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WhatsApp Business यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से सर्विस मैसेज पर लगेगा चार्ज; पेमेंट मेथड जरूरी

वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव लागू हो गया है. Meta ने सर्विस मैसेज के लिए अब चार्ज लेना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही जिन बिजनेस अकाउंट में पेमेंट मेथड जुड़ा नहीं है, उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है. मेटा ने वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस को पहले ही पेमेंट मेथड जोड़ने के लिए कहा था. कंपनी के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक पेमेंट मेथड ऐड नहीं करने वाले अकाउंट्स के सर्विस मैसेज 1 अक्टूबर से डिलीवर नहीं किए जाएंगे. वॉट्सऐप बिजनेस में क्या बदला? पहले वॉट्सऐप बिजनेस पर कुछ सर्विस मैसेज के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता था. अब 1 अक्टूबर से इन मैसेज पर प्रति मैसेज के हिसाब से शुल्क लगेगा. यह बदलाव खास तौर पर उन गैर-टेम्पलेट मैसेज पर लागू होता है, जो किसी ग्राहक के मैसेज करने के बाद खुले 24 घंटे के कस्टमर सर्विस विंडो में भेजे जाते हैं. सर्विस मैसेज में कस्टमर सर्विस एजेंट या किसी थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की तरफ से भेजे गए मैसेज शामिल हो सकते हैं. किन वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट पर असर होगा? यह बदलाव वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले सॉल्यूशन प्रोवाइडर और सीधे इंटीग्रेशन वाले बिजनेस पर लागू होगा. अगर ऐसे बिजनेस अपने मैसेजिंग अकाउंट में पेमेंट मेथड नहीं जोड़ते हैं, तो नए चार्ज शुरू होने के बाद उनके सर्विस मैसेज की डिलीवरी रुक सकती है. इसलिए कंपनियों को अपने वॉट्सऐप बिजनेस अकाउंट की पेमेंट सेटिंग चेक करने की जरूरत है. हर मैसेज पर लगेगा चार्ज मेटा अब सर्विस मैसेज भेजने के बजाय डिलीवर होने वाले मैसेज के आधार पर चार्ज करेगा. इसकी कीमत अलग-अलग मार्केट के हिसाब से बदल सकती है. मेटा के मुताबिक, सर्विस मैसेज की कीमत उस मार्केट में यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन मैसेज की दरों के बराबर होगी. इसके लिए कोई वॉल्यूम टियर भी नहीं होगा. बिजनेस इन गैर-टेम्पलेट मैसेज को तभी भेज सकते हैं जब 24 घंटे का कस्टमर सर्विस विंडो खुला हो. यह विंडो ग्राहक के मैसेज करने पर शुरू या रीसेट होती है. वॉट्सऐप बिजनेस एजेंट का चार्ज अलग सर्विस मैसेज का यह चार्ज Meta Business Agent की कीमत से अलग है. मेटा बिजनेस एजेंटके मैसेज के लिए कंपनी पहले से अलग टोकन-बेस्ड प्राइसिंग लागू कर चुकी है. मेटा के मुताबिक, एक ही मैसेज पर सर्विस और बिजनेस एजेंट दोनों तरह का चार्ज नहीं लगेगा. विज्ञापन से वॉट्सऐप आने पर राहत वॉट्सऐप का फ्री एंट्री पॉइंट विंडो अभी भी जारी है. अगर कोई ग्राहक ऐसे विज्ञापन के जरिए वॉट्सऐप पर आता है जिसमें क्लिक करके वॉट्सऐप चैट खुलती है, तो उस विंडो में मैसेज डिलीवरी पर चार्ज नहीं लगेगा. मेटा बिजनेस एजेंट के इस्तेमाल पर टोकन चार्ज लग सकता है. इस बदलाव के बाद वॉट्सऐप बिजनेस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए अपने पेमेंट मेथड और मैसेजिंग सेटिंग को चेक करना जरूरी हो गया है.

युवा शराब से क्यों बना रहे दूरी? 2022-24 के डेटा में गिरावट, बड़ी उम्र के लोगों में बढ़ा सेवन

