samacharsecretary.com

ऐपल ने लॉन्च किया स्लीप एपनिया नोटिफिकेशन फीचर: अब Apple Watch से मिलेगी नींद की बीमारी की जानकारी

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल ने भारत में न्यू हेल्थ फोक्स्ड फीचर को पेश कर दिया है. इस न्यू फीचर की मदद से यूजर्स को खर्राटे से संबंधित सांस वाली बीमारी की जानकारी मिलेगी, जिसको स्लीप एपनिया कहा जाता है. कंपनी ने अपनी ऐपल वॉच में स्लीप एप्निया नोटिफिकेशन फीचर को शामिल किया है, जो यूजर्स की हेल्थ को ट्रैक करेगा और उसकी जानकारी देगा. साथ ही कंपनी ने बताया है के एयरपॉड्स प्रो 3 में क्लिनिकली वैलिडेटेड हियरिंग टेस्ट फीचर दिया गया है. इसकी मदद से यूजर्स अपने घर बैठे ही सुनने की क्षमता की जांच कर सकेगा. इंसानों की जिंदगी अहम है नींद कंपनी ने बताया है कि नींद इंसानों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है. इसका असर इंसानों की जिंदगी और सेहत दोनों पर ही दिखाई देता है. स्लीप एप्निया क्या होती है? स्लीप एप्निया, एक आम बीमारी है. इसमें सोते समय कुछ पल के लिए सांस रुक जाती है, जिससे शरीर में पर्याप्त आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है. जानकारी के मुताबिक, एक अनुमान है कि पूरी दुनिया में इस बीमारी से 1 अरब से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. स्लीप एप्निया की वजह से होने वाले नुकसान स्लीप एप्निया का अगर समय रहते इलाज ना कराया जाए तो यह गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है. स्लीप एप्निया की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और दिल से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं. स्लीप एप्निया को कैसे करता है ट्रैक ऐपल वॉच के अंदर एक खास फीचर शामिल किया है, जिसका काम ब्रीदिंग डिस्टर्बेसेज को चेक करना है. यह फीचर एक्सेलेरोमीटर की मदद से कलाई की छोटी-छोटी एक्टिविटियों को पहचानकर नींद के दौरान सांस लेने के दौरान सामान्य पैटर्न में होने वाली रुकावटों को पहचानता है. 30 दिन में ऐपल वॉच इन डेटा का एनालाइज करेगा और अगर स्लीप एप्निया के लगातार संकेत मिलते हैं, तो उसके बाद यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजा जाएगा. इसके बाद शख्स को डॉक्टर से संपर्क करना होगा और आगे की जांच करानी होगी.

