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घंटों कंप्यूटर काम से बढ़ता है स्वास्थ्य जोखिम, अपनाएं ये आसान सुरक्षा टिप्स

आज के डिजिटल दौर में कंप्यूटर और लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना आम बात हो गई है, लेकिन लंबे समय तक एक ही पोज़ीशन में बैठने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जन्म ले रही हैं। हाल ही में डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ऑफिस वर्क करने वाले युवा और खासकर महिलाएं फ्रोजन शोल्डर यानी कंधों के जाम होने की समस्या का तेजी से शिकार हो रही हैं। यह समस्या न केवल आपके कंधों बल्कि गर्दन, कमर और रीढ़ की हड्डी को भी प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं इस दर्द के कारण, लक्षण और बचाव के तरीक कामकाजी महिलाओं और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले युवाओं में फ्रोजन शोल्डर और शोल्डर पेन के मामले बढ़ रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि कई घंटे तक कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना, मोबाइल पर लगातार नजरें गड़ाए रखना और शारीरिक गतिविधियों में कमी इसके मुख्य कारण हैं।   फ्रोजन शोल्डर क्या है? फ्रोजन शोल्डर वह स्थिति है जिसमें कंधों की मांसपेशियां जकड़ जाती हैं और उनमें दर्द व सूजन होने लगती है। शुरुआत में यह परेशानी हल्की लगती है, लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर हो सकती है। महिलाएं ज्यादा प्रभावित क्यों? वरिष्ठ आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. आरएस बाजौरिया के अनुसार, महिलाओं में मोटापा, गर्दन-कंधों पर बढ़ती चर्बी और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण मांसपेशियां जल्दी कमजोर हो जाती हैं। कई महिलाएं तो पीठ तक हाथ नहीं ले जा पातीं, जिससे बालों में कंघी करना, कपड़े पहनना या हल्का सामान उठाना भी मुश्किल हो जाता है। लक्षण (Symptoms)     कंधों में दर्द और जकड़न     हाथ ऊपर या पीछे ले जाने में कठिनाई     हल्के वजन उठाने में तकलीफ     गर्दन और कमर तक दर्द फैलना कारण (Causes)     लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना     लगातार कंप्यूटर/मोबाइल स्क्रीन देखना     व्यायाम और स्ट्रेचिंग की कमी     मोटापा और बढ़ा हुआ वजन     सोते समय गलत पोजीशन बचाव के आसान तरीके (Prevention Tips) 1. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें – स्क्रीन से नजर हटाकर शरीर को स्ट्रेच करें। 2. सीधे बैठें – झुककर या तिरछा होकर कंप्यूटर/मोबाइल का उपयोग न करें। 3. नियमित व्यायाम करें – खासकर कंधे, गर्दन और रीढ़ को मजबूत करने वाले व्यायाम। 4. हाथ सिर के नीचे रखकर न सोएं – इससे नसों पर दबाव बढ़ सकता है। 5. वजन नियंत्रित रखें – मोटापा कंधों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। विशेषज्ञ की सलाह फ्रोजन शोल्डर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर फिजियोथेरेपी और हल्के व्यायाम से काफी हद तक आराम पाया जा सकता है।

