samacharsecretary.com

चुकंदर का जूस हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं! इन लोगों के लिए बन सकता है खतरनाक

आजकल लोग अपनी फिटनेस का खास ख्याल रखने लगे हैं और इसी वजह से जिम जाने वाले और हेल्थ कॉन्शियस लोग सब्जियों का जूस अधिक पीने लगे हैं. इसी कड़ी में सुबह-सुबह हेल्दी ड्रिंक के नाम पर चुकंदर का जूस पीना आजकल ट्रेंड बन चुका है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट्स तक, हर कोई इसके फायदे गिनाता है. लेकिन हर चीज के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी होते हैं. उसी तरह चुकंदर का जूस जिसे हेल्दी मानकर लोग पी रहे हैं, वो कुछ लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. चुकंदर का जूस पोषक तत्वों से भरपूर जरूर है, लेकिन यह हर शरीर पर एक जैसा असर नहीं करता. कई बार इसको ज्यादा पीना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए इस जूस को पीने से पहले यह जान लीजिए कि क्या यह आपके लिए सही है या नहीं. डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों से परेशान लोग जिन लोगों को अक्सर डाइजेशन की समस्या रहती है,उनको इस जूस से परहेज करना चाहिए. कुछ लोगों को चुकंदर का जूस पीने के बाद पेट फूलना, ऐंठन, गैस या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार, चुकंदर में मौजूद प्राकृतिक नाइट्रेट्स और फाइबर कुछ लोगों के डाइजेस्टिव सिस्टम पर तेज असर डाल सकते हैं, खासकर जब इसे खाली पेट पिया जाए. पेशाब का लाल होना अगर चुकंदर का जूस पीने के बाद आपका पेशाब या मल लाल दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसे बीटुरिया कहा जाता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (HMS)के हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह चुकंदर के प्राकृतिक पिगमेंट के कारण होता है और आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है. किडनी स्टोन वालों के लिए खतरा चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है. इस वजह से किडनी स्टोन वाले मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए. अमेरिका की नेशनल किडनी फाउंडेशन (NKF) के अनुसार, ज्यादा ऑक्सलेट शरीर में कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जिन लोगों को पहले से किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें इसका सीमित सेवन करना चाहिए. लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए सावधानी चुकंदर का जूस ब्लड प्रेशर कम करने में मदद करता है. लेकिन अगर आपका बीपी पहले से कम है या आप उसकी दवाई ले रहे हैं. तो यह ज्यादा लो का कारण बन सकता है, जिससे चक्कर और कमजोरी महसूस हो सकती है. किन लोगों को चुकंदर के जूस से बचना चाहिए?     किडनी स्टोन या किडनी रोग वाले लोग     लो ब्लड प्रेशर के मरीज     डायबिटीज वाले लोग     कमजोर पाचन तंत्र वाले लोग     प्रेग्नेंट महिलाएं चुकंदर का जूस पीने का सही तरीका क्या है? चुकंदर का जूस पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन इसे जितना ज्यादा, उतना बेहतर समझ कर पीना गलती हो सकती है. एक लिमिट में ही किसी भी चीज का सेवन सही होता है और शुरुआत में इसे पीने के बाद अपने शरीर में होने वाले रिएक्शन का भी ध्यान रखें. अगर कुछ भी बदलाव नजर आए तो पहले तुरंत जूस पीना बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें.

दिल्ली में भीषण गर्मी का असर, गर्भवती महिलाओं में बढ़ीं प्रेगनेंसी से जुड़ी जटिलताएं

 गर्मी के तेवर अपने चरम पर हैं और देश के कई राज्यों समेत राजधानी दिल्ली में सूरज की तपिश अब बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है. यहां का पारा पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार भी पहुंच चुका है जिसके चलते आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के हॉस्पिटल में गर्मी के कारण प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याओं वाली महिलाओं की संख्या काफी बढ़ गई है. डॉक्टर्स का कहना है कि बढ़ता तापमान न केवल मां की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे की ग्रोथ को भी रोक रहा है. गर्मी से समय से पहले डिलीवरी का जोखिम मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर की डायरेक्टर डॉ. रेनू मलिक का कहना है गर्मी की वजह से प्री-टर्म लेबर (समय से पहले प्रसव) के मामले बढ़ रहे हैं. शरीर का तापमान बढ़ने से स्ट्रेस पैदा होता है जो डिलीवरी की प्रक्रिया को वक्त से पहले शुरू कर सकता है. वहीं डॉक्टरों के मुताबिक, जब तापमान 45 डिग्री के आसपास होता है तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन समय से पहले एक्टिव हो सकते हैं. बच्चे के वजन और ग्रोथ पर बुरा असर गर्मी सिर्फ मां के लिए ही नहीं बल्कि भ्रूण के लिए भी घातक है. रिपोर्ट बताती है कि हीट स्ट्रेस के कारण प्लेसेंटा तक पोषण सही तरह से नहीं पहुंच पाता. इसका सीधा परिणाम 'लो बर्थ वेट' यानी जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना है. इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहने वाली महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर) का खतरा भी बढ़ जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दोपहर 11 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें.