भीषण गर्मी में राहत: कोंकण की पारंपरिक ‘फूटी कढ़ी’ बन सकती है नेचुरल कूलर

चिलचिलाती धूप, गर्म हवा के थपेड़े और 45 डिग्री के पार जाता तापमान… देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. घर से बाहर निकलते ही शरीर पसीने से भर जाता है, जिसकी वजह से कुछ ही देर में थकान होने लगती है. धूप गला सुखाकर सारी एनर्जी छीन लेती है. इस तपिश भरे मौसम में लोगों को सिर्फ AC या ठंडा पानी पीने से ही राहत नहीं मिलती है. ऐसे में वो लोग देसी चीजों से शरीर को अंदर से ठंडा रखने की कोशिश करते हैं. अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं, तो मशहूर शेफ संजीव कपूर की बताई कोंकण की ट्रेडिशनल ड्रिंक फूटी कढ़ी आपके लिए किसी  नेचुरल कूलर की तरह काम करेगी. शेफ संजीव ने बताया कि पीढ़ियों से कोंकण इलाके में लोग गर्मियों के दौरान इस हल्की खट्टी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक को पीते आ रहे हैं. कोकुम से बनने वाली ये देसी ड्रिंक न सिर्फ स्वाद में शानदार होती है, बल्कि शरीर को ठंडा रखने और गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है. फूटी कढ़ी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स:     15-20 कोकुम की पंखुड़ियां     2-3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई     2-3 बड़े चम्मच ताजा हरा धनिया     1 बड़ा चम्मच चीनी     स्वादानुसार नमक     2 छोटी चम्मच घी     1 छोटी चम्मच राई     आधी छोटी चम्मच हींग बनाने का तरीका:  1. सबसे पहले कोकुम की पंखुड़ियों को एक बाउल में डालें और उसमें 3 कप पानी मिलाकर लगभग 35-40 मिनट के लिए छोड़ दें. 2. अब इस पानी को छान लें. इसमें हरी मिर्च, धनिया, चीनी और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. 3. एक पैन में घी गर्म करें. उसमें राई डालें. जब राई चटकने लगे तो उसके बाद उसमें हींग डालकर हल्का सा भून लें. 4. इस तड़के को कोकुम वाले मिक्स में डालें और अच्छी तरह मिला लें. 5. अब इसे गिलास में बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. गर्मियों में क्यों फायदेमंद है ये ड्रिंक? 1. कोकुम की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए ये गर्मी और लू से राहत दिलाकर शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद कर सकता है. 2. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं. 3. फूटी कढ़ी एक बहुत ही हल्की ड्रिंक है और पचाने में आसान होती है. इसे खाने के साथ लेने से पेट को आराम मिल सकता है. 4. तेज गर्मी में होने वाली थकान और सुस्ती को कम करने के लिए भी ये ड्रिंक काफी फायदेमंद मानी जाती है.  

HMD Vibe 2 5G भारत में लॉन्च, 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ

HMD ने भारत में गुरुवार को अपना नया स्मार्टफोन HMD Vibe 2 5G लॉन्च कर दिया है. यह पिछले साल आए HMD Vibe 5G का अपग्रेडेड वर्जन है. इस नए फोन में आपको 6.7 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. वहीं बैटरी इसकी सबसे बड़ी खासियत है क्योंकि इसमें 6000mAh की दमदार बैटरी मिलती है. साथ में 18W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है. आइए डिटेल में जानते हैं और इस फोन में हमें क्या-क्या देखने को मिलता है. HMD Vibe 2 5G की कीमत और उपलब्धता भारत में HMD Vibe 2 5G की कीमत काफी किफायती रखी गई है. इसका 4GB RAM + 64GB स्टोरेज वाला वेरिएंट ₹10,999 में मिलता है. वहीं अगर आपको थोड़ा ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो 128GB वाला वेरिएंट भी उपलब्ध है. इसकी कीमत ₹11,999 है. इसमें RAM भी आपको 4GB ही मिलता है. कलर ऑप्शन्स की बात करें तो ये फोन Cosmic Lavender, Nordic Blue और Peach Pink जैसे आकर्षक रंगों में आता है. फिलहाल यह Flipkart पर आसानी से खरीदने के लिए उपलब्ध है. HMD Vibe 2 5G के फीचर्स HMD Vibe 2 5G में डुअल सिम (Nano + Nano) सपोर्ट मिलता है और यह Android 16 पर चलता है. इसमें आपको 6.7 इंच का HD+ डिस्प्ले मिलता है. खास बात यह है कि इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट दिया गया है, जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग काफी स्मूद महसूस होती है. डिवाइस को IP64 रेटिंग भी मिली हुई है. यानी यह धूल और हल्की पानी की छींटों से काफी हद तक सेफ रहता है. परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें ऑक्टा-कोर Unisoc प्रोसेसर दिया गया है. फोन में 4GB RAM स्टैंडर्ड मिलता है और स्टोरेज के लिए आपको 128GB तक का ऑप्शन मिलता है. कैमरा की बात करें तो HMD Vibe 2 5G में AI सपोर्ट वाला रियर कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है जो LED फ्लैश के साथ आता है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. HMD Vibe 2 5G में आपको एक बड़ी 6000 mAh की बैटरी मिलती है. साथ ही इसमें 18W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट दिया गया है और अच्छी बात ये है कि चार्जर बॉक्स में ही मिल जाता है, अलग से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. कनेक्टिविटी की बात करें तो इसमें Bluetooth 5.0, Wi-Fi 5 और USB Type-C पोर्ट दिया गया है, जिससे डेटा ट्रांसफर और कनेक्टिविटी दोनों ही स्मूद रहती हैं.