नई दिल्ली शराब पीने को लेकर एक नया ट्रेंड सामने आया है,  पिछले कुछ सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में शराब पीने का चलन कम हुआ है, वहीं 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या बढ़ी है. इतना ही नहीं, इस उम्र के कुछ लोग पहले से ज्यादा शराब पीने लगे हैं।  नई स्टडी Annals of Internal Medicine में प्रकाशित हुई है. रिसर्च के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच अमेरिका में शराब पीने वाले युवाओं की संख्या अब कम हो रही है, युवा शराब से दूरी बन रहे हैं, कोरोना महामारी के बाद युवाओं में ये शराब पीने का ट्रेंड कम हो रहा है. रिसर्च में जो आंकड़े बताए गए हैं उनके मुताबिक, 2018 तक अमेरिका में 40 साल से कम उम्र वाले 66 % लोग शराब पीत थे, 2020 में ये आंकड़ा 69 % था, लेकिन 2024 में ये 67 % रह गया है. 40 साल से कम उम्र में जेन- जी यानी 26 से 30 साल की उम्र के युवा भी शामिल हैं. रिसर्च में ये भी बताया गया है कि 50 साल से अधिक उम्र में शराब पीने का ट्रेंड अब ज्यादा क्यों बढ़ा है।  50 की उम्र के बाद क्यों चिंता ज्यादा? डॉक्टरों के मुताबिक, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का ज्यादा सेवन खास तौर पर चिंता का विषय है. इस उम्र में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है, ज्यादा शराब इन जोखिमों को और बढ़ा सकती है।  स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और लिवर विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पी. ली के मुताबिक, इस उम्र के लोग ज्यादा मानसिक तनाव में हैं, इस वजह से वह शराब का सहारा ले रहे हैं. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि 40 से कम उम्र वालों में मानसिक तनाव कम हो गया है, लेकिन 50 प्लस वाले इसको कम करने के लिए शराब ज्यादा पी रहे हैं।    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग कभी-कभी शराब पीते हैं, उनमें से 53 प्रतिशत लोग अब शराब की खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह संख्या पांच साल पहले केवल 44 प्रतिशत थी. साथ ही, जिन लोगों ने कभी शराब नहीं पी, उनकी संख्या भी 2020 के बाद 3 प्रतिशत बढ़ गई है. हालांकि, वैश्विक स्तर पर शराब की बिक्री अभी भी बहुत बड़ी है. 2024 में दुनिया भर में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके बावजूद, इसका विकास बहुत धीमा हो गया है।  वहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शराब की खपत 2024 से 2029 के बीच 357 मिलियन लीटर बढ़ने की संभावना है. इससे भारत दुनिया में तेजी से बढ़ने वाला शराब बाजार बन रहा है. हालांकि, यह बदलाव वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत है, जहां युवा वर्ग शराब से दूर हो रहे हैं. रिपोर्ट ने नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बढ़ती मांग पर भी प्रकाश डाला है. शराब की बिक्री में केवल 0.6 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई और इसका कुल बाजार मूल्य 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा, वहीं नॉन-अल्कोहल स्पिरिट्स की बिक्री 17 प्रतिशत बढ़ी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 से 2029 तक यह बाजार 24 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है और 2029 तक यह 10.2 बिलियन लीटर से अधिक हो जाएगा।  मानसिक तनाव में शराब लेना बन सकता है आदत द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसिक तनाव के समय कुछ लोग शराब को राहत पाने का तरीका मान लेते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. धीरे-धीरे शराब तनाव से निपटने की आदत बन सकती है और इसकी मात्रा भी बढ़ सकती है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50 की उम्र के बाद  शराब पीता है या पहले से ज्यादा शराब लेने लगा है, तो इसे सिर्फ आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।  कौन सी शराब खरीदना पसंद कर रहे हैं युवा? आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब देखकर ही नहीं खरीद रही है, इसके अलावा भी उनकी कुछ पंसद है, जिस पर उनका फोकस ज्यादा रहता है जैसे…     ऐसी शराब जिसका टेस्ट अलग हो.     शराब की क्वालिटी भी अच्छी हो.     साथ ही कोई खास पहचान हो. शराब का बिजनेस आखिर कैसे बढ़ा? युवा ने शराब पीना भले ही कम कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी देखने को मिल रही है, जिसकी वजह यह है कि युवा शराब को कम जरूर पी रहे हैं, लेकिन जब भी पी रहे हैं तो महंगी और क्वालिटी को देखते हुए ही पी रहे हैं. जिसकी वजह से शराब कंपनियों की कमाई आगे बढ़ी है. खास कर इस बदलाव का असर वोदका के अलग-अलग फ्लेवर की पसंद में भी दिख रहा है।  इन कंपनियों का प्रर्दशन रहा अच्छा युवा की बदलती मांग की वजह से ही रैडिको खेतान, यूनाइटेज स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. यानी Gen Z अब कम शराब जरूर पी रहे हैं, लेकिन बेहतर क्वालिटी और अलग फ्लेवर की शराब पीना पसंद कर रहे हैं। 

₹9,000 से कम में 6000mAh बैटरी! 90Hz स्क्रीन के साथ मिल रहा Android 16 Go

नई दिल्ली अगर आपका बजट ₹10 हजार के आसपास है और सबसे बड़ी चिंता फोन की बैटरी को लेकर रहती है, तो itel ने नया ऑप्शन पेश किया है. कंपनी ने itel A300C का नया 3GB RAM वेरिएंट ₹8,699 में लॉन्च किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत 6000mAh की बैटरी है. कंपनी का दावा है कि यह भारत का सबसे सस्ता 6000mAh स्मार्टफोन है. इस फोन का लुक iPhone 18 Pro से मिलता जुलता है।  दिलचस्प बात यह है कि कम कीमत के बावजूद फोन में सिर्फ बड़ी बैटरी ही नहीं दी गई है. इसमें 90Hz डिस्प्ले, 18W फास्ट चार्जिंग, Android 16 Go Edition और MIL-STD-810H ड्यूरेबिलिटी भी मिलती है. यानी कंपनी ने इस फोन को उन लोगों के लिए तैयार किया है जिन्हें कैमरा या गेमिंग से ज्यादा बैटरी, मजबूती और रोजमर्रा के काम के लिए भरोसेमंद फोन चाहिए।  ₹8,699 में क्या मिलेगा? यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Android Go Edition खास तौर पर कम RAM वाले डिवाइस के लिए बनाया गया Android का हल्का वर्जन है. इसलिए 3GB RAM वाले फोन में सामान्य Android की तुलना में सिस्टम को हल्का रखने की कोशिश की जाती है।  असली खेल है 6000mAh बैटरी ₹8,699 वाले इस फोन की सबसे बड़ी वजह इसकी बैटरी है. इसमें 6000mAh की बैटरी दी गई है, जिसे 18W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. चार्जिंग के लिए USB Type-C पोर्ट दिया गया है।  90Hz डिस्प्ले भी मिलेगा itel A300C में 6.56 इंच का HD+ डिस्प्ले है, जिसका रिफ्रेश रेट 90Hz है. यानी स्क्रॉलिंग और सामान्य ऐप इस्तेमाल 60Hz स्क्रीन की तुलना में ज्यादा स्मूद महसूस हो सकता है।  हालांकि यहां एक समझौता भी है. स्क्रीन का रिजॉल्यूशन HD+ है, Full HD+ नहीं. इसलिए इस फोन को खरीदने वाले यूजर को 90Hz की स्मूदनेस तो मिलेगी, लेकिन महंगे फोन जैसी शार्प स्क्रीन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।   फोन गिरे तो भी ज्यादा चिंता नहीं? itel ने A300C को सिर्फ बैटरी वाला फोन बनाने की कोशिश नहीं की है. कंपनी इसमें MIL-STD-810H आधारित ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग का दावा करती है. इसका मतलब फोन को कुछ तय परिस्थितियों में गिरने और झटकों जैसी स्थितियों के लिए टेस्ट किया गया है।  लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए. MIL-STD-810H का मतलब यह नहीं है कि फोन पानी में सुरक्षित है या इसे बिना किसी चिंता के हर तरह की खराब परिस्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है।  itel इस फोन के साथ पहले 100 दिनों के लिए फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट ऑफर भी दे रहा है. कंपनी के मुताबिक इससे एक्सिडेंटल स्क्रीन डैमेज की स्थिति में शुरुआती 100 दिनों के दौरान यूजर को एक्स्ट्रा सुरक्षा मिलती है.  कैमरा साधारण, लेकिन काम चल जाएगा कैमरे के मामले में यह फोन किसी कैमरा फोन की तरह पेश नहीं किया गया है. इसमें 8MP का रियर कैमरा और 5MP का फ्रंट कैमरा है. कंपनी के मुताबिक ये रोजमर्रा की फोटो और वीडियो कॉल के लिए हैं।  इसका मतलब साफ है. अगर आपकी प्राथमिकता Instagram या YouTube के लिए शानदार फोटो और वीडियो है, तो यह फोन उस तरह का डिवाइस नहीं है. लेकिन WhatsApp पर फोटो भेजने, वीडियो कॉल करने और सामान्य तस्वीरें लेने जैसे कामों के लिए कैमरा दिया गया है।  इसमें 4G है, 5G नहीं itel A300C 4G स्मार्टफोन है. इसमें 4G LTE कनेक्टिविटी दी गई है, लेकिन 5G नहीं है. यह बात फोन खरीदते समय ध्यान में रखना जरूरी है, क्योंकि 2026 में ₹8-9 हजार का फोन लेने वाला यूजर इसे कई साल तक इस्तेमाल कर सकता है।  UPI, WhatsApp और YouTube जैसे काम होंगे itel का कहना है कि A300C को रोजमर्रा के ऐप्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. WhatsApp, YouTube, UPI और QR पेमेंट, सोशल मीडिया और लर्निंग ऐप्स जैसे कामों को कंपनी इसके इस्तेमाल के प्रमुख उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है।  फोन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक भी दिया गया है. इसके अलावा Type-C OTG और IR रिमोट सेंसर मिलता है, जिससे कंपैटिबल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स को फोन से कंट्रोल किया जा सकता है। 

