और छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत बरी डेरा प्रमुख रणजीत हत्याकांड और छत्रपति हत्याकांड में बरी हो चुका है। इस साल सात मार्च को गुरमीत को पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट ने छत्रपति हत्याकांड से उसे बरी किया था। अब उसने साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की हुई है। पुराने डेरे की करवा रहा मरम्मत डेरा प्रमुख जब पिछली बार सिरसा आया था तो उस समय उसे पुराने डेरे के पुन निर्माण शुरू करवाया था। गुरमीत सिंह ने 40 दिन की पैरोल के दौरान वह नियमित तौर पर पुराने डेरे में आकर काम का निरीक्षण करता था। जिसका काम आज भी जारी है। इसके पास स्थित लड़कों के स्कूल को नए डेरे के पास शिफ्ट करने की योजना है। इस डेरे की स्थापना डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक शाह मस्ताना ने की थी।

‘सेल्फी विद डॉटर’ को मिला खट्टर का समर्थन, सुनील जागलान से की खास मुलाकात

जींद. केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने जींद प्रवास के दूसरे दिन सोमवार सुबह बीबीपुर गांव में पूर्व सरपंच सुनील जागलान के घर पहुंचे। उन्होंने सुनील के सेल्फी विद डाटर अभियान को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि अभियान ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को पूरे देश में सबसे अधिक गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर बीबीपुर गांव से शुरू हुई सेल्फी विद डाटर मुहिम ने न केवल देश, बल्कि दूसरे देशों तक अपनी पहचान बनाई। प्रधानमंत्री स्वयं अपने कार्यक्रम मन की बात में इस मुहिम का उल्लेख कर चुके हैं। गाली बंद अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने विभिन्न राज्यों में गाली देने की प्रवृत्ति पर सुनील जागलान के सर्वे पर भी विस्तृत चर्चा की। एआइ सेल्फी विद डाटर अभियान की भी पूरी जानकारी ली। केंद्रीय मंत्री ने सुनील जागलान की बेटियों नंदिनी जागलान और याचिका जागलान से भी बातचीत की। ऊर्जा संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता ईंधन बचत को लेकर प्रधानमंत्री की अपील का जिक्र करते हुए मनोहर लाल ने कहा, ऊर्जा संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री की सोच को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे बदलाव अपनाकर ईंधन और ऊर्जा की बचत कर सकते हैं। निजी वाहन का अनावश्यक रूप से प्रयोग कम कर, सार्वजनिक वाहनों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना, बिजली उपकरणों का सोच-समझकर उपयोग करना और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना जैसे कदम देशहित में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। प्रत्येक नागरिक ऊर्जा संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे, तो देश आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक मजबूत होगा।

महिला हॉकी को नई ऊंचाई देने वाले बलदेव सिंह हुए पद्मश्री से सम्मानित

शाहाबाद/चंडीगढ़. हरियाणा की खेल नगरी शाहाबाद के लिए आज गर्व का ऐतिहासिक पल रहा, जब द्रोणाचार्य अवार्डी हाकी कोच बलदेव सिंह को राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। जैसे ही यह सम्मान उन्हें मिला, पूरे शाहाबाद और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय महिला हाकी को नई पहचान दिलाने वाले बलदेव सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री से नवाजा जाना हरियाणा के लिए भी गौरव की बात है। गौरतलब है कि बलदेव सिंह ने उस दौर में शाहाबाद में महिला हाकी की नींव मजबूत की, जब बेटियों का खेलों में आगे बढ़ना आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और तमाम सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने गांव-गांव से प्रतिभाएं खोजीं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया। उनकी मेहनत और समर्पण ने शाहाबाद को भारतीय महिला हाकी की सबसे बड़ी नर्सरी बना दिया। उनकी कोचिंग में तैयार हुई रानी रामपाल, नवनीत कौर, जसजीत कौर, राजवींदर कौर, जायदीप कौर, रितु रानी, सुमन बाला जैसी खिलाड़ियों ने भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इनमें से कई खिलाड़ियों ने भारतीय टीम की कप्तानी भी संभाली। उनके द्वारा तैयार खिलाड़ियों ने ओलंपिक, एशियन गेम्स, कामनवेल्थ गेम्स और विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मिठाई बांट कर मनाई खुशी शाहाबाद में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई। खिलाड़ियों ने कहा कि यह सम्मान केवल बलदेव सिंह का नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों की मेहनत का सम्मान है, जिन्हें उन्होंने तराश कर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाया। पद्मश्री से सम्मानित होने के बाद बलदेव सिंह एक बार फिर साबित कर चुके हैं कि सच्चा गुरु वही होता है, जो अपनी मेहनत से साधारण प्रतिभाओं को असाधारण पहचान दिला दे। शाहाबाद की मिट्टी से निकले इस महान कोच ने भारतीय हाकी को जो विरासत दी है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।