गूगल इवेंट में iPhone का इस्तेमाल वायरल, ‘Gemini Spark’ फीचर भी पेश

गूगल का एनुअल डेवलपर कॉन्फ्रेंस Google I/O 2026 की शुरुआत हो चुकी है. इस इवेंट के दौरान कंपनी AI एजेंट, यूट्यूब न्यू फीचर, जीमेल न्यू फीचर्स और AI वीडियो मेकर आदि का ऐलान किया है. लेकिन लाइव इवेंट के दौरान कंपनी ने डेमो के लिए iPhone का यूज किया है, जो मूमेंट इंटरनेट वायरल हो चुका है. गूगल इवेंट के दौरान जब न्यू पर्सनल एआई एजेंट जेमिनाई स्पार्क के बारे में बताया जा रहा था. तब डेमो के दौरान ऐपल का लेटेस्ट हैंडसेट iPhone 17 Pro का यूज किया गया है, जबकि गूगल के पास खुद का फ्लैगशिप हैंडसेट है. देखने में यह मामूली गलती लगती है, लेकिन इंटरनेट पर यह मूमेंट तेजी से वायरल हुआ. गूगल खुद कई बार पिक्सल हैंडसेट को लेकर दावे कर चुका है कि उसको AI युग के लिए तैयार किया है. कंपनी कुछ साल साल से लगातार अपने पिक्सल हैंडसेट को AI फीचर्स के साथ लोडेड करके दे रहा है. iPhone 17 Pro पर किया गया लाइव डेमो कुछ घंटों के अंदर iPhone 17 Pro पर किया गया लाइव डेमो का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया. लाखों लोगों ने देखा. कई यूजर्स ने कहा कि इसके लिए कंपनी खुद का पिक्सल 10 सीरीज का यूज कर सकती थी. आईफोन के लिए AI गूगल पहले ही जानकारी शेयर कर चुका है कि वह अपने Gemini का अलग वर्जन तैयार कर रहा है. यह वर्जन सीरी के साथ काम करेगा, हालांकि यह कब तक लॉन्च होगा, उसकी कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी है. गूगल जेमिनाई स्पार्क क्या है? गूगल इवेंट के दौरान बताया गया है कि जेमिनाई स्पार्क एक पर्सनल AI एजेंट है. यह जेमिनाई ऐप के अंदर मिेगा, जो यूजर्स के प्रॉम्प्ट पर काम करेगा. यह लॉन्ग और मुश्किल टास्क को बैकग्राउंडम में कंप्लीट करता है और यूजर्स को बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा. इसको Gmail, Docs और दूसरे Google Workspace ऐप्स के साथ इंटीग्रेट किया है. इसको पहले अमेरिकी यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा.