बारिश में तेजी से झड़ रहे बाल? प्याज के रस की ये ट्रिक करें, जड़ों से मजबूत होंगे बाल

 बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ने के कारण स्कैल्प पर चिपचिपापन, डैंड्रफ और फंगल इंफेक्शन की समस्या बढ़ जाती है. यही वजह है कि इस मौसम में बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और जड़ों से कमजोर होकर पतले होने लगते हैं. अगर आप भी बारिश के दिनों में गुच्छों में झड़ रहे बालों को देख-देखकर परेशान हैं तो आपकी रसोई में मौजूद प्याज का रस इस समस्या का सबसे बेहतरीन और प्राकृतिक इलाज है. प्याज के रस में भरपूर मात्रा में सल्फर, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो स्कैल्प का इंफेक्शन दूर कर बालों की जड़ों को पोषण देते हैं और नए बाल उगाने में मदद करते हैं. मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने अपने एक वीडियो में कुछ समय पहले बताया था कि हेयरफॉल के लिए प्याज का रस ज्यादा असरदार होता है. उन्होंने कहा था कि नए बालों की ग्रोथ के लिए ताजा प्याज का रस निकालें और बालों में लगा लें. हालांकि आप चाहें तो प्याज के रस में नारियल तेल और एलोवेरा जेल मिलाकर भी लगा सकते हैं. सामग्री: 2 मध्यम आकार के लाल प्याज 1 छोटा चम्मच नारियल का तेल या अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) 1 चम्मच ताजा एलोवेरा जेल (ऑप्शनल) रुई (कॉटन बॉल) इस्तेमाल की सही विधि: रस निकालने का सही तरीका: प्याज को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. अब इसे मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें. एक साफ सूती कपड़े या बारीक छलनी की मदद से निचोड़कर प्याज का शुद्ध रस एक कटोरी में निकाल लें. तेल और एलोवेरा मिलाएं: प्याज के रस में 1 छोटा चम्मच नारियल का तेल और 1 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें. नारियल तेल स्कैल्प को नमी देता है और प्याज की तीखी गंध को कम करता है, जबकि एलोवेरा बारिश में होने वाली खुजली को शांत करता है. लगाने का सही तरीका: रुई (कॉटन बॉल) को इस मिश्रण में डुबोएं और अपने बालों की मांग (स्कैल्प) खोल-खोलकर जड़ों में अच्छी तरह लगाएं. ध्यान रखें कि रस बालों की लंबाई से ज्यादा स्कैल्प की त्वचा पर लगना चाहिए. हल्की मसाज करें: रस लगाने के बाद अपनी उंगलियों के पोरों से 5 मिनट तक हल्के हाथों से स्कैल्प की सर्कुलर मोशन में मालिश करें. इससे सिर में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) बढ़ता है और प्याज का रस जड़ों तक समा जाता है. सुखाने और धोने का समय: प्याज के रस को बालों में 25 से 30 मिनट तक लगा रहने दें. इसके बाद किसी माइल्ड या सल्फेट-फ्री हर्बल शैम्पू से गुनगुने या सादे पानी से सिर धो लें. बारिश के मौसम में हफ्ते में 2 बार इस नुस्खे का इस्तेमाल करें. 2 से 3 हफ्तों के नियमित उपयोग से ही बालों का झड़ना रुक जाएगा और बालों में नई मजबूती आएगी.