मोबाइल पर कैसे आएगा इमरजेंसी अलर्ट? जानिए नई सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी

शनिवार को देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (Cell Broadcast System) का बड़े पैमाने पर टेस्ट किया गया है. साफ है कि आने वाले समय में यह सर्विस आम लोगों के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल में लाई जाएगी. यानी आगे जब भी कोई बड़ी आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, साइकलोन या कोई सिक्योरिटी थ्रेट का खतरा होगा, तो सरकार सीधे आपके फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट भेज सकेगी. यह कोई सामान्य SMS नहीं होगा, बल्कि टावर से एक साथ पूरे इलाके में ब्रॉडकास्ट होने वाला मैसेज होगा, जिसे पाने के लिए न इंटरनेट की जरूरत होगी और न ही किसी ऐप की. हालांकि कमजोर नेटवर्क में भी काम करेगा, लेकिन एक शर्त है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जा रही है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकता है. यानी जहां कॉल ड्रॉप हो रही हो, इंटरनेट न चल रहा हो, वहां भी अलर्ट आने की संभावना रहेगी, क्योंकि यह SMS की तरह कतार में नहीं फंसता, बल्कि सीधे टावर से पुश होता है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी क‍ि अगर आपके फोन में बिल्कुल “No Service” है, यानी टावर का कोई सिग्नल ही नहीं मिल रहा, तो फिर यह सिस्टम भी काम नहीं करेगा. बिना स‍िम के फोन पर भी दिख सकता है अलर्ट आने वाले समय में इस सिस्टम की एक और खास बात लोगों को चौंका सकती है, यह नंबर पर नहीं, बल्कि एरिया पर काम करता है. यानी अगर आपका फोन ऑन है और किसी नेटवर्क का सिग्नल पकड़ रहा है, तो बिना स‍िम के भी इमरजेंसी अलर्ट स्क्रीन पर फ्लैश हो सकता है. यही वजह है कि इसे आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्‍युन‍िकेशन टूल माना जा रहा है. फिर भी कुछ लोग रह जाएंगे ‘आउट ऑफ कवरेज’ हालांकि यह सिस्टम काफी एडवांस्ड है, लेकिन पूरी तरह फूलप्रुफ नहीं है. जिन इलाकों में नेटवर्क कवरेज ही नहीं है, वहां रहने वाले लोग इन अलर्ट से वंचित रह सकते हैं. इसी तरह अगर फोन स्‍व‍िच ऑफ है या बैटरी खत्म है, तो कोई भी चेतावनी नहीं पहुंचेगी. एयरप्‍लेन मोड में भी फोन नेटवर्क से कट जाता है, इसलिए वहां भी अलर्ट नहीं आएगा. इसके अलावा पुराने फीचर फोन्स या ऐसे स्‍मार्टफोन जिनमें यह फीचर सपोर्ट नहीं करता है, वे भी इस सिस्टम के दायरे से बाहर रहेंगे. कई बार यूजर्स खुद सेट‍िंग्‍स में जाकर इमरजेंसी अलर्ट को disable कर देते हैं, ऐसे में भी यह सर्विस उन तक नहीं पहुंच पाएगी. आने वाले समय की ‘लाइफ-सेवर’ टेक्नोलॉजी आगे चलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम को देश के आपदा प्रबंधन ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जाएगा. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे आपके इलाके में लगा एक ड‍िज‍िटल लाउडस्पीकर. अगर आप उसकी रेंज में हैं और आपका फोन नेटवर्क से जुड़ा है, तो वार्न‍िंग आपको तुरंत मिल जाएगी. लेकिन अगर आप उस रेंज से बाहर हैं या आपने खुद को नेटवर्क से ड‍िसकनेक्‍ट कर रखा है, तो यह अलर्ट आप तक नहीं पहुंचेगा. यानी साफ है क‍ि यह तकनीक तेज, असरदार और कई मामलों में लाइफ सेवर साबित होगी, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं, जिन्हें समझना उतना ही जरूरी है.