Apple का बड़ा दावा: ऐप स्टोर पर 18 हजार करोड़ रुपये की फ्रॉड डील्स ब्लॉक

ऐपल ने एक बड़ा दावा किया है और बताया है कि उसने बीते एक साल में करोड़ों रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया है और लोगों की मेहनत की कमाई को ठगे जाने से बचाया है. ये जानकारी ऐपल न्यूजरूम पर शेयर की है. ऐप स्टोर ने ट्रांजैक्शन में 2.22 बिलियन डॉलर (करीब 18 हजार करोड़ रुपये) से ज्यादा की धोखाधड़ी को रोका है. कंपनी ने बीते छह साल में 11.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा के फ्रॉड को रोकने में सफलता हासिल की है. हर सप्ताह करोड़ों विजिटर्स आते हैं ऐपल ने बताया है कि 175 देशों के ऐप स्टोर पर हर सप्ताह करीब 85 करोड़ से ज्यादा विजिटर्स आते हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए ऐपल का कहना है कि वह स्कैम, खतरनाक ऐप्स, फर्जी रिव्यू और पेमेंट फ्रॉड पकड़ने के लिए रिव्यू टीम और एडवांस मशीन लर्निंग सिस्टम का यूज करते हैं. 2025 में आए 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन ने बताया ह कि ऐप रिव्यू टीम ने साल 2025 में 91 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन प्रोसेस किए और 3 लाख नए डेवलपर्स को ऑनबोर्ड किया है. फिर ऐप स्टोर गाइडलाइन्स का उल्लंघन करने पर करीब 20 लाख से ज्यादा ऐप सबमिशन रिजेक्ट किए हैं. इनमें 12 नए ऐप्स और 8 लाख ऐप अपडेट भी शामिल रहे हैं. रिव्यू टीम में इंसान और AI करते हैं काम कंपनी ने आगे बताया है कि उनके रिव्यू टीम में इंसानों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) बेस्ड सिस्टम भी काम करता है. ये सिस्टम फास्ट तरीके से खतरनाक ऐप्स की पहचान करता है और फिर उनको ब्लॉक करने में मदद करता है. कई ऐप ने बाद में बदला अपना नेचर ऐपल ने रिपोर्ट में बताया है कि 59 हजार ऐसे ऐप्स भी रिमूव किए जा चुके हैं, जो शुरुआत में गेम या सामान्य यूटिलिटी के रूप में मंजूर किए थे. बाद में उनको फ्रॉड प्लेटफॉर्म में बदल दिया गया.   लाखों अकाउंट्स को किया जा चुका है बंद अमेरिका कंपनी ने बताया है कि कई साइबर ठग बॉट नेटवर्क और फर्जी अकाउंट की मदद से ऐप रैंकिंग में हेरफेर, स्पैम और नकली रिव्यू पोस्ट करने की कोशिश करते हैं. इसको लेकर कंपनी बता चुकी है कि वह साल 2025 में 1.1 बिलियन फर्जी अकाउंट बनाने की कोशिश को ब्लॉक कर चुकी है. बच्चों की सेफ्टी वाले नियम तोड़े गए Apple ने ये भी बताया है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए बनाए गए नियमों को तोड़ने पर Kids कैटेगरी के 5 हजार से ज्यादा ऐप्स को रिजेक्ट किया जा चुका है. पहले ऐप्स ने स्क्रीन टाइम और आस्क टू बाय जैसे पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स का भी जिक्र किया, फिर इनकी मदद से माता-पिता बच्चों की ऐप एक्टिविटी और शॉपिंग पर नजर रखते हैं.