OpenAI Dots की एंट्री, AI अब सिर्फ जवाब नहीं देगा बल्कि आपके लिए काम भी करेगा

नई दिल्ली अभी तक AI से कोई काम करवाने के लिए आपको उसे बार-बार कमांड देने होते हैं. सवाल पूछा, जवाब मिला और बातचीत खत्म. लेकिन अब OpenAI इस तरीके को बदलने की कोशिश कर रहा है. कंपनी ने dots नाम के ऐसे AI एजेंट पेश किए हैं, जो एक बार काम समझने के बाद आपके बिना हर कदम पर कमांड दिए लगातार उस काम पर आगे बढ़ सकते हैं।  सीधे शब्दों में समझें तो यह सिर्फ ऐसा AI नहीं है जो आपके सवाल का जवाब देता है. आप उसे कोई जिम्मेदारी दे सकते हैं और वह उसके अगले कदम खुद तय करके काम आगे बढ़ाता रहेगा. जरूरत पड़ने पर आपसे राय या मंजूरी मांगेगा और फिर काम जारी रखेगा. यही बदलाव dots को सामान्य चैटबॉट से अलग बनाता है. हाल ही में मेटा ने Muse लॉन्च किया है, इसका Muse Charm डिवाइस भी ऑलवेज ऑन एआई एजेंट की तरह काम करता है।  खुद से करेगा ब्राउजिंग भी OpenAI के मुताबिक dots को खास तौर पर ऐसे कामों के लिए बनाया गया है जो एक मैसेज के जवाब के साथ खत्म नहीं होते. हर dot को अपना क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर मिलता है. यह जुड़े हुए ऐप्स का इस्तेमाल करके किसी प्रोजेक्ट पर काम कर सकता है और यूजर के ChatGPT से बाहर जाने के बाद भी काम जारी रख सकता है।  मसलन, अगर आप किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं तो dot सिर्फ जानकारी खोजकर आपको नहीं देगा. वह उपलब्ध जानकारी देख सकता है, काम का अगला फेज तय कर सकता है, जरूरी चीजों का मसौदा तैयार कर सकता है और फिर आपके पास रिव्यू के लिए वापस आ सकता है।  यानी AI का नया मॉडल कुछ ऐसा है. काम बताइए और हर छोटी चीज बताने के बजाय उसे काम आगे बढ़ाने दीजिए. सबसे दिलचस्प बात, आप ChatGPT बंद कर दें तो भी काम चलता रहेगा।  dots की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘always-on’ होना है. OpenAI के अनुसार यह आपके किसी काम को लेकर बैकग्राउंड में काम करता रह सकता है. जब कोई महत्वपूर्ण फैसला लेना हो या आपकी मंजूरी की जरूरत हो, तब यह आपके पास वापस आता है।  उदाहरण के लिए अगर आप किसी रिपोर्ट के लिए लगातार बदल रहे आंकड़ों पर काम कर रहे हैं, तो dot नई जानकारी आने पर उसे देख सकता है, अपने विश्लेषण को अपडेट कर सकता है और जहां आपकी राय जरूरी है, वहां आपको बता सकता है. इसी तरह अगर अगर कोई टास्क दिया है तो वो खुद ही मल्टिपल सोर्स को कॉन्टैक्ट कर सकता है.  कंटेंट बनाने वालों के लिए भी इसका इस्तेमाल दिलचस्प हो सकता है. OpenAI के उदाहरण में dot किसी क्रिएटर के इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट से जरूरी हिस्से खोजकर शो नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट के ड्राफ्ट तैयार कर सकता है. यूजर के बदलाव के बाद वह आगे के काम में भी उन पसंद को इस्तेमाल कर सकता है।  4,000 से ज्यादा ऐप्स से जुड़ने की क्षमता OpenAI ने dots को सिर्फ ChatGPT तक ही नहीं रखा है. कंपनी के मुताबिक ये जुड़े हुए ऐप्स के साथ काम कर सकते हैं और 4,000 से ज्यादा ऐप्स तक कनेक्शन का सपोर्ट बताया गया है. इन्हें ChatGPT के अलावा Slack और Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म से भी इस्तेमाल किया जा सकता है. टेक्स्ट मैसेजिंग का विकल्प आगे आने की बात कही गई है।  इसका मतलब यह है कि AI आपके लिए अलग-अलग ऐप्स में बिखरे काम को एक साथ देखने और आगे बढ़ाने की भूमिका निभा सकता है. यहीं से dots का असर सिर्फ AI चैट तक सीमित नहीं रहता. यह ईमेल, मीटिंग, रिसर्च, दस्तावेज, कोडिंग और टीम के काम जैसे कई हिस्सों तक पहुंच सकता है।  हर काम AI खुद ही खरेगा तो इंसान क्या करेगा? यहां एक जरूरी बात है. dots को पूरी तरह खुली छूट नहीं दी गई है. यूजर तय करता है कि dot किन ऐप्स को इस्तेमाल कर सकता है और उसे कितनी परमिशन मिलेगी. कुछ कामों के लिए यूजर की मंजूरी जरूरी रखी जा सकती है. OpenAI के मुताबिक सेंसिटिव काम जैसे पासवर्ड बदलना यूजर के कंट्रोल में रहता है।  OpenAI ने Custom Rules का विकल्प भी दिया है. इसके जरिए यूजर तय कर सकता है कि dot कौन-सा काम खुद कर सकता है, किस काम के लिए मंजूरी लेनी होगी और कौन-सा काम बिल्कुल नहीं करना है. यह जरूरी है क्योंकि किसी AI को आपके ईमेल, फाइलों और दूसरे ऐप्स तक पहुंच देना सिर्फ सुविधा का मामला नहीं है. इसके साथ सुरक्षा और प्राइवेसी का सवाल भी जुड़ा है. OpenAI की टक्कर Meta के Muse से dots का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब Meta भी अपने AI एजेंट Muse को आगे बढ़ा रही है. Meta ने सितंबर में Muse पेश किया था, जो यूजर की ओर से काम कर सकता है, लंबे समय तक किसी लक्ष्य पर काम जारी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर मंजूरी मांग सकता है।  इसलिए OpenAI और Meta के बीच मुकाबला अब सिर्फ यह नहीं रह गया है कि किस कंपनी का AI बेहतर जवाब देता है. अगली लड़ाई इस बात की है कि किसका AI आपके लिए ज्यादा काम खुद कर सकता है। 