कोकोनट लस्सी रेसिपी: गर्मी में ठंडक देने वाला हेल्दी ड्रिंक

 गर्मियों के मौसम में जब पारा चढ़ने लगता है तो शरीर को हाइड्रेटेड और पेट को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है. वैसे तो उत्तर भारत में लस्सी सबसे लोकप्रिय समर ड्रिंक है लेकिन अगर आप वही साधारण लस्सी पीकर बोर हो चुके हैं तो क्यों ना कुछ नया ट्राई किया जाए. ऐसे में कोकोनट यानी नारियल की लस्सी आपके लिए परफेक्ट हो सकती है. नारियल की लस्सी के फायदे कोकोनट लस्सी न केवल स्वाद में बेहतरीन है बल्कि नारियल की तासीर ठंडी होने के कारण यह आपके पेट को दोगुनी ठंडक पहुंचाती है. यह एक ऐसा प्रीमियम ड्रिंक है जो आपको ताजगी के साथ-साथ भरपूर ऊर्जा भी देती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और झटपट रेसिपी. लस्सी के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजा दही (गाढ़ा) – 2 कप नारियल का दूध या कद्दूकस किया हुआ ताजा नारियल – 1 कप नारियल पानी (लस्सीको पतला करने के लिए) – 1/2 कप चीनी या मिश्री पाउडर – स्वादानुसार इलायची पाउडर – एक चुटकी बर्फ के टुकड़े  – 4-5 बारीक कटा हुआ सूखा नारियल और कटे हुए बादाम बनाने का तरीका एक मिक्सर जार या ब्लेंडर में गाढ़ा दही और नारियल का दूध डालें. अगर आप ताजा नारियल इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे पहले बारीक पीस लें. इसमें स्वादानुसार चीनी, इलायची पाउडर और थोड़े से बर्फ के टुकड़े डालें. अब सभी सामग्रियों को 1-2 मिनट के लिए अच्छी तरह ब्लेंड करें जब तक कि लस्सी एकदम स्मूथ और झागदार न हो जाए. अगर लस्सी बहुत गाढ़ी लग रही है तो आप इसमें थोड़ा नारियल पानी मिला सकते हैं. तैयार कोकोनट लस्सी को गिलास में निकालें. ऊपर से नारियल के लच्छे या ड्राई फ्रूट्स सजाएं और इसे ठंडा-ठंडा सर्व करें.

सत्तू शरबत रेसिपी: गर्मी में देसी प्रोटीन ड्रिंक जो रखे शरीर को ठंडा

भीषण गर्मी और तपती लू के बीच जब शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है तो ऐसे में देसी प्रोटीन शेक कहा जाने वाला सत्तू शरबत आपके  लिए किसी वरदान से कम नहीं. सत्तू की तासीर स्वाभाविक रूप से ठंडी होती है जो पेट की जलन को शांत करने और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है. इसमें मौजूद हाई फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते जिससे यह वजन घटाने वालों के लिए भी आदर्श है. बिना चीनी और बिना किसी भारी मसाले के तैयार यह शरबत न केवल आपको हाइड्रेटेड रखता है बल्कि चिलचिलाती धूप में भी आपको तरोताजा महसूस कराता है. सत्तू शरबत बनाने के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें सत्तू – 4 बड़े चम्मच ठंडा पानी – 2 गिलास काला नमक – स्वादानुसार भुना हुआ जीरा पाउडर – 1/2 छोटा चम्मच नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच ताजा पुदीना पत्तियां – 5-6 (कुचली हुई) बारीक कटी हरी मिर्च और प्याज बनाने का तरीका एक जग में सत्तू डालें और थोड़ा ठंडा पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि कोई गुठली न रहे. अब बचा हुआ ठंडा पानी डालें और इसे अच्छी तरह फेंटें. इसमें काला नमक, भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस मिलाएं。 कुचली हुई पुदीना पत्तियां डालें, जो इसकी ठंडक और खुशबू को बढ़ा देंगी. अगर आप चाहें तो इसमें बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च डालकर इसे और भी चटपटा बना सकते हैं. बर्फ के टुकड़े डालें और तुरंत सर्व करें.