गर्मी में बच्चों की सेहत का ख्याल: डाइट में शामिल करें ये ठंडक देने वाले फूड्स

 गर्मियों में तापमान बढ़ते ही बच्चों और बुजुर्गों के लिए की सेहत का बहुत ख्याल रखना पड़ता है. जैसे-जैसे सूरत की किरणें आग बरसाना शुरू करती हैं, वैसे-वैसे ही इसका असर बच्चों पर देखने को मिलने लगता है. तेज धूप, उमस और गर्म हवाओं की वजह से बच्चे जल्दी थकने लगते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं और कई बार उनके शरीर में पानी की कमी भी होने लगती है. बाहर खेलते-कूदते समय उनका शरीर बहुत जल्दी ही डिहाइड्रेट होता है, इसलिए इस मौसम में उनकी डाइट सही होना बेहद जरूरी है. ऐसे में माता-पिता की सबसे बड़ी टेंशन ये होती है कि आखिर बच्चों को क्या खिलाया जाए. अगर आप भी प्रचंड गर्मी में बच्चों के लिए ऐसा डाइट चार्ट ढूंढ रहे हैं, जो उन्हें एनर्जी दे, उनके शरीर को ठंड रखे और उनके शरीर में पानी की बिल्कुल भी कमी न होने दे तो ये खबर आपके लिए है. आज हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो गर्मियों में बच्चों की डाइट में शामिल करना हर माता-पिता के लिए जरूरी है. तरबूज: लिस्ट में सबसे पहला नाम तरबूज का आता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. इसे खाने से बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होती और उन्हें ताजगी महसूस होती है. साथ ही इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं. खीरा: खीरा भी गर्मियों में खाना बहुत अच्छा माना जाता है. ये न केवल बड़ों के लिए बल्कि बच्चों के लिए भी हेल्दी होता है. इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो बॉडी को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसे सलाद या हल्के नमक के साथ स्नैक की तरह उनकी डाइट में शामिल किया जा सकता है. दही चावल: आप बच्चों की डाइट में दही और चावल भी शामिल कर सकते हैं. दही और चावल का कॉम्बिनेशन तपती गर्मी में काफी राहत देता है. ये पेट को ठंडा रखता है और पाचन भी बेहतर बनाता है. बच्चों को ये खाने में टेस्टी भी लगता है और उनके पेट के लिए हल्वा भी रहता है. नारियल पानी: गर्मी में बच्चे जब खेलते हैं तो उनके शरीर से खूब पसीने बहते हैं, जिसकी वजह से जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं और वो डिहाइड्रेटेड महसूस करते हैं. नारियल पानी इनकी कमी पूरी करने में मदद करता है. इसमें नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो बच्चों को एक्टिव बनाए रखते हैं और पानी की कमी भी पूरी करते हैं. छाछ: छाछ पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और खाना भी आसानी से पचता है. इसमें कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छे होते हैं. नींबू पानी: आप अपने बच्चों को नींबू पानी भी दे सकते हैं. नींबू पानी बनाकर रख लें और जब भी वो बाहर से खेलकर या स्कूल से वापस आएं तो उन्हें पिला दें. गर्मी में बच्चों के लिए शानदार ड्रिंक है. इसमें विटामिन सी होता है जो शरीर को तरोताजा रखने में मदद करता है. इसे हल्का मीठा बनाकर बच्चों को आसानी से दिया जा सकता है. गुलकंद: गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलकंद शरीर की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसे दूध में मिलाकर बच्चों को दिया जा सकता है. ये पेट को भी आराम पहुंचाता है. बेल का शरबत: बेल का फल शरीर को ठंडक देने के लिए जाना जाता है. इसका शरबत बच्चों को गर्मी और लू से बचाने में मदद कर सकता है. साथ ही ये पेट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. टमाटर: लिस्ट में आखिरी नाम टमाटर का है. इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसे सलाद के रूप में बच्चों की डाइट में शामिल किया जा सकता है. ये शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है.