Google ने लॉन्च किया Fitbit Air, बिना स्क्रीन वाला फिटनेस बैंड; कीमत ₹13,999

Google ने भारत में अपना Fitbit Air फिटनेस बैंड लॉन्च कर दिया है. WHOOP के बाद से मार्केट में स्क्रीनलेस फिटनेस बैंड का ट्रेंड आया और इस ट्रेंड में अब गूगल भी आ चुका है. इसे अमेरिका में कुछ महीने पहले ही लॉन्च किया गया था, लेकिन भारत में अब लॉन्च हुआ है. भारत में 2 अक्टूबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई स्क्रीन नहीं है. यानी यह आपकी सेहत का डेटा रिकॉर्ड करेगा, लेकिन कलाई पर मैसेज, कॉल या दूसरे नोटिफिकेशन दिखाकर आपका ध्यान नहीं भटकाएगा. इसकी कीमत 13,999 रुपये रखी गई है. Google के मुताबिक Fitbit Air उसका अब तक का सबसे छोटा और हल्का Fitbit ट्रैकर है. इसे 24 घंटे पहनने के हिसाब से बनाया गया है. कंपनी का फोकस यहां स्मार्टवॉच बनाने पर नहीं, बल्कि ऐसा छोटा ट्रैकर देने पर है जो चुपचाप आपकी ऐक्टिविटी और सेहत से जुड़े आंकड़े रिकॉर्ड करता रहे. ये जानकारी फोन पर Google Health ऐप में देखी जा सकती है. स्क्रीन नहीं है, फिर यह करेगा क्या? Fitbit Air को पहली नजर में देखकर सवाल उठ सकता है कि जब इसमें स्क्रीन ही नहीं है तो इसका फायदा क्या है. इसका जवाब इसके सेंसर और Google Health ऐप में छिपा है. यह ट्रैकर लगातार हार्ट रेट रिकॉर्ड कर सकता है. इसके अलावा आराम की स्थिति में हार्ट रेट, हार्ट रेट में बदलाव, नींद के अलग-अलग चरण, नींद की ड्यूरेशन और ब्लड ऑक्सीजन यानी SpO2 जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड की जाती है. इसमें इरेगुलर हार्ट रिदम यानी Afib से जुड़े नोटिफिकेशन का फीचर भी दी गई है. मेडिकल डिवाइस नहीं, सिर्फ फिटनेस ट्रैकर है यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. गूगल खुद कहता है कि Fitbit Air मेडिकल डिवाइस नहीं है और इन फीचर्स का इस्तेमाल किसी बीमारी की जांच या इलाज के लिए नहीं किया जाना चाहिए. हार्ट रेट और नींद से जुड़े आंकड़ों की सटीकता कई चीजों पर निर्भर कर सकती है. असली खेल Google Health Coach का है Google इसे अपने Google Health Coach के साथ जोड़कर देख रहा है. यानी हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर पर भी काम किया गया है. Health Coach आपके ट्रैक किए गए डेटा को देखकर रोजमर्रा की सेहत और फिटनेस से जुड़े सुझाव देने के लिए बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यह वर्कआउट लॉग करने, गाइडेड एक्सरसाइज फॉलो करने और आपकी ऐक्टिविटीज को समझने में मदद कर सकता है. यहां तक कि जिम में किसी मशीन या व्हाइटबोर्ड पर लिखी वर्कआउट रूटीन की फोटो लेकर उसे एक्टिविटी के तौर पर लॉग करने का विकल्प भी दिया गया है. सात दिन तक चलेगी बैटरी स्क्रीन हटाने का एक सीधा फायदा बैटरी में भी दिखाई देता है. गूगल के अनुसार Fitbit Air एक बार चार्ज करने पर सात दिन तक चल सकता है. अगर बैटरी खत्म हो रही है तो सिर्फ पांच मिनट की फास्ट चार्जिंग से करीब एक दिन की बैटरी मिल सकती है. यह उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकता है जो रात में भी ट्रैकर पहनते हैं. गूगल का कहना है कि इसका हल्का और छोटा डिजाइन रातभर पहनने के लिए बनाया गया है. कंपनी यह भी कहती है कि यूजर दिन में Pixel Watch जैसे दूसरे डिवाइस का इस्तेमाल करके रात में Fitbit Air पहन सकता है और नींद का डेटा लगातार रिकॉर्ड कर सकता है. कलाई पर स्क्रीन नहीं, लेकिन फोन में पूरा डेटा कलाई पर आपको डेटा देखने के लिए स्क्रीन नहीं मिलेगी. इसके बजाय फोन में Google Health ऐप खोलकर अपनी जानकारी देखनी होगी. इसका एक फायदा यह है कि कलाई पर बार-बार स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. गूगल भी इसे ऐसा डिवाइस बता रहा है जो आपको लगातार नोटिफिकेशन से दूर रखता है. यानी अगर आप स्मार्टवॉच की वजह से हर मैसेज और अलर्ट तुरंत देखने लगते हैं, तो Fitbit Air उसका उल्टा अनुभव देता है. कीमत 13,999 रुपये, साथ में तीन महीने का प्रीमियम ट्रायल भारत में Google Fitbit Air की कीमत 13,999 रुपये है और इसकी बिक्री 2 अक्टूबर से शुरू होगी. यह Google Store के अलावा Flipkart, Croma, Reliance Digital और Vijay Sales जैसे रिटेल पार्टनर्स के जरिए उपलब्ध होगा. हर खरीद के साथ Google Health Premium का तीन महीने का ट्रायल मिलेगा. इससे Google Health Coach का पूरा अनुभव इस्तेमाल किया जा सकेगा. लॉन्च ऑफर के तहत चुनिंदा HDFC Bank और ICICI Bank कार्ड से भुगतान करने पर 1,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा रहा है. 6 महीने की नो-कॉस्ट EMI के साथ भी 1,000 रुपये कैशबैक का विकल्प है. इसके अलावा कंज्यूमर लोन पर 12 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI उपलब्ध होगी. Whoop और दूसरे स्क्रीनलेस ट्रैकर से मुकाबला स्क्रीनलेस फिटनेस ट्रैकर कोई नई कैटेगरी नहीं है. Whoop और कुछ दूसरे ब्रांड पहले से ऐसे डिवाइस दे रहे हैं जिनका फोकस स्क्रीन और नोटिफिकेशन के बजाय स्वास्थ्य, फिटनेस और रिकवरी डेटा पर है. Fitbit Air इसी बढ़ती कैटेगरी में Google की एंट्री है. Google की खासियत यहां उसका बड़ा हेल्थ इकोसिस्टम है. Fitbit Air को Google Health ऐप और Google Health Coach के साथ जोड़कर कंपनी हार्डवेयर से ज्यादा डेटा और व्यक्तिगत सलाह पर जोर दे रही है. मई में Google ने बताया था कि उसका Google Health ऐप अलग-अलग हेल्थ डेटा को एक जगह लाने की दिशा में बनाया गया है.