पुराना AC भी देगा नई जैसी ठंडक, बस अपनाएं ये आसान मेंटेनेंस टिप्स

गर्मी जैसे-जैसे बढ़ती है, पुराने AC का असली टेस्ट शुरू हो जाती है. कई लोगों की शिकायत होती है कि AC चल तो रहा है, लेकिन पहले जैसी ठंडक नहीं दे रहा. कमरे को ठंडा होने में बहुत समय लग रहा है या फिर AC बस हवा फेंक रहा है, ठंडक नहीं. अच्छी बात ये है कि ज्यादातर मामलों में इसका समाधान आसान होता है, बस थोड़ी समझ और सही मेंटेनेंस की जरूरत होती है. कार की तरह AC की भी रेग्यूलर सर्विस सबसे पहले बात करते हैं सर्विसिंग की. अगर आपका AC एक-दो साल पुराना है और आपने हर साल सर्विस नहीं करवाई है, तो ठंडक कम होना लगभग तय है. AC के अंदर धूल, मिट्टी और गंदगी जमा हो जाती है, जिससे एयरफ्लो कम हो जाता है और कूलिंग पर असर पड़ता है. इसलिए हर सीजन की शुरुआत में प्रोफेशनल सर्विस कराना बेहद जरूरी है. सर्विसिंग के दौरान टेक्नीशियन कॉइल्स, फिन्स और ड्रेनेज सिस्टम को साफ करता है, जिससे AC की परफॉर्मेंस वापस बेहतर हो जाती है. फिल्टर क्लीनिंग अब बात आती है फिल्टर की सफाई की, जो आप खुद भी कर सकते हैं. AC का फिल्टर सबसे जल्दी गंदा होता है क्योंकि वही सारी धूल को रोकता है. अगर फिल्टर चोक हो गया, तो हवा ठीक से पास नहीं हो पाएगी और ठंडक कम हो जाएगी. पीक समर में आपको हर 10-15 दिन में फिल्टर निकालकर पानी से धोना चाहिए और पूरी तरह सूखने के बाद ही वापस लगाना चाहिए. ये छोटा सा काम आपके AC की कूलिंग को काफी हद तक सुधार सकता है. गैस की इश्यू कूलिंग कम होने का एक बड़ा कारण गैस भी होता है. AC में जो रेफ्रिजरेंट गैस होती है, वही असल में हवा को ठंडा करती है. अगर गैस कम हो गई है या लीक हो रही है, तो AC चाहे जितना चलाएं, ठंडक नहीं मिलेगी. ऐसे में आपको किसी एक्सपर्ट से गैस चेक करवानी चाहिए. अगर गैस कम है, तो उसे रिफिल किया जाता है, लेकिन उससे पहले ये देखना जरूरी है कि कहीं लीकेज तो नहीं है. अगर लीक है और आपने सिर्फ गैस भरवा ली, तो कुछ ही समय में वही समस्या फिर से आ जाएगी. गैस लीक लीकेज की समस्या को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती होती है. पाइप्स या कॉइल्स में छोटी सी दरार भी गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाल सकती है. एक अच्छा टेक्नीशियन पहले लीकेज ढूंढेगा, उसे ठीक करेगा और उसके बाद ही गैस भरेगा. इससे आपका AC लंबे समय तक सही कूलिंग देगा. एक और अहम चीज है आउटडोर यूनिट की सफाई. कई लोग सिर्फ इंडोर यूनिट पर ध्यान देते हैं, जबकि आउटडोर यूनिट भी उतनी ही जरूरी है. अगर आउटडोर यूनिट पर धूल या कचरा जमा है या उसके आसपास हवा का सही फ्लो नहीं है, तो हीट बाहर नहीं निकल पाएगी और कूलिंग कमजोर हो जाएगी. कोशिश करें कि आउटडोर यूनिट खुली जगह पर हो और उसके आसपास कोई रुकावट न हो. कमरे की कंडीशन कैसी हो? इसके अलावा, कमरे की कंडीशन भी बहुत मायने रखती है. अगर कमरे में बहुत ज्यादा धूप आती है या दरवाजे-खिड़कियां ठीक से बंद नहीं हैं, तो AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. मोटे पर्दे इस्तेमाल करें और कोशिश करें कि ठंडी हवा बाहर न जाए. इससे AC की एफिशिएंसी बढ़ती है. डायरेक्ट सनलाइट आती है तो ब्लैकआउट ब्लाइंड का यूज करना बेहतर होगा. पुराने AC में एक और ट्रिक काम आती है, थर्मोस्टेट सेटिंग्स को समझदारी से यूज करना. बहुत लोग AC को 16 डिग्री पर सेट कर देते हैं, ये सोचकर कि जल्दी ठंडा होगा. लेकिन इससे कंप्रेसर पर लोड बढ़ता है और बिजली भी ज्यादा खर्च होती है. 24-26 डिग्री का सेटिंग आमतौर पर सही रहता है, जिससे कूलिंग भी अच्छी मिलती है और AC पर दबाव भी कम रहता है. अगर आपका AC बहुत पुराना है, तो कभी-कभी पार्ट्स की हालत भी खराब हो जाती है, जैसे कंप्रेसर या फैन मोटर. ऐसे में बार-बार छोटी-मोटी रिपेयर कराने से बेहतर है कि एक बार सही से जांच करवा लें कि कौन सा पार्ट बदलने की जरूरत है. ये समझना जरूरी है कि AC मशीन है और उसे सही देखभाल चाहिए. समय पर सर्विसिंग, साफ फिल्टर, सही गैस लेवल और लीकेज फिक्सिंग, इन सब चीजों का ध्यान रखेंगे, तो आपका पुराना AC भी नई जैसी ठंडक दे सकता है. थोड़ी सी मेहनत और सही जानकारी से आप बिना नया AC खरीदे भी इस गर्मी में आराम से ठंडक का मजा ले सकते हैं.