अंडा, चिकन या मटन: किसका प्रोटीन सबसे जल्दी पचता है? जानें सही जवाब

नॉन-वेजिटेरियन लोग प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए अपनी डाइट में अंडा, चिकन या मटन को शामिल करते हैं. कई लोग दिन भर में 10-20 अंडे, 500-800 ग्राम चिकन मटन खा लेते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन आपका पेट सबसे जल्दी और आसानी से पचा पाता है? दरअसल, डाइजेशन के मामले में हर प्रोटीन का असर शरीर पर अलग होता है लेकिन अक्सर लोग ज्यादा प्रोटीन के चक्कर में ऐसा फूड चुन लेते हैं जिसे पचाने में पेट को भारी मेहनत करनी पड़ती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इन तीनों में से कौन सा प्रोटीन सोर्स सबसे जल्दी पचता है. अंडे के प्रोटीन को समझें हेल्थलाइन के मुताबिक, जब बात सबसे जल्दी और पूरी तरह से पचने वाले प्रोटीन की आती है तो अंडा इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर में अंडे को 1.0 रेटिंग मिली है जो सबसे बेस्ट मानी जाती है. इसका मतलब है कि अंडे का प्रोटीन खाने के बाद शरीर इसे बहुत तेजी से और आसानी से तोड़कर अवशोषित कर लेता है. 1 पूरे अंडे को पचने में 2 से 3 घंटे का समय लगता है. चिकन ब्रेस्ट अंडे के बाद चिकन तेजी से डाइजेस्ट होता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकन ब्रेस्ट में फैट की मात्रा बहुत कम यानी न के बराबर होती है. लीन मीट होने की वजह से पेट को इसे ब्रेकडाउन करने में अधिक समय नहीं लगता. मटन की तुलना में चिकन काफी हल्का होता है और इसका प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी स्कोर भी लगभग 1.0 के करीब होता है. यदि आपका डाइजेशन थोड़ा कमजोर भी है तो भी उबला या ग्रिल्ड चिकन पेट पर भारी नहीं पड़ता. चिकन को पूरी तरह पचने में 2.5 से 3.5 घंटे का समय लगता है. मटन पचने में लगती है देरी मटन यानी रेड मीट प्रोटीन का एक बहुत ही रिच सोर्स है लेकिन इसे पचाना सबसे मुश्किल काम है. डाइजेशन टाइमलाइन रिपोर्ट बताती है कि हाई-फैट और कॉम्प्लेक्स मॉलिक्यूल्स वाले रेड मीट जैसे मटन को पूरी तरह पचने में काफी लंबा समय लगता है. मटन में सैचुरेटेड फैट और डेंस मसल्स फाइबर्स होते हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए पेट के एसिड और एंजाइम्स को कई घंटों तक लगातार काम करना पड़ता है. इसलिए रात के समय मटन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. मटन या रेड मीट को पचने में 4 से 6 घंटे या उससे अधिक का समय लग सकता है.

गर्मी में ठंडक का शाही उपाय: घर पर बनाएं केसर-पिस्ता शरबत

गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए लोग अक्सर मार्केट में मिलने वाले पैक्ड जूस या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में अगर आप बिना चीनी के कुछ बेहद शाही, पौष्टिक और रिफ्रेशिंग ट्राई करना चाहते हैं तो घर पर बनाएं केसर-पिस्ता का यह खास शरबत. 2 हजार रुपये किलो मिलने वाले प्रीमियम केसर और पिस्ता से तैयार यह होममेड ड्रिंक आपके शरीर को अंदर से AC जैसी ठंडक देगी. यह न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि डायबिटीज के मरीजों और वेट लॉस करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन समर ड्रिंक है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और क्विक रेसिपी.केसर-पिस्ता शरबत रेसिपी केसर-पिस्ता शरबत बनाने की सामग्री पिस्ता: 1/2 कप (बिना नमक वाले) केसर के धागे: 15-20 (एक चम्मच गुनगुने पानी या दूध में भीगे हुए) दूध: 1 लीटर (लो-फैट या टोंड) हरी इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच भीगा हुआ बादाम गोंद (Almond Gum): 2 चम्मच (वैकल्पिक, एक्स्ट्रा ठंडक के लिए) मीठे के लिए नेचुरल विकल्प: 1/2 कप धागे वाली मिश्री का पाउडर या शहद/स्टीविया (स्वादानुसार) बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का तरीका सबसे पहले पिस्ता को 2 से 3 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद उनका छिलका उतार लें. छिले हुए पिस्ता को मिक्सी के जार में डालें और थोड़े से ठंडे दूध के साथ पीसकर एकदम स्मूथ और बारीक पेस्ट बना लें. अब एक भारी तले वाले बर्तन में दूध को उबलने के लिए रखें. जब दूध में एक उबाल आ जाए, तो आंच धीमी कर दें और इसमें तैयार किया हुआ पिस्ता का पेस्ट मिला दें. दूध को लगातार चलाते हुए 5-7 मिनट तक पकाएं. अब इसमें भीगा हुआ केसर (रंग और खुशबू के लिए) और हरी इलायची पाउडर डालें. अगर आप धागे वाली मिश्री का इस्तेमाल कर रहे हैं (जो पेट के लिए ठंडी होती है) तो इस स्टेज पर मिला लें. अगर शहद या स्टीविया का उपयोग कर रहे हैं तो दूध के पूरी तरह ठंडा होने के बाद मिलाएं. जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे रूम टेम्परेचर पर आने दें. इसके बाद शरबत को 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. सर्विंग ग्लास में बर्फ के टुकड़े और भीगा हुआ बादाम गोंद डालें. ऊपर से चिल्ड केसर-पिस्ता शरबत डालकर ठंडे-ठंडे स्वाद का आनंद लें.