‘नो PUCC, नो फ्यूल’! हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 1 अक्टूबर से लागू होगी नीति

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक आधारित कार्ययोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. सरकार ने फैसला लिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा. यह नियम एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू किया जाएगा. हरियाणा में प्रदूषण कम करने के लिए ​ पर जोर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है. इसके तहत सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. सरकार ईवी नीति के तहत करेगी काम सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक एनसीआर के प्रमुख शहरों में 925 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का है. इनमें से 575 बसों के खरीद आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, रोहतक और सोनीपत में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. सरकार ईवी नीति के तहत लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन भी दे रही है. बिना PUC वाले वाहनो की जाएगी पहचान प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी. सरकार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लागू कर रही है, जिससे बिना PUC वाले वाहनों की पहचान की जा सकेगी. परिवहन विभाग ने पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ रोजाना कार्रवाई करने का लक्ष्य तय किया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट उद्योगों की निगरानी भी अब पहले से ज्यादा सख्त होगी. हरियाणा में 1349 उद्योगों को ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इनमें से अधिकतर इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट किया जा चुका है . सरकार सितंबर 2026 तक नए उत्सर्जन मानकों को पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर रही है . अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान के लिए नया सर्वे भी कराया जाएगा. सरकार का लक्ष्य वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए राज्य में नए एयर मॉनिटरिंग स्टेशन भी लगाए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य 30 सितंबर 2026 तक सभी जरूरी स्टेशन चालू करने का है, ताकि प्रदूषण वाले क्षेत्रों की समय पर पहचान की जा सके. जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू इसके अलावा एनसीआर क्षेत्र में सड़कों के पुनर्विकास, निर्माण सामग्री और कचरा प्रबंधन पर भी काम तेज किया गया है. सरकार ने जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं . अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकतर काम पूरे कर लिए जाएंगे, जिससे आने वाले समय में एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से राहत मिल सके.

गुरुग्राम-मेवात में बनेगा 500 एकड़ का इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर, हरियाणा सरकार का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने राज्य को इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘हरियाणा इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026’ को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस नीति का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट और सेमीकंडक्टर उद्योगों को आकर्षित कर बड़े स्तर पर निवेश और रोजगार सृजित करना है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए नई नीति लाने की घोषणा की थी। अब इस नीति को लागू कर हरियाणा सरकार देश की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रानिक्स अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की तैयारी में है मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह और विभाग के आयुक्त एवं सचिव डा. अमित कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में उद्योगपतियों से सलाह मशविरा करने के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया। हरियाणा की नई नीति केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। केंद्र सरकार के अनुसार देश में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का आकार वर्ष 2014 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा की नई नीति भी इन्हीं केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप तैयार की गई है। गुरुग्राम-मेवात बेल्ट बनेगी नया इलेक्ट्रानिक्स हब हरियाणा सरकार ने आइएमटी सोहना में लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है। दिल्ली-एनसीआर से निकटता, बेहतर सड़क नेटवर्क, कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की उपलब्धता इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए आकर्षक बना सकेगी। राज्य पहले से ही आटोमोबाइल और आटो कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी है। अब सरकार इलेक्ट्रानिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी उसी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर जैसे औद्योगिक क्षेत्र इलेक्ट्रानिक्स निर्माण के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। उद्योगों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन, पूंजी सहायता मिलेगी उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि नई नीति के तहत सरकार उद्योगों को 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता देगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। इसके अलावा 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसकी सीमा 20 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हरियाणा में निर्मित इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को स्थायी बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी। रोजगार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण क्षेत्र में बड़े निवेश आने से हरियाणा में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। मोबाइल कंपोनेंट, पीसीबी असेंबली, डिस्प्ले यूनिट, बैटरी पैक, आटो इलेक्ट्रानिक्स और चिप पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में एमएसएमइ इकाइयों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। इसके साथ ही राज्य में डिजाइन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और इलेक्ट्रानिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार ने संकेत दिए हैं कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से विशेष नीति तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार भी भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अरबों रुपये की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। ऐसे में हरियाणा भविष्य में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