अनानास के छिलकों से बनाएं हेल्दी ड्रिंक ‘टेपाचे’, गर्मियों में मिलेगा गजब का फायदा

अनानास खाने में बहुत अच्छा लगता है और गर्मियों में लोग उसका जूस भी खूब पीते हैं. मगर अनानास के छिलकों को अक्सर लोग कूड़ा समझकर फेंक देते हैं. अनानास के छिलके असल में पोषण से भरपूर होते हैं और यह हमारी गट हेल्थ के लिए गर्मियों में किसी जादू की तरह काम करते हैं. अगर आप भी अनानास के छिलकों को कचरा समझकर फेंक देते थे, तो अब से गलती न करें. अनानास के छिलकों से आप समर स्पेशल ड्रिंक बना सकते हैं, जो टेस्टी होने के साथ-साथ पेट के लिए भी फायदेमंद साबित होगी. अनानास के छिलकों से बनने वाली इस ड्रिंक को टेपाचे (Tepache) कहते हैं. यह मैक्सिकन फर्मेंटेड ड्रिंक अनानास के छिलकों और उसके सख्त हिस्से यानी कोर से बनाई जाती है. यह ड्रिंक हल्की फिजी होती है और कई लोग इसे सोडा का हेल्दी ऑप्शन मानते हैं. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए अनानास का वो हिस्सा इस्तेमाल होता है जिसे लोग अक्सर फेंक देते हैं. कैसे बनाते हैं टेपाचे अनानास के छिलकों, पानी और गुड़ से इस ड्रिंक को तैयार किया जाता है, इसे कुछ दिनों तक फर्मेंट होने दिया जाता है, जिससे इसमें हल्की नेचुरल गैस बन जाती है. इसका स्वाद हल्का मीठा, खट्टा और बेहद रिफ्रेशिंग होता है. टेपाचे के लिए सामग्री 1 अनानास के छिलके और कोर 2 लीटर पानी 1 कप गुड़ 1 दालचीनी स्टिक झटपट इस तरीके से बनाएं टेपाचे     सबसे पहले अनानास के छिलकों को अच्छी तरह धो लें.     एक बड़े कांच के जार में पानी, गुड़, दालचीनी और अनानास के छिलके डालें.     जार को ढककर 2-3 दिन के लिए कमरे के तापमान पर रखें.     जब इसमें हल्की फिज आने लगे, तब इसे छानकर फ्रिज में ठंडा करके पिएं. सेहत के लिए फायदेमंद है टेपाचे अनानास के छिलकों से बनने वाली ड्रिंक टेपाचे पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम देती है. अनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है.वहीं फर्मेंटेशन प्रोसेस इस ड्रिंक में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाती है, जो गट हेल्थ के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. गर्मियों में भारी या गैस वाली ड्रिंक्स की जगह इसे पीना शरीर को हल्का महसूस करा सकता है. प्रो टिप: टेपाचे बनाते समय कांच के जार का ही इस्तेमाल करें और इसे सीधा धूप में न रखें. 2-3 दिन बाद जब इसमें छोटे बुलबुले दिखने लगें, तो समझ जाइए कि आपकी प्रोबायोटिक ड्रिंक तैयार है.

गंजेपन से परेशान लोगों के लिए नुस्खा: प्याज और सरसों तेल से उग सकते हैं नए बाल

 गिरते बाल और गंजापन आजकल हर उम्र के लोगों के लिए काफी बड़ी समस्या बना हुआ है. इससे बचने के लिए या फिर बालों को वापिस उगाने के लिए लोग महंगे ट्रीटमेंट और शैंपू के पीछे भागते हैं लेकिन फिर भी मनमुताबिक रिजल्ट नहीं मिलते. सेलिब्रिटी हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने एक इंटरव्यू के दौरान इस समस्या के बारे में बताया कि यदि आपके बाल झड़ रहे हैं या आप नए बाल उगाना चाहते हैं तो महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय अपनी रसोई में मौजूद चीजों पर भरोसा करें. उनके अनुसार, बालों की ग्रोथ के लिए सही पोषण और सही तेल का चुनाव सबसे जरूरी है. प्याज और लहसुन का जादू हेयर स्टाइलिस्ट ने बताया कि बालों को दोबारा उगाने के लिए प्याज का रस सबसे ज्यादा असरदार हो सकता है. प्याज में मौजूद सल्फर स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और हेयर फॉलिकल्स को एक्टिव करता है. उन्होंने लहसुन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. उनके मुताबिक, जिन चीजों में 'आग' यानी थोड़ी तेजी या तीखापन होता है, वे स्कैल्प को स्टिमुलेट करने में मदद करती हैं. लहसुन का अर्क बालों की जड़ों में जाकर उन्हें मजबूती देता है और नए बाल उगने की प्रोसेस को तेज करता है. सरसों तेल की अहमियत आजकल लोग फैंसी और खुशबूदार तेलों के पीछे भागते हैं लेकिन स्टाइलिस्ट के अनुसार सरसों का तेल बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह तेल नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है और बालों को अंदरूनी पोषण देता है. अगर आप रोज बाल धोते हैं तो हल्का तेल रोज लगाना चाहिए. हालांकि उन्होंने साफ किया कि प्याज के रस और सरसों तेल का कॉम्बिनेशन हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर इस्तेमाल करना चाहिए. इससे बालों का झड़ना बंद होता है और उनकी चमक वापस आती है. फॉलो करें ये रूटीन इंटरव्यू में जावेद ने सलाह दी कि बालों की केयर को लेकर आपको डिसिप्लिन बनाना होगा. हफ्ते में 2 बार प्याज का रस और लहसुन का पेस्ट बालों की जड़ों में अच्छे से लगाएं. इसके बाद सरसों तेल से मसाज करें. यह रूटीन न केवल नए बाल उगाने में मदद करेगा बल्कि जो बाल मौजूद हैं उन्हें भी घना और काला बनाए रखेगा. अगर आप भी बालों की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह घरेलू और सस्ता नुस्खा आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.  