गर्मी में पेट के लिए रामबाण: चुकंदर-राई कांजी बनाने की आसान रेसिपी

 उत्तर भारत में चिलचिलाती गर्मी दस्तक दे चुकी है और तेज धूप और लू कहर बनकर लोगों को सता रही है. इस मौसम में अक्सर हमारा पेट सुस्त पड़ जाता है, भूख कम लगती है और कुछ ठंडा-खट्टा पीने का मन करता है. आज के समय में लोग पेट को ठीक रखने के लिए बाजार के महंगे प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स या डिब्बाबंद जूस की तरफ भागते हैं, मगर हमारी रसोई में छुपा एक पुराना खजाना आपकी इस समस्या का रामबाण इलाज है. रसोई में मौजूद कुछ चीजें पेट से जुड़ी बीमारियोंं में बहुत असरदार साबित होती हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. गर्मी में शरबत, जूस के अलावा कांजी भी लोग खूब पीते हैं, लेकिन इस गर्मी आप चुकंदर-राई की कांजी ट्राई कीजिए. यह सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है, बल्कि दादी-नानी के जमाने का एक ऐसा पारंपरिक अमृत है, जो टेस्ट में जितना चटपटा है, सेहत के लिए उतना ही वरदान. आइए जानते हैं चुकंदर और राई के पोषण से भरपूर इस देसी प्रोबायोटिक ड्रिंक को बनाने का आसान तरीका. चुकंदर-राई कांजी के लिए आपको यह सारी चीजें लेनी हैं.     काली राई : 2 बड़े चम्मच     पीली सरसों : 1 बड़ा चम्मच     गाजर (लंबे टुकड़ों में कटी हुई): 1 कप     चुकंदर (लंबे टुकड़ों में कटा हुआ): 1 कप     हरी मिर्च: 2 (स्वादानुसार)     हींग: एक चुटकी     काला नमक: 1 ½ छोटा चम्मच     सादा नमक: स्वादानुसार     पानी: 4 कप     सर्विंग के लिए: 2 बड़े चम्मच खारी बूंदी और कुछ ताजी पुदीने की पत्तियां कांजी बनाने का आसान तरीका कांजी बनाने की असली खूबसूरती इसके फर्मेंटेशन में है, अगर आप घर पर देसी स्टाइल में राई वाली कांजी बनाना चाहते हैं तो इन स्टेप्स को जरूर फॉलो करें. मसाला तैयार करें: सबसे पहले काली राई और पीली सरसों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें. इसका बारीक पाउडर नहीं बनाना है, क्योंकि दरदरा टेक्सचर ही इसे असली स्वाद देता है. पानी गुनगुना करें: पानी को अच्छी तरह उबाल लें और फिर उसे थोड़ा ठंडा होने दें. पानी गर्म होना चाहिए, लेकिन खौलता हुआ नहीं. जार में सामग्री मिलाएं: एक कांच के साफ और सूखे जार में कटी हुई गाजर, चुकंदर, हरी मिर्च, हींग, काला नमक, सादा नमक और पिसी हुई राई-सरसों का पाउडर डालें. फर्मेंटेशन की शुरुआत: अब इस जार में गुनगुना पानी डालें और चम्मच से अच्छी तरह मिला लें. जार के मुंह को एक साफ मलमल के कपड़े से बांध दें. धूप का जादू: इस जार को दो दिनों के लिए तेज धूप में रख दें. धूप की गर्मी से राई एक्टिव होगी और पानी में खट्टापन आना शुरू होगा. देखभाल: इन दो दिनों के दौरान रोजाना जार को एक बार हिलाएं और अगर ऊपर कोई सफेद झाग या परत दिखे, तो उसे साफ चम्मच से हटा दें. सर्विंग: 2 दिन बाद कांजी का कलर गहरा गुलाबी हो जाएगा और इसमें से एक तीखी-खट्टी खुशबू आने लगेगी. अब इसे फ्रिज में रखकर ठंडा करें, सर्व करते समय ऊपर से कुरकुरी खारी बूंदी और पुदीने की पत्तियां डालें.