अब उम्र नहीं देख रही थायराइड बीमारी, किशोर और युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित

 फतेहाबाद बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है। यही हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, पाचन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और अधिक बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है। इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए। थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां     संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।     आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।     नियमित व्यायाम और योग करें।     तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।     वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।     लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।     जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है। -डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।  

अब प्राइवेट केंद्रों पर भी फ्री अल्ट्रासाउंड, नूंह की गर्भवती महिलाओं को मिली राहत

नूंह. जिला स्वास्थ्य विभाग ने नूंह के नागरिकों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार,प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत जिले के प्रमुख निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों को स्वास्थ्य विभाग के पैनल में शामिल किया गया है। अब सरकारी अस्पतालो से रेफर की गई गर्भवती महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर पूरी तरह निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने इसके लिए प्रति अल्ट्रासाउंड 330 रुपये की दर तय की है, जिसका भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाएगा। वहीं मरीजों से कोई भी शुल्क नहीं लिया जा सकता। यह सुविधा 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी। गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश 18 से 19 सप्ताह की जांच अनिवार्य: प्रत्येक रेफर की गई महिला को गर्भावस्था के 18वें से 19वें सप्ताह के बीच कम से कम एक मुफ्त अल्ट्रासाउंड प्रदान किया जाएगा। यह जांच गर्भ में पल रहे शिशु की किसी भी जन्मजात विकृति या अन्य जटिलताओं का समय पर पता लगाने के लिए बेहद जरूरी है। विशेष दिनों में प्राथमिकता: हर महीने की 9, 10, 23 और 30 तारीख को रेफर की गई महिलाओं को इन निजी केंद्रों पर जांच के लिए प्राथमिकता दी जाएगी। शनिवार को पहले दिन ही देवांश अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छह महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया गया। देवांश हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. प्रियंका ने बताया कि सरकार द्वारा जारी आदेशों का नियमानुसार पालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अब दूर दराज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें अपने नजदीकी ही उच्च स्तरीय जांच की सुविधा बिल्कुल मुफ्त मिल सकेगी। फिरोजपुर झिरका खंड     न्यू वाधवा नर्सिंग होम,     रौनक अल्ट्रासाउंड सेंटर     दुर्गा देवी अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     प्राइम डॉयग्नोस्टिक्स     गोयल अल्ट्रासाउंड     डॉ. अरोड़ा अल्ट्रासाउंड नूंह खंड      आर.जी. अल्ट्रासाउंड सेंटर     मलिक हॉस्पिटल     महाजन डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. विशाखा इमेजिंग सेंटर     गोयल अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर      सिटी डॉयग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड सेंटर      मेसर्स एएनएच 3डी/4डी अल्ट्रासाउंड     भारत अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर पुन्हाना खंड       बी.एस. अल्ट्रासाउंड सेंटर      सहारा अल्ट्रासाउंड सेंटर     न्यू भारत डॉयग्नोस्टिक सेंटर     तिरुपति डॉयग्नोस्टिक्स लैब व सीटी स्कैन      वरदान अल्ट्रासाउंड सेंटर      न्यू प्राइम अल्ट्रासाउंड सेंटर पिनंगवा खंड     मंगला अल्ट्रासाउंड सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     डॉ. हिम्मत राय मेमोरियल हॉस्पिटल तावडू खंड     माडर्न अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक सेंटर     डॉ. ऊषा बत्रा मेमोरियल अल्फा हॉस्पिटल     न्यू ओम डॉयग्नोस्टिक     देवांश अल्ट्रासाउंड व डॉयग्नोस्टिक्स सेंटर गर्भ की जांच सरल होगी – क्योंकि सरकारी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की पुख्ता व्यवस्था नहीं है, इसलिए यह फैसला लिया गया है, सरकारी केंद्रों पर आने वाली गर्भवति महिलाओं को जांच के लिए भेजा जाएगा प्राईवेट केंद्र पर। इससे महिलाओं की गर्भ की जांच सरल होगी। – डॉ ज्योत्सना, सीएमओ नूंह

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला! 40% दिव्यांगजन अब रोडवेज में कर सकेंगे फ्री सफर