कई रोगों की अचूक दवा है फलों और सब्जियों का रस

प्रकृति ने ऐसी कई सब्जियां और फल हमें दिये हैं जिनके रस के निरन्तर प्रयोग से कैंसर, कुष्ठ रोग जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है बशर्ते हम उनका सेवन विशेषज्ञों के परामर्श से करें। हर व्यक्ति मौसमी फल और सब्जियों के रस से स्वस्थ रह सकता है। आंवले का रस आंवले में विटामिन सी सबसे अधिक पाया जाता है। आंवले का ताजा रस मूत्र संबंधी सभी शिकायतों में उपयोगी रहता है। दो-तीन महीनों तक आंवलों का ताजा रस पीने से दीर्घ की निर्बलता में लाभ मिलता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने, बहरापन दूर करने में भी यह रस लाभप्रद है। साथ ही एसिडिटी कम करने, गठिया, सफेद बालों का बढना रोकने, रक्त विकार, पीलिया, एवं हृदय रोगों में भी आंवले का जूस बहुत फायदेमंद होता है। चुकन्दर का रस चुकन्दर में पाया जाने वाला बिटिन नामक खास तत्व टयूमर एवं कैंसर की प्रकृति को शरीर से नष्ट करता है। यह तत्व शरीर में रोगों से लडने की क्षमता बढ़ाता है। इसीलिए खून की कमी होने पर एक कप की मात्रा में दिन में तीन बार इसके रस को पीने से लाभ होता है। गुर्दे संबंधी रोगों को दूर करने के लिए एक कप चुकन्दर का रस पीने से फायदा होता है। यह दिमागी गर्मी में भी फायदा करता है। गाजर का रस गाजर में विटामिन ए बहुतायत से पाया जाता है। इसीलिए गाजर का रस आंखों हेतु काफी फायदेमंद होता है। दो किलो गाजर का जूस एक-एक कप करके दिन में कई बार पीने से प्राथमिक अवस्था का कैंसर ठीक हो जाता है। गाजर के पत्तों का चार-चार बूंद रस गरम करके कान एवं नाक में डालने से सिरदर्द ठीक हो जाता है। निम्न रक्तचाप वाले रोगों के लिए भी यह रस फायदेमंद होता है। टिंडे का रस उच्च रक्तचाप वाले रोगों के लिए टिंडे के रस का सेवन करने से रक्तचाप सामान्य रहता है। हरी सब्जियों का रस बथुवा, पालक, मैथी, चैलाई, मूली इत्यादि सब्जियों में आयरन के अलावा कैल्शियम के लिए कच्चा ही प्रयोग में लाना ठीक रहता है। मिक्सी में थोड़े पानी के साथ पीसकर रस निकाला जाता है। मूली का रस पीलिया, बथुए का रस पथरी, पालक का रस पित्त और मैथी का रस पेचिश रोगों में काफी लाभदायक होता है। पेट संबंधी रोग भी उक्त रसों से दूर होते हैं। टमाटर का रस पके हुए टमाटरों का रस सुबह और शाम 20 ग्राम ताजे और कुनकुने पानी के साथ पीने से फोड़े फुंसी, एवं खुजली इत्यादि में लाभ होता है। इस रस के सेवन से मधुमेह रोगी के मूत्र में शक्कर की मात्रा सामान्य हो जाती है। इसके रस का बुखार में सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है। मुंह के छालों तथा मसूड़ों से रक्त बहने पर टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करते रहने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं और मसूड़ों से ख्ूान आना भी रूक जाता है। फूलगोभी का रस फूलगोभी के पत्तों को पकाकर खाने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है। इसके पत्तों को आंखों पर लगाने से आंखों की लाली ठीक हो जाती है। गला बैठ गया हो तो इसके पत्तों और डंठल को पानी में उबालकर गरारे करने से गला ठीक हो जाता है। प्याज का रस एक छोटे चम्मच प्याज के रस में बराबर पानी मिलाकर छोटे बच्चों को दिन में तीन बार पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। बीस ग्राम प्याज के रस में पचास ग्राम मिसरी मिलाकर प्रातः काल बीस दिन तक सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है। प्याज के रस की दो बूंदें कान में डालते रहने से बहरापन दूर हो जाता है। पीलिया रोग में दस ग्राम सफेद प्याज का रस, पांच ग्राम हल्दी, दस ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह-शाम खिलाने से लाभ होता है। सेब का रस सेब में विटामिन बी, फास्फोरस एवं लौह तत्व अधिक पाये जाते हैं। इसका रस पेट के रोगों में फायदा करता है। बुखार, अरूचि, अजीर्ण, हृदय एवं उदर रोगों में काफी लाभकारी होता है।  