तेज चलने से बढ़ सकती है उम्र: लीसेस्टर स्टडी में बड़ा खुलासा

हेल्दी रहने के लिए पैदल चलना सबसे आसान तरीका है। यह आपके पूरे शरीर की फिटनेस को सही रखने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके चलने की स्पीड से उम्र की लंबाई पर असर पड़ता है। लीसेस्टर बायोकेमिकल रिसर्च सेंटर की स्टडी ने पता लगाया कि तेज चलने वालों या धीमा चलने वालों में से कौन ज्यादा जीते हैं? इसी सेंटर की दूसरी रिसर्च इसके पीछे का कारण भी बताती है। तेज या धीमी गति, कैसे चलने वाले लोग जीते हैं लंबा? लीसेस्टर सेंटर की रिसर्च ने यूके बायोबैंक के 474,919 लोगों के चलने की आदत का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि तेज स्पीड से चलने की आदत वाले लोगों की संभावित उम्र (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा होती है। उन्होंने यह पता भी लगाया कि संभावित उम्र का शारीरिक वजन से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से गहरा नाता है। उन्होंने पाया कि जो अंडरवेट (जरूरत से ज्यादा पतले) लोग धीमी स्पीड से चलते हैं, उनकी उम्र सबसे कम देखी जाती है। धीमा चलने वाले अंडरवेट पुरुषों की संभावित उम्र औसतन 64.8 साल और ऐसी अंडरवेट महिलाओं की औसतन उम्र 72.4 साल होती है। शारीरिक वजन से बेहतर है ये इंडिकेटर इस रिसर्च के प्रमुख लेखक प्रोफेसर टॉम येट्स कहते हैं कि हमारा शोध यह साफतौर पर दिखाता कि संभावित उम्र को देखने के लिए बॉडीवेट स्टेटस से ज्यादा बेहतर इंडिकेटर फिजिकल एक्टिविटी स्टेटस है। हमारा शोध लोगों को तेज चलकर अपनी उम्र बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। आपको बता दें कि यह शोध साल 2019 में प्रकाशित हुआ था। दूसरा शोध: टेलोमेयर है कारण 2022 में कम्युनिकेशन बायोलॉजी पर प्रकाशित लीसेस्टर के दूसरे शोधकर्ताओं की रिसर्च तेज चलने और लंबी उम्र के कारण के बारे में बताती है। इसमें यूके बायोबैंक के 405,981 लोगों का अध्ययन किया गया। जिसमें पाया कि चलने की स्पीड हेल्थ के बारे में जानने का मजबूत संकेत है। अध्ययन में तेज गति से चलने वाले लोगों के ल्यूकोसाइट टेलोमेयर की लंबाई धीमा चलने वालों के मुकाबले ज्यादा मिली। इसी की वजह से उनकी संभावित उम्र में बढ़ोतरी का संबंध पाया गया। टेमोमेयर और लंबी उम्र का रिश्ता कई सारे शोधों के बाद टेलोमेयर को लाइफ एक्सपेक्टेंसी और उम्र संबंधी बीमारियों के साथ मजबूती से जोड़कर देखा गया। साइंस डायरेक्ट पर मौजूद शोध बताता है कि टेलोमेयर लीनियर क्रोमोजोमल डीएनए के आखिरी सिरे पर मौजूद कैप होती है। जो क्रोमोजोम को डैमेज होने से बचाती है और इनकी स्टेबिलिटी को बढ़ाती है। 100 साल से ज्यादा जीने वाले लोगों में टेलोमेयर की लंबाई कम उम्र में किसी बीमारी से मरने वाले लोगों की तुलना में अधिक पाई गई है।