नूंह. प्रदेश परिवहन विभाग की तरफ हरियाणा रोडवेज की बसों में 40 प्रतिशत से ऊपर दिव्यांग अब निशुल्क सफर कर सकेंगे। परिवहन विभाग की तरफ से जारी किए गए आदेश जारी कर दिए गए हैं। पहले केवल 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए यह सुविधा थी, लेकिन अब में 40 से लेकर 99 प्रतशित के दिव्यांगों को भी योजना का लाभ दिया गया। शुरू की गई निशुल्क बस सफर की इस योजनाओं से हजारों की की संख्या में दिवयांगों को लाभ होगा। सरकार की तरफ से जारी की गई योजना का दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। सरकार की तरफ से आए आदेशों की जिले के परिवहन विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप अहलावत ने भी पृष्टि की है। सुविधा केवल हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य बता दें कि प्रदेश सरकार की तरफ से 25 अगस्त 2008 को 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए परिवहन विभाग की बसों में निशुल्क यात्रा का प्रविधान किया था। यह योजना तभी से चली आ रही है। योजना के तहत 100 प्रतिशत दिव्यांग के साथ एक व्यक्ति भी उसके साथ निशुल्क सफर कर सकता है, लेकिन अब सरकार ने पूर्व की इस योजना में छूट दी है। हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की तरफ से जारी किए गए आदेशों में हरियाणा रोडवेज की साधारण बसों में 40 से प्रतिशत से ज्यादा दिवयांग को निशुल्क परिवहन सुविधा की बात कही गई है। जारी आदेशों में कहा गया है कि यह सुविधा केवल हरियाणा राज्य सीमा के भीतर ही हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य होगी। निशुल्क योजना का लाभ लेने के लिए दिव्यांग व्यक्ति को यूडीआई ( यूनिक डिसबिलिटी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड प्राप्त करना होगा। जो जरूरत पड़ने पर परिचालक व चेंकिग टीम को दिखाना होगा। विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना को दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। दिव्यांग शोकिन, यूनूस, जमशेद ने कहा कि दिव्यांग कई बार निशुल्क बस सफर की मांग कर चुकें हैं। लेकिन अब जाकर यह फैसला हुआ है। यह स्वागत योग्य है।

हरियाणा BJP का विशेष अभियान, मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की योजना

चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हरियाणा भाजपा ने प्रदेशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने “बारह साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” कार्यक्रम को लेकर प्रदेश समिति का गठन किया है। प्रदेश कार्यालय ‘पंचकमल’ से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह समिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। कार्यक्रमों के माध्यम से केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक ले जाने की रणनीति पर काम किया जाएगा। गठित समिति में प्रदेश सचिव राहुल राणा को संयोजक बनाया गया है, जबकि पूर्व प्रदेश सचिव मनीष यादव को सह-संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय बंसल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओबीसी मोर्चा अवनीत कौर तथा युवा मोर्चा कार्यकारिणी सदस्य विकास दहिया को सदस्य बनाया गया है। भाजपा संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह समिति प्रदेशभर में विभिन्न जनसंपर्क, संवाद और उपलब्धि आधारित कार्यक्रम आयोजित कर सकती है, ताकि प्रधानमंत्री मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को जनकल्याण और विकास के दृष्टिकोण से जनता के बीच प्रस्तुत किया जा सके।

छुट्टियों में राशन स्टॉक पर हरियाणा सरकार की नजर, खराब होने पर जिम्मेदार होगा स्कूल स्टाफ

फतेहाबाद/लुधियाना. भीषण गर्मी के बीच शिक्षा विभाग ने 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया है। छुट्टियों के साथ ही विभाग ने सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के स्टाक को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। विभाग ने सभी स्कूलों से मिड-डे मील में उपयोग होने वाले गेहूं, चावल, दाल, तेल सहित अन्य सामग्री का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही के कारण यदि कोई खाद्यान्न खराब हुआ तो संबंधित स्कूल स्टाफ जिम्मेदार माना जाएगा। शिक्षा विभाग के अनुसार अवकाश के दौरान स्कूल बंद रहेंगे, ऐसे में खाद्यान्न की सुरक्षित स्टोरेज सुनिश्चित करना जरूरी होगा। जिन स्कूलों में राशन अधिक मात्रा में बचा हुआ है या खराब होने की आशंका है, वहां से स्टाक तुरंत वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं से स्टाक का रिकॉर्ड निर्धारित समय में उपलब्ध करवाने को कहा है। अधिकारियों का मानना है कि गर्मी के मौसम में खाद्यान्न खराब होने का खतरा अधिक रहता है। बता दें कि पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील योजना के तहत भोजन दिया जाता है।