Apple Pay ने भारत में दी दस्तक, कार्ड पेमेंट का नया तरीका; जानें UPI से अंतर

नई दिल्ली करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद Apple ने आखिरकार भारत में अपनी पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च कर दी है। भारत में इसकी शुरुआत Axis Bank के साथ की गई है। फिलहाल Axis Bank के चुनिंदा Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड Apple Pay के साथ काम करेंगे। Apple का कहना है कि आने वाले समय में दूसरे बैंक और कार्ड जारी करने वाले फाइनेंशियल ऑर्गनाइजेशंस को भी इस सर्विस से जोड़ा जाएगा। बता दें, यह सेवा UPI से बिल्कुल अलग है। Apple Pay के जरिए यूजर्स अपने iPhone, iPad और Apple Watch से स्टोर, ऐप्स और वेबसाइट पर पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए हर बार कार्ड नंबर, PIN या OTP डालने की जरूरत नहीं होगी। पेमेंट को Face ID, Touch ID या डिवाइस की सुरक्षा व्यवस्था के जरिए ऑथराइज किया जा सकेगा। Apple के मुताबिक Mac के लिए Apple Pay सपोर्ट भी जल्द आने वाला है। फिलहाल सिर्फ Axis Bank के चुनिंदा कार्ड भारत में Apple Pay की शुरुआती उपलब्धता काफी लिमिटेड है। अभी Axis Bank के Visa और Mastercard नेटवर्क वाले एलिजिबल क्रेडिट कार्ड ही Apple Pay में जोड़े जा सकते हैं। RuPay कार्ड फिलहाल Apple Pay के साथ सपोर्टेड नहीं हैं। इसी तरह HDFC Bank, ICICI Bank और SBI Card जैसे बड़े कार्ड जारी करने वाले ऑर्गनाइजेशंस के कार्ड लॉन्च के समय उपलब्ध नहीं हैं। यूजर्स अपने योग्य Axis Bank कार्ड को Apple Wallet में ऐड कर सकते हैं। इसके बाद जहां Apple Pay सपोर्ट उपलब्ध होगा, वहां iPhone या Apple Watch को कॉन्टैक्टलेस पेमेंट टर्मिनल के पास लाकर पेमेंट किया जा सकेगा। ऑनलाइन और ऐप के अंदर होने वाले पेमेंट में भी Apple Pay का इस्तेमाल किया जा सकता है। हर कार्ड मशीन पर नहीं चलेगा Apple Pay Apple Pay के भारत में लॉन्च होने के बावजूद शुरुआत में इसे हर जगह इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। पेमेंट के लिए उस मर्चेंट या पेमेंट टर्मिनल पर Apple Pay सपोर्ट होना जरूरी है। इसलिए किसी जगह पर सामान्य कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट काम करने के बावजूद Apple Pay जरूरी नहीं कि काम करे। शुरुआत में Apple Pay को फूड एंड बेवरेज, ट्रैवल, फैशन और लाइफस्टाइल जैसी कैटेगरी के मर्चेंट्स के बीच रोलआउट किया जा रहा है। कंपनी समय के साथ ज्यादा मर्चेंट्स और ऐप्स को ऐड करने की योजना बना रही है। UPI से ऐसे अलग है Apple Pay भारत में Apple Pay की एंट्री ऐसे समय हुई है जब UPI डिजिटल पेमेंट का सबसे मुख्य तरीका बना हुआ है। UPI सीधे बैंक अकाउंट से बैंक अकाउंट में पेमेंट की सुविधा देता है, जबकि Apple Pay का शुरुआती भारतीय मॉडल कार्ड पर आधारित है। यही वजह है कि शुरुआत में इसकी रेंज UPI की तुलना में काफी अलग रहेगी। बता दें, Apple देश में iPhone की बिक्री, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल मौजूदगी बढ़ा रही है। अब Apple Pay के जरिए भारतीय iPhone और Apple Watch यूजर्स को कंपनी के इकोसिस्टम के भीतर एक और पेमेंट विकल्प मिलेगा।

WhatsApp Business यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से फ्री मैसेजिंग होगी सीमित