हर उम्र में अलग होती है Vitamin-D की जरूरत, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें

क्या आप जानते हैं कि भारत में लगभग 80% आबादी विटामिन-डी की कमी से जूझ रही है? हमारी भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और धूप से बढ़ती दूरी इस समस्या का मुख्य कारण है। शरीर में विटामिन-डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही कमजोर नहीं होतीं, बल्कि बाल झड़ना, कमजोर इम्युनिटी और डिप्रेशन जैसी कई गंभीर बीमारियां भी घेरने लगती हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि एक दिन में हमारे शरीर को कितने विटामिन-डी की जरूरत होती है। आइए विटामिन-डी की सही मात्रा और इसकी कमी पूरी करने वाले फूड्स के बारे में जानें। रोज कितनी मात्रा में विटामिन-डी चाहिए? विटामिन-डी की जरूरत उम्र के हिसाब से हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकती है। इसकी मात्रा को आमतौर पर IU में मापा जाता है।     शिशु (0 से 1 वर्ष)- छोटे बच्चों को हर दिन लगभग 400 IU की जरूरत होती है।     बच्चे और वयस्क (1 से 70 वर्ष)- इस  उम्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को हर दिन लगभग 600 IU विटामिन-डी लेना चाहिए।     बुजुर्ग (70 वर्ष से ज्यादा)- उम्र बढ़ने के साथ शरीर की विटामिन अब्जॉर्ब करने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए उन्हें ज्यादा विटामिन-डी, लगभग 800 IU की जरूरत होती है। शरीर में विटामिन-डी बढ़ाने के लिए डाइट हालांकि, विटामिन-डी का सबसे बेहतरीन सोर्स सूरज की रोशनी ही है, लेकिन कुछ फूड्स भी विटामिन-डी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं-     फैटी फिश- मछली विटामिन-डी के सबसे बेहतरी सोर्स में से एक है। ट्राउट और साल्मन न केवल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है, बल्कि विटामिन-डी का भी पावरहाउस है।     अंडे- अंडे का पीला भाग विटामिन-डी का अच्छा सोर्स है। शाकाहारी लोग जो अंडा खाते हैं, उनके लिए विटामिन-डी बढ़ाने का यह एक बेहतरीन तरीका है।     सफेद मशरूम- मशरूम एकमात्र ऐसा प्लांट बेस्ड सोर्स है, जिसमें प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी होता है। हालांकि, मशरूम खरीदते समय UV-treated या High in Vitamin D लेबल वाले मशरूम चुनें, क्योंकि ये सूरज की रोशनी या यूवी किरणों के संपर्क में आने के कारण ज्यादा पोषक होते हैं।     फोर्टिफाइड दूध- बहुत कम फूड आइटम्स में प्राकृतिक रूप से यह विटामिन होता है, इसलिए कई डेयरी और नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स को फोर्टिफाई किया जाता है यानी ऊपर से विटामिन-डी मिलाया जाता है। ऐसे डेयरी प्रोडक्ट्स चुनें, जिनपर फोर्टिफाइड होने का लेबल हो।     ग्रीक योगर्ट- दही या ग्रीक योगर्ट न केवल प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, बल्कि कई ब्रांड इसे विटामिन-डी के साथ फोर्टिफाई भी करते हैं। यह पाचन के साथ-साथ हड्डियों की मजबूती के लिए भी शानदार है।  