गर्मियों में गुलाब जल से स्किन केयर: नेचुरल ग्लो पाने के आसान तरीके

 गर्मियों के मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी हमारी स्किन की सारी चमक छीन लेते हैं. अक्सर इसके कारण चेहरा डल, बेजान और ऑयली नजर आने लगता है. ऐसे में इस मौसम में स्किन का खास ख्याल जरूरी हो जाता है. अच्छी बात यह है कि घर में मौजूद कुछ चीजों से आप आसानी से अपनी स्किन का ध्यान रख सकते हैं. गुलाब जल उन्हीं में से एक है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से स्किन केयर के लिए किया जाता रहा है. यह न सिर्फ चेहरे को ठंडक देता है, बल्कि स्किन के PH लेवल को भी बैलेंस बनाए रखता है. इसे रोजाना चेहरे पर लगाने से स्किन से जुड़ीं समस्याएं कम होती हैं और चेहरा नेचुरली ग्लो करता है. आज हम आपको बताएंगे कि गर्मियों में आप गुलाब जल का इस्तेमाल करके कैसे ग्लोइंग और बेदाग स्किन पा सकते हैं. गुलाब जल और बेसन का पैक गर्मियों के मौसम में धूप और गर्मी के कारण स्किन डल और बेजान हो जाती है. ऐसे में इससे बचने के लिए आप गुलाब जल और बेसन का फेस पैक चेहरे पर लगा सकते हैं. इस फेस पैक को बनाने के लिए 1 चम्मच बेसन में 1 चम्मच में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरा धोने के बाद अच्छे से लगाएं और 10–15 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार यह पैक जरूर लगाएं. गुलाब जल और मुल्तानी मिट्टी गर्मी के दिनों में स्किन ऑयली हो जाती है. ऑयली स्किन के कारण पिंपल्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं जो आपकी खूबसूरती को कम कर देती हैं. इससे बचने के लिए 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी में 2–3 चम्मच गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें. चेहरा अच्छे से धोने के बाद इस फेस पैक को 10–15 मिनट तक लगाकर रखें. जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा धो लें और बाद में मॉइश्चराइजर लगा लें. टोनर के तौर पर गर्मी में चेहरे को फ्रेश रखने के लिए आप गुलाब जल को टोनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. यह चेहरे को ठंडक देता है और ताजगी बनाए रखता है. आप इसे एक स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख सकती हैं और चेहरा धोने के बाद चेहरे पर स्प्रे कर सकती हैं.  

जियोफोन और जियोभारत फोन के रिचार्ज प्लान्स का नाम बदला, अब ‘4G Feature Phone Plans’

रिलायंस जियो को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने जियोफोन (JioPhone) और जियोफोन प्राइमा (Jio Phone Prima) प्लान्स को हटा दिया है। इसके अलावा, 'जियोभारत' (JioBharat) फोन के रिचार्ज प्लान्‍स का नाम बदलकर ‘ 4G Feature Phone Plans ’ कर दिया है। जियोफोन डेटा ऐड-ऑन का नाम ‘4G Feature Phone Add-ons’ कर दिया गया है। कहा जाता है कि ट्राई के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है। ट्राई जियोफोन और जियोभारत फोन से जुड़े रिचार्जों को सभी तरह की डिवाइस चलाने वाले ग्राहकों के लिए लाने का निर्देश दिया था। Jio रिचार्ज से सस्‍ते होते थे जियोफोन और जियोभारत के रिचार्ज पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।     दरअसल, रिलायंस जियो की ओर से जियोफोन और जियोभारत फोन के अलग रिचार्ज लाए जाते थे।     जियोफोन और जियोभारत, कंपनी के फीचर फोन हैं, जिन्‍हें 4G यूजर्स के लिए पेश किया जाता है।     कंपनी इन फोन्‍स के लिए कम कीमत में रिचार्ज उपलब्‍ध कराती थी, क्‍योंकि ग्राहक 4जी नेटवर्क पर होते थे। ट्राई ने दिया था अहम निर्देश टेलिकॉमटॉक की रिपोर्ट के अनुसार, इसी महीने ट्राई ने जियो को उसके ड‍िवाइस संबंधी टैरिफ प्‍लान्‍स में बदलाव करने और उन्‍हें सभी डिवाइस यूजर्स के लिए उपलब्‍ध कराने का निर्देश दिया था। ऐसा लगता है कि कंपनी ने ट्राई की बातों को मानते हुए रिचार्ज प्‍लान्‍स का नाम बदलकर ‘4G Feature Phone Plan’ और ‘4G Feature Phone Add-on’ कर दिया है। हालांकि अभी यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि इन रिचार्ज को सिर्फ जियाफोन और जियोभारत फोन यूजर्स करा सकेंगे या कोई भी 4जी स्‍मार्टफोन यूजर कर पाएगा जिसके पास जियो का सिम है।     123 रुपये का प्‍लान जिसमें अनलिमिटेड वॉयस कॉल, 0.5 GB/दिन डेटा और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 28 दिनों की है।     234 रुपये वाला प्‍लान भी कंपनी 4G यूजर्स को देती है। इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रत‍िदिन और 300 SMS दिए जाते हैं। इसकी वैलिड‍िटी 56 दिन है।     369 रुपये का प्‍लान भी है जिसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 0.5 GB डेटा प्रतिदिन दिया जाता है। इसकी वैलिड‍िटी 84 दिन है।     कंपनी 1234 रुपये में 336 दिन की वैलिडि‍टी 4G फीचर फोन प्लान पर देती आई है। इस बदलाव से क्‍या होगा? पहली नजर में यह बदलाव सिर्फ नाम बदलना महसूस होता है। अगर यह 4जी फोन यूजर्स के लिए ही है तो इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि कंपनी अब जियोभारत और जियोफोन ग्राहकों के अलावा अन्‍य फीचर फोन यूजर्स को भी ये प्‍लान उपलब्‍ध कराए। हालांकि इस बारे में अभी आध‍िकारिक जानकारी का इंतजार है।  

गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल

गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है। गर्मियों का स्किन पर असर अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है। अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है। प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर वात प्रधान वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।     इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।     यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।     लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है। पित्त प्रधान पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।   ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।   स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कफ प्रधान कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है। औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:     चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।     लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।     रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के 5 आसान ड्रिंक्स

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं क‍ि बच्चे बड़ों की तुलना में जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा मात्रा में पानी खो देते हैं। 1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है डॉक्‍टर भावना आगे बताती हैं क‍ि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्‍थ पर पड़ सकता है। 2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा एक्‍सपर्ट कहती हैं क‍ि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्‍चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है। 1. नींबू पानी सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़ विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। 2. छाछ सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें। लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना 3. नारियल पानी सामग्री: ताजा नारियल पानी विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं। लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है। 4. आम पन्ना सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं। लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है। 5. तरबूज का रस सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें। लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ​ 6- घर का बना फ्रूट स्मूदी​ सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। ​ बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्र‍िंक्‍स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।

स्मार्टफोन खरीदते समय 89% लोग AI फीचर्स को दे रहे हैं सबसे ज्यादा अहमियत

स्मार्टफोन खरीदते समय आप किन बातों या कहें कि किन फीचर्स का ध्यान रखते हैं. एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि 89 परसेंट लोग स्मार्टफोन खरीदते समय आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) फीचर्स पर ध्यान दे रहे हैं. पहले भले ही कैमरे, बैटरी, प्रोसेसर और डिस्प्ले पर ध्यान दिया जाता हो, लेकिन अब लोगों का फोकस AI पर है. काउंटरप्वाइंट रिसर्च ने फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट का नाम स्मार्टफोन इनसाइट रिपोर्ट 2026 है. भारतीय मार्केट में कंज्यूमर की बदलती आदत को दिखाया गया है. साथ ही बताया है कि अब यूजर्स स्पेसिपिकेशन्स से आगे बढ़कर AI पर ध्यान दे रहे हैं, जिसमे Gen-z भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन चुनने में अब सबसे अहम भूमिका AI निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया है कि 89 परसेंट यूजर्स ने बताया है कि AI फीचर्स उनके हैंडसेट खरीदने के फैसले को प्रभावित करता है. AI की मदद से यूजर्स अपने डेली के टास्क को आसान बना रहे हैं. सर्चिंग से लेकर वॉयस असिस्टेंट तक को AI बेहतर बना रहा है. कई मोबाइल कंपनियां खुद का AI मॉडल दे रहे हैं. सैमसंग से गूगल तक मार्केट में कई AI मॉडल मार्केट में गूगल के AI फीचर्स के अलावा भी कई मॉडल मौजूद हैं. जहां सैमसंग का Galaxy AI है. वहीं वीवो और शाओमी के भी AI मॉडल हैं. मोटोरोला का Moto AI नाम है. सैमसंग ने गूगल जेमिनी के कई फीचर्स को ऑप्टीमाइज करके अपने हैंडसेट को दिया है, जिससे उनकी उपयोगिता और बेहतर हो गई है. ये स्पीड 15-20 हजार रुपये के सेगमेंट में भी फैल रही है, जहां आमतौर पर प्रीमियम फीचर्स बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. 33 परसेंट लोग EMI पर स्मार्टफोन खरीद रहे- रिपोर्ट रिपोर्ट में एक अन्य खुलासा ये भी किया है कि 33 परसेंट लोग ऐसे हैं, जो आसान किस्तों (EMI) का ऑप्शन लेकर प्रीमियम हैंडसेट को खरीद रहे हैं.