नई दिल्ली  Meta भारत में 1 अक्टूबर 2026 से अपने WhatsApp Business Platform की प्राइसिंग में बदलाव कर रहा है, जिसका मतलब है कि बिजनेसेज को अब उन मैसेजेस के लिए भी पेमेंट करना होगा जो पहले फ्री थे। उदाहरण के लिए, अभी बिजनेसेज 24 घंटे की विंडो के भीतर कस्टमर्स के मैसेजेस का जवाब और ऑर्डर अपडेट्स बिल्कुल मुफ्त में भेज सकते हैं। लेकिन 1 अक्टूबर से ये बदल जाएगा। हालांकि, कुछ सीमित संख्या में मैसेजेस फ्री बने रहेंगे, लेकिन Meta यूटिलिटी मैसेजेस (जैसे ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स) के लिए चार्ज लेगा, भले ही वे उसी 24 घंटे की विंडो के भीतर क्यों न भेजे गए हों। ध्यान दें कि ये बदलाव केवल WhatsApp Business Platform पर लागू होते हैं, रेगुलर WhatsApp या WhatsApp Business एप पर नहीं। तो आखिर 1 अक्टूबर से क्या बदल रहा है, क्या अब भी मुफ्त रहेगा और बिजनेसेज को कितना ज्यादा पेमेंट करना होगा? आइए समझते हैं। 1 अक्टूबर से क्या बदल रहा है? अब तक, WhatsApp Business Platform का इस्तेमाल करने वाले बिजनेसेज किसी कस्टमर का मैसेज आने के 24 घंटे के भीतर उसे फ्री में जवाब दे सकते थे। इसमें प्रोडक्ट्स या ऑर्डर्स से जुड़े सवालों के जवाब देने के साथ-साथ ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स भेजना शामिल था। 1 अक्टूबर से Meta इस 24 घंटे की विंडो के भीतर भेजे गए ऑर्डर अपडेट्स और दूसरे यूटिलिटी मैसेजेस के लिए बिजनेसेज से चार्ज लेना शुरू कर देगा। कस्टमर्स के सवालों के जवाब हर बिजनेस फोन नंबर पर प्रति माह पहले 1,000 सर्विस मैसेजेस के लिए फ्री रहेंगे। इसके बाद बिजनेसेज को एडिशनल रिप्लाई के लिए पैसे देने होंगे। 24 घंटे की विंडो के बाद भेजे जाने वाले यूटिलिटी मैसेजेस पर पहले से ही चार्ज लगता था, इसलिए वह नियम वैसा ही रहेगा। WhatsApp Business मैसेजेस का कितना खर्च आएगा? भारत में Meta ने ऑर्डर कन्फर्मेशन और डिलीवरी अपडेट्स जैसे यूटिलिटी मैसेजेस के लिए जीएसटी (GST) से पहले स्टैंडर्ड रेट 0.115 रुपये प्रति डिलीवर्ड मैसेज तय किया है। 18 परसेंट GST जोड़ने के बाद ये लगभग 0.136 रुपये प्रति मैसेज बैठता है। 30 सितंबर तक बिजनेसेज किसी कस्टमर के मैसेज करने के 24 घंटे के भीतर यूटिलिटी मैसेजेस फ्री में भेज सकते हैं। 1 अक्टूबर से उन्हें बिना GST के 0.115 रुपये प्रति डिलीवर्ड यूटिलिटी मैसेज देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई बिजनेस 1,000 ऑर्डर अपडेट्स भेजता है, तो उसे GST से पहले 115 रुपये या 18 परसेंट GST मिलाकर करीब 135.70 रुपये चुकाने होंगे। मैसेज की रेट इस बात पर निर्भर करती है कि मैसेज किस तरह का है। मेटा मार्केटिंग मैसेज (जैसे प्रमोशनल ऑफर और सेल अनाउंसमेंट्स) के लिए 0.8631 रुपये प्रति मैसेज की दर तय करता है, जबकि ऑथेंटिकेशन मैसेज (जैसे वन-टाइम पासवर्ड या OTP) की कीमत GST से पहले 0.115 रुपये प्रति मैसेज होती है। 1 अक्टूबर 2026 से Meta हर बिजनेस फोन नंबर के लिए प्रति माह पहले 1,000 सर्विस रिप्लाई फ्री देगा। इसके बाद, सर्विस मैसेजेस की दर संबंधित मार्केट में यूटिलिटी और ऑथेंटिकेशन दरों के बराबर होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर भारत में कोई बिजनेस एक महीने में 1,500 सर्विस रिप्लाई भेजता है, तो पहले 1,000 फ्री होंगे और बाकी बचे 500 मैसेजेस के लिए उसे पेमेंट करना होगा। 0.115 रुपये प्रति मैसेज के हिसाब से ये GST से पहले 57.50 रुपये या GST मिलाकर करीब 67.85 रुपये होगा। क्या-क्या फ्री रहेगा? इन बदलावों के बावजूद WhatsApp Business के सभी मैसेजेस चार्जेबल नहीं होंगे। जैसा कि पहले बताया गया है, बिजनेसेज को हर बिजनेस फोन नंबर पर हर महीने 1,000 सर्विस मैसेजेस फ्री मिलेंगे। इसके अलावा कस्टमर्स हमेशा की तरह बिजनेसेज को फ्री में मैसेज भेज सकते हैं और उन्हें इन मैसेजेस को भेजने या रिसीव करने के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे। Meta उन बिजनेसेज के लिए मौजूदा 72 घंटे की फ्री विंडो को भी जारी रख रहा है, जिन्हें 'Click-to-WhatsApp' विज्ञापनों या Facebook पेजेस पर मौजूद कॉल-टू-एक्शन बटन्स के जरिए मैसेजेस मिलते हैं। इन तीन दिनों के दौरान बिजनेसेज बिना कोई Meta मैसेजिंग चार्ज दिए कस्टमर्स को मैसेज भेज सकते हैं। इस फ्री विंडो की पेशकश करके Meta का मकसद ज्यादा से ज्यादा बिजनेसेज को अपने एडवरटाइजिंग टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए बढ़ावा देना है, ताकि वे संभावित कस्टमर्स तक पहुंच सकें और उनसे WhatsApp पर जुड़ सकें। कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर से जो बिजनेसेज कस्टमर्स को जवाब देने, ऑर्डर अपडेट्स भेजने और डिलीवरी नोटिफिकेशन शेयर करने के लिए WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इन मैसेजेस के लिए Meta को ज्यादा पेमेंट करना पड़ सकता है। हालांकि, आम कस्टमर्स के लिए कुछ भी नहीं बदलेगा। उन्हें बिजनेसेज को मैसेज भेजने या WhatsApp पर रिप्लाई और अपडेट्स पाने के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे।  