फेक ऐप, फ्रॉड कॉल और मोबाइल चोरी पर Google का बड़ा वार, यूजर्स को मिलेगी ट्रिपल सुरक्षा

 नई दिल्ली गूगल ने एंड्रॉयड शो:आईओ एडिशन का लाइवस्ट्रीम किया है, जो कंपनी के एनुअल कॉन्फ्रेंस गूगल आईओ 2026 से करीब एक सप्ताह पहले किया है. गूगल ने एंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए आने वाले अपकमिंग फीचर और टूल्स की जानकारी दी है. गूगल की एनुअल कॉन्फ्रेंस 19-20 मई को होगी।  गूगल अब बैंकिंग स्कैम कॉल्स से बचाने के लिए न्यू फीचर तैयार कर रहा है. बैंकिंग स्कैम  में साइबर ठग खुद की पहचान बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों से अकाउंट की जानकारी हासिल करते हैं, ताकि उनके पैसे चुरा सकें. स्पूफिंग टेक्नोलॉजी की मदद से अक्सर लोगों को लगता है कि शायद बैंक से ही कॉल है।  गूगल ने अपने टूल को बेहतर करने के लिए कुछ चुनिंदा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ पार्टनरशिप कर रहा है. बैंकिंग फ्रॉड को रोकने के लिए कंपनी स्पूफिंग प्रोटेक्शन फीचर लेकर आ रही है।  फर्जी कॉल्स को खुद का काट देगा  यह फीचर पार्टनर बैंक के नाम पर यूज होने वाले फर्जी कॉल्स को अपने आप काट देगा. साथ ही यूजर्स को एक नोटिफिकेशन भी मिलेगा कि वह संभवतः एक स्कैम कॉल्स थी।   गूगल का यह न्यू फीचर सिर्फ उन यूजर्स को मिलेगा, जिनका स्मार्टफोन एंड्रॉयड 11 और उससे ऊपर के डिवाइसों के लिए रोलआउट किया जाएगा. कंपनी ने बताया है कि इस साल के अंत तक कई बैंकों को शामिल कर लिया जाएगा।  लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर  गूगल अपने लाइव थ्रेड डिटेक्शन फीचर को भी एक्सपेंड करने का ऐलान कर चुका है. यह फीचर ऐप्स के व्यवहार को एनालाइज करेगा और अगर कोई संदिग्ध एक्टिविटी मिलेगी तो उसे पकड़ा जा सकेगा. ऐसे में साइबर ठगों के ऐप्स पर लगाम लगेगी।  गूगल इसके लिए डाइनेमिक सिग्नल मॉनिटरिंग नाम की तकनीक का इस्तेमाल करती हैं. ये टेक्नोलॉजी किसी भी ऐप के द्वारा किए गए संदिग्ध पैटर्न और गतिविधियों को पहचान सकता है. साथ ही SMS फॉरवर्डिंग जैसी एक्टिविटी को भी देखता है।  डिवाइस चोरी होने से बचाएगा  गूगल एक और नया फीचर लेकर आ रहा है, जिसकी मदद से डिवाइस को चोरी से बचाया जा सकेगा. एक बार फोन को लोस्ट मार्क कर दिया गया तो चोर तब तक फोन का यूज नहीं कर पाएंगे जब तक उसको बायोमेट्रिक तरीके से अनलॉक नहीं किया जाता है. यह फीचर Android 17 डिवाइसों में डिफॉल्ट रूप से ऑन मिलेगा।  ऐप परमिशन और लोकेशन कंट्रोल करेगा  गूगल एक नया प्राइवेसी फीचर भी ला रहा है, जिसमें एक बटन होगा, जिसकी मदद से यूजर किसी ऐप को केबल तक अपनी सटीक लोकेशन देगा जब तक वह ऐप ओपन रहेगा। 

WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने वाला ऐप नहीं रहना चाहता. कंपनी अब इसे एक प्रीमियम प्लेटफॉर्म में बदलने की तैयारी कर रही है. अब कंपन WhatsApp Plus ला रही है. ये दरअसल एक सब्सक्रिप्शन सर्विस है जिसके लिए यूजर्स को पैसे देने होंगे. फिलहाल ये सब्सक्रिप्शन प्लान चुनिंदा आईफोन यूजर्स के लिए रोलआउट होना शुरू हो गया है. पिछले कई महीनों से इसकी चर्चा बीटा वर्जन में हो रही थी, लेकिन अब पहली बार कुछ यूजर्स को इसका एक्सेस मिलने लगा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि काफी समय तक एक फर्जी WhatsApp Plus वायरल होता रहा था. ये ऐप यूजर्स को एक्स्ट्रा फीचर्स दिलाने का दावा करता था, लेकिन बाद में य स्कैम ऐप निकला. लेकिन अब कंपनी खुद ही WhatsApp Plus ला रही है. कंपनी खुद ही लोगों को पहले WhatsApp Plus यूज करने से मना करती रही. कई यूजर्स के अकाउंट परमानेंट ब्लॉक भी हो गए. बहरहाल, कंपनी का नया WhatsApp Plus फीचर सिर्फ कुछ आईफोन यूजर्स को दिख रहा है और धीरे-धीरे बाकी लोगों तक पहुंचाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के पास WhatsApp का लेटेस्ट iOS वर्जन है, उन्हें सेटिंग्स में इसका ऑप्शन दिख सकता है. पैसे देकर मिलेगा क्या? व्हाट्सऐप प्लस का पूरा फोकस ऐप को ज्यादा पर्सनल और कस्टमाइज्ड बनाने पर है. यानी मैसेजिंग और कॉलिंग जैसी बेसिक सुविधाएं अभी भी मुफ्त रहेंगी, लेकिन जो लोग ऐप का लुक और फीचर्स बदलना चाहते हैं, उन्हें एक्स्ट्रा चीजें मिलेंगी. इस नए प्लान में यूजर्स को 18 नए थीम कलर मिलेंगे. अभी व्हाट्सऐप का ज्यादातर इंटरफेस हरे रंग का होता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन के बाद लोग पर्पल, ब्लू, रेड, यलो और कई दूसरे रंग चुन पाएंगे. ऐप के आइकन भी बदले जा सकेंगे. कंपनी करीब 14 नए ऐप आइकन देने वाली है. नए थीम्स, नए स्टिकर्स इसके अलावा प्रीमियम स्टिकर्स भी मिलेंगे जिनमें एनिमेटेड इफेक्ट होंगे. यानी स्टिकर भेजने का एक्सपीरियंस थोड़ा ज्यादा इंटरैक्टिव और विजुअल होगा. कंपनी नए रिंगटोन भी दे रही है ताकि व्हाट्सऐप कॉल बाकी ऐप्स से अलग महसूस हो. एक बड़ा बदलाव पिन चैट्स में देखने को मिलेगा. अभी आम यूजर्स सिर्फ 3 चैट पिन कर सकते हैं, लेकिन WhatsApp Plus लेने के बाद 20 चैट तक पिन की जा सकेंगी. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा काम या बिजनेस चैट्स होती हैं, उनके लिए यह फीचर उपयोगी माना जा रहा है. व्हाट्सऐप ग्रुपिंग और चैट मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ऑफिस नाम से एक चैट लिस्ट बनाई है, तो वह एक साथ सभी ऑफिस चैट्स का थीम, नोटिफिकेशन साउंड और कॉल ट्यून बदल सकेगा. अभी यह सब अलग-अलग करना पड़ता है. 300 रुपये प्रति माह सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप में इसकी कीमत करीब 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है. यानी भारतीय रुपये में लगभग 280 रुपये के आसपास. अलग-अलग देशों में कीमत अलग हो सकती है. कुछ जगहों पर कंपनी ट्रायल भी दे सकती है. हालांकि अभी भारत में इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है. लेकिन टेक रिपोर्ट्स मान रही हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में यह ज्यादा यूजर्स तक पहुंच सकता है. दिलचस्प बात यह भी है कि मेटा अब धीरे-धीरे अपने सभी प्लेटफॉर्म पर पेड फीचर्स बढ़ा रहा है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पहले से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. अब व्हाट्सऐप भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है. फ्यूचर में जरूरी फीचर्स भी पेड कर सकती है कंपनी इस नए मॉडल को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि आज थीम और स्टिकर्स पैसे में मिल रहे हैं, लेकिन फ्यूचर में कहीं जरूरी फीचर्स भी पेड न हो जाएं. आम तौर पर कंपनियां पैसे कमाने के लिए ये स्ट्रैटिजी अपनाती आई हैं. नया सब्सक्रिप्शन ला कर फ्री में मिलने वाले जरूरी फीचर्स पेड कर देती हैं.

AI डीपफेक पर सरकार सख्त, 2 घंटे में कंटेंट हटाने का नया नियम लागू

दरअसल पिछले कुछ सालों में AI डीपफेक और फर्जी इंटीमेट तस्वीरों का मामला तेजी से बढ़ा है. कई लोगों की तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए गए. सरकार सख्त, लेकिन कंपनियां अब भी कर रहीं हैं लापरवाही! खासकर महिलाओं और लड़कियों को इसका सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. कई मामलों में ब्लैकमेलिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग और मानसिक उत्पीड़न तक की शिकायतें सामने आईं. AI टूल्स की वजह से अब किसी की तस्वीर लेकर कुछ ही मिनटों में नकली वीडियो या फोटो बनाना आसान हो गया है. इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने 2026 में आईटी रूल्स को और सख्त किया. नए नियमों के तहत अगर कोई यूजर किसी प्लेटफॉर्म पर गैर-सहमति वाली इंटीमेट फोटो या डीपफेक कंटेंट की शिकायत करता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को बहुत तेजी से कार्रवाई करनी होगी. कई मामलों में 2 घंटे के अंदर कंटेंट हटाने की बात कही गई है, जबकि सरकारी या कोर्ट ऑर्डर वाले मामलों में 3 घंटे के अंदर एक्शन लेना पड़ सकता है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक सराकरी ऑफिशियल्स ने कहा है कि अब करीब 75% ऐसे कंटेंट को शिकायत मिलने के दो घंटे के अंदर हटाया जा रहा है. पहले यही प्रक्रिया कई बार 24 घंटे से लेकर कई दिनों तक चलती थी. अब प्लेटफॉर्म्स को तेज मॉडरेशन सिस्टम, AI डिटेक्शन टूल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम बनानी पड़ रही है. सरकार ने AI कंटेंट पर लेबल भी किया था मैंडेटरी नए नियम सिर्फ कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं हैं. सरकार चाहती है कि AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल भी किया जाए ताकि लोग समझ सकें कि फोटो या वीडियो असली नहीं है. कई नियमों में यह भी कहा गया है कि सिंथेटिक या AI जनरेटेड मीडिया पर मार्किंग जरूरी होगी. एक बड़ा बदलाव यह भी है कि अब प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. अगर कोई कंपनी शिकायत के बाद भी ऐसे कंटेंट को हटाने में लापरवाही करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. भारत सरकार का फोकस अब पहले हटाओ, बाद में जांच करो वाले मॉडल पर दिख रहा है क्योंकि डीपफेक कंटेंट बहुत तेजी से वायरल हो जाता है. रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पुराने नियमों में दिया गया समय बहुत लंबा था और तब तक ऐसा कंटेंट तेजी से वायरल हो जाता था. रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और दूसरे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी मॉडरेशन टीम और AI सिस्टम को और मजबूत किया है ताकि डीपफेक, मॉर्फ्ड फोटो और रिवेंज पोर्न जैसे कंटेंट को जल्दी पकड़ा जा सके. सरकार का फोकस खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वाले कंटेंट पर है. अधिकारियों ने यह भी माना कि सिर्फ AI पर भरोसा करना आसान नहीं है क्योंकि कई मामलों में गलत तरीके से भी कंटेंट फ्लैग हो सकता है. इसलिए कुछ मामलों में मानव समीक्षा भी की जाती है, जिससे थोड़ी देरी हो सकती है. लेकिन सरकार चाहती है कि ज्यादातर मामलों में तुरंत कार्रवाई हो ताकि पीड़ित को कम से कम नुकसान पहुंचे. ब्रिटेन में कंपनियों पर जुर्माना का प्रोविजन सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश अब इस तरह के कंटेंट पर सख्ती बढ़ा रहे हैं. ब्रिटेन में भी सरकार ने टेक कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर रिवेंज पोर्न या डीपफेक इंटीमेट कंटेंट को तय समय में नहीं हटाया गया तो भारी जुर्माना या प्लेटफॉर्म ब्लॉक तक हो सकता है. एक और बड़ी चिंता यह है कि AI टूल्स अब आम लोगों तक पहुंच चुके हैं. रिसर्च में सामने आया है कि हजारों ऐसे मॉडल इंटरनेट पर मौजूद हैं जिनसे किसी की फर्जी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं. कई टूल इतने आसान हो चुके हैं कि बिना टेक्निकल जानकारी वाला व्यक्ति भी इन्हें इस्तेमाल कर सकता है. यही वजह है कि सरकारें अब सोशल मीडिया कंपनियों से सिर्फ शिकायत सुनने की उम्मीद नहीं कर रहीं, बल्कि पहले से ऐसे कंटेंट को पकड़ने वाली टेक्नोलॉजी लगाने का दबाव बना रही हैं. आने वाले समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे प्लेटफॉर्म पर AI आधारित मॉनिटरिंग और ज्यादा बढ़ सकती है. हालांकि इस पर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत तेजी से कंटेंट हटाने के नियम का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है और इससे फ्री स्पीच पर असर पड़ सकता है. लेकिन दूसरी तरफ साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि डीपफेक और गैर-सहमति वाले इंटीमेट कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं क्योंकि इस