18 साल के रेहान का कमाल, गुजरात में ₹80 करोड़ से लगाएंगे सेमीकंडक्टर फैक्ट्री

आज के दौर में 18 साल की उम्र में ज्यादातर युवा कॉलेज, करियर और नौकरी के बारे में सोच रहे होते हैं. लेकिन गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले रेहान मनसूरी ने इतनी कम उम्र में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखा है. उनकी कंपनी Micronex गुजरात के सानंद में करीब ₹80 करोड़ के निवेश से सेमीकंडक्टर लीड फ्रेम बनाने की फैक्ट्री लगाने जा रही है. खास बात यह है कि यह कोई ऐप या AI सॉफ्टवेयर स्टार्टअप नहीं है. कंपनी सीधे उस हार्डवेयर सप्लाई चेन में उतर रही है, जो चिप को पैकेज करने के लिए जरूरी होती है. कंपनी के मुताबिक फैक्ट्री में निर्माण का काम शुरू हो चुका है और मई 2027 तक प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. पहले चरण में हर साल करीब 50 करोड़ लीड फ्रेम यूनिट बनाने की योजना है. फैक्ट्री शुरू होने के बाद करीब 250 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है. लीड फ्रेम होता क्या है? नाम सुनकर आपको लग सकता है कि यह चिप के अंदर लगा कोई छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट है. असल में लीड फ्रेम एक बेहद पतले मेटल का स्ट्रक्चर होता है, जिस पर सेमीकंडक्टर चिप को लगाया जाता है. यह चिप को सपोर्ट देने के साथ-साथ उसे बाहरी सर्किट से जोड़ने में भी मदद करती है. चिप और लीड फ्रेम  को बेहद पतले गोल्ड या कॉपर वायर से जोड़ा जाता है. इसके बाद पूरा पैकेज सर्किट बोर्ड से कनेक्ट किया जा सकता है. यानी आसान भाषा में कहें तो चिप बनने के बाद उसे इस्तेमाल करने लायक पैकेज बनाने की प्रक्रिया में लीड फ्रेम की अहम भूमिका होती है. Micronex इन लीड फ्रेम्स  को कॉपर एलॉय से बनाने की योजना बना रही है. इनकी मोटाई 0.1mm से 0.25mm के बीच होगी. कंपनी के मुताबिक ये पार्ट चिप को मैकेनिकल सपोर्ट देने, गर्मी निकालने और मैन्युफैक्चरिंग के दौरान सुरक्षा देने में भी मदद करते हैं. पहले कार और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, फि मोबाइल और टेलीकॉम कंपनी की शुरुआती योजना लीड फ्रेम्स को पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और ओटोमोटिव सेक्टर के लिए तैयार करने की है. इसके बाद उत्पादन क्षमता बढ़ने पर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम सेक्टर में भी विस्तार करने की योजना है. Micronex ने SEMICON India 2026 के दौरान Kaynes Semicon के साथ MoU भी साइन किया है. इससे भविष्य में कंपनी के लीड फ्रेम्स को सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सप्लाई करने का रास्ता खुल सकता है. कंपनी ने India Semiconductor Mission के Semicon 2.0 कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव देने की भी योजना बताई है. 18 साल के रेहान ने सेमीकंडक्टर ही क्यों चुना? Rehan Mansuri एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका कारोबार प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग से जुड़ा है. रिपोर्टों के मुताबिक परिवार की भारत में सात रिसाइक्लिंग यूनिट हैं. इसी वजह से उन्हें कम उम्र से ही मैन्युफैक्चरिंग और बिजनेस का अनुभव मिला. रेहान के मुताबिक उन्होंने भारत की सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में लीड फ्रेम्स को लेकर एक गैप देखा. उनका फोकस शुरुआत में दुनिया की बड़ी कंपनियों से कीमत या स्केल पर सीधी टक्कर लेने के बजाय लोकल कंपनियों को स्थानीय सप्लाई, तेज डिलीवरी, इंजीनियरिंग सपोर्ट और डिजाइन बदलाव में मदद देने पर है. गुजरात क्यों बन रहा है सेमीकंडक्टर का बड़ा सेंटर? Micronex का यह प्रोजेक्ट ऐसे समय में आया है जब गुजरात में सेमीकंडक्टर से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में करीब ₹1.4 लाख करोड़ के निवेश का जिक्र किया गया है. सानंद में पहले से ही सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट डेवेलप हो रहे हैं.

त्योहारों से पहले बढ़ेगा खर्च, 1 अक्टूबर से AC-फ्रिज समेत ये सामान होंगे महंगे

मुंबई  फेस्टिव सीजन में अगर आप AC, TV, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. 1 अक्टूबर से इन प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं. कई बड़ी कंपनियां अक्टूबर से अपने प्रोडक्ट्स के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं कुछ कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला पहले ही कर लिया है. इसका सबसे ज्यादा असर AC की कीमतों पर देखने को मिल सकता है. कंपनियां AC के दाम करीब 5 से 8 फीसदी तक बढ़ा सकती हैं. वहीं वॉशिंग मशीन, फ्रिज और LED TV की कीमतों में भी 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हर कंपनी की कीमत बढ़ाने की टाइमिंग अलग हो सकती है. आइए जानते हैं, क्यों बढ़ाए जा रहे हैं दाम? क्यों कंपनियां बढ़ा रही हैं कीमत? कंपनियों पर कॉपर, एल्युमिनियम, स्टील और प्लास्टिक जैसी चीजों की बढ़ती कीमतों का दबाव है. इसके अलावा सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च भी बढ़ा है. डॉलर में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी एशिया में चल रही स्थिति का असर भी कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है. जानिए किन कंपनियों ने दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है? Blue Star, Godrej Appliances, Haier, Daikin और Super Plastronics जैसी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुकी हैं. LG और Bosch Home Comfort ने भी AC की कीमतों में करीब 5 फीसदी तक बढ़ोतरी की है. Panasonic अभी कीमत बढ़ाने को लेकर स्थिति को देख रही है. Haier 1 अक्टूबर से अपने रूम AC की कीमत करीब 5 फीसदी बढ़ाने वाली है. कंपनी ने TV और वॉशिंग मशीन जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स की कीमतों में 2 से 3 फीसदी बढ़ोतरी की भी बात कही है. कंपनी के मुताबिक अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो दिसंबर और जनवरी में भी कीमतें बढ़ सकती हैं. पुराने स्टॉक की वजह से मिलेगी राहत! यहां एक राहत वाली बात भी है. कंपनियों और डीलर्स के पास पुराने दाम पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद है. ऐसे में फेस्टिव सीजन की शुरुआत में कुछ प्रोडक्ट पुराने दाम पर मिल सकते हैं. Godrej के मुताबिक यह पुराना स्टॉक करीब एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है. यानी दिवाली तक कुछ प्रोडक्ट्स पर पुराने दाम का फायदा मिल सकता है. लेकिन दिवाली के बाद नए दाम ज्यादा साफ तौर पर देखने को मिल सकते हैं. खासकर TV की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इसलिए अगर आप इस फेस्टिव सीजन में कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने का सोच रहे हैं, तो कीमत और ऑफर दोनों को देखकर फैसला करना जरूरी